Transcription
आज के इस वीडियो में मैं बात करने वाला हूँ कि अवलोकितेश्वर कौन थे। लोगों के पास बहुत कम जानकारी है क्योंकि भारतीय इतिहास में उन्हें पटाया नहीं जाता है। अवलोकितेश्वर बौद्ध धर्म के बोधिसत्वों में सबसे प्रसिद्ध हैं जिनकी पूजा स्त्री और पुरुष दोनों के रूप में की जाती है। इस वीडियो में मैं कुछ ऐसे तथ्यों पर विस्तार से बात करने वाला हूँ जो इससे पहले आप लोगों ने नहीं सुने होंगे। इस वीडियो को पूरा देखने के बाद ही आप लोग कमेंट करना। तो, वीडियो की शुरुआत करते हैं।
वीडियो की शुरुआत यहाँ से करेंगे। आप जो फोटो देख रहे हो, इस फोटो को आप लोगों ने कहानी ना कहानी ज़रूर देखा होगा। कहाँ पर देखा है? आपको याद है? कुछ लोगों को याद होगा, कुछ लोगों को याद नहीं होगा। अजंता की गुफाओं में इसको ज़रूर देखा होगा आप लोगों ने। तो आप इस मूर्ति को देख रहे हो, ये किसकी है? अवलोकितेश्वर की मूर्ति है। इन्हें पद्मपाणि के नाम से भी जाना जाता है। आगे मैं बात करूँगा उनकी। तो सबसे पहले अवलोकितेश्वर के नाम पर बात करते हैं कि इनके कौन-कौन से नाम थे।
अवलोकितेश्वर के पहले प्रकृति भाषा में पाँचवीं शताब्दी तक हमें यही नाम उनका देखने को मिलता है। इसके बाद अवलोकितेश्वर संस्कृत भाषा में सातवीं शताब्दी के बाद हमें यह नाम देखने को मिलता है। इनका अंतर क्या है? यह आप ध्यान से समझना। नाम आपको देखने में जैसे लगेंगे, लेकिन अंतर है। यह समय अंतर है। आप इसको ध्यान रखना है। लोकेश्वर का अर्थ होता है विश्व का भगवान, यानी विश्वनाथ। पद्मपाणि यानी कमल को धारण करने वाला। अर्धनारीश्वर यानी आधा पुरुष और आधा स्त्री का स्वरूप। भोलेनाथ का अर्थ है बुद्धि की करुणा का प्रतीक। नीलकंठ ईश्वर यानी नीली ग्रीवा वाला। 108 नाम से जाना जाता है। जो प्रमुख नाम थे, जो लोकप्रिय नाम थे, उन नामों की यहाँ पर मैंने चर्चा की है।
अवलोकितेश्वर के अलावा किस-किस के और ये नाम हैं? भोलेनाथ किसको कहा जाता है? नीलकंठ किसको कहा जाता है? लोकेश्वर किसको कहा जाता है? आप लोग तो जानते हैं, बताने की आवश्यकता नहीं है। अभी मैं आगे आपको बहुत अच्छे से समझा दूँगा। इस वीडियो को पूरा देखो, आपको सब कुछ समझ में आ जाएगा। पूरा मामला क्या है, ये आपको अच्छे से समझ में आ जाएगा। कुछ लोगों का भी बहुत चिढ़ हो रही होगी क्योंकि मैं क्या बोल रहा हूँ। बस आप लोग वीडियो देखो, आपको सब समझ में आ जाएगा। तो ये नाम हैं। इन नामों को आप लोग अच्छे से ध्यान रखें।
सबसे पहले जो उल्लेख है, वो महायान शाखा के ग्रंथ सूत्र में किया गया है, जिसे लोटस सूत्र से पहले का ग्रंथ माना जाता है। लोटस सूत्र के अध्याय 25 में बोधिसत्व अवलोकितेश्वर का वर्णन किया गया है। पशुओं की रक्षा करने वाला और जो व्यक्ति उनका नाम जाप करता है, उनकी मदद करने वाला, के नाम से भी जाना जाता है। देवों के स्वरूप में भी जाना जाता है, जिसमें 11 रुद्र, 8 वासु, 12 आदित्य, एक इंद्र और एक प्रजापति शामिल हैं। आप लोगों को कुछ समझ में आ रहा है? नहीं आ रहा है? आपने एक कहावत तो सुनी होगी कि हमारे देश में 33 करोड़ देवी देवता हैं या फिर 33 कोटी देवी देवता हैं। वो कहाँ से आ रहे हैं? यहीं से आ रहे हैं। अभी मैं अभी और बात करूँगा और आपको समझ में आएगा।
चीनी यात्री वेन सांग ने अपने यात्रा विवरण में बोधिसत्व अवलोकितेश्वर की पूजा का उल्लेख किया है। मैंने चीनी यात्री वेन सांग का यात्रा विवरण पढ़ा है, उसमें इस बात को मैंने बताया था। विवरण में राजा हर्षवर्धन के द्वारा अवलोकितेश्वर की पूजा किए जाने का उल्लेख किया है। परंतु भारतीय इतिहासकारों ने अवलोकितेश्वर की जगह शिव नाम का प्रयोग किया है। बस ब्रह्म यहीं से शुरू होता है। इतिहासकार जो वास्तविक नाम है, वो लिखना नहीं चाहते हैं क्योंकि उससे कुछ लोगों का धंधा खराब हो जाएगा। धंधा चला रहे हैं इसीलिए इतिहासकार ऐसा करते हैं। हमारे भारतीय इतिहास में इतिहासकारों ने इतना बड़ा झोल किया है जिसको शब्दों में बताना मुश्किल है। आप लोगों ने यह ज़रूर सुना होगा कि राजा हर्षवर्धन भगवान शिव के उपासक थे। लेकिन क्या आप जानते हो कि भगवान शिव, जिसको कहा जाता है, उनका वास्तविक नाम क्या है? यह बात मैं खुद स्वीकार कर रहा हूँ। राजा हर्षवर्धन पर मैंने वीडियो बनाया है, उस वीडियो में अच्छे से मैंने बताया है। आप लोगों ने अगर देखा होगा वीडियो तो आपको ज़रूर मालूम होगा। और अगर नहीं देखा है वो वीडियो तो इस वीडियो के अंत में वो वीडियो मिल जाएगा। तो उस वीडियो को आप लोग ज़रूर देखें जिसमें मैंने वेन सांग के यात्रा विवरण को पढ़ा है। और अगर आपके पास यात्रा विवरण है तो आप खुद उसमें ये बात पढ़ सकते हो।
वेन सांग ने अपने यात्रा विवरण में लिखा है कि माउंट पोर्टल पर अवलोकितेश्वर का बिहार है जहाँ पर उनकी पूजा की जाती है। माउंट पोर्टल तमिलनाडु जिले में अंबा समुद्राम के पास है जो आधुनिक हिंदू धर्म का केंद्र है। लेकिन जब वेन सांग भारत की यात्रा पर था तब उस जगह पर अवलोकितेश्वर की पूजा की जाती थी। आज हिंदू धर्म का केंद्र है। आज जिसे हम हिंदू धर्म कहते हैं या सनातन धर्म कहते हैं, दरअसल उसका वास्तविक नाम है बौद्ध धर्म की महायान शाखा। लेकिन कुछ लोग इसको स्वीकार इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि उनका धंधा खराब हो जाएगा और जो श्रेष्ठ है वो चली जाएगी। यह कारण है इसीलिए वो इस चीज को स्वीकार नहीं करते हैं। मैंने अपनी पिछली वीडियो में यह कहा दिया था कि भारत के किसी भी बड़े मंदिर में चले जाइए, वहाँ पर आपको बुद्ध की मूर्तियाँ मिलेंगी या फिर स्वयं बुद्ध बैठे मिलेंगे। तो बहुत सारे लोगों को बड़ा बुरा लगा था। काफी सारे लोगों ने कमेंट करके…
कॉल साहित्य में विकसित हुए बुद्ध मित्र के वीर सोधि ग्रंथ में कहा गया है कि वैदिक ऋषि अगस्त्य ने बोधिसत्व अवलोकिता से तमिल सिखा थी। यह बहुत ही महत्वपूर्ण पॉइंट है। इसको बहुत अच्छे से आप लोग ध्यान रखें। ऋषि अगस्त्य का नाम सब लोगों ने सुना होगा। इसकी चर्चा माया तंत्र सूत्र के अंतिम अध्याय में भी की गई है। तमिल परंपरा के अनुसार भी ऐसा माना जाता है कि ऋषि अगस्त्य ने तमिल का ज्ञान प्राप्त किया था। अब यहाँ पे जिसको शिव लिखा जा रहा है, बौद्ध धर्म में इसको अवलोकितेश्वर लिखा जाता है। अभी मैं उनकी फोटो दिखाऊँगा आपको, तब आपको समझ में आ जाएगा सब कुछ। इसकी चर्चा जापानी, तिब्बती बौद्ध धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। कहाँ पे? तिब्बती बौद्ध धर्म में। तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार बोधिसत्व अवलोकितेश्वर की हृदय से देवी तारा का जन्म हुआ था। अब देवी तारा के बारे में थोड़ी सी बात कर लेते हैं।
यहाँ पर एक शब्द मैं बार-बार कह रहा हूँ, अवलोकितेश्वर। ये मेरे मुँह से बार-बार इसलिए निकल रहा है क्योंकि मैंने इनका जो इतिहास है वो इंग्लिश में पढ़ा है तो बार-बार मेरे मुँह से वही निकल रहा है। तो आप लोग एडजस्ट करना। नहीं तो बाद में आप लोग कमेंट करके ये कहो, "गुस्सा मत करो, आपका प्रोनंशिएशन सुधारिए।" मैं अलग-अलग भाषण की किताबें पढ़ता हूँ, तो इसीलिए जो मुझे सरल लगता है वो मैं कहता हूँ। इसीलिए कुछ शब्दों पर मेरा जो प्रोनंशिएशन है बिल्कुल खराब है। ये बात मैं खुद स्वीकार कर रहा हूँ। जो शब्द मुझे अच्छा लगता है, शर्म लगता है, मुँह से बोल देता हूँ। तो आपको यहाँ पर ध्यान रखना है कि अवलोकितेश्वर से तारा का जन्म हुआ था। अब देवी तारा कौन है? इनके बारे में थोड़ी सी जानकारी मैं आपको देता हूँ। देवी तारा को आर्य तारा, श्यामा आदि के नाम से भी जाना जाता है। श्यामा का मतलब समझते हो? जिसका रूप काला हो। देवी तारा को बौद्ध धर्म की महायान शाखा में एक महिला बोधिसत्व के रूप में पूजा जाता है। यह उनका फोटो है, आप लोग अच्छे से देख लो इसको। देवी तारा को हिंदू धर्म में देवी काली के रूप में पूजा जाता है। काली माता का आप लोगों ने नाम ज़रूर सुना होगा, बहुत अच्छे से बचपन से सुना होगा। अब काली माता का वास्तविक नाम क्या है? वास्तविक नाम है तारा देवी। हम लोग काली क्यों कहते हैं? काला तो उनका स्वरूप था, रंग था। लेकिन अगर कोई व्यक्ति काला है तो उसको आप काला कहोगे? बिल्कुल नहीं कहोगे। लेकिन हम कहते हैं क्योंकि हमारे देश में ये परंपरा है। देवताओं के नाम बदल-बदल के उनको तुम्हारे सामने प्रस्तुत किया गया है, बचपन से प्रस्तुत किया गया है। अब तुम्हारे दिमाग में वो चीज भर गई हैं, वो इतनी जल्दी निकलेंगी नहीं। अब आपको समझ में आया कि उनका वास्तविक नाम क्या है? तारा है। यह आपको ध्यान रखना है। ऐसे ही वासुदेव को कृष्ण कहा जाता है। वासुदेव काले थे और कृष्ण का मतलब भी काला ही होता है। अगर कोई व्यक्ति काला है और आप उसको काला कहें तो ये अच्छी बात नहीं है। देवी देवताओं की जो नाम हैं, इसी तरह से परिवर्तन करके लिखे गए हैं, इसीलिए आपको समझ में नहीं आता है। और पहले पढ़ाई-लिखाई का सबको अधिकार होता नहीं था। कुछ लोगों को होता था। वो जो बोलते थे और वही उन्हें सच लगता था। तो इतना आपको समझ में आया? आगे बात करते हैं।
करण व्यू सूत्र के अनुसार बोधिसत्व अवलोकितेश्वर के शरीर से पैदा हुए देवता। अब उन पर थोड़ी सी बात कर लेते हैं। नंबर एक: सूर्य और चंद्र का जन्म अवलोकितेश्वर की आँखों से हुआ है। नंबर दो: महेश्वर का जन्म अवलोकितेश्वर के माथे से हुआ है। नंबर तीन: ब्रह्मा का जन्म अवलोकितेश्वर के कंधों से हुआ है। नंबर चार: नारायण यानी विष्णु का जन्म अवलोकितेश्वर के हृदय से हुआ है। नंबर पाँच: महालक्ष्मी का जन्म अवलोकितेश्वर के घुटनों से हुआ है। नंबर छह: सरस्वती का जन्म अवलोकितेश्वर के दांतों से हुआ है। नंबर सात: वायु देव का जन्म हुआ है। नंबर आठ: वरुण यानी जल देव का जन्म हुआ है। सूर्य, चंद्र, महेश्वर, ब्रह्मा, विष्णु, महालक्ष्मी, सरस्वती, वायु देव, जल देव, इन सब का जन्म हुआ है। अभी मैं आगे और बात करूँगा। आपको यहाँ पर ध्यान रखना है, ब्रह्मा, विष्णु, महेश। हम लोग आजकल क्या समझते हैं कि शिव और महेश एक ही व्यक्ति हैं? बिल्कुल नहीं। करण व्यू सूत्र में दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं। महेश्वर देव की पत्नी उमा देवी है। यह आपको ध्यान रखना है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इनका जन्म किससे हो रहा है? एक बोधिसत्व अवलोकितेश्वर से। और हिंदू धर्म में टॉप देवताओं में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का स्थान है। इसीलिए ग्रीक राजाओं ने जो मूर्तियाँ बनाई हैं जिसमें ब्रह्मा बुद्ध के आगे हाथ जोड़कर खड़े हैं, वो मूर्तियाँ गलत नहीं हैं, सही हैं। ये हैं अवलोकितेश्वर। ये फोटो देख रहे हैं, वो ये हैं। इन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु, महेश, महालक्ष्मी, सर्व शक्ति, सूर्य, चंद्र, इन सब का जन्म हुआ है। लेकिन यही अवलोकितेश्वर के स्वर्गीय सर पर कौन बैठे हैं? बुद्ध बैठे हुए हैं। अभी मैं आगे इनकी और फोटो दिखाऊँगा। कुछ लोग यह ध्यान देते हैं कि बौद्ध धर्म को मानने वाले राजाओं ने हिंदू धर्म के देवी देवताओं को निशाना दिखाने के लिए ऐसा किया है। जी चीज को आप लोग बहुत प्राचीन समझते हो। दरअसल वो प्राचीन नहीं है। पृथ्वी देवी का जन्म अवलोकितेश्वर के चरणों से हुआ।
मंत्र यह सूत्र है जिसे चौथी शताब्दी के अंत में और पाँचवीं शताब्दी के शुरुआत में संकलित किया गया था। करण व्यू सूत्र बहुत सारे लोगों ने पढ़ा होगा, उसका नाम भी सुना होगा। तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि करण व्यू सूत्र एक स्वर्ग से बंधा आसमान से तिब्बत के 28वें राजा लहापुरी नियंत्रण की महल की छत पर पहुँचा था जिनकी मृत्यु पाँचवीं शताब्दी में दक्षिणी तिब्बत में हुई थी। देखो, इस बात को तो मैं नहीं मानता हूँ कि अगर कोई व्यक्ति यह दावा करे कि आसमान से एक किताब आई और हमारी छत पर गई है तो मैं ऐसी बात को नहीं मानता हूँ चाहे वो किसी भी धर्म की हो। मैं किसी का बड़ा भक्त नहीं हूँ। जहाँ लॉजिक काम ही नहीं कर रहा है, उस चीज को कैसे स्वीकार करूँ? आसमान से अभी कोई किताब नहीं आई। बौद्ध परंपरा में ऐसा माना जाता है कि जो करण व्यू सूत्र है वो आसमान से आई थी। आगे हम उसकी बात करते हैं। करण व्यू सूत्र को कार्बन डेटिंग से चौथी और पाँचवीं शताब्दी का ही माना गया है। उसकी जो कार्बन डेटिंग है वो की गई तो वो चौथी-पाँचवीं शताब्दी की ही मानी गई है। करण व्यू सूत्र का 983 ई. में तिब्बती से चीनी भाषा में अनुवाद बुद्ध के द्वारा किया गया था। तिब्बती से चीनी भाषा में किया गया था। ये आपको ध्यान रखना है। 1801 से 1852 के बीच करण व्यू सूत्र का फ्रेंच भाषा में अनुवाद किया गया था। 2013 में करण व्यू सूत्र का तिब्बती भाषा से अंग्रेजी भाषा में अनुवाद पीटर रॉबर्ट ने किया था।
अब यहाँ पर बात करते हैं धारणी या धरणी क्या है? इस पर थोड़ी सी बात कर लेते हैं। धारणी का अर्थ होता है धारण करना या बनाए रखना। ये होता है भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को याद करने तथा उनका उच्चारण करने के लिए धारणी का प्रयोग किया जाता था। अब ये धरणी क्या है? और आपको अच्छे से समझा देता हूँ। धारणी एक ताबीज का रूप है और तिब्बती बौद्ध परंपरा में यह माना जाता है कि यह हानिकारक और आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करता है। यहाँ पर तंत्र-मंत्र वाली बात हो रही है। बहुत धर्म में बहुत सारी शाखाएँ हैं। एक-दो शाखाएँ नहीं हैं। बहुत धर्म में कुछ लोग मांस खाते हैं, कुछ लोग नहीं खाते हैं। कुछ लोग तंत्र-मंत्र में विश्वास करते हैं, कुछ लोग नहीं करते हैं। कुछ लोग पूजा करते हैं, कुछ लोग नहीं करते हैं। कुछ लोग भगवान को मानते हैं, कुछ लोग नहीं मानते हैं। और सभी शाखाओं के अलग-अलग नियम हैं। शक्तिशाली मंत्रों के समूह माना गया है। यहाँ पर धारणी शब्द का जो प्रयोग किया गया है, आप उसको एक मंत्र का स्वरूप मान सकते हो। इसको धारणी कहा जाता है। सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय महायान सूत्र, लोटस सूत्र, हृदय सूत्र आदि में धारणी का प्रयोग किया गया है।
नीलकंठ धारणी जिसे महाकरुणा धारणी के नाम से भी जाना जाता है। नीलकंठ धारणी एक महायान बौद्ध मंत्र है जो बोधिसत्व अवलोकितेश्वर के लिए प्रसिद्ध है। महायान बौद्ध परंपरा में ऐसा माना जाता है कि नीलकंठ धारणी मूल रूप से हरिहर… हरिहर का मतलब है, हरि का मतलब है विष्णु और हर का मतलब है शिव… की नाम और विशेषताओं के लिए ये जानी जाती है। इसका पाठ अवलोकितेश्वर के द्वारा किया गया था। हम लोग अवलोकितेश्वर कहें या शिव कहें, एक ही बात है। हिंदू धर्म में उन्हें शिव कहा जाता है और बौद्ध धर्म में उन्हें अवलोकितेश्वर कहा जाता है। ईश्वर के विभिन्न रूपों और अवतारों की चर्चा की गई है इसी ग्रंथ में। नीलकंठ महादेव के रूप में वर्णन किया गया है। ईश्वर के 108 अवतार हैं जिसमें कुछ महिला अवतारों को भी शामिल किया गया है। 108 अवतार और 108 नाम भी हैं इनके। श्रीलंका में अवलोकितेश्वर की पूजा नाथ देव के रूप में आज भी की जाती है। जिन-जिन देशों में बौद्ध धर्म मौजूद है, उन देशों में आपको ब्रह्मा भी मिल जाएँगे, महेश भी मिल जाएँगे, विष्णु भी मिल जाएँगे, सब मिल जाएँगे वहाँ पे। जितने देवी-देवता हमारे हिंदू धर्म में प्रचलित हैं, वो सारे देवी-देवता मिल जाएँगे आपको। लेकिन याद रखना, ये बुद्ध से नीचे हैं, ऊपर नहीं है। यह बात याद रखना।
एक राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता हैं, मैं उनका नाम नहीं लूँगा। जब आप उनको सुनेंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि यार इससे बड़ा तो इतिहासकार संसार में पैदा ही नहीं हुआ। लेकिन वो व्यक्ति इतना झूठ बोलता है, लेकिन इतने कॉन्फिडेंस से बोलता है कि सामने वाला पूरी तरह से उसकी बात पर विश्वास कर लेता है। आप लोग उस प्रवक्ता को जानते हो, समझ गए होंगे कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ। मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूँ, इसलिए नाम नहीं ले रहा हूँ। लेकिन झूठ बोलने की अपनी एक सीमा होती है। आप इतने बड़े टीवी चैनल पे बैठ के झूठ बोल रहे हो और इतने कॉन्फिडेंस से बोल रहे हो, लोगों को सच लग रहा है। काफी लोगों के मुँह से आपने ये सुना होगा कि थाईलैंड में श्री राम की चर्चा है। रामायण वहाँ का राष्ट्रीय ग्रंथ है। लेकिन वो कभी ये नहीं बताएँगे कि वहाँ के राम को बुद्ध से पहले नहीं माना जाता है, बुद्ध के बाद माना जाता है। ये कोई नहीं बताता। और यही बात मैंने एक अपनी वीडियो में कहा दिया था, तो कुछ लोगों को बड़ा बुरा लगा था। और बड़ा लगना लाज़मी है क्योंकि बचपन से उनकी दिमाग में ये थोप दिया गया है कि भाई यही परम श्रेष्ठ हैं, इनसे ऊपर कोई नहीं है। ये उनकी दिमाग में घुस गया है। अब मैं उनके सामने एक नई बात प्रस्तुत कर रहा हूँ तो वो कैसे स्वीकार करेंगे उसको? बिल्कुल नहीं करेंगे। इसीलिए कुछ लोगों को मेरी बातें बिल्कुल अजीब लगती हैं। कहते हैं, "ये क्या कह रहे हो तुम?" मैं वही कह रहा हूँ जो मैंने अपनी रिसर्च में पाया।
अवलोकितेश्वर की पूजा लोकनाथ के रूप में की जाती है, कभी पुरुष के रूप में तो कभी महिला के रूप में की जाती है। इसका अर्थ होता है तीसरी आँख से देखने वाला। अब तीसरी आँख से देखने वाला किसको माना जाता है? आप लोग जानते हैं। अब मैं आपको कुछ फोटो दिखाता हूँ। इन फोटोस को देखकर आपका जो दिमाग है बिल्कुल चकरा जाएगा। हमारे यहाँ मूर्ति कला के बारे में क्यों नहीं पढ़ाया जाता है? इसीलिए नहीं पढ़ाया जाता है कि लोग जान लेंगे। अगर लोगों ने जान लिया तो फिर पूजा कौन करेगा? भक्ति कौन बनेगा? और अगर भक्ति नहीं करेंगे तो धंधा चौपट हो जाएगा। और धंधा अगर चौपट हो गया तो रोड पे आ जाएँगे। तो इसीलिए धंधा बरकरार रखने के लिए लोगों को बेवकूफ बनाओ। मूर्ति कला को पढ़ाओ मत। आई कुछ मूर्तियाँ मैं आपको दिखाता हूँ। पहले ये देखिए, ये अवलोकितेश्वर की मूर्ति है। यह भी अवलोकितेश्वर शिव की मूर्ति है। आप इनके माथे पर देखिए, ऊपर बुद्ध बैठे हुए हैं। अब आप लोग इस फोटो को देखिए। इसमें अवलोकितेश्वर के कितने सारे हाथ दिखाए गए हैं। इनका क्या मतलब है? आप लोग देखिए, ईश्वर के ऊपर बुद्ध बैठे हुए हैं। इन हाथों का क्या मतलब है? वो मैं आपको बता देता हूँ। हाथों का मतलब है कि इतनी सारी इनके पास शक्तियाँ थीं। आप लोग देखिए, ईश्वर के पास गुणों का मतलब है कि इतनी सारी शक्तियाँ थीं इनके पास और उन शक्तियों को हाथों के रूप में दिखाया गया है। अब आपको समझ में आ गया? अगर किसी मूर्ति के चार हाथ बने हैं तो वो अंधविश्वास नहीं है और किसी मूर्ति के आठ हाथ बने हैं या 10 हाथ बने हैं, वो अंधविश्वास नहीं है। वो उसके गुणों को प्रदर्शित करते हैं, वो उसकी शक्तियों को दिखाते हैं। अगर कोई देवी-देवता एक हाथ में तलवार लिए हैं और दूसरे हाथ में चक्र लिए हैं तो इसका मतलब जानते हो कि उसके पास शस्त्र चलाने की भी शक्ति है और चक्र के नियमों से झुकने की भी शक्ति उसके पास है। कुछ लोग इसको अंधविश्वास समझ लेते हैं। ये अंधविश्वास नहीं है। और यही यहाँ पर दिखाया गया है। इतने सारे जो हाथ हैं वो इसीलिए दिखाए गए हैं। अब यहाँ पर इन फोटो को आप लोग देखिए ध्यान से। यह यहाँ पर बैठे हुए हैं। ये बैठे हुए हैं। इनके हाथ में त्रिशूल भी आपको दिखाई दे रहा होगा और यहाँ पे आपको ये चार हाथ दिखाई दे रहे होंगे। आप लोगों को चार हाथ दिखाई दे रहे होंगे। ये सारी मूर्तियाँ अवलोकितेश्वर से संबंधित हैं। बहुत सारी हैं, सैकड़ों की संख्या में दिखा सकता हूँ मैं। अब आप लोग इस मूर्ति को देखो। त्रिलोकनाथ टेंपल, हिमाचल प्रदेश। नाम तो सुना होगा आप लोगों ने बहुत अच्छे से। ये बैठे हैं भगवान भोलेनाथ या कहें भगवान शिव और इनके सर पर बैठे हुए हैं भगवान बुद्ध। कुछ लोगों को कानों में चुभ गई होगी ये बात, "ये क्या कह दिया तुमने?" मैंने तो वही कहा जो सामने है, अपनी तरफ से कुछ कहा नहीं है। और ये मंदिर किसने बनवाया था? 10वीं शताब्दी में बनवाया था। किसने बनवाया था? यह पता कर लेना। पता करने के लिए मैं बता देता हूँ, वेबसाइट की लिंक मैं डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दे दूँगा। वहाँ से जाके आप पढ़ लेना। अब आप इसको देखिए। यह तो आपको सही दिखाई दे रही होगी, भगवान शिव बैठे हुए हैं और उनके ऊपर भगवान बुद्ध बैठे हुए हैं। यहाँ पर मुझे एक बात याद आ गई कि एक बहुत ही प्रसिद्ध गुरु हैं, उन्होंने कहा था… एक वीडियो मैंने उनका देखा था तो उन्होंने ये कहा था कि गौतम बुद्ध शिव का एक प्रतिशत भी नहीं है। ये कहा था उन्होंने। जब मैंने वो वीडियो देखा तो मैं बहुत हँसा कि ये साधु-संत लोग अपने मन में कल्पना कर लेते हैं और उस कल्पना को ये हकीकत मानते हैं। पहले पढ़ तो लो गौतम बुद्ध के बारे में, पढ़ लो भगवान शिव के बारे में। इसके बाद अपना ओपिनियन दो। मैं तो कह रहा हूँ कि ये मूर्तियाँ देखकर ही आपको दिखा देना चाहिए कि कौन 1% है और कौन 100% है। मैं किसी भी देवी-देवता का अपमान नहीं कर रहा हूँ क्योंकि सारे देवी-देवता अपने ही हैं। किसका अपमान करूँगा? अपने ही लोगों का। लेकिन हाँ, जो लोग इनके नाम पर धंधा चला रहे हैं, उनकी भावनाएँ आहत ज़रूर होंगी और उसकी मुझे बिल्कुल परवाह नहीं है। और मैं फिर से ये बात कह रहा हूँ कि भारत के किसी भी बड़े मंदिर में चले जाना, वहाँ पर बुद्ध की मूर्तियाँ मिलेंगी या तो हो सकता है खुद ही बैठे मिलेंगे। इनकी सभा आपको कोई नहीं मिलेगा। और जिसको आप हिंदू धर्म कहते हो, सनातन धर्म कहते हो या वैदिक धर्म कहते हो, जो भी आप कहते हो, दरअसल उसका वास्तविक नाम है बौद्ध धर्म की महायान शाखा। अब आपको समझ में आया कि अवलोकितेश्वर कौन हैं? वो शिव कौन हैं? एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नाम हैं। बौद्ध धर्म में वही अवलोकितेश्वर हैं और हिंदू धर्म में वही शिव हैं। लेकिन व्यक्ति एक ही है और कहानी भी दोनों धर्म में अलग-अलग मिलेगी। इनकी बहुत धर्म में कुछ अलग कहानी है, हिंदू धर्म में कुछ अलग कहानी है।
तो उम्मीद है अब आपको समझ में आ गया होगा। अगर फिर भी आपके समझ में नहीं आया है तो करण व्यू सूत्र अगर मुझे मिल गया तो मैं एक वीडियो और लाऊँगा जिसमें मैं अवलोकितेश्वर के बारे में और आपको जानकारी दूँगा। लेकिन इतना मैं आपको बता रहा हूँ कि जिसे आप हिंदू धर्म समझ रहे हैं, वो जिसे आप बौद्ध धर्म समझ रहे हैं, हर्षवर्धन से पहले दोनों एक थे। ना कोई हिंदू था और ना कोई बौद्ध था। यह धर्म-धर्म का जो खेल है, कब से खेल गया है, इस पर मैं एक वीडियो लाऊँगा, उसमें बात करूँगा। तो उम्मीद है आपको समझ में आ गया होगा। वीडियो अगर अच्छा लगा हो तो उसको लाइक करें, शेयर करें। वीडियो देखने के लिए धन्यवाद।