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3) Tafseer-Surah Fatiah (Naam+Maqsad+Iste’aza +Bismillah)Class 3 - Level 1 || Eng. Ebrahim Shabbir

Dr. Mehboob Abu Asim28:11

Transcription

अच्छा ये बताएं कि पिछली दफा हमने सूरतुल फातिहा के हवाले से हल्का सा पढ़ा था ना? मुझे कौन बता सकता है इसका नाम फातिहा क्यों है? या उसके पीछे क्या हमें समझ आती है? कौन बता सकता है जी?

मोहम्मद भाई आप बता दें। बिल्कुल, बिल्कुल। फातिहा जो है, फतह यानी खोलना। इफल बाब इफत अल किताब—किताब खोलो, दरवाजे को ओपन करो। ठीक है? तो वहां से ये निकला है। ये इसका लजी माना है। और कुरान मजीद में क्या है कि यह कुरान को आगे पूरा खोलता है। ठीक है? बाज़ उलमा कहते हैं कि इंसान अल्लाह ताला से ये सूरत दुआ के तौर पर मांगता है, और अल्लाह ताला बदले में जो है आपको फिर पूरा कुरान आगे देता है जवाब में। अच्छा, आज आगे चलते हैं और इसकी जो है ना असल तफसीर पर हम इंशाल्लाह आते हैं। किताब आप सबके पास है ना? उर्दू हम डिस्प्ले कर देंगे, लेकिन जिनके पास रोमन है या इंग्लिश है वो सेम ही है, कोई फर्क नहीं है उसमें।

अच्छा, सूरत अल फातिहा में यह सबसे पहले सूरत का सिर्फ एक नाम है। फातिहा नामों में से एक नाम है। असल में सूरत के और भी बहुत सारे नाम हैं। किस-किस ने सुने सूरतुल फातिहा के और कोई नाम? कोई आपने सुने हैं? जी? बल्कि मैं काम करता हूं, मैं इसको छुपा देता हूं पहले अभी। जी, हाथ कम हो गए हैं। जी, आपसे शुरू करते हैं। बैठ के, बैठ के, बैठ, बैठ के… उम्मल किताब! माशाल्लाह! सूरतुल फातिहा का एक और नाम है। इसको भी नोट कर लें। उम्मल किताब। उम्मल किताब का मतलब किताब की मां। तो यह फातिहा जो है, फिर वो किताब की मां बन गई। अच्छा, और कौन सा नाम है? उम्मल कुरान भी है—कुरान की मां। यह इस नाम से क्या मतलब समझ आती है हमें? उम्मल किताब, उम्मल कुरान से आपको क्या समझ आती है? क्यों उसको यह नाम दिया हुआ है? नहीं, नहीं। अभी-अभी आपने कोई और माशाल्लाह बुक पढ़कर आए हैं? कोई और जवाब चाहिए कि सूरतुल फातिहा को उम्मल किताब, उम्मल कुरान क्यों दिया गया? इसके पीछे क्या? चलिए, माशाल्लाह! एक जवाब आ गया कि पूरे कुरान का खुलासा है। ये भी सही जवाब बनता है, और यह बहुत करीब जवाब है। ठीक है? ठीक है। आपका नाम क्या है? मुजम्मिल भाई ने एक हदीस सुनाई है। एक हदीस में आता है, अल्लाह के रसूल सलाम फरमाते हैं, “ला सला ल किताब उसकी नमाज ही नहीं होती जिसने नमाज में उम्मल किताब नहीं पढ़ी।” उम्मल किताब कौन सी सूरत है? सूरतुल फातिहा। ठीक है। इसके पीछे एक और जो वजह है ना, वो यह कि हर चीज में, इंसानों में भी क्या होता है कि बच्चे असल लौटकर जाते हैं मां की तरफ। ठीक है? मां से आए हैं वो। तो पूरा का पूरा कुरान मजीद जो है, वह असल सारा खुलासा लौटकर कहां आता है? सूरत फातिहा में। कुरान मजीद में तौहीद के बारे में जिक्र है सर? फातिहा में भी तौहीद के बारे में जिक्र है। कुरान में कयामत के कुछ वाक़यात और मनाज़िर और कुछ कयामत के बारे में कुछ चीजें बताई गई हैं सर? फातिहा में कहां मिलती है आपको कयामत के हवाले से? कौन सी आयत में? माशाल्लाह! मालिक न… फिर कुरान में अल्लाह ताला हमारा इस दुनिया में आने का मकसद बताता है। फातिहा में भी वह है। और वह क्या मकसद है? याया नाद। ठीक। फिर अल्लाह ताला पिछली क़ौमों के वाक़यात सुनाता है कुरान में। आते ना, क़ौम आद के, क़ौम समूद के? सर, फातिहा में भी इतने वाक़यात आते हैं। किसके आते हैं? हां, बिल्कुल। यहूदियों के आता है, ईसाइयों का वाक़या आता है। क्या वजह थी वो लोग गुमराह हुए? तो उम्मल किताब, उम्मल कुरान मतलब यह सारा का सारा कुरान लौटकर जो उसका निचोड़ है, वह सूरत फातिहा में आ रहा है। ठीक है? दो और नाम आपको पता चल गए। एक कौन सा? फातिहा, उम्मल कुरान, उम्मल किताब। और भी इसके नाम हैं। और कौन-कौन से हैं? सबअल मसानी! माशाल्लाह! सबअल मसानी का मतलब? सब का मतलब सात। मसानी बार-बार दोहराई जाने वाली। ठीक है? ये इसका एक नाम है जो अल्लाह ताला ने खुद कुरान मजीद में दिया। किसी को आयत आती है? माशाल्लाह! लनी अला फरमाता है कि हमने आपको सात बार-बार दोहराई जाने वाली आयतें भी दे दीं और एक अजीम कुरान भी दे दिया आपको। ठीक है? तो यह बार-बार दोहराई जाने वाली है। और कितनी बार दोहराई जाती है आयतें? एक दिन में कम से कम कितनी बार दोहराई जाती है यह सूरत? सब 17 कह रहे हैं। और भी कोई नंबर है? 17 किस तरह? ठीक है। दो फ़र्ज़, फ़ज़र के हो गए। उसके बाद चार ज़ोहर के हो गए। कितने हो गए? छह हो गए। फिर चार असर की ऐड कर लें। कितने हो गए? 10 हो गए। तीन मगरिब के, 13 और इशा के दो, चार, चार। ठीक। इशा के चार ऐड कर लें। कितने हो गए? 17। कम से कम 17 बार आप हर मुसलमान ने ये सूरत जो है दिन में पढ़नी है। तो अल्लाह ताला ने इसको बार-बार दोहराई जाने वाली जो है वो सात आयतें इसको फ़रमाया है। तो ये भी इसका एक और नाम है। जी, जी। दो रकात में दो दफ़ा। जी, जी। हां, इसी तरह करके 17। फ़ज़र में एक नहीं काउंट कर रहे हम। फ़ज़र में कितनी कर रहे हैं? दो। ज़ोहर में चार, असर में… हर रकात में एक बार होगी ना? तो हर रकात में… तो इस लिहाज़ से 17 बनती है। वरना उस लिहाज़ से करेंगे तो कोई आठ, ढ़ाई बनेंगी, कम बनेंगी। ठीक है? ये इसका एक और नाम है—सबअल मसानी। और भी कोई नाम है इसका? चार नाम तो आपने बता दिए। रुकैया… तो एक लड़की का नाम है? रुकिया। जी, जी, जी। रुकिया। रुकिया का मतलब? माशाल्लाह! दम करना। इस सूरत का एक और नाम है—रुकिया। और यह उस हदीस से निकलता है जो अल्लाह के रसूल सलम ने सहाबी को कहा था। वो वाक़या याद है ना आपको? पिछले हफ़्ते सुनाया था कि जब उन्होंने सूरतुल फातिहा से दम किया था, तो आपने जवाब में उनको यह कहा था कि तुम्हें कैसे पता कि इसमें रुकिया है, शिफ़ा है इसमें? तो इसको दम के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। चलिए, हो गए पांच नाम। और… रुकिया हो गया, दम के लिए। अलवा फ़िया। माशाल्लाह! ठीक है। अलवा फ़िया भी इसका एक नाम है कि हर मौजूदा इसमें जो है कवर होता है। और किताब में देखें और भी कोई है? हाँ, माशाल्लाह! पहले लेते हैं। आपने अल काफ़िया बोला। इस सूरत का एक और नाम है—अल काफ़िया। ठीक है? लिख लें, नोट कर लें अपने पास। काफ़िया का मतलब क्या है? कि सूरत काफ़ी है। यह सूरत हर चीज़ से काफ़ी है। आपको बीमार हो गए, दम करना है, यह सूरत काफ़ी है। हत्तआ कि उलमा कहते हैं, आप नमाज़ में सूरतुल बकरा की अलिफ़ ला म मीम से लेके सूरतुल नास में मिनल जिन्नति व नास तक पूरा कुरान पढ़ लें, लेकिन फातिहा नहीं पढ़ी, नमाज़ होगी? नहीं होगी। लेकिन अगर खाली सूरत फातिहा पढ़ ली और दूसरी सूरत नहीं पढ़ी, उलमा कहते हैं आपकी रकात हो जाएगी। तो इतनी काफ़ी है सूरत कि आप खाली सूरत फातिहा भी अगर पढ़ लेते हैं, वो रकात आपकी हो जाएगी। लेकिन फातिहा नहीं पढ़ी तो वो रकात ही नहीं होगी। ठीक है? अच्छा, एक और नाम आया था इधर से—अस्सला। अस्सला का मतलब क्या है? नमाज़। अल्लाह ताला ने हदीस कुदसी में इस सूरत को एक और यह नाम दिया—अस्सला। हदीस में आता है, क़सम अस्सला। अल्लाह ताला कहते हैं, “यह मैंने सलात जो है उसको आधा-आधा स्प्लिट कर दिया। आधा मेरे पास है, आधा बंदे के पास है।” अच्छा, अब इस हदीस से सलात का मतलब नमाज़ बनना चाहिए था ना? तो सूरतुल फातिहा कैसे बन गई? मतलब यह हदीस आपको समझ आ गई? अल्लाह ताला कहते हैं कि मैंने सलात को अपने और अपने बंदे के दरमियान हाफ़-हाफ़ कर दिया, तक़सीम कर दिया। आधी मेरे पास है, आधी बंदे के पास है। तो इस हदीस में इसका तर्जुमा सलात का नमाज़ क्यों नहीं किया? सूरत फातिहा क्यों किया? जी? चलिए, एक जवाब आया क्योंकि इसके बगैर नमाज़ नहीं। और भी कोई जवाब है? कोई कह सकता है कि यह तो आपने खुद से तर्जुमा बना दिया। उसका तर्जुमा यह नहीं बनता। सलात को नमाज़ कहते हैं ना? तो इस हदीस में तर्जुमा करते हुए फातिहा क्यों किया जा रहा है? अच्छा, एक और जवाब, दूसरा है कि हर नमाज़ में जो है बार-बार दोहराई जाती है इसलिए। लेकिन अभी भी कोई भी कह सकता है कि आपने सलात का तर्जुमा कैसे बदल दिया? जी? चलिए, एक और जवाब आया। माशाल्लाह! टेक्निकल जवाब है कि मालिक में दन तक आधी है, उसके बाद बाकी आधी स्प्लिट कर लिया। चलिए, ये और थोड़ा जवाब चाहिए। अभी तक मैं मुतमइन नहीं हो रहा जवाब से। जी, बैठ के… जी, सर। फातिहा के बगैर नमाज़ नहीं होगी। वो भी हदीस अपनी जगह पर ठीक है। लेकिन इस हदीस के तर्जुमे में सलात के वर्ड को नमाज़, फातिहा क्यों कर रहे हैं? नमाज़ होनी चाहिए थी। अच्छा सवाल। वैसे समझ आ गया या मैं कंफ़्यूज़ कर रहा हूं सवाल में? जी, जी। एक मैं एक लेता हूं, फिर इंशाल्लाह आपके पास भी… जी, जी। चलिए, मसूद साहब कह रहे हैं कि दो हिस्सों में तक़सीम की। एक इबादत है, एक दुआ। आपका भी यही जवाब था। च… अभी भी कोई कह सकता है कि यह सब ठीक है, आपकी सारी वजहें ठीक हैं, लेकिन इस हदीस में तर्जुमा करते हुए सलात के वर्ड को फातिहा क्यों कर दिया? हदीस वाज़ है, “क़सम अस्सला बनी अल्लाह।” फरमाता है, “मैंने सलात को तक़सीम कर दी अपने और अपने बंदे के दरमियान, आधी-आधी।” सलात का मतलब दुआ है। तो नमाज़ में दुआ करते हैं। यह भी ठीक है। यह वजह सारी ठीक है, लेकिन तर्जुमा क्यों चेंज किया? चलिए, इस हदीस को अगर आप पूरा पढ़ेंगे, तब वाज़ होगा। अक्सर ऐसे ही होता है। आपको कभी भी कोई अगर पूरा ठीक जाननी हो, सिर्फ़ उस आयत को, हदीस को पूरा पढ़ लें। इस… यह बड़ी लंबी हदीस है। जी, जुबैर भाई। हां, माशाल्लाह! इस हदीस का अगला जितना हिस्सा है, वह एक-एक चीज़ दलील देती है कि यह सलात का मतलब है फातिहा। अब हदीस को मुकम्मल करते हैं। हदीस में आगे अल्लाह ताला फरमाता है, “हदीस कुदसी। अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन। जब मेरा बंदा कहता है, ‘अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन,’ तो मैं जवाब में कहता हूं, ‘मेरे बंदे ने मेरी तो तारीफ़ बयान कर दी।’ फिर जब मेरा बंदा कहता है, ‘अर्रहमान अर्रहीम,’ अल्लाह ताला जवाब में बंदे को कहता है, ‘मेरा बंदा तो मेरी सना बयान कर रहा है।’ फिर जब बंदा कहता है, ‘मालिकी यौमिद्दीन,’ अल्लाह ताला जवाब में कहता है बंदे को जो यह आयत पढ़ रहा होता है, कि ‘मेरा बंदा तो मेरी बड़ाई बयान कर रहा है।’ मनी… फिर जब बंदा कहता है, ‘ईयाक नअबुदु वईयाक नस्ताईन,’ अल्लाह ताला जवाब में कहता है, ‘मेरे बंदे ने जो मांगा उसको मैं दूंगा।’ वो उसके लिए… यहां इसने तक़सीम कर दी। अब जो मांगा उसके लिए… फिर बंदा क्या मांगता है? ‘इरशदना अस्सिरॉतल मुस्तक़ीम।’ क्या? अल्लाह हम सबको हिदायत दे, सीधे रास्ते पर। तो अल्लाह ताला कहता है, ‘वदल…’ जो मेरे बंदे ने मुझसे सवाल किया, यह उसके लिए… और फिर आख़िर तक… तो इस हदीस में ही इसका जवाब है। जो हदीस शुरू होती है ना कि मैंने सलात को तक़सीम किया है अपने और अपने बंदे के दरमियान, आधी-आधी… उसी हदीस के बाक़ी हिस्से हैं। जब बंदा यह आयतें फातिहा की पढ़ रहा होता है… इस हदीस से आप अंदाज़ा लगा लें कि हम जब फातिहा पढ़ रहे होते हैं दिन में कम से कम 17 बार, एक-एक बार, एक-एक आयत पर अल्लाह हमें जवाब दे रहा होता है। एक-एक बार आप कहते हैं, ‘अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन,’ अल्लाह आपको कह रहा होता है, ‘हम्मी… मेरा बंदा देखो मेरी हमद बयान कर रहा है।’ फिर आप कहते हैं, ‘अर्रहमान अर्रहीम,’ अल्लाह कहता है, ‘मेरा बंदा मेरी सना बयान कर रहा है।’ तो इस तरह करते-करते आप अल्लाह से हिदायत मांगते हैं। अल्लाह जवाब में कहता है, ‘मेरे बंदे ने जो मांगा वो उसके लिए…’ तो इतनी अज़ीम ये सूरत है। तो इस हदीस से इस सूरत को यह नाम क्या दिया गया? एक और—अस्सला। कि वो हदीस में आता है। ठीक है? तो ये आपको तक़रीबन हमने कितने नाम बता दिए हैं? चलिए, स्क्रीन पर देख लेते हैं। आपको सात-आठ नाम बता दिए। आठ नाम टोटल हो गए, फातिहा को मिलाकर। ठीक है? तो इससे आपको अंदाज़ा हो गया। अच्छा, ये नाम थे सूरत के। अब मुझे ये बताएं कि इस सूरत की अहमियत क्या है? अहमियत का मतलब क्या होता है? कौन ट्रांसलेट कर सकता है इंग्लिश में? इम्पॉर्टेंस। ठीक है? सूरत की इम्पॉर्टेंस क्या है? क्या अहमियत है सूरत की? यह बता दिया आपको, थोड़ा अलग अंदाज़ से बताया। पहली बात अहमियत की, इसको अल्लाह ताला ने कितनी बार ऑर्डर दिया कम से कम दिन में पढ़ने का? 17 बार। इसी से पता चलता है सूरत कितनी इम्पॉर्टेंट है, कितनी अहम है। दूसरी अहमियत यह कि जिस बंदे ने यह सूरत नहीं पढ़ी, हदीस में उसकी नमाज़ ही नहीं है। इतनी अहम है सूरत। तो यह सूरत की बहुत सारी अहमियत में से दो अहमियतें। दो आप अपने पास लिख सकते हैं। एक तो यह कि इस सूरत को ऑर्डर कितनी बार दिया अल्लाह ने पढ़ने का? 17 बार। और दूसरा यह कि इस सूरत के बगैर हदीस में आता है नमाज़ नहीं होती।

अच्छा, अगला पॉइंट हमारा यह है कि अब इस सूरत का जो मकसद है, जो… मैं थोड़ा नीचे जाता हूं स्क्रीन में… ये मज़मून और बुनियादी मकसद। इसको पहले तो समझ लेते हैं। इसका मतलब क्या? मज़मून और बुनियादी मकसद का क्या मतलब होता है? अच्छा, मुझे ये जो जवाब चाहिए ना, ये अंडर 20 से चाहिए। 20 से ऊपर जो भी एज का वो नहीं बोलेंगे। उनको पता है। 20 से नीचे जो भी है वो बताएं। 25 से नीचे… चलिए। याय… जो उर्दू नहीं पढ़े हुए… मज़मून किसको कहते हैं? सब्जेक्ट। ठीक है? इस सूरत का सब्जेक्ट क्या है? और बुनियादी मकसद का मतलब? हाँ… कहाँ से? जब बिल्कुल मेन पर्पस… सूरत का पर्पस क्या है? तो देखिए… इससे पहले के जवाब में आपको क्या लगता है? सूरत अल… अब तक आप कितने सालों से पढ़ते आ रहे हैं? इस सूरत का मकसद क्या है? जी? चलिए, रमज़ान भाई कहते हैं, हिदायत है। और भी कोई मकसद है सूरत में? वापस, वापस… अच्छा, रिव्यू ऑफ़ द फ़ॉल्स… ठीक है। हक़ और बातिल की मुफ़्त… चलिए… और अल्लाह ताला के वसीले से दुआ करना। ठीक। दो बड़े बुनियादी मकसद हैं सूरत के। यह सब ठीक है जो आप बता रहे हैं, लेकिन यह दो के आगे डिटेल्स में निकलती है। पहले यह कि अल्लाह ताला ने इसमें बड़ी अहम दुआ हमें जो है ना करने को बोला है। और वह कौन सी दुआ है? मुस्तक़ीम। यह मकसद है कि बंदा अल्लाह ताला से यह दुआ मांग ले। असल मकसद पूरी सूरत का यह कि बंदा दुआ मांगे अल्लाह से। और सबसे इम्पॉर्टेंट दुआ कौन सी है? हिदायत की। आप अमीर हैं, लेकिन हिदायत नहीं है, कोई फ़ायदा नहीं है। आपके पास कुर्सी है, लेकिन हिदायत नहीं है, कोई फ़ायदा नहीं है। लोगों के… हां, आपकी वाहवाही होती है। बहुत मशहूर है आपका नाम। लोग लो तो लोग बस वाहवाही करते हैं, लेकिन हिदायत नहीं है, कोई फ़ायदा नहीं है। लेकिन आप ग़रीब हैं, कोई आपकी जानता तक भी नहीं है। कई रिश्ता भेजें तो लोग इंकार कर देते हैं। कोई बिज़नेस शुरू करें तो कोई करना नहीं चाहता आपके साथ। सब ठुकरा देते हैं, सब आपको रिजेक्ट करते हैं, लेकिन हिदायत है तो बादशाहों से भी बड़ी नेअमत आपके पास है। क्यों? क्योंकि यहां सांस निकलेगी तो वो बादशाह का अंजाम कुछ और होगा। वो जो मशहूर है जिसके पास हिदायत नहीं है उसका अंजाम कुछ और होगा। लेकिन आपका अंजाम यक़ीनी तौर पर पता है क्या होगा? क्या होगा? कि क़बर में भी खुशी, क़बर में भी सुकून और आख़िरत में, जन्नत में भी सुकून। तो अल्लाह ताला को पता है हमें सबसे ज़्यादा किस चीज़ की ज़रूरत है, और वही सबसे अहम चीज़ अल्लाह ताला ने सूरत में डाल दी। और वो क्या है? हिदायत। तो पहला मकसद यह है कि अल्लाह बंदे से यह दुआ करवाना चाहता है—इरशदना अस्सिरॉतल मुस्तक़ीम। दूसरा मकसद कि अल्लाह उस दुआ का तरीक़ा हमें सिखाता है कि दुआ अगर मांगनी है ना बादशाह से, तो किस तरह मांगनी है? यह नहीं। कभी भी आपने ऐसे नहीं किया नमाज़ में—अल्लाहु अकबर… इरशदना अस्सिरॉतल मुस्तक़ीम… नमाज़ नहीं होगी। आप… अल्लाह ने आपको दुआ करने का तरीक़ा सिखा दिया। क्या तरीक़ा दुआ करने का? पहले भाषा की तारीफ़ बयान करो। दुनिया में हम जाते हैं ना भाषाओं के पास, मिनिस्टर के पास या वज़ीर के पास, किसी के पास भी, बड़े हो के पास… तारीफ़ उसकी बयान करते हैं। बल्कि शेर-शायरी करते हैं, और कई बार झूठी होती है वो, सिर्फ़ इसलिए ताकि वह खुश हो जाए और मेरा काम कर दे। लेकिन अल्लाह ताला की तारीफ़ आप जितनी भी करें, वह कम है। तो अल्लाह ताला बंदे को सिखाते हैं कि पहले रब की तारीफ़ करो, उसकी सना बयान करो, मानो के वो रब कितना बड़ा है। उसको बताओ कि मैं किसकी इबादत करता हूं? तेरी इबादत करता हूं। इकरार करो उसको। आपको याद दिलाओ बार-बार। फिर अल्लाह से दुआ मांगो, और फिर दुआ को थोड़ा सा एक्सप्लेन कर दो कि मुझे किस रास्ते पर जाना है। मुझे उस रास्ते पर जाना है, जो… बाक़ियों के रास्ते पर नहीं जाना। तो यह दो बड़े मकसद। एक तो यह कि दुआ कौन सी करनी है आपने? और दूसरा? दूसरा क्या मकसद है? नहीं कर रहे, लगता है। जी? हां, दुआ करने का तरीक़ा। दुआ करनी किस तरह है? तो ये दो बड़े अहम मकसद हैं सूरत फातिहा के। दुआ कौन सी करनी है? कैसे करनी है? यहां से आप अपनी लाइफ़ को पूरा कंपेयर करना शुरू कर दें। आज तक जब भी आपके दो हाथ उठते हैं, तो आपकी दुआ का मेजर पार्ट, अक्सर हिस्सा कौन सा होता है? क्या दुनिया के लिए होता है? हिदायत के लिए होता है? क्या दुनिया के फ़ायदे के लिए होते हैं? अपने आख़िरत के फ़ायदे के लिए होते हैं? इसी से आप अंदाज़ा लगा लें, ये दुआ कितनी अहम है। हम हम खुद कितनी बार पढ़ रहे होते हैं और दुआ में कितनी बार मांगते हैं? तो इसलिए हिदायत की दुआ सबसे ज़्यादा बंदे को जो है मांगनी चाहिए।

अच्छा, अगले इस पर आते हैं। अब इस सूरत की जो है ना शुरू से, यानी अऊज़ु बिल्लाह से हम शुरू करेंगे, इंशाल्लाह। सबसे पहले आप ये स्क्रीन पर एक वर्ड देख रहे हैं। ये क्या है? इस्तिआज़ा। का मतलब क्या है? हां, इस्तिआज़ा का मतलब है पनाह मांगना। और इसी से वर्ड है—अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर् रजीम। जो लफ़्ज़ है—अऊज़ु बिल्लाह—ये इस्तिआज़ा है। क्या आप अल्लाह ताला की पनाह मांगते हैं? अच्छा, पनाह को मुझे कौन एक्सप्लेन कर सकता है? क्या मतलब है? पनाह मांगना। ठीक है। मोहम्मद भाई कहते हैं, हिफ़ाज़त में आना। पनाह का मतलब? शैतान मर्दूद… नहीं। वो शैतान रजीम का मतलब है… शेल्टर, मदद मांगना, प्रोटेक्शन, एक सेफ़ जगह। ठीक है? पनाह का मतलब बेसिकली क्या है? थोड़ा सा… अगर इसको थोड़ा सा डिटेल में एक्सप्लेन करूं कि आपको डर है कि कोई आप पर हमला होने वाला है। उस हमले से, उस अटैक से बचने के लिए आपको पता है मुझे यह चीज़ बचा सकती है, तो आप उससे जाकर प्रोटेक्शन मांगते हैं, उससे जाकर मदद मांगते हैं। इसे क्या कहते हैं? पनाह। यह पूरा प्रोसेस है जिसे कहते हैं पनाह कि आपको डर था, कोई आप पर हमला करने वाला है। अब आप बचने के लिए जिस जगह पर जाते हैं, बचाने के लिए… यह है पनाह। शेर आप पर हमला करने लगा। इंशाल्लाह! कभी नहीं होगा। ऐसे मिसाल दे रहा हूं बस। शेर आप पर हमला करने लगा है। आप भागते-भागते दरख़्त ऊपर चढ़ जाते हैं। आपने कहां पनाह ली? दरख़्त से पनाह ली। दरख़्त पर ली, दरख़्त से पनाह ली आपने। ठीक है? 10 लोग भागते हैं आपको पकड़ने के लिए, और आप भागते-भागते इस मस्जिद के गेट में यहां आकर छुप जाते हैं। आपने कहां पनाह ली? इस मस्जिद में पनाह ली। किससे ली? उन 10 लोगों से जो आपको पकड़ने के लिए आए हैं। तो फिर कुरान पढ़ते हुए हम पनाह किससे ले रहे होते हैं? अल्लाह की मांगते हैं। और किसके… किससे? अल्लाह… बचा… शैतान से। अच्छा, यह बताएं, हम कुरान पढ़ रहे हैं। नेकी का काम है? बुराई का काम है? नेकी का काम है। तो इसमें हम क्यों पनाह मांग रहे हैं अल्लाह से? इधर कौन सा ख़तरा है हमारे ऊपर? क्या अटैक हो सकता है? वसवसे का अटैक। माशाल्लाह! हिदायत से हटाने का अटैक। और क्या होगा? शैतानी… क्या? शैतानी। जनरल शैतानी अटैक से… और… और डिस्ट्रक्शन से, आपका ध्यान हटाने से अटैक जो होगा… और जो अटैक होगा कुरान को समझने के हवाले से, जो अटैक होगा कि आप कुरान ना समझ सकें… आप इन सब से अल्लाह ताला से मांगते हैं कि अल्लाह, तू मुझे बचा ले। क्योंकि शैतान के हमले से कौन बचा सकता है आपको? सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह। आप खुद भी नहीं बचा सकते। आप अल्लाह से दुआ मांगेंगे तो अल्लाह आपकी मदद करेगा और आप बचा सकते हैं। अल्लाह आपको बचाता है उसमें भी। तो इसलिए आप सबसे पहले पनाह मांगते हैं। और यह सिर्फ़ सूरत फातिहा पढ़ते हुए नहीं, कुरान पढ़ते हुए पढ़नी चाहिए बिला शक़। आप जब भी कुरान शुरू करें, कभी भी डायरेक्ट ना शुरू करें। अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर् रजीम पढ़े और फिर शुरू करें। ठीक है? तो यह है अऊज़ु बिल्लाह। यह क्लियर है सबको? अऊज़ु बिल्लाह में कोई डाउट तो नहीं है? लड़कों को भी, शबाब को भी… चलिए, ठीक है। शैतान रजीम का मतलब? यहां हाथ खड़ा करें। अच्छा, ठीक। शैतान रजीम का मतलब शैतान मर्दूद से। ठीक है? उसको अल्लाह ताला ने रद किया, रिजेक्ट कर दिया था। कहां से रिजेक्ट किया था? मर्दूद बेसिकली जो रजीम का होने का तर्जुमा किया… मर्दूद यह है कि उसको कर दिया रद कर दिया। किस चीज़ से रिजेक्ट किया शैतान को? जी? अल्लाह ताला की रहमत से, जन्नत से, अल्लाह की नेअमतों से। ठीक है? असल यह हिदायत से उसको रिजेक्ट कर दिया गया। तो शैतान रजीम से हम पनाह मांग… अल्लाह ताला की पनाह मांग रहे होते हैं, प्रोटेक्शन कि अल्लाह हमें शैतान से बचा।

अच्छा, उसके बाद अगला यह है, इसके बाद हम कौन सी आयत पढ़ते हैं? बिस्मिल्लाहिर्रह्मा निर्रहीम। इसका तर्जुमा, सही तर्जुमा कौन कर सकता है? लफ़्ज़ी सही तर्जुमा? जी? अल्लाह के नाम से। अच्छा, हमारे अक्सर लोग यह तर्जुमा करते हैं—अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं। बिस्मिल्लाह का जो सही माना ना… बिस्म का मतलब—नाम से। अल्लाह। अल्लाह के नाम से। यह इसका असल तर्जुमा है। शुरू… इसके असल तर्जुमे में नहीं आता। लेकिन फिर शुरू क्यों ऐड करते हैं हम लोग? असल यह है कि अल्लाह के नाम से। अब वो आप जो भी काम कर रहे हैं, आप वो काम अल्लाह के नाम से शुरू कर दें। ठीक है? आप कहीं सफ़र कर रहे हैं—बिस्मिल्लाह। इसका मतलब क्या है? अल्लाह के नाम से सफ़र को शुरू कर रहे हैं। खाना खाने लगे हैं—तो अल्लाह के नाम से खाना खाना शुरू कर रहे हैं। कोई बिज़नेस करने लगे हैं—बिस्मिल्लाह। पढ़ के… कोई डीलिंग आप फ़ाइनल करने लगे हैं—बिस्मिल्लाह पढ़ के। तो क्या मतलब? कि मैं इस डील को अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं। तो असल यह है कि अल्लाह के नाम से शुरू का मतलब यह है कि जो भी काम है आप उसको अल्लाह के नाम से जोड़ के शुरू कर रहे हैं। उसके बाद है—अर्रहमान अर्रहीम। इसको इंशाल्लाह जो है आगे आयत में, इंशाल्लाह तफ़सील बताएंगे।

अच्छा, बिस्मिल्लाहिर्रह्मा निर्रहीम के से दो अहम पॉइंट जो आप नोट कर लें। पहली तो यह है कि अल्लाह ताला ने जो भी सूरत नाज़िल किया, उसके साथ बिस्मिल्लाहिर्रह्मा निर्रहीम को भी नाज़िल किया। लेकिन एक सूरत है कुरान में जिसमें नहीं है बिस्मिल्लाह। कौन सी है? ठीक। ये अलग बात है। सब आइडिया देंगे। लेकिन वैसे जो भी सूरत नाज़िल हुई, अल्लाह ताला ने… हदीस में आता है कि हर सूरत के साथ बिस्मिल्लाह को नाज़िल किया। और बाज़ उलमा ख़ास तौर पर सूरत फातिहा के हवाले से कहते हैं कि इसके साथ तो बिस्मिल्लाह पढ़ना बहुत ज़रूरी है। यहां तक के बाज़ उलमा कहते हैं, बिस्मिल्लाहिर्रह्मा निर्रहीम जो है सूरतुल फातिहा का हिस्सा है। यानी सूरत फातिहा की कितनी आयतें हैं? सात आयतें हैं ना? बाज़ उलमा कहते हैं, बिस्मिल्लाहिर्रह्मा निर्रहीम ये पहली आयत है। उसके बाद जो है वो बाक़ी आयतें आती हैं—अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन से लेके आगे तक। अच्छा, मैं आपको ना एक चीज़ दिखाता हूं स्क्रीन पर। इस मसले में ना उलमा का वैसे इख़्तिलाफ़ है कि सूरत फातिहा में बिस्मिल्लाहिर्रह्मा निर्रहीम क्या सूरत फातिहा का हिस्सा है या नहीं? बाज़ उलमा कहते हैं, हिस्सा है। और बाज़ क्या कहते हैं? कि वो हिस्सा नहीं है। जो कहते हैं ना हिस्सा है, आप देखेंगे, बाज

पढ़ते हैं, शैतान भाग जाएगा। और क्या-क्या फायदे हैं इसमें? अल्लाह की मदद मिलती है, माशाल्लाह। और एक इम्पोर्टेंट पॉइंट रह रहा है जी। वहां एक हाथ खड़ा, पीछे नहीं, आवाज नहीं पहुंची, अल्लाह की मदद में आ जाते हैं। वही अल्लाह की प्रोटेक्शन में एक सबसे इम्पोर्टेंट जवाब है जी। बरकत, वो जवाब आ गया। ये किसका ऑर्डर है? अल्लाह का ऑर्डर है। तो आप अल्लाह के और अल्लाह के रसूल सल्लम के ऑर्डर को फॉलो कर रहे हैं। ये सबसे बड़ी चीज आपके लिए होनी चाहिए। ठीक है? हां, बिल्कुल। शैतान जो है वो भाग जाता है दूर। तो ये बिस्मिल्लाह के चार फायदे बता दिए आपको। पहला यह कि बरकत। दूसरा, अल्लाह की तरफ से मदद आना। तीसरा, शैतान से आपको बचा लेना। और चौथा जो सबसे बड़ा है वो क्या? आप दीन पर, अल्लाह के और अल्लाह के रसूल सल्लम के ऑर्डर्स पर अमल करें। ये सबसे बड़ी आपके लिए जो है फायदा होना चाहिए। तो अगरचे और भी करना था, लेकिन टाइम आज शॉर्ट है, तो इसी पर इफा करते हैं। अल्लाह ताला से दुआ करते हैं कि अल्लाह हमें कुरान मजीद को सही अंदाज से सीखने की, समझने की और उस पर अमल करने की तौफीक दे।

आज के हवाले से कोई भी सवाल जो नहीं समझ आया, सर समरी में कर देता हूं। आज हमने सर फातिहा के नाम पढ़े। बला आगे इला अला क्लास शुरू करेंगे। कोई सवाल नहीं है? किसी? जी जी जी, मैं समझा नहीं। जी जी, पॉइंट नहीं। मैंने कहा बिस्मिल्लाह के चार फायदे हैं। वो तो बीच में एक बात बताई थी कि हर सूरत से पहले बिस्मिल्लाह होती है, सिवाय सूरत तबा के। ठीक है? लेकिन जो पॉइंट्स बताए वो चार बिस्मिल्लाह के फायदे, वो तो आपने नोट कर लिए ना? हा हा। वो दूसरी बात बताई थी कि बिस्मिल्लाह फातिहा का हिस्सा है या नहीं है। ठीक है? वही लाफ था जो आपको स्क्रीन पर दिखाया था।

चले, इसी के साथ आज की क्लास खत्म करते हैं। बलाला खर अब आपकी आखिरी क्लास होगी? कौन सी? 5 मिनट बज गए। नहीं नहीं, ब्रेक अभी। ऐसा है, ब्रेक देते-देते नमाज का टाइम हो जाता है। इंशाल्लाह, ब्रेक नमाज के लिए ब्रेक देंगे आपको। चलिए, बारक अल्लाह फीकुम।