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भी है। एक दूसरे ने जो सुझाव दिए और कुछ साथी लिख के भी देके जाएंगे। हम समाजवादी पार्टी के लोग उन तमाम सुझावों को अमल करेंगे। उन सुझावों के लेकर के हम पार्टी के लोग उनको कार्यक्रम भी बनाने का काम करेंगे।
मैं धन्यवाद देता हूं अपने संगठन के लोगों का कि जिन्होंने यह संकल्प लिया है कि अपनी वोटर लिस्ट को सुधारने का काम करेंगे। भारतीय जनता पार्टी की साजिश, षड्यंत्र और समय-समय पर जो लगातार चुनाव में धांधली करते हैं, उस धांधली को रोकने के लिए अपनी वोटर लिस्ट को ठीक करने के लिए हम लोग गांव-गांव में, गली में, मोहल्लों में जाकर के अपने साथियों के, जिनके वोट छूट गए हैं, उनके बनवाएंगे और जो फर्जी वोट भारतीय जनता पार्टी ने बनवा रखे हैं, कोई बूथ ऐसा भारतीय जनता पार्टी का नहीं है जिसमें फर्जी वोट उन्होंने ना बनाए हों। उन वोटों पे भी आपत्ति करने का काम हम मिलकर करेंगे।
सोने का भाव ₹1 लाख से ऊपर चला गया है। सोने का भाव ₹1 लाख से ऊपर पहुंच गया। एक तोला। यह है भारतीय जनता पार्टी का सबका साथ, सबका विकास। आप सोचिए, गरीब परिवार में अगर कोई शादी हो तो अपने परिवार की बेटी के लिए एक सामान भी खरीदकर के गरीब परिवार का सदस्य नहीं दे सकता। उसके माँ-बाप, पिता अगर कुछ देना चाहेंगे, तब भी नहीं दे पाएंगे। और लगातार यह सरकार कह रही है कि हम विकसित भारत बनाएंगे। इनके विकसित भारत का सपना क्या है? आखिरकार हम विकसित भारत किसको बोलेंगे? क्या विकसित भारत यही है? कि जहाँ पर गरीब अपनी बेटी की भी शादी नहीं कर पा रहा है, ना करा पा रहा है। क्या विकसित भारत में यही महंगाई होगी? मुनाफा इतना ही लोग कमाएंगे? विकसित भारत में यही इतना ही भ्रष्टाचार होगा? आखिर क्या भारतीय जनता पार्टी का विकसित भारत का सपना क्या है? यही सपना है क्या उनका?
और फिर हम धन्यवाद देना चाहते हैं एक बहुत प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल का, जिन्होंने कम से कम सत्य को सामने लाने का प्रयास किया। जो लोग यह दावा करते थे कि कुंभ में 37 लोगों की जान गई है, अब तो वो आंकड़े आ गए हैं 82 के। और सरकार अभी भी छिपा रही होगी। अभी भी सच्चाई सामने नहीं आई है। और सरकार क्या कर रही थी? मुआवजा ना देना पड़े इसलिए आंकड़े छिपाना और वह लोग कुछ दावा ना करें, मुआवजे की मांग ना करें, उसके लिए घर-घर जाकर के पैसे दिए गए। आखिरकार ये पैसे किसने दिए थे जो दिए जा रहे थे? आखिरकार कुंभ में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, मृत्यु के बाद जो सरकार ने मुआवजा तय किया था, आखिरकार कैश कौन देने जा रहा था? यह कैश किसका था? और अगर वह नहीं दे पाए वहाँ पहुँच के उस परिवार में, तो आखिरकार वो नगदी वापस किसको मिल गई? जो लोग ऐसे पवित्र काम में झूठ बोल सकते हैं, वो किसी भी आंकड़े में झूठ बोल सकते हैं। इसलिए जहाँ हमें वोटर्स इसके लिए सावधान रहना है, वहीं आने वाले समय में सेंसस भी होने जा रहा है। अब तो तारीख भी आ गई है। हम सब मिलकर के और सब लोगों को मिलकर के उसके लिए भी सावधान रहना पड़ेगा। पता नहीं कौन से आंकड़े सरकार दे दे, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के आंकड़ों पर किसी को भरोसा नहीं है।
जो बुनियादी सवाल हैं, किसान की तरक्की, खुशहाली, उसकी आय दोगुनी होना, हर फसल की कीमत मिल जाना, किसान की जरूरत की चीजों को सस्ता उपलब्ध कराना, समय पर उपलब्ध कराना, सरकार का कोई ध्यान नहीं उस तरफ। बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है। बड़े पैमाने पर इन्होंने रोजगार और नौकरी के सर्टिफिकेट नहीं दिए हैं। सच्चाई यह है के 8 साल के लखनऊ और दिल्ली के काम करने के तरीके ने, आर्थिक नीतियों ने बड़े पैमाने पर रोजगार बनाने का काम किया है, पढ़े-लिखे नौजवानों को बेरोजगार बना दिया। सही तरीके से काम होता तो करोड़ों लोगों को नौकरी मिल जाती और अपना ही घोषणा पत्र अगर यह बार-बार पढ़ते तो लाखों का आंकड़ा नहीं देना पड़ता, करोड़ों का आंकड़ा देती है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी की हर बात झूठी है।
मैं सभी अल्पसंख्यक सभा के सदस्यों का, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का, प्रदेश अध्यक्ष जी का, उनके साथ एवं संगठन के लोगों का और उनके साथ जितने भी संगठन में लोग काम कर रहे हैं, उनका मैं बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार प्रकट करता हूँ। बहराइच के मेले पर प्रतिबंध लगाया गया। उसके बाद अभी लगाया गया, अनुमति नहीं दी गई। दूसरा सवाल यह है सर कि सरकार ने वक्त कानून तो लाया, लेकिन उत्तर प्रदेश बोर्ड में अभी तक चुनाव नहीं हो सके, जिसमें दो एमएलए और दो एमपी 2022 के अब तक चुनाव नहीं हुए, पिछले दो महीने से देश भर के लोगों को भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार नफरत को बढ़ाने का काम करेंगे। जो परंपरागत हमारे मिलीजुली संस्कृति का, हमारे जो आपसी मेल के स्थान या मेले, उनको जानबूझकर रोकना चाहती है। कारोबार हमें जोड़ता है। मेला हमें जोड़ता है। यह कारोबार के खिलाफ लोग हैं। खुशियों के खिलाफ लोग हैं। मेले में क्या है? मिठाई खाने लोग जाते हैं। थोड़ा कारोबार करते हैं गरीब के लोग। झूला झूलते हैं। यानी क्या लेना-देना झूला झूलने से? कोई मेला ऐसा नहीं होता जहाँ पर झूला ना लगता हो, मिठाई ना मेले में हो। और गरीब लोगों का मेला होता है, मिलने का स्थान होता है, कारोबार का स्थान होता है। और हजारों साल से लगे हुए हैं मेले। जहाँ एकता का संदेश जाता है, मिलकर के रहते हैं लोग। जहाँ पर एक दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ता है, एक दूसरे से जुड़ने का मौका मिलता है, उस हर चीज से भारतीय जनता पार्टी खिलाफ है। इसीलिए मैंने सवाल पूछा कि जो 37 का आंकड़ा बता रहे थे, अब 82 का आंकड़ा हो गया है। अगर हमारे ये सब पत्रकार निकल पड़े, जिस तरीके से उस बड़ी संस्था ने, प्रतिष्ठित संस्था ने रिसर्च करके, समय लगाकर, रिस्क लेकर के यह आंकड़े सामने लाने का काम किया है, अगर यह हमारे साथी भी निकल पड़े तो इस सरकार की पूरी पोल खुल जाएगी। सरकार कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं बचेगी। यह कैश आया कहाँ से? जो दिया जा रहा था, हमारे बहुत सारे साथियों पर जाँच हो जाती है, आप पर भी कईयों पर छापा पड़ जाता है। यह कैश आया कहाँ से? और जिनमें वो कैश वितरित हो पाया है, जहाँ मान लीजिए वितरित नहीं हो पाया, वो कैश वापस गया किसके हाथ में? नगदी। कैश आप दे कैसे सकते हैं? किस नियम के तहत आप नगदी दे रहे हैं? नगदी देने का निर्णय किस नियम के तहत हुआ है? नगदी का वितरण किसके आदेश पर हुआ है? वितरण तो बताया, भूल जाइए कि वितरण क्या हुआ? चलो किसी को कुछ पहुँचा। आखिर किसके आदेश पर हुआ है? यह कौन है जो नगदी बंटवा रहा है? क्या नकदी बाँटने में अनियमितताएँ नहीं हुई होंगी? जो वापस आया होगा, जो देने गए वो अपनी जेब में रख लिया होगा और मृत्यु के कारण भी नहीं बता रहे हैं ये लोग। आखिर क्यों सरकार डर रही है इन सवालों से? सरकार क्यों बचना चाहती है? बिगड़ी हुई है अपनी पीठ, हम दपा रहे हैं सर, हम लोग पार्टी की तरफ से जो जानकारी मिलेगी, उसको पत्र के माध्यम से भेज देंगे।
इलाज की बात, अगर इस्तहार में चित्र नहीं तो उन्होंने मित्र बदल दिया अपना। आपकी सरकार में 50 से ज्यादा जगह-जगह हॉस्पिटल बनवाए गए थे और आज भी मतलब चार साल होने जा रहे हैं, वो बंद पड़े हुए हैं। मतलब किसी भी तरीके से ना उसमें नियुक्तियाँ की जा रही है, ना मतलब जो मतलब वो इतनी शानदार बिल्डिंग बनी हुई है, लेकिन उसको बंदर तोड़ रहे हैं। मतलब टूट-फूट हो रही है। किस विभाग के बारे में? वो शेर जो आपने पढ़ा था, छलनी वाला जी, दोबारा पढ़ लो, ये इन्हें जवाब मिल जाएगा जी। एक-दो जख्म नहीं, पूरा बदन है छलनी। एक-दो जख्म नहीं, पूरा बदन है छलनी। जख्म बेचारा परेशान है किधर से उठे। हर विभाग इसी तरह है। हर विभाग ऐसा ही है। किस विभाग के बारे में बात करें, बताओ? हर विभाग इसी तरह है। हर विभाग ने काम रोका। आप सोचिए, आज बिजली का संकट है। थोड़ा बहुत बारिश हो गई, उसकी वजह से सरकार बच गई। लेकिन सरकार अभी प्राइवेटाइजेशन कर रही है। जो इंफ्रास्ट्रक्चर था जिसको और अच्छा करना चाहिए था, वह इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद कर दिया। कहीं ट्रांसफार्मर रहे हैं, कहीं लाइन कट जा रही है, पहुँच नहीं पा रही है। लोगों को कैसे जीवन-यापन जी पा रहे थे इन गर्मी में, सोचिए आप। कोई बिजली बनाने का कारखाना नहीं लगाया। और अब सुनने में आ रहा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में महंगी बिजली मिलने वाली है। और कई बार मैंने कहा और फिर कहता हूँ मैं आपको, जब तक बिजली सस्ती नहीं होगी, तब तक कोई भी उद्योग-कारोबार उत्तर प्रदेश में नया नहीं आएगा। क्योंकि जिस समय सस्ती बिजली उत्तर प्रदेश में का उद्योग लगाने के लिए होगी, कारोबार लगाने के लिए होगी, उस समय वह कारोबारी, उद्योगपति दूसरे प्रदेश के लोगों से कंपटीशन कर पाएगा। आप बताइए, बिजली कहाँ पहुँचा दी? कितनी महंगी? हर चीज पर पैसा वसूल सरकार और जो बिजली विभाग मुनाफे में था, वो कहाँ पहुँच गया, बताओ आप। और एक भी बिजली का कारखाना लगाया हो तो बताओ। आप, आप साथियों से पूछता हूँ कि जो बिजली के कारखाने का उद्घाटन किया था, क्या बीजेपी का लगवाया हुआ था क्या? या बीजेपी ने शुरू किया था? समाजवादियों का शुरू किया गया कारखाने था, उसका उद्घाटन हुआ, उसी की वजह से आज बिजली मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग का तो हाल ही जाने क्या है? स्वास्थ्य विभाग में क्या हाल है? मेडिकल कॉलेजेस का क्या हाल है? सुनने में आया है कि मेडिकल कॉलेज में निर्देश दिए गए हैं, निर्देश कि कोई भी एमबीबीएस स्टूडेंट फेल ना किया जाए। अब आप सोचिए इसके पीछे क्या होगा? क्योंकि बच्चे शिकायत ना करें। जो पढ़ने जा रहे हैं मेडिकल कॉलेज में, वो मेडिकल कॉलेज में कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, प्रोफेसर्स नहीं हैं, असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं हैं। अभी नए बच्चे आने जा रहे हैं एमबीबीएस के। क्या इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, बताइए आप? तो कौन से विभाग के बारे में बात करें? और कई विभाग तो ऐसे हैं, बस चल रहे हैं। पानी की टंकी वाला विभाग तो पता ही है आपको। अभी कौन सा जून महीना चल रहा है। आज अखबार में खबर आ गई कि पानी की टंकी से पानी निकल रहा है, तो जुलाई तक गिर जाएगी। हर महीने गिरनी है। टंकी तो जून वाली तो गिर चुकी है, जुलाई वाली गिरेगी। अभी सिंचाई विभाग में भी कई पद रद्द कर दिए गए हैं। अब ये सरकार ही रद्द होगी, जनता रद्द कर देगी इसको।
हुआ उसके बाद उत्तराखंड में लगातार एयर एक्सीडेंट हुए, लखनऊ में भी स्कोप निकला कि सेफ्टी के, कुछ अकाउंटेबिलिटी। मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ, लेकिन इसमें एक्सपर्ट्स की राय और सरकार को नियमों का पालन, मानकों का पालन कराना चाहिए, क्योंकि रिस्क बहुत है इसमें और हमने आपने देखी ये वो तस्वीरें देखी हैं, जिस तरीके से क्रैश हुआ और उत्तराखंड में कोई पहली बार क्रैश नहीं हुआ है। लगातार कुछ दिनों में कितने क्रैश हुए? कितने लोगों की जान गई है? आखिरकार मानक और नियम का पालन कौन कराएगा? डिपार्टमेंट ट्रांसफर हुआ है, ये कोई नई चीज सरकार में नहीं है। कल कम से कम इतनी बड़ी पुलिस आई थी, ये तो पता लगता है कि लापता अधिकारी कहाँ है, उस पर भी चर्चा हो जाती। भी कहा गया कि 2017 से पहले बिनावाद या क्षेत्रवाद के भर्ती नहीं हुआ करती। कोई भी सरकार नियम के बाहर भर्ती नहीं कर सकती है। कोई भी सरकार नियम और नियम के बाहर भर्ती नहीं कर सकती। यह आरोप इसलिए लगाते हैं कि अगर हम लोग संख्या पूछना चाहे कि इतनी भारी संख्या बता रहे हैं आप, इसमें पीडीए की गिनती क्या है? पीडीए की हकमारी कौन कर रहा है? इस भर्ती में पीडीए की हकमारी किसने की? पीडीए की आंकड़े बता दे सरकार। कोई सवाल ना पूछे इसलिए यह केवल इनका प्रोपोगेंडा है। भारतीय जनता पार्टी से अच्छा प्रोपोगेंडा कोई नहीं कर सकता। कम से कम यह तो बता देते कि उत्तराखंड में खजाना किसका लूटा गया। एक आईएएस लापता है। बंटवारे को लेकर थी और सुना है कि किसी को इस्तीफा देना पड़ा था। आपके विभाग के किसी एक, आपके ही विभाग के किसी सलाहकार को क्या बोलेंगे उसको? क्या हिंदी में क्या बोलेंगे? हाँ, एडवाइजर, सलाहकार को इस्तीफा देना पड़ा था। और सोचिए, इस्तीफा कब देना पड़ा? जब मुख्यमंत्री कार्यालय के लोग जमीनों का काम कर रहे थे, जमीनों का मामला निकला। जो उनके मालिक थे, पार्टनर कहाँ भागे हुए हैं, बताएँ आप, क्या नाम है उनका? सोचिए आप, तो ये बातें कौन याद दिलाएगा? तो अभी भी बैठते हैं लोक भवन में, तो कैसे-कैसे लोग बैठते हैं, तुम्हें नहीं पता, जिन पर मुकदमे थे वो तक बैठते हैं। इसीलिए लोक भवन में बैठे हुए लोगों को हटाना है सर। एक आरोप आपकी सरकार पर लगता था कि आपकी सरकार है, इस कक्षा में भी कई मंत्री दिख रहे हैं। ब्राह्मण का होगा तो आ जाएंगे, ओबीसी का होगा तो एक साहब आ जाएंगे। सब मुझे, मैं धन्यवाद देता हूँ कि आप तो बोल रहे हो, एक का बोलना ही बहुत है। इनकी सरकार में कहाँ क्या हो रहा है? आपको खुद पता है, कैसे क्या हो रहा है?
मल्टी कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट जो है, 2022 से लागू, मैं किसी भी पक्ष के नेता का बयान, वो लागू भी हो गया, काम चल रहा है, तो मैं इस पे स्टडी करके और अपने विधायकों से कहूँगा, पूरी जानकारी करके और आप भी ब्रीफ कर देना हमें। हमें कर दो, नहीं ब्रीफ तो करना ही पड़ेगा ना कि क्या आपत्तियाँ हैं और आपको बहुत मोटी बात बता दूँ। हर इंस्टिट्यूशन को, जो इंस्टिट्यूशन इंडिपेंडेंट है, हर इंस्टिट्यूशन को यह कंट्रोल करना चाहते हैं, चाहे कोऑपरेटिव सोसाइटी का हो, चाहे कोई भी हो, हर एक का कंट्रोल भारतीय जनता पार्टी खुद चाहती है। उसी के तहत सब फैसले सरकार लेती है। जितने भी एक्ट में परिवर्तन आया है, नियमों में परिवर्तन आया है, कंट्रोल उनके हाथ में चला जाए, उसी के लिए परिवर्तन लेकर के आए हैं। अखिलेश जी, आजमगढ़ में आपके जो विधायक हैं, रमाकांत यादव जी की संपत्ति को पूर्ण कर दिया। सर, सारा तो स्ट्रक्चर हो रहा है इस कानून। पंचायत राज जब खत्म हो रहा है, अगर स्टडी करोगे सर, राज्य सरकार को कोई राइट नहीं बचेगा इसके बाद। मैं आपसे सहमत हूँ और इसीलिए उन्होंने किसके हाथ में दे दिया है? और उनके हाथ में जाने से कई स्टेट के लीडर्स को भी कंट्रोल कर लेंगे। कई स्टेट के तो जो कोऑपरेटिव था, जो गरीब लोग, किसान के और आम लोगों के लाभ के लिए, किसान के लाभ के लिए जो स्ट्रक्चर क्रिएटेड था, कोऑपरेटिव सोसाइटी बनी थी, उसको पूरा खत्म करना चाहते हैं और पूरा कंट्रोल ले रखे। कभी समय बढ़ाना, कभी नियम बढ़ाना, कभी समय कम कर देना। और 5 इसलिए सरकार हटाना बहुत जरूरी है। उपमुख्यमंत्री मिलकर के जातियों में झगड़ा करा रहे हैं और खासकर पिछड़े लोगों के साथ भेदभाव हो रहा है। बेटी के साथ भेदभाव हुआ है। तेलंगाना गवर्नमेंट ने एक को अवार्ड दिया है, का जो किया गया है, के रूप में दिखाया गया है। कांग्रेस गवर्नमेंट को, मैंने ना फिल्म देखी, ना मुझे जानकारी है। में आप हत्या हुई। अखिलेश जी, फतेहपुर में आप समाजवादी पार्टी के नेता हैं, प्रकाश यादव जी, उन पर मुकदमा दर्ज हुआ, उन्होंने Facebook पर आपस में के खिलाफ भी और एक कम्युनिटी के खिलाफ भी, उनको गिरफ्तार किया गया। आपको ऐसा नहीं लग रहा है कि सोशल मीडिया पर जो पॉलिटिकल पार्टीज हैं, जो राज कर रही हैं यहाँ पर, उनके बीच में कड़वाहट क्या कर रहे हैं आप? कड़वाहट बढ़ रही है। लड्डू दो, वहाँ पहुँचा दे सरकार के पास। देखिए, सरकार के लोग कुछ भी कह सकते हैं। सरकार के लोग कुछ भी कह सकते हैं। आजादी है। यहाँ जितने लोग बैठे हैं, मीडिया के बारे में जानते हैं। सोशल मीडिया में जो लोग बैठे हैं, वह जानते हैं और बीजेपी के लोग फंड कर रहे हैं। और दुख की बात तो यह है कि उसमें नकली लोग बैठे हुए हैं। अगर आप उनकी आईडी चेक करोगे तो कई नकली, भारतीय जनता पार्टी ने पैसे से बैठाया हुआ होगा कि आपको इनको गाली देनी है, इनको गाली देनी है और जाति के हिसाब से किसका क्या नुकसान हो सकता है, धर्म के आधार पे किसका कैसे कहा जाए? ये सरकार पैसा देकर काम करवा रही है और अगर कोई सच सच बोल दे, अगर उनके खिलाफ कोई बोल दे तो उसपे एफआईआर दर्ज हो जाएगी। एक बहुत गरीब नौजवान यहाँ पर आया था प्रतापगढ़ का। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कुछ कहा था हमारे बारे में, उसको सहन नहीं हुआ, उसने टिप्पणी कर दी कुछ, उसने भी लिख दिया। तो बताइए, वहाँ के पुलिस कप्तान, सीओ, एसओ सब जेल भेजने में तैयार। हमारे जितने अल्पसंख्यक के साथी बैठे हैं, इनके खिलाफ न जाने क्या-क्या लिखा जाता है। बीजेपी लिखवाती है। यह सब जानते होंगे, जहाँ बैठे लोग हैं। बीजेपी लिखवाती है। और अगर ये लोग कुछ लिख दें, जवाब दे दें तो एसओ साहब आ जाएंगे एकदम पकड़ने। तो अगर सत्य प्रकाश यादव या जो भी मैं जानता नहीं हूँ किसने लिखा है? क्या लिखा है? अगर क्या लिखा है, पढ़ दो तो हम और आगे बात बढ़ा देंगे। क्या लिखा है? पढ़ दो तो हम बात आगे बढ़ा देंगे। या WhatsApp पे भेज दो ना, हम पढ़ लेंगे। अब मुकदमा भी हो चुका है। तो क्या हो गया, मुकदमा हो गया तो क्या? हम और आप बात ही कर सकते हैं, उसमें क्या है? प्रेस में थोड़ी मुकदमा हो और तुम पे तो कभी नहीं मुकदमा होगा। अच्छा तुम पे मुकदमा हो जाएगा तो छोड़ दो, भूल जाओ। यह पढ़े या गाएँ, इन पे मुकदमा नहीं हो सकता। अरे बताओ ना क्या लिखा है? हम तो जान जाएँ, प्रेस में इतनी बात हो रही है तो। के खिलाफ लिखा। अच्छा हमारी जाति के खिलाफ कितना लिखते हैं? बताओ। हमारे लोगों से लिखवाते हैं। एक फर्जी आदमी है दूसरे स्टेट में, हमारी तस्वीर कैसे बनाता है, आप बताओ, हम दिखवाएँ, वो बीजेपी का है। एफआईआर लिखा दो मुख्यमंत्री पर। एक काम करो, उसका पेज जरा खोल दें, एक हरियाणा वाले का खोलिए पेज जरा, अगर उस पे एक कार्रवाई हो जाए तो बता दो, हमें दिखाइए जरा उसको भी फेमस कर दें। हैं? नहीं, पैसा कौन दे रहा है? नगदी कौन दे रहा है? तो ये गरीब कार्यकर्ता करता है, भावना में आके कुछ कह देता है, लिख देता है तो उसे जेल भेज दे दोगे ऐसे पुलिस से। अभी लोग ये तो टेक्नोलॉजी है, वो तो आप भी जानते हो क्या-क्या बनाता है वो फोटो हमारी, बताइए, सब जानते हैं ये लोग और पैसा कौन देता है? दिल्ली का एक मंत्री है, वो पैसा देता है। गुस्सा नहीं आता आपको इतना? अब इन्हें कितना गुस्सा आता है, बस पूछो इन लोगों से क्या करें, बताइए? गुस्सा आए तो क्या करेंगे? नहीं, बिल्कुल नहीं आता। कहेंगे बहुत हम लोग शरीफ लोग हैं, कुछ नहीं करेंगे। बहुत उम्दा। केवल लड्डू खिलाएँगे बस। नहीं, लड्डू-लड्डू खिलाएँगे। हैं? अब वो पता नहीं मुझे। नहीं, आप सोचिए ना, पैसे देके। ये बहुत सारे लोग हैं। आप लोग खुद जानते हो एजेंसी वाले लोगों को। भाई, एजेंसी वालों को कितना पैसा दिया जा रहा है? अब कंपनी के नाम मत बुलवाओ मुझसे। मैं, हालांकि एक अखबार ने जो स्टिंग ऑपरेशन किया था, आप बताइए, किसी पर कार्रवाई हुई क्या? हमारे खिलाफ प्रचार कराने के लिए, वो जो एक खिलाफ प्रचार कराते हैं हमारे लिए। हाँ। तो सोचिए, कितने लाख रुपए? कितने और नाइजीरिया से अकाउंट ऑपरेट हो रहा था। और कौन पैसा दे रहा था? बीजेपी वाले पैसा दे रहे थे। अच्छा मुख्यमंत्री जहाँ पैसा देगा, क्या कर लोगे आप? उनकी ऑफिस पैसा देगी, क्या कर लोगे आप? जो काम अगर उनकी देखरेख में हो तो क्या कोई कुछ कर लेगा? इसीलिए ये सब बैठे हुए हैं सरकार हटाने के लिए। ऐसा हटेगी बीजेपी इस बार, पता नहीं लगेगा बीजेपी कहाँ चली गई। आया नहीं अभी तक पेज उसका। छोड़िए, मत दिखाइए पेज। तो सब जानते हैं। इसलिए प्रेस के लोगों का बहुत धन्यवाद। अखिलेश जी, अखिलेश जी, सवाल वो आजमगढ़ में रमाकांत यादव जी की संपत्ति को खुश किया गया है और पूरे में इस बात की चर्चा है कि लगातार जो सरकार है, जो प्रशासन है वो सीडीए के विधायकों का इस तरह कार्रवाई। जाहिद बेग, इरफान सोलंकी, मोहम्मद आजम खान साहब, प्रजापति, रमाकांत यादव और कितने नाम बताऊँ मैं? देखिए, क्या बनाया मेरा? बताइए, बताइए, यह बताइए, आप बताइए, आप इस पे कोई एफआईआर नहीं होगी। इससे खराब तो नहीं लिखा होगा ना, सत्य विकास ने। सेव तो आपने कर ही लिया है, क्या चीज आगे के लिए? सेव तो कर ही लिया है इसे? नहीं-नहीं, ऐसा कुछ नहीं, सब हम भुलक्कड़ लोग हैं, सब भूल जाते हैं। एक नहीं और संगठन में जो हमारी आपकी बातचीत हुई है, एक दूसरे ने जो सुझाव दिए और कुछ साथी लिख के भी देकर जाएंगे। हम समाजवादी पार्टी के लोग उन तमाम सुझावों को अमल हैं। यही है, चैनल वाले बैठे हैं। तुमने कौन सा जिताया था, बताना? अच्छा ये कहाँ तक चले गए थे? नहीं-नहीं, इनका चैनल कहाँ तक गया था? अच्छा इस्लामाबाद चला गया था इनका चैनल। बताइए आप। हद कर दी आपने। कितना अपमान करवाया देश का, बोलना नहीं चाहिए, लेकिन अब बता रहे हैं, अब क्या बताएँ? हैं? इन्हीं का चैनल था भाई, कैसे चैनल हो, बताओ यार, ये देश के साथ खिलवाड़ ना करें। चैनल वाले लोग, हालांकि हमारे दुश्मन हैं सर, बन जाएंगे। चैनल वाले भाई, हमारा सहयोग करो सगा बनाने में। सर, उत्तर प्रदेश से जो मजदूर हैं, इसराइल मजदूरी करने, सरकार ने सोचा, वॉर बंद होना चाहिए। वॉर बंद होना चाहिए। वॉर कहीं भी, हम वॉर के पक्ष में नहीं हैं। भारत सरकार से कहेंगे और आपके माध्यम से मैं कहूँगा कि जो भारतीय लोग, हिंदुस्तानी लोग ईरान में हैं या और जगह हैं, उनको पूरा सुरक्षित वापस लाए भारत सरकार। अखिलेश जी, नाबालिक बच्चियों के साथ लगातार रेप की घटनाएँ सामने आ रही हैं, जिसमें लखनऊ में भी मेट्रो के नीचे जो बच्ची के साथ रेप हुआ, कानपुर है और कौशाम्बी भी है, लखनऊ, हाँ, बस्ती, तमाम ऐसी जगह है जहाँ नाबालिक बच्चे के साथ रेप किया जा रहा है। मतलब क्या कहेंगे? पुलिस अपना काम नहीं कर रही है, जो पेट्रोलिंग और जो समय-समय पे काम करना चाहिए, वो नहीं काम कर रहे। सरकार को जो जागरूकता है, समझदारी का काम करना चाहिए, सरकार नहीं काम कर रही। चलो, प्रेसों का धन्यवाद। [संगीत] मैं समाजवादी पार्टी और संगठन में जो हमारी आपकी बातचीत हुई है, एक दूसरे ने जो सुझाव दिए और कुछ साथी लिख के भी देकर जाएंगे। हम समाजवादी पार्टी के लोग उन तमाम सुझावों
को अमल करेंगे। उन सुझावों के लेकर के हम पार्टी के लोग उनको कार्यक्रम भी बनाने का काम करेंगे। मैं धन्यवाद देता हूं अपने संगठन के लोगों का कि जिन्होंने यह संकल्प लिया है कि अपनी वोटर लिस्ट को सुधारने का काम करेंगे।
भारतीय जनता पार्टी की साजिश, षड्यंत्र और समय-समय पर जो लगातार चुनाव में धांधली करते हैं, उस धांधली को रोकने के लिए अपनी वोटर लिस्ट को ठीक करने के लिए हम लोग गांव-गांव में, गली-गली में, मोहल्लों में जाकर के अपने साथियों के, जिनके वोट छूट गए हैं, उनके बनवाएंगे और जो फर्जी वोट भारतीय जनता पार्टी ने बनवा रखे हैं—कोई बूथ ऐसा भारतीय जनता पार्टी का नहीं है जिसमें फर्जी वोट उन्होंने ना बनाए हों। उन वोटों पर भी आपत्ति करने का काम हम मिलकर के करेंगे।
सोने का भाव ₹1 लाख से ऊपर चला गया है। सोने का भाव ₹1 लाख से ऊपर पहुंच गया। एक तो यह है भारतीय जनता पार्टी का सबका साथ, सबका विकास। आप सोचिए, गरीब परिवार में अगर कोई शादी हो तो अपने परिवार की बेटी के लिए एक सामान भी खरीद कर के गरीब परिवार का सदस्य नहीं दे सकता। उसके माँ-बाप, पिता अगर कुछ देना चाहेंगे, तब भी नहीं दे पाएंगे। और लगातार यह सरकार कह रही है कि हम विकसित भारत बनाएंगे। इनके विकसित भारत का सपना क्या है? आखिरकार हम विकसित भारत किसको बोलेंगे? क्या विकसित भारत यही है कि जहाँ पर गरीब अपनी बेटी की भी शादी नहीं कर पा रहा है, ना करा पा रहा है? क्या विकसित भारत में यही महंगाई होगी? मुनाफा इतना ही लोग कमाएंगे? विकसित भारत में यही इतना ही भ्रष्टाचार होगा? आखिरकार भारतीय जनता पार्टी का विकसित भारत का सपना क्या है? यही सपना है क्या उनका?
और फिर हम धन्यवाद देना चाहते हैं एक बहुत प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल का, जिन्होंने कम से कम सत्य को सामने लाने का प्रयास किया। जो लोग यह दावा करते थे कि कुंभ में 37 लोगों की जान गई है, अब तो वो आंकड़े आ गए हैं 82 के। और सरकार अभी भी छिपा रही होगी। अभी भी सच्चाई नहीं सामने आई है। और सरकार क्या कर रही थी? मुआवजा ना देना पड़े, इसलिए आंकड़े छिपाना और वह लोग कुछ दावा ना करें, मुआवजे की मांग ना करें, उसके लिए घर-घर जाकर के पैसे दिए गए। आखिरकार ये पैसे किसने दिए थे जो दिए जा रहे थे? आखिरकार कुंभ में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, मृत्यु के बाद जो सरकार ने मुआवजा तय किया था, आखिरकार कैश कौन देने जा रहा था? ये कैश किसका था? और अगर वो नहीं दे पाए वहाँ पहुँच के उस परिवार में, तो आखिरकार वो नगदी वापस किसको मिल गई? जो लोग ऐसे पवित्र काम में झूठ बोल सकते हैं, वो किसी भी आंकड़े में झूठ बोल सकते हैं। इसलिए जहाँ हमें वोटर लिस्ट के लिए सावधान रहना है, वहीं आने वाले समय में सेंसस भी होने जा रहा है। अब तो तारीख भी आ गई है। हम सब मिलकर के और सब लोगों को मिलकर के उसके लिए भी सावधान रहना पड़ेगा। पता नहीं कौन से आंकड़े सरकार दे दे, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के आंकड़ों पर किसी को भरोसा नहीं है।
जो बुनियादी सवाल हैं—किसान की तरक्की, खुशहाली, उसकी आय दोगुनी होना, हर फसल की कीमत मिल जाना, किसान की जरूरत की चीजों को सस्ता उपलब्ध कराना, समय पर उपलब्ध कराना—सरकार का कोई ध्यान नहीं उस तरफ। बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है। बड़े पैमाने पर इन्होंने रोजगार और नौकरी के सर्टिफिकेट नहीं दिए हैं। सच्चाई यह है कि 8 साल के लखनऊ और दिल्ली के काम करने के तरीके ने, आर्थिक नीतियों ने बड़े पैमाने पर रोजगार बनाने का काम किया है, पढ़े-लिखे नौजवानों को बेरोजगार बना दिया। सही तरीके से काम होता तो करोड़ों लोगों को नौकरी मिल जाती। और अपना ही घोषणा पत्र अगर यह बार-बार पढ़ते तो लाखों का आंकड़ा नहीं देना पड़ता, करोड़ों का आंकड़ा देती है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी की हर बात झूठी है।
मैं सभी अल्पसंख्यक सभा के सदस्यों का, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का, प्रदेश अध्यक्ष जी का, उनके साथ एवं संगठन के लोगों का और उनके साथ जितने भी संगठन में लोग काम कर रहे हैं, उनका मैं बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार प्रकट करता हूँ। बहराइच के मेले पर जो प्रतिबंध लगाया गया, उसके बाद बाराबंकी और अयोध्या पर भी लगाया गया, अनुमति नहीं दी गई। दूसरा सवाल यह है सर कि सरकार ने वक्त कानून को लाया, लेकिन अब उत्तर प्रदेश पावर बोर्ड में अभी तक चुनाव नहीं हो सके, जिसमें दो एमएलए और दो एमपी जाते हैं, 2022 के अब तक चुनाव नहीं हुए, पिछले दो महीने से सीयू चार्ज नहीं है। देश भर के लोगों को भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार नफरत को बढ़ाने का काम करेंगे, जो परंपरागत हमारे, हमारे मिली-जुली संस्कृति का, हमारे जो आपसी मेल के स्थान या मेले, उनको जानबूझ कर के रोकना चाहती है। कारोबार हमें जोड़ता है। मेला हमें जोड़ता है। यह कारोबार के खिलाफ लोग हैं। खुशियों के खिलाफ लोग हैं। मेले में क्या है? मिठाई खाने लोग जाते हैं। थोड़ा कारोबार करते हैं। गरीब के लोग झूला झूलते हैं। यानी क्या लेना-देना झूला झूलने से? कोई मेला ऐसा नहीं होता जहाँ पर झूला ना लगता हो, मिठाई ना मेले में हो। और गरीब लोगों का मेला होता है। मिलने का स्थान होता है। कारोबार का स्थान होता है। और हज़ारों साल से लगे हुए हैं मेले, जहाँ एकता का संदेश जाता है, मिलकर के रहते हैं लोग, जहाँ पर एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ता है, एक-दूसरे से जुड़ने का मौका मिलता है। उस हर चीज से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ है। इसीलिए मैंने सवाल पूछा कि जो 37 का आंकड़ा बता रहे थे, अब 82 का आंकड़ा हो गया है। अगर हमारे ये सब पत्रकार निकल पड़े, जिस तरीके से उस बड़ी संस्था ने, प्रतिष्ठित संस्था ने रिसर्च करके, समय लगा के, रिस्क लेकर के ये आंकड़े सामने लाने का काम किया है, अगर ये हमारे साथी भी निकल पड़े तो इस सरकार की पूरी पोल खुल जाएगी। सरकार कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं बचेगी। ये कैश आया कहाँ से? जो दिया जा रहा था, हमारे बहुत सारे साथियों पर जाँच हो जाती है, आप पर भी कईयों पर छापा पड़ जाता है। यह कैश आया कहाँ से? और जिनमें वो कैश वितरित हो पाया है, जहाँ मान लीजिये वितरित नहीं हो पाया, वो कैश वापस गया किसके हाथ में? नगदी। कैश आप दे कैसे सकते हैं? किस नियम के तहत आप नगदी दे रहे हैं? नगदी देने का निर्णय किस नियम के तहत हुआ है? नगदी का वितरण किसके आदेश पर हुआ है? वितरण तो बताया, भूल जाइए कि वितरण क्या हुआ? चलो किसी को कुछ पहुँचा, आखिर किसके आदेश पर हुआ है? ये कौन है जो नगदी बँटवा रहा है? क्या नकदी बाँटने में अनियमितताएँ नहीं हुई होंगी? जो वापस आया होगा, जो देने गया वह अपनी जेब में रख लिया होगा, और मृत्यु के कारण भी नहीं बता रहे हैं ये लोग, आखिर क्यों सरकार कर रही है? इन सवालों से सरकार क्यों बचना चाहती है? पीठ हम दबा रहे हैं सर, हम लोग पार्टी की तरफ से जो जानकारी मिलेगी, उसको पत्र के माध्यम से भेज देंगे।
जी, करने गए थे, घायल हुए थे, उनके इलाज की बात की बात, अगर इस्तहार में चित्र नहीं तो उन्होंने मित्र बदल दिया अपना। अखिलेश जी, आपकी सरकार में 50 बेड युक्त जगह-जगह हॉस्पिटल बनवाए गए थे और आज भी मतलब 4 साल होने जा रहे हैं, वो बंद पड़े हुए हैं। मतलब किसी भी तरीके से ना उसमें नियुक्तियाँ की जा रही हैं, ना मतलब जो मतलब वो इतनी शानदार बिल्डिंग बनी हुई है, लेकिन उसको बंदर तोड़ रहे हैं, मतलब टूट-फूट हो रही है। किस विभाग के बारे में? वो शेर जो आपने पढ़ा था, छलनी वाला, दोबारा पढ़ लो, ये इन्हें जवाब मिल जाएगा। जी, एक दो जख्म नहीं, पूरा बदन है छलनी, एक दो जख्म नहीं, पूरा बदन है छलनी। जख्म बेचारा परेशान है किधर से उठे। अब इन्हीं के शेर जोड़ो, हर विभाग इसी तरह है, हर विभाग ऐसा ही है। किस विभाग के बारे में बात करें, बताओ? हर विभाग इसी तरह, हर विभाग ने काम रोका। आप सोचिए, आज बिजली का संकट है। थोड़ा बहुत बारिश हो गई, उसकी वजह से सरकार बच गई। लेकिन सरकार अभी प्राइवेटाइजेशन कर रही है। जो इंफ्रास्ट्रक्चर था, जिसको और अच्छा करना चाहिए था, वो इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद कर दिया। कहीं ट्रांसफार्मर रहे हैं, कहीं लाइन कट जा रही है, पहुँच नहीं पा रही है। लोगों को कैसे जीवन-यापन जी पा रहे थे इन गर्मी में, सोचिए आप। कोई बिजली बनाने का कारखाना नहीं लगाया। और अब सुनने में आ रहा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में महंगी बिजली मिलने वाली है। और कई बार मैंने कहा और फिर कहता हूँ मैं आपको, जब तक बिजली सस्ती नहीं होगी, तब तक कोई भी उद्योग-कारोबार उत्तर प्रदेश में नया नहीं आएगा। क्योंकि जिस समय सस्ती बिजली उत्तर प्रदेश में का उद्योग लगाने के लिए होगी, कारोबार लगाने के लिए होगी, उस समय वो कारोबारी, उद्योगपति दूसरे प्रदेश के लोगों से कंपटीशन कर पाएगा। आप बताइए, बिजली कहाँ पहुँचा दी? कितनी महंगी? हर चीज पर पैसा वसूली सरकार और जो बिजली विभाग मुनाफे में था, वो कहाँ पहुँच गया, बताओ आप। और एक भी बिजली का कारखाना लगाया हो तो बताओ। आप, आप साथियों से पूछता हूँ कि जो बिजली के कारखाने का उद्घाटन किया था, क्या बीजेपी का लगवाया हुआ था क्या या बीजेपी ने शुरू किया था? समाजवादियों का शुरू किया गया कारखाने था, उसका उद्घाटन हुआ, उसी की वजह से आज बिजली मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग का तो हाल ही जाने क्या है? स्वास्थ्य विभाग में क्या हाल है? मेडिकल कॉलेजेस का क्या हाल है? सुनने में आया है कि मेडिकल कॉलेज में निर्देश दिए गए हैं, निर्देश कि कोई भी एमबीबीएस स्टूडेंट फेल ना किया जाए। अब आप सोचिए इसके पीछे क्या होगा? क्योंकि बच्चे शिकायत ना करें। जो पढ़ने जा रहे हैं मेडिकल कॉलेज में, वो मेडिकल कॉलेज में कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, प्रोफेसर्स नहीं हैं, असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं हैं। अभी नए बच्चे आने जा रहे हैं एमबीबीएस के, क्या इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, बताइए आप? तो कौन से विभाग के बारे में बात करें? और कई विभाग तो ऐसे हैं, बस चल रहे हैं। पानी की टंकी वाला विभाग तो पता ही है आपको। अभी कौन सा जून महीना चल रहा है। आज अखबार में खबर आ गई कि पानी की टंकी से पानी निकलना है, तो जुलाई तक गिर जाएगी। हर महीने गिरनी है टंकी तो जून वाली तो गिर चुकी है, जुलाई वाली गिरेगी। अभी सिंचाई विभाग ने भी कई पद रद्द कर दिए गए हैं। अब ये सरकार ही रद्द होगी, जनता रद्द कर देगी इसको।
उसके बाद उत्तराखंड में लगातार एयर एक्सीडेंट हुए। लखनऊ में भी टेक्निकल का स्कोप निकला। पैसेंजर की सेफ्टी के अकाउंटेबिलिटी नहीं है। मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ, लेकिन इसमें एक्सपर्ट्स की राय और सरकार को नियमों का पालन, मानकों का पालन कराना चाहिए। क्योंकि रिस्क बहुत है इसमें। और हमने, आपने देखी ये वो तस्वीरें देखी हैं जिस तरीके से क्रैश हुआ और उत्तराखंड में कोई पहली बार क्रैश नहीं हुआ है। लगातार कुछ दिनों में कितने क्रैश हुए? कितने लोगों की जान गई है? आखिरकार मानक और नियम का पालन कौन कराएगा? डिपार्टमेंट ट्रांसफर हुआ है। साल पहले ये कोई नई चीज सरकार में नहीं है। कल कम से कम इतनी बड़ी पुलिस आई थी। ये तो पता लगता है कि लापता अधिकारी कहाँ है। उस पे भी चर्चा हो जाती है। 2017 से पहले बिना जातिवाद या क्षेत्रवाद के भर्ती नहीं हुआ करती। कोई भी सरकार नियम के बाहर भर्ती नहीं कर सकती है। कोई भी सरकार नियम और नियम के बाहर भर्ती नहीं कर सकती। यह आरोप इसलिए लगाते हैं कि अगर हम लोग संख्या पूछना चाहें कि इतनी भारी संख्या बता रहे हैं आप, इसमें पीडीए की गिनती क्या है? पीडीए की हकमारी कौन कर रहा है? इस भर्ती में पीडीए की हकमारी किसने की? पीडीए की आंकड़े बता दे सरकार। कोई सवाल ना पूछे इसलिए [संगीत] यह केवल इनका प्रोपेगेंडा है। भारतीय जनता पार्टी से अच्छा प्रोपेगेंडा कोई नहीं कर सकता। कम से कम यह तो बता देते कि उत्तराखंड में खजाना किसका लूटा गया। एक आईएएस लापता है, बंटवारे को लेकर के और सुना है कि किसी को इस्तीफा देना पड़ा था। आपके विभाग के किसी एक, आपके ही विभाग के किसी सलाहकार को क्या बोलेंगे उसको? क्या हिंदी में क्या बोलेंगे? हाँ, एडवाइजर, सलाहकार को इस्तीफा देना पड़ा था। और सोचिए, इस्तीफा कब देना पड़ा? जब मुख्यमंत्री कार्यालय के लोग जमीनों का काम कर रहे थे, जमीनों का मामला निकला, जो उनके मालिक थे, पार्टनर कहाँ भागे हुए हैं, बताएँ आप, क्या नाम है उनका? सोचिए आप तो ये बातें कौन याद दिलाएगा? सर, कुछ लोग तो कह रहे हैं कि वो अभी भी लोग भवन में बैठते हैं। लोग भवन में तो कैसे-कैसे लोग बैठते हैं? तुम्हें नहीं पता। जिन पे मुकदमे थे वो तक बैठते हैं। इसीलिए लोग भवन में बैठे हुए लोगों को हटाना है।
सर, एक आरोप आपकी सरकार को लगता था कि आपकी सरकार में मुख्यमंत्री है, सरकार में भी दिख रहे हैं। ब्राह्मण का होगा तो एक साहब आ जाएंगे, ओबीसी का होगा तो एक साहब आ जाएंगे। रहती है। देखिए सब मुझे, मैं धन्यवाद देता हूँ कि आप तो बोल रहे हो। एक का बोलना ही बहुत है। इनकी सरकार में कहाँ क्या हो रहा है? आपको खुद पता है कैसे क्या हो रहा है? सर, मल्टी कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट जो है, 2022 से लागू है, मैं किसी भी पक्ष के नेता का आज जब बयान वो लागू भी हो गया, काम चल रहा है मल्टी कोऑपरेटिव सोसाइटी, तो मैं इस पर स्टडी कर करके और अपने विधायकों से कहूँगा पूरी जानकारी करके और आप भी ब्रीफ कर देना हमें। हमें कर दो। नहीं, ब्रीफ तो करना ही पड़ेगा ना कि क्या आपत्तियाँ हैं। और आपको बहुत मोटी बात बता दूँ। हर इंस्टिट्यूशन को, जो इंस्टिट्यूशन इंडिपेंडेंट है, हर इंस्टिट्यूशन को ये कंट्रोल करना चाहते हैं, चाहे कोऑपरेटिव सोसाइटी का हो, चाहे कोई भी हो, हर एक का कंट्रोल भारतीय जनता पार्टी खुद चाहती है। उसी के तहत सब फैसले सरकार लेती है। जितने भी एक्ट में परिवर्तन आया है, नियमों में परिवर्तन आया है, कंट्रोल उनके हाथ में चला जाए, उसी के लिए परिवर्तन लेकर के आए हैं। अखिलेश जी, आजमगढ़ में आपके जो विधायक हैं, रमाकांत यादव जी की संपत्ति को पूर्ण कर लिया। इंस्ट्रक्शन हो रहा है इस कानून से पंचायत राज जब खत्म हो रहा है, अगर स्टडी करोगे सर तो राज्य सरकार को कोई राइट नहीं बचेगा। इसके बाद मैं आपसे सहमत हूँ और इसीलिए उन्होंने किसके हाथ में दे दिया है और उनके हाथ में जाने से कई स्टेट के लीडर्स को भी कंट्रोल कर लेंगे, कई स्टेट के। तो जो कोऑपरेटिव था, जो गरीब लोग, किसान के और आम लोगों के लाभ के लिए, किसान के लाभ के लिए जो स्ट्रक्चर क्रिएटेड था, कोऑपरेटिव सोसाइटी बनी थी, उसको पूरा खत्म करना चाहते हैं और पूरा कंट्रोल ले रख के कभी समय बढ़ाना, कभी नियम बढ़ाना, कभी समय कम कर देना, इसलिए सरकार हटाना बहुत जरूरी है। न्याय मिलना चाहिए। सरकार और दोनों उप मुख्यमंत्री मिलकर के जातियों में झगड़ा करा रहे हैं और खासकर पिछड़े लोगों के साथ भेदभाव हो रहा है, बेटी के साथ भेदभाव हुआ है। तेलंगाना गवर्नमेंट ने एक को अवार्ड दिया है, किया गया है। हैदराबाद का जो किया गया है, पूरी कम्युनिटी को मिले के रूप में दिखाया गया है और कांग्रेस गवर्नमेंट को अवार्ड। मैंने ना फिल्म देखी, ना मुझे जानकारी है। 10 दिन में आप, हत्या हुई। अखिलेश जी, फतेहपुर में आप समाजवादी पार्टी के नेता हैं, प्रकाश यादव जी, उन पर मुकदमा दर्ज हुआ। उन्होंने Facebook पर आपस में मिली थीम के खिलाफ भी और एक कम्युनिटी के खिलाफ भी, उनको गिरफ्तार किया। क्या आपको ऐसा नहीं लग रहा है कि सोशल मीडिया पर जो पोलिटिकल पार्टीज़ हैं, जो राज कर रही हैं यहाँ पर, आप उनके बीच में कड़वाहट बढ़ने जा रही है? क्या कर रहे हैं आप? कड़वाहट बढ़ रही है। लड्डू दो, वहाँ पहुँचा, सरकार के पास। देखिए, सरकार के लोग कुछ भी कह सकते हैं। सरकार के लोग कुछ भी कह सकते हैं। आजादी है। यहाँ जितने लोग बैठे हैं, मीडिया के बारे में जानते हैं। सोशल मीडिया में जो लोग बैठे हैं, वह जानते हैं और बीजेपी के लोग फंड कर रहे हैं। और दुख की बात तो यह है कि उसमें नकली लोग बैठे हुए हैं। अगर आप उनकी आईडी चेक करोगे तो कई नकली, भारतीय जनता पार्टी ने पैसे से बैठाया हुआ होगा कि आपको इनको गाली देनी है, इनको गाली देनी है और जाति के हिसाब से किसका क्या नुकसान हो सकता है, धर्म के आधार पे किसका कैसे कहा जाए। ये सरकार पैसा दे के काम करवा रही है और अगर कोई सच बोल दे, अगर उनके खिलाफ कोई बोल दे तो उसमें एफआईआर दर्ज हो जाएगी। एक बहुत गरीब नौजवान यहाँ-यहाँ पर आया था, प्रतापगढ़ का। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कुछ कहा था हमारे बारे में, उसको सहन नहीं हुआ, उसने टिप्पणी कर दी कुछ, उसने भी लिख दिया। तो बताइए, वहाँ के पुलिस कप्तान, सीओ, एसओ सब जेल भेजने में तैयार। हमारे जितने अल्पसंख्यक के साथी बैठे हैं, इनके खिलाफ ना जाने क्या-क्या लिखा जाता है। बीजेपी लिखवाती है। यह सब जानते होंगे जहाँ बैठे लोग हैं। बीजेपी लिखवाती है। और अगर ये लोग कुछ लिख दें, जवाब दे दें तो एसओ साहब आ जाएंगे एकदम पकड़ने। तो अगर सत्य प्रकाश यादव या जो भी, मैं जानता नहीं हूँ किसने लिखा है? क्या लिखा है? अगर क्या लिखा है पढ़ दो तो हम और आगे बात बढ़ा दें। क्या लिखा है पढ़ दो तो हम बात आगे ले बढ़ा देंगे या WhatsApp पे भेज दो ना हम पढ़ लेंगे। मुकदमा भी हो चुका है तो क्या हो गया? मुकदमा हो गया तो क्या हम और आप बात ही कर सकते हैं? उसमें क्या है? प्रेस में थोड़ी मुकदमा और तुम पे तो कभी नहीं मुकदमा होगा? अच्छा, तुम पे मुकदमा हो जाएगा तो छोड़ दो, भूल जाओ। ये पढ़े या गाएँ, इन पे मुकदमा नहीं हो सकता। अरे, बताओ ना क्या लिखा है? हम तो जान गए ना, प्रेस इतनी बात हो रही है तो किसी जाति के खिलाफ? अच्छा, हमारी जाति के हिसाब से कितना लिखते हैं, बताओ? हमारे लोगों से लिखवाते हैं। एक फर्जी आदमी है दूसरे स्टेट में, हमारी तस्वीर कैसे बनाता है? आप बताओ हम लिखवाएँ। वो बीजेपी का है। एफआईआर लिखा दो मुख्यमंत्री पे। एक काम करो, उसका पेज जरा खोल दो, एक हरियाणा वाले का। खोलिए पेज जरा। अगर उस पे एक कार्रवाई हो जाए तो बता दो हमें। दिखाइए जरा। उसको भी फेमस कर दें। हैं? नहीं-नहीं, पैसा कौन दे रहा है? नगदी कौन दे रहा है? तो यह गरीब कार्यकर्ता भावना में आ के कुछ कह देता है, लिख देता है तो उसे जेल भेज दो पुलिस से। अभी लोग यह तो टेक्नोलॉजी है, वो तो आप भी जानते हो क्या-क्या बनाता है वो फोटो हमारी? बताइए, सब जानते हैं लोग और पैसा कौन देता है? दिल्ली का एक मंत्री है वो पैसा देता है। गुस्सा नहीं आता आपको इतना? अब इन्हें कितना गुस्सा आता है, बस पूछो इन लोगों से क्या करें? बताइए, गुस्सा है तो क्या करें? एफआईआर? नहीं, बिल्कुल नहीं। एफआईआर कराएँगे बहुत, हम लोग शरीफ लोग हैं, कुछ नहीं करेंगे। बहुत उम्दा, केवल लड्डू खिलाएँगे, बस नहीं, लड्डू, लड्डू खिलवाएँगे। हैं? अब वो पता नहीं, मुझे नहीं। आप सोचिए ना, पैसे देखिए ये बहुत सारे लोग हैं, आप लोग खुद जानते हो, एजेंसी वाले लोगों को भाई, एजेंसी वालों को कितना, इतना पैसा दिया जा रहा है। अब कंपनी के नाम मत बुलवाओ मुझसे। मैं, हालांकि एक अखबार ने जो स्टिंग ऑपरेशन किया था, आप बताइए किसी पर कार्रवाई हुई क्या? हमारे खिलाफ प्रचार कराने के लिए, वह जो एक खिलाफ प्रचार कराते हैं हमारे लिए।