Transcription
इना आना कल कौसर रोजाना 21 मर्तबा पढ़ने के फायदे। अगर तुम्हें पता चल जाए कि इस तरतीब से, इस वक्त, ऐसे, इस तरह पढ़ने से अगर सूर कौसर क्या कुछ मिल जाता है। अगर मैं तुम्हें साथियों, भाइयों, बहनों, फौरी तौर पर जो कुछ हासिल होता है, उसके बारे में बता दूं कि सूर कौसर का यह अमल तो आपने जिंदगी में बेशुमार बार पढ़ा होगा। लेकिन एक खास तरतीब से शायद आपने 21 मर्तबा सूर कौसर का यह सच्चा अमल बहुत कम जगह सुना होगा। कुछ मेरे बहन भाइयों ने सुना होगा जरूर, लेकिन शायद बहुत कम लोगों ने।
साथियों, भाइयों, बहनों, जाती मकान चाहिए हो, फरी तौर पर बड़ी से बड़ी रकम चाहिए हो, बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज करवाना हो, घर में फकों की नौबत हो, तंगदस्ती हो, माली परेशानी हो, फौरी तौर पर तंगदस्ती हों से परेशानियों से छुटकारा चाहते हो। कर्ज़ों में कोई डूबा हुआ शख्स, बंदा या बंदी ऐसा इस वीडियो में शामिल है, फौरी तौर पर अर्जेंट कर्ज से छुटकारा चाहता हो, कर्जे माफ करवाना चाहता हो, या चाहता हो कि उसे खुद इतनी दौलत पैसा मिल जाए कि अपना पैसा कर्जा खुद अदा कर दे।
कोई ऐसी मेरी बहने भाई जिनको अच्छे रिश्ते चाहिए हो। इस अमल को पढ़ते ही रिश्तों की, मनपसंद रिश्तों की अगर लाइन ना लग जाए तो फिर कहिए। फिर कहिए पहले कोई बात नहीं कि आप कहे और पहले पढ़ ले और फिर अगर फायदा ना हो तो फिर कहने के हकदार है। बया बीवी में नफरत हो चुकी है, दूरिया है, अलदिया है, शदीद नफरत हैं। एक दिन के अमल से बीवी शौहर की गुलाम ना बन जाए तो फिर मुझे कहना और शौहर बीवी का गुलाम ना बन जाए तो फिर कहना। बीवी शौहर के लिए पढ़ ले, शौहर बीवी के लिए पढ़ ले। तरीका बताऊंगा, यह वह अमल बताऊंगा हर परेशानी को दूर कर देगा। बड़ी से बड़ी बीमारी, बड़ी से बड़ी तकलीफ को यह सूर कौसर का अमल दूर कर दे।
पढ़ने का तरीका बेहद आसान है। दुनिया में कहीं भी मौजूद हो, किसी शहर, किसी गांव, किसी गली, किसी बस्ती, किसी मोहल्ले में, चाहे पाकिस्तान से हो, चाहे इंडिया, चाहे बांग्लादेश, चाहे नेपाल, चाहे अफगानिस्तान, चाहे सऊदिया, दुबई, युमान, मस्कत, जापान, इटली, दुनिया का कोई मुल्क, कोई शहर, कोई गांव, कोई गली, कोई मोहल्ला जहां से भी मौजूद हो। साथियों, भाइयों, बहनों, आपने करना क्या है? सुकून से, इत्मीनान से बैठ जाना है इस अमल को पढ़ने के लिए। चाहे कोई भी दिन हो, कोई भी वक्त हो, कोई भी जगह हो। कोशिश करना मेरी ये वीडियो आए और इन तमाम मसाइल में या कोई भी दुनिया का मसला हो, कोई भी हाजत मुराद हो, उसके लिए इस अमल को पढ़ा जा सकता है।
इस अमल को पढ़ने के बाद दुआ तो मांगनी है। वैसे ये वो अमल है कि पढ़ने वाले की जिंदगी में अगर वो दुआ ना भी मांगे तो जो परेशानी है, जो मुसीबत है, जो हाजत है, वो पूरी हो जाती है। मुसीबत मिनटों सेकंडो में दूर हो जाती हैं। यह दुनिया का वाहिद ऐसा अमल है जो अपने पढ़ने वालों को थोड़ा सा भी इंतजार नहीं करवाता। फौरी तौर पर हालात बदल देता है, फौरी तौर पर घर में सुकून ले आता है, खुशियां ले आता है। हर हाजत, हर मुराद मिनटों सेकंडो में पूरी कर देता है।
चाहे दुनिया में कहीं भी मौजूद हो, किसी शहर, किसी गांव, किसी गली, किसी बस्ती में। आपने इस अमल को जिंदगी में एक मर्तबा लाजमी पढ़ लेना है। अगर एक बार पढ़ लिया तो कोई ऐसा दिन ना एक बार में ही आपका बिगड़ा काम बन जाएगा। एक दिन के अमल से ही आधी मिनट, एक मिनट लग जाएगी इस अमल को पढ़ने में। एक दिन के अमल सही दो मिनट लग जाएगी। लेकिन यह एक दो मिनट को ना देखें। य एक दो मिनट आपकी जाया नहीं चली जाएगी। एक दो मिनट का अमल तकदीर के बंद दरवाजों को खोलकर ऐसी ऐसी जगह से रिजक लाएगा, पैसा लाएगा कि अकल तुम्हारी हैरान रह जाएगी। खुद भी तुम हैरान रह जाओगे कि यह पैसा, यह दौलत कहां से आ गया।
साथियों, भाइयों, बहनों, मैंने इस अमल को हजारों लाखों लोगों को बताया है। कोई ऐसा ब बंदा या बंदी जिसने अपनी शदीद परेशानी में, मुश्किल वक्त में। कई ऐसी मेरी बहने थी जो कई सालों से रिश्तों के लिए परेशान थी। रिश्ते आते थे किसी के तो कईयों के तो आते ही नहीं थे। और कईयों के आते थे तो बस वो उनकी पसंद के नहीं थे। जिस तरह वो चाहती थी वसे रिश्ते नहीं आते थे। मेरे भाइयों, ऐसे मेरे भाई हैं जिनकी शादियां नहीं ते हो पाती थी। आप यकीन करें या ना करें, इस एक दिन के अमल से लोगों का यह मसला हल हो गया। लोगों ने जहां दिल चाहा वहां उनको अपनी पसंद का रिश्ता मिला और ऐसा रिश्ता मिला कि खुदा की कसम, इस अमल को पढ़ने के बाद सालों साल हो गए लोग तरक्की करते गए। यानी कि उन्होंने कभी ऐसा रिवर्स नहीं हुआ, उनकी रिश्ते टूटे नहीं। फिर वो मैंने यह भी देखा कि जिसका इस अमल को पढ़ने के बाद अच्छी जगह रिश्ता भी हुआ और वो रिश्ते में निभाया निभाया गया रिश्ता वो टूटा नहीं कभी। कोई तकलीफ उसके हमसफर ने उसे जिंदगी में नहीं। चाहे मेरी बहनों ने पढ़ा हो अच्छे हम सफर के लिए तो वो मैंने 10 10, 12 12, 151 साल हो गए वो ऐसे खुश है अपनी जिंदगी में। मतलब समझे जो बिरियां गम की मारियां बहने भाई जो रिश्तों के लिए रो रहे थे वो ऐसी जगह उनका रिश्ता हुआ, उनके नसीब बदल गए। नसीबों को चमका देता है यल।
और वो मेरे दोस्त और वो मेरे भाई बहने दोनों जिनका बाल बाल कर्ज में डूब चुका है, कर्जदार ने जीना हराम कर दिया है। कभी फोन, कभी मैसेजेस भाई हमें हमारी रकम लौटा दी जाए, हमें हमारे पैसे लौटा दिए जाए। हम कुछ भी नहीं जानते। हर तरफ से आजमाइश में कर्ज में गिरे हुए हो। फौरी तौर पर इस अमल को जितना जल्दी हो सके आज के आज पढ़ लो। सुस्ती ना करना, कल पढ़ूंगा, परसों पढ़ूंगा। साथियों, भाइयों, बहनों, इंसान है, जहन से निकल जाता है। एक मर्तबा अपने जहन में इस अमल को बिठा लो। फिर रोजाना आपने चाहे तो रोजाना भी पढ़ सकते हैं। और अगर एक बार आपने इस अमल को पढ़ लिया ना, मैं गारंटी से कहता हूं कोई आपकी जिंदगी का ऐसा खुदा की कसम दिन ना गुजरेगा क्या आप इस अमल को ना पढ़ो। दौलत का तूफानी अमल है, दौलत से घर को भर देने वाला दुनिया का आजम उदा तरीन अमल है।
इस अमल को मामूली समझिए। यह वो अमल है मेरे भाइयों, मेरी बहनों, जो मिनटों सेकंडो में आपकी तकदीर को बदल देगा। आपकी किस्मत के बंद दरवाजों को यह अमल फरी तौर पर खोलकर खुदा की कसम ऐसी ऐसी जगह से रिजक और पैसा लाएगा आपकी अपनी अकल हैरान रह जाएगी कि यह पैसा, यह दौलत कहां से आ गई। लोगों के आगे हाथ फैला फैला कर थक चुके हो, तंग यों में, परेशानियों में जिंदगी गुजार गुजार कर थक चुके हो। खुदा का वास्ता देता हूं आज के आज मेरा बतलाया हुआ यह छोटा सा अमल पढ़ लेना। सारी जिंदगी दुआएं दोगे इंशाल्लाह।
अब अमल समझाने लगा हूं। खुदारा एक सेकंड की वीडियो भी स्किप ना कीजिएगा। वीडियो अगर काट काट कर देखना चाहते हो, स्किप कर कर के देखना चाहते हो, तो जब फ्री हो जाओ फिर देख लेना। क्योंकि ये अमल साथियों, भाइयों, बहनों, शायद किसी को लाखों करोड़ों भी दो ना, तो भी शायद कोई तुम्हें ये दुनिया का सच्चा अमल ना बताए जो आज तुम्हारा भाई, तुम्हारा हमदर्द तुम्हें ये अमल बताएगा। मैंने इस अमल को हजारों लाखों लोगों को बताया है अपनी जिंदगी में और अल्लाह पाक के हुकम से जो भी इस अमल को पढ़ता है, उसके वारे न्यारे हो जाते हैं। घर में उसके सुकून आ जाता है, खुशियां आ जाती हैं। उसकी तकदीर फौरन बदल जाती है। किस्मत के बंद दरवाजे उसके फौरी दौर पर खुल जाते हैं। और खुदा की कसम उस बंदे की जिंदगी में रिजक ऐसी ऐसी जगह से आता है कि जहां से उसने गुमान तक ना किया हो, जहां से उसने सोचा भी ना हो। पैसा ऐसी ऐसी जगह से उसकी जिंदगी में आना शुरू हो जाता है। हर हाजत, हर मुराद ये अमल पूरी कर देता है। सारी जिंदगी के तुम्हारे वजाइनल एक तरफ और आज का मेरा बतलाया हुआ सूर कौसर का अमल एक तरफ।
आपने इस अमल को पढ़ने के लिए जो पहली शर्त है, याद रखिएगा। अमल की सबसे जो पहली शर्त है, आपने सुकून से, इत्मीनान से बैठ जाना है। किसी ऐसी जगह पर कि जब तक अमल करें कोई आपको डिस्टर्ब ना करे। सुकून से, इत्मीनान से अल्लाह रब्बुल इज्जत की जात पर यकीन, भरोसा करते हुए किसी ऐसी जगह पर बैठिए इस अमल को पढ़ने के लिए कि जब तक अमल पढ़े कोई डिस्टर्ब ना करें। सबसे पहले आपने जैसा कि मैंने बताया कि यह सूर कौसर का अमल है और इसमें दो तीन मजीद आपने सर कौसर के साथ वजा मिलाकर पढ़ने हैं। यह छोटा सा आसान सा अमल है जो एक ही वक्त में, एक ही जगह पर बैठकर आपने बड़े आराम से पढ़ लेना है। अमल के दरमियान में आपने वकफा नहीं लेना। अमल के दरमियान में आपने ब्रेक नहीं लेना। सच्चे दिल से, पूरे यकीन से रबल इजत की जात पर भरोसा करते हुए आपने इस अमल को एक ही वक्त में, एक ही जगह पर बैठकर पढ़ लेना है।
सबसे पहले आपने अमल शुरू करना है। अजु बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम। एक मर्तबा आपने अजु बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम पढ़ के अमल शुरू करना है और फौरन आपने इस अल में साथियों, भाइयों, बहनों, इना आना कौसर फ सल्ली रवन हर इना शनिया कावल अबतर। बड़ी तवज्जो चाहता हूं, बड़ी तवज्जो चाहता हूं, बड़ी हाथ जोड़कर तवज्जो चाहता हूं। मामूली ना समझिए इस अमल को। यह अमल साथियों, भाइयों, बहनों, वह अमल आज तुम्हे देकर जाऊंगा इंशा अल्लाह। अल्लाह पाक ने चाहा तो दुआएं दोगे। हर तरफ से मेरे भाइयों, मेरी बहनों, आजमाइश में घिरे हुए हो, परेशानियों में गिरे हुए हो। इंशा अल्लाह फरी तौर पर तमाम परेशानियों से निकल जाओगे, तमाम आजमाइश से निकल जाओगे। बस आपने इस अमल को बताए हुए तरीके से किसी भी दिन, किसी भी वक्त कोशिश करना वीडियो जैसे ही देख लो, एक मर्तबा तो उसी वक्त इस अमल को पढ़ लेना। वीडियो देखने के फौरन बाद अगर कोई मजबूरी ना हो तो बाकी जब चाहो आप लोग पढ़ सकते हो। आप जैसा बहतर समझे।
साथियों, दोस्तों, भाइयों, बहनों, आपने अजु बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम पढ़ के अमल को शुरू करना है और पहला वजीफा इस अल में आपने सबसे पहले सर कौसर को शामिल करना है और आपने इस अमल में सबसे पहले सात मर्तबा, सेवन टाइम, अजु बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम पढ़ के सात बार आपने सर कौसर को पढ़ लेना है। सेवन टाइम, सात बार पढ़िए। जब सात मर्तबा सेवन टाइम सूर कौसर पढ़ ले तो उसी वक्त आपने इस अमल में सेकंड नंबर पर एक और वजीफा शामिल कर देना है। जब सात मर्तबा सूर कौसर पढ़ ले तो फरी ौर पर आपने इस अमल में सेकंड नंबर पर जो कमाल का वजीफा शामिल करना है, बड़ा मुजब वजीफा है, आजम उदा वजीफा है, दौलत का बादशाह वजी अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम पढ़ के अमल शुरू किया, सात मर्तबा सूर कौसर पढ़ ली तो अब आपने एक इसम, एक वजीफा इस अमल में शामिल करना है और यह पूरा का पूरा अमल एक ही वक्त में, एक ही जगह पर बैठकर पढ़ना है। यानी कि जब एक बार इस अमल को पढ़ने बैठ गए ना, किसी भी दिन, किसी भी वक्त, किसी भी जगह पर एक बार बैठ गए तो जब तक अमल कंप्लीट ना हो, आपने खड़े नहीं होना। एक ही वक्त में, एक ही जगह पर बैठकर अमल पढ़ना। आखिर में अपने तमाम मकास के लिए, तमाम परेशानियों के लिए अल्लाह पाक से दुआ मांग लेनी।
अब साथियों, भाइयों, बहनों, सात बार सूर कौसर पढ़ ली तो अब सात बार सूर कौसर जो पढ़ी आपने पहली बार तो इसके बाद आपको जो वजीफा पढ़ना है, सर कौसर सात बार पढ़ने के फौरन बाद साथियों, भाइयों, बहनों, यह वजीफा है या रहमान, या रहमान, या रहमान, या रहमान। आपने या रहमान का वजीफा इस अमल में शामिल कर देना है। सात बार आपने या रहमान का वजीफा पढ़ना है। सात मर्तबा। जब या रहमान का वजीफा पढ़े तो इसके बाद फौरन आपने अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम पढ़ के सात बार सूर कौसर सेकंड टाइम पढ़ लेनी है। दोबारा से। इस तरह आपकी टोटल 14 मर्तबा सूर कौसर हो जाएगी।
जब सेकंड टाइम सात मर्तबा सूर कौसर पढ़ ले तो अब आपने जो वजीफा इस अमल में शामिल करना है, इस पूरे अमल को बतला में, समझाने में थोड़ा वक्त जरूर लग रहा है, लेकिन जब पढ़ने बैठेंगे तो मुश्किल से आपका एक से डेढ़ दो मिनट लग जाएगा। आपने सेकंड टाइम सात मर्तबा जब अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम पढ़ के सूर कौसर पढ़ ली तो अब आपने एक जो वजीफा शामिल करना इस अमल में, कमाल का वजीफा है, पावरफुल वजीफा है, दौलत का बादशाह वजीफा है, दौलत से घर को भर देने वाला आज बूदा वजीफा है। साथियों, भाइयों, बहनों, यह वजीफा है या गनी यू, या गनी यू, या गनी यू, या गनी य, या गनी [संगीत] या गनी य, या गनी य, या गनि। आपने अपने अंदाज में पढ़ना है। या गनियो का यह वजीफा इस समल में सिर्फ और सिर्फ इस वजीफे को या गनियो का यह वजीफा अने सात बार, सेवन टाइम पढ़ के आखिर में क्या करना है? अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम पढ़ना है और एक मर्तबा आपने पहले सूर कौसर पढ़ना है, फिर दूसरी बार, फिर तीसरी बार और इस तरह सात मर्तबा आपने सूर कौसर को इस अमल में शामिल करके इस तरह आपकी टोटल 21 मर्तबा सूर कौसर इस अमल में आप लोग पढ़ लेंगे।
अमल के आखिर में आपने क्या करना है, यह भी समझ ले और यह एक इजाजत शुदा अमल है। अमल की इजाजत चाहते हैं तो अपना प्यारा सा नाम कमेंट्स में लिख दे ताकि फरी तौर पर आपको इजाजत मिल जाए। आखिर में सात मर्तबा सूर कौसर पढ़ ले तो एक मर्तबा दरूद शरीफ लाजमी पढ़िए। कोई सा भी अमल के शुरू में दरूद पाक नहीं पढ़ना, आखिर में पढ़ना है। कोई सा भी दरूद पाक पढ़ के अल्लाह पाक से खूब सारी दुआएं मांगते मांगते अमल को कंप्लीट कीजिएगा। अपना ख्याल रखिएगा। अल्लाह हाफिज।