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दरोगा की नौकरी की सचाई पार्ट -2

Sub Insp. AKSHAY TYAGI12:55

Transcription

हेलो दोस्तों, क्या हाल है? आई होप यू आर डूइंग वेल। मेरे हिसाब से तैयारी आप लोगों की जो है बढ़िया चल रही होगी।

तो मैंने पिछली एक वीडियो बनाई थी उस पे बहुत ज्यादा कमेंटबाजी हो रही है नीचे कि ये क्या कह दिया, डीमोटिवेट हो गए हम, यू हो गए। भाई, मैंने जो है सच्चाई थी वो तुम्हें लोगों को बता दी। तुम्हारी समझ में आ रही है, समझो। नहीं आ रही है, मत समझो। इस बात से मुझे कोई लेना देना नहीं। तो पिछली वीडियो में मैंने जो है इस नौकरी की में जो कमियां थी वो आप लोगों को बता दी। अब इसमें जो खूबियां है वो मैं आप लोगों को बता दे रहा हूं। उसी हिसाब से तुम देख लेना कि तुम इस नौकरी में फिट बैठ रहे हो या नहीं बैठ रहे हो। फिर इसके बाद जो है मैं स्ट्रेटजी वीडियो बना दूंगा। कैसे मैंने एग्जाम क्रैक करा, ऑल इंडिया 500-600 के बीच में मेरी इसमें रैंक थी। ऑल यूपी कह लो या ऑल इंडिया कह लो और 335 मेरे नंबर थे। कट-पीट के 329 पॉइंट कुछ आए थे। नॉर्मलाइज हो गए। छह नंबर मेरे घट गए थे इसमें से।

तो ये वीडियो थोड़ी सी बड़ी हो सकती है। वैसे मैं कोशिश करूंगा कि बहुत जल्दी-जल्दी बोल के और इसे खत्म करने की। इसके जो-जो फायदे हैं मैं आप लोगों को बता देता हूं कि इसमें आप लोगों को क्या-क्या बेनिफिट इस नौकरी में मिलेंगे। सबसे पहले तो 4200 ग्रेड पे की नौकरी है। 4200 ग्रेड पे में अगर सीपीओ के बाद में बात करूं तो सबसे आसान नौकरी यही लेनी है कि 4200 ग्रेड में तुम इससे आसानी से नौकरी बस सीपीओ एसआई ले सकते हो, क्योंकि मैंने सीपीओ भी क्रैक करा है और यूपीएसआई भी क्रैक करा है। तो मुझे पता है कि सीपीओ एसआई लेना इससे थोड़ा सा यूपीएसआई से लेना आसान है। वैकेंसी इस बार थोड़ी कम है। पिछली बार ज्यादा थी तो इस बार थोड़ा सा जो है मुश्किल पड़ेगा। तो 4200 ग्रेड पे की सबसे आसान नौकरी है। सबसे आसानी से आप इसे ले सकते हो। 4200 ग्रेड में डिसेंट सैलरी दे रही है। लगभग 65,000 हमारा वेतन आ रहा है। तो ठीक-ठाक कमाई है। ठीक-ठाक तनख्वाह मिल रही है। तो एक तो फायदा हो गया। इसका ये जो बेसिक हर आदमी जिसकी वजह से यहां जो है आना चाह, यहां क्या हर नौकरी जो भी करना चाह रहा है वो आदमी सब सैलरी की वजह से ही करना चाह रही है कि हम जो है जाके ठीक-ठाक पैसा कमाए। बहुत होते हैं, बहुत बढ़िया खर्चा चल जाता है, सब चीजें ठीक रहती हैं। बेरोजगारी खत्म हो जाएगी तो अपने आप ही सब चीजें ठीक हो जाती हैं।

अब आते हैं इसके बिल्कुल जो बेनिफिट जो सिर्फ तुम्हें मिलेंगे। कॉन्फिडेंस तुम्हारा एकदम बूस्ट हो जाएगा। बहुत ज्यादा हाई कॉन्फिडेंस तुम्हारा रहेगा हर जगह। जहां भी जाओगे बहुत कॉन्फिडेंस से बात करोगे। बात करने की अकल आ जाएगी। किस आदमी से किस तरीके से बात करनी है। तो कॉन्फिडेंस पूरा हाई रहेगा। हर जगह तुम्हारा स्टाफ चलेगा। तुम्हें कहीं लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। हर जगह जाओगे जहां वहीं जाके कह दिया करोगे भाई स्टाफ से हैं। तो वहां भी मैक्सिमम क्या होता है कि पुलिस वाले खड़े होते हैं। वो तुम्हें जो है एडजस्ट कर लेंगे। मंदिर में जा रहे हो, वहां तुम्हारा स्टाफ चल जाएगा। टोल पे तुम्हारा स्टाफ चल जाएगा। हॉस्पिटल में जा रहे हो, वहां तुम्हारा स्टाफ चल जाएगा। हर जगह कहीं भी जा रहे हो तुम्हारे जान पहचान के लोग मिल ही जाएंगे। तुम्हारे बैच के सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर वहां जाके तुम रिक्वेस्ट करके अपने उनसे करके अपने थोड़े बहुत जो है तुम्हारे छोटे-मोटे जो काम है वो तुम निकलवा लोगे। जैसे कहीं हॉस्पिटल है, वहां इलाज करवाना है, डिस्काउंट करवाना है। है ना? तो ये चीजें जो है हो जाती हैं।

नॉलेज बढ़ेगी तुम्हारी। नॉलेज बढ़ेगी। कानूनी रूप से भी वैसे भी कि कोई काम किस तरीके से होता है। तो उस नॉलेज के बेस पे तुम अपने रिश्तेदारों की, अपने यारों दोस्तों की, जो भी तुम्हारे भाई बंधु हैं उन लोगों की मदद कर पाओगे। फिर जो सबसे ज्यादा बेनिफिट है इस नौकरी का वो है कि सोशल रिस्पेक्ट। सोशल रिस्पेक्ट बहुत है भाई। ये लोग कह रहे हैं कि पुलिस वालों को लोग गाली दे रहे हैं। तो भाई, लोगों का तो काम है प्रधानमंत्री को भी गाली दे, मुख्यमंत्री को भी गाली दे, पीठ पीछे कोई भी गाली देवे। मुंह पे गाली देना तो पता चले। तो भाई, सोशल रिस्पेक्ट इसमें बहुत है। बहुत ज्यादा इज्जत मिलेगी तुम्हें। गांव समाज में तुम जैसे गांव में एकदम भगवान बन जाओगे एक तरीके से कि अरे हमारे गांव का तो रोग लग गया। बिना वजह जो लोग तुमसे बात करना भी पसंद नहीं कर रहे थे, वे तुम्हें फोन कर-कर के तुम्हारा हालचाल पूछे करेंगे। तो सोशल रिस्पेक्ट तुम्हें इसमें भर-भर के मिलेगी। यहां भी जहां तुम्हारी पोस्टिंग रहेगी और गांव में रिशेदारी में हर जगह तुम्हारी पूछ रहेगी कि भाई दरोगा है, दरोगा है, दरोगा है। बहुत बढ़िया तुम्हारी जो है इसमें जो है इज्जत बनेगी।

दूसरा तुम एक तरीके से कंट्री को सर्व करोगे, लोगों को सर्व करोगे। यहां पे तुम्हारे पास पीड़ित आएंगे। है ना? तुम्हारे अंदर अगर तुम में कॉन्फिडेंस है और तुम जो है ईमानदारी से थोड़ी भी ईमानदारी से काम कर रहे हो तो तुम्हें पता लग जाता है कि कौन सही है, कौन गलत है। तो त्वरित न्याय, तुरंत ऑन द स्पॉट तुम कई बारी ऐसा होता है कि ऑन द स्पॉट न्याय कर देते हैं आदमी। ठीक है? जिसमें कोई 10 महीने से दो साल से इल्जाम पड़े हैं, लोग बाग। तुम्हारे पास वादी आया प्रार्थना पत्र लेकर, तुमने प्रतिवादियों को बुलाया। वहीं बैठकर तुरंत न्याय हो जाता है। कई बार तो इतनी ब्लेसिंग्स मिलती है, इतनी ब्लेसिंग्स मिलती है कि तुम कहोगे भाई वाह, क्या काम कर दिया। और पूरे दिन में तुम्हें मान लो अगर 100 लोगों से तुम पूरे दिन में मिल रहे हो, 100 में से 99, 98 आदमी तुमसे ऐसे मिलेंगे। ये तुम्हें साहब ही साहब करते रहेंगे। ठीक है? तो इस चीज का भी तुम्हें पूरा तगड़ा तुम्हें तुम्हारे कॉन्फिडेंस बूस्ट होएगा। इससे तुम्हें लगेगा कि हां, मैं नौकरी कर रहा हूं।

और भाई, एक तुम बोर नहीं होने की इसमें। रोज नया काम मिलेगा डेली। कभी किसी तरीके के अपराधी को पकड़ना है, कभी किसी तरीके का काम करना है, कभी लॉ एंड ऑर्डर की ड्यूटी है, कभी वीआईपी ड्यूटी है। है ना? कभी दबिश में दिल्ली जा रहे हो, कभी पहाड़ों में जा रहे हो। तो घूमना भी हो जाता है इसमें। इसी बहाने अलग से तो टाइम मिलता नहीं कि अलग से पर इस बहाने घूमना-फिरना भी हो जाता है। अगर तुम चौकी इंचार्ज नहीं हो। अगर तुम चौकी इंचार्ज नहीं हो तो तुम्हें छुट्टी में भी कोई खास समस्या आएंगी नहीं। तुम्हें छुट्टी मिलेंगी और तुम्हारा कोई भी इमरजेंसी का काम होगा वो तुम्हारा हो जाएगा। अधिकारी भी सब समझते हैं कि भाई इसे जरूरत है छुट्टी की या नहीं है। बेफालतू की कि भाई मुझे यह है, वो है तो ऐसे तो मिलती नहीं पर अगर तुम्हारे काम होंगे तुम्हें छुट्टी मिल जाएगी। यूं कहेंगे कि छुट्टी नहीं मिलती। भाई साहब, मुझे मैं आज भी छुट्टी पे ही हूं। 7 दिन की छुट्टी मुझे मिल गई थी। काम अगर तुम्हें पड़ेगा तो अधिकारी समझते हैं। बिना वजह छुट्टी लोगे तो तुम यहां काम में पिछड़ोगे, काम भी नहीं सीख पाओगे और दिक्कत रहेंगी तो अधिकारी समझते हैं। जब तुम्हें जरूरत होगी छुट्टी तुम्हें मिलेगी। शादी हो रही है मेरे साथ वो लोग जिन लोगों की शादी हुई है, 40-40, 50 दिन की भी छुट्टी है तो छुट्टी भी तुम लोगों को जो है मिल जाती है।

और भाई, क्या कह रहे हैं अगर चौकी इंचार्ज हो तो यार तुम कैसे चले जाओगे अपनी छेत्रा क्षेत्र छोड़ के जब वहां के क्षेत्र की तुम्हारी जिम्मेदारी है, वहां के कर्ता-धर्ता तुम ही हो तो तुम उस क्षेत्र को कैसे छोड़ के चले जाओगे। तुम खुद ही नहीं जाने के और जाओगे तो दो दिन, तीन दिन की छुट्टी मिलेगी वो भी जो है कप्तान साहब करेंगे। तो भाई, ऐसे तो जिम्मेदारी से बच के तो भागा नहीं जाएगा। अब मुझे तुम लोग एक बात बताओ कि भाई, ठीक है, ये लो और लोग भी बुराई कर रहे हैं। मैंने भी पिछली वीडियो में बुराई करी थी तो मुझे ये बताओ कि कौन सी ऐसी नौकरी है 4200 ग्रेड पे जो तुम्हें एक छोटे से क्षेत्र में तुम्हें बता कह रही है कि भाई यहां के कर्ता-धर्ता तुम ही हो। यहां जो कुछ करोगे तुम ही करोगे। तुम्हारे अंडर में दो चार सिपाही भी रहेंगे। एक दो हेड कांस्टेबल भी रहेगा। तुम्हारे साथ भी चलेंगे। तुम कहीं दबिश में जा रहे हो, चार लोग तुम्हारे हमरा तुम्हारे साथ गन लेके जा रहे हैं। है ना? तुम्हें फील होएगा कि भाई हां, हम भी कुछ हैं।

तो कुल मिला के मैंने तुम्हें इसके प्रोज़ भी बता दिए। कोन्स भी बता दिए कि भाई समस्या है, वर्क लोड है, काम करना पड़ेगा। अगर तुम काम करने के लिए तैयार हो तो भाई, बढ़िया तुम्हारा मन लगेगा। कोई ऐसी बात नहीं है। थोड़े दिन में ही तुम्हें आदत पड़ जाएगी। अब मेरे से यूं कह रहे कमेंट्स में कि भाई यूपी पुलिस के कांस्टेबल बढ़िया या यूपी पुलिस का दरोगा बढ़िया? दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल बढ़िया या दिल्ली पुलिस का दरोगा? यो यूपी पुलिस का दरोगा? पटवारी बढ़िया या दरोगा बढ़िया? अबे भाई, इनसे कंपैरिजन है कुछ? तुम ही बताओ इनसे कंपैरिजन, इनसे कोई कंपैरिजन नहीं है। है ना? सब-इंस्पेक्टर सब-इंस्पेक्टर होता है। दरोगा दरोगा होता है। सिपाही सिपाही होता है। वो कहीं भी हो, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। ठीक है? हम दिल्ली पुलिस से बढ़िया नौकरी छोड़ के आ रहे। दिल्ली पुलिस कांस्टेबल ते बढ़िया नौकरी छोड़ के आ रहे। हम बराबर वेतन की, शनिवार, इतवार की छुट्टी और छह घंटे की थी ड्यूटी। ठीक है? तो इन चीजों ते कुछ फर्क नहीं पड़ता।

और भाई, काम तो करना पड़ेगा हर जगह। पर फिर लास्ट में आगे भी कहूंगा वर्क लोड है। छुट्टी की भी ममारी है। काम भी करना पड़ेगा। सब चीजें ठीक है। पर फिर भी ओवरऑल मिला के सब कुछ यहां सही है। कोई ऐसी गदल नहीं मच रहा कि भाई मर गए, मार गए, ये हो गया, वो हो गया। ऐसा कुछ नहीं है।

फिर आ जाती है साइड पोस्टिंग की बात। अगर तुम थाने में नहीं हो। थाने में नहीं है तो भाई काम भी नहीं है। बहुत कम काम है। 10:00 बजे जाना है। 6:00 बजे वापस। संडे तुम्हें ऑफ मिलेगा। ये साइड पोस्टिंग की बात हो गई। इसके अलावा भी थाने के अलावा भी 25 से 30 डिपार्टमेंट है। वो 25 से 30 सब-यूनिट्स हैं। जिनमें तुम जाके अपना काम-धाम कर सकते हो। ट्रैफिक है, एलआईयू है और तुम्हारा एटीएस है, एसएसएफ है, सर्विलांस है, साइबर है। बहुत डिपार्टमेंट है। तो जैसा तुम्हें ठीक लगे उस हिसाब से कर लो।

और भाई, कोई हंसी-खेल तो है नहीं कि तुम कह रहे हो कि मैं तो यह करना सोच रहा था, मैं तो वो करना सोचा था कि तुमने सोचा और तुम दरोगा में भर दोगे। 4500 वैकेंसी है। 4500 में से 45 दूनी 90, 900 वैकेंसी तो लड़कियों की। 3600 वैकेंसी बची। 3600 वैकेंसी है। 16 लाख फॉर्म है भाई। इतना आसान काम ना है। आना मैं तो जब मानू जब यहां आ जाओ और ज्वाइन ना करो। ठीक है? न तो बकवास कोई कर देगा भाई। मैंने कर दिया। पहले परीक्षा पास कर लो। कंपैरिजन फिर कर लियो।

और भाई, काम तो हर जगह करना पड़ेगा। कहीं सरकारी विभाग में कुछ नहीं रह रहा। ऐसा कहां कहीं काम नहीं करना पड़ा। काम तो हर जगह करना पड़ा। रेलवे और बैंक हमारे तो ज्यादा काम कर रहे हैं। ठीक है? और अगर तुम चाह रहे हो कि भाई काम ना करना पड़े तो स्कूल में पन से बढ़िया कोई नौकरी नहीं। स्कूल में एक नौकरी है पन की उससे बढ़िया कोई नौकरी नहीं। बस घंटी घंटी बजानी और पानी पियाना कुछ नहीं करना। भाई दरोगा तो दरोगा ही हो। बहुत काम करना पड़े। ठीक है। उस काम ते तुम्हारी पहचान हो या काम ते पहचान है। चाम ते पहचान नहीं है। काम करोगे जिले में नाम होवेगा। जिले में नाम होगा। कप्तान साहब तुम्हें जो है नाम से जाने। बढ़िया चौकी मिलेगी। बढ़िया तुम्हारी रिस्पेक्ट रहेगी। काम के आदमी की हर जगह इज्जत है। हमारे थाने पे ही एक दरोगा जी हैं। मैं उनका नाम नहीं लेने का। भाई साहब, जब भी कभी कुछ कप्तान साहब ओआर लेते हैं और वो लेते हैं तो उन्हें पता है कि लड़का बहुत मेहनती है। बहुत काम करता है। तो कभी आज तक दो मिनट से ज्यादा उनका ओआर नहीं चला। अच्छा, ये भाई बहुत बढ़िया लड़का है। बहुत काम करता है। ऐसा बात होती है। और जो नकारे हैं भाई, उन्हें सुनने को मिले क्योंकि हर आदमी की जिम्मेदारी सेट है यहां। कोई बच नहीं सकता। जिम्मेदारी है। तुम बहुत बड़े जिम्मेदारी के पद पा रहे हो। बहुत बड़े जिम्मेदारी के पद पा रहे हो तुम। बहुत मजबूत पद है ये। यूं कहने से वो है सुखी धसक है। और यह है भाई। सुखी ना है धसक। सुखी धसकना है। बढ़िया नौकरी है। या जो जो अपराधी है ना जो फंस जाए यहां साहब ही साहब रखे है फिर वो। ठीक है? बिना वजह तो तुम किसी को सता नहीं सकते पर जो यहां फंस जाए ना बस वो साहब ही साहब रखा है, साहब बचा लो, साहब बचा लो, साहब बचा लो। पर तुम्हें अपना विवेक से काम करना रहे। दिमाग, कान, नाक, आंख खुले रखोगे तो सब चीजें ठीक रहेंग। भगवान का नाम लेके बढ़िया तैयारी करो, बढ़िया मेहनत करो और विभाग में कुछ ना कुछ बढ़िया सीखने को मिलेगा। नहीं होवेगी थाने की नौकरी साइड में कर लीजिए। ठीक है? दरोगा बढ़ गए हैं। जब हमारा बैच आया 9534 का उसके बाद भी मृतक आश्रित वगैरह का जो है एक दो बैच और आ गया। तो कुल मिला के हर थाने पे दरोगा की मौज हो रही बहुत ज्यादा है। कुछ ही थाने हैं जिनमें बहुत ज्यादा वर्क लोड रह गया। नहीं तो इतना ज्यादा वर्क लोड नहीं है। पर हां है भाई, 8-10 घंटे तो रोज काम करना पड़ेगा। वैसे लॉ एंड ऑर्डर की भी तो ड्यूटी है यार। सब थोड़ी है कि इन्वेस्टिगेशन ही इन्वेस्टिगेशन। तो बेस्ट ऑफ लक।

अगली वीडियो में जो है मैं स्ट्रेटजी बता दूंगा किस सब्जेक्ट की किस तरीके से तैयारी करनी है। अगर मेरी मानो की तो हिसाब से तैयारी कर लियो तुम्हारे सिलेक्शन के चांस जो है बढ़ जाएंगे। ठीक है भाई?