📱

Get Our Mobile App

Take your business learning on the go!

Download on the App StoreGet it on Google Play

HUZOOR ﷺ Ke Chacha Hazrat Abbas Ka Dilchasp Waqia | Peer Ajmal Raza Qadri Bayan | Owais Production

Owais Production10:28

Transcription

हजरते अब्बास नबी पाक अलैहिस्सलाम के चाचा हैं। वह कहते हैं, "मैं अपने बच्चों को घर के अंदर बिठा के ना तो नबी पाक की बातें सुना रहा था।" कौन खातिब साहब के अब्बा जी हजरत अब्बास कहते हैं, "मैं अपने बच्चों को घर में बिठा के तो रसूल पाक की बातें, मैं हुजूर के बचपन की, हुजूर के खिलाफ किरदार की, नबी पाक के उठने की, बैठने की, मैं बच्चों को बातें सुना रहा हूं। मैं सुना रहा था बातें। फॉर्मेट मुझे क्या खबर थी के दरवाजे पे खड़े होकर मेरे नबी पाक भी मेरी बातें सुन रहे हैं।"

हुजूर गुजर रहे थे गली से तो महबूब ने देखा कि वो बातें कर रहे हैं नबी पाक की बच्चों को बिठा के। मलिक [संगीत] जो चाहती है बच्चों से कर ले। अम्मा जो चलती है बच्चों से। एक जुमला मैंने बाद में कहना था, पहले कह देता हूं। अम्मा अगर चाहे तो बच्चे आप के फार्मा बरदार होते हैं। और अगर अम्मा चाहे तो बच्चे आप के सही कह रहा हूं। तो अगर अम्मा के कहने पर बच्चे अब्बा जी से झगड़ा कर लेते हैं, यहां अब्बा जी के कम छुम लेते हैं, तो अम्मा के कहने पर बच्चे दुरूद ओ सलाम नहीं पढ़ेंगे। वह सेबा किया है मेबूब अली सलाम की शान में कमी करने वाले बेहतर से बचेंगे नहीं। क्यों नहीं? ये चीज हम सीखते हैं।

हजरते अब्बास राजी अल्लाह ताला लोग कहते हैं, "बच्चों को घर में बिठा के नबी पाक की अजमतें सुना रहा था। हुजूर गली से गुजर रहे थे, तो आबू भी खड़े हो गए। हुजूर सुनने लगे। कब तक? कब से हुजूर सुन रहे थे? जब बातें मुकम्मल हो गई ना, जब उस दिन का वो सबक, उस दिन की वो महफिल तकनीक को पहुंची, तो महबूब ने दस्तक दी।" कहते हैं, "हुजूर ने दस्तक दी। मैंने दरवाजा खोला तो हैरानी रह गया। अल्लाह की सारी रहमत मेरे दरवाजे पर खड़ी थी।" [संगीत] श्री फ्लाइट बैठ गए तो महबूब ने सुन भी लिया, फिर भी पूछा, "चाचा क्या कर रहे थे?" पूछ लिया, लेकिन तस्दीक के लिए पूछा, "क्या कर रहे थे?" अर्ज किया, "रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वल्लम, ये अब्दुल्ला, ये बाकी बच्चे कह रहे थे मुस्तफा की कोई बात सुनाएं, तो महबूबा आपके तारे कर रहा था।"

हजरते अब्बास कहते हैं, "पहले पूछा, फिर तस्दीक फरमाई। कहने लगे, 'जो आप कह रहे हैं, सच कह रहे हैं। मैं भी दरवाजे पे खड़ा होकर सुन रहा था। मैं सुन रहा था दरवाजे पे खड़े हो के।' सही कह रहे। अब हुजूर ने रिजल्ट का ऐलान किया। तेरा बच्चा कैसे उनके पास चला गया? जो हुजूर खेल में गायब का इनकार करते हैं, वहां जाकर कैसे बैठ गया? जो कहते हैं कि माशाल्लाह ताला हुजूर को तो अपना नहीं पता, आखिरी वक्त कैसा हो, कहां का कैसे चला गया तेरा बच्चा उनके पास? जो साहब इकराम के बारे में कमजोर जुमला बोलो, बेहतरीन नबूवत के बारे में कमजोर कैसे चला गया? अगर तूने घर में बैठ के महफिल की होती, उन्हें खुद सिखाया होता, कैसे भी कर सकते थे बच्चे ना इधर-उधर की तो बात कर, ये बता के काफिला क्यों लूटा? मुझे रहजनों से गरज नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है। तू पानी किसको देता रहा? अगर तेरा अपना भाग्य खुश रह गया।"

महबूब पाक अली सलाम से फरमाने लगे, नबी पाक अली सलाम जनाबे पाक से कहा, "मैंने सुन लिया है और मैं इतना खुश हुआ हूं, इतना खुश हुआ हूं। सुनो, अब तुम्हें मिलेगा क्या?" हुजूर, "क्या मिलेगा?" कहते हैं, "मेरे सारे खानदान की तवज्जो हुजूर की जैब हो गई।" तो महबूब ने फरमाया, "हरलत लाकुम शफात।" फरमाया, "तुमने ये काम करके ना, अपने बच्चों को मेरी अजमत सिखा के, अपने बच्चों को मेरे गीत सुना के, फरमाया तुमने अपने और अपने खानदान के हक में मेरी सिफारिश को हल कर लिया है। फरमाया, 'आप सुबह कयामत, मैं तुम सब की सिफारिश करके तुम्हें जन्नत में साथ ले के जाऊंगा।'" [संगीत]

बच्चों को रात को बिताया करो। [संगीत] क्योंकि हमने बताया होता है कि यह मौलवी साहब है, इनको हम 10000 महान तंखा देते हैं, तो बच्चा भी समझना है कि क्योंकि ये 10000 लेट है, तो एक घंटा इस नदी में वाले दिन बात करनी करनी है। क्या उसका वो सर लगा? क्या असर लगा? जब हमने तारों फिश तरह कराया है, ये नाथ का हमने बुलाया हुआ है, किस लिए? ये 15000 लगा, तो बच्चा कहते हैं, "इसकी तो ड्यूटी है 15000 पूरा करना है।" इसमें ये खातिब साहब आए हैं, क्या करने आए? कहते हैं, "25000 एडवांस लिया।" तो बच्चा उसका क्या असर लगा? वो रहेगा, "इसका तो काम है।" गुलाबी बड़े अच्छे शेर पढ़ रहा है, तो बच्चा कहता है, "पढ़ने नहीं, उसके ऊपर पैसे नहीं फेंके जा रहे हैं।" साथ-साथ मेरे भाई, बच्चे को अपनी गोद में बिठा और जहां आप उसको यह सिखाते हैं ना कि बेटे पढ़ जाओगे तो बहुत ऊंचे बढ़ोगे, जहां उसे यह सिखाते हो ना, "ये महाराज घर बड़ा करीबी है और ये हमारा दुश्मन है," तो बच्चा 5 साल का भी उसे घर में नहीं घुसता। अपनी जात के बारे में बच्चे को सर कुछ सीखने हो, पहले कम उसे यह करो कि उसे मेरे नबी की मोहब्बत सिखाओ, उसे रसूलुल्लाह का प्यार सिखाओ। उसे रात को जब यहां लिटाते हो ना, यहां कंधे पे, उसे कहते हो, "मैंने तेरे लिए बड़ी मेहनत की, मैं बड़ी कोशिश करता रहा, मैं तेरे लिए बड़ी दूर तक सफर करके आया।" उसे कहा करो, "बेटे, मैंने कुछ भी नहीं किया तेरे लिए, जो कुछ भी किया है तेरे रसूल ने किया है।" बच्चों को नबी पाक ने सिखाएं, उनकी गुड्डी में डालें। ये बात कैसे बिगड़ गया बच्चा? कैसे गैर? [संगीत]

ऑन अपनी गए। वो पहले ना इस तरह होता था कि कोई किसी बुजुर्ग से मिलता था तो कहता था, "जब दुआ करना।" इधर देख लिया जाता था। [संगीत] [संगीत] तो कर पसीने लगी हुई थी कमरे में। मैंने कहा कि ये भाई उतार दो। मैंने नमाज पढ़ने का तो पीर साहब की ये फोटो ले के जब भूकंप आ गया कि जहां तस्वीर वहां जहाज नहीं, तो मुरीद साहब की हो या पीर साहब की हो, बात तो एक ही है। पीर साहब को नहीं पता, फोटो नहीं लगवानी चाहिए। वैसे भी फोटो दीवारों पे नहीं प्रो की रखती चाहिए। पीरों की तस्वीर दिल में रखती चाहिए और हमने तेल में सजा रखी है तस्वीर। यार बस जरा गार्डन झुका ही देख ली। इतना शौक, इतना शौक। मुझे कुछ शख्स पूछता है ना कभी, "फ्लेक्स पर फोटो छोड़ो यार, पहले फ्लेक्स पर लगती है, फिर माशाल्लाह जमीन पे गिर गया।" [संगीत]

बाकी कोई कितना दिन का काम कर रहा है, ये सुबह कयामत खुद बी खुद पता चल जाएगा। बस दुआ फरमाए, अल्लाह यहां भी इज्जत दें और वहां भी अल्लाह पर्दे दरी आता फरमाए। मेरी बात पर जरूर गौर करें और याद रखें, अपने बच्चों को बिठा। [संगीत] सिद्दीका से किसी ने पूछा, "मेरी बात पर तवज्जो करनी।" हजरत या शाह सिद्दीका राजी अल्लाह ताला अंह से किसी ने पूछा कि अम्मा जी, क्या वजह हुई कि आप मुसलमान हो गई? क्या सबक बना आपके कलम पढ़ने का? हर आदमी के साथ कोई ना कोई बात हुई, किसी ने कराने पाक सुना, किसी ने कुछ सुना, कोई ना कोई वाक्य है, पास मंजर है। तो अम्मा जी, आप कैसे मुसलमान हुई? जब या ऐसे सीधी का खाने लगी, "मुझे कोई जरूरत ही नहीं पड़ी किसी वाक्य की, इसलिए कि मेरे अब्बा जी जनाबे आबू बाकर सिद्दीक जितनी देर घर बैठे रहते थे, मोहम्मद अरबी की नाइट ही पढ़ते रहते थे। वो रसूलुल्लाह अलैहिस्सलाम की तारीफ ही करते रहते थे।" मुझे जरूरत पेस तो किस तरह तेरे बच्चे को जरूरत पेश आई है कि वो कहानी से जाकर सीखे? तू किधर है? तीन बटन की ड्यूटी अब्बा जी और अम्मा जी की है। नबी पाक ने लगे हैं, तीन काम करो। अपनी औलाद को तीन चीजें सिखाओ। हुजूर कौन सी? फरमाए, "अपने नबी की मोहब्बत सिखाओ।" [संगीत] बेड की मोहब्बत सिखाओ। और तीसरा मां-आप की ड्यूटी है, तुम्हारी जिम्मेदारी है। घर कब बनेगा? [संगीत] ठीक है। ये जब स्कूल जाएगा तो बोलेगा, "हम दिकियां लूज नहीं है, हम कायल हैं यदि तालीम के, लेकिन थैंक यू का सवाब कोई नहीं। सवाब जक अल्लाह हूं खैर का है, इस काजर है। जजाक अल्लाह हूं इस काजर है।" ये ऋषि बुखारी में मौजूद है। नबी पाक अलैहिस सलाम ने फरमाया, "जिसने अपने मोहसिन को जाकर लो खैर कहा, उसने उसका पूरा शुक्रिया अदा कर दिया।" तो ये जुमले तूने क्यों नहीं सिखाए? ये तेरे बच्चे की जुबान पे क्यों नहीं आया? इन फिकारों को तूने क्यों अपने घर में राज नहीं किया? बच्चों को दिन सिखाएं, नबी पाक की गुलामी सिखाएं, उन्हें रसूल पाक ने सलाम की बारगाह में हाजिर होना शिखा है।