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Molana Tariq Jameel's Latest Bayan In Tolamba Eid gah | 21 September 2025

AJ Official1:15:29

Transcription

अय्यूब अल सलाम बीमारी के दिन याद आते हैं। सुनो गल कहने लगे, "वह आज के दिनों से बड़े अच्छे थे।" वह कैसे अच्छे थे? कहा, "जब बीमार था तो रोजाना अर्शों से एक दफा अल्लाह की आवाज आती थी, 'अय्यूब, क्या हाल है?'"

नाचने वालियां, हम ये तुम्हारे मोबाइलों में ये नौजवान नस्ल नंगे डांस देख रही है। सारी सारी रात मोबाइल पर गलाजत देखते रहते। ईमान वाले मर्द एक तरफ, औरतें एक तरफ। ईमान वाले सारे उम्मती अपने नबियों के साथ और सारी औरतें हजरत खदीजा, अजवाजे मुतहरात, सैयदा फातिमा के साथ। अल्लाह कहेगा, "या रिवान, उसका नाम हुजनी वना इबादी, वारी मेरे और मेरे बंदों के दरमियान पर्दा हटा दे।"

इस दफा मिलाद के मैंने वीडियो देखी है। औरतें, मर्द नाच रहे, नंगे सर लड़कियां नाच रही हैं। मर्द भगड़े डाल रहे हैं। ढोल बज रहे हैं। गाने गाए जा रहे हैं। इसको मिलाद नबी कहते हैं। यौमे पैदाइश तो गुरों की बिदत है। बर्थडे और नबी की बर्थडे मना रहे हो। शर्म करो। शर्म अपने नबी के सीने में खंजर जब खबोते हो, उसके दिल में खंजर उतारते हो। मोहब्बत इसको कहते हैं। मोहब्बत इतात का नाम है। मोहब्बत मानने का नाम है। लाखों रुपए के केक बनाते हैं। ओ, ये लाखों रुपए गरीबों को दो जो सैलाब में बह गए हैं। मैं अभी खमा बस्ती से होके आ रहा हूं। गौसपुर से, जहां हमारी फाउंडेशन ने अल्लाह के फजलल से वहां 130 खमे लगाए हैं। और उनको तीन वक्त हम खाना दे रही है हमारी फाउंडेशन। उनके जानवरों का चारा, उनके लिए टॉयलेट बना के दिए हैं। उनके जानवरों के लिए बड़ा नलका लगाया है। एक कैंप कायम किया है मेडिकल। कोई बीमार हो जाए तो उसके इलाज के लिए।

इमाम शाफी फरमाते हैं, "बड़े से बड़े आलिम से मैंने मुनाजरा किया। मैंने उसको हरा दिया। और जब जाहिल से मुनाजरा किया, उसने चाहते मारे।" तो ईसाइयों ने कहा, "ईसा अल्लाह का बेटा।" यहूदियों ने कहा, "हुजैर अल्लाह का बेटा।" मेरे नबी ने कहा, "कुल अल्लाहहु अहद।" इनसे कह दो, "वो अकेला है।" सूरज का रब अल्लाह, चांद का रब अल्लाह, सितारों का रब अल्लाह, हवाओं का रब अल्लाह, बादलों का रब अल्लाह, फरिश्तों का रब अल्लाह, सबसे ज्यादा याद के काबिल अल्लाह। हक मन उब, सबसे ज्यादा बंदगी के काबिल अल्लाह। अजद मन, सबसे बड़ा सखी अल्लाह। अल्हम्दुलिल्लाह कुद खरा वलद इलाहा इल्लल्लाहहु ला शरीद सद मौलाना मुद रसूल अम्माबाद बिल्ला शैतजीम बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।

[हंसी] कस व नबी सल्लल्लाहु तबारक ताला अलैह वसल्लम ल त आयशा रज़्लाहु अन्हा या रसूल अल्लाह अनिक वन सालून इदा कफल खबस व नबी सल्लल्लाहु तबारक ताला अलैह वसल्लम तर लहा ला यज़ इलिक कमाला सल्लल्लाहु ताला अलैह वसल्लम।

मेरे मोहतरम भाइयों और दोस्तों, रबी अव्वल का महीना चल रहा है, जिसमें अल्लाह ने अपने महबूब को दुनिया में वजूद अता फरमाया। जब से दुनिया बनी है, उस दिन से कयामत तक सबसे खुशी का दिन वो था जब आप दुनिया में तशरीफ लाए। और जब से दुनिया बनी है और कयामत तक सबसे गम का दिन वह था जब आप दुनिया से तशरीफ ले गए। और यह हजारों कायनात तो अरबों साल पुरानी है। इंसानी जिंदगी 101 हजार साल की है। इसमें जो 63 साल मेरे नबी की जिंदगी के थे, वह इस कायनात की जान है। उससे आला ना पहले ना बाद में। अरबी के लिहाज से है 63 साल। अंग्रेजी के लिहाज से है 61 साल, एक महीना, 16 पे। यह 63 साल 63 साल हैं। मुहर्रम, सफर, रबी अव्वल, जनवरी, फरवरी के लिहाज से मैंने सारा हिसाब किया हुआ है। अल्लाह के फजल से 61 साल, एक महीना, 16।

इंसान अंधेरों में थे। जानते नहीं थे, कहां से आए हैं? किसने भेजा है? क्यों भेजा है? मौत क्या है? आगे क्या है? इस पर पर्दा पड़ा हुआ था। इस इल्म को लेकर मेरे नबी दुनिया में तशरीफ लाए और सबसे बड़ा जो उन्होंने एहसान इंसानियत पे फरमाया, वो इस कायनात के खालिक का पता बताया। तारुफ करवाया। उसकी हकीकत बताई। क्योंकि पहले मजहब वाले भटक गए। यहूदी पुराना मजहब था। उन्होंने कहा, "उजैबुल्लाह, उजैर अल्लाह का बेटा है।" तो अल्लाह को भूल गए, उसकी हकीकत। ईसाइयों ने 50 साल के बाद एक सेंट पाल था, यहूदी था। वो ईसाइयत का लिबा ओढ़ा। तो उसने ऐलान कर लिया कि मुझे ईसा सलाम का पैगाम आ गया कि ईसा अल्लाह का बेटा है। वतन नसारा अल मसीह्लाह। तो ईसाइयों ने कहा, "ईसा अल्लाह का बेटा।" यहूदियों ने कहा, "उज़ैर अल्लाह का बेटा है।" मेरे नबी ने कहा, "कुल अल्लाहहु अहद।" इनसे कह दो, "वो अकेला है।" वाहिद नहीं कहा, अहद। क्योंकि वाहिद गिनती में आता है, वाहिद, इसनैन। वाहिद एक, दो। और अहद यकता, अहद अकेला। अहद ना आगे ना पीछे, ना दाएं ना बाएं, ना ऊपर ना नीचे। वो अकेला अहद कब कब से है? कदीमुन बिला इब्तदा। इब्तदा से पाक है। तो कौन बताए कब से है? कब तक है? दायमुन बिला इंतहा। अबदी है। कैसे पता चले कहां इंतहा है? इब्तदा से पाक है, इतेहा से पाक है। अल अव्वल। अव्वल तो है, लेकिन बिला बिदाया। अव्वल तो शुरू होता है ना? एक वो हु अवल। पूरा सुनो सब।

ये मेरे नबी का एहसान, उन्होंने हमें बताया कि अल्लाह कौन है और अल्लाह क्या करता है और अल्लाह की कितनी ताकत है। सब्ला माफ समावा व अज़जुल हकीम। कुल कायनात अल्लाह की तस्बीह पढ़ती है। क्यों? वो इज्जत वाला। हनत सिबा। तैरने को कहते हैं। तैरने में माना पाया जाता है कि जब तक अगली मंजिल ना आए, तैरने से आदमी रुक नहीं सकता, सांस नहीं ले सकता, ठहर नहीं सकता। वड़ुप अंदर जाएगा। कितने गर्क हो गए इस तूफान में, उसे तैरना है आखिरी किनारे तक। जब तक कायनात है, ये तेरे रब की तस्बीह पढ़ती है, पढ़ती है, पढ़ती है। त लंबे वाले नाम ही पढ़ो तो कोई फर्क कोई नहीं पदा। और फिर क्या कहा? कुल कदम सलात तस्बीहु। सिर्फ तस्बीह नहीं पढ़ते, वो अपने रब की नमाज भी पढ़ते हैं। रब्बे जुल जलाल की कसम, जिस चटाई पर बैठे हो, इसका एक-एक धागा अल्लाह की नमाज पढ़ रहा है। एक-एक धागा अल्लाह की तस्बी कर रहा है। इस मस्जिद की एक-एक ईंट नहीं, ईंट का एक-एक एटम, जर्रा जर्रा, वो मेरे रब की नमाज़ पढ़ रहा है। तारीफ कर रहा है। हवा के झोंकों में चलने वाले हवा के जर्रात, वो एक-एक ज़र्रा अल्लाह की तस्बीह पढ़ता है। अल्लाह की नमाज़ पढ़ता है। बारिश से उदक का उतरने वाला एक-एक कतरा नहीं, एक-एक कतरे में जितने एटम जर्रात हैं, वो एक-एक जर्रा अल्लाह की नमाज पढ़ता है। अल्लाह की तस्बीह पढ़ता है। हर दरख्त का भर पत्ता नहीं, पत्ते के अंदर चलने वाली रगें, रगों में चलने वाला रस, उस रस का एक-एक ज़र्रा अल्लाह की नमाज पढ़ता है। अल्लाह की तस्बीह पढ़ता है। जो फल निकलता है, वो भी खामोश नहीं। वो अल्लाह की नमाज पढ़ता है। अल्लाह की तस्बीह पढ़ता है। हर मौज पानी की हजारों कतरात के साथ है। समंदर की मौजें हो, दरिया की रवानी हो और तूफान की तुगयानी हो और चश्मों की झरझराहट हो और बादल की गरज और चमक हो, आसमान की बुलंदियां हो, जमीन की पस्तियां हो, पहाड़ों की सख्तियां हो, रेत की नरमियां हो, पानी की उठान हो या पानी की निशान हो, बुखार बन के ऊपर जा रहा हो, बारिश बन के नीचे आ रहा हो। चार पांव पे चलने वाले, दो पांव पे चलने वाले, पेट के बल चलने वाले। मनम श अरबा, मनम शलान, मन यमशला बने। पेट के बल चलने वाले अरबहा, अरब। दो पांव पे चलने वाले अरब हा, अरब। चार पांव पे चलने वाले अरब हा, अरब। दो परों से उड़ने वाले अरब हा, अरब। समंदर की मछलियां अरब खरब खरब खरब। अल्लाह अल्लाह कहता है, "सारे ही मेरी नमाज पढ़ते हैं। सारे ही मेरी तस्बीह पढ़ते हैं।" श इल्लास हम, हर शय तेरे रब को याद करती है। वला तहु तस्बी। तुम्हें पता नहीं है। वो मुझे याद कर रहे हैं। तुम्हें पता नहीं है। हर शय सजदे में। अलम्लाह यदू मन समावत मन। ओ पागलों, देखो तो सही। आसमान या आसमान वाले, जमीन और जमीन वाले, सब अल्लाह के सामने सजदे में गिरे पड़े हैं। सब सजदे में गिरे पड़े हैं। कुल अला्लाहु अहद। अकेला, कोई शरीक है नहीं। अकेला अल मलिक। ला शरी। कोई शरीक नहीं। अल फर्द। ला निद। बेमिसाल। कोई उसकी मिसाल नहीं। कैसे मिसाल दें? कोई श हो तो मिसाल दें। बेमिसाल है। अल अली। ला सम। इतना बुलंद है कि कोई उसके बराबर नहीं। रब समावात व फस्त। इबादत ही हल तहु समिया। सुभान अल्लाह। पीछे अल्लाह एक दावा लाता है। जमीन का रब अल्लाह, आसमानों का रब अल्लाह, फलक का रब अल्लाह, आसमान, सूरज का रब अल्लाह, चांद का रब अल्लाह, सितारों का रब अल्लाह, हवाओं का रब अल्लाह, बादलों का रब अल्लाह, फरिश्तों का रब अल्लाह, जमीन का रब अल्लाह, अल्लाह, पानी का रब अल्लाह, हवा का रब अल्लाह, आग का रब अल्लाह, और और मिट्टी का रब अल्लाह, जिब्रील का रब अल्लाह, मेकाईल का रब अल्लाह, इसराफील का रब अल्लाह, इजराइल का रब अल्लाह, अर्श के फरिश्तों का रब अल्लाह, जन्नत का रब अल्लाह, जहन्नुम का रब अल्लाह, तेरा मेरा सबका रब अल्लाह। रेंगने वाले, गार में छुपने वाले, और अंदर अंदर बिलों में छुपने वाली कीड़ियां, सबका रब है अल्लाह। तो फिर आगे कहता है, "फस्त इबादत ही रब समा मस्जिद दी।" कीड़ियां गिन के भी खा आ जाओ मैदान, तो सात जमीनों में कितनी चींटियां चल रही है? और मेरा रब क्या कहता है? "अपने देखने की ताकत बताता है। मैं तो आगे देखकर हूं। मुझे पीछे नजर नहीं आ रहा। अब मैं इनको देख रहा हूं। मुझे यह नजर नहीं आ रहा है। मैं इनको देख रहा हूं, तो मुझे ये नजर नहीं आ रहा है। ऊपर देख रहा हूं, नीचे नजर नहीं आ रहा। नीचे देख रहा हूं, ऊपर नजर नहीं आ रहा। और मेरा रबहु जमीत। मेरे बंदो, मेरी नजर ने हर चीज को घेरे में लिया हुआ है। ला या रब्बल जर्रा।" जर्रा उर्दू में बारीक चीज को कहते हैं। अरबी में जर्रा एटम को कहते हैं। और एटम एक सेंटीमीटर का 10 करोड़वा हिस्सा होता है। एडस आर ऑन द सेंटीमीटर। तो आज की साइंस कहती है कि एक एटम एक सेंटीमीटर का 10 करोड़वा हिस्सा। और अल्लाह कह रहा है, "एटम भी देख रहा हूं।" फिर कहता है, "फरा।" अरे, तुम्हें नहीं देखूंगा? तुमने कुंडी लगा ली। कोई नहीं देख रहा। ला लो गिलास। चोरी कर लो, जिना कर लो, शराब पी लो, जुआ खेल लो। दिन कोई नहीं देख यरा। क्या देखता हूं? काली रात हो, दबी बनत सौदा। काली चंटी हो, फ़ लत जलमा। काली रात हो, अल सखत समा। और काला पहाड़ हो। चंटी काली, रात काली, पहाड़ काला, चट्टान काली। वो कहां फौकाशी? ला आंखों से नजर नहीं आता। आंख तक देख रोशनी की रफ्तार है 3 लाख किलोमीटर फी सेकंड। और ख्याल की रफ्तार है करोड़ों करोड़ों मील फी सेकंड। और मेरा रब कहता है, "ला तो खालतून करो।" ख्याल दौड़ाओ। ख्याल के घोड़े थक के गिर जाओगे, रब को ना पा सकोगे, ना देख सकोगे। हो गए या अल्लाह, तू इतना दूर हो गया? तो काम के कर रहे? कहा, "फिक्र ना करो। दूर इतना हूं, ख्याल ना पहुंचे। करीब इतना हूं कि अकरब इबीद, तेरी इस र से ज्यादा मैं तेरे करीब हूं। तू मुझे ऊंची पुकार, मैं लबक कहूंगा। तू मुझे आहिस्ता पुकार, या अल्लाह।" वो कह रहा है, "लबक।" तुम आहिस्ता पुकारो, या अल्लाह। वो कह रहा है, "लब्बेक।" मैं सिर्फ खुद बोलूं, तुम ना सुनो। वो कहता है, "लबक।" मैं सी लूं, जुबान तालू से लगा लूं, ना जुबान हिले, ना होठ हिले, दिल से बोलूं, या अल्लाह। तो कहता है, "वो भी सुन रहा हूं। वो भी सुन रहा हूं। वो भी सुन रहा हूं।" तो मेरा रब कहता है, "तेरे रब की आंख कैसी है?" काली रात हो, काला पहाड़ हो, काला पत्थर हो, ऊपर एक काली चंटी जा रही है, हिक जा रही है, या करोड़ा जा रही है। एक चींटी है या कितनी है? तो मेरा रब क्या कह रहा है कि मैं चींटी देख रहा हूं? नहीं, रब की कसम, उसकी इज्जत की कसम, उसकी किबियाई की कसम, मैं कैसे उसकी तारीफ कर सकता हूं। लदा कलमात रब्बी नफात रब्बी व जी मददा वज अकलाम व सब अब माफत कलमात्लाह। सात समंदर स्याही बनाओ, पूरी कायनात के हाथों में कलम पकड़ाओ, हाथों में कॉपियां पकड़ाओ, कहा, "लिखो मेरे रब की तारीफ लिखो, अपने रब की तारीफ लिखो।" सात समंदर बहर अलकाहिल 14000 किलोमीटर लंबा है और फिलीपाइन के करीब 111 किलोमीटर गहरा है। मैंने बड़े बड़े समंदरों में अल्लाह ने मुझे फराया है। और मेरा रब कहता है, "लिखो, लिखो। एक दिन आएगा, समंदर खुश हो जाएंगे और तेरे रब की तारीफ का जर्रा भी अदा ना होगा।" चाहे इतने समंदर और लाओ, फिर और लाओ, फिर और लाओ, फिर और लाओ। कयामत कायम होगी, तेरे रब की तारीफ खत्म ना होगी। तो मेरा रब ये कह रहा है, "ओ, मैं कीड़ी नहीं देख रहा। मैं क्या देख रहा? काली काली रात, काला पहाड़, काला पत्थर, काली चंटी के काली टांगों से जो लकीर पड़ रही है, वो लकीर देख रहा। वो लकीर तुम्हारे सामने चोटी चले, तुम लकीर नहीं देख सकते। वो कह रहा है, "मैं वो औरों पे, वो लकीर देख रहा हूं।" तो ये यहां जो हो रहा है, वो नहीं देख रहा? जो यहां हो रहा है, वो नहीं देख रहा? जो हाथ चल रहा है, जुल्म की तरफ, जो कदम उठ रहा है, अय्याशी की तरफ, जो पैसा आ रहा है, हराम का, रिश्वत का, चोरी का, डाके का, नहीं देख रहा। ला या रब का्रा। एक एटम भी छुपा हुआ नहीं है। अद अकेला। तो वो फिर आगे कहता है, "रब्ब समावात व अ वमा।" जब है ही आसमानों का भी अल्लाह, जमीनों का भी अल्लाह, दरमियान का भी अल्लाह। तो फस्त इबादत ही। फिर जम जा उसकी बंदगी पर। फिर जम जा उसकी बंदगी पर। क्यों? हल तहु समिया। कोई मेरे जा होर दिखा दे। सुभान अल्लाह। क्या खूबसूरत दावा है। हल तहु समिया। कोई मेरे ज हो भी तो सही। कोई है तेरे रब जैसा? हल तालुहू समिया। गूंज है आसमान वालों, बताओ। हलताहु समिया। है कोई अल्लाह अल्लाह जैसा? जमीन वालों, बताओ। हलताहु समिया। है कोई अल्लाह जैसा? मशरिक वालों, मगरब वालों, वालों, जनूब वालों, ऊपर वालों, नीचे वालों, आबी मखलूक, खाकी मखलूक। हल तम लहु समिया। कोई है तेरे रब जैसा? कोई है तेरे अल्लाह जैसा? ये एहसान है मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का, जिन्होंने हमें बताया कि कौन है इस कायनात का शहंशाह। वो है, उसका नाम है अल्लाह। बोलो, फिर बोलो, फिर बोलो। अर्श तक नूर चला गया। खुदा ना कहा करो। खुदा अल्लाह का नाम अल्लाह ने नहीं रखा। किसी ईरानी ने रखा है। फारसी का लफज़ है। दो लफ्जों से बना है। खुद आ, जिसे किसी ना बनाया हो। और जब तुम कहते हो, "अल्लाह" कहो। तुम अल्लाह के सारे सिफाती नामों के साथ अल्लाह को पुकारते हो। मैंने कहा, "अल्लाह हु्मा।" देख रहे हैं। मैंने कहा, "अल्लाह हु्मा।" लेकिन मेरे रब की कसम, इस अल्लाह हु्मा में मैंने कहा है, "अर रहमान, तू अर रहीम, अल मलिक, अल कुद्दूस, अल सलाम, अल मोमिन, अल मोहमन, अल अज़ज, अल जबब्बार, अल मुतकबिर, अल खलिक, अलबारी, अल मुसव, अल गफार, अल काार, अल वहाब, अल रजाक, अल फता, अल अलीम, अल काबिज़, अल बास, अल काफिज़, अल राफे, अल मुज़, अल मुज़िल, अल सम, अल बसीर, अल हकम, अल अल अदल, अल लतीफ, अल कबीर, अल हलीम, अल अज़म, अल गफूर, अल शूर, अल अली, उल कबीर, अल हफीज, उल मुकीद, अल जलील, उल करीम, रकीबुल, मुजीबुल, वास, अल मजीदुल, बा शहीद, उल हक, अल वकी, कवी, अल मतीनु, वली, अल हमीदुल, मुसी, अल मुद, मुईद, अल मुमीद, अल वाजिद, उल माजिद, अल वाहिद, अहद, अल समद, उल कादिर, मु्तदिर, अल मुकदम, मुर, अल अवल, अल आखिर, अलहिर, अल बात, अलवा, वाली, अल मुताल, अल बर, तवाब, अल मुंतकिम, अलफ, रऊफ, मालिक मुल्क, जलाल वराम, अल मुसिस, अल जामे, अल गनी, अल मुगनी, अल अल, नाफ, नूर, अलहादिल, बदी, अल बाकी, अल वारिस, रशीद, सबूर, अलन, अल मनान, जल जलालहु।" कहो, "या अल्लाह।" आपने इतने नामों से अल्लाह को पुकार लिया। ये हमारे मौलवी भी खुदा कहते, ये भी अल्लाह नहीं कहता। अल्लाह नूर समावात व अल्लाह रफा समावात। अल्लाह हुज़ ला इलाहा इल्लाहु। अल्लाह अलिफ लाम मी। अल्लाह ला इलाहा इल्लाहु। अल कयम। फुल हस्बी अल्लाह। ला इलाहा इल्लाहु। अल्लाह अलश सवा। रहमान अल सवा। लहु मा समाज बिल इनहु अफा। ये कौन है जिसकी तारीफ हो रही है? अल्लाह, अल्लाह, अल्लाह। ला इलाहा इल्लाहु। लहु अस्मा उ हुसना। सारी कायनात झुकाई हुई है उसने अपने सामने। कहता है, "हल तालुम समिया।" ओ है कोई तेरे रब की टक्कर का? लिहाजा, हलताहु समिया। क्या जुमला है? अल्लाह की कसम, हलता कोई कायनात में दावा करके दिखा दे। हतामहु समिया। है कोई तेरे रब की टक्कर का? अल अलीला समी। कोई अल मुद्बर बिला मुशीर। सारी तदबी करता है, कोई मुशीर? कोई नहीं। कोई मुशावरती कंसिल? कोई नहीं। कोई जमात? कोई नहीं। अम्र समा। आसमान से जमीन, जमीन से आसमान तक। अकेला निजाम चलाता है, कोई मुशीर? कोई नहीं। अल काहिर। सब पे काबू है, बिला मुईन। कोई मददगार? कोई नहीं। अल मलिक। शहंशाह है, ला शरीक लहू। कोई शरीक नहीं है। अह मनकर। सबसे ज्यादा याद के काबिल अल्लाह। हक मन उबद। सबसे ज्यादा बंदगी के काबिल अल्लाह। अजद मन सुल। सबसे बड़ा सखी अल्लाह। अर मलक। सबसे बड़ा मेहरबान अल्लाह। अजद मन सुल। सबसे बड़ा सखी अल्लाह। व मलिक ला शरीला व फर्द ला निदला व अली ला समला। कोई उस जैसा नहीं, ना है, ना हो सकता है, ना होगा। कुल श इ वजहा। हर चीज को फना है, अल्लाह को बका है। कुल मना अलहा फान। हर चीज ने मरना है, उसे जिंदा रहना है। फिर कुल नसत मौत। और आगे पहले कुल मन फान। यहां फिर उसको बढ़ाया। कुल शिक, कुल शिक। कुल नफ्स जा मौत। हर नफ्स ने मौत का जायका चखना। फिर इसको और खुला किया। कुल श हाल इल्ला वहु। सब मर जाएंगे, वो जिंदा होगा। सबको मार के जमीन आसमान को झटका देगा, कहेगा, "अनल मलिक। मैं हूं बादशाह।" फिर दूसरा झटका देगा, फिर कहेगा, "अनल कुदस, सलाम, उल मोमिन।" फिर तीसरा झटका देगा, फिर कहेगा, "अनल मुहम, अज़ज, उ जबार, मुत तकबिर।" अकेला होगा। जिब्रील भी मर गया। मैकाईल भी मर गया। इजराइल भी मर गया। इसराफल भी मर गया। अर्श के फरिश्ते भी मर गए। सातों आसमान के फरिश्ते भी मर गए। नबी भी मर गए। वली भी मर गए। इंसान भी मर गए। जन्नात भी मर गए। जानवर भी मर गए। हर रूह वाला, हर हर जानदार, बेजान, सब मर गए। फना। और वो अकेला कह रहा है, "मैं हूं अल मलिकुल कुद्दूस, अस्सलाम, उल मोमिन, अल मोहम, अज़जुल, जफार, उल मुतकबिर।" फिर कहेगा, "ऐन मुलक।" बादशाह किधर हो? हम लोग बादशाह किधर हो? ऐनल मुलूक। किधर हो? ऐनल जबून। ये जो आज जुल्म करते फिर रहे हैं, इनको पता नहीं है कि अपने पांव पे कुल्हाड़ियां मार रहे हैं। वो ये माफिया हो, वो ये चोर डाकू हो, वो दहशतगर्द हो। इन इन कमबख्तों को पता नहीं है कि ये क्या कर रहे हैं। ये अपनी कब्र में कैसी आग जला रहे हैं। इन्हें पता नहीं है ना लोगों को पता है कि जुल्म पर कब्र में कैसी आग जलती है। ये वो नहीं, इसलिए नशे में हैं। ऐल जबारून। वो किधर हैं आज जालिम? फिर कहता है, "ऐन मुतकबून।" एड़ी मार के चलने वाले, गर्दन अकड़ा के चढ़ने वाले, तकब्बर वाले, किधर हो? ला तमश अ मरहा। अरे पागल दीवाने, पेट में तेरे पखाना, मसाने में तेरे पेशाब, आंतों में तेरे गंदगी। तू जमीन पे अकड़ के क्यों चलता है? जब तू एड़ी मार के चलता है, इन अ तू मेरी जमीन को फाड़ देता है एड़ी मार के। और तू ऐसे गर्दन ऊपर करता है व तला? क्या तेरा कद पहाड़ों से ऊपर चला जाता है? या तेरी एड़ी से मेरी जमीन फटती है? और तेरे अंदर तो मैंने बखाना डाला हुआ है, पेशाब डाला हुआ है, गंदगी डाली हुई है। चंद दिन के बाद तेरी रूह निकालूंगा, तू एक मुरदार जुस्सा होगा। बाहर रखो तो बदबू से सारा शहर परेशान हो जाएगा। और कब्र में तेरे ऊपर कीड़े मुसल्लत करूंगा, जो तेरे पिंजर को अलग कर देंगे, तेरी बोटियों को अलग कर देंगे। फिर कब्र की तपश तेरी हड्डियों को भी गला दे। कुरा जब हमारी हड्डियां भी चूराचुरा हो जाएंगी, तिल करत खासरा। इनरा। अल्लाह मेरे नबी का एहसान। कुल अहद। अकेला। वो गुजारा कैसे करता है? अल्लाहहु समद। सब उसके मोहताज हैं। वो किसी का मोहताज? वो मकान देखो। हम सारे जात है ना? अल्लाह भी एक जात है। हमने जगह घेरी हुई है। दो फुट, ढाई फुट। अल्लाह का ना अव्वल है, ना आखिर है, ना इब्तदा है, ना इंतहा है। तो वो जमाने से भी पाक है, मकान से भी पाक है। मकान तो मखलूक है। और मखलूक में खालिक नहीं आ सकता। वो लाम मकान है, वो लाजमान है। तू दिल में तो आता है, समझ में नहीं आता। बस जान गया मैं, तेरी पहचान यही है। वो कैसे? मैं बयान करूं कि एक जात है जिसको देखना चाहूं, उसके अव्वल को? मेरे मेरी क्या औकात है? सवा लाख नबी और नबियों के रसूल भी रब की ना इब्तदा देख सकते हैं, ना इंतहा देख सकते हैं। वो इब्तदा से भी पाक है, इंतहा से भी पाक है। असमद। सब मोहताज हो। असमद। वो बेनियाज है। असमद। सब की जरूरत है तुम्हारा रब। वो तुम उसकी कोई जरूरत नहीं हो। आसमान अपनी कुदरत से बनाए। अपनी शहनशाही के लिए आसमान जरूरत नहीं। कुर्सी जरूरत नहीं। अर्श जरूरत नहीं। फरिश्ते जरूरत नहीं। जमीन जरूरत नहीं। आग, पानी, हवा, मिट्टी।

उसकी जरूरत नहीं। उसी का कब्जा है। कैसा बेनियाज है? लम यद। किसी का बाप नहीं है। वमद किसी का बेटा नहीं है। मतदा साहिबा ओ मेरी बीवी कोई नहीं वला वदा मेरा बेटा कोई नहीं।

अनकू वद पागलों बेवकूफों किधर से मेरे बेटे तुमने बना दिए। वम कुलहु कुवन अहद कोई उसकी मिसाल बताओ भाई। अल्लाह कहता है कोई मिसाल हो तो मैं बताऊं। मेरी मिसाल ही कोई नहीं है। मेरी मिसाल ही कोई नहीं।

जन्नत की सबसे बड़ी नेमत है जब बंदा सामने आएगा, पर्दा हटाएगा और कहेगा सलाम कोम रब रहीम। मेरे बंदो आज तुम्हारा रब मेरी बंदियों आज तुम्हारा रब तुम्हें सलाम पेश करता है।

वजू नाला रब नाज़रा जब अल्लाह अपना पर्दा हटाएगा। जब जन्नत वाले जन्नत में और सारे जन्नती अपनी-अपनी जगह में तो फरिश्ता ऐलान करेगा अल्लाह की जियाफत है जमा हो जाओ सारे जमा होंगे एक मैदान है जन्नतुल फिरदौस में उसका नाम मजीद है जिब्रील आए एक शीशा लेकर या रसूल अल्लाह ये शीशा इसमें ये नुक्ता आपने देखने का हां कहा ये क्या है ये मैदान मजीद है इसका नाम में मज़द इसकी घास जाफरान की है पर पीली नहीं सफेद रंग की घास है और ये अल्लाह के दीदार की जगह है और मैं जिब्रील जो यूं करो तो अर्श से यहां पहुंच जाते हैं। यूं एक सेकंड में जिब्रील सिदरतुल मुंतहा से ईदगाह की मस्जिद में पहुंच जाते हैं। वह कहते हैं या रसूल अल्लाह मैं इस मैदान में साल साल उड़ा हूं। मुझे नहीं पता कहां शुरू होता है, कहां खत्म होता है। ये मेरे रब के दीदार की असेंबली है।

ईमान वाले मर्द एक तरफ औरतें एक तरफ ईमान वाले सारे उम्मती अपनेप नबियों के साथ और सारी औरतें हजरत खदीजा अजवाजे मुतहरात सैयदा फातिमा के साथ और अल्लाह ताला फरमाएगा मेरे मेहमान आए हैं। खाना खिलाओ। जब वो खाना खाएंगे तो कहेंगे जन्नत का खाना तो ए ही है। जन्नत का खाना। फिर अल्लाह फरमाएगा इस पानी पिलाओ। तो अल्लाह के दस्तरखान का पानी पीकर सबसे आला चश्मा तसनीम है। तस्नीम ये देखा है? इतनी सीरी लगी आपको नजर भी नहीं आ रही। इतनी सी तरी तस्लीम की लेकर आसमान पे बैठ के यूं कर दे। उस आसमान से जमीन तक खुशबू फैल जाएगी। जब अल्लाह के दस्तरखान पर पिएंगे तो कहेंगे तस्लीम कोई शय कोई नहीं।

फिर अल्लाह कहेगा फल खिलाओ यही होता है ना खाना आता है पानी आता है फिर मीठा आता है तो मीठे में ना खाते करो सेमिया ना मुराद फिरिया ठ हो जाएगा थडा अल्लाह को बड़े पेट वाला बिल्कुल अच्छा नहीं लगता मौलवी होवे तो हो ही बड़ा लग तो अल्लाह कहेगा फल खिलाओ तो जब वो फल खाएंगे तो जो अल्लाह कह रहा है आला किस्म के फल कहेंगे ये फल तो फल तो कुछ भी नहीं है। फल तो ये हैं।

फिर उसके बाद अल्लाह ताला फरमाएगा मेरे मेहमान आए हैं। शाही दरबार है। शाही दरबार के लिबास के आदाब होते हैं। इनको शाही लिबास पहनाओ। तो ना पावन दी लोड है ना लावन दी लोड है। एक ऐसे चमक उठेगी। और सबके लिबास तब्दील हो जाएंगे। अल्लाह के दरबार के शयान शान वो लिबास होगा। तो कहेंगे जन्नत लिबास टाट दे कपड़े ही हैं।

फिर अल्लाह कहेगा तब हम और फिर ये भी एक है बड़ों के दरबार में जाने का कि परफ्यूम लगा होना चाहिए। खुशबू होनी चाहिए। हमारे नबी को खुशबू बड़ी पसंद थी। तो एक हवा चलेगी। उसका नाम मेरे नबी ने बताया मुसीरा। वो हवा आपने फरमाया हर जन्नती मर्द औरत को खुशबू लगाएगी। और फरमाया तेरी बीवी दुनिया में तुझे ऐसी तरह खुशबू नहीं लगा सकेगी जैसी वो हवा तुझे खुशबू लगाएगी।

अब जब यह सब मुकम्मल हो जाएगा तो अल्लाह कहेंगे मेरे बंदों ने खा भी लिया, पी भी लिया, फल भी खा लिए, कपड़े भी पहन लिए, खुशबू भी लगा ली। क्यों भाई राजी हो? या अल्लाह बड़े राजी हैं। मेरे वादे पूरे हो गए। कहा या अल्लाह सारे पूरे हो गए। कहा नहीं इनला यरीद अल्लाह खुद फरमाएगा एक वादा अभी बाकी है जो पूरा नहीं हुआ। वो कहेंगे या अल्लाह वो कौन सा है अलम तब वजूना नार वल जन्नत या अल्लाह फादे तो पूरे हो गए तूने दोज़ख से बचा लिया तूने जन्नत में पहुंचा दिया और तूने अपनी रजा नसीब फरमा दी बाकी क्या रह गया है तो अल्लाह ताला कहेगा सुनो आवाज आएगी अब बंदों को या रिजवान जन्नत का जीएम सीओ सीओ मौलवीशाम साहब सीओ फाउंडेशन तो जन्नत का सीओ जन्नत का जीएम अल्लाह कहेगा या रिवान उसका नाम इफ हुज बैनी व इबादी वारी मेरे और मेरे बंदों के दरमियान पर्दा हटा दे दोज़ख का सबसे बड़ा अज़ाब आखिरत का सबसे बड़ा अज़ाब दोज़ख नहीं है। इन रब महज अल्लाह के दीदार से महरूमी पहले फरमाई सुम्मा इनसाल जम फिर वो जाएंगे आग में आग छोटा अज़ाब है। अल्लाह के दीदार से महरूमी बड़ा अज़ाब है।

तो पर्दे उठेंगे आंखें फट जाएंगी। आज ये आंख है जो अल्लाह को देखेगी। दुनिया में मूसा अल सलाम ने लाड में मांग लिया था और टठे बेहोश होश या अल्लाह अगा तो नहीं मांगता मैं मेरी थप एक हस्ती के लिए अल्लाह ने पर्दा उठाया वो उसका महबूब है वो उसका हबीब है वो मोहम्मद है वो अहमद है वो माही है वो हाशिर है वो आकिब है वो फाते है वो खातिन है वो अबुल कासिम है वो ताहा है वो यासीन है वो शाहिद है वो मुबशिर है वो नज़र है वो दाढ़ी इल्लाह है वो सिराज मुनीर है वो अज़ज है वो हरीस है वो रऊफ है वो रहीम है वो मुजमिल है वो मुद्दसिर है वो खातुल अंबिया है वो खातमुल मुरसलीन है कितने नाम बताऊं उसकी पीढ़ी भी इसलिए सुनाता हूं वो मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्दुल मुनाफ बिन कुसई बिन किलाब बिन मुर्रा बिन काब बिन लुबई बिन गालिब बिन फहर बिन मालिब बिन नज़र बिन किना बिन खुजमा बिन मुदरिका बिन इलियास बिन मुदर बिन नज़ार बिन मुद बिन अदनान बिन अवद बिन हमसा बिन सलामान बिन औस बिन बऊ बिन कमवाल बिन उबई बिन अवाम बिन नाशद बिन हिजा बिन बलदास बिन यदलाफ बिन ताबिक बिन जाहिम बिन नाहिश बिन माफी बिन ऐफी बिन अब बिन उबैद बिन दुआ बिन हमदान बिन समर बिन यसबी बिन यज़न बिन यहन बिन इरवा बिन ऐज़ बिन ज़ीशान बिन ईसर बिन अकनाद बिन इहाम बिन मुकसिर बिन नाहिद बिन ज़ बिन समी बिन मज़ बिनद बिन इराम बिन कीदार बिन इस्माइल बिन इब्राहिम बिन आदर बिन नाहूर बिन सरूज बिन रऊ बिन फ़ बिन आबिर बिन अरफशाद बिन साम बिन नूह बिन लाम बिन मतशा बिन इदरीस बिन यद बिन बिन मलहल ईल बिन कीनान बिन आुश बिन शीश और ओ आदम अल सलातो व्सलाम ये इनको सिर्फ अपना दीदार कराया है बाकी किसी ने नहीं कीता आज सब करेंगे ऐसे पर्दे हटेंगे और अल्लाह मुस्कुराता हुआ कहेगा सलामन कौम रब रहीमो थोड़ी देर तसवुर तो करो तुम अल्लाह के सामने जन्नतुल फिरदौस के मैदान में हो और ऐसे पर्दे हट रहे हैं और अल्लाह अपने हुस्न के साथ जमाल के साथ आहिस्ताआहिस्ता पर्दों से बाहर आ रहा है और फिर एकदम कहता है सलामन कौन रब रहीम तुम्हारा रब तुम्हें सलाम पेश करता है और और इससे मजे की बताऊं मेरे नबी ने सरकार ने फरमाया मां मिनु अहदिन इल्ला सहाहु रबहुरा उस मैदान में जितने ईमान वाले मर्द औरतें खरबों की तादाद में अल्लाह अल्लाह की कसम एक-एक का नाम लेकर हाल पूछेगा। सुभान अल्लाह रयाज़ क्या हाल यूसुफ क्या हाल उस्मान क्या है वहीद क्या है नाम लेकर नाम लेकर और अल्लाह के बोल की लज्जत क्या है अय्यूब अल सलाम 18 साल बीमार रहे पंच प 18 साल बीमार रहे। कीड़े नहीं पड़े। यह बकवास है। नबी को अल्लाह ऐसा नहीं बनाता कि लोग को नफरत हो। दर्दें थी ऐसी जो ऐसे मरोड़ के फेंक देती थी 18 साल। जब अल्लाह ने सेहत दे दी तो एक आदमी ने पूछा अय्यूब अल सलाम बीमारी के दिन याद आते हैं। हु सुनो ग कहने लगे वो आज के दिनों से बड़े अच्छे थे। वो तौबा तौबा तौबा वो कैसे अच्छे थे कहा जब बीमार था तो रोजाना अर्शों से एक दफा अल्लाह की आवाज आती थी अय्यूब क्या हाल है उस आवाज में जो लज्जत थी वो आज इस सेहत में कोई नहीं है ये मेरे नबी ने एहसान फरमाया हमें अल्लाह का तारुफ करवाया और कहा झुको इसके आगे अतीउ्लाह व अतीउ रसूल इसके सामने झुको को फला व रब और अल्लाह ने कहा फला व रब लानून हत्ता यु का फीमा शज अनफजनस तस्लीमा ऐ पूरी दुनिया के इंसानों सुन लो ऐ मेरे महबूब मुझे आपके रब की कसम अल्लाह की कसम ये ऐसी कसम है कुरान की सबसे खूबसूरत कसम है ऐ मेरे महबूब मुझे आपके रब की कसम है तो खुद क्या मजे की बात है यार है खुद वो कह रहा मुझे आपके रब की कसम क्या मोहब्बत है इसमें ये तो लंबे वालों को बता दो इन तलबा उलमा चौधियों को बता दो जब तक आपके सामने गर्दन नहीं झुकाएंगे मरदूद हैं वहां सैयद कुरैशी नहीं चलता वहां गुलामी रसूल चलती है अबू लहब सैयद कुरैशी था तब बतदा अभी लहब वतब बर्बाद हो गया अबू लहब बिलाल गुलाम गुलाम का बेटा हबशी हबशी का बेटा दादे दा नाम आज तक मेनु किसी किताब नहीं लदा हालांकि मैं जोहर लाया है ना मेनु नहीं मिलया उधे तो दादे दा कोई पता नहीं किसीदा और मेरा नबी फरमा रहा है बिलाल की कब्र कहां है शाम में आपने फरमाया कयामत कायम होगी मैं सबसे पहले कब्र से निकलूूंगा मेरे दाएं तरफ से अबू बकर, मेरे बाएं तरफ से उमर और मेरे कदमों से बिलाल निकलेगा। और मेरे लिए बुराक आएगा और बिलाल के लिए सुर्ख ऊंटनी आएगी। बिलाल मेरे आगे ड्राइवर बनके चलेगा। मैं उसके पीछे चलूंगा। मैदान मशर में पहुंचेंगे। तो मेरा अल्लाह कहेगा बिलाल कुम फन बिलाल उठो। आज अज़ाने बिलाली सुना दे सारी दुनिया के मर्दों औरतों को। तो जब वह कहेंगे अल्लाहू अकबर तो क्या मजा होगा उसका तो यह वहां सिक्का कुरशी सैयद नहीं चलता वहां मोहम्मद ही सिक्का चलता है मोहम्मद मुस्तफा उनकी लाद हवा तब माज ही जब तक मेरी नहीं मानोगे ईमान मुकम्मल नहीं मेरी नहीं मानोगे ईमान पूरा नहीं तरह बैगा मैं तुम्हें रोशन रास्ते पे छोड़ के जा रहा हूं लहाहार इसकी रात है ही नहीं दिन ही दिन है हटोगे तो बर्बाद हो जाओगे जैसे आज तूफान ने बर्बाद कर दिया ये भी मेरे नबी ने बताया कि ये अपने ये पानी अल्लाह का ये हवा अल्लाह की ये पत्थर अल्लाह के ये पहाड़ अल्लाह के ये बिजलियों की गरज और चमक अल्लाह की ये कड़क सब व मलका ही बिजलियों की कड़क बारिश का बरसना ब्रस्ट हो के बरसना क्लाउड ब्रस्ट होना या पीछे अल्लाह की लगाम है पीछे अल्लाह का हाथ है और और मेरे नबी ने बताया ये कब होगा ये कैसे होगा ये नाफरमानी पे होगा एक हदीस सुनाता हूं कुर्बान जाऊं या रसूल अल्लाह क्या कुछ आप बता कर गए? क्या कुछ खोल कर गए? ओ जी क्लाउड ब्रस्ट हो गया तो तूफान आ गया। रावी बिखर गया, सतलुज बिखर गया, तनाब भी इनको ये क्यों बिखरे हैं? किसने इनको उभारा है? अल्लाह। किसने बादलों को फाड़ा है? अल्लाह। किसने सैकड़ों मन वजनी पत्थरों को उठा के जमीन पे फेंका है? अल्लाह। किसने लाशों को रंद दिया है पत्थरों से। अल्लाह कितने पानी में गर्क हो गए। किसने किया? अल्लाह। कितने घर अल्लाह ताला ने तोड़ दिए। किसने किया? अल्लाह। मासाब मुसीबत फेमा कसबत ये जो कुछ हुआ है तुम्हारे गुनाहों की वजह से है। व कसीर अभी तो बहुत मैं माफ़ कर देता हूं। मेरे नबी ने अल्लाह की कसम अरबी का मकूल है वकात हुफ कि कोई इसका उर्दू में है कोई कसर नहीं छोड़ी मेरे नबी ने हर शय पर अपने नूर की रोशनी डाली मेरे नबी की जिंदगी मिलाद मनाने का नाम नहीं है और जो इस दफा मिलाद के मैंने वीडियो देखे हैं वो उन वो इन मौलवियों को समझाओ जिन्होंने यह बिदत फैलाई। औरतें मर्द नाच रहे हैं। नंगे सर लड़कियां नाच रही हैं। मर्द भगड़े डाल रहे हैं। ढोल बज रहे हैं। गाने गाए जा रहे हैं। इसको मिलाद नबी कहते हैं। और तफ है तुम्हारी अकल पर। और तफ है तुम्हारी बदकली और जहालत पर। हैप्पी बर्थडे टू यू या रसूल अल्लाह। यमे पैदाइश तो गोरों की बिदत है। बर्थडे नबी की बर्थडे मना रहे हो। शर्म करो शर्म करो। एक प्याले पानी में डूब के मर जाओ बदबख्तों। और लाखों रुपए केक बनाते हैं। ओ ये लाखों रुपए गरीबों को दो जो सैलाब में बह गए हैं। केक बनाकर हैप्पी बर्थडे या रसूल अल्लाह। वह जहालत का कोई इलाज नहीं है। इमाम शाफी फरमाते हैं बड़े से बड़े आलिम से मैंने मुनाजरा किया। मैंने उसको हरा दिया। और जब जाहिल से मुनाजरा किया उसने चाहते मारे। जाहिल के लिए तो कोई जवाब ही नहीं। उसे जब पता ही नहीं है। इसको मैंने दुनिया फेरी है। मैंने कितने मुल्कों में मिलादन नबी देखा है। पूरी उम्मत मिलाद मनाती। मैं उसका इंकार नहीं कर रहा हूं। लेकिन मैंने जो मिलाद देखा है वो है मिलाद। कि लोग ऐसे औरतें मर्द निकल कर डांस नहीं करते। मस्जिदों में इकट्ठे होते हैं जैसे तुम इकट्ठे हुए बैठे हो और उसमें मेरे नबी की नातें पढ़ी जाती हैं। फिर उलमा उसमें अपने हमारे नबी की तारीफ में बयान करते हैं। कुरान पढ़ते हैं। ये है मिलाद नबी। ये मिलाद नबी थोड़ा ही है कि सड़कों पे फिर जाओ। ज़हर भी गई, असर भी गई, मगरब भी गई, ईशा भी गई और करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिए और नाच गाने, डांस इसका नाम मिलाद नबी। अपने नबी के सीने में खंजर खबोते हो। उसके दिल में खंजर उतारते हो। मोहब्बत इसको कहते हैं। मोहब्बत इस चीज का नाम है। मोहब्बत इतात का नाम है। मोहब्बत मानने का नाम है। मोहब्बत झुक जाने का नाम है। मुहर्रम आता है। या हुसैन या हुसैन जंजीरें मार रहे हैं। वो छुरियां चला रहे हैं। कोई शराब नहीं छोड़ता। कोई नमाज नहीं पढ़ता। कोई रोजा नहीं रखता। कोई झूठ नहीं छोड़ता। तो ये कैसा गम हुसैन है? ये गम हुसैन नहीं है। ये दुख हुसैन है कि हुसैन को दुख दे रहे हो। अहले कर्बला को दुख दे रहे हो। इसको मोहब्बत नहीं कहते। ये जहालत है। ये जहालत है। ये शर्मिंदगीगी है। ये ये मेरे पास अल्फाज़ कोई नहीं जो मेरे अंदर से निकल रहे हैं। लेकिन मैं जुबान बंद कर रहा हूं। मैं मिंबर पर बैठा हूं। इसलिए मुहर्रम आता है कि हुसैन को इस तरह पीटो और ना शराब छोड़ो ना सूद छोड़ो ना जुआ छोड़ो ना झूठ छोड़ो ना जिना छोड़ो मिलाद नबी मनाओ ना हराम छोड़ो ना रिश्वत छोड़ो ना जिना छोड़ो ना सूद छोड़ो ना जुआ छोड़ो इसका नाम मिलाद है मैंने कितने मुल्कों में देखा सही मिलाद सही मिलाद अबुल मुजफ्फर अल बकरी इराक का बादशाह था। 5 98 हिजरी में उसने सबसे पहले मिलाद शुरू किया। और 598 से 630 तक वो जिंदा रहा। हर साल वो मिलाद मनाता था। ऐसी मिलाद नहीं होती। हां चरागा वो करता था पूरे शहर में। लेकिन ये बकवास इसको मिलाद कहना। खुसरे नाच रहे थे मिलाद। मुझे किस मैं तो देखता नहीं किसी ने मुझे दिखाई। खुसरे नाच रहे थे। लड़के नाच रहे थे। लड़कियां नाच रही थी। क्यों अपने नबी का दिल जख्मी पहले वो जख्मी हैं उम्मत के हालात देखकर क्यों उनको दुख देते हो? क्यों उनके नाम पर शराफत की कबा को धजियां बखेरते हो? और दीन को मजाक उड़ाते हो। और दीन को तबाह बर्बाद करके अपने आप को मुसलमान कर समझ के नेकी कर रहे हो। नेकी कर रहे हो। मेरे नबी ने खबर दी पानी क्यों बेफरता है? सैलाब क्यों आते हैं? बारिशें बेकाबू क्यों होती हैं? बाद अलम तर अन्लाहजी सहाबा देखते नहीं हो बादलों को तो अल्लाह हाकता है। फिर उनको जोड़ता है। रुकामा फिर उनको पहाड़ बना के ऊपर ले जाता है। फ का खिला कभी रहमत की आती है कभी मतर अज़ाब की बारिश है गैस रहमत की बारिश है ये अज़ाब की बारिशें हैं नीचे सैलाब है ऊपर से बारिश है मैं अभी खमा बस्ती से होके आ रहा हूं गौसपुर से जहां हमारी फाउंडेशन ने अल्लाह के फजलल से वहां 130 खेमे लगाए हैं और उनको तीन वक्त हम खाना दे रही है हमारी फाउंडेशन नाश्ता फजर का दोपहर का खाना रात का खाना उनके जानवरों का चारा उनके टॉयलेट बना के दिए हैं। उनके जानवरों के लिए बड़ा नलका लगाया है पानी पिलाने के लिए। एक एक कैंप कायम किया है मेडिकल। कोई बीमार हो जाए तो उसके इलाज के लिए। ये तो हुआ मिलाद। ये क्या मिलाद है? मेरे नबी ने कहा सुनो गौर से। इजत [संगीत] वाला गिनते जाना। जब हुक्मरान कौमी खजाने के लुटेरे बन जाएंगे। कोई अल्लाह से डरने वाला तो कोई नजर ही नहीं आता है। इजत उदला जब कौमी खजाना बादशाहों की मिल्कियत बन जाएगा। पहले गर्दन इनकी फंसेगी व अमानत मगमा जिसको कोई अमानत सुपुर्द की जाएगी ओहदा वो उस ओदे से पैसा बनाना शुरू कर देगा। पूछो इन डीसीियों से, एसियों से और सेियों से और 22 ग्रेड के सेियों से मुल्क हमने नहीं लूटा। अल्लाह की कसम मुल्क को हमने मकरूज़ नहीं किया। अल्लाह की कसम इन हुक्मरानों ने हमें मकरूज़ किया है। ये इन सेियों ने हमें मकरूज़ किया है जो बदबख्त अरबों की जायदादें बना के बैठे हैं और कब्र में इतनी सारी जगह में जाके सो जाते हैं। मेरे एक दोस्त थे चीफ सेक्रेटरी पाकिस्तान रहे। बड़ी पुरानी बात है। मैं नाम भूल गया हूं। तो उन्होंने मेरा बयान कराया जहां वो ये ये जो सीएसएस के बच्चे होते हैं। उसमें मेरा बयान कराया। उनका तबादला हो गया इस्लामाबाद। छ महीने बाद वापस आ गए। मैं मिलने गया। अल्लाह उनकी कब्र रोशन करे। मुझे नाम भूल गया। मैंने कहा आप छ महीने में वापस आ गए। कहा मौलाना अगर मैं एक साल रहता या मैं पागल हो जाता या मैं बदयानत हो जाता। कि जिस से के पास बैठो इतने पैसे स्विट्जरलैंड में जमा है। इतने इंग्लैंड में जमा है। इतने प्लॉट अमेरिका में हैं। इतने बर्तनानिया में हैं। जिसके पास शाम को बैठते इतने घर मैंने इस्लामाबाद में बना लिए हैं। इतने वहां बना लिए हैं। तो मैं सोच में पड़ गया। मैं चीफ सेक्रेटरी पंजाब और मेरे पास आज तक अपना घर कोई नहीं। अल्लाह इनको बराबर कर देगा। चीफ सेक्रेटरी पंजाब क्या नहीं कमा सकता? कहा मेरे पास जाती घर कोई नहीं। व जकात मगरमा और जकात नहीं देंगे। कहेंगे टैक्स है कौन दे? गिनते जाना। तीन हो गई। व गैर दीन उलमा दुनिया के पीछे भागेंगे। दीन को छोड़कर दुनिया के पीछे भागेंगे। दुनिया दुनिया दुनियादारों की तरह बनाने के पीछे भागेंगे। झूठ सच बराबर कर देंगे। जमीर को सुला देंगे। इल्म को कहीं जाकर दफन कर देंगे। अकबर को गुमराह करने वाले उलमा। अकबर को दीन इलाही तक पहुंचाने वाले उलमा। मुल्ला अब्दुल नबी और मुल्ला मोहम्मद सुल्तानपुरी यह खबीस जब ये ये दिल्ली का मुफ्ती था काजी जब ये मरा तो इसके घर से कितने संदूक सोने के भरे हुए निकले और कब्रों में संदूक सोने के डाले हुए थे ये थे उसको काफिर बनाने वाले वो तो अल्लाह दर्जे बुलंद करे मुजद अलफसानी रहम अल्लाह जिन जिनकी बरकत से अकबर आखिरी पांच साल में तौबा कर गया और सच्चा सही मुसलमान बन गया व गैर दीन उलमा दीन बेचेंगे दुनिया कमाएंगे व अता रजत लोग बीवियों की मानेंगे वका उमाहु और मां के दिल के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे व अदना सदी काहु दोस्त को सीने से लगाएंगे व अबाहु बाप को धक्के देंगे बाप की बात का जवाब नहीं देंगे दोस्त को खाने चाय पिलाएंगे वसाद कबीला तफास सरदारी नाफरमानों क्या शराबी सानी लोग सरदार बन जाएंगे वन रसुल को अर हुकूमत ना अहल लोगों के हाथ में होगी निकम्मे लोगों के हाथ में होगी वज मखा श एक दूसरे को मुस्कुरा के सलाम करेंगे और अंदर बुगज़ छुपा होगा नफरत छुपी होगी उसके उसके शर से बचने के लिए उसको मुस्कुरा के मिलेंगे। वो रजखा ही एक दूसरे के शर से बचने के लिए एक दूसरे को मिल रहे हैं। वाफत असत मसाजिद मस्जिदें फिरका वारियत के मरकज़ बन जाएंगी। आज देखो मस्जिद हफी बरेलवी इतना बड़ा बोर्ड लगा हुआ है। मस्जिद हफी देवबंदी इतना बड़ा बोर्ड लगा हुआ है। मस्जिद मस्जिद सल्फी अहले हदीस इतना बड़ा बोर्ड लगा हुआ है। असवा मसाजिद मिंबर जो मोहब्बत को फैलाने के लिए था। उसी मिंबर पर बैठने वाले आग बरसाएंगे। आग मैं पूरी दुनिया फेरा हूं। जो नफरत मैंने हिंदुस्तान पाकिस्तान में फिरका वरियत की देखी है। अल्लाह की कसम मैंने पूरी दुनिया में ऐसी नफरत नहीं देखी। एक दूसरे के जनाजे नहीं पढ़ते। एक दूसरे को सलाम नहीं करते। मैं जब ये मोटरवे नहीं बना था। मैं लाहौर से आ रहा था। कस्सवाल असर का टाइम हो गया। मैंने गाड़ी रोकी। मैं खुद ड्राइव करता था उस वक्त। तीन नौजवान सद पगड़ी वाले खड़े थे। मैंने कहा अस्सलाम वालेकुम। मुझे देखना। उन्होंने किया। मैंने दोबारा कहा अस्सलाम वालेकुम। उन्होंने कहा फिर मैंने कहा अस्सलाम वालेकुम। ए सिर हला रहे थोड़ी जेब हला दो। वालेकुम अस्सलाम। मैं मुसलमान नहीं। इन बच्चों का कसूर नहीं है। वो तो नौजवान थे। 22 23 साल के लड़के थे। यह वो ज़हर उन मुल्लाओं ने भरा है जिन्होंने नफरत की आग भड़का कर। यह काफिर, यह काफिर, वो काफिर, वो काफिर ओए अल्लाह नाम मनो किसी जन्नत भी जा दो यार देवबंदी भी काफिर बरेल दे नजदीक और बरेलवी काफिर देवबंदि नजदीक गैर मुकलद काफिर मुकलदा नजदीक और और मुक्किद काफिर गैर मुकलदों के नजदीक तो जन्नत रब करना की है अस मसाजिद अगली सुनोनात वज़ गाने वालियां आम हो जाएंगी नाचने वालियां आम ये तुम्हारे मोबाइलों में ये नौजवान नस्ल नंगे डांस देख रही है। सारी सारी रात

मोबाइल पर गिलाजत देखते रहते हैं। औरत नंगी हो जाएगी और नाच-गाना आम हो जाएगा। मौसी की आम हो जाएगी। यह हो रहा है कि नहीं हो रहा? ओ बोलो, वो शरबति खुमूर और शराबें पी जाएंगी। पाकिस्तान पाक जमीन, अल्लाह चौधरी रहमत अली की कब्र रोशन करे। इंग्लैंड में दफन है। मैं उसकी कब्र पे गया हूं। फातिहा पढ़ा है। उसने नाम रखा था पाकिस्तान। पाक जमीन पे शराब के अड्डे, जिना के अड्डे, जुए के अड्डे, भत्ताखोरों के अड्डे, कत्लो-गारत के उजरती कातिल, उजरती कातिल चंद हजार पे कत्ल करने वाले, इसका नाम पाकिस्तान तो नहीं रखा जा सकता। शरबत खुमूर, शराबें पी जाएंगी। वुबिस हरी और मर्द रेशम पहनेंगे, सोना पहनेंगे। वला आखिर उम्मत अवलहा और आज के लोग पहले लोगों को कहेंगे, बेवकूफ थे, पागल थे, हम बड़े समझदार हैं, बड़े साइंसदान हैं। हाय हाय हाय! जब हुक्मरान हुकूमत का कौमी खजाना लूटेंगे, जब अमानत की पोस्टों पर लोग अमानत की बजाय पैसा, पैसा बनाएंगे। जब जकात से इंकारी हो जाएंगे। जब उलमा दीन बेच के दुनिया बनाएंगे। जब मांओं को बर्बाद करेंगे, बीवियों के पांव चूमेंगे। बाप को धक्के देंगे। दोस्त को गले लगाएंगे। कबीले की सरदारी बदमाशों के हाथ में होगी। हुकूमत निकम्मे, ना अहल, बेवकूफों के हाथ में होगी। एक दूसरे को सलाम करेंगे। एक दूसरे के शर से बचने के लिए गाने वालियां आम हो जाएंगी और मौसी की आम हो जाएगी। मस्जिदों में फिरका-परस्ती की आग भड़क उठेगी और शराब पी जाएगी और रेशम पहना जाएगा और सोना पहना जाएगा। और आज की उम्मत पहली उम्मत को पागल, बेवकूफ कहेंगे, तो फिर क्या होगा? फबदा हमरा इंतजार करो, हवाएं पागल हो जाएंगी। ये खुद नहीं पागल हुए, ये पहाड़ खुद नहीं पड़ ए 15 गला ने इन्होंने चाक कर दिया है पहाड़ों का सीना, हवाओं को पग कर दिया है। पानी बागी हो गए हैं, बिफर गए, तूफान बन गए हैं और जानवरों की तरह इंसानों को बहा के ले जा रहे हैं। ये इतना बड़ा नुकसान है, पूरा मुल्क भी मिलके इन मुसीबत जदों की मदद करे तो शायद जाकर ये कमी पूरी हो। लेकिन वो तो चोरियां कर रहे हैं। कश्तियों पे एक-एक लाख किराया बना दिया है। ये इंसान हैं कि जानवर हैं। इंतजार करो रीन हमरा, मौसम पागल हो जाएंगे। हुआ है पागल कि नहीं हुआ? बोलो। बोलो ना। व जलजलतन और जलजले आएंगे। व खसखन और जमीन तुम्हें निगल जाएगी। व मसकन और तुम्हें मसख करके रख देगी। व आयात मुतताबत और ऊपर नीचे अज़ाब ताबड़तोड़ आएंगे। कदा बाल सिलताबा जैसे तस्बी का धागा टूटे तो दाने टप-टप-टप-टप गिरते हैं, ऐसे ऊपर से सजाएं आएंगी। ये किसी को दोष नहीं दे सकते, हम ये हम अपने आप को दोष दो, हम बुरे हैं, हमारी वजह से यह हो रहा है। मैं आप सबके सामने हाथ जोड़ता हूं। मेरे शहर के लोग बैठे हो। सारी दुनिया से दो नंबरी कर सकता हूं। मेरे यहां 500 साल से आबाओ-अजदाद की कब्रें हैं। तुम्हारे साथ तो दो नंबरी नहीं कर सकता। अल्लाह के वास्ते तौबा कर लो और अपने रब की तरफ रुजू कर लो। और इन बिदात से निकलो। जहालत से निकलो। फिरका वारियत से निकलो। हरामखोरी से निकलो। इन बड़े कबीरा गुनाहों से तौबा करो। और उसकी बारगाह में झुको, तो तब जाकर ये हवाएं हमारे हक में चलेंगी। वरना मेरा रब अगर हम ना पलटे तो इससे और ऊपर आएगा। इससे और ऊपर आएगा। कयामत भी तो इसी तरह आएगी। तो आज मैं इतना रोता हूं। बेबसी किया याद मिला। एक चोर का हार्ट कटा था और तेरा हबीब रोने बैठ गया था। आज उसकी उम्मत के हजारों बच्चे पानी ले गया। बूढ़ों को पानी ले गया। जवानों को पानी ले गया। घरों को पानी ले गया। बस्तियों को मैदान बना दिया। या अल्लाह, मैं क्या करूं? मैं बच्चे की तरह रो सकता हूं। मेरे पास कुछ नहीं। तू मेहरबानी कर। मैं बूढ़ों की तरह रो सकता हूं। मैं कुछ नहीं कर सकता। तौबा करो अल्लाह की बारगाह में और उसे मनाए हम कि अल्लाह हमसे राजी हो और ये आफात तले। इस अल्लाह के सिवा कोई किसी के पास इसका हल कोई नहीं है। तौबा करते हो कहो, या अल्लाह मेरी तौबा। फिर कहो, या अल्लाह मेरी तौबा। फिर कहो, या अल्लाह मेरी तौबा। हाथ उठाओ, अल्लाह हम अताहु। ऐ अल्लाह, तेरे महबूब की उम्मत लुट गई, पिट गई, मिट गई। जहरों ने भी बमों से उड़ा दिया और तेरे पानी ने, तेरी हवा ने, तेरे पहाड़ों ने, तेरे पत्थरों ने, तेरे दरियाओं ने भी हम तबाह बर्बाद कर दिया। या अल्लाह, एक चोर के हाथ कटने तेरे महबूब के आंसू नहीं रुक रहे थे। आज कितनों को हम पानी में डूबता वीडियो में देख रहे हैं। घरों को बहता देख रहे हैं। लाशें तैर रही। या अल्लाह, या अल्लाह, किसके पास जाए? किधर जाए? तू नहीं सुनेगा तो और रब कौन है? किसके आज तेरा नब भी जिंदा होता। तुम उनके दरबार में जाके उनको सिफारिश सहाबा पे दुख आता था। वो भागे-भागे तेरे नबी के पास आते थे। तेरा महबूब हाथ उठाता था। बादल छट जाते थे। हर मुसीबत टल जाती थी। आज हम किसके पास जाए? सारी उम्मत इंसानियत छोड़कर हैवानियत पर आ गई है। या अल्लाह, तू सच्चों में हम झूठे हैं। तू इससे भी ज्यादा हमें पकड़े अज़ाब दे। हम सबको गर्क कर दे। हम हकदार हैं। हम सबको हवाओं से उड़ा दे। हम हकदार हैं। हम सबको तू दरिंदों के हवाले कर दे। हमारी बोटियां नोच ले। हम हकदार हैं। तू आग में फेंक दे। हम हकदार हैं। तू हवाओं से उड़ा दे। हम हकदार हैं। पर हम तौबा करते हैं। या अल्लाह। हम कमजोर मुसलमान हैं। देखना मेरे अल्लाह। 1445 साल का फासला है। हमारे और तेरे नबी के दरमियान। उन्होंने तो कभी कोई बुराई देखी नहीं थी। उनकी नेकी तो माहौल ने भी उनको नेक बनाया। हमारे तो चारों तरफ नंग है। बेहयाई है, फ़हाशी है। मैं अपनी नौजवान नस्ल को कैसे बचाऊं? मैं इन्हें कैसे तेरे करीब करूं? मैं कैसे इन्हें तेरे नबी के करीब करूं? मैं कैसे इनसे तौबा करूं। हर तरफ गुनाहों का डेरा है। बदकरदारों का डेरा है। तूने बदकिरदारों को ताकतवर बना दिया। तूने फिरौनों को ताकत दी। और हमारे जैसे कमजोर कीड़े-मकोड़ों की तरह पिस रहे। तू आ ना या अल्लाह। तूने मूसा के फिरौन को पकड़ा तो था। सिर्फ 40 साल में पकड़ लिया था। तूने लश्करों समेत बर्बाद कर लिया था। तूने कारून को धंसा दिया था। तूने आदो समूद को तबाह कर दिया था। या अल्लाह, हमारे फिरौनों को कब पकड़ेगा? या इनके सीनों से दिल निकल गए। इनके सीनों में दिल नहीं है। पत्थर हैं। या अल्लाह। इन शक्ल के इंसान हैं। ये अंदर से भेड़िए हैं। या अल्लाह, ये क्या कर रहे हैं? चारों सूबों में बेगुनाहों को कत्ल किया जा रहा है। बच्चियों की इज्जतों को लूटा जा रहा है। या अल्लाह, फरियाद करे तो किससे करें? किसको सुनाए? या अल्लाह, तू आजा ना। बच्चा तड़पता है तो अम्मा को पुकारता है ना, कि मां की गोद में उसे पनाह मिलती है। वो थप्पड़ भी मारती है तो फिर भी उसकी गोद में गिरता है। तू हमें धक्का भी दे तो हमने तेरे सामने गिरना है। तू नजरें फेर तो सकता नहीं। हम हर वक्त तेरी नजरों के सामने हैं। या अल्लाह, लेकिन तेरे ही पास आएंगे ना। चारों तरफ से बैठ रहे हैं। देख गज़ा में तेरे हबीब की उम्मत के साथ यहूदियों ने क्या कंसीडर किया। किस तरह गोश्त उनके बोटी बनकर हवाओं में अभी तक उड़ रहे हैं। पाकिस्तान में किस तरह मछलियों की तरह लोग बह गए हैं। जाएंगे समंदर में। समंदर की मछलियों की खिजा बनेंगे। हिंदुस्तान में कितने मुसलमान तबाह बर्बाद हो गए हैं। हम तौबा करते हैं। हम तेरी मिन्नत करते हैं। तू आज झोली मेली है या शय कोई नहीं है। खोटे सिक्के अंदर मौला, एक तेरा दरबार है। जिसे खोटा सिक्का भी चल जाता है। बाकी तो हर कोई खराब हो जाए। हमारे खोटे अमल कबूल फरमा ले। हमारी झूठी नमाज़ें कबूल फरमा ले। किसी का रोना पसंद आया हो तो दिन फेर दे या अल्लाह। बहुत सारा मजमा रो रहा है। बहुत सारे घुटनों में सर दे के रो रहे हैं। कोई आंसू तो पसंद कर। किसी की हाय तो पसंद कर। किसी की पुख फरियाद तो पसंद कर। बेबस हो गए हैं मौला। लाचार हो गए हैं मेरे मौला। बेबसा है लाचार हैं। ला मलजा वला मंजा का इल्ला इरे सिवा कोई जयपनाह नहीं है। आजा अपने हबीब की उम्मत पर आजा। हमें जालिमों से छुड़ा ले। हमें भेड़िया नुमा इंसानों से छुड़ा ले। हमें दरिंदा नुमा इंसानों से बचा। हमें अपनी हवाओं के अज़ाब से बचा ले। हमें पत्थरों-पानियों के अज़ाब से बचा ले। या अल्लाह, सैकड़ों मन वजनी पत्थरों को कौन गिरा सकता है तेरे सिवा? गांव के गांव मिट्टी में दब गए। या अल्लाह माफी दे दे। इन हवाओं को हुकुम दे दे। नरम चलने का। इन पानियों को हुक्म दे दे। नरम चलने को। इन बारिशों को रोक दे। ऊपर से बारिश हो रही है। नीचे तूफानी पानी है। मैं नंगे आसमान के नीचे तेरे महबूब की उम्मत बैठी है। या अल्लाह, मैं देख कर आया हूं। छोटे-छोटे बच्चे, बूढ़ी औरतें खमों में बेपसी की तस्वीर बने हुए हैं। या अल्लाह, हमारी ये फरियाद, ये रोना-धोना कुबूल कर ले और हमें माफ कर दे और हमारे मुल्क की तकदीर बदल दे। पूरे 57 इस्लामी मुल्कों की तकदीर बदल दे। इन्हें ताकत दे। इन्हें ईमान दे। इन्हें हौसले दे। इन्हें कुफ्र पर ताकत अता फरमा। सारी दुनिया के अहले बाततिल को हिदायत दे दे। हिदायत नहीं है तो फिर इनके साथ आदो समूद वाला हाल फरमा। इनको तूने बड़ी मोहलत दी। या अल्लाह, पहली दफा जब से उम्मत वजूद में आई है, ये तीसरी सदी जा रही है कि उम्मत कीड़े-मकोड़ों की तरह पिस रही है, चक्की में गंदुम की तरह पिस रही है और बाततिल गुर्राता है कि हम हैं इस कायनात के मालिक। तू आ इनको बता मालिक तू है, ये नहीं है। तू है, ये नहीं है। जो शहीद हो गए, पानी में गर्क हो गए, जो अफगानिस्तान जलजले में शहीद हो गए। जो गज़ में शहीद हो गए, जो पानियों में बह गए, सबको जन्नतुल फिरदौस अता फरमा। जिनके मकान बह गए, जिनके घर टूट गए, पूरे पाकिस्तान वालों को हिम्मत दे। इन सबके मकान बनाए और जिन्होंने दरियाई रास्तों को रोका। और उसमें उन्होंने अपनी हवस और माल की तमाम लोगों के घरों को बर्बाद किया। उनको बर्बाद कर दे या अल्लाह। उनको सजा दुनिया में दे। हमें अपनी आंखों से दिखा। जिन्होंने पानियों के रास्ते रोके। जिन्होंने नालों पे बिल्डिंग बनाई। जिन्होंने नालों को बंद किया। अपने चंद पैसों के लिए। जिन्होंने पानी दरियाओं के बेट में कॉलोनियां बनाई अपनी शवतों और हवस के लिए। इन्हें इबरत का निशान बना दे। इनसे सब कुछ छीन ले। इनके कपड़े भी उतार दे। इनको नंगा कर दे। ये रहम के मुस्तहिक नहीं। रहम के मुस्तहिक इन्हें पानी बहा के ले गया। इनके घर खंडर बन गए। एक लंबी मुद्दत के बाद पाकिस्तान में कोई घर बनाता है। आज वो खंडर बने पड़े हैं। या अल्लाह, तू आजा। या अल्लाह। मैं तो अब पुकारते-पुकारते भी थक गया हूं। मेरी आवाज बैठ रही है। मेहरबानी कर दे। आज अपनी रजा का ऐलान कर दे। ऐ ईदगाह मस्जिद के फरिश्तों, मुझे पता है तुम भी बहुत ज्यादा हो। हम रो रहे हैं। तुम भी रो हमारे साथ। हम रो रहे हैं। तुम भी रो हमारे साथ। नमाज के बाद जब वापस जाओगे तो अल्लाह को बताना, या अल्लाह तेरे हबीब की उम्मत को बहुत रोता देखा है हमने। वो तेरे सामने फरियाद कर रहे हैं। हमारे हबीब के पास भी जाना। उनको भी बताना, या रसूल अल्लाह, पाकिस्तान की नहीं, पूरी दुनिया की उम्मत तबाहाल है। दुआ फरमा दें। ऐ रब, तू सब कुछ है, हम कुछ नहीं है। रब्बना आतना दुनिया हसना, आखिरत हसना। सल्लल्लाहु ताला नबी करीम।