Transcription
हर साल कई बार, हर 6 महीने में, और कभी-कभी तो हर 3 महीने में नए स्मार्टफोंस लॉन्च होते रहते हैं। जैसे ही यह लॉन्च होते हैं, आपके मन में एक सवाल घूमने लगता है कि ये नया फोन कैसा है? यह वाला ले लूं? अपना पुराना वाला बेच दूं? अपग्रेड कर लूं या एक्सचेंज कर लूं? मतलब, कभी-कभी हाइप इतनी ज्यादा होती है कि दिमाग चलना बंद कर देता है।
लेकिन क्या हर साल नया फोन लेना जरूरी है? हम अपने पुराने फोन के बारे में नेगेटिव सोचने लगते हैं। "मेरा फोन एक साल पुराना हो गया है, इसमें नए फीचर्स नहीं है, अब तो लैग करने लगा है, बैटरी बैकअप भी पहले जैसा नहीं रहा, फोन हीट होने लगा है जैसे रॉकेट बनने की कोशिश कर रहा है," और ना जाने क्या-क्या। ये सब सोच-सोच कर हम खुद को कन्वेंस करने लगते हैं कि नया फोन लेना जरूरी है। लेकिन क्या यह सच में जरूरत है या सिर्फ इल्यूजन?
आज इस वीडियो में हम यह समझेंगे कि हर साल स्मार्टफोन अपग्रेड करना जरूरी है या नहीं। और अगर है, तो किसके लिए? मैं आपसे बात करने वाला हूं कि आपको कौन से फैक्टर्स का ध्यान रखना चाहिए, कब फोन अपग्रेड करना सही है, और कैसे आप अपने पैसे की वैल्यू को गिरने से बचा सकते हैं। और हां, एक शॉकिंग बात भी शेयर करूं जो आपके अपग्रेड डिसीजन को हमेशा के लिए बदल देगा। तो वीडियो को एंड तक जरूर देखिए। और अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है, तो जल्दी से कर लीजिए और बेल आइकॉन दबाकर 'ऑल' पर क्लिक कर दीजिए ताकि नए वीडियो का अपडेट सबसे पहले आपको मिले।
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम है प्रिंस और आप देख रहे हैं टेक तत्व विचार।
आपने नोटिस किया होगा कि स्मार्टफोन कंपनीज कैसे हर 6 महीने में या 1 साल में नए फोंस लॉन्च करती रहती हैं। जैसे ही एक नया फोन का टीजर आता है, सोशल मीडिया और इसी तरह के कई सवाल और फिर वही फोम में स्टार्ट हो जाता है। आप सोचने लगते हैं कि अरे, यह नए फोन में तो नए फीचर्स हैं, यह तो मेरे पुराने फोन को बीट कर देगा।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कंपनीज ऐसे हर छोटे अपग्रेड के साथ नए फोंस क्यों लाती हैं? इसका रीजन है मार्केट डायनेमिक और कंपटीशन। स्मार्टफोन कंपनीज हर वक्त एक रेस में हैं। हर ब्रांड चाहता है कि वह सबसे पहले नए फीचर्स लेकर आए। और यह रेस सिर्फ टेक्नोलॉजी के लिए नहीं है, बल्कि आपका अटेंशन और वॉलेट ग्रैब करने के लिए भी है।
वैसे तो नए फोंस काफी एक्साइटिंग लगते हैं, लेकिन आपको एक चीज समझनी जरूरी है। कंपनीज का काम है नए प्रोडक्ट्स बना के उनका हाइप क्रिएट करना। इंक्रीमेंटल अपग्रेड्स मतलब छोटी-छोटी इंप्रूवमेंट्स का कांसेप्ट यहीं से शुरू होता है। जैसे नए फोन में बस एक नया प्रोसेसर का नाम बदल दिया, या कैमरे में एक नए मोड का एडिशन कर दिया, हाई रिफ्रेश रेट या बेटर डिस्प्ले जोड़ दिया। नहीं तो डिजाइन के नाम पर और नए फोन का पूरा ऐड रेडी है।
मान लीजिए एक नए फोन का ऐड बोलता है कि इसमें AI पावर्ड कैमरा है। रियलिटी यह है कि आपका पुराना फोन भी वही AI फीचर्स हैंडल कर सकता है, बस नए मॉडल के लिए मार्केटिंग में बड़ा क्लेम कर दिया गया। इसका नतीजा आपको लगता है कि आपका फोन अब आउटडेटेड है, लेकिन असल में वो अभी भी परफेक्टली काम कर रहा है। जैसे परफेक्टली फंक्शनल रहते हैं, बस कंडीशन यह है कि उनको प्रॉपर्ली मेंटेन किया जाए।
सबसे पहले बात करते हैं परफॉर्मेंस की। अक्सर लोग सोचते हैं कि 1 साल बाद उनका फोन स्लो हो जाता है। लेकिन अगर आप सॉफ्टवेयर अपडेट्स ले रहे हैं, अननेसेसरी ऐप अनइंस्टॉल करते हैं, और स्टोरेज फ्री रखते हैं, तो फोन की परफॉर्मेंस काफी देर तक मेंटेन रह सकती है। अगर आप कैजुअली फोन यूज करते हैं, तो एक फ्लैगशिप फोन आपको इजीली तीन-चार साल तक बिना किसी प्रॉब्लम के सर्व कर सकता है। आप अपना फोन रिसेट भी कर सकते हैं आफ्टर अ ईयर। इससे आपका फोन अच्छे से क्लीन हो जाता है और बेटर परफॉर्म करता है।
दूसरा एस्पेक्ट है बैटरी डिग्रेडेशन का। हर लिथियम-आयन बैटरी टाइम के साथ डिग्रेड होती है, लेकिन इसका स्पीड काफी स्लो होता है। अगर आप फोन को सही तरीके से चार्ज करें। वैसे आजकल का टेक इतना एडवांस है कि आपको जल्दी कोई दिक्कत नहीं आने वाली। पर ध्यान रखने का फायदा यह होगा कि आपको नए फोन की जरूरत सिर्फ बैटरी के वजह से नहीं पड़ेगी।
एक और इंपॉर्टेंट फैक्टर है OS अपडेट। कई ब्रांड्स जैसे Apple, iOS को चार-पांच साल तक OS अपडेट और सिक्योरिटी पैचेज देते हैं। और Samsung भी Android फोंस के लिए 3-4 साल तक OS और 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देता है। तो अगर आपका फोन अभी भी लेटेस्ट OS पर चल रहा है, तो आपको शायद नए फीचर्स की जरूरत महसूस नहीं होगी।
अगर आप दो-तीन साल के बाद अपग्रेड करते हैं, तो नए फोंस का इंपैक्ट ज्यादा नोटिसेबल होता है और नए फीचर्स का एक्साइटमेंट भी बढ़ जाता है। तो सोचिए, क्या हर साल अपग्रेड करना जरूरी है, या फिर अपने फोन को दो-तीन साल तक चलाना एक बेटर डिसीजन हो सकता है, जिसमें आपका पैसा भी बचे और नए फीचर्स का मजा भी डबल हो? तो अगर आपका फोन सही काम कर रहा है, तो शायद एक साल रुकने का डिसीजन आपके लिए बेस्ट हो सकता है। आपका क्या विचार है? कमेंट में जरूर बताएं।
अच्छा, तो अब यह समझना जरूरी है कि हर यूजर के लिए हर साल अपग्रेड करना जरूरी नहीं होता। लेकिन कुछ स्पेसिफिक लोग हैं, जिनके लिए नए फोन का यूज करना एक जरूरत बन जाता है। सबसे पहले बात करते हैं उन लोगों की जो कंटेंट क्रिएशन, फोटोग्राफी या गेमिंग जैसे फील्ड्स में काम करते हैं।
अगर आप एक यूट्यूबर हैं या इंस्टाग्रामर हैं, तो बेटर कैमरा और वीडियो स्टेबलाइजेशन आपके काम को नेक्स्ट लेवल पर ले जा सकते हैं। जैसे एक कंटेंट क्रिएटर के लिए बेटर कैमरा और वीडियो स्टेबलाइजेशन बहुत जरूरी हो सकती है। इसी तरह गेमर्स के लिए नए प्रोसेसर और बेटर रिफ्रेश रेट इंपॉर्टेंट होते हैं।
एक और कैटेगरी है हाई-एंड यूजर या फ्लैगशिप यूजर की, जो हमेशा बेस्ट परफॉर्मेंस और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के लिए अपग्रेड करते हैं। जैसे जो लोग 5G के आते ही 5G फोन पर स्विच कर गए, या जो लोग हर नए फ्लैगशिप का वेट करते हैं, क्योंकि उन्हें लेटेस्ट फीचर्स का एक्सपीरियंस सबसे पहले चाहिए।
लेकिन अगर आप एक नॉर्मल यूजर हैं, जो अपने फोन को कॉल्स, मैसेजेस और थोड़ी बहुत सोशल मीडिया ब्राउजिंग के लिए यूज करते हैं, तो आपके लिए हर साल अपग्रेड करने की जरूरत नहीं है। एक नॉर्मल यूजर के लिए पुराने फोन का प्रोसेसर या कैमरा भी काफी होता है, जब तक फोन सही काम कर रहा हो।
फॉर एग्जांपल, मान लीजिए एक हाई-एंड यूजर अपना फ्लैगशिप फोन अपग्रेड करता है, क्योंकि नए मॉडल में उसे बेटर जूम कैपेबिलिटी और 4K या 8K वीडियो रिकॉर्डिंग मिलती है। लेकिन एक नॉर्मल यूजर के लिए यह नए फीचर सिर्फ एक लग्जरी होते हैं, जरूरत नहीं। तो अगर आपका काम कटिंग-एज टेक्नोलॉजी पर डिपेंड नहीं करता, तो तीन-चार साल तक अपना फोन चलाना आपके लिए ज्यादा वैल्यू फॉर मनी डिसीजन होगा। और ऑनेस्टली, अगर फोन सही काम कर रहा है, तो नए फोन के लिए अपना वॉलेट खाली करना कोई स्मार्ट मूव नहीं होगा।
तो क्या आप एक हाई-एंड यूजर हैं या एक नॉर्मल यूजर? कमेंट में मुझे जरूर बताइए आपका क्या ओपिनियन है।
वेल, आगे बढ़ते हैं और जानते हैं एक और इंपॉर्टेंट एंगल: फाइनेंशियल लॉस। हर साल फोन अपग्रेड करना एक बढ़िया डिसीजन लगता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आपके पैसे की वैल्यू को कितना इंपैक्ट करता है?
सबसे पहले बात करते हैं डेप्रिसिएशन की। एक नए स्मार्टफोन का वैल्यू एक साल में लगभग 40 से 60% तक गिर जाता है। जैसे अगर आपने 60,000 का फोन लिया, तो अगले 1 साल के अंदर उसकी रिसेल वैल्यू 12 से 18,000 तक गिर सकती है। हर नए मॉडल के आते ही पुराने फोन की वैल्यू और ज्यादा कम हो जाती है, चाहे फोन अभी भी परफेक्टली काम कर रहा हो।
हां, प्रीमियम फोंस जैसे Apple के iPhones अपनी वैल्यू थोड़ी बेहतर बनाए रखते हैं, लेकिन फिर भी डेप्रिसिएशन तो होता ही है। आप सोचते हैं कि नए मॉडल के लिए इतना पैसा खर्च करना वेस्ट होगा, तो फोन के केस में क्यों डिफरेंट लगता है? यह भी एक गैजेट है जो दो-तीन साल या उससे ज्यादा चल सकता है, अगर आप उसका ध्यान रखें।
अब सोचिए, अगर आप हर साल अपग्रेड करने के बजाय 3-4 साल के लिए एक अच्छा फोन लेते हैं, तो आपको नए फोन का रियल वैल्यू मिलता है। इस तरह आपका एक बड़ा इन्वेस्टमेंट भी जस्टिफाई होता है और आप अपने पैसे का बेटर यूज कर सकते हैं।
अगर आप एक अच्छा फोन लेते हैं, सिर्फ एग्जांपल के लिए, जैसे 60,000 या 70,000 का, और उसे 4 साल तक चलाते हैं, तो इफेक्टिवली आपका फोन आपको 15,000 से 17,500 पर ईयर का पड़ता है। लेकिन अगर आप हर साल 60,000 का नया फोन खरीदते हैं, तो आपका खर्चा 4 साल में लगभग 2,40,000 तक पहुंच जाता है।
यह समझना जरूरी है कि लॉन्ग-टर्म यूज करने से आपको नए फोन के अननेसेसरी एक्सपेंसेस से बचने का मौका मिलता है। अब सोचिए, क्या हर साल नए फोन के लिए 60,000 से 1 लाख तक का खर्चा करना फाइनेंशियल सेंस बनाता है, या अपने परफेक्टली फाइन काम करते फोन को और कुछ साल यूज करके पैसा बचाना बेटर है?
इसके साथ ही जुड़ा एक और सवाल है कि हमेशा एक स्मार्टफोन पर कितना पैसा स्पेंड करना चाहिए? तो इस पर कभी और बात करेंगे, नहीं तो वीडियो और लंबी हो जाएगी। पर अब एक ऐसे शॉकिंग सच के बारे में बात करते हैं, जो शायद आपको हर साल फोन अपग्रेड करने से रोक दे।
अक्सर हम नए फोन के टेंप्टिंग एड्स और फीचर्स के चक्कर में पुराने फोन को इग्नोर कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सब कैसे आपके डिसीजन को इन्फ्लुएंस करता है? सबसे पहले बात करते हैं प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस की। यह एक स्ट्रेटजी है जो कई स्मार्टफोन कंपनीज अपने प्रॉफिट बढ़ाने के लिए यूज करती हैं।
कंपनी इंटेंशनली पुराने फोंस के लिए नए सॉफ्टवेयर अपडेट्स भेजती हैं, जो अक्सर फोंस को स्लो कर देते हैं। आपने यह खुद भी नोटिस किया होगा, 1 साल या 2 साल बाद आपका फोन अपडेट के बाद स्लगिश फील करने लगता है। यह एक इल्यूजन क्रिएट करता है कि आपको नए फोन की जरूरत है, जबकि रियलिटी में आपका फोन परफेक्टली फाइन चल रहा होता है।
और नए मॉडल्स के फीचर्स हमेशा रेवोल्यूशनरी नहीं होते। कई बार कंपनी नए फोंस में सिर्फ कॉस्मेटिक्स या माइनर अपग्रेड्स करती हैं, जैसे नए कलर ऑप्शंस, स्लाइटली बेटर कैमरा स्पेक्स, या एक एडिशनल सेंसर। लेकिन इन फीचर्स का रियल-लाइफ इंपैक्ट काफी मिनिमल होता है।
फॉर एग्जांपल, अगर आप एक नॉर्मल यूजर हैं, तो एक 3 साल पुराना फ्लैगशिप फोन भी नए मिड-रेंज फोन से बेटर परफॉर्मेंस देता है। वैसे, आपने सुना होगा कि Apple के कुछ नए फीचर्स पुराने iPhones में एक्सेसिबल नहीं होंगे। हालांकि, Android में भी अभी सही से नहीं आए। तो क्या यह बस स्ट्रेटजी थी नए मॉडल्स को ज्यादा अट्रैक्टिव बनाने की?
अब बात आती है बैटरी लाइफ के इशू की। अक्सर लोग सोचते हैं कि उनका पुराना फोन चार्ज जल्दी खत्म कर रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि एक नए बैटरी रिप्लेसमेंट के साथ आपका पुराना फोन फिर से एकदम नया लग सकता है? एक नए फ्लैगशिप फोन के लिए 60,000 से 1 लाख खर्च करने से बेटर है कि 2 से 4,000 का बैटरी रिप्लेसमेंट करवा के अपने पुराने फोन को नई लाइफ देना।
क्या आपको नहीं लगता कि यह ज्यादा स्मार्ट डिसीजन है, इस धरती के लिए भी और हमारे लिए भी? और सबसे शॉकिंग बात यह है कि बहुत सारी कंपनीज नए फीचर्स को इंटरनेशनली ओवरहाइप करती हैं। जैसे एक नए कैमरा सेंसर का एग्जांपल ले लीजिए। कंपनीज आपको दिखाएंगी कि नए फोन से फोटोज काफी बेटर आती हैं, लेकिन रियल वर्ल्ड यूज में डिफरेंस बेरली नोटिसेबल होता है। यह मार्केटिंग का एक तरीका है जो आपके डिसीजन को इन्फ्लुएंस करता है।
सोचने की बात यह है कि आपका पुराना फोन सिर्फ इसलिए आउटडेटेड लगता है, क्योंकि कंपनीज और मार्केटिंग स्ट्रेटजी आपको ऐसा फील करवाती हैं। जब आप लॉजिकली सोचेंगे, तो समझ में आएगा कि आपका पुराना फोन अभी भी परफेक्टली काम कर रहा है और नए फोन की जरूरत सिर्फ एक परसेप्शन है, रियलिटी नहीं।
तो दोस्तों, अब तक हमने काफी सारी इंपॉर्टेंट बातें डिस्कस की हैं। हर साल फोन अपग्रेड करना एक पर्सनल चॉइस है, लेकिन हमने देखा कि अगर आपका फोन अच्छे से चल रहा है, तो उसे दो-तीन साल या उससे ज्यादा यूज करना ज्यादा सेंसिबल और फाइनेंशियल स्मार्ट डिसीजन हो सकता है। चाहे वो परफॉर्मेंस का एंगल हो, बैटरी लाइफ का, या नए फीचर्स का, लॉन्ग-टर्म यूज काफी प्रैक्टिकल लगता है।
मेरा पर्सनल ओपिनियन है, अगर आप एक कैजुअल यूजर हैं और आपका फोन अभी भी स्मूथली चल रहा है, तो नए फोन के चक्कर में मत पड़िए। बस अपने करंट फोन का ध्यान रखिए और मैक्सिमम यूज कीजिए। लेकिन अगर आपका काम फोन के ऊपर हैवीली डिपेंड करता है, जैसे कंटेंट क्रिएशन, गेमिंग या फोटोग्राफी, तो नए और कटिंग-एज टेक्नोलॉजी वाले फोन का अपग्रेड आपके लिए जरूरी हो सकता है।
और अगर आपके पास है कोई इंटरेस्टिंग टिप या एक्सपीरियंस जो नए फोन अपग्रेड करने के डिसीजन को इंपैक्ट करता है, तो वो कमेंट में जरूर शेयर कीजिए। शायद हम सबको कुछ नई बात सीखने को मिले। और हां, अगर यह वीडियो पसंद आई हो, तो लाइक करना बिल्कुल मत भूलिए। अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो नया फोन लेने का प्लान कर रहे हैं, और चैनल को सब्सक्राइब करके सपोर्ट कीजिए। मैं मिलता हूं आपसे अगले वीडियो में, तब तक के लिए बाय।