Transcription
हजरत अब्बास वह हैं जिसने हर कदम पर इमाम हुसैन का साथ निभाया। वह हजरत अली के बेहद बहादुर बेटे थे। उन्होंने कर्बला के मैदान में झंडा उठा रखा था, इसलिए उन्हें अलमदार कहते हैं।
हजरत अब्बास ने जब बच्चों की प्यास को देखा तो उनसे रहा नहीं गया और वह पानी लेने के लिए चल दिए। किसी में भी इतनी हिम्मत ना थी कि वह हजरत अब्बास का मुकाबला कर सके। यजदी ऐसे भाग रहे थे जैसे शेर को देखकर बकरियां भागती हैं।
हजारों की तादाद में लश्कर था, उस पूरे लश्कर के बीच में से शेर की तरह जाकर आपने दरिया में से पानी लिया और पानी को अपने हाथ में लेते ही छोड़ दिया और कहा, "आका हुसैन के बिना जिंदगी किस काम की?"
पानी भरकर हजरत अब्बास आ रहे थे तो यजीदी छुपे हुए थे। उन्होंने छुपकर आपके ऊपर तीर चलाया। हजारों तीर आप पर एक साथ चलाए गए। आपके हाथ पर हमला किया गया, आपका हाथ शहीद हो गया। आपके दूसरे हाथ को भी शहीद कर दिया गया और आपको शहादत नसीब हुई और आपने जवानों के अंदर जज्बा पैदा करके चले गए।