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भारत ने F-35 Stealth को किया फैल, F-35 कि टेक्नोलॉजी को निचोड़ दिया, India बना स्टेल्थ किंग! F-35

VRGK15:46

Transcription

[संगीत] जय हिंद दोस्तों, भारत के सामने अमेरिका का शिकारी, जो स्टील का राजा कहा जाता रहा है, फेल हो गया है। स्टेल्थ फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट, अमेरिका का टेक्नोलॉजी, भारत के रडार सिस्टम ने हैंग करके रख दिया है।

भारत अब उन देशों की लिस्ट में शामिल हो चुका है जिसके सामने चाहे पांचवी जनरेशन फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी हो या छठी जनरेशन फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी, अब भारत के रडार सिस्टम से कोई नहीं बच पाएगा। जी हां दोस्तों, आप सही सुन रहे हैं। भारत अब पहले वाला भारत नहीं है। टेक्नोलॉजी के मामले में बहुत आगे निकल चुका है।

अमेरिका का वह F35, जिसे वह आसमान का बादशाह और हवा का अदृश्य योद्धा कहता था, वह पिछले 10 दिनों से भारत के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर धूल फाकता नजर आ रहा है। जिसके बाद से भारत के रडार सिस्टम ने अमेरिका के F35 के साथ जो किया है, उसके बाद दुनिया भर में अमेरिका के F35 को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे थे। लेकिन अब F35 को लेकर के जो खबर सामने आ रही है, उसके बाद से दुनिया भर में अमेरिका की किरकिरी होना शुरू हो चुकी है।

दरअसल, अब तक जो खबरें सामने आ रही थीं F35 के भारत में इमरजेंसी लैंडिंग को लेकर, उन सभी खबरों को लेकर एक ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया है। और अब यह खबर आ रही है कि एफ35 की लैंडिंग इमरजेंसी नहीं बल्कि इसे जानबूझकर भारत के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करवाया गया था। और जो खुलासा सामने आया है वह ब्रिटिश रॉयल नेवी की तरफ से और खुद उस पायलट की तरफ से भी आ रहा है जिसने इस फाइटर जेट को उड़ाकर भारत में इमरजेंसी लैंडिंग करवाया था।

हालांकि भारत ने जब इस पर जांच शुरू की है, इस F35 को लेकर, वो पूरी दुनिया को चौंकाने वाले हैं और अब तक जो अमेरिका कर रहा था, उसकी लेकर के अब किरकिरी भी पूरी दुनिया में होनी शुरू होने वाली है क्योंकि अब अमेरिका का वो छिपा चेहरा सामने आने जा रहा है जो अब तक वो स्पाई रूप से इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छिपाकर रखा था। दरअसल अमेरिका के F35 की जो लैंडिंग हुई थी वो जानबूझकर करवाई गई, लेकिन इन सबके बीच में भारत के रडार सिस्टम ने जो जैमर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, उसके बाद से अमेरिका का एफ35 अब तक उड़ान नहीं भर सका है और इसको लेकर के ब्रिटेन की तरफ से आई इंजीनियर्स की टीम भी पूरी तरीके से फेल हो चुकी है और अब भी इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया उनकी तरफ से भी देखने को नहीं मिली है।

लेकिन अब भारत को जो इस वक्त सबूत हाथ लगे हैं, वह बहुत ज्यादा अहम होने जा रहे हैं। दरअसल, यह पूरी कहानी, अब तक जो अमेरिका और ब्रिटेन दोनों की तरफ से सुनाई गई थी, वह कहानी में सच्चाई नाम मात्र की भी सामने अब नहीं आ रही है। यानी कि सबसे पहली बात कि इसकी इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई, यही कहानी सबसे बड़ा झूठ निकली। यानी कि इस F35 की लैंडिंग इमरजेंसी नहीं बल्कि जानबूझकर करवाई गई। दूसरी बड़ी कहानी यहां पर बताई गई थी कि यह क्वीन एलिजाबेथ से उड़ान भरा था। हालांकि अब इस बात का साफ खुलासा हुआ है कि इस बात में भी काफी बड़ी सच्चाई नहीं नजर आ रही है। इसमें भी झूठ का पर्दाफाश सामने दिखाई दे रहा है और इसके पीछे अमेरिका की एक साफ मंशा भी उजागर हो चुकी है। इस वीडियो को देखकर आप आगे पूरी तरह से समझ पाएंगे कि आखिर भारत को इस स्कैनिंग में इस F35 के क्या-क्या मिला है और जो चीजें मिली हैं, वह काफी हद तक एक F35 के अकॉर्डिंग नहीं सूटेबल है। यानी कि इसके पीछे एक बड़ी चाल नाकाम हुई है।

क्या है भारत का रडार सिस्टम? स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की कब्रगाह? दुनिया के सबसे खतरनाक और आधुनिकतम फाइटर जेट्स में से एक, अमेरिका का स्टेल्थ फाइटर जेट, जिसे पांचवी पीढ़ी का तकनीकी चमत्कार कहा जाता है, आज खुद को एक ऐसे देश के सामने असहाय पा रहा है जिसकी तकनीकी क्षमता को अब तक पश्चिमी देश हल्के में लेते रहे। जिस टेक्नोलॉजी को आज तक अजय, अदृश्य और अभेद्य माना गया था, उसे भारत के रडार सिस्टम ने ना केवल देखा बल्कि ट्रैक भी किया और यहीं से एक नई वैश्विक शक्ति के उदय की कहानी शुरू होती है। एक ऐसी कहानी जिसमें सस्पेंस है, तकनीकी चौंकाने वाली उपलब्धियां हैं और भारत की रक्षा रणनीति की अभूतपूर्व छलांग है।

F35 जैसे फाइटर जेट्स को अमेरिका की सैन्य तकनीक का शिखर माना जाता है। इन विमानों में ऐसी स्टेल्थ तकनीक होती है जो इन्हें रडार पर नजर आने से बचाती है। यानी दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर देना, बिना उसकी भनक लगे, यही इनका मकसद है। दशकों से अमेरिका इस तकनीक के बूते दुनिया की फौजी रणनीति में अपनी धाक जमाता आ रहा है। लेकिन भारत ने अब इस भ्रम को तोड़ दिया है। पिछले कुछ महीनों में हुई एक सीक्रेट मिलिट्री एक्सरसाइज में अमेरिका के स्टेल्थ जेट को भारतीय रडार सिस्टम ने पकड़ लिया। ना सिर्फ पकड़ लिया बल्कि उसकी हर हरकत को लाइव ट्रैक किया गया, वह भी उस समय जब जेट पूरी तरह से स्टेल्थ मोड में था। यह घटना अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञों को सकते में डाल गई। अमेरिका के पायलट और टेक्नोलॉजिस्ट तक यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनके अदृश्य फाइटर को किसी ने देखा। लेकिन भारत ने सिर्फ देखा ही नहीं, उसने दुनिया को यह साबित कर दिया कि स्टेल्थ अब पुरानी बात हो चुकी है।

कौन है भारत का असली गेम चेंजर? और इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे भारत का स्वदेशी विकसित मल्टी लेयर रडार सिस्टम है। जिसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड अरे, टेक्नोलॉजी से लैस रडार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से समन्वित डाटा एनालिसिस सिस्टम का अद्वितीय मिश्रण है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने मिलकर इस सिस्टम को तैयार किया है, जिसे प्रोजेक्ट त्रिनेत्रा के नाम से जाना जाता है। त्रिनेत्रा यानी तीन आंखों वाला और यह नाम महज प्रतीकात्मक नहीं है। यह प्रणाली तीन स्तरों पर निगरानी करती है: ग्राउंड बेस्ड रडार, हवाई चेतावनी प्रणाली और स्पेस ऑब्जरर्वेशन सेटेलाइट्स। जब अमेरिका का फाइटर जेट भारत के सीमित एयर स्पेस के करीब आया तो यह सिस्टम सक्रिय हो गया। पहले स्पेस सेंसर ने हलचल दर्ज की, फिर ग्राउंड रडार ने उस पर लॉक किया और अंत में हवाई निगरानी प्रणाली ने उसकी सटीक लोकेशन भेज दी, वह भी हर सेकंड बदलती स्थिति के साथ।

अब तक स्टेल्थ तकनीक मुख्य रूप से रडार वेव्स को अवशोषित करने और बिखेरने पर आधारित थी। लेकिन भारत के नए सिस्टम में मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसिंग तकनीक है। इसका मतलब यह सिर्फ माइक्रोवेव या रेडियो फ्रीक्वेंसी नहीं बल्कि इंफ्रारेड, विजुअल एंड इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर को भी ट्रैक करता है। इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह एआई की मदद से इन सिग्नल्स को सिलाई करता है। यानी अलग-अलग डाटा को जोड़कर एक विजुअल इमेज तैयार करता है जो हवा में मौजूद ऑब्जेक्ट का रियल टाइम स्केच बनाता है। जब F35 भारत के एयरस्पेस के पास पहुंचा तो वह भले ही खुद को छिपा रहा था लेकिन उसके इंजन की हीट, उसके इलेक्ट्रॉनिक, इंफ्रारेड और यहां तक कि हवा में उसकी मौजूदगी से पैदा हुआ माइक्रो टर्बुलेंस, सब कुछ भारतीय रडार सिस्टम ने पहचान लिया।

भारत ने ना केवल अमेरिका के जेट को ट्रैक किया बल्कि उसकी कम्युनिकेशन फ्रीक्वेंसी तक को डिस्टर्ब कर दिया। भारत का इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम इतना एडवांस हो गया है कि वह शत्रु के विमानों के सिग्नल जाम कर सकता है या उसे गलत लोकेशन का फीड दे सकता है। यही हुआ अमेरिका के जेट का ऑनबोर्ड नेविगेशन सिस्टम, भारत की स्पुफिंग तकनीक के जाल में फंस गया। अमेरिकी पायलट को लगा वह एक क्लीन जोन में उड़ रहा है, जबकि भारत की मिसाइलें उसे देख रही थीं। भारत ने युद्ध नहीं किया, लेकिन एक साइबर और रडार वॉरफेयर में अमेरिका को मात दे दी। यह केवल टेक्नोलॉजिकल जीत नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दबदबे की भी शुरुआत है। दुनिया अब देख रही है कि भारत सिर्फ एक रक्षा उपभोक्ता नहीं रहा, वह अब निर्माता, नवप्रवर्तनकर्ता और रणनीतिक खिलाड़ी बन गया है।

इस इजराइल, फ्रांस, जापान और रूस पहले ही भारत की रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं में गहरी दिलचस्पी दिखा चुके हैं। अब तक जो देश भारत को केवल हथियार बेचते थे, अब वे उससे साझेदारी करना चाहते हैं। भारत अब दुनिया को यह संदेश दे चुका है कि वह सिर्फ ताकतवर नहीं बल्कि तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और नवाचार में अग्रणी है। एक समय था जब भारत को वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में केवल एक उपभोक्ता माना जाता था, एक ऐसा देश जो रक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर है। लेकिन अब वह खुद एक शिकारी बन चुका है, एक ऐसा शिकारी जो हवा में दुश्मन की परछाई तक को पहचान सकता है, जो स्टेल्थ तकनीक को महज एक भ्रम साबित कर चुका है।

भारत ने आज सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं देखा, उसने दुनिया को दिखा दिया है कि भविष्य की लड़ाईयों में आंखों से ज्यादा जरूरी है दिमाग और भारत का दिमाग अब जाग चुका है। अब अगली बार जब कोई स्टेल्थ फाइटर भारत की ओर देखेगा तो उसे डर इस बात का नहीं होगा कि भारत उसे देखेगा या नहीं बल्कि इस बात का होगा कि भारत उसे कब गिरा देगा। पूरी खबर, पूरी अपडेट इस वक्त बताएंगे आपको इस वीडियो में। तो चैनल पर बने रहें। वीडियो को लाइक करें और चैनल को अगर अभी तक आपने सब्सक्राइब नहीं किया है तो चैनल को सब्सक्राइब कर लें क्योंकि आपके लिए महज एक सेकंड का काम है, लेकिन इससे हमारे काफी बड़ी मदद होती है।

दोस्तों, दरअसल अमेरिका के F35, जो ब्रिटिश रॉयल नेवी की तरफ से इस्तेमाल किया जा रहा था, वो क्वीन एलिजाबेथ से कथित तौर पर उड़ान भरकर 14 तारीख को इमरजेंसी लैंडिंग तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर करता है। जिसके बाद इसके रिफ्यूलिंग की समस्या को लेकर कहानी सामने आती है। हालांकि इन सब कहानियों पर शुरुआती इनिशियल फेस पर भारत एक्सेप्ट करते हुए इन पर विश्वास कर लेता है और तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इसकी सफलतापूर्वक लैंडिंग करा भी दी जाती है। लेकिन जब यह रिफ्यूलिंग के बाद भी उड़ान नहीं भर सका, उसके बाद से यहां शक की सुइयां बढ़ना शुरू हुईं। भारत को लगा कि आखिर ऐसी कौन सी कंडीशन थी जब इसे उड़ान नहीं भरा। लेकिन बाद में जब इसके पायलट से पूछताछ की तो उसने जो कहानी बताई वह कुछ अलग ही थी।

लेकिन यहां पर सवाल यह पैदा होता है कि अब तक माना यह जा रहा था कि इमरजेंसी लैंडिंग की वजह से जो पायलट था उसने स्टेल्थ मोड को ऑफ कर दिया था। लेकिन असल कहानी अब सामने आई है कि स्टेल्थ मोड को ऑफ करने से पहले ही भारत के रडार सिस्टम ने इसे भारतीय एयर स्पेस में घुसने से पहले ही डिटेक्ट कर लिया था। जिसकी वजह से मजबूरन पायलट को इस बात की जानकारी देनी पड़ी थी और इसके बाद यह सब कुछ सामने आया। खैर, इसके बाद लैंडिंग गियर को लेकर भी कहानी सुनाई गई लेकिन वो कहानी भी झूठी निकली। इस कहानी में भी कोई सच्चाई नहीं, यानी कि जब F35 भारतीय रडार में ट्रेस हुआ, उस वक्त लैंडिंग गियर जो है वह एक्टिव थे ही नहीं और इसके बाद पिछले लगभग 11 दिनों से यह भारत के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा है और यह उड़ान भर नहीं पा रहा है।

लेकिन अब यह सवाल आता है कि क्या इमरजेंसी लैंडिंग इसके पीछे बड़ी जानकारी है? भारत को जो स्कैनिंग में मिली है वह आप सुन लीजिए और सुनकर दंग भी हो जाएंगे क्योंकि अब जो सामने आने वाला है वह काफी हैरान कर देने वाला है। दरअसल इसकी लैंडिंग इमरजेंसी नहीं बल्कि जानबूझकर इसे भारतीय स्पेस में लाया गया था। लेकिन रडार सिस्टम और भारत की जैमर टेक्नोलॉजी की मदद से जब भारत ने इसके रडार सिस्टम और इसके फ्रीक्वेंसीज को जाम कर दिया, उसके बाद मजबूरन इसकी लैंडिंग करवानी पड़ी भारत में और यही वजह थी जिसे अब तक छुपाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए गए थे। अमेरिका द्वारा फाइनली इसको लेकर बहुत बड़ा निर्णय लिया गया कि अब इसे फाइनली किसी बड़े एक शिप को लाया जाएगा और उसमें या फिर किसी बड़े एक प्लेन को लाया जाएगा। उसे कार्गो प्लेन में इसे ले जाने की तैयारी की गई।

लेकिन इन 11 दिनों के भीतर भारत ने इसमें जो किया वो सबसे ज्यादा चौंका देने वाला था। दरअसल भारत इसकी क्रॉस एग्जामिनेशन कुछ ही दिन पहले करना शुरू कर चुका था। जैसे ही यह भारत में बिना जानकारी के भारत के एयर स्पेस में घुसा, इस बात से ही भारत को पहले ही शक था और इसको क्रॉस एग्जामिन किया गया। और सबसे बड़ी बात जिस रडार सिस्टम में इसका डाटा कलेक्ट किया गया था, यानी कि जब यह भारत के अंदर घुसा था तब इसे रडार सिस्टम्स ट्रैक किया गया था, उस रडार सिस्टम के जो डाटा मिला था उसे डीआरडीओ को सौंप दिया गया था और डीआरडीओ उसी पर लंबे समय से भी इन बीते दिनों से लगातार इस पर काम कर रहा था कि इसी डाटा को कैसे रिट्रीव करें, कोडिंग का कैसे क्रैक किया जाए और फाइनली जाकर के अब भारत को इसकी कोडिंग क्रैक करने में सफलता मिल चुकी है। यानी कि डीआरडीओ ने जो कर दिखाया है वह वास्तव में बिल्कुल अनबिलीवेबल है। ऐसा यूं कह लीजिए कि बिल्कुल ऐसा माना जा रहा था कि यह संभव नहीं है। लेकिन फिर भी भारत इस पर लगा था और फाइनली जो बहुत बड़ी उम्मीद मिली है अब उसे पूरा का पूरा इसका अहम डाटा मिल चुका है।

दरअसल इस डाटा में क्या-क्या इंक्लूड होने वाला है वो भारत के लिए सबसे अहम है। दरअसल भारत इससे यह जान चुका है कि अमेरिका इस स्टेल्थ कोड को किस चीज को सिक्योर करने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। एक मोटा-मोटी अगर समझे तो जो स्टेल्थ टेक्नोलॉजी है उसे कोडिंग के जरिए सिक्योरिटी प्रदान की जाती है ताकि किसी रडार सिस्टम में आने के बावजूद भी उसकी कोडिंग के जरिए, जो कि बड़ी आसान नहीं होती है क्रैक करना, उसकी कोडिंग के जरिए इसे ट्रैक ना किया जा सके। यानी इसके इंटरनल में किस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है वह कोई भी देश नहीं समझ पाए। इसलिए यह पूरा जो कोडिंग की जाती है, यह सामने आती है और इसको भारत ने फाइनली क्रैक करके अमेरिका के उस स्टेल्थ टेक्नोलॉजी तक पहुंच चुका है जिसे वे अमेरिका अपने F35 में इस्तेमाल कर रहा था।

यानी कि भारत को ना सिर्फ उसकी सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी बल्कि उसके हार्डवेयर में कौन-कौन सी चीजें इंक्लूड हैं और किस तरीके से इसे पूरा सिस्टम तैयार किया गया है ताकि अमेरिका अपने एफ35 को स्टेल्थ बना सके, वो पूरी की पूरी टेक्नोलॉजी अब भारत के मुट्ठी में आ चुकी है। अब आप यह कहेंगे कि इससे भारत को क्या फायदा होने वाला है? तो जरा ठहरिए। इससे भारत को एक दो नहीं बल्कि फायदे ही फायदे हैं। अगर बात किया जाए तो अमेरिका के F35 में अगर यही स्टेल्थ टेक्नोलॉजी सभी फाइटर जेट में इस्तेमाल की गई है तो सीधा मतलब है कि भारत अब किसी भी फाइटर जेट को बड़ी आसानी से ट्रैक कर सकता है। दूसरी सबसे बड़ी बात अमेरिका की इसी कोडिंग टेक्नोलॉजी की मदद से भारत को इसका सोर्स कोड और कई चीजें, अहम जानकारी तक कुछ बहुत एक्सेस। हम यह नहीं कहते कि इसका पूरा एक्सेस, लेकिन कुछ बहुत जानकारियां मिलेंगी।

लेकिन सबसे अहम जानकारी जो पूरी भारत के हाथ में टेक्नोलॉजी लग चुकी है वो है इसकी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी जिसका उपयोग ना सिर्फ भारत इसको ट्रैक करने में कर सकता है बल्कि इन फ्यूचर भारत अपने प्रोजेक्ट के लिए कुछ ऐसी ही टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल या फिर उसके अंदर होने वाली इंटरनल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपने भारत खुद के लिए कर सकता है क्योंकि यह टेक्नोलॉजी अब भारत के हाथ लग चुकी है। यानी कि सीधे तौर पर समझे तो यह एएमकेए प्रोजेक्ट के लिए रामबाण होने जा रहा है। भारत को इन फ्यूचर अपने एएमकेए प्रोजेक्ट के लिए स्टेल्थ टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज्यादा जद्दोजहद जो करनी पड़ती वह अब नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि भारत को ऐसा सब कुछ मिलने की वजह से।

लेकिन जरा एक बात खुद सोचिए, अमेरिका के F35 के साथ भारत ने इतना कुछ बड़ा कर दिया है तो क्या अमेरिका इस चीज को लेकर के शांत बैठा है? लेकिन बिल्कुल भी ऐसा नहीं है, अमेरिका इसको लेकर पूरी तरीके से बौखला उठा है और अब इसका जो पहाड़ है वो टूटने वाला है ब्रिटेन के ऊपर क्योंकि ब्रिटेन की तरफ से F35 भी इस फाइटर जेट को इस्तेमाल किया जा रहा था। अमेरिका अब तक यही मान रहा था कि अगर यह भारत में गया तो भारत इसकी स्कैनिंग करके रिवर्स इंजीनियरिंग द्वारा अमेरिका के F35 की टेक्नोलॉजी को निकाल सकता है, चोरी कर सकता है। लेकिन भारत ऐसा कुछ नहीं किया। भारत ने जो किया वो अमेरिका के इस F35 को यह साबित कर दिया है कि उसमें ऐसा कोई बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी नहीं है जिसकी वजह से इसे इतना ज्यादा अमेरिका हाइप बनाता था।

लेकिन अब यह बात पूरी दुनिया के सामने भारत जैसे ही आई, अमेरिका के F35 की क्रेडिट इतनी कम हो चुकी है कि अब इसको लेकर पूरी दुनिया के वो देश जो अब तक इसे बहुत सुपीरियर मानते थे, उन देशों की नजरों में भी भारत की एयर डिफेंस सिस्टम का नाम एक बार फिर से उनकी जुबान पर आना शुरू हो चुका है। अब दुनिया यह मान रही है कि भारत के एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को किस तरह से भारत ने तैयार किया है यह ज्यादा जरूरी है। क्योंकि अमेरिका के F35 को अगर भारत ने पूरी तरीके से कैप्चर कर लिया है तो इसका सीधा साफ मतलब यह है कि उसकी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी भारत के एयर डिफेंस सिस्टम के आगे कहीं नहीं टिकती। तो बाकी उन देशों की जो कंप्लीटली स्टेल्थ फाइट जेट भी नहीं बना पाए हैं उनके लिए यह और भी बहुत बड़ा डर बन चुका है। चीन बुरी तरीके से घबराया हुआ है इस खबर के आने के बाद से क्योंकि अमेरिका खुद भी अब तक इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा है।

खैर, अमेरिका यह भी मानता है कि भारत इस बात को लेकर झूठ भी कह सकता है। भारत ऐसा कुछ भी कह सकता है जो कि बिल्कुल सच ना हो। लेकिन अब यहां पर देखने वाली बात यह है कि भारत अब इस पर आगे क्या बड़ा एक्शन लेने जा रहा है जो कि सबसे अहम है इस आगे पूरे घटनाक्रम को लेकर के। अब यह माना जा रहा है कि भारत को कई सारे अहम वो डाटा मिल चुके हैं। इस स्टेल्थ की वजह से जो इसके मेकिंग में और इसके सरफेस पर लगे इस स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की वजह से रिवील हो चुके हैं। भारत को कई सारा ऐसा डाटा मिल सकता है और साथ-साथ सबसे बड़ी बात यह है कि अब भारत अमेरिका के F35 का पुरजापुरजा खोलने में भी कैपेबल हो रहा है। वहां पर देखें तो डीआरडीओ इस पर पूरी तरीके से काम कर रहा है।

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