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नमस्ते सभी को, केवी टीचर्स गिल्ड में आपका स्वागत है।
तो बच्चों, अभी हम डिस्कस करेंगे छठी कक्षा हिंदी का एक क्वेश्चन पेपर। यह सत्र 2025-26 की आवधिक परीक्षा प्रथम पीटी वन एग्जाम का पेपर है, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय का।
और सबसे पहले है खंड 'क' अपठित अवबोधन। एक अनसीन पैसेज आपको दिया है। निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
तो संसार में सबसे मूल्यवान वस्तु समय है क्योंकि दुनिया की अधिकांश वस्तुओं को घटाया बढ़ाया जा सकता है, पर समय का एक क्षण भी बढ़ा पाना व्यक्ति के वश में नहीं है। समय के बीत जाने पर व्यक्ति के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं होता। विद्यार्थी के लिए तो समय का और भी अधिक महत्व है। विद्यार्थी जीवन का उद्देश्य है शिक्षा प्राप्त करना। समय के उपयोग से ही शिक्षा प्राप्त की जा सकती है। जो विद्यार्थी अपना बहुमूल्य समय, खेलकूद, मौज मस्ती और आलस्य में खो देते हैं, वे जीवन भर पछताते रहते हैं क्योंकि वे अच्छी शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। जीवन और जीवन में उन्नति नहीं कर पाते। मनुष्य का कर्तव्य है कि जो क्षण बीत गए हैं उनकी चिंता करने के बजाय जो अब हमारे सामने हैं उनका सदुपयोग करें।
चलिए प्रश्न देखते हैं। समय को सबसे अमूल्य वस्तु क्यों कहा गया है? इसका एक भी क्षण घटाया बढ़ाया नहीं जा सकता। समय व्यक्ति के वश में नहीं है। समय ही व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है। मनुष्य उस समय की गति को नहीं रोक सकता। वैसे चारों ही सही हैं, लेकिन गद्यांश में लिखा है कि समय सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि बाकी अधिकांश वस्तुओं को दुनिया की घटाया बढ़ाया जा सकता है। समय का एक क्षण भी घटाना या बढ़ाना व्यक्ति के वश में नहीं है। तो क्योंकि इसका एक क्षण भी घटाया बढ़ाया नहीं जा सकता, इसलिए यह अमूल्य है। इसका कोई मूल्य नहीं है।
आगे विद्यार्थी जीवन का उद्देश्य है: जीवन को सुखी बनाना, गुरुओं का आदेश मानना, व्यक्ति के जीवन में समय का महत्व, शिक्षा प्राप्त करना। वैसे सभी हैं लेकिन देखते हैं गद्यांश में बताया गया है विद्यार्थी के जीवन का उद्देश्य है शिक्षा प्राप्त करना। तो इसमें सही है चौथा विकल्प।
विद्यार्थी जीवन भर क्यों पछताते रहते हैं? क्योंकि वे आलसी होते हैं। जो अपना कीमती समय मौज मस्ती और आलस्य में खो देते हैं। जो ज्ञान प्राप्त नहीं करते। जो विद्यार्थी माता-पिता और गुरुओं की आज्ञा का पालन नहीं करते। पढ़ने से आपको सभी सही लगेंगे। अब गद्यांश में क्या दिया है कि जो विद्यार्थी अपना बहुमूल्य कीमती समय खेल कूद मौज मस्ती और आलस्य में खो देते हैं वे जीवन भर पछताते रहते हैं। तो इसमें सही होगा दूसरा विकल्प।
समय के संबंध में व्यक्ति का क्या कर्तव्य बताया गया है? परिश्रम करें। मन लगाकर पढ़ाई करें। बीतते समय के बारे में पश्चाताप न करके वर्तमान समय का सदुपयोग करें। असफल होने पर निराश न हों, पुनः प्रयास करें। तो यहां पर बताया गया है कि हमारा हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। मनुष्य जीवन का कर्तव्य है जो बीत गया उसकी चिंता न करें जो हमारे सामने है उस समय का सदुपयोग करें। तो इसमें सही होगा तीसरा विकल्प।
उपयुक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या होगा? ऊपर जो गद्यांश दिया है उसका शीर्षक समय का सदुपयोग, समय और मनुष्य, विद्यार्थी और समय, अमूल्य समय। तो इसका सही शीर्षक हो सकता है समय का सदुपयोग क्योंकि उसी के बारे में पूरा गद्यांश है।
निम्न अक्षरों को मिलाकर आगे पीछे आप अक्षरों को कर सकते हैं। चार सार्थक शब्द बनाइए। ह म य ल। इसमें मात्रा भी आप दे सकते हैं। ये शब्द बनेगा हिमालय। फिर है आ श क आएगा आकाश। कुछ मात्राएँ देनी हैं, कुछ शब्दों को आगे पीछे करना है। भ, त र यह हो जाएगा भरत हो सकता है। वैसे भीतर होगा शब्द भीतर। फिर है न नियम नियम।
आगे है कविता में भूमि शब्द से अलग-अलग शब्द जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। भूमि शब्द में कुछ दूसरे शब्दों को जोड़कर जैसे पुण्य भूमि, स्वर्ण भूमि, जन्मभूमि, कर्मभूमि, धर्म भूमि, रणभूमि, युद्ध भूमि, बुद्ध भूमि। कोई भी छह शब्द आप लिख देंगे। आपने लिखा है एक लिख देते हैं पुण्य भूमि, कर्मभूमि, धर्म भूमि, रणभूमि, युद्ध भूमि, जन्मभूमि। ठीक है यह छह शब्द हमने लिख दिए।
आगे है खंड 'ग' पठितबोधनम। आपके पाठ्य पुस्तक से प्रश्न हैं। मलहार पाठ्य पुस्तक पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
पहला है मातृभूमि कविता के कवि का नाम लिखिए। तो जो पहली कविता है मातृभूमि वो लिखी है सोहन लाल द्विवेदी ने। सोहन लाल द्विवेदी।
आगे है रघुपति किसे कहा जाता है? रघुपति श्री राम को कहा जाता है।
बर्लिन ओलंपिक में खेल का अच्छा प्रदर्शन देखते हुए उनके प्रशंसकों ने ध्यानचंद को किस नाम से पुकारना शुरू कर दिया? बर्लिन ओलंपिक में जब इतना अच्छा प्रदर्शन ध्यानचंद जी ने किया तो उनके प्रशंसक चाहने वाले उन्हें हॉकी का जादूगर पुकारने लगे। हॉकी का जादूगर।
ध्यानचंद का जन्म किस सन में हुआ? उनका जन्म 1904 में हुआ था।
आगे है ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र क्या हैं? उनके अनुसार सबसे बड़े मंत्र हैं लगन, साधना और खेल भावना। खेल भावना।
आगे है निम्न नीचे दिए गए प्रश्नों के का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा बनाइए। हिंद महासागर के लिए कविता में कौन सा शब्द आया है? हिंद महासागर के लिए कविता में आया है शब्द सिंधु।
मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से भारत की प्रशंसा की गई है। भारत के महापुरुषों की जय की गई है। भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है। 'ग' विकल्प सही है। भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।
अब मिलान करने हैं। लांसनायक, बर्लिन ओलंपिक, पंजाब रेजीमेंट, सैंपर्स और माइनर्स टीम, सूबेदार, छावनी। स्वतंत्रता के पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद सूबेदार ही था। आजादी के पहले भारत में भारतीय सेना में दूसरा सबसे बड़ा पद सूबेदार होता था। भारतीय सेना का एक पद एक रैंक थी लांसनायक। सैनिकों के रहने की जगह को छावनी कहते थे। वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता जिसमें 49 देशों ने भाग लिया। यह था बर्लिन ओलंपिक। स्वतंत्रता के पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल यह था पंजाब रेजीमेंट और अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल। अंग्रेजों का हॉकी दल यह था सैंपर्स और माइनर्स। सैंपर्स एंड माइनर्स।
ठीक है। नेक्स्ट नीचे दिए गए काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए।
वह पावस का प्रथम दिवस जब पहली बूंद धरा पर आई। अंकुर फूटा पड़ा धरती से नव जीवन की ले अंगड़ाई। धरती के सूखे अधरों पर गिरी बूंद अमृत सी आकर वसुंधरा की रोमावली सी हरी दूब पुल की मुस्काई। पहली बूंद धरा पर आई।
वैकल्पिक प्रश्न है। पावस का क्या अर्थ है? पावस का मतलब होता है वर्षा ऋतु। उपयुक्त पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? कविता का नाम है पहली बूंद। ग्रीष्म ऋतु के बाद कौन सी ऋतु आती है? ग्रीष्म के बाद आती है वर्षा ऋतु। वर्षा ऋतु के आगमन से चारों तरफ क्या फैल गई है? आनंद रूपी हरियाली, कीचड़, जल या धूल। आनंद रूपी हरियाली। कविता के कवि का नाम लिखिए। तो कवि हैं गोपाल कृष्ण कोल। गोपाल कृष्ण कोल।
अब नीचे पठित गद्यांश दिया है, पढ़ना है। फिर प्रश्नों के उत्तर लिखने हैं।
मेरा जन्म 1904 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ था। बाद में हम झांसी आकर बस गए। 16 वर्ष की उम्र में मैं फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गया। मेरी रेजीमेंट का हॉकी खेल में काफी नाम था, पर खेल में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं थी। उस समय हमारे रेजीमेंट के सूबेदार मेजर तिवारी थे। वे बार-बार मुझे हॉकी खेलने के लिए कहते। हमारी छावनी में हॉकी खेलने का कोई निश्चित समय नहीं था। सैनिक जब चाहे मैदान में पहुंच जाते और अभ्यास शुरू कर देते। उस समय तक मैं एक नौसिखिया खिलाड़ी था। मतलब नया जो खेल को सीख रहे नया-नया खेल को सीख रहा था।
मेजर ध्यानचंद का जन्म कब हुआ? यह पहले भी था प्रश्न 1904 में। सिपाही के रूप में वे सबसे पहले कहां भर्ती हुए? वे भर्ती हुए फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट में। फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट के सूबेदार कौन थे? उस समय उनके सूबेदार मेजर तिवारी थे। सैनिक मैदान में जाकर क्या करते थे? दौड़ लगाते थे, गप्पे हांकते थे, हॉकी का अभ्यास करते थे। 'ग' विकल्प सही है। ध्यानचंद कैसे खिलाड़ी थे? उस समय तक वह नौसिखिया खिलाड़ी थे।
आगे है रचनात्मक लेखन। विद्यालय में प्राचार्य महोदय को तीन दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र लिखिए। इस तरह से आप पत्र लिखेंगे:
सेवा में,
श्री प्रधानाचार्य महोदय,
केंद्रीय विद्यालय,
आपके विद्यालय का नाम,
फिर दिनांक।
विषय: अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मुझे मेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए अपने परिवार के साथ तीन दिन के लिए दिल्ली जाना है। आप शादी में जाना है लिख सकते हैं या फिर आप बीमार हैं उसके लिए भी आप लिख सकते हैं। तो तीन दिन के लिए दिल्ली जाना है अपने परिवार के साथ। इसीलिए मैं अगली तीन तारीख बताएंगे। 21 जुलाई से 23 जुलाई 2025 तक विद्यालय आने में असमर्थ हूँ। अतः मेरी आपसे प्रार्थना है कि मुझे तीन दिनों का अवकाश प्रदान करें। इसके लिए मैं सदा आपका आभारी रहूँगा।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम और कक्षा।
इसके और में है भाई को परीक्षा में मिली सफलता पर बधाई देते हुए पत्र लिखिए। यह अनौपचारिक पत्र है। तो इस तरह से आप लिखेंगे सबसे पहले आपका पता फिर दिनांक फिर प्रिय अच्छा भाई को लिखना है।
प्रिय भाई,
कुछ देर पहले तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर अत्यंत खुशी हुई कि तुम कक्षा सातवीं की परीक्षा में प्रथम आए हो। बहुत-बहुत बधाई। आखिर तुम्हारी मेहनत रंग लाई। तुम्हारा कठिन परिश्रम और धैर्य आखिर काम आया। हालांकि तुम्हारी सामर्थ्य, लगन एवं मेहनत पर सबको विश्वास था और तुम्हारी सफलता में भी कोई संदेह नहीं था। अब तुम्हें भविष्य में इतनी ही मेहनत करनी है ताकि तुम्हारा यह प्रतिशत कम न हो पाए। मम्मी पापा भी तुम्हें शुभ आशीर्वाद कह रहे हैं।
शुभकामनाओं सहित,
तुम्हारा भाई,
नीचे आपका नाम।
उसके बाद है निम्न में से किसी एक विषय पर अनुच्छेद लिखिए। विषय है मेरा मनपसंद खेल, समय का महत्व, परिश्रम का महत्व, पर्यावरण संरक्षण।
तो सबसे पहले मेरा प्रिय खेल जो भी आपका प्रिय खेल है मान लीजिए क्रिकेट है। मेरा प्रिय खेल क्रिकेट है। यह एक बहुत ही लोकप्रिय खेल है जिसे बच्चे, युवा और बूढ़े सभी पसंद करते हैं। क्रिकेट दो टीमों के बीच खेला जाता है जिसमें प्रत्येक में 11 खिलाड़ी होते हैं। यह खेल मैदान में खेला जाता है। मैं जब भी खाली होता हूँ, अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलता हूँ। मुझे क्रिकेट खेलने में बहुत आनंद आता है। इससे शरीर तंदुरुस्त रहता है और मन प्रसन्न रहता है। क्रिकेट खेलने में से एकता, टीम भावना और अनुशासन की भावना भी विकसित होती है। मेरे प्रिय खिलाड़ी विराट कोहली हैं। वे एक बल्लेबाज हैं और उनका खेल बहुत प्रेरणादायक है। मैं भविष्य में एक अच्छा क्रिकेटर बनना चाहता हूँ और देश के लिए खेलना चाहता हूँ। क्रिकेट मेरे जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है।
फिर समय का महत्व। समय जीवन का सबसे मूल्यवान धन है। यह यदि एक बार समय निकल जाता है तो कभी वापस नहीं आता। इसीलिए कहा गया है समय का सदुपयोग करो क्योंकि समय अमूल्य है। जो विद्यार्थी समय का सही उपयोग करते हैं वे जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं। आलसी और समय को नष्ट करने वाले लोग पीछे रह जाते हैं। समय का महत्व केवल पढ़ाई में नहीं बल्कि हर क्षेत्र में होता है। किसान समय पर खेत जोते तो फसल अच्छी होती है। डॉक्टर समय पर इलाज करें तो रोगी बच सकता है। हमें हर कार्य समय पर करना चाहिए। हमें अपने दिन का समय सही ढंग से बांटना चाहिए ताकि हम पढ़ाई, खेल और आराम सभी के लिए समय निकाल सकें। समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है।
फिर है परिश्रम का महत्व। परिश्रम सफलता की पहली सीढ़ी है। बिना परिश्रम के कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। मेहनत करने वाले ही जीवन में ऊंचाइयाँ प्राप्त करते हैं। हमारे इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जैसे अब्राहम लिंकन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी परिश्रम करके सफलता प्राप्त की। विद्यार्थियों के लिए परिश्रम बहुत जरूरी है। बिना मेहनत के परीक्षा में अच्छे अंक नहीं आ सकते। केवल सपना देखने से कुछ नहीं होता। उन्हें पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है। एक कहावत है परिश्रम का फल मीठा होता है। इसीलिए हमें हमेशा ईमानदारी लगन से मेहनत करनी चाहिए। आलस्य और शॉर्टकट से केवल असफलता ही मिलती है।
और आखिर में पर्यावरण संरक्षण। पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। इसमें वायु, जल, पेड़-पौधे, जानवर और मनुष्य सब शामिल हैं। यदि पर्यावरण शुद्ध रहेगा तो जीवन संभव है। आजकल प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और प्लास्टिक के अधिक उपयोग से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। इसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। हमें पेड़ लगाने चाहिए। जल और ऊर्जा को बचाना चाहिए तथा प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना चाहिए। हमें पर्यावरण को स्वच्छ और हराभरा बनाए रखना है। विद्यालयों और समाज में जागरूकता फैलाकर भी हम पर्यावरण को बचाने में मदद कर सकते हैं। स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन का सपना तभी पूरा होगा जब हम सब मिलकर इसका संरक्षण करेंगे।
यह था छठी कक्षा हिंदी का एक क्वेश्चन पेपर। उम्मीद है सभी प्रश्न आपको अच्छे से समझ में आ गए होंगे। देखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।