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Lohar Ka Beta Or Jadugar Ka Kissa||Moral Stories In Urdu||Urdu Novel Moral Stories||Sachi Kahani||

Sachi Kahani 20:09

Transcription

[संगीत]

पिछले जमाने का जिक्र है किसी गांव में एक

लोहार और उसका बेटा रहते थे। एक दिन बेटा

अपने बाप से कहने लगा अब्बा अब्बा मेरे

लिए एक छुरी बनाओ जिसकी धार बहुत तेज हो।

बाप ने कहा बेटा छुरी भली ना कठारी। यह तो

बताओ तुमने छुरी का करना क्या है? बेटे ने

गोलमोल सा जवाब दिया। बस अब्बा मुझे छुरी

चाहिए। आखिर बेटे के बेहद इसरार पर बाप ने

लोहे की छुरी बना दी। जब बेटे के हाथ में

हथियार आ गया तो वह शेर हो गया। लगा बाप

को डराने धमकाने कि अब्बा फौरन राजकुमार

के महल में जाओ और मेरे लिए राजकुमारी का

रिश्ता मांगो। अगर नहीं मांगा तो मैं यह

छुरी मारकर तेरा सर तन से जुदा कर दूंगा।

लोहार बेचारा यह सुनकर थर-थर कांपने लगा।

लड़के की आंखों में खून उतरा हुआ था।

लोहार उस घड़ी को कोसने लगा जब उसने बेटे

को छुरी बनाकर दी थी। अब सोचने लगा कि

करूं तो क्या करूं? उधर कुआं इधर खाई। अगर

राजा से रिश्ता मांगने गया तो राजा मुझे

मार डालेगा और ना गया तो बेटा मुझे मार

देगा। आखिर काफी सोच विचार के बाद उसने

फैसला किया कि यूं मरने से बेहतर वहां

मरना बेहतर है। चलो राजा के पास चलता हूं।

चाहे कत्ल ही क्यों ना हो जाऊं। बात तो हो

जाएगी कि लोहार राजा से रिश्ता मांगने आया

था। अपने बेटे के हाथों गुमनामी की मौत

मरने से बेहतर है कि राजा के हाथों इज्जत

से मशहूर होकर मर जाऊं। एक दिन लोहार

हिम्मत करके राजा के पास पहुंचा और वहां

जाकर अपने बेटे के लिए राजकुमारी का

रिश्ता मांगा। यह सुनकर राजा के तन बदन

में आग लग गई कि कम्मी होकर मेरी बेटी का

रिश्ता मांगता है। दिल तो चाहा कि अभी

जल्लाद को हुक्म देकर उसका सर तन से जुदा

करवा दूं। लेकिन वजीर जरा समझदार था। राजा

के कान में सरगोशी करते हुए कहने लगा

महाराज इसे मरवा दिया तो खामखा हंसीज़ाक

होगी। लोग बात का बतंगड़ बना देंगे। हम

किस-किस का मुंह बंद करेंगे। अकलमंदी यही

है कि हम किसी तरह से इसे टाल दें। सांप

मरे और लाठी भी ना टूटे। हम इससे ऐसा सवाल

कर डालते हैं कि जिसका जवाब यह सारी

जिंदगी भी ढूंढ नहीं पाएगा। अगर गुड़ देने

से यह मर जाए तो जहर क्यों दीजिए। उसके

बाद वजीर लोहार से मुखातिब होकर बोला

मियां लोहार हम राजकुमारी का रिश्ता

तुम्हारे बेटे से करने के लिए तैयार हैं।

लेकिन उसके लिए हमारी एक शर्त है कि

तुम्हारा बेटा कोई ऐसा काम करें जो आज से

पहले ना किसी ने किया हो और ना किसी ने

देखा हो। लोहार शर्त सुनकर वापस लौट पड़ा

और अपने जिंदा बच जाने पर खुदा का लाख

शुक्र अदा किया। घर आकर उसने अपने बेटे को

यह बात बताई। दोनों बाप बेटे ने गांव

छोड़ने का इरादा किया और इस शर्त को पूरा

करने के लिए सफर पर रवाना हो गए।

चलते-चलते एक घने जंगल में पहुंचे। क्या

देखते हैं कि एक आदमी शरी यानी शीरस के

दरख्त के नीचे बैठा है। जमीन पर चारों तरफ

शरी के पीले-पीले फूल बिखरे हैं। आदमी ने

चूल्हे में अपनी टांग डाल रखी है और पैर

में से तड़-तड़ आग के शोले निकल रहे हैं।

चूल्हे पर खोलते हुए तेल की कढ़ाई रखी है

और वह पकोड़े तल-तल कर खा रहा है। लोहार

और उसके बेटे ने जब यह अजीब मंजर देखा तो

वह हैरान हो गए और एक दूसरे से कहने लगे

यह काम तो राजा ने कहीं ना सुना होगा और

ना कहीं देखा होगा। चलो यही सीखते हैं।

लुहार उस आदमी से मुखातिब होकर बोला

अल्लाह के बंदे मेरे बेटे को अपना शागिर्द

बना लो और उसे भी इस तरह से पकोड़े तलना

सिखा दो। वो आदमी लोहार से बोला मियां आगे

चले जाओ। आगे मेरा उस्ताद बैठा है। वो

तुम्हारे बेटे को शागिर्दी पर रख ले तो रख

ले। मुझे शागिर्द बनाने की इजाजत नहीं है।

यह सुनकर दोनों बाप-बेटा आगे चले गए। चलते

चले जा रहे थे। आगे क्या देखते हैं कि एक

बड़ की छांव के नीचे एक आदमी बैठा है और

बड़ के चारों तरफ बड़ का फल बिखरा हुआ है।

उसने चूल्हे में अपनी टांग डाल रखी है और

एड़ी में तरह-तर आग के शोले निकल रहे हैं

और चूल्हे पर उबलते हुए तेल की कढ़ाई रखी

है और वह जलेबियां तल-तल कर खा रहा है।

लोहार और उसके बेटे ने जब यह मंजर देखा तो

एक दूसरे से कहने लगे अरे यह काम तो पिछले

काम से भी मुश्किल है। यह काम तो राजा ने

ना कहीं देखा होगा और ना कहीं सुना होगा।

चलो यही सीखते हैं। लुहार उस आदमी से

मुखातिब होकर बोला, "अल्लाह के बंदे मेरे

बेटे को भी अपने शागिर्दी में रख ले। इसे

भी इस तरह से जलेबियां तलना सिखा दे।" उस

आदमी ने लुहार से कहा, "मिंयां, आगे जाओ।

आगे मेरा उस्ताद बैठा है।" वह तेरे बेटे

को शागिर्दी पर रख ले तो रख ले। मुझे

शागिर्द बनाने की इजाजत नहीं है। यह सुनकर

दोनों बाप बेटा आगे रवाना हो गए। वह

चलते-चलते एक और जगह पर पहुंचे। जहां क्या

देखते हैं कि एक आदमी बेरी के पेड़ के

नीचे बैठा है। जमीन पर बेरी के मीठे-मीठे

बेर बिखरे पड़े हैं। उसने भी चूल्हे में

अपना पैर डाल रखा है और पैर में से

तड़-तरड़ आग के शोले निकल रहे हैं। चूल्हे

पर गन्ने के रस से भरी हुई एक कढ़ाही रखी

है और वह गुड़ बना-ब बनाकर खा रहा है।

लुहार और उसके बेटे ने जब यह मंजर देखा तो

मन ही मन में कहने लगे। अरे यह काम तो

पिछले काम से भी ज्यादा मुश्किल है। यह

काम तो राजा ने ना कहीं सुना होगा और ना

कहीं देखा होगा। चलो यही सीख लेते हैं।

लोहार उस आदमी से मुखातिब होकर बोला,

"अल्लाह के नेक बंदे, मेरे बेटे को भी

अपनी शागिर्दी में रख लो। इसे भी इस तरह

से गुड़ बनाना सिखा दो। वो बोला, ठीक है,

मैं तेरे बेटे को अपना शगिर्द बना लेता

हूं। इसे अपने पास रख लेता हूं। यह लो

चाबियां। वो सामने एक कमरा है। उस कमरे का

दरवाजा खोलो और अपने बेटे को कमरे में

बिठाकर बाहर से दरवाजा बंद कर दो। लोहार

ने उस आदमी की हिदायत पर अमल किया। जब

बेटे को कमरे में बंद करके वापस जाने लगा

तो उस आदमी ने लोहार से चाबियां वापस ले

ली और लोहार से कहने लगा अब एक साल के बाद

वापस आना। लोहार चाबियां देकर अपने घर

वापस लौट गया। उधर लड़का कमरे में भूखा

प्यासा बैठा था। इंतजार कर रहा था कि कोई

आए और उसकी मदद करे। लेकिन पूरा दिन गुजर

गया और उसकी मदद के लिए कोई ना आया। फिर

जब लड़के ने कमरे में चारों तरफ देखा तो

उसके रोंगटे खड़े हो गए। खून खुश होने

लगा। उसके सामने एक खौफनाक नजारा था। कमरे

के अंदर चारों तरफ इंसानी हड्डियां बिखरी

पड़ी थी। लड़के ने सोचा ना जाने मुझसे

पहले कितने ही लोग इस मौत के कमरे में

अपनी जान दे चुके हैं और मेरा हाल भी उनसे

कुछ मुख्तलिफ नहीं होगा। मैं और मेरा बाप

उस बाहर बैठे आदमी के धोखे में आ गए। अब

मुझे भी इन आदमियों की तरह यहां पर

एड़ियां रगड़गड़ कर मरना पड़ेगा। एक रोज

मेरी भी हड्डियां इन हड्डियों की तरह

बिखरी पड़ी होंगी। यह सोचकर उसकी आंखों

में आंसू आ गए और फूट-फूट कर रोने लगा। जब

रोने से दिल का गुबार निकल गया तो कमरे

में एक कोने में जाकर बैठ गया। दिल ने कहा

जब तक सांस तब तक आस। लड़के ने जमीन पर

पड़ी हुई एक बड़ी सी हड्डी उठाई जिसका

सिरा छुरी से ज्यादा तेज और तीखा था और

दीवार खोदना शुरू कर दी। दीवार से मिट्टी

गिरती रही और गिरती रही। आखिर रात दिन की

मेहनत रंग लाई। दीवार में इतना बड़ा सुराख

हो गया था कि एक आदमी उसमें से निकल सकता

है। जब लड़का उसमें से निकल कर दूसरी तरफ

गया तो क्या देखता है कि एक और कमरा उसका

मुंतज़िर है। कमरा खूब सजा हुआ है। कीमती

पर्दे लटक रहे हैं। कमरे में बहुत कीमती

कालीन बिछा हुआ है। जाली के पर्दे के पीछे

सांस लेते हुए किसी बहुत हसीन जिस्म का

एहसास होता है। जो ही लोहार के लड़के ने

पर्दा सरकाया तो उसकी आंखें खुली की खुली

रह गई। क्या देखता है कि एक गदराए हुए

गोरे रंग की मालिक एक बहुत खूबसूरत लड़की

बिस्तर पर लेटी हुई सो रही है। जवानी की

नींद में सांस लेते हुए उसका जिस्म मुसलसल

हरकत में है। करवटों के बायस काले-काले

लंबे बाल उसके जिस्म से लिपटे हुए हैं।

कुछ देर लड़का दीधे फाड़े उसे देखता रहा।

उसी दौरान लड़की की आंख खुल गई। पहले तो

लड़की अपने कमरे में अजनबी लड़के को देखकर

डर गई और लड़का भी घबराया कि खुदा जाने

क्या बला है। थोड़ी देर बाद जब दोनों

मुत्तमीन हुए तो लड़की ने कहा, कोई बात

नहीं आजा मेरे पास आजा। यहां बिस्तर पर

बैठ और मुझे बता कि तू कौन है और यहां

कैसे पहुंचा। यह सुनकर लोहार के लड़के की

हिम्मत बढ़ी। उसने अपनी सारी कथा कही।

पहले तो लड़की ने उसे कुछ खाने के लिए

दिया और फिर कहा जो आदमी बाहर गुड़ निकाल

कर खा रहा है और जिसने तुझे कमरे में बंद

किया है वह आदमी मेरा बाप है। मैं भी

जादूगरनी हूं। तू फिक्र ना कर मैं तुझे

जादू सिखाऊंगी। लड़की अपने बाप से दो गुना

ज्यादा आगे थी। बाप अगर 14 दर्जे पर था तो

बेटी 16 दर्जे पर थी। लड़की ने लोहार के

लड़के को जादू सिखाना शुरू कर दिया और

उसके अलावा उसे तरह-तरह के फल और लजीज

खाने खिलाती। अच्छी से अच्छी उसे पोशाक

पहनने के लिए देती। इसी तरह से एक वर्ष

गुजर गया लेकिन लोहार लड़के को लेने के

लिए ना आया। उसने सोचा कि जब तक मेरा बेटा

कामिल जादूगर नहीं बन जाता उसे लेने के

लिए नहीं जाऊंगा। इस तरह वो लड़का साहरा

जादूगरनी से जादू सीखता रहा और एक दिन

अपने जादू में माहिर हो गया। 2 बरस के बाद

लोहार वापस आया। क्या देखता है कि वह आदमी

उसी तरह बेरी के दरख्त के नीचे बैठा है।

जमीन पर बेरी के मीठे-मीठे बेर बिखरे पड़े

हैं और उस आदमी ने अपनी टांग चूल्हे में

डाल रखी है और पैर में से आग के शोले निकल

रहे हैं और वह उसी तरह से गुड़ बनाकर खा

रहा है। लुहार ने पूछा, अल्लाह के बंदे

मेरा बेटा कहां है? 2 साल पहले मैं उसे

तेरी शागिर्दी में छोड़ गया था। वह आदमी

कहने लगा, "मैं तो 2 साल से यहीं पर बैठा

हूं और गुड़ बना-ब बनाकर खा रहा हूं। ना

मुझे फुर्सत मिली और ना मैंने वहां जाकर

देखा। तो अपने हाथ से अपने बेटे को कमरे

में बंद करके बाहर से ताला लगा गया था। यह

ले कुंजियां और अपने बेटे को जाकर देख ले।

बाप ने सुना तो उसके चेहरे पर हवाइयां

उड़ने लगी। एक रंग आता और एक रंग जाता था।

यह सोचकर कि 2 साल बाद बेटे की हड्डियां

ही मिले तो मिलें वरना जिंदा मिलना तो

नामुमकिन है। गुड़ खाने के उस शौकीन आदमी

को दिल में गालियां देता हुआ लोहार

दौड़ा-दौड़ा उस कमरे की तरफ गया और ताले

में चाबी घुमाई। लड़की के कानों में जब

चाबी की आवाज पड़ी तो लड़के से कहने लगी

अगर मेरा बाप हुआ तो हम दोनों को मार

डालेगा और अगर तेरा बाप हुआ तो हम बच

जाएंगे। लोहार दरवाजा खोलकर अंदर कमरे में

गया तो कमरा खाली था। दीवार के सुराख में

से गुजर कर जब दूसरे कमरे में पहुंचा तो

क्या देखता है? सामने कमरे पर मसेरी पर एक

खूबसूरत लड़की और उसका लड़का बैठे हुए

हैं। मारने वाले से जान बचाने वाला ज्यादा

बड़ा है। अपने बेटे को जिंदा देखकर बाप की

जान में जान आई। दौड़कर बेटे को बेअर सीने

से लगा लिया और खुदा का लाख-लाख शुक्र अदा

किया। उसके बाद लड़के ने अपने बाप को

लड़की का तारुफ करवाया। असल हकीकत से जब

लोहार वाकिफ हुआ तो वह कांप कर रह गया।

उसने उसके बेटे की जान बचाने पर लड़की का

शुक्रिया अदा किया। वो खूबसूरत जादूगरनी

साहरा कहने लगी। अब तुम दोनों के बचने की

फकत एक ही आस है और वो यह कि ऐ लोहार तू

रोता पीटता और सिसकता हुआ बाहर मेरे बाप

के पास जा और उसे जाकर कह कि मेरा बेटा

भूख प्यास से मर गया। तुमने उसे बाहर

निकाला ही नहीं। अब मुझे इतनी इजाजत तो

दें कि उसकी हड्डियों को किसी कपड़े में

बांधकर ले जाऊं ताकि उसकी हड्डियों को दफन

कर सकूं। लोहार रोता हुआ कमरे से बाहर

निकला। जैसा लड़की ने समझाया था उसने वैसा

ही किया। गुड़ बनाता और खाता हुआ वो आदमी

बोला, "हां हां, हड्डियां ले जा। मैंने

उनका क्या करना है? और उस बूढ़े जादूगर ने

हड्डियां ले जाने के लिए एक बड़ी सी चादर

भी फराहम कर दी। लोहार दोबारा कमरे में

आया और लड़के की बताई गई हिदायत के

मुताबिक अपने बेटे को चादर में छुपा लिया।

जब बेटे को चादर में छुपाए कंधे पर उठाकर

बाहर जाने लगा तो लड़की बोली मेरी एक बात

पल्ले से बांध लो। मैंने तुम्हारे लड़के

को जो जादू सिखाया है उस जादू के जरिए

रास्ते में ही कहीं कमाई करना शुरू ना कर

देना। अगर तुमने रास्ते में ही अमीर होना

शुरू कर दिया तो मेरे बाप को पता चल जाएगा

और फिर वह तुझे और तेरे बेटे को नहीं

छोड़ेगा। खूबसूरत साहिरा कमरे में ही रही।

लोहार ने उस लड़की से कहा कि बेटी तू भी

हमारे साथ चल। अपने संगदिल और जालिम बाप

से रिहाई हासिल कर। लेकिन लड़की ना मानी

और कहने लगी कि इस तरह से हम तीनों ही

पकड़े जाएंगे और वैसे भी अब मेरा जीना

मरना यहीं पर है। यहां से भागकर मैं कहां

जाऊंगी। लोहार अपने बेटे को कपड़े में

लपेटे कंधे पर उठाए बाहर निकला। उसने

चाबियों का गुच्छा दूर हिसे जादूगर की तरफ

फेंक दिया जो अभी तक बैठा गुड़ बना रहा था

और साथ ही साथ खा रहा था। जादूगर ने उसकी

तरफ कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। चाबियां

उठाई और फिर से अपने काम में मशरूफ हो

गया। जब लोहार सफर किए उस आदमी से कहीं

दूर निकल आया तो उसने अपने कांधे से नीचे

उतारा। फिर अपने बेटे को चादर से बाहर

निकाला और दोनों ने खुदा का शुक्र अदा

किया कि उन दोनों की जान बच गई और फिर से

बाप बेटों ने सफर का आगाज शुरू किया। वह

चले जा रहे हैं और चले जा रहे हैं और

चलते-चलते जंगल से बाहर निकल आए। अब वह

हरे-भरे खेतों में पहुंच गए। एक जगह क्या

देखते हैं कि रह चल रहा है। बैल घूम रहा

है और कुएं से पानी निकल रहा है। पास ही

एक जमीदार खड़ा है। लोहार का लड़का अपने

बाप से कहने लगा अब्बा मैं तुम्हें एक

जादू दिखाता हूं। मैं एक मंत्र पढूंगा और

बैल बन जाऊंगा। तुम मुझे जमींदार को बेच

देना। लेकिन याद रखना मेरा रस्सा उतार

लेना। उसे साथ मत देना। लड़के ने कुछ पढ़ा

और फिर बैल बन गया। और फिर दोनों

चलते-चलते जमींदार के पास पहुंचे। जमींदार

ने इस कदर खूबसूरत और पला हुआ बैल देखा तो

कहने लगा बाबा जी क्या तुमने बैल को बेचना

है? लोहार ने कहा हां बेचना है। जमींदार

ने पूछा क्या लोगे? लोहार ने कहा ₹55

जमींदार को सोच में डूबे हुए देखकर लोहार

बोला मेरा बैल बहुत अच्छा है। अगर तुझे

यकीन ना आए तो इसे हल में जोड़कर देख ले।

जमींदार ने बैल को रहट में जोड़ा। बैल खूब

पानी निकालने लगा। उसके पहले वाले बैल से

भी कहीं ज्यादा। जमींदार बैल को देखकर

राजी हो गया और उसे खरीदने के लिए भी मान

गया। लोहार कहने लगा लेकिन मैंने अपना

रस्सा नहीं देना। जमींदार बोला कोई बात

नहीं तुम अपना रस्सा उतार लो। मैं खुद ही

अपना नया रस्सा डाल लूंगा। जमींदार ने

सवा5 दिए और वह बैल खरीद लिया। जब लोहार

चलते-चलते काफी दूर निकल गया तो बैल ने

अपना रुख मोड़ा और भाग खड़ा हुआ। सीधा

लोहार के पास पहुंचा और वहां जाकर फिर

लड़का बन गया। जमींदार बेचारा हाथ में

डंडा पकड़े भागा-भागा दौड़ा दौड़ा और

हांपता हुआ लोहार के पास आया और कहने लगा

बाबा तुमने मेरा बैल तो नहीं देखा। लोहार

बोला बैल तो मैं अभी-अभी तुम्हारे हवाले

करके आया हूं। बैल कहां है? बेचारे

जमींदार के वहमो ख्याल में भी नहीं आ सकता

था कि उस बूढ़े लोहार के साथ जो लड़का जा

रहा है, वही उसका भागा हुआ बैल है।

जमींदार वापस लौट गया। लोहार और उसके

लड़के ने लड़की की दी गई हिदायत पर अमल

नहीं किया और रास्ते ही में कमाई करना

शुरू कर दी। अब रास्ते ही में उन्हें उसका

खामियाजा भुगतना पड़ा। बूढ़े जादूगर को

पता चल गया कि लोहार का लड़का जिंदा है और

मेरी कैद से फरार हो चुका है। मेरी अपनी

बेटी ने उसे मुकम्मल जादू सिखा दिया है।

वाकई ही घर का भेती लंका ढहाता है। जादूगर

ने एक बूढ़े आदमी का भेष धारा और उनसे

पहले ही आगे रास्ते में आकर बैठ गया।

लोहार के लड़के को क्योंकि पहले ही

कामयाबी मिली थी। इसलिए उसने फिर से लालच

किया और इस बार ऊंट बनने का सोचा। अब्बा

इस बार तू मेरे बदले पूरे ₹9 मांगना और ₹1

भी कम मत करना और याद रहे मेरे साथ नकेल

मत देना। इतना कहकर लड़के ने मंत्र पढ़ा

और ऊंट बन गया। लोहार उस ऊंट का रस्सा

पकड़े-पकड़े चलता-चलता उस जादूगर के पास

पहुंच गया जो फकीर का भैंस बदले उनका

इंतजार कर रहा था। फकीर ने लोहार से पूछा

बाबा जी क्या ऊंट बेचना है? फकीर ने लोहार

के दिल की कही थी। उसने खुश होकर कहा हां

बेचना है। फकीर ने कहा क्या लोगे? लोहार

ने कहा ₹9। फकीर ने फौरन ₹9 निकाले और

लोहार की हथेली पर रख दिए। अब लोहार को

याद आया और बोला मैंने ऊंट के साथ नकेल

नहीं देनी। फकीर भी जादूगर था और राजदार

था। नकेल के भेद और अहमियत से वाकिफ था और

बोला मैंने तुम्हें मुंह मांगी कीमत दी है

और नकेल ऊंट के साथ ही खरीदा है। इसलिए

नकेल तो तुम्हें देनी पड़ेगी। गज़ उनके बीच

इतनी बहस और इतनी तूत मैंम हुई कि राह

चलते मुसाफिर रुक गए। और इर्द-गिर्द खेतों

में काम करते हुए कैसान भागे-भागे आए और

वहां पर जमा हो गए। फकीर ने लोगों से

मुखातिब होते हुए कहा, लोगों खुदा लगती

कहो क्या तुमने आज तक यह सुना है कि कोई

जानवर बिक जाए और बेचने वाला जानवर बेचने

के बाद उसके गले से रस्सा उतार ले। देखो

देखो यह आदमी मुझे पूरी कीमत पर ऊंट बेचने

के बाद यह नकेल वापस लेने पर झगड़ा कर रहा

है। फकीर की बात में वजन था। जब लोगों ने

देखा कि यह तू तू मैंम नकेल के लिए हो रही

है तो सब ने लुहार को झूठा किया। इतने

लोगों के आगे लुहार की पेश ना गई। उसे ना

चाहते हुए भी ऊंट के साथ फकीर के हवाले वो

नकेल करनी पड़ी। फकीर जो जादूगर था और

नकेल की हकीकत से वाकिफ था। खुशी के मारे

उछलने लगा। लड़का अब जादूगर के कब्जे में

था। क्योंकि अब नकेल जादूगर के हाथ में थी

और इसलिए उसके लिए अब यह मुमकिन ना था कि

वह पहले की तरह आजाद होकर वहां से भाग

जाए। लेकिन लड़का भी अब आम लड़का नहीं था।

2 साल जादूगर ने की लड़की की शागिर्दी में

रहने के बाद एक कामिल जादूगर बन चुका था।

उसने मंत्र पढ़ा और कबूतर बनकर उड़ गया।

जादूगर के हाथ में नकेल का दूसरा सिरा फट

से नीचे गिर गया। उसने पीछे मुड़कर देखा

तो ऊंट का कहीं नामो निशान भी नहीं था और

नकेल नीचे जमीन पर घिसड़ रही थी। अब

जादूगर ने भी मंत्र पढ़ा और बाज बनकर

कबूतर के पीछे लग गया। लेकिन लड़का भी कुछ

कम नहीं था। शेर को सवा शेर। कबूतर ने जब

नीचे झुक कर देखा, गांव की कुछ औरतें झुकी

हुई छप्पड़ में से हाथ भर-भर कर काली स्या

चिकनी मिट्टी निकाल रही हैं ताकि अपने

कच्चे घरों और फर्शों पर पोछा लगा सकें।

इससे पहले कि बाज कबूतर को पकड़ता, लड़का

मंत्र पढ़कर मेंढक बनकर छपड़ में जा गिरा।

यह देखकर बूढ़ा जादूगर बगला बन गया। छपड़

में उतरा और चूंचे मार-मार कर मेंढक को

तलाश करने लगा। एक गांव की खूबसूरत गोरी

लड़की भी अपने लंबे-लंबे हाथों से मिट्टी

निकाल रही थी। लड़के ने फिर से मंत्र पढ़ा

और मेंढक से छल्ला बनकर लड़की की उंगली

में चला गया। पगला भगत यानी जादूगर। अब

उसकी छोटी उंगली से छल्ला निकालने से तो

रहा। थोड़ी देर बाद औरतें मिट्टी बर्तनों

में डालकर अपने घरों की तरफ चल पड़ी। जैसे

ही लड़की अपने घर पहुंची, जादूगर बगले से

फकीर बन गया और सदा लगाते हुए उनके घर पर

जा पहुंचा। लड़की छन्ने में आटा डाले

दरवाजे पर आई। जादूगर बोला, बेटी, मैंने

आटा नहीं लेना। मैंने तो वह छल्ला लेना है

जो तुम्हारे दाएं हाथ की छोटी उंगली में

है। यह बात सुनकर लड़की को गुस्सा आ गया।

तू कौन होता है मुझसे यह छल्ला मांगने

वाला? जब यह तकरार लड़की के मां के कानों

में पड़ी तो वह भी दरवाजे पर आ गई। अब जो

मां को असल बात पता चली तो वह लड़की से

बहुत खफा हुई। मां शक की मजाज औरत थी।

लड़की से कहने लगी, तू तो छपड़ से मिट्टी

लेने गई थी। यह छोटी उंगली में छल्ला कहां

से पहनवा कर आ गई? बता तेरे किस यार ने यह

छल्ला दिया? इसे फौरन उतार और फेंक। आ

लेने दे तेरे बाप को। सब बताती हूं। इससे

पहले कि तू कोई चांद चढ़ाए। कर देती हूं

तेरे हाथ पीले। लड़की बेचारी अजीब मुसीबत

में फंस गई थी। उसने अपनी छोटी उंगली से

छल्ला निकाल कर फेंक दिया। फकीर इसी

इंतजार में छल्ले पर आंख रखे खड़ा था।

उसने छल्ला पकड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाया।

लड़का फिर छल्ले से कबूतर बनकर उड़ गया और

जादूगर बाज बनकर उसके पीछे लग गया। आखिर

राजा का महल आ गया। दोनों उसके ऊपर उड़

रहे थे। राजा कचहरी लगाए बैठा था। इससे

पहले कि बाज कबूतर को पकड़ता लड़का कबूतर

से सोने की तार बन गया और बादशाह के ताज

में जाकर गिर गया कि यहां से तो बाज मुझे

नहीं निकाल सकेगा। जादूगर फिर बाज से फकीर

बन गया और बादशाह के सामने आकर सदा लगाई।

राजा ने कहा मांग क्या मांगता है? फकीर ने

कहा राजा तेरे ताज के अंदर जो सोने का तार

है वह मुझे दे दे। यह बात सुनकर राजा को

बहुत हैरत हुई कि मेरे ताज में सोने का

तार कहां से आया? यह सोचकर उसने एक हाथ

ऊपर उठाया कि ताज में हाथ डालकर देखे तो

सही। जूही राजा ने ताज में हाथ डाला, और

राजा के हाथ में आते ही तस्बी बनकर टूट

गया और जमीन पर बिखर गया। फकीर फौरन

मुर्गा बनकर उन्हें चुगने लगा और लड़का

देखते ही देखते मोतियों से बिल्ला बनकर

उसने मुर्गे को पकड़ कर दबोच लिया और वहीं

पर मार दिया। राजा दम बख खुद हैरान परेशान

यह सब कुछ देख रहा था। हैरत से उसकी आंखें

फटी जा रही थी। ऐसा मंजर राजा ने कभी अपनी

आंखों से नहीं देखा था। उधर मुर्गे को

मारने के बाद लड़का अपनी असल हालत में

वापस आ गया था और आगे बढ़कर राजा के रूबरू

आदाब बजा लाया। राजा जो अभी तक हैरत में

डूबा हुआ था बा मुश्किल ही बोला यह सब

क्या माजरा है? लड़के ने कहा, महाराज

बताइए क्या आज से पहले आपने यह सब देखा या

सुना? राजा हैरत से मुंह में उंगलियां

दबाए हुए बोला, नहीं कभी नहीं। इस पर

लड़के ने कहा, महाराज, अब अपना मुहायदा

याद कीजिए जो आपने मेरे बाप से किया था।

मैं उसी लोहार का लड़का हूं। मैंने भरी

कचहरी में इतने लोगों के सामने आपकी शर्त

पूरी कर दी है। अब आप अपना वादा पूरा

कीजिए और मुझे राजकुमारी का रिश्ता दीजिए।

राजा के पास अब कोई रास्ता नहीं रहा था।

उसे मजबूरन हां करना पड़ी और अपनी बेटी का

रिश्ता उसे देना पड़ा। चंद रोज बाद लोहार

अपने लड़के को सजाए घोड़ी पर बिठाए बारात

लेकर राजा के महल में आ गया। धूमधाम से

शादी हुई। लोहार का लड़का बादशाह का दामाद

बन गया। क्योंकि राजा का कोई बेटा नहीं

था। इसलिए राजा ने लोहार के बेटे को ही

अपना वली अहद बना लिया। चंद सालों बाद जब

राजा मर गया तो लोहार का लड़का तख्त पर

बैठा और निहायत आन बान से हुकूमत करने

लगा। प्यारे दोस्तों, उम्मीद करता हूं कि

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