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Shahzadi Zainab Ka Anokha Qissa || Moral Stories in Urdu & Hindi

VibeElevate37:46

Transcription

बगदाद में एक गरीब घर में फातिमा नाम की औरत रहती थी, जो दिन भर मिट्टी के घड़े बनाती। वह बर्तन वगैरह बनाकर शहर में बेचती और इससे जो कुछ मिलता, बमुश्किल घर का खर्चा चलाती थी। उसकी बेटी का नाम आमीना था। आमीना को यह काम बहुत कड़वा लगता था। चूंकि वह बहुत खूबसूरत थी, इसलिए लोग उसे शहजादी आमीना कहकर पुकारते थे। जब लोग उसे शहजादी आमीना कहते तो उसकी गर्दन फख्र से तनी जाती और वह खुद को वाकई सच्ची शहजादी समझने लगती।

मां से जबरदस्ती पैसे लेकर वह अच्छे-अच्छे लिबास पहनती थी, ताकि लोग उसकी शान में कोई फर्क महसूस न करें और उसे वाकई शहजादी ही समझें। इसलिए वह मिट्टी के काम से दूर ही रहती और अक्सर मां को समझाती कि वह यह गंदा काम न करें और चैन व सुकून से जिंदगी गुजारे। वह खुद को सिर्फ नाम की नहीं, सच्ची शहजादी समझती थी। वह कहती थी कि एक दिन किसी मुल्क का शहजादा आएगा और उसे पसंद करके, उससे ब्याह करके अपने अज़ीम महल में ले जाएगा। और वह महल में जाकर मल्लिकाओं की तरह राज करेगी और फिर मां को भी अपने साथ महल में ले जाएगी। जहां उसे मिट्टी के काम से हाथ-पांव खराब नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि वह ठाट-बाट से जिंदगी बसर करेगी।

उसकी मां उसकी यह बचकाना बातें सुनकर हंस पड़ती और उसे अक्सर समझाती रहती कि मिट्टी के घरों में रहने वाले संगमरमर के महलों के ख्वाब नहीं देखते, क्योंकि यह ख्वाब सिर्फ ख्वाब होते हैं जो कभी हकीकत का रूप नहीं धार सकते। मगर आमीना हमेशा मां की बात एक कान से सुनती और दूसरे कान से निकाल देती और यह कहती कि वह जो ख्वाब देखती है, उसके ख्वाब एक दिन ज़रूर हकीकत का रंग धार लेंगे। बस उसे किसी शहजादे का इंतज़ार है। तब उसकी मां उसे खूब डांटती-फटकारती, मगर आमीना पर इस तरह का कोई असर न होता।

एक रोज़, अजीब खूबसूरत लिबास पहने, वह करीबी सेहरा में घूम रही थी कि अचानक उसके कानों में किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी। आमीना के कान खड़े हो गए। रोने की आवाज़ किसी और की थी। आमीना ने इधर-उधर देखा, मगर उसे कोई नज़र न आया। वह एक लम्हे के लिए हैरान हुई कि यह आवाज़ कहां की है? इसका कोई वहम तो नहीं। मगर एक मर्तबा फिर उसे रोने की आवाज़ आई, तो वह पलट कर उसकी तरफ देखने लगी, जहां से उसे यह आवाज़ सुनाई दे रही थी। सामने घनी झाड़ियां नज़र आ रही थीं। आमीना इस तरफ बढ़ने लगी। ज्यों-ज्यों वह करीब जा रही थी, रोने की आवाज़ और वाज़ेह होती जा रही थी।

झाड़ियों के पीछे एक लड़की ज़ख्मी हालत में पड़ी थी। ऐसा मालूम हो रहा था जैसे ज़मीन पर ज़ख्मी हालत में पड़ी लड़की कोई और न हो, बल्कि आमीना खुद हो। अजीब फर्क सिर्फ इतना था कि आमीना ने जो लिबास कीमती समझकर पहन रखा था, वह आम सा था, जबकि इस लड़की ने बदन पर जो लिबास पहन रखा था, वह सच में न सिर्फ कीमती बल्कि बहुत खूबसूरत था। उसके गले में और बाजू में इंतहाई नफ़ीस और नायाब सोने के ज़ेवरात थे। उसके सर पर एक छोटा सा मगर निहायत खूबसूरत ताज बालों में फंसाया हुआ था। आमीना सच में अपनी इस हमशक्ल को शहजादियों जैसे रूप में देखकर बहुत हैरान हो गई।

उसने ज़ोर से कहा, "या अल्लाह! क्या यह सच में मैं हूं या मैं कोई ख्वाब देख रही हूं?" तकलीफ की वजह से उसके मुंह से सांस निकल गई। "अरे, यह तो हकीकत है!" वह हैरत से बोली। वह ज़ख्मी लड़की, जो बेहोश दिखाई दे रही थी, कराहने लगी और उसके मुंह से कुछ निकलने लगा। "बचाओ! खुदा के लिए मुझे बचाओ! मेरी मदद करो! मैं मर रही हूं! मुझे बचाओ!" इस लड़की के मुंह से टूटे अल्फाज़ निकले। "कौन हो तुम? कहां से आई हो? दीवाने! चुप करो!" आमीना ने उसे झिंझोड़ते हुए पूछा। मगर लड़की मुकम्मल तौर पर बेहोश हो चुकी थी।

आमीना परेशानी के आलम में सोचने लगी, "कैसे क्या करना चाहिए? क्या वह इस लड़की को घर ले जाए? या फिर किसी और के हवाले से उसे यहां होश में लाकर उसके बारे में पूछा जाए?" फिर उसने दूसरे तरीके पर अमल करने का फैसला किया। वह अपनी इस हमशक्ल लड़की को घर ले जाने पर झिझक रही थी, तो वह कुछ सोचकर उठी और निहायत तेज़ी से भागती हुई अपने घर आ गई। उसने एक बर्तन में थोड़ा सा पानी और कुछ खाने का सामान लिया और इसी तेज़ी से भागकर सेहरा में उस जगह वापस आ गई, जहां उसकी हमशक्ल शहजादी लड़की पड़ी थी।

लड़की बदस्तूर बेहोश नज़र आ रही थी। आमीना ने उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारे। तब उसे होश आया और उसने कराहते हुए आंखें खोल दीं। "मैं... मैं कहां हूं?" उसने आंखें खोलकर निहायत तकलीफ भरे लहजे में इधर-उधर देखते हुए कहा और फिर उसकी नज़र आमीना पर पड़ी तो मारे हैरत के हल्की चली गई। वह हैरानी से कभी अपने आप को और कभी आमीना को देखने लगी। "तुम कौन हो?" वह ताज्जुब के आलम में आमीना से मुखातिब हुई।

"मेरा नाम आमीना है। मैं पास ही कस्बे में रहती हूं। तुम्हारी तरह, तुम्हें भी मैं देखकर हैरत में पड़ गई थी। मेरा ख्याल है, पहले तुम कुछ खा लो। तुम बहुत ज़ख्मी हो। मैं तुम्हारे ज़ख्मों पर मरहम-पट्टी कर दूंगी। इसके बाद हम यकीनन बातें करेंगे। क्या ख्याल है?" आमीना ने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखते हुए कहा और लड़की ने इस बात में सर हिला दिया। आमीना ने घर से लाया हुआ खाना उसके सामने रख दिया। लड़की जल्दी-जल्दी खाना खाने लगी, जैसे वह बहुत भूखी हो। आमीना उसके ज़ख्मों को पानी से साफ करके मरहम-पट्टी करने लगी, जो वह इस मकसद के लिए घर से लाई थी। लड़की के चेहरे पर हैरत की लहर दौड़ रही थी, मगर वह कुछ बोले बगैर खाना खाती रही और आमीना भी खामोशी से उसकी मरहम-पट्टी करती रही।

"हां, अब तुम मुझे अपने बारे में बताओ कि तुम कौन हो? तुम्हें ज़ख्मी किसने किया और तुम यहां कैसे आई हो? और सबसे बड़ी बात, तुम्हारी शक्ल मेरी तरह क्यों मिलती है?" आमीना ने उसके ज़ख्मों पर मरहम-पट्टी करने के बाद यकीनन उसकी तरफ देखते हुए पूछा। लड़की भी खाना खाकर फारिग हो चुकी थी और आमीना की तरफ देख रही थी। "शक्ल क्यों मिलती है? इसका तो मैं तुम्हें कोई जवाब नहीं दे सकती, क्योंकि तुम्हें अपनी हमशक्ल देखकर मैं खुद हैरान हूं। हो सकता है यह कुदरत का इत्तेफाक हो। हां, अलबत्ता तुमने मेरी मदद की है। मुझे न सिर्फ खाना खिलाया, बल्कि मेरे ज़ख्मों पर मरहम-पट्टी की है। इसलिए मैं तुम्हें अपने बारे में ज़रूर बताऊंगी।"

फिर कुछ देर सांस लेने के लिए रुकी और कहने लगी, "मेरा नाम शहजादी ज़ैनब बिंत है। मैं मुल्क दमिश्क के बादशाह की बेटी हूं।" आमीना उसकी बात सुनकर बुरी तरह झल्ला पड़ी। "क्या कहा? आप मुल्क दमिश्क की शहजादी हैं?" उसने फटी-फटी निगाहों से उसकी तरफ देखते हुए कहा। "हां, यह सच है। वाकई मुल्क दमिश्क की शहजादी हो। इसमें हैरानी वाली क्या बात है?" "न हैरानी की तो कोई बात नहीं," आमीना ने जल्दी से कहा। "वे अलबत्ता आप मुझे बताइए, आपको ज़ख्मी किसने किया है और आप इस हालत में यहां तक कैसे पहुंच गईं, जबकि मुल्क दमिश्क तो यहां से कई कोस दूर है?"

"मुझे इस हालत में पहुंचाने वाला मेरा दुश्मन था, ताक़ो जादूगर है। जादूगर! जादूगर एक बहुत ज़ालिम और निहायत खतरनाक तरीन जादूगर है। वह अलबत्ता मुझसे शादी करने की ख्वाहिश रखता है, मगर एक तो उसकी शक्ल बहुत खौफनाक है और दूसरा वह निहायत बूढ़ा है। भला मैं एक बूढ़े और बदसूरत जादूगर से इस तरह शादी कर सकती हूं? और फिर वह फितरत और सलूक के ऐतबार से भी हैवान है। मैंने सुना है कि वह अपनी जादूगरी की ताकत बढ़ाने के लिए न सिर्फ इंसानों, बल्कि इंसानों के छोटे-छोटे और मासूम बच्चों को भी अपने देवताओं के कदमों में चढ़ा देता है। इसलिए मैं इस बदफितरत इंसान से बहुत नफरत करती हूं। वह हर रोज़ मेरे महल आता है और मुझे फुसलाने और प्यार से मनाने की कोशिश करता है। फिर वह मुझे डराने-धमकाने की भी कोशिश करता है, मगर मैं जानती थी कि वह मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।"

"अच्छी लड़की! अलबत्ता मुझे परियों के मुल्क का एक परीज़ाद शहजादा यूसुफ पसंद है। मैं भी उसे पसंद करती हूं। हम दोनों ने फैसला कर रखा है कि हम किसी और के साथ शादी हरगिज़ नहीं करेंगे। इस बात का इल्म ताक़ो जादूगर को भी है। वह परीज़ाद शहजादा यूसुफ से बहुत जलता है, मगर अपने किसी जादू के उसूल के तहत उसे इस बात की इजाज़त नहीं कि वह परीज़ादों के खिलाफ किसी किस्म का कोई काम उठाए या किसी परी या परीज़ाद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे। उसने अपनी एक खास तिलिस्मी अंगूठी मुझे दे रखी है, जिसकी वजह से ताक़ो जादूगर जुर्रत नहीं करता कि वह मुझे किसी किस्म का कोई नुकसान पहुंचाए। इस अंगूठी में यह खासियत भी है कि मैं जो चाहूं रूप बदल सकती हूं। अलबत्ता इस अंगूठी की बदौलत मैं किसी न किसी परिंदे का रूप धारकर परियों के मुल्क में शहजादा यूसुफ से मिलने जाती थी।"

"बस एक रोज़ मुझे शहजादा यूसुफ के एक तिलिस्मी परिंदे ने खबर दी कि शहजादा यूसुफ बहुत बीमार है। उसकी बीमारी का सुनकर मैं बहुत परेशान हुई। मैंने फौरन तिलिस्मी अंगूठी पहनकर अपना रूप बदला और शहजादा यूसुफ को देखने के लिए एक चिड़िया बनकर परियों के मुल्क की तरफ उड़ने लगी। शहजादा यूसुफ की बीमारी का ताक़ो जादूगर को भी इल्म हो चुका था। वह जानता था कि शहजादा यूसुफ बीमार है और वह मेरी मदद को किसी भी सूरत नहीं कर सकता। यह सोचकर वह मेरे पीछे निकल गया। मेरे करीब पहुंचकर उसने मुझे अपने पंजों में दबोचना चाहा। इतने बड़े कबूतर को देखकर मैं डर गई और तेज़ी से दूसरी तरफ उड़ने लगी। मगर कबूतर बार-बार मुझ पर झपट रहा था। कई बार मैं उसके पंजे में आते-आते बची। उसके तेज़धार पंजों ने मुझे ज़ख्मी कर डाला। मुझे अपनी मौत यकीनी नज़र आ रही थी। मैं एक चिड़िया के रूप में थी, इसलिए मैं हवा में अपना रूप नहीं बदल सकती थी। इसलिए मेरा ज़मीन पर आना बहुत ज़रूरी था। मैंने सोचा कि अगर मैंने अपना रूप न बदला तो यह मुझे ज़िंदा न छोड़ देगा। यह सोचकर मैंने झपटा लगाया और किसी तरह उस कबूतर से बचते हुए ज़मीन पर आ गई और इन झाड़ियों में आकर छिप गई। और मैंने अपना असल रूप इख्तियार कर लिया। परिंदे के रूप में मुझे अपने ज़ख्मों का इतना एहसास नहीं हुआ था, मगर असल रूप में आते ही मुझे शदीद तकलीफ का एहसास हुआ। मेरे मुंह से खून रिस रहा था। मुझ में इतनी हिम्मत न थी कि ताक़ो जादूगर के खौफ से इन झाड़ियों के पीछे से निकल आऊं। मैं यहीं पड़ी-पड़ी बेहोश हो गई। उसके बाद क्या हुआ, यह तुम मुझसे बेहतर जानती हो।" शहजादी ज़ैनब बिंत यह कहकर खामोश हो गई।

"हैरतअंगेज़, आमीना साहिबा! बहुत अजीब और गरीब कहानी है। आप एक इंसान होकर एक परीज़ाद शहजादे से मोहब्बत करती हैं! अब आप क्या करेंगी? अगर वह जादूगर यहां फिर आ गया तो?" आमीना ने परेशान निगाहों से ऊपर देखते हुए कहा, जैसे उसे शक हो कि ताक़ो जादूगर उसे ही शहजादी समझकर न ले जाए। "घबराओ नहीं, ताक़ो जादूगर मेरी तलाश से मायूस होकर वापस चला गया है। वह अगर यहां आया तो इस तिलिस्मी मेरी अंगूठी की वजह से मुझे फौरन पता चल जाएगा," शहजादी ज़ैनब बिंत ने उसे तसल्ली देते हुए कहा।

"न-न, साहिबा, यह बात नहीं है। मैं तो आपके बारे में परेशान हो रही थी। बस आपने बताया नहीं। अब आपका क्या इरादा है? आपके ज़ख्मों पर मैंने मरहम-पट्टी तो कर दी है, मगर अभी आपके ज़ख्म ऐसे नहीं कि आप चल-फिर सकें। क्या अब आप फिर किसी परिंदे का रूप धारकर वापस अपने मुल्क जाएंगी?" आमीना ने जल्दी से संभलते हुए पूछा। "हां, मैं एक परिंदे का रूप धारूंगी। मगर अब मैं अपने वतन नहीं जाऊंगी, बल्कि मैं ताक़ो जादूगर के महल में जाऊंगी। और जब तक मैं ताक़ो जादूगर को हलाक नहीं कर दूंगी, उस वक्त तक न तो मैं अपने मुल्क जाऊंगी और न ही शहजादा यूसुफ से मिलूंगी," शहजादी ज़ैनब बिंत ने सोचते हुए फैसलाकुन लहजे में कहा।

"क्या कहा? आप ताक़ो जादूगर को हलाक करेंगी? मगर कैसे? आप तो कह रही हैं कि वह निहायत खतरनाक और ज़ालिम तरीन हैवान है?" आमीना ने चौंककर उसकी तरफ देखते हुए पूछा। "हां, यह ठीक है। मगर अब इस जादूगर का खात्मा बहुत ज़रूरी हो गया है, क्योंकि अगर इसका खात्मा न किया गया, तो यह मेरे लिए इसी तरह अज़ीयत का बायस बनता रहेगा और उसने तिलिस्म होने वाला नुकसान पहुंचाने के लिए अपने देवता से इजाज़त ले ली है। अब वह किसी खुफ़िया जगह में बैठा शहजादा यूसुफ को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई जादूई पुतला बना रहा है। और जिस रोज़ वह शहजादे का तिलिस्मी पुतला बनाने में कामयाब हो गया, तो वह इस पुतले को आग में जलाकर भस्म कर देगा। पुतले के जलते ही शहजादा यूसुफ जहां होगा और जिस हालत में होगा, जलकर वही हालत हो जाएगा। मगर मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। मैं शहजादे के तिलिस्मी पुतले को हरगिज़ नहीं बनने दूंगी। इससे पहले कि ताक़ो जादूगर शहजादे का पुतला बनाकर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, मैं इसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दूंगी।" शहजादी ज़ैनब बिंत के लहजे में चट्टानों जैसी सख्ती थी।

"और अगर इस जादूगर ने आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो?" आमीना ने उसकी आंखों में आंखें डालकर कहा। "न, वह मुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकता। अगर मैं तुम्हारा साथ देने के लिए राज़ी हो जाऊं, तो मैं निहायत आसानी से इस जादूगर को मार सकती हूं।" "मैं... मैं आपकी भला क्या मदद कर सकती हूं?" "मगर मेरी जगह ले लो। यानी, मेरी जगह तुम शहजादी ज़ैनब बिंत बन जाओ, तो ताक़ो जादूगर के फरिश्ते भी नहीं जान सकेंगे कि तुम असली नहीं, नकली शहजादी हो, क्योंकि तुम्हारी और मेरी सूरत में ज़रा सा भी फर्क नहीं, मुकम्मल तौर पर दोनों एक रूप हैं। तुम मेरी जगह ले सकती हो। वह तुम्हें अपने साथ ले जाएगा और मैं किसी छोटे से परिंदे के रूप में तुम्हारे साथ रहूंगी। अलबत्ता इस जादूगर की जान एक सुनहरी चमगादड़ में है, जो भूत घर में छिपी हुई है। इस भूत घर तक पहुंचना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन भी है। ताक़ो जादूगर ने इस घर की हिफाज़त के लिए निहायत खौफनाक इंतज़ामात कर रखे हैं। एक मामूली सी चींटी भी इस भूत घर में दाखिल नहीं हो सकती। मगर मुझे यकीन है कि मैं या तुम इसे शादी का झांसा दे दें, तो वह हर हाल में हमें अपने भूत घर में ले जाएगा। एक बार अगर भूत घर में दाखिल हो गईं, तो मेरे लिए सुनहरी चमगादड़ को तलाश कर लेना और इसे हलाक करना ज़रा सा भी मुश्किल नहीं होगा।" शहजादी ज़ैनब बिंत कहती चली गई और आमीना उसकी बात सुनकर सोच में पड़ गई।

कुछ देर वह सोचती रही। फिर एक गहरी सांस लेकर कहने लगी, "ठीक है, शहजादी साहिबा, मैं आपकी मदद के लिए तैयार हूं। मेरी आरज़ू से यही ख्वाहिश थी कि काश मैं भी किसी मुल्क की शहजादी होती और मैं भी किसी मुल्क पर राज करती। यह मेरी खुशकिस्मती है कि मैं आपको अपने रूप में, बल्कि एक शहजादी के रूप में देख रही हूं। एक तो शक्ल की मुशाबिहत, दूसरा मेरा इंसानी फ़रीज़ा भी है कि मैं आपकी मदद करूं। आइए, पहले मैं आपको अपने घर ले जाकर अम्मी से मिलवाती हूं। फिर उनकी इजाज़त लेकर आपके साथ चलूंगी और आप जो हुक्म देंगी, मैं उस पर अमल करूंगी।" उसकी बात सुनकर शहजादी ज़ैनब बिंत के होठों पर मुस्कुराहट उभर आई। उसने आगे बढ़कर आमीना को अपने गले से लगा लिया। "तुम बहुत अच्छी लड़की हो। आज से तुम मेरी बहन हो। तुम्हारा नाम आमीना नहीं, शहजादी आमीना है। ताक़ो जादूगर की हलाकत के बाद अगर खुदा ने हमारी ज़िंदगी मुकर्रर की, तो मैं तुम्हें अपने साथ अपने मुल्क ले जाऊंगी और फिर तुम वहीं मेरी सहेली बहन बनकर मेरे साथ रहोगी," शहजादी बिंत ने कहा। उसकी बात सुनकर आमीना का चेहरा खुशी से चमक उठा और उसकी आंखें खुशी के मारे चमकने लगीं, जैसे शहजादी ज़ैनब बिंत की बात सुनकर उसे बहुत बड़ा खजाना मिल गया हो।

आमीना की मां सुनकर बहुत मुतास्सिर हुई। उसकी मां ने कहा, "अगर शहजादी ज़ैनब बिंत की परेशानी उसकी मदद करने से खत्म हो सकती है, तो इसे उसकी मदद ज़रूर करनी चाहिए।" शहजादी ज़ैनब बिंत ने आमीना की मां का बहुत-बहुत शुक्रिया अदा किया और उससे वादा किया कि वह आमीना की खुद हिफाज़त करेगी। "अगर ताक़ो जादूगर ने उसे किसी किस्म का नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो वह खुद उसके सामने आ जाएगी और आमीना पर हल्की सी भी आंच न आने देगी।" "हां, शहजादी साहिबा, अब मेरे लिए क्या हुक्म है?" आमीना मुखातिब होकर मुस्कुराते हुए पूछा। "शहजादी साहिबा का लफ्ज़ छोड़ो। मैं तुम्हारी बहन हूं। तुम सिर्फ मेरा नाम लेकर मुझे पुकार सकती हो। समझी?" "ठीक है, मेरी प्यारी हमशक्ल बहन। अब बताओ हमें क्या करना है? किसी खाई में छलांग लगाना है या पहाड़ से कूदना है?" आमीना ने कहा और शहजादी उसकी बात सुनकर हंस पड़ी।

फिर संजीदगी से कहने लगी, "आमीना, सबसे पहले हमें वापस अपने महल में पहुंचना है। मेरे बाप और मां मेरे बारे में बहुत परेशान होंगे। मैं उन्हें बताए बगैर शहजादा यूसुफ से मिलने निकल पड़ी थी। अब तो काफी देर हो गई है। अगर उन्हें मेरी गुमशुदगी का इल्म हुआ तो वह बहुत परेशान होंगे," शहजादी ने कहा और आमीना ने इस बात में सर हिला दिया। "मुझे देखकर हैरत का इज़हार नहीं करेंगे?" आमीना ने पूछा। शहजादी बोली, "न, क्योंकि अभी तुम उनके सामने नहीं जाओगी। तुम अभी और इसी वक्त मेरा रूप धार लो। मैं घोड़ी बन जाती हूं। तुम मुझ पर सवार हो जाओ और मैं तुम्हें मुल्क दमिश्क ले चलूंगी। तुम महल पहुंचकर अपने आप को शहजादी ज़ैनब बिंत ज़ाहिर करना। बाकी की हिदायतें और तफसील मैं तुम्हें रास्ते में ही बता दूंगी," शहजादी ज़ैनब बिंत ने सोचते हुए अंदाज़ में कहा और आमीना ने इस बात में सर हिला दिया और शहजादी बिंत के साथ उस सेहरा में वापस आ गई।

तब शहजादी बिंत ने अपने दाएं हाथ में मौजूद लाल नगीने वाली अंगूठी की तरफ देखते हुए कुछ पढ़ा। दूसरे ही लम्हे उसके इर्द-गिर्द धुआं फैल गया। वह थोड़ी देर के लिए इस धुएं में छिपी रही। फिर ज्यों ही धुआं खत्म हो गया, आमीना यह देखकर हैरान रह गई कि जिस जगह कुछ लम्हों तक सिर्फ शहजादी बिंत खड़ी थी, वहां अब एक निहायत तेज़ दौड़ने वाली और खूबसूरत घोड़ी खड़ी थी। इस पर बाकायदा ज़ीन का साज़ था। एक लम्हे के लिए आमीना झिझक गई। "मुझ पर सवार हो जाओ, जो हमारा सफर बहुत तकलीफदेह है," घोड़ी के मुंह से शहजादी बिंत की आवाज़ निकली और आमीना उसकी बात सुनकर जल्दी से सर हिलाकर उस पर सवार हो गई। जैसे ही आमीना घोड़ी पर सवार हुई, घोड़ी तेज़ी से भागने लगी। उसकी रफ्तार तेज़तर होती चली गई। उनका यह सफर कई घंटे जारी रहा, यहां तक कि रात सर पर आ गई। आमीना घोड़ी से बुरी तरह चिपकी थी। घोड़ी की रफ्तार इस कदर तेज़ थी जैसे वह हवा में उड़ रही हो।

शहजादी आमीना को ताक़ो जादूगर की हलाकत के बारे में और दूसरी बातें करती रही। "जादूगर की शक्ल दिखा सकती हूं कि वह कैसा है, ताकि तुम्हें जानने में आसानी रहे। क्यों न सर उठाकर देखो। मैं तिलिस्मी अंगूठी की बदौलत तुम्हें ताक़ो जादूगर का चेहरा दिखा सकती हूं," घोड़ी, यानी शहजादी बिंत ने कहा। आमीना ने सर उठाकर देखा। उसके दाएं जानिब एक हैरान-सा दिखाई दे रहा था, जिसमें निहायत एक खौफनाक शक्ल वाला बूढ़ा दिखाई दे रहा था। उसका सर दरमियान से गंजा था, जबकि बाकी सर के बाल बहुत लंबे-लंबे थे। "वाकई, यह तो निहायत बूढ़ा और खौफनाक शक्ल वाला जादूगर है! और हां, वह देखो, यह है शहजादा यूसुफ, परियों का शहजादा!" आमीना ने देखा। इस जादूगर की दूसरी जानिब एक और बड़ा हैरान था, जिसमें एक निहायत मासूम और खूबसूरत इंसान, जिसने अपने बालों पर लाल रंग का रुमाल बांधा हुआ था, नज़र आ रहा था। उसका लिबास शानदार था। "बल्कि शहजादी साहिबा, मेरा मतलब है, बहन, यह खूबसूरत शहजादा ही लायक है कि तुम इससे शादी कर सको। अब तो मेरे दिल में और कूवत पैदा हो गई है। मैं इस बदसूरत बूढ़े को तुम्हारे रास्ते से हटा दूंगी और इस खूबसूरत शहजादे से तुम्हारी शादी करूंगी," आमीना ने कहा और शहजादी ज़ैनब बिंत हंस पड़ी।

वह अचानक आमीना के मुंह से शादी की बात सुनकर परेशान हुई। "क्या हुआ रे?" बिंत ने जल्दी से पूछा। "ताक़o जादूगर को हमारी हकीकत का इल्म हो गया है। मुझे तिलिस्मी मेरी अंगूठी ने बताया है कि वह एक तिलिस्मी गोया के सामने बैठा न सिर्फ हमें देख रहा है, बल्कि हमारी बातें भी सुन रहा है," शहजादी ज़ैनब बिंत ने निहायत परेशान लहजे में कहा। आमीना उसकी बात सुनकर परेशान हो गई। शहजादी ज़ैनब बिंत ने निहायत परेशान लहजे में कहा, "उसने हमें पर छोड़ दिया है और हम अपने महल नहीं, बल्कि हम इस जादूगर के भूत घर की तरफ जा रहे हैं। मैं रुक जाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही हूं, मगर मेरे पांव मेरा साथ नहीं दे रहे।" शहजादी ज़ैनब बिंत की रफ्तार इंतहाई हद तक तेज़ हो गई और वह रास्ता बदलकर दूसरी जानिब भागने लगी। उसकी रफ्तार इस कदर तेज़ हो गई कि आमीना के मुंह से बुक्का-बुक्का की आवाज़ें निकलने लगीं और उस पर बेहोशी की कैफियत तारी हो गई। वह घोड़ी पर नरमी से संभलकर बैठ गई, जैसे वह नींद के आलम में हो। घोड़ी तेज़रफ्तारी से भागती रही। पहाड़ी रास्तों को फांदती हुई एक सरसब्ज़ पहाड़ी इलाके में दाखिल हो गई। सामने खूबसूरत बाल-बूटे लगे हुए थे। घोड़ी इस रास्ते पर दौड़ने लगी और फिर आमीना ने बदकिस्मती से सामने देखा तो उसे एक अजीब-ओ-गरीब पहाड़ नज़र आया। पहाड़ में एक बहुत खुले मुंह वाली गुफा दिखाई दे रही थी। अगर आमीना पर बदकिस्मती न होती तो वह इस भयानक शक्ल वाले घर को देखकर यकीनन खौफ की वजह से बेहोश हो जाती। घोड़ी इसी रास्ते पर भागती हुई भयानक शक्ल वाले भूत घर में दाखिल हो गई। जैसे ही वह गुफा में दाखिल हुई, इस गुफा का मुंह खुद-ब-खुद बंद हो गया।

उसे यूं महसूस हो रहा था जैसे कोई अनदेखी कुव्वत उसे जबरदस्ती अपनी जानिब खींच रही हो। अचानक उसका पांव फंस गया और वह सांस रोककर उठकर धड़ाम से गिरी। आमीना घोड़ी के ऊपर से छलांग लगाकर धड़ाम से गिरी। शहजादी ज़ैनब बिंत बिजली की तेज़ी से उठ खड़ी हुई और फिर बुरी तरह चौंक गई, क्योंकि वह घोड़ी के रूप से अपने असली रूप में वापस आ चुकी थी और जिस जगह वह खड़ी थी, वह निहायत अजीब-ओ-गरीब और खौफनाक चीज़ों से भरा हुआ एक बहुत बड़ा हॉलनुमा कमरा था। कमरे की दीवारों को खून से रंगीन किया गया था। दीवारों के करीब हर तरफ जानवरों और इंसानों की हड्डियां और खोपड़ियां बिखरी पड़ी थीं और इस कमरे में इस कदर तैफ़ुन था कि आमीना और ज़ैनब बिंत को सांस लेना दुश्वार हो रहा था। एक बहुत बड़े सर के बंधे हुए थे। मगर लंबे-लंबे, निहायत खौफनाक सांप थे, जिनके फन आमीना के चेहरे पर लहरा रहे थे। आमीना का सर ढलक गया था। शायद वह बेहोश थी।

शहजादी ज़ैनब बिंत आमीना को इस मुसीबत में देखकर परेशान हो गई। वह बेताब अंदाज़ में आगे बढ़ने लगी तो उसी वक्त उसके करीब रोशनी का चमक हुआ और वहां ताक़ो जादूगर हाज़िर हो गया। "रुक जाओ, शहजादी ज़ैनब! अगर तुम अपनी हमशक्ल लड़की की तरफ बढ़ीं, तो उसके बदन से लिपटे हुए सांप इसे फौरन डस लेंगे और तुम्हारी मालूमात के लिए इरशाद है कि यह आम सांप नहीं हैं। यह पाताल के सबसे खतरनाक और ज़हरीले तरीन सांप हैं। अगर इनमें से किसी एक सांप ने भी इस लड़की को डस लिया, तो एक लम्हे से भी कम वक्त में इस लड़की का जिस्म जलकर राख हो जाएगा," ताक़ो जादूगर ने शहजादी को खबरदार किया। उसे देखकर शहजादी ज़ैनब बिंत का चेहरा बिगड़ गया और उसकी आंखों में उसके लिए जहान भर की नफरत भर गई।

"मेरी जान! इतनी नफरत भरी निगाहों से मत देखो, शहजादी! तुम इस वक्त मेरी कैद में हो। एक आरज़ू से मुझे तुम्हारी तलाश थी, मगर तुम किसी तरह से मेरे काबू में नहीं आ रही थी। आज मुझे मौका मिल गया। अब तुम्हें मुझसे कोई नहीं छीन सकता। मुझे परीज़ाद शहजादा यूसुफ से बहुत परेशानी थी, मगर अब मैंने उसका भी बंदोबस्त कर लिया है। अपने देवता से इजाज़त लेकर मैंने उसका तिलिस्मी पुतला बना लिया है। यह देखो!" ताक़ो जादूगर ने हवा में हाथ हिलाया। फौरन ही उसके हाथ में एक मिट्टी का बना हुआ पुतला आ गया, जिसकी शक्ल शहजादा यूसुफ से मिलती थी। शहजादी ज़ैनब बिंत ने उसके हाथ में शहजादा यूसुफ का पुतला देखकर परेशान हो गई। वह तेज़ी से आगे बढ़ने लगी। तो ताक़ो जादूगर ने जल्दी से कहा, "न-न, शहजादी, आगे न बढ़ना! इस वक्त तुम्हारे शहजादे और तुम्हारी हमशक्ल लड़की की जान मेरी मुट्ठी में है। मेरे एक इशारे से न सिर्फ यह ज़हरीले सांप तुम्हारी हमशक्ल लड़की को राख का ढेर बना सकते हैं, बल्कि मैं इस पुतले की गर्दन तोड़कर शहजादा यूसुफ को एक लम्हे में मौत के मुंह में पहुंचा सकता हूं।"

और शहजादी ज़ैनब बिंत रुक गई और धीमी आवाज़ में बोली, "तुम क्या चाहते हो मुझसे?" उसने अपनी हमशक्ल लड़की आमीना और ताक़ो जादूगर के हाथ में शहजादा यूसुफ के पुतले की जान देखकर कहा। ताक़ो जादूगर बोला, "मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि शहजादी की अंगूठी उतारकर मेरे हवाले कर दो और खुशी-खुशी मेरे साथ शादी के लिए तैयार हो जाओ। जो अगर तुम मेरी बात मान लो, तो मैं सिर्फ शहजादा यूसुफ की जान बख्श दूंगा, बल्कि तुम्हारी हमशक्ल लड़की को भी यहां से ज़िंदा सही-सलामत जाने दूंगा। वरना दूसरी सूरत में मैं इन दोनों को हलाक कर दूंगा और तुमसे ज़बरदस्ती शादी भी कर लूंगा। तुमने मुझे इस लड़की के ज़रिए धोखा देने की तरकीब बहुत अच्छी सोची थी। तुमने इसे अपना लिबास पहनाया और मुकम्मल तौर पर अपने जैसा बना दिया, मगर तुम इसे शहजादा यूसुफ की अंगूठी देना भूल गई। और यही बात मुझे तुम्हारे धोखे से बचा गई। अब तुम मुकम्मल तौर पर मेरे कब्ज़े में हो। तुम अपनी इस अंगूठी की बदौलत शहजादा यूसुफ को इतना भी न बता सकोगी कि वह कयामत तक नहीं आ सकता।" ताक़ो जादूगर ने ज़ोरदार कहकहा लगाते हुए कहा और शहजादी ज़ैनब बिंत ने बेबसी से अपने होंठ काट लिए।

वाकई, उससे बड़ी गलती हो गई थी। घोड़ी बनते ही उसे चाहिए था कि शहजादा यूसुफ की अंगूठी अपनी हमशक्ल आमीना को पहना देती, ताकि अगर ताक़ो जादूगर उसके बारे में जानना चाहे तो वह आसानी से न जान सके। "मगर अब क्या? अब तो गलती हो चुकी थी, अब क्या हो सकता था?" शहजादी परेशानी के आलम में अपने होंठ काटते हुए बोली। "ठीक है, ताक़ो जादूगर, मैं तुम्हारी शर्त मान लूं। मैं यह अंगूठी तुम्हारे हवाले कर दूंगी और मैं तुमसे शादी करने पर भी तैयार हूं। मगर इससे पहले कि मैं अंगूठी तुम्हारे हवाले करूं, तुम कम से कम मेरी हमशक्ल लड़की के जिस्म पर लिपटे हुए सांप हटा दो और इसे होश में लाओ। मैं इससे एक ज़रूरी बात करना चाहती हूं। तो इसके बाद मैं अंगूठी तुम्हें दे दूंगी।" ताक़ो जादूगर ने गौर से उसकी तरफ देखा, मगर उसे शहजादी ज़ैनब बिंत के चेहरे पर बेबसी के सिवा कोई असर नज़र न आया। तब उसके चेहरे पर मुस्कुराहट उभर आई। "ठीक है, मैं अभी इन सांपों को गायब कर दूंगा।" यह कहकर कोई मंत्र पढ़कर आमीना के जिस्म पर लिपटे हुए सांप गायब हो गए।

ताक़ो जादूगर शहजादी की तरफ मुड़ने लगा था कि उसे एक ज़ोरदार झटका लगा और वह ज़ोरदार धक्का खाकर उलटकर गिर पड़ा। उसी वक्त तेज़ फड़फड़ाहट की आवाज़ के साथ उस पर एक बहुत बड़ा परिंदा झपटा और उसके हाथ पर पंजे मारता हुआ, उसके हाथ से शहजादा यूसुफ का पुतला लेकर एक तरफ उड़ चला गया। ताक़ो जादूगर ने परिंदे की तरफ देखा। उसी वक्त इस परिंदे ने ज़मीन पर लौट लगाई और फौरन शहजादी का रूप बदल लिया, जिसके चेहरे पर एक फातिहाना मुस्कुराहट थिरक रही थी। शहजादी ने मौके से फायदा उठाकर तिलिस्मी अंगूठी से एक परिंदे का रूप बदला था और वह परिंदा बनकर ताक़ो जादूगर से टकराकर उसे नीचे गिराने और उससे शहजादा यूसुफ का पुतला हासिल कर लिया। शहजादा यूसुफ का पुतला उसके हाथ में था। ताक़ो जादूगर गुस्से में गरजा, "शहजादी, तो तुमने मेरे साथ धोखा किया है!" शहजादी बोली, "मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज़ होता है। तुमने एक चाल चली और मुझे और मेरी हमशक्ल लड़की को अपने भूत घर में बुला लिया और अब मैंने चाल चली और अपने शहजादे का पुतला हासिल कर लिया। यही दुनिया का उसूल है, जैसा करो वैसा भरो।" शहजादी बिंत हंसने लगी।

ताक़ो जादूगर गुस्से से गरजा, "शहजादी, इसके लिए तो तुम्हें बहुत बड़ा खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा!" उसने दोनों हाथ खोलकर शहजादी की तरफ झपटा। उसकी हथेली से आग के शोले निकलकर शहजादी की तरफ भागे। मगर शहजादी ज़ैनब बिंत तिलिस्मी अंगूठी की मदद से फौरन उस जगह से गायब होकर दूसरी तरफ ज़ाहिर हो गई। यह देखकर ताक़ो जादूगर ने उस पर एक बार फिर आग फेंकी, मगर शहजादी ज़ैनब बिंत एक मर्तबा फिर गायब हो गई। वह फौरन वहां से गायब हो जाती जहां तक ताक़ो जादूगर आग फेंकता था। अपनी मार खाली जाते देखकर ताक़ो जादूगर का गुस्सा आसमान पर पहुंच गया। उसने कोई मंत्र पढ़कर हाथ ज़मीन पर झटका। उसी वक्त एक धमाका सा हुआ और वहां एक निहायत ताकतवर और खौफनाक शेर हाज़िर हो गया। ताक़ो जादूगर ने शेर की तरफ देखकर इंतहाई गुस्सैल अंदाज़ में कहा, "तिलिस्मी शेर! इस बदबख्त शहजादी को पकड़ लो, इसके टुकड़े-टुकड़े कर दो!" शेर ने एक खौफनाक दहाड़ मारी और खौफनाक अंगारों जैसी निगाहों से शहजादी ज़ैनब की तरफ देखा। हवा में उसकी तरफ शेर को देखकर शहजादी भी तिलिस्मी अंगूठी की बदौलत एक शेरनी के रूप में आ गई। इससे पहले कि शेर उस पर हमला करे, शहजादी ज़ैनब बिंत ने बिजली की तेज़ी से उस पर हमला कर दिया। उसका हमला इस कदर शदीद और खतरनाक था कि ताक़ो जादूगर भी आंखें फाड़कर उसे देखता रहा और शहजादी ज़ैनब बिंत ने शेरनी के रूप में शेर की गर्दन चबाकर उसे हलाक कर डाला।

उसी वक्त आमीना, जो सांप गायब होने के बाद सुकून के करीब बेहोशी के आलम में गिर पड़ी थी, दहाड़ों और चीखों की आवाज़ सुनकर उसने घबराकर देखा और फिर वह शहजादी ज़ैनब बिंत को एक खौफनाक शक्ल वाले गंजे जादूगर से लड़ते देखकर हैरतज़दा रह गई। पहले वह परेशानी के आलम में सोचने लगी कि उसके साथ क्या हुआ था और वह इस जगह पर कैसे आ गई और शहजादी ज़ैनब बिंत इस गंजे सर वाले ताक़ो से क्यों लड़ रही है? मगर उसे कुछ समझ न आया। तब वह सर झटककर शहजादी ज़ैनब बिंत और गंजे सर वाले जादूगर की लड़ाई देखने लगी। और फिर उसने देखा, ताक़o जादूगर ने जादू के ज़ोर से शहजादी ज़ैनब बिंत को अपनी गिरफ्त में कस लिया। उसने एक हाथ से शहजादी ज़ैनब बिंत की गर्दन पकड़ ली और दूसरा हाथ हवा में घुमाया, एक तलवार हासिल की और उसे इस अंदाज़ में हाथ उठाया जैसे वह एक झटके से शहजादी ज़ैनब बिंत की गर्दन काट देना चाहता हो।

यह देखकर आमीना के बदन में जैसे बिजली सी दौड़ गई। वह तेज़रफ्तारी से उठी और झपटती हुई ताक़ो जादूगर की तरफ दौड़ी। उसकी छलांग सुनकर ताक़ो जादूगर चौंका, उसकी तरफ देखने लगा। मगर इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, आमीना उसके करीब पहुंच गई और उसने एक हाथ से उसके बाल पकड़ लिए और दूसरे हाथ से ज़ोर-ज़ोर से उसकी कमर में मुक्के मारने लगी। जादूगर के मुंह से एक ज़ोरदार चीख निकल गई और न सिर्फ उसके हाथ से तलवार छूट गई, बल्कि शहजादी ज़ैनब बिंत की गर्दन पर से उसकी गिरफ्त भी ढीली पड़ गई। शहजादी ज़ैनब बिंत ने एक झटके में उससे तड़पकर अपनी गर्दन छुड़ा ली। "बहुत खूब! बहुत खूब! अच्छे मौके पर तुमने मेरी मदद की है। इस बदबख्त के बाल मत छोड़ना। इसकी तिलिस्मी ताक़त का राज़ इसके बालों में है। जब तक इसके बाल तुम्हारी मुट्ठी में रहेंगे, यह हमारे खिलाफ कुछ नहीं कर सकेगा। तुम इसके बाल पकड़े रखो। मैं सुनहरी चमगादड़ को तलाश करती हूं, जिसमें इस बदबख्त की जान है!" शहजादी ज़ैनब बिंत ने चीखकर कहा और आमीना ने इस बात में सर हिला दिया। वह दोनों हाथों से ताक़ो जादूगर के बाल मुट्ठियों में लेकर खींचने लगी। ताक़ो जादूगर की चीखें उसके कानों के पर्दे फाड़ रही थीं।

शहजादी ज़ैनब बिंत ने फौरन एक कबूतर का रूप धारा और फड़फड़ाती हुई उड़ गई। मिनट भर बाद वापस आई। "अच्छी लड़की! मुझे छोड़ दो! मुझे छोड़ दो! मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगा! मैं तुम्हें इस दुनिया में सबसे बड़ी मलिका बना दूंगा! मेरे बाल छोड़ दो!" मगर उसने उसके बाल न छोड़े। वह जानती थी कि यह जादूगर झूठ बोल रहा है। अगर उसने उसके बाल छोड़ दिए तो वह यकीनन उसे मार डालेगा। ताक़ो जादूगर चीखता चला जाता रहा। कभी वह आमीना को लालच देता, कभी उसे डराता, मगर आमीना ने उसके बाल न छोड़े। यहां तक कि शहजादी ज़ैनब बिंत कबूतर के रूप में एक सुनहरी रंग की चमगादड़ पंजों में दबोचे हुए वहीं पहुंच गई। उसके पंजों में सुनहरी चमगादड़ देखकर ताक़ो जादूगर का रंग फक हो गया। उसने चीख-चीखकर शहजादी ज़ैनब बिंत से माफी मांगी, मगर शहजादी ज़ैनब बिंत ने कुछ ही देर में उसे चीर-फाड़कर टुकड़े-टुकड़े करके रख दिया, यहां तक कि सुनहरी चमगादड़ को हलाक कर दिया।

जैसे ही सुनहरी चमगादड़ मरी, ताक़ो जादूगर भी मर गया। उसी वक्त हर तरफ गहरी तारीकी छा गई और हर तरफ से चुड़ैलों की चहचहाट और चीखने की आवाज़ें आने लगीं। हर तरफ रोशनी फैल गई और आमीना खुद को एक बहुत बड़े महल में देखकर हैरान रह गई। उसके करीब शहजादी ज़ैनब बिंत भी मौजूद थी। उसने आमीना का बहुत शुक्रिया अदा किया। शहजादी ज़ैनब बिंत ने आमीना को अपने मां-बाप से मिलवाया और उन्हें भी सारी बात बता दी। शहजादी के मां-बाप आमीना को शहजादी की हमशक्ल देखकर बहुत हैरान हुए और खुश भी हुए। उन्होंने आमीना को अपनी बेटी बना लिया और यूं आमीना की ख्वाहिश सच में पूरी हो गई कि वह किसी मुल्क की शहजादी बन जाए। उसने अपने मां-बाप को भी वहीं बुला लिया। बादशाह सलामत ने आमीना की शादी ताक़ो से कर दी। और जब शहजादा यूसुफ बीमारी से तंदुरुस्त हुआ, तो उन्होंने उसे शहजादी ज़ैनब बिंत का रिश्ता देने का वादा कर लिया। और फिर शहजादी ज़ैनब बिंत की शादी इस कदर धूमधाम से हुई कि हर शख्स हैरान रह गया, क्योंकि शादी में सच में परियां और परीज़ाद शामिल थे। आमीना, जो अब सच में शहजादी बन चुकी थी, उसे शादी में दावत थी और बहुत खुश थी और खुश क्यों न होती? उसकी शहजादी बनने की दिली ख्वाहिश जो पूरी हो चुकी थी।