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क्यों बीमारी ठीक नहीं होती है ?

Drkirti vikram singh15:04

Transcription

नमस्कार दोस्तों, कैसे हैं आप? आशा करता हूँ कि आप बहुत ही बढ़िया से होंगे। दोस्तों, एज अ होम्योपैथिक डॉक्टर मैं अपने क्लिनिक में बहुत सारे पेशेंट देखता हूँ। ऐसा नहीं होता कि मैं हर पेशेंट ठीक कर पाता हूँ। कुछ पेशेंट नहीं भी ठीक होते, उसकी कुछ कारण होते हैं। कुछ मेरी गलतियाँ होती हैं, कुछ पेशेंट्स की गलतियाँ होती हैं और कुछ मैं उन्हें कन्वे नहीं कर पाता हूँ। तो आज मैं आपको पॉइंट वाइज बताऊँगा कि अगर कोई पेशेंट ठीक नहीं हो रहा है, अगर आपको कोई बीमारी है, कोई ऑटोइम्यून डिसीज है, कोई क्रॉनिक डिसीज है, कोई स्किन डिसीज है, कोई भी प्रॉब्लम है और वह अगर ठीक नहीं हो रही है तो आपकी तरफ से क्या गलती हो सकती है और डॉक्टर की तरफ से क्या गलती हो सकती है जिसके कारण वह बीमारी ठीक नहीं हो पा रही है। तो मैं डॉक्टर विक्रम, आपका मेरे चैनल में बहुत-बहुत स्वागत है। तो चलिए शुरू करते हैं [संगीत]।

शुरू करने से पहले आप सबसे यह गुजारिश है कि प्लीज इस वीडियो को लाइक जरूर करिएगा। चैनल को अभी तक आपने सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज सब्सक्राइब करें। बेल आइकन को जरूर से दबाएँ। मैं ऐसे ही वीडियोस लाता रहता हूँ। मेरा ईमेल आईडी कीर्ति विक्रम सिंह परिहार @gmail.com है। वहाँ पर जाके आप मेल कर सकते हैं। कोई भी समस्या हो तो आप पूछ सकते हैं, कोई भी जानकारी चाहिए तो आप ले सकते हैं। तो चलिए टॉपिक की तरफ चलते हैं और सबसे पहले हमारी गलती, मतलब एज अ डॉक्टर हम क्या गलती कर जाते हैं? क्या चूक कर जाते हैं जिससे पेशेंट ठीक नहीं होता?

सबसे पहले जब पेशेंट हमारे पास आता है तो कई बार पहली बार जब पेशेंट आता है तो प्रॉपर वह अच्छे से बता नहीं पाता या हम उससे निकलवा नहीं पाते हैं। हम अच्छे से पूछते नहीं हैं, केस चेकिंग नहीं कर पाते हैं, जल्दी बाजी रहती है या वह बताना ही नहीं चाह रहा है। कई बार क्या होता है कि क्लीनिक में फीमेल पेशेंट रहती हैं, उन्हें कुछ अलग से, कुछ उनकी प्रॉब्लम रहती हैं जो कि वह बता नहीं पाती हैं। शुरुआत में अगर आप मेल डॉक्टर हैं तो ऐसा बहुत कॉमन होता है और अगर आपकी क्लीनिक थोड़ी सी खुली हुई है और वहाँ सब पेशेंट बैठे हैं चारों तरफ तो ऐसा बहुत कॉमन होता है। तो पेशेंट कम सिम्टम्स की प्रॉब्लम जितनी है वो मेन मेन प्रॉब्लम बताता है। उसके बाद जो अंदर वाली प्रॉब्लम है या कोई मेंटल स्ट्रेस है, तनाव है, जैसे अ या किसी तरह की घटना हुई है या बिल्कुल माइन्यूट सिम्टम्स या एग्रावेट्स कब बढ़ती है, कब घटती है, अ या कोई पिकुलर सिम्टम जो है वो बताना मोस्टली वो इतना दिमाग में उनके आता ही नहीं है तो वो बता नहीं पाते हैं। तो आपकी केस चेकिंग प्रॉपर नहीं हो पाती है, आप सिम्टम्स प्रॉपर नहीं ले पाते हैं और अगर आपने सिम्टम्स प्रॉपर नहीं लिए हैं तो या तो आप थेरेपी पॉइंट ऑफ व्यू से मेडिसिन देंगे या तो आप सिंप्टोमेटिक पॉइंट ऑफ व्यू से मेडिसिन देंगे होम्योपैथी में, या आप सिंगल मेडिसिन देंगे या चार पाँच मेडिसिन देंगे वो ज्यादा मैटर नहीं करता लेकिन अगर आपको प्रॉपर केस ही नहीं पता है, प्रॉपर पेशेंट ने अच्छे से बताया ही नहीं है। वो कारण कुछ भी हो सकता है, पहली बार आना हो सकता है, फीमेल हो सकती हैं, झिझक हो सकता है, कोई एक ऐसा सिम्टम है जो बहुत जरूरी है एज अ होम्योपैथिक डॉक्टर आपका जानना लेकिन वो पेशेंट को पता नहीं है कि होम्योपैथी में यह भी बताना जरूरी है। तो ऐसे बहुत सारे सिम्टम्स होते हैं जो पहली बार में आ नहीं पाते हैं केस में और जिसके कारण आप प्रॉपर मेडिसिन नहीं दे पाते हैं। तो सबसे पहला कारण एज अ डॉक्टर हमें क्या करना चाहिए कि हमें प्यार से पूछना चाहिए। हो सके तो केबिन जो है अगर फीमेल पेशेंट है तो हो सके वहाँ से मेल पेशेंट को हटा दें और प्रॉपर केस चेकिंग करें। क्या समस्या है? प्रॉपर पूछे, समझे और हो सके तो आपके पास एक फीमेल अटेंडेंट हो तो उनसे बात करवाएँ फीमेल पेशेंट की जिससे आपको केसेस, जो सिम्टम्स हैं, जो समस्या है पेशेंट की वो अच्छे से समझ में आए। अगर सिम्टम्स नहीं समझ में आएगा तो फिर आपको प्रॉब्लम होगी मेडिसिन सोचने में और अच्छी मेडिसिन देने में और केस टेकिंग अगर प्रॉपर नहीं होगा तो मेडिसिन प्रॉपर नहीं दे पाएंगे आप।

दूसरा, एज अ डॉक्टर कई बार हम बहुत जल्दी, क्या होता है कि हम इतने सारे पेशेंट देखते हैं और यह मेरे साथ बहुत ज्यादा होता है कि इतने सारे पेशेंट देखने के बाद हम ज्यादातर क्या होता है कि एक तरह की मेडिसिन देना चालू कर देते हैं। फॉर एग्जांपल मैं अपना एग्जांपल समझाता हूँ कि ज्यादातर सर्दी के अगर पेशेंट आते हैं तो मैं आर्निका 200, विस्क मिलम सिक्स ईयर्स में मैडोरा इनम और साथ में अ शटका के लिए कोलो सिंथ मदर टिंचर ये मेडिसिन देता हूँ। ऐसा बहुत बार है कि पेशेंट ठीक हो जाता है। 70 परसेंट पेशेंट ठीक हो जाते हैं, 30 परसेंट पेशेंट नहीं ठीक हो पाते क्योंकि के सिम्टम्स मैच नहीं कर पाते। तो ऐसे पेशेंट को दोबारा जब वो आपके पास आए तो फिर आप अच्छे से केस चेकिंग लें, तो फिर से कुछ और मेडिसिन देने की कोशिश करें, समझने की कोशिश करें कि उन्हें कौन सी और मेडिसिन दे सकते हैं, कौन सी नई मेडिसिन दे सकते हैं और जो वो आप रेगुलर मेडिसिन देते रहते हैं उसके अलावा आपको कौन सी मेडिसिन देनी चाहिए। तो ऐसा जरूरी नहीं है कि आप 100 में से 100 पेशेंट ठीक करें लेकिन अगर कोई पेशेंट आप बिलीव कर रहा है, दोबारा आ रहा है, उसे आराम नहीं लगा है, फिर भी आ रहा है तो आपको फिर से केस टेकिंग करना चाहिए, समझना चाहिए कि जो आप रेगुलर मेडिसिन दे रहे हैं उससे आराम नहीं लगा है तो दोबारा से आप नई मेडिसिन समझे उसके लिए प्रॉपर और फिर मेडिसिन दें तो बहुत ही अच्छे रिजल्ट्स मिलेंगे।

तीसरा, एज अ डॉक्टर हम जल्दी बाजी में पेशेंट को सही तरीके से बताना भूल जाते हैं कि मेडिसिन कब-कब खानी है और कैसे लेनी है। होम्योपैथी में यह बहुत ज्यादा जरूरी होता है कि दोनों मेडिसिन के बीच में कम से कम 15 से 20 मिनट का गैप हो। अगर दो-तीन मेडिसिन आप दे रहे हैं तो और खाने खाने के लगभग आधे घंटे बाद या आधे घंटे पहले वो मेडिसिन खाएँ। तो अगर कोई नया पेशेंट है जिन्हें पता नहीं है कि मेडिसिन कैसे लेनी है, दो बूंद डायरेक्टली टंग में लेनी है या पानी के साथ लेनी है तो आपको अच्छे से समझाना पड़ेगा। जिस तरह से आपको मेडिसिन देनी है, आपको पता है कि इस तरह से मेडिसिन देनी है वो उसी तरह से पेशेंट को मेडिसिन लेना होगा। अगर तरीका चेंज हो गया, ड्यूरेशन चेंज हो गया तो सिर्फ फर्क पड़ता है। तो आपको अच्छे से समझाना है या आपके असिस्टेंट को अच्छे से समझाना आना चाहिए कि पेशेंट को कि कैसे मेडिसिन लेनी है, कब मेडिसिन लेनी है, क्या ड्यूरेशन है, कितनी बार खानी है दिन में, यह पूरा अच्छे से समझाना चाहिए। और सबसे ज्यादा इम्पॉर्टेंट, पेशेंट को आपको मेंटेनिंग कॉज और एक्साइटिंग कॉसेस जरूर समझाने हैं। तो अगर कोई क्रॉनिक डिसीज है तो वो क्रॉनिक डिसीज दो कारण से है। अगर कोई पुरानी बीमारी किसी पेशेंट को तो वो दो कारण से होती है: पहला मेंटेनिंग कॉज और दूसरा एक्साइटिंग कॉज। मेंटेनिंग कॉज मतलब ऐसे कारण जिससे उसकी बीमारी जो है वो बनी हुई है। फॉर एग्जांपल अगर उसे अस्थमा की प्रॉब्लम है और वो डस्टी एनवायरमेंट में रह रहा है, उसके घर में बहुत ज्यादा धूल और डस्ट है तो वो उसका मेंटेनिंग कॉज है और एक्साइटिंग कॉज, फॉर एग्जांपल अगर कोई अस्थमा का पेशेंट है और वो फ्रिज से निकाल के कुछ दही, दूध या कुछ ऐसा खाता है जिससे उसकी प्रॉब्लम बढ़ जाती है, वो एक्साइटिंग कॉज है। तो आपको एग्रावेट्स बढ़ती है यह जानना बहुत ज्यादा जरूरी है, पहले ही पूछ लीजिए और आपको कुछ पता भी होना चाहिए कि अस्थमा में क्या चीज खाना है, क्या चीज नहीं खाना। प्रिकॉशंस इसको हम कॉमनली प्रिकॉशंस बोलते हैं लेकिन प्रिकॉशंस बहुत जनरल वर्ड है। आपको मेंटेनिंग कॉज देखना है, एक्साइटिंग कॉज देखना है। मेंटेनिंग कॉज को आपको बंद कराना है, पेशेंट को स्ट्रिक्टली बोलना है कि ये चीजें नहीं खानी हैं, यहाँ पर नहीं जाना है, कुछ दिन तक तो बिल्कुल नहीं करना है जब तक मेडिसिन चल रही है। तो एक्साइटिंग कॉज और मेंटेनिंग कॉज अगर ये चीज आप मेंटेन नहीं करते हैं तो एज अ पेशेंट, एज अ डॉक्टर आप ना पेशेंट को ठीक कर पाएंगे और ना ही पेशेंट ठीक हो पाएगा। तो मोस्टली अगर किसी को एलर्जी है किसी चीज से तो उसे बंद करना होगा। अगर किसी को किसी चीज से प्रॉब्लम है तो उसे बंद करना होगा। अगर कोई चीज, कभी-कभी क्या होता है देखिए, फॉर एग्जांपल एक एग्जांपल दिखा समझाता हूँ मैं कि ये बहुत कॉमन एग्जांपल है कि कोई पेशेंट है वो मतलब मोस्टली 12 बजे तक मोबाइल देखते हैं, टीवी देखते हैं और उसके बाद डेढ़ बजे सोते हैं और ऐसा करते-करते-करते उनकी दिनचर्या ऐसी हो गई है तो उन्हें पता नहीं है कि वह गलत कर रहे हैं। उनकी दिनचर्या ऐसी हो गई है और जिसके कारण उन्हें स्ट्रेस रहता है, तनाव रहता है, गैस बनती है, एसिडिटी बनती है तो आपके पास तो वो एसिडिटी की प्रॉब्लम लेकर आए हैं लेकिन प्रॉब्लम वो जो 12 बजे तक मोबाइल देख रहे हैं वो है। तो अगर आप वो बंद नहीं करवाते हैं तो आप मेडिसिन देंगे तो सिर्फ आराम लगेगा। जैसे ही मेडिसिन बंद करेंगे, प्रॉब्लम फिर से वापस हो जाएगी। तो ये मेंटेनिंग कॉज है और कोई अगर बहुत ज्यादा तीखा खा रहा है और उनको लग रहा है कि ये उनके लिए नॉर्मल है, बचपन से खा रहे हैं लेकिन उसके कारण उन्हें एसिडिटी प्रॉब्लम होती है, जैसे तीखा खाते हैं वैसे ही बढ़ती है तो आपको तीखा खाना बंद करवाना पड़ेगा। तो ये एक एग्जांपल है। एज अ पेशेंट भी ध्यान रखना है, एज अ डॉक्टर भी ध्यान देखना है, मेंटेनिंग कॉज और एंजाइटिंग कॉसेस बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर कोई क्रॉनिक डिसीज ठीक कर रहे हैं, एक्यूट डिसीज में बहुत ज्यादा मतलब नहीं रहता लेकिन अगर क्रॉनिक डिसीज है जो कि कॉमनली होम्योपैथी में क्रॉनिक डिसीज लेके पेशेंट आते हैं तो आपको मेंटेनिंग कॉज और एक्साइटिंग कॉज ये दोनों ही बहुत ज्यादा जरूरी है ध्यान रखना और प्रिकॉशंस बताना कि आपको ये नहीं करना है, ये करना है, ऐसा करना है, ऐसा करना है। तो जैसे मान लीजिए एक एग्जांपल और देता हूँ क्योंकि ये बहुत कम है और यही सबसे बड़ा चीज है कि अगर मान लीजिए किसी का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, बीपी बढ़ा हुआ है। अब कोलेस्ट्रॉल कम करना है तो तेल-मसाला आपको बताना पड़ेगा कि तेल नहीं खाना है, नॉनवेज नहीं खाना है, अल्कोहल नहीं पीना है। अगर पेशेंट नहीं मानता है तो उनकी गलती है लेकिन आपका बताना बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर नहीं मानते हैं तो स्वाभाविक बात है वो जानते हैं कि उनकी प्रॉब्लम क्यों नहीं ठीक हो पा रही है तो सिर्फ मेडिसिन लेने से वो ठीक नहीं होगी जब तक वो वो कॉज को ठीक नहीं कर पा रहे हैं। एक्सरसाइज करना पड़ेगा उन्हें। तो ये चीजें बहुत ज्यादा जरूरी हैं। अ तो एज अ पेशेंट भी ये, पेशेंट की तरफ मैं आ गया हूँ। पेशेंट को सबसे ज्यादा ध्यान क्या देना है? सबसे पहले जो डॉक्टर बोले हैं उसे अच्छे से समझना है, सुनना है और वैसे ही मेडिसिन लेनी है। अगर डॉक्टर ने बोला है दिन में तीन बार लेनी है तो तीन बार ही लेनी है, दो बार नहीं लेनी है। गैप जितना बोला है वही मेंटेन करना है। अगर नहीं समझ में आता तो आप फिर से पूछ लीजिए, असिस्टेंट से पूछ लीजिए, डॉक्टर से पूछ लीजिए लेकिन प्रॉपर मेडिसिन लीजिए। तो सबसे पहले प्रॉपर मेडिसिन लीजिए, कैप नहीं होना चाहिए और दूसरा अगर डॉक्टर ने मेंटेनिंग कॉज और एक्साइटिंग कॉज मतलब आपको प्रिकॉशंस बताए हैं वो प्रिकॉशंस जरूर करना है। अगर वो प्रिकॉशंस आप नहीं लेंगे अ तो आपकी प्रॉब्लम नहीं ठीक होगी। तो अगर डॉक्टर ने बोला कि ये मत खाइए, ये मत खाइए, आपको इस चीज से एलर्जी है, कुछ दिन तक परहेज करिए तो परहेज जरूर करना है और मेडिसिन टाइम पर लेनी है। या डॉक्टर ने बोला है कि टाइम पर सोइए, कोशिश करिए टाइम पर सोने की और टाइम पर सोइए। देखिए आधी प्रॉब्लम अपने आप ही ठीक हो जाती है अगर आप प्रिकॉशंस लेते हैं और आधी प्रॉब्लम दवाई से ठीक होती है लेकिन अगर आपने प्रिकॉशन नहीं ली तो सिर्फ दवाई पैलिएटिव असर करेगी मतलब सिर्फ आपको आराम लगेगा। जैसे ही आप तेल-मसाला फिर चालू कर देंगे या 2 बजे सोना फिर चालू कर देंगे तो आपकी प्रॉब्लम फिर से वैसे ही होगी। कुछ दिन तक आराम लगेगा फिर वापस होगी। तो आपको अपना दिनचर्या, प्रिकॉशन ये बहुत ज्यादा जरूरी है एज अ पेशेंट ठीक करना। आपको समझना कि अब मेरा शरीर जो है वो समझ, वो झेल नहीं पा रहा है जो आपका लाइफस्टाइल है तो आपको अपने शरीर को उस हिसाब से आपकी लाइफस्टाइल जो है चेंज करनी होगी। हल्का खाना होगा, तेल-मसाला कम लेना होगा, जो भी मेंटेनिंग कॉज और जो एक्साइटिंग कॉज है उसे आपको दूर करना होगा बेसिकली और मेडिसिन लेनी होगी कुछ दिन के लिए। मेडिसिन फिर बंद कर दीजिए लेकिन वह आप फिर से हि मत करिए जिससे आपको प्रॉब्लम हो रही थी, आपके शरीर को प्रॉब्लम हो रही थी, सिम्टम्स आ रहे थे तो वह चीजें बिल्कुल ना करें। धीरे-धीरे आपकी समस्या ठीक हो जाएगी। तो एज अ बॉडी आपको समझना बहुत ज्यादा जरूरी है कि हमारी बॉडी किस चीज के कारण ये प्रॉब्लम हो रही है और वह चीज आप थोड़ा सा कम करें। जैसे आपका वजन ज्यादा है, फिर उसके बाद घुटने में दर्द है तो आप घुटने की दवा कितनी भी खा लें और काम लगेगा लेकिन अगर आपने वजन कम नहीं किया तो कैसे घुटने का दर्द हमेशा के लिए ठीक होगा? तो इस चीज को जरूर ध्यान रखें और ये सबसे इम्पॉर्टेंट चीज है। एज अ पेशेंट आपको ये समझना कि आपको किस चीज से प्रॉब्लम है और वो चीज को आपको कम करना ही होगा और वो चीज मोस्टली मेडिसिन से कम नहीं हो सकती। आपका वजन मेडिसिन से कितना कम हो सकता है? अगर आप खाना खाते रहेंगे तो कैसे कम होगा? अगर आप एक्सरसाइज नहीं करेंगे तो कैसे कम होगा? तो अगर मान लीजिए आपको घुटने में दर्द है तो आप एक्सरसाइज तो अभी तुरंत नहीं कर सकते लेकिन खाने में परहेज कर सकते हैं, डाइट फॉलो कर सकते हैं, अपना वजन कम करिए थोड़ा, घुटना रिलैक्स करेगा साथ में मेडिसिन लीजिए, टहलना चालू करिए धीरे-धीरे आप ज्यादा टहलें और उसके बाद आपकी प्रॉब्लम ठीक हो जाएगी। वजन कम होता रहेगा, घुटना आपका रिलैक्स होता रहेगा और घुटने की प्रॉब्लम हमेशा के लिए ठीक हो जाएगी। लेकिन अगर आप इसे लेकर बैठ गए कि नहीं मैं तो चल ही नहीं सकता हूँ और मैं तो खाऊँगा ही खाऊँ चाहे तो मैं पिऊँगा ही पिऊँगा तो ऐसे आपकी बीमारी ठीक नहीं होती। और सबसे बड़ा कारण बीमारी ठीक ना होने का मेंटेनिंग कॉज और एंजाइटिंग कॉज ही है। अगर इसे आप सॉल्व कर लेते हैं तो आपकी प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी, ठीक हो जाएगी।

दोस्तों, आशा करता हूँ कि आपको ये वीडियो अच्छा लगा हो। अगर अच्छा लगा हो तो प्लीज वीडियो के नीचे एक लाइक का बटन दिया गया है तो उसको दबाना बिल्कुल बोलिएगा। यहाँ पर एक रेड कलर का सब्सक्राइब का बटन दिया गया है तो उसको भी दबा दीजिए। उसके बगल में एक बेल आइकन है तो उसको भी दबा दीजिए। मैं ऐसे ही होम्योपैथिक रिलेटेड डिसीज से रिलेटेड वीडियोस लाता रहता हूँ तो उसको देखने के लिए मेरे चैनल को सब्सक्राइब करना बहुत ज्यादा जरूरी है। दोस्तों, प्लीज एक शेयर की बटन की जरूर इस वीडियो को शेयर करिएगा। नीचे कमेंट सेक्शन है, मैसेज जरूर करिएगा। अगर आप मेरे मेंबर बनना चाहते हैं तो जॉइन की बटन दी गई है, जरूर दबाइए। अगर आप मुझसे हमेशा बात करना चाहते हैं या मुझसे हमेशा कांटेक्ट में रहना चाहते हैं, कभी भी आप चाहते हैं कि… बस इतना ही। कल फिर मिलते हैं। जय हिंद, जय भारत। धन्यवाद। थैंक यू सो मच। बाय।