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आज हम लोग बात करेंगे रेबीज वैक्सीन पर, जो किसी भी एनिमल के काटने पर कब रेबीज वैक्सीन लगानी है और कब नहीं लगानी है और क्या करनी है। इसमें किस एनिमल के काटने पर लगाना चाहिए। इसमें यह है जो स्तनधारी प्राणी बोलते हैं, मैमल्स होते हैं, जो मैमल्स होते हैं उनके काटने पर लगाया जाता है, चाहे कोई भी हो जैसे मंकी है, काऊ है, व बफेलो है या फिर क्या है कैट है, डॉग तो है ही। हम डॉग का कहना ही क्या, डॉग तो है ही, उसका तो वही प्राइमरी माना जाता है। इस किसी भी स्तनधारी प्राणी के एनिमल के मैमल्स के काटने पर हमें रेबीज वैक्सीन लगाना होता है।
तो हम पहले यह बताना चाहते हैं, केवल रेबीज वैक्सीन नहीं, फर्स्ट ऑफ ऑल हमें क्या करना है? उसके पहले भी कई प्रोटोकॉल फॉलो करने हैं। पहला यह है उसको सोप एंड वाटर से 15 से 20 मिनट कम से कम हमें वॉश करना चाहिए। और पानी कैसा होना चाहिए? फ्लोइंग वाटर। फ्लो होना चाहिए। क्रॉस में या जेट से कीजिए या फ्लो फोर्स में फ्लो हो रहा है। इसका पर्पस यह होता है फिजिकली जो एरिया है जहां कि जो टॉक्सिन डाला हुआ है, वह फिजिकली वॉश आउट हो जाए। जो जो भी एनिमल से गया हुआ है वायरस, वह वायरस फिजिकली वॉश आउट हो जाए। तो जितना मैक्सिमम वॉश आउट हो, अच्छा है। एस सून एस पॉसिबल पहला काम यह करना है कि कहीं भी आप पानी से करके नॉर्मल कोई भी साबुन, इसमें कोई स्पेशल साबुन लाने की जरूरत नहीं है, एनी सोप लगाना है। दूसरा उपाय करना है, उसमें बीटाडीन लगाना है। ऊंड को कभी भी कवर नहीं करना है, ओपन रखना है और बीटाडीन लगाइए, जितना कॉपी पूरा अमाउंट बीटाडीन लगाइए और उसको फिर क्या खुला रखना है ऊंड को और उसके बाद फिर अगला उपाय करना है, ठीक है?
अगला उपाय होता है कैटेगराइज करना है कि वैक्सीन किस कैटेगरी का है। हम कैटेगरी वन है, कैटेगरी टू है, कैटेगरी थ्री है। उसके हिसाब से फिर हम अगला प्रोसेस करते हैं। ओके? तो कैटेगरी वन में, कैटेगरी वन का मतलब यह हुआ जो उसमें क्या है? जस्ट लीकिंग और नॉर्मल स्किन। कोई भी नॉर्मल स्किन में चाट लेता है कुत्ता या उसका यह चाट लेता है, नॉर्मल स्किन में उसको कैटेगरी वन बोलते हैं। ओके? उस केस में हमें कोई भी वैक्सीन लगाने का जरूरत नहीं। नॉर्मल स्किन में यह चार्ट लिया या हमने कुत्ते को खाना खिलाया। हमने कुत्ते को खाना खिलाया तो उसमें कोई हमें वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं है।
कैटेगरी टू क्या होता है? कैरियर टू में हुआ स्किन में स्क्रैच हुआ है या हल्का वाइट हुआ है लेकिन वह डीप नहीं है। यदि स्किन के ऊपर लेयर को अंदर कवर अंदर गेहूं गया हुआ है उसको क्या बोलते हैं? कैटेगरी टू। कैटेगरी टू होगा और उस केस में, उस केस में वैक्सीन फाइव डोज लगेगा। और कैटेगरी थ्री में क्या होता है? जो कि स्किन को क्रॉस किया है या ब्लड आया हुआ है। कैसे पता है स्किन क्रॉस हुआ है? यह क्लियर कट दिखा रहा है कि स्किन के ब्रच हुआ है, गैप है तो वह यह हो गया या फिर स्क्रैच ही है तो उसमें क्या है? स्क्रैच में उसको हम स्पिरिट टेस्ट करते हैं। स्पिरिट स्वाब से हम लगाएंगे उस पर और उसमें हमें जलन होगी। इट मींस वह क्या है? कैटेगरी थ्री हो गया। कैटेगरी टू नहीं, कैटेगरी थ्री हो गया। म्यूकस मेंब्रेन पर, म्यूकस मेंब्रेन पर जैसे लिप्स पर या जेनाइटल एरिया में इस समय यदि लीकिंग होती है तो उसको हम क्या मानते हैं? कैटेगरी थ्री मानते हैं। यदि कोई जंगल का एनिमल काटता है, जंगली एंड वाइल्ड एनिमल काटता है, जंगल में काटता है तो वह क्या क्या होता है? कैटेगरी थ्री होता है। ओके?
तो कैटेगरी थ्री में क्या होता है? एंटीबॉडी लगाते हैं। रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन लगाते हैं। एंटी-रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन। आजकल अच्छा हो गया। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जो सिंथेसाइज हो रहा है वह बहुत सस्ता हो गया। जैसे इसमें रेबिशील एक ब्रांड है और भी दूसरा ब्रांड है तो रेबिशील हम लगाते हैं। तो यह कब लगाते हैं? कैटेगरी थ्री में। तो एक सबसे अच्छा चीज इसमें यह है जो यदि पहले किसी ने प्री-एक्सपोजर लगाया हुआ है। प्री-एक्सपोजर का मतलब होता है हमें कुत्ता काटा नहीं। हम पहले से कुत्ता या कोई भी एनिमल काटा नहीं है। हम प्रिकॉशनरी तीन डोज लगवा लेते हैं। तो तीन डोज प्रिकॉशनरी लगवा लिया या फिर कभी काट लिया। पांचों डोज लगवा लिया हमने और एंटीबॉडी लगा लिया। एंटीबी लगवा जरूरत पड़ा या नहीं पड़ा, फुल कोर्स ट्रीटमेंट लिया या पहले से तीन डोज लगवा लिया इस दोनों कंडीशन में लाइफ लॉन्ग माइंड, लाइफ लॉन्ग लाइफ में कभी भी आपको केवल दो डोज लगाना है, केवल दो डोज लगाना है। जीरो एंड थ्री। जीरो आज जैसे जीरो हो गया और तीन दिन बाद डे थ्री हो गया। एनी क्वेश्चन?
प्री-एक्सपोजर क्या होता है? प्री-एक्सपोजर यही हुआ कि हमें काटा नहीं। जो डॉग हैंडलर होते हैं, जो कुत्ते की देखभाल करते रहते हैं या जो घर में पालते हैं, किसी भी तरीके से कुत्ते कांटेक्ट में रहते हैं उनको उसके लिए भाई किसी या आपको लगता है रिस्क है, रात में आने जाना होता है, कुत्ते काट सकते हैं, आपको लगता है तो बेटर प्री-एक्सपोजर लगाओ। प्री-एक्सपोजर मींस आप एक्सपोजर नहीं हुआ आपको काटा नहीं है, आपने पहले से ही लगवा लिया तो उस केस में क्या करना है? तीन डोज लगवाना है और जीरो आज एक जिस दिन शुरू करते हो, जीरो हो गया और एक सातवें दिन और एक 21 से 28 दिन में एक लगाना है। तो तीन डोज लगवा लिए सब जो लाइफ लॉन्ग, यह सबसे बड़ा फायदा है। लाइफ में कभी भी आपको एंटीबॉडी नहीं लगवाना पड़ेगा क्योंकि एंटीबॉडी बहुत पेनफुल होता है। ऊंड के चारों तरफ लगाना होता है। इनफिल्ट्रेट करना होता है। जहां भी काटा है। सपोज करो आपको 20 जगह काट लिया तो 20ों जगह आपको ऊंड को कवर करना पड़ेगा। ओके? 20ों जगह कवर करना पड़ेगा। इसलिए तीन डोज पहले लगा लो। आपको यह काम नहीं करना पड़ेगा। और आपको लाइफ लॉन्ग इससे छुटकारा, एंटीबॉडी से छुटकारा मिल जाएगा पर पांच नहीं लगाना पड़ेगा, आगे दो ही डोज लगाना पड़ेगा, लाइफ लॉन्ग वैलिड है। सेम चीज अप्लाई होता है पोस्ट-एक्सपोजर। पोस्ट-एक्सपोजर मतलब आपको काट लिया है किसी ने, आपने उसका पूरा ट्रीटमेंट लिया है, जिस कैटेगरी में, कैटेगरी टू में है तो टू का ट्रीटमेंट, थ्री में थ्री का ट्रीटमेंट आपने ले लिया है तो फिर आपको लाइफ में कभी भी एंटीबॉडी की जरूरत नहीं है और ओनली टू डोज ऑफ वैक्सीन लगाने हैं, वही डे जीरो और जीरो थ्री। ओके? एनी क्वेश्चन?
अच्छा क्वेश्चन है। प्री-एक्सपोजर में यदि यह काटता है तो प्री-एक्सपोजर काटने मतलब हुआ उस दिन तक इम्युनिटी है हमारे पास ऑलरेडी तो अलग से हमें कुछ चेंज करने की जरूरत नहीं है। उसको तो फिर हम उसी एंटीबॉडी प्रोडक्शन और शेड्यूल को खत्म कर दिया तो कवर हो जाएगा और उसका हम सपोज करो जीरो दिन लगाया तो तीन दिन तो एंटीबॉडी है, वह कवर हुआ और रेबीज लगाने का पर्पस ही यही है जो कि जो एंटीबॉडी लगाने का जो कि उसका जो यह इमीडिएट एंटीबॉडी देना है, इमीडिएट एंटीबॉडी देना तो यदि उस केस में यदि काट लिया कैटेगरी थ्री है तो उस केस में हमें एंटीबॉडी लगाना पड़ेगा क्योंकि वैक्सीन सात दिन बाद करेगा। यह सात दिन बीत गया तो फिर हमें एंटीबॉडी नहीं लगानी पड़ेगी क्योंकि वैक्सीन यह मान लीजिए वैक्सीन का असर सात दिन बाद होगा। वैक्सीन एंटीबॉडी सात दिन बाद। ठीक है? एनी क्वेश्चन?
हम सर प्री-एक्सपोजर जैसे हमने आज काट दिया, काटा नहीं है और लगवा लिया और पांच दिन के बाद किया। फिर हम उसको कितने डोज और लगाएंगे? तो यही क्वेश्चन इनका था। उस केस में हमें यदि कैटेगरी थ्री था तो हमें एंटीबॉडी लगवाना पड़ेगा। एंटीबॉडी लगवाना पड़ेगा और उस केस में हमें यह जो है अपना प्री-एक्सपोजर का शेड्यूल तो काटा है ना तो उसको पूरा कर लेंगे तो हो जाएगा। एंटीबॉडी ऑलरेडी बनेगा तो उस केस में यह होता है कुछ केस में। एनी क्वेश्चन? एनी मोर क्वेश्चन?
अगर एक हफ्ते बाद आता है, वैक्सीन कभी भी, अच्छा क्वेश्चन है। कभी भी लाइफ में कितने इतने टाइम बाद भी कोई आता है तो हमें वैक्सीन लगाना है। वैक्सीन तो हमें मना कभी नहीं करना है। उस डे को हम क्या मानेंगे? जीरो डे। जीरो। जिस दिन भी आता है, सपोज एक महीने बाद आता है, दो महीने बाद आता है। इसका इनक्यूबेशन पीरियड का कुछ पता नहीं। कई सालों बाद भी होता है। कोई हमें दो साल बाद ही बोलता है तो हम उसको डे जीरो मानेंगे और सेम शेड्यूल फॉलो करेंगे। ठीक है? एंटीबॉडी को ऊंड के चारों तरफ ही लगाया जाता है। और इसको याद रखना है। यहां लगाते हैं हम। एंटीबॉडी तो उनके अराउंड लगाएंगे और वैक्सीन को कहां लगाएंगे? डेल्टाइड में लगाएंगे। आर में लगाएंगे। हम आजकल ग्लूटियल रीजन में जो बम पर या बोटक्स पर लगाते थे वहां नहीं लगाएंगे।
एक क्वेश्चन और कर दूं। मैं एंटीबॉडी के लिए बताना चाहते हैं। एंटीबॉडी का ऊंड के हर ऊंड को कवर करना है। यदि सपोज करो 20 जगह काटा बड़ा-बड़ा काट लिया है। उस केस में हम क्या करेंगे? हम उनको इसको एंटीबॉडी तो कम होगा, उसका डोज के हिसाब से होता है। एंटीबॉडी का डोज के हिसाब से होता है। तो हम डोज को क्या करेंगे? डाइल्यूट कर लेंगे एनएस से और फिर हम एक ईच एंड एव्री ऊंड को कवर करेंगे। उसका डोज फिक्स होता है, उतना ही लगाना है, उससे ज्यादा नहीं लगाना। वेट के हिसाब से होता है। ठीक है? तो हम ईच एंड एव्री ऊंड को कवर करेंगे। और सपोज म्यूकस मेंब्रेन में आई के अंदर लीक किया है या काटा है उस केस, म्यूकस मेंब्रेन में होता है। उस केस में हम क्या करते हैं? मुंह के अंदर काट लिया। उस केस में हम क्या करेंगे? रेंज करेंगे उसको। एंटीबॉडी से क्या करेंगे? रेंज करेंगे। यदि हमें ज्यादा अमाउंट चाहिए तो हम उसको डाइल्यूट करके एनएस से फिर हम उसको करेंगे। सिरिंजिंग करेंगे। उसको हम वाश आउट करेंगे। उससे एंटीबॉडी से, उससे एंटीबॉडी से लोकली वाश करेंगे। ऐसे केस में। ठीक है? एनी क्वेश्चन मोर?
सर अगर डॉग डॉग है घर में और अगर हम खाना गलती से लीक कर लिया हमारे खाने को उसको क्या हमने वैक्सीन लगवाना है? अभी तक कोई प्रूफ नहीं है कि फूड खाने से उसको फैलता है। हम तो उसमें हमें फूड से फैलता नहीं है, उसमें हमें वैक्सीन सजेस्ट करने की जरूरत नहीं है। लेकिन कोई इंसिस्ट करता है तो उस केस में हम ऐसा करेंगे, उसको वैक्सीन लगा देंगे और उस वैक्सीन को हम प्री-एक्सपोजर में कन्वर्ट कन्वर्ट कर सकते हैं। सपोज करो कि हमने जीरो और 3 लगा दिया और कुत्ते को कुछ नहीं हुआ तो इट्स ओके, वह प्री-एक्सपोजर मान लेंगे उसको। हम उसको फिर अगला दो डोज लगाने की जरूरत नहीं है। तीन डोज ही सफिशिएंट हो जाएगा। प्री-एक्सपोजर हो तो हमें लगाने की जरूरत नहीं। इसी तरह जैसे होता है रैट बाइट, रैट रैट बाइट या मोल बाइट में नॉर्मली वैक्सीन लगाने की देखा नहीं गया। इंडिया में कोई सीजन देखा नहीं गया तो रिकमेंड नहीं होता है। लेकिन हम कोई पॉसिबिलिटी हो सकती है तो हमें हुआ नहीं है लेकिन अभी तक लेकिन फिर भी कोई हमें करता है तो हमें लगाने में प्रॉब्लम, लगाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है, लगाना चाहिए। ठीक है? क्योंकि ये रेबीज में हम एक्स्ट्रा प्रिकॉशन लेके चलते हैं। कभी डाउट है जो कि अभी लगाना है नहीं लगाना है, डाउट जब भी है तो लगाना है, उसके फेवर में जाना है। कभी यह है कि कैटेगरी थ्री टू है, कैटेगरी थ्री है, डाउट है तो क्या करेंगे? कैटेगरी थ्री जाएंगे, हायर कैटेगरी में जाएंगे। हायर ग्रेड को देखेंगे। यह ध्यान रखना है इसमें। तो मर से और भी सारे कवर हो गए क्वेश्चन।
हम और प्री-एक्सपोजर में और आफ्टर पोस्ट-एक्सपोजर में अगर डिले हो जाता है तो दोनों में मतलब जो डोज का शेड्यूल है वो चेंज होना है या नहीं चेंज होगा? नहीं, अब चेंज नहीं करना। अब हम उसी दिन से शुरू करेंगे। उस दिन को शुरू करेंगे। पहले हम करते थे लेकिन अब हम चेंज नहीं करेंगे। डिले हो गया, उस दिन को हम मान लेंगे। अगला शेड्यूल उस हिसाब से नया शेड्यूल बना देंगे। नया शेड्यूल बना देंगे। सपोज कि जस्ट मीनिंग यह है कि कोई किसी का सेकंड डोज तीसरे दिन लगना था और नहीं लगाया, चौथे दिन आया तो उस दिन लगा देंगे। अगला हम उसका शेड्यूल उस हिसाब से हम चेंज कर देंगे। चार दिन बाद लगाएंगे। उस दिन को हम सेकंड डोज मान लेंगे और उस हिसाब से करेंगे। यही शेड्यूल फॉलो करते हैं। तो अब आजकल हम शेड्यूल चेंज नहीं करते हैं।
दूसरा एंटीबॉडी में हम एक चीज और बताना चाहते हैं। यदि हमें डोज के हिसाब से लगाते हैं तो यदि कम हमारे पास काटा हुआ है तो कम डोज से काम चल जाएगा। ऊंड को कवर करना है। ठीक है? यह है और एंटी एंटीबॉडी का डोज वेट के हिसाब से डोज होता है। लेकिन जो वैक्सीन है वह फिक्स डोज होता है। वह आज जन्म लिया, एक दिन का बच्चा है या 100 साल का है, उसका सेम है। वैक्सीन का, वैक्सीन का जो डोज है सेम है। उसका अमाउंट उतना ही लगेगा। लेकिन एंटीबॉडी वेट डिपेंडेंट है, वेट के हिसाब से। ठीक है? थैंक यू। थैंक यू फॉर टुडे।