Transcription
Facebook एड्स कोर्स: डिटेल्ड टारगेटिंग।
दोस्तों, अगर हम किसी भी प्लेटफॉर्म की बात करें तो वहां पर सबसे इंपॉर्टेंट किसी भी कैंपेन या ऐड को चलाने में जो फैक्टर है, वो है उसकी ऑडियंस। अगर आप बहुत ही ज्यादा ब्रॉड ऑडियंस टारगेट कर लेते हो, तो हो सकता है आपका पैसा वेस्ट जाए और आपको वो रिजल्ट्स ना आए जो आप लेकर आ सकते हो, जो आप पैसा खर्च कर रहे हो डेली। अगर आप अपनी ऑडियंस को बहुत ही ज्यादा नैरो कर लेते हो, तो हो सकता है वो उतनी रीच ही ना आए हो, उतना आपको इफेक्टिवली आपके कैंपेन ही रन ना हो।
तो डिटेल टारगेटिंग, आज जो ये वीडियो है, ये इतना इंपॉर्टेंट वीडियो है कि आपको हर कैंपेन में आपको एक काम आएगा। ये आपको अच्छे से सीखना है और एक-एक जो बारीकी मैं आपको बताने जा रहा हूं। बिकॉज़ हम जब अपने अलग-अलग क्लाइंट्स के लिए जब हम कैंपेन बनाते हैं, उनके लिए एड्स रन करते हैं, तो हम डिटेल टारगेटिंग में ऑडियंस को किस तरीके से हमें चूज़ करना है, हम इस बात का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं। तो बेसिकली इसमें किस-किस तरीके से हम अपनी ऑडियंस को टारगेट कर सकते हैं, वो आपको समझाऊंगा। अच्छे से सीखिएगा। बिकॉज़ ये वीडियो अगर आपने अच्छे से सीखा, तो जब मैं आपको प्रैक्टिकली कैंपेन बनाने सिखाऊंगा, अलग-अलग तरीके का हर कैंपेन बनाना सिखाऊंगा, तो वहां पर आपको वो ज्यादा उतना समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि कॉन्सेप्ट आपका यहीं क्लियर हो जाएगा। तो अच्छे से इस वीडियो को देखिएगा। एक भी पॉइंट मिस नहीं करना है।
वीडियो पसंद आ रहा है तो लाइक कर लीजिएगा, कमेंट कर दीजिएगा और सब्सक्राइब कर लो। बेल आइकॉन दबा दो ताकि एक भी वीडियो इस कोर्स का आपसे मिस ना हो। और इस जैसे जो अमेजिंग कोर्सर्सेस हम एआई और डिजिटल मार्केटिंग के ऊपर लेकर आ रहे हैं, वो भी आपको मिलते रहे। तो सब्सक्राइब कर लो। बेल आइकॉन दबा दो।
तो अब हम प्रैक्टिकली सीखेंगे। स्क्रीन पे चलते हैं और अच्छे से जानते हैं। दोस्तों देखिए, अभी आपको डैशबोर्ड दिख रहा होगा मेरे Facebook एड्स का। ठीक है? वो ऐड अकाउंट, बिज़नेस पोर्टफोलियो अकाउंट और उसमें एक पर्टिकुलर ऐड अकाउंट जो मैंने चूज़ कर रखा है, जिसमें मैं आपको कैंपेन बनाना सिखा रहा हूं। यह वो है। तो, यहां पर मैं न्यू कैंपेन पे क्लिक करूंगा और यहां पर मैं ट्रैफिक चूज़ कर लूंगा। ऑब्जेक्टिव कंटिन्यू करेंगे। मैनुअल ट्रैफिक कैंपेन पे जाएंगे और कंटिन्यू करेंगे।
कैंपेन बनाने के लिए कैंपेन का नाम वगैरह देना है। सारी चीजें करना। एडवांटेज कैंपेन बजट को ऑन कर लो। ठीक है? यह जरूरी है बिकॉज़ इससे हमारा बजट ऑप्टिमाइज करता है Facebook या मेटा एड्स। डेली बजट अपना वगैरह चूज़ कर लिया। नेक्स्ट करते हैं। एडसेट लेवल पे जाएंगे, जहां पर एक्चुअल में हमें अपनी ऑडियंस को टारगेट करना है। ठीक है? यहां पर नीचे आते हैं। देखते हैं कहां पर हमारे पास ऑप्शन आ रहा है। हम ये रहा दोस्तों। ठीक है?
यूज़ ओरिजिनल ऑडियंस, क्योंकि अब यहां पर ना हमको दो तरीके के ऑप्शन यह देने लग गया है। जो Facebook है या मेटा एड्स है, ये अब हमें दो ऑप्शन देता है। एक है एडवांटेज डिटेल टारगेटिंग। यहां पर आपको कुछ नहीं करना। यहां पर आपने बेसिक सेटिंग्स करी और भाई सब कुछ अब मैनेज करेगा मेटा एड्स का एi सिस्टम या मेटा एड्स का ये पूरा एल्गोरिदम जो बना हुआ है, ठीक है सॉफ्टवेयर। बट अगर आपको अपनी ऑडियंस खुद आपको सेलेक्ट करनी है, चूज़ करनी है, तो आपको यहां पर यहां मैनुअल पे आना पड़ेगा, जैसे मैंने अभी सेलेक्ट करा, एडिट करा।
अब यहां स्टार्ट करने से पहले आपको एक बहुत इंपॉर्टेंट प्रो टिप दे देता हूं। आप कितनी भी बड़ी बढ़िया ऐड कॉपी बना लो, कितने भी बढ़िया आप प्राइमरी टेक्स्ट लिख लो, क्रिएटिव बना लो, वीडियो बना लो, कुछ भी कर लो। ठीक है? बट अगर आपने सही ऑडियंस टारगेट नहीं करी, जो मैं आपको अब डिटेल टारगेटिंग में ऑप्शंस देने जा रहा हूं, उसको यूज़ करते हुए, तो आप समझ लेना कि आपको वो रिजल्ट्स मिल ही नहीं सकते जो आप डिर्व करते हैं। ठीक है? या जितना पावरफुल आपका प्रोडक्ट है या सर्विस है।
तो इंक्लूड पीपल हु मैच। अब यहां पर हमारे पास तीन ऑप्शन है। देखो ब्राउज़ पे क्लिक करूंगा। डेमोग्राफिक्स, इंटरेस्ट और बिहेवियर। एक-एक करके समझेंगे।
डेमोग्राफिक्स क्या है? अब देखिए, डेमोग्राफिक्स में कई ऑप्शंस हमारे पास ये देता है। एजुकेशन, फाइनेंशियल, लाइफ इवेंट्स, पेरेंट्स, रिलेशनशिप एंड वर्क। ठीक है? बाकी दोनों वो नहीं है। तो एजुकेशन पे जब मैं क्लिक करूंगा, तो एजुकेशन लेवल पे क्लिक करूंगा। एट हाई स्कूल, एट यूनिवर्सिटी, एट यूनिवर्सिटी, डॉक्टर डिग्री, फाउंडेशन डिग्री। अब ऐसे करके। अब मान लो कि मेरे को कोई पर्टिकुलर ऐसा कोर्स बेचना है, जो 12th के बाद ही लोग करते हैं। तो यहां पर मैं यूनिवर्सिटी, ठीक है? और जो भी मेरे को लगता है कि इस पर्टिकुलर प्रोफेशन के लोग, स्कूल या यूनिवर्सिटी या कॉलेज लेवल के लोग, ठीक है, मेरे लिए परफेक्ट ऑडियंस है, उनको मैं चूज़ कर लूंगा। अब मान लीजिए, ऐसे कोई लोग मेरा कोई कोर्स है या मेरे को ऐसा कोई प्रोडक्ट है, सर्विस है, जो मास्टर्स डिग्री वाले लोग टारगेट करेंगे या डॉक्टरेट डिग्री वालों के लिए मेरा कुछ प्रोडक्ट है, तो यहां से मैं टारगेट कर सकता हूं। वापस यहां पर।
ठीक है? फील्ड ऑफ स्टडी के हिसाब से हम कर सकते हैं। मान लो यहां पर एमबीए। मैंने एमबीए डाला। अब दोस्तों, एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनेंस, एमबीए, ऐसे करके अलग-अलग वो आ गए। अब मेरा डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स है। अब एमबीए मार्केटिंग मैनेजमेंट को मैं सेलेक्ट कर सकता हूं। एमबीए मार्केटिंग फाइनेंस। ठीक है? एमबीए। यहां पर ये पूरा का पूरा जो एमबीए डिग्री के ये वाले हैं। तो ऐसे करके मैं इन लोगों को टारगेट कर लूंगा। बिकॉज़ इन लोगों को डिजिटल मार्केटिंग के लिए अपने को अपग्रेड करना होता है, डिजिटल मार्केटिंग के टूल सीखने होते हैं। तो ऐसे करके मैं बीबीए। तो यहां पर हम पर्टिकुलरली कर क्या रहे हैं? आप समझे, हमारा यहां काम क्या हो रहा है कि हम डेमोग्राफिक्स में जो हमारे पास ऑप्शन आ रहे हैं, उनके हिसाब से हम लोगों को चूज़ कर रहे हैं, अपना टारगेट ऑडियंस चूज़ कर रहे हैं।
फिर ऐसे फाइनेंस में, इनकम के हिसाब से हम कर सकते हैं। देख रहे हो? टॉप 10 ऑफ़ ज़िप कोर्स, यूएस वगैरह। ये इंडिया में ऑप्शन नहीं होता इनकम के हिसाब से। मैं आपको बता दूं। मान लीजिए अगर मेरा कोई वीडियो यूएस में कोई देख रहा है, तो वहां पर वो कर सकता है। लाइफ इवेंट्स, एनिवर्सरी। ठीक है? अब किसी का गिफ्ट्स का काम है। ठीक है? अब वो उन लोगों को पहले से टारगेट कर दे, जिनकी एनिवर्सरीज आने वाली है। सारी चीजें हैं। अवे फ्रॉम फैमिली, अवे फ्रॉम होमटाउन, ऐसे करके। तो एनिवर्सरीज के अंदर यहां पर वो उनको टारगेट कर सकता है, ताकि वो गिफ्ट्स वगैरह वो अपने लिए बाय करें या कुछ करें। फिर यहां पर आप देख सकते हो, यहां पर विद इन 30 डेज या जो लोग एनिवर्सरी विद इन, जो इनके 30 से 60 दिन के बीच में जिनकी एनिवर्सरीज आ रही है, मतलब इस लेवल तक की टारगेटिंग है, आप सोच रहे हो? फिर अवे फ्रॉम फैमिली। अब जो लोग अब अपनी फैमिली से दूर रह रहे हैं, उनको अगर मान लो आपका कोई टिफिन का बिज़नेस है या आपका पीजी का बिज़नेस है या आपका रेंट पे चढ़ाने का कोई बिज़नेस है, उन लोगों को आप टारगेट कर सकते हो। अवे फ्रॉम होमटाउन। फिर डेट ऑफ़ बर्थ के हिसाब से, मंथ ऑफ़ जैसे मई के अंदर इतने लोगों का वो आ रहा है, तो आप कोई टीशर्ट ऐसी कस्टमाइज़ टीशर्ट, जो मई में जिनका बर्थडे है, उनके लिए मैन और वुमेन के लिए टारगेट कर रहे हो, तो सोचो कितने ज्यादा अलग-अलग ऑप्शंस हमारे पास आ रहे हैं।
पेरेंट्स, रिलेशनशिप। अब रिलेशनशिप या रिलेशनशिप स्टेटस। एंगेज्ड, जो लोग हो चुके हैं, उनको आप अलग तरीके से आपके प्रोडक्ट सर्विज पिच कर सकते हो, ऐड दिखा सकते हो। जो रिलेशनशिप में हैं, उनके लिए अलग। तो कई सारी इंडस्ट्रीज हैं, जिनके लिए ये टारगेटिंग तो बहुत ही अमेजिंग ऑप्शन है, अगर सही ऑडियंस तक पहुंचना है। ठीक है? ऐसे ही रिलेशनशिप, रिलेशनशिप स्टेटस और वर्क। वर्क में हम आ गए। एंप्लयरर्स, इंडस्ट्रीज, जॉब टाइटल्स। अब जॉब टाइटल्स के हिसाब से, मान लो मैंने यहां पर डाला मार्केटिंग सेल्स में जो भी लोग हैं, मैं टारगेट करना चाहता हूं, क्योंकि मैं डिजिटल मार्केटिंग का उनको कोर्स का ऐड दिखाना चाहता हूं। तो मैं इस तरीके से टारगेट कर सकता हूं। तो आप समझ गएगे कि किस तरीके से हम डेमोग्राफिक्स को बेसिकली टारगेट कर सकते हैं।
अब ऑप्शन आता है इंटरेस्ट। बेसिकली इंटरेस्ट के अंदर हमारे पास कई सारी इंडस्ट्रीज आ गई, लाइक बिज़नेस इंडस्ट्री, एंटरटेनमेंट, फैमिली एंड रिलेशनशिप, फिटनेस एंड वेलनेस, फूड, ड्रिंक, हॉबी, शॉपिंग, स्पोर्ट्स, आउटडोर, टेक्नोलॉजी, ऐसे करके। अब इसी के अंदर अदर भी आ गई। जैसे बिज़नेस एंड इंडस्ट्री में मैं क्लिक करता हूं, तो एडवरटाइजिंग, मार्केटिंग, ये सब आ गई। अब मैं डिजिटल मार्केटिंग पढ़ाता हूं या मार्केटिंग कंसल्टेशन देता हूं, तो मैं एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग के लोगों को टारगेट भी कर सकता हूं, सॉरी, टारगेट भी कर सकता हूं। ठीक है? अब यहां पर बैंकिंग से रिलेटेड कुछ प्रोडक्ट हैं। डिजाइनिंग वगैरह से रिलेटेड। ठीक है? मैनेजमेंट, बिनेस फाइनेंस, मार्केटिंग, बिनेस एंड फाइनेंस। तो ये पूरा का पूरा एक ऑडियंस साइज आ गया। भाई, इस पर्टिकुलर जो कैटेगरी है, इसमें इतना जो लोग हैं, इतना साइज है ऑडियंस का, जो इंटरेस्ट रखता है इस पर्टिकुलर कैटेगरी में। तो ये तो यहां पर अलग-अलग दे रखा है। बैंकिंग का ये है, डिजाइन का ये है। तो कितना आप डीप तक जा सकते हो चीजों को सीखने के लिए। ऐसे एंटरटेनमेंट, फैमिली। ठीक है? टेक्नोलॉजी। इस तरीके से हम टारगेट कर सकते हैं एक पर्टिकुलर इंडस्ट्री को और इंडस्ट्री के अंदर भी अलग-अलग हमारे पास सब कैटेगरी के ऑप्शंस आ रहे हैं। उधर भी हम टारगेटिंग कर सकते हैं। तो ये तो हो गया इंटरेस्ट के हिसाब से।
वैसे जनरली इंटरेस्ट के हिसाब से जो टारगेटिंग होती है, वो बहुत ब्रॉड टारगेटिंग होती है। अब मान लो कोई इंटरेस्ट डाल देता है मार्केटिंग या एडवरटाइजिंग, तो इतनी ब्रॉड ऑडियंस हो गई, भाई सारे जो मार्केटिंग एडवरटाइजिंग वाले होते हैं, तो ना मेरे डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स खरीदने के लिए बैठे हैं। तो वहां पर नैरो टारगेटिंग का हमें ऑप्शंस करना होता है। नैरो टारगेटिंग क्या है? किस तरीके से हम उसको चूज़ करेंगे, वो मैं आपको अपकमिंग वीडियो के अंदर इस कोर्स में सिखाऊंगा।
अब हम आते हैं बिहेवियर के अंदर। बिहेवियर एनिवर्सरी बिहेवियर में सॉरी, जो ऑप्शंस आ रहे हैं, लाइक मोबाइल डिवाइस यूजर, कंज्यूमर क्लासिफिकेशन, डिजिटल एक्टिविटीज, मोबाइल डाटा यूजर, मोर कैटेगरीज। आप यहां पर देख सकते हो, इंटरेस्ट, अपकमिंग इवेंट्स, ठीक है? परचेस बिहेवियर वाले लोग, ठीक है, जो शॉपर्स वगैरह है, ठीक है? अब यहां पर एक एग्जांपल समझो। बहुत सारे लोग जो डिजिटल एक्टिविटीज के अंदर एंगेज रहते हैं, जैसे क्रिएटर्स वगैरह हो गए, ठीक है? या गेमर्स हो गए। तो यहां से हमको वो पर्टिकुलर पता लगता है बिहेवियर, जैसे मैं हूं। मेरे को ट्रैवल से रिलेटेड वीडियोस, वॉग्स देखना पसंद है। डिजिटल मार्केटिंग से रिलेटेड बहुत ज्यादा पसंद है, बिकॉज़ डिजिटल मार्केटिंग तो मेरा काम है। तो मैं उसकी चीजें बहुत तलाश करता रहता हूं, देखता रहता हूं। हैं? और उसके ऊपर एक्शंस लेता रहता हूं। इंगेज रहता हूं उस तरह के कंटेंट से और मैं ट्रैवल पसंद करता हूं। मैं घूमता भी बहुत हूं। मैं ट्रेवल ब्लॉगर भी हूं। तो वो सब चीज़ भी मैं करता हूं। तो ये मेरा बिहेवियर पढ़ते हैं। तो बिहेवियर के हिसाब से मेरे को उस कैटेगरी के अंदर डाल देते हैं। तो यहां पर आपको क्रिएटर्स को टारगेट करना है। गेमर्स को करना है। ठीक है? अर्ली टेक्नोलॉजी अप्टर्स, वो लोग जो टेक्नोलॉजी में बहुत ज्यादा रुचि रखते हैं, उसमें बहुत ही जल्दी वहां पर आके उस टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं, उस तरीके के लोग। सोचो कि इन्होंने कितनी बिहेवियर एनालिसिस करी होगी और जो भी यूजर हर वक्त Facebook के ऊपर, Instagram के ऊपर, इनके प्लेटफॉर्म्स के ऊपर टाइम स्पेंड करते हैं, उनका डाटा किस तरीके से उन्होंने कलेक्ट करा होगा। तो, ये ऑडियंस आप लोगों के पास आती है।
अब यहां पर, अब यहां पर आप देखो, जैसे कि हम बात करते हैं परचेस बिहेवियर वाले। एंगेज शॉपर्स। यह वो कैटेगरी है, जो ई-कॉमर्स बिजनेस वाले लोगों के लिए तो एक ट्रेजर है। बिकॉज़ ये वो लोग हैं, जो ज्यादातर शॉपिंग वपिंग इस तरीके की चीजों के संग एंगेज रहते हैं। ठीक है? तो ई-कॉमर्स वाले इसको टारगेट कर सकते हैं। ठीक है? फिर यहां पर ट्रेवल आ गया। अब ट्रेवल के अंदर फ्रीक्वेंट इंटरनेशनल ट्रेवलर्स। तो जो वीजा वाले हैं, वो इन लोगों को टारगेट कर सकते हैं। ठीक है? फ्रीक्वेंट ट्रेवलर्स हो गए। रिटर्न फ्रॉम ट्रेवलिंग वन वीक एगो, जो अभी बाहर से ट्रेवल करके आए हैं एक हफ्ते पहले। ठीक है? टू वीक्सो। इतने लेवल पे टारगेटिंग हो रही है। तो सोचिए, जो डेमोग्राफिक्स, इंटरेस्ट और बिहेवियर, तीन ऑप्शंस इन्होंने दिए हैं, इसमें कितना डीप में जाके हम अपने प्रोडक्ट सर्विस के हिसाब से अपने ऑडियंस को टारगेट कर सकते हैं।
फिर जैसे मैंने आपको बताया, मैं नैरो डाउन कैसे करना है? अगर ज्यादा ब्रॉड हो रहा है, वो भी सिखाऊंगा। बट अभी आपको ये वीडियो कैसा लगा? कितने डीप में आपको चीजों को समझ में आया। और ऐसा नहीं होता कि मिनटों के अंदर आप वो टारगेटिंग सेलेक्ट कर लोगे। जब आप कैंपेन बनाते हो, तो आपको बड़ा रिसर्च करना पड़ता है, एनालिसिस करना पड़ता है। ऑडियंस कितनी ब्रॉड है, नैरो है। ठीक है? और ऑडियंस में और मैं कैसे इसको इंप्रूव कर सकता हूं। बहुत मेहनत करनी पड़ती है। तब जाकर आपकी परफेक्ट ऑडियंस बनती है। और जब उस ऑडियंस से रिजल्ट आते हैं, तो पहले उस ऑडियंस को हमेशा सेव भी करके रख लो, जब आप एक ऑडियंस वगैरह सेलेक्ट करो, ताकि अगर उसे रिजल्ट अच्छा आए, तो इन फ्यूचर किसी नए कैंपेन में उस ऑडियंस को यूज़ कर लो। बार-बार रिसर्च और बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
तो कैसा लगा यह वीडियो कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा दोस्तों और उम्मीद करता हूं यह कोर्स आप अच्छे से सीख रहे होंगे। थैंक यू।