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How AI is making us Dumber in HINDI {Future Friday}

science to technology25:03

Transcription

स्वागत है आप सभी लोगों का मेरे चैनल साइंस टेक्नोलॉजी में। मैं अनुपम विपुल आप सभी लोगों का स्वागत करता हूं आज के शो फ्यूचर फ्राइडे में।

इफ यू वांट टू वाच दिस वीडियो इन इंग्लिश प्लीज क्लिक द डिस्क्रिप्शन गो टू माय इंग्लिश ओनली चैनल।

तो आज हम लोग बात करेंगे कि एआई हमें मूर्ख कैसे बना रहा है। तो ये समझना बहुत जरूरी है। ये अभी बहुत सीरियस टॉपिक बन गया है। क्योंकि एक तो तरफ से एआई हमारा जॉब ले रहा है। दूसरी तरफ से हमें मूर्ख भी बना दे रहा है कि जो नहीं भी देना चाहिए था वो भी दे देंगे उसको। तो ये समझना बहुत जरूरी है।

तो सबसे पहले समझना ये आएगा काफी लोगों नहीं एआई नहीं है। ये नहीं है। जारवस नहीं है। हरसाई नहीं है। दीर्घाई नहीं है। उसका कोई मतलब नहीं है। एआई जो है वो है और आ चुका है। और उसका असर रियल है। यानी कि जो होना था वो हो गया है। इसके आगे जो है वो सिर्फ इसका इंप्रूवमेंट मतलब आप ऐसा समझिए कि जो पहली बार परमाणु बूम बनाना मुश्किल था। लेकिन जब वो पहली बार बन गया उसके पास है तो कोई टेंशन वाली बात है ही नहीं। बस टाइम लगेगा। तो एआई वो लाइन क्रॉस कर चुका है। यानी कि अभी अगर आप डिस्कशन करना चाहे तो टाइम वेस्ट करने के लिए कर सकते हो कि ओ ये सब एजीआई नहीं है। बस फैंसी चैट बॉट है। वो सब का कोई फर्क नहीं पड़ना। वो गाड़ी खुल चुकी है। हो गया वो ट्रेन निकल गई है।

अब रहा बात कि उसका जो इंपैक्ट है कि इतना बड़ा चेंज लाना कि जहां पे हम लोग सिलिकॉन को सोचने लायक बना दे या एटलीस्ट ऐसा ये करें। इमिटेट करे, बिहेव करे कि वो लगे कि सेंटिएंट है वो हो गया है और उसका असर फैल रहा है और यह समझिए इसका जो स्पीड है जो डैमेज दे रहा है ये बहुत फास्ट है और इसका कोई क्योर नहीं है मतलब ये बीमारी इतना स्पीड से फैल रहा है कि हम लोग ध्यान भी नहीं दे रहे हैं और इसका कोई मतलब इन प्रिंसिपल या कोई सोचे कुछ नहीं है तो ये समझना बहुत जरूरी है और ये समझ इसका सबसे बड़ा असर क्या होगा ठीक है मतलब ये हो रहा है एआई आ चुका है मार्केट में और स्टूडेंट्स तक पहुंच गया उससे होगा क्या उससे होगा कि एक पूरा जनरेशन ेशन मतलब कि जिनका जन्म समझ लीजिए कि रीसेंट टाइम्स के आसपास हुआ है अराउंड लेस जैसे कि 2010 के आसपास में वो घुस रहे हैं इस दुनिया में जहां वो चैट जीपीटी डे वन से एक्सेस कर पाया और चैट जीपीटी सिर्फ एक एआई है ऐसे कई सारे एआई बन चुके हैं और ये हमेशा मैं समझा देना चाहूंगा कभी भी किसी चीज का पहला सबसे मुश्किल होता है चैट जीपीटी पहली बार जब आया 3.5 मार्केट में वो बड़ी बात थी उसके बाद से तो अब हर कोई सूत उठा बना ले रहा है तो ये समझना बहुत जरूरी है कि ये पूरा जनरेशंस को नुकसान कर देगा जनरेशंस को मतलब कि ये ऐसा नहीं कि अरे कोई बड़ी बात नहीं ना जी ना ये शिफ्ट डिलीट करने लायक बात है तो ये समझना बहुत जरूरी है।

The effect of over reliance on AI dialogue systems on students' cognitive ability is पर रिव्यु किया गया है। University students of critical thinking another hard work to AI मतलब ये समझना बहुत जरूरी है। Students के हाथ में पहुंच गया है। ये मामला बहुत सीरियस है। बहुत गंभीर है और इसके बारे में नुकसान हो रहा है। इसको बताना ऐसी बात हो गई कि पानी गीला है। तो समस्या है। ये समझना बहुत जरूरी है कि हो गया है। अब आप डिस्कशन करना। ओ इट्स जस्ट अ चैट बॉट सर चैटबॉट पुराने वाले नहीं ऐसे होते थे। ये एआई है और इसका सबसे बेस्ट है जो गॉड फादर ऑफ एआई है वो लिटरली इसका एक उन्होंने ब्रेन का मैपिंग किया है। आप कह लो कि अच्छा ये ऐसे करके वो देख रहा है वो देख रहा है। हमारा ब्रेन भी वैसे ही काम करता है। लिटरली हमने इस ब्रेन का प्रोटोकॉल कॉपी कर दिया सिलिकॉन में। और अब आप लड़ने का लड़ सकते हो कि वो इट्स नॉट ट्रू अंडरस्टैंडिंग वो बस कॉम्प्लेक्स ज्यादा है। मतलब कि वो मैसेज ज्यादा है। और क्यों मैसेज आया? क्योंकि उसमें एब्सोल्यूट डेटा है। हमारे पास यहां पे एब्सोल्यूट डेट नहीं है। उसके पास एब्सोल्यूट डेटा है। तो समझना बहुत जरूरी है और वो कुछ ही साल की दूरी में है जहां पर वो एक्चुअली इसके लेवल पर कमट करने लग जाएगा और उससे पहले ही इतना नुकसान कर रहा है। ये समझना बहुत जरूरी है कि अभी वहां तक नहीं पहुंचा एजीआई तक और अभी हमारा बैंड बजा रहा है। आगे का तो डिस्कशन ही क्या करें। मतलब सोच लीजिए तीन-चार साल पहले मैं इसके बारे में कोई नहीं बात कर रहा था और अब सब जगह पे रिसर्च पेपर किया जा रहा है कि कितना नुकसान हो रहा है इससे हर पब्लिकेशन में हर जगह।

तो अब बात करते हैं इसको थोड़ा सा हम अपना एक्सपीरियंस दे देते हैं ताकि आपको समझ में आए कि मैं कैसा दुनिया से आया हूं और मुझे किस तरह की दुनिया दिखती थी व अब ये दुनिया बदल कैसे गया है ताकि आपको थोड़ा सा कॉन्टेस्ट है। पहली बात मैं थोड़ा उम्रदार हूं। आई एम ओल्ड। कितना ओल्ड है जो लोग मेरा लाइव स्ट्रीम देखे होंगे बर्थडे वाला तो बता आई एम ओल्ड। तो बेसिकली समझना बहुत जरूरी है कि हम जिस टाइम में आए थे उस टाइम ये बहुत फेवरेट था मेरा। काफी लोगों को पसंद था। मतलब ये आई थिंक 10 साल या 15 साल चला है ये। बहुत अच्छा टीवी शो था और इसी तरह का मेगा स्ट्रक्चर चलता था। इस तरह के शोज़ आते थे जिस पे सब लोग देखते थे। मतलब कि मेरे टाइम में जो नर्डी लोग होते थे वो सब इसी तरह का डेटा कंज्यूम करते थे। हाउ इट्स मेड आता था। मेगा स्ट्रक्चर है, सुपरस्ट्रक्चर है, मेक इट बिग है। बहुत सारे ऐसे शो आते थे जो सब लोग देखते थे। डिस्कवरी चैनल पे, हिस्ट्री चैनल पे, नेशनल ज्योग्राफी पे ये सब देखते थे। और YouTube पे समझिए कि हम बहुत पहले आए हैं। कितना पहले आए हैं। YouTube पे जब हम आए हैं तो उस टाइम पे YouTube सिर्फ 10 मिनट का होता था। मतलब 10 मिनट का लिमिट देते हैं। मेरा जो पहला वीडियो YouTube पे डाला हुआ है मैं नहीं कहूंगा कि खोजिए और देखिए बहुत क्रिंज है। बहुत पुराना है। वो 13 साल पहले अपलोड किया गया था। तो समझना बहुत जरूरी है कि हम उम्रदार हैं। थोड़ा दुनिया देख चुके हैं।

दूसरी बात हम जिस टाइम पे बड़े हो रहे थे हमारे मतलब लोगों में जो हमारे नर्ड ग्रुप थे उसमें सब लोग को ये सब डाटा मिल रहा था। बढ़िया हाई क्वालिटी मतलब कि अभी भी मैं जेन्युइनली बोला मेरे अगर पैसा हो जाए तो मैं मेथबस्टर का पूरा वो बुलरे खरीद लूं। पूरा सारे सीजन का जस्ट आउट ऑफ रिस्पेक्ट क्योंकि बहुत अच्छा शो था तो ये समझना बहुत जरूरी है और हम YouTube बहुत हम सारा YouTube का मेटा चेंज होते हुए देख चुके हैं यानी कि 10 मिनट से 15 मिनट खोल दिया वो बड़ी बात थी जिस टाइम ये हमको मिला था वो बहुत बड़ा बात था कि YouTube में आपको अलऊ किया जा रहा है 10 मिनट से ज्यादा लंबा वीडियो डालना उसका ईमेल आता था हम तब से कर रहे हैं YouTube पे मतलब फुल टाइम नहीं कर रहे फुल टाइम तो हम 7 साल पहले ही किए हैं लेकिन हम पहले भी उस पे थे और उस टाइम में छोटा बनाओ चलेगा फिर लंबा बनाओ चलेगा फिर थंबनेल में सीधा सीधा कॉर्नर डाल दो वो चलेगा। वो सब हम देख चुके हैं। फिर बीच में आ गया कि रिटेंशन टाइम रिटेंशन टाइम वो सारा चीज देख चुके हैं। तो ये समझना बहुत जरूरी है कि एक्सपीरियंस है मेरे पास। जो आप लोग बोल रहे हो कि अच्छा ये है वो है वो सारा चीज हो चुका है। अभी जैसे सब लोग कह रहे कि अरे शॉर्ट है शॉर्ट है। इस लाइक सर YouTube में ये सब हो चुका है। तो ये समझना बहुत सही है।

अब रहा बात कि मेरा कोर प्रॉब्लम क्या है? कोर प्रॉब्लम है मेरा ग्रामर और स्पेलिंग भगवान भरोसे है। यानी कि मेरा कॉपी इंग्लिश के सर नहीं चेक करते थे। रख देते थे साइड में। सबका क्लास का चेक करते थे। फिर एंड में पढ़ते थे। मेरा इतना खराब स्पेलिंग और हैंडराइटिंग है। लेकिन ये सब तो हुआ। तो इसका असर क्या पड़ा? इसका असर ये पड़ा कि जब सर्चिंग के मामले में बात आता है यानी कि खुदाई करने का उस मामले में हमसे भिड़ने के लिए अच्छे-अच्छे लोगों को मेहनत करना पड़ेगा। मतलब ऐसा नहीं कि हमसे बेटर आप नहीं कर सकते। लेकिन आपको मेहनत लगेगा। यानी कि मैं जब गेम आर्टिस्ट बना उसमें हम लोग को काम होता था कोई भी जैसे प्रॉप बनाना है तो प्रॉप बनाने के लिए उसका रेफरेंस कलेक्ट करना होता था। हम तुरंत खोज लेते थे। तुरंत फर्क नहीं पड़ता। वर्ल्ड वॉर टू का कोई रैंडम सा टेलीफोन था। खोद खाद के उसका किसने बनाया कब बनाया सब खोद खाद के निकाल देते थे। और ये हम पहले कर रहे थे। समझिए चैट जीपीटी तब तक था भी नहीं। विकपीडिया बड़ी बात होती थी। और हम फोरम्स जा के खोदने का हमको आदत पड़ चुका था। मतलब कि अगर हम बैठे हैं कि हमको ये जानना है दिन खत्म होते होते तक हम जान जाएंगे कि वो क्या है पूरा स्टार्ट टू फिनिश तो एक्सपीरियंस ये है मेरा समझना मुझे थोड़ा उम्र हो चुका है हम थोड़ा दुनिया नीचे और ये अब तो मतलब इस सब के बारे में बात भी नहीं होता कि कितना बड़ा बात सब बच्चे लोग बात करते थे मतलब इसका एक जो पॉजिटिव इंपैक्ट होता था जो बड़ी बात होती थी डिस्कवरी चैनल है नेशनल जग्राफी है वो सब खत्म हो चुका है आज के टाइम में और बोल रहे हैं कि YouTube पे लेके अच्छा YouTube पे ऐसा चलता है इस लाइक हम सब देख चुके हैं इट्स लाइक ऐसे वैसी बात नहीं हम देख चुके है तो सर्चिंग के मेरे पास मेरे पास एक बहुत अच्छा स्किल सेट है और वो सारा स्किल सेट बिल्ड अप हुआ है। यानी कि जो सर्चिंग मुझे गेम आर्टिस्ट बनने के टाइम यानी जब मैं स्टूडेंट था जब पढ़ाई कर रहा था उस टाइम मैं 3Ds मैक्स का ट्यूटोरियल खोज के देखता था। उस टाइम हम रिगिंग विगिंगिंग करते थे। मतलब मेरा सबसे फ्रस्ट्रेटिंग एक्सपीरियंस रहा है इंस्टट्यूट में कि हम लोग को रिगिंग सिखाया जा रहा था। रिगिंग मुझे दिल से पसंद है। अंदर से मजा आता है। हम रिगिंग के लिए मेहनत करना शुरू किए। हम मेरा कंप्लेन कर दिए बच्चे लोग भाई। मतलब मेरे ही कॉलीग्स लोग कंप्लेन कर दिए। हम बोले भैया ये क्या बात हो गया? उसे बोला कि तुम ज्यादा शो ऑफ कर रहे हो। लाइक सर आपने ये दिया था कि इसको बेंड करके दिखाओ। मैंने वो बनाया कि नहीं। दूसरे लोग अगर नहीं कर पाए तो उसमें मेरी क्या गलती है? एंड एंड में जब मतलब आई थिंक बहुत दिन बाद फिर से मिले तो लिटरली बता रहे थे कि हम चाह रहे थे तुम्हारे जैसा कोई इंटरेस्टेड रहे तो पूरा वो दिखा रहे थे फेशियल रिग बनाना चाह रहे थे। ये सब बनाना चाहिए। लोग सपोर्ट ही नहीं किए। वो सब आलसी थे सब हम लड्डू है। और देखिए हम कितने अच्छे आलसी थे। जब जी ब्रश में मेरा मन नहीं लग रहा था। हम छोड़ दिए क्लास की लाइक सर मन नहीं लग रहा है। नहीं समझ में आ रहा छोड़ो। बाकी मैं बाकी में हमने इंटरफेयर नहीं करे। मेरे में लोग कंप्लेन कर दिए। इट्स लाइक भाई ये क्या बात होता है कंप्लेन करती है भाई तो थोड़ा दुनिया हम भी देख चुके हैं सब चीज जो होता है ना वो बुली हुआ ये सब सब अच्छा खासा सब दुनिया देख चुके हैं मिथबस्टर को लॉन्च होते हुए देखे हैं और खत्म होते हुए भी देखे हैं तो अब रहा बात कि सबसे इंपॉर्टेंट चीज क्या है जो मुझे आज यहां पे खड़ा कर रहा है वो है क्यूरियोसिटी और ये समझना बहुत जरूरी है जैसे आइंस्टाइन के भाषा में कहा जाए आई हैव नो स्पेशल टैलेंट आई एम द ओनली पैशनेटली क्यूरियस और ये सबसेेंट बात है और ये जैसे ही मैंने YouTube चैनल बनाया जब एज लाइक सीरियस करने लगा थोड़ा सा ही पॉपुलर होने लगा उस टाइम समझ में आया लोग क्यूरियस एकदम नहीं होते हैं ये बहुत सीरियस बात है क्योंकि क्यूरियोसिटी नहीं है बाकी चीज तक आप जाओगे नहीं मतलब ये समझना बहुत मुझे कि होता है कि आपको गाड़ी के लिए गराज को खोलना पड़ेगा ना आप गराज ही नहीं खोल रहे हो गराज क्या है गराज है क्यूरोसिटी क्यूरोसिटी आपको खोलना पड़ेगा और वहीं से सारा चीज स्टार्ट होता है जैसे कि हमको कितना लोग शुरू में पढ़ते थे कि आप ये दे दो प्रेजेंटेशन दो अरे भैया कुछ स्लाइड तो है चार पांच लाइन भी नहीं लिखा हुआ ऐसा नहीं कि पूरा टेक्स्ट पैराग्राफ है या खूब सारी इमेजेस हैं। आप आराम से इसको रेप्लिकेट कर सकते हैं। हम सिर्फ इतना लोग शुरू शुरू में पड़े रहते हैं। ये दे दो पीपीटी दे दो। और हमको कैसे पता कि आप आलसी हो क्योंकि ये पीपीटी नहीं है। और इस फोटो फ्रेम जो आप देख रहे हो टीवी देख रहे हो इसमें लिखा हुआ है कि ये क्या है? लेकिन उतना आप मेहनत नहीं करोगे। क्यूरियस हो नहीं खोदोगे नहीं। खोदोगे नहीं पता नहीं चलेगा। तो ये समझना बहुत जरूरी है कि अगर आप क्यूरियस नहीं है तो बाकी का डिस्कशन ही नहीं करना है आपको। अगर आप सिर्फ वो क्या बोलते हैं जैसे एनपीसी है सिर्फ बह रहे हैं भावनाओं के साथ जैसे मतलब स्कूल भेज दिए मां-बाप ने तो आप वहां स्कूल में हो स्कूल से आए कोचिंग में चले गए कोचिंग से आके फिर गए मतलब जो जो आपको करने बोल दिया जाए आप कर रहे हो लेकिन अंदर से खुजली नहीं हो रही है आपका कुछ नहीं होने वाला है ये समझना बहुत जरूरी है जितने लोग जिंदगी में कुछ किए हैं चाहे वो पॉजिटिव डायरेक्शन में हो चाहे नेगेटिव डायरेक्शन में हो चाहे एक्सप्लइटेटिव डायरेक्शन में हो वो सारे में एक ही चीज कॉमन है क्यूरियोसिटी क्यूरियोसिटी के बाद समझिए तभी आप कुछ चीज को खोदिएगा उसको समझिएगा और तब अंडरस्टैंडिंग आए और अंडरस्टैंडिंग से फायदा यह होता है कि आपको मूर्ख बनाना मुश्किल हो जाता है। असंभव नहीं। मैं एकदम क्लियर कर देता हूं। जैसे कि अभी हम उस जगह पे पहुंच गए जहां काफी सारा चीज हम रिसर्च किए हैं। तो एक थोड़ा सा अंडरस्टैंड क्या हमको कोई मूर्ख बना सकता है आराम से लेकिन मेहनत करना पड़ेगा उसको। ऐसे नहीं बस जैसे कि कोई कितने सारे यूटर्स लोगों को चूना लगा रहा है। क्यों चूना लगा? क्यूरियस नहीं है। बस हां आप कुछ बोल रहे हो हम सुन रहे हैं। क्यूरियस नहीं है। क्यूरियस होते है तो जैसे ही कोई बोलेगा कि सर मैग्नेटिक रेफ्रिजरेशन ना सॉलिड स्टेट है। लोग जूता लेके चप्पल से मारने लगेंगे कि भैया ये क्या कर उसमें से इतना सारे वाल्व्स लगे हुए हैं। इतनी पाइपिंग लगी हुई है। वो किसका है? हुulू लुलू का है। तो ये समझना बहुत जरूरी है कि क्यूरियोसिटी हमको वहां तक ले जाता है। हमसे अभी मजाक भी नहीं कर रहा हूं। कुछ दिन पहले आई एम होपिंग कि वो ट्रोल कर रहा है कि कैसे आप रिसर्च करते हो। भैया ये क्या सवाल हुआ भैया? इंटरनेट है। वही Google है मेरे पास जो आपके पास है। और आपके पास तो चैट जीपीटी मेरे से पहले आया है। हमको तो आदत मतलब रिसेंटली पढ़ना आया कि चैट जीपीटी कर लेते हैं। अब वो भी क्योंकि मेरे पास अब इतना इनफेशन है कि अब चैट जीपीटी जहां हलसनेट करते हैं हम तुरंत पढ़ लेते हैं कि सर कहां जा रहे हो? कहां जा रहे हो? तो ये समझना बहुत जरूरी है कि बिना क्यूरियोसिटी के डिस्कशन नहीं होना है। क्यूरियोसिटी है तो ही आगे का बात करेंगे और क्यूरियसिटी बच्चों में खत्म हो गई है। काम खत्म शिफ्ट डिलीट हो गया उनका ब्रेन। तो समझना बहुत जरूरी है। और चिल्ड्रन एंड स्टूडेंट को समझिए ग्रो अप तभी कर सकते हैं जब वो क्यूरियसिटी मेंटेन कर पाएंगे। अगर आप क्यूरियस है मतलब कि अगर आप ये समझते हैं साइंस को तो आपको समझ में आ जाएगा कि हम लोग आर्गुमेंट फ्रॉम अथॉरिटी से क्यों बचना चाहते हैं। लेकिन वो आपको खुद खोदना पड़ेगा। क्यूरियोसिटी खुद ही आपको ले जाएगी वहां तक। क्यूरियोसिटी नहीं है। कोई आपको नहीं सिखा सकता। तो वही समझिए बच्चे और स्टूडेंट्स के लिए बहुत जरूरी है। अगर वो खुद से क्यूरियस है खुद कर लेंगे मेहनत कर लेंगे। जैसे कि मैं एकदम ओपनली बता रहा हूं। मेरे को जीबर आज तक समझ में नहीं आया। लेकिन रिगिंग में खुद से अंदर से खुजली हुई अंदर से मेहनत किया किए और खुद से हम फ्यूज़ 360 अपने आप को सिखाए क्योंकि हमको अंदर से इंटरेस्ट था। बाकी क्यों नहीं कर पाते? क्यूरियोसिटी नहीं है। क्यूरियोसिटी होगी आपका दिमाग प्रॉब्लम सॉल्विंग के लिए बना है। जो मैं बोलता हूं ना कि काफी लोग कह अरे प्रॉब्लम ना रहेगा बांस बजेगी बांसुरी नहीं। वो आलसी लोगों का काम है। समझदार लोग सॉल्व करते हैं और उसी में मजा आता है। जीने का तो यही फायदा ही है कि प्रॉब्लम है सॉल्व करो। नहीं तो वही समझिए आपका न्यूरल कैपेसिटी खराब हो जाएगा। आप क्रंच नहीं कर पाएंगे। जो मैं ऐसा बोलता हूं ना कि कभी मुंह में जो पहला चीज आ रहा है ना धाग से निकाल मत दीजिए। उसको आए थोड़ा सा थोड़ा सा ज्यादा देर नहीं बस थोड़ा सा उसको क्या हो रहा है? क्या हो रहा है? क्या तुरंत शॉर्ट हो जाएगा। वही समझिए। इंटरनेट में समझिए कि हर चीज है तो हमसे इतना लोग पूछते हैं कि कहां से रिसर्च कर रहे हैं? कहां मिल जा रहा है डेटा? इसलिए वही इंटरनेट है सर और अब तो बहुत हाई स्पीड भी नहीं है। पहले था 300 Mbps अब उसको 150 Mbps कर दिए तो ऐसा भी नहीं कि बहुत हाई स्पीड है। मतलब मुझे पता है कि इंटरनेट में सिर्फ कॉर्न भरा हुआ है लेकिन वो 99% है। 1% अभी भी है। बहुत चीज है उसमें खोज लो। तो वही समझिए सीकिंग इनेशन फिल्टरिंग करना तब जाके आप कुछ सीख पाओगे। बचपन में मैं इंसाइक्लोपीडिया पढ़ता था। आप लोग में से भी बहुत लोग पढ़े होंगे। तो जो लोग क्यूरियस है वो सॉर्ट कर लेंगे। जो क्यूरियस नहीं है वो लटक जाएंगे। मैं इसका कोई आपका अगर आपके सामने कोई बच्चा है दो तीन बच्चे हैं और उसमें आपको दिख रहा है एक बंदा क्यूरियस है कूद रहा है सीख रहा है बात हो रहा है वो आगे बढ़ जाएगा कुछ ना कुछ कर ही लेगा लाइफ में और दूसरे जो स्मार्ट भी हो सकते हैं सब रट सकता है एग्जाम में 100 पे 100 ला सकता है जैसे-जैसे रियल लाइफ जिंदगी आएगी खत्म और इसीलिए आपको समझ में आ जाएगा जो लोग सब स्कूल टॉपर रहते हैं एक गायब कैसे हो जाते हैं कॉलेज टॉपर है ये टॉपर है वो टॉपर गायब कैसे हो गए सर मतलब बचपन में तो आप बहुत पॉपुलर थे न्यूज़ में नाम आ रहा था कि बाहर में नाम आ रहा था बाहर निकले तो कैसे गायब हो गए उसमें से कुछ ही लोग होते हैं जो एक्चुअल क्यूरियस होते हैं और वो लोग कुछ ना कुछ कर लेंगे। तो क्यूरियोसिटी सबसे कंपलसरी है। बाकी सारा चीज आपके बुद्धि का काम करेगा। जब तक क्यूरियोसिटी चला है। क्यूरियोसिटी इंजन है। क्यूरियोसिटी बंद पड़ गया काम खत्म। दी एंड आपके पास बुद्धि नहीं है। फर्क नहीं पड़ता आपके पास एक पीएचडी हो या छह पीएचडी हो।

अब बात करते हैं क्रिटिकल थिंकिंग। क्यूरियोसिटी इंजन है। इंजन के पीछे ड्राइवर कौन है? ड्राइवर है क्रिटिकल थिंकिंग। तो यहीं पे समझिए कि यहां पे सबसे बड़ा नुकसान होना शुरू हुआ। क्योंकि चैट जीपीटी बच्चों तक पहुंच गया है। बच्चे उससे पूछ ले रहे हैं। वो खुद क्यूरियस नहीं हो पा रहे हैं। उनके अंदर में खुजली नहीं हो रही है। वो खोदना नहीं सीख रहे हैं। यहीं पे दिक्कत है। क्यों? क्योंकि उससे क्रिटिकल थिंकिंग का जो मसल है वो बोल जाता है। क्रिटिकल थिंकिंग में ये सारा चीज लगता है जिसमें आपका आता है क्लेरिफाई। अरे कहना क्या चाहते हो? क्वेश्चन सवाल क्या है? इसीलिए मैं हमेशा बोलता हूं धड़ा से मुंह खोल के मत पूछ दिया कीजिए। थोड़ा सा सोचिए। फिर आइडेंटिफाई क्लियर कीजिए। उसको थोड़ा फिल्टर कीजिए। एनालिस कीजिए कि आप पूछना क्या चाह रहे हो? डिस्कशन क्या है? फिर इवैलुएट कीजिए कि हमको क्या लग रहा है इसके बारे में? मैं हमेशा बहुत सारे सिंपल जी में मैं यही बोल दूंगा अच्छा आपको क्या लगता है कि क्यों नहीं हो रहा है? थोड़ा देर सोचता है आदमी अच्छा इसलिए नहीं हो रहा है। वो आपने मसल कमजोर कर लिया है इसलिए आपको पूछना पड़ रहा है और मसल पे आप मेहनत करते रहिए। धड़ाक से दिमाग में सवाल हो गया जवाब सर हो गया। आगे बढ़ो। थिंकिंग आप कर पाओगे। फिर क्रिएट फाइनल जवाब आपका मिल जाएगा। तो ये समझना बहुत जरूरी है कि स्टूडेंट इंपॉर्टेंट इसलिए कि उसमें इसको डेवलप किया जाता है। ये है जिसे हम लोग कहते हैं क्रिटिकल थिंकिंग। यह काम अगर आप चैट जीपीटी को दे दे रहे हैं तो यह मसल जो है यह इकोसिस्टम आपके ब्रेन में है वह डेवलप नहीं हो रहा और यह समझना बहुत जरूरी है। आप कुछ सीखते हैं वो हर चीज़ में लागू होता है। आप अगर गाड़ी अच्छे से चलाते हैं वो दूसरे स्किल सेट में हेल्प करेगा। इसीलिए आप लोग देखते होंगे जो क्लास में जो एक्चुअली अच्छा बंदा है वो हर चीज में अच्छा होगा। वो स्पोर्ट्स भी अच्छा खेल लेगा, ड्राइंग भी अच्छा हो जाएगा, पढ़ाई में भी अच्छा नंबर आएगा, एक्स्ट्रा को एक्टिविटी भी कर लेगा और जो नहीं है वो किसी चीज में नहीं है। ये कैसे हो जाता है वही समझिए कि स्किल ट्रांसफर होता है। जो स्किल सेट मुझे अपने इंस्टट्यूट के टाइम में हेल्प करता था रिसर्च करने में वही हेल्प किया जब मैं एज अ गेम आर्टिस्ट के तौर पे एंप्लॉयड था 2 एंड हाफ ईयर के लिए वो हेल्प किया कि धड़ाधड़ हम सारे चीज का रेफरेंस कलेक्ट कर पाते थे। वही स्किल सेट हेल्प किया हमको ये YouTube चैनल बनाने में कि धड़ धड़ा के हम खोदखोद के डेटा निकाल पा रहे हैं। स्किल सेट हमेशा ट्रांसफर होता है। इसीलिए स्किल सेट डेवलप करना जरूरी है। तो वो कब आप कर सकते हैं? वो सारा आप डेवलप कर सकते हैं। जब आप बच्चे हैं, स्टूडेंट हैं। स्टूडेंट के क्या वहां पे क्यों डेवलप हो रहा है? क्योंकि वहां पे लोड नहीं पड़ा हुआ है। यानी कि अभी मेरे ऊपर लोड पड़ा हुआ है। ठीक है? मुझे थोड़ा सा कमाना है पैसा। कोर्ट केस लड़ना है। सही दीर्घाई करना है। इंश्योरेंस का भी शायद अगस्त में भरना पड़ेगा। बहुत सारा चीज है। अब मेरे पास वो लग्जरी नहीं है कि बस मैं बैठ के कुछ सीख रहा हूं। यानी कि जो मैं बचपन में था कि भैया इनक्लोपीडिया पढ़ रहे हैं। बेमतलब का वो अब नहीं कर सकते। अब हमको हर काम जो कर रहे हैं। अच्छा ये काम करो इससे पैसा आएगा कि नहीं आएगा? ये काम करो इससे जुगाड़ होगा कि नहीं होगा वो करना पड़ता है। कुछ लोग मेरे सिचुएशन में बहुत बेटर कर पाते हैं। कुछ लोग मेरे से बहुत बुरा कर पाते हैं। लेकिन ये अब उतना आसान नहीं है जो स्टूडेंट वाले फेस में था कि स्टूडेंट वाले में करना क्या है? पढ़ो। मां-बाप सॉर्ट कर दिए कि तुम कहां रहोगे? पीजी में रहोगे। खाने पीने का टेंशन नहीं है और जा रहे हो क्या करना है वो सब चीज सॉर्टेड है। बस सीखो। तो वो टाइम को कॉम्प्रोमाइज कर देना कि भैया के मेहनत करें उसे चैट जीपीटी कर दो। वो बहुत भारी मुश्किल है। और ये समझना बहुत जो गधे लोग हैं शुद्ध गधे लोग वो कहेंगे कि कैलकुलेटर अ के आया तो उससे मैथमेटिशियन तो नहीं खराब होगा। बात ये समझना बहुत सही है। कैलकुलेटर आपके लिए सोचता नहीं है। कैलकुलेटर में गलत नंबर डालिए। कैलकुलेटर बोल ये थोड़ी करेगा कि ए भैया आप हमको लगता है आप गलत मिस्टेक किए हो। चैट जीपीटी में आप स्पेलिंग मिस्टेक डालिए क्योंकि मैं जानता हूं वो समझ जाता है कि आप कहना क्या चाह रहे हो? कैलकुलेटर नहीं समझता है सर। गलत नंबर डाले और गलत रिजल्ट आएगा। तो ये समझना बहुत जरूरी है। एआई आपके लिए और अभी की जो एआई की बात कर रहा है फ्यूचर की नहीं जो अभी है वो आपका डेटा करेक्ट करे। बोला मेरे केस में सारा स्पेलिंग मिस्टेक सुधार देता है। फिल्टर कर देता है कि सर आप ये कहना चाह रहे हो। मैं समझ जा रहा हूं कि मतलब मैं समझ सकता हूं कि आप कहना क्या चाह रहे हो और प्लीज करता है वो आपको कि सर अच्छा आपको रीस्टर का रिजल्ट अच्छा लगेगा। तो ये समझना मुझे जैसे कि राइटिंग एस में है वो लिटरली चैट जीपीटी समझ रहा है कि अच्छा ये राइटिंग एस और आप बता रहे हो आपके प्रों्ट में है कि मेरा ये एग्जाम है। तो वो सारा चीज कर दे रहा है। यही काम आपका ये है क्रिटिकल थिंकिंग। क्रिटिकल थिंकिंग आपका मसल है। इसे मेहनत कराना होता है। बचपन से कराते रहना होता है ताकि यह डेवलप हो। ये डेवलप होगा तब आप आगे बढ़ोगे और इसको इससे पहले आपको चाहिए क्यूरियोसिटी ताकि आपका दिमाग खुले उसको अगर आपने मार डाला काम खत्म। क्यूरियोसिटी के बाद आता है क्रिटिकल थिंकिंग। क्रिटिकल थिंकिंग हर चीज में डेवलप करना होता है। छोटे-छोटे स्कूल के क्वेश्चंस हैं। मतलब स्कूल में बहुत सारा चीज सिखाया जाता है। उसका कारण ये नहीं है कि आप सारा सीख लो। उसका कारण ये है ताकि अगर क्रिटिकल थिंकिंग डेवलप हो कि चीज है तो उसके अंदर एक परत है। परत के अंदर जाओ तो डाटा मिलेगा। जैसे कि बैटरी है तो बैटरी में क्या है? एनोड और कैथोड है, इलेक्ट्रोलाइट्स है और अंदर जाना चाहे आप जा सकते हैं। लेकिन पता चल जाएगा कि हर चीज के पीछे कुछ है। मोटर है तो मोटर में क्या है? बताइए क्या है? तो समझना बहुत जरूरी है। हर चीज के पीछे कुछ होता है। हमें एजुकेशन इसलिए देता है ताकि हमारा ये डेवलप हो। वो डेवलपमेंट क्या है? क्रिटिकल थिंकिंग। तो हम लोग कल को प्लेन देखें तो अच्छा ये क्या मैजिक है ना? प्लेन है तो कुछ होगा। आपको थोड़ा सा पड़ेगा। अच्छा लिविंग होगा जिससे लिफ्ट बन रहा है। लिफ्ट बन रहा है। तो लिफ्ट बना के थ्रस्ट कहां से आ रहा है? थ्रस्ट इंजन से आ रहा है। इंजन में क्या हो रहा है? एक्शन इक्वल रिएक्शन हो रहा है। तो ये सब समझना बहुत जरूरी है कि कैलकुलेटर से मत कंपेयर कीजिए। कैलकुलेटर में गलत डालिए। कैलकुलेटर में सही गलत ही आंसर आएगा। लेकिन एआई सही करके बताता है। इसीलिए दिक्कत है कि एआई आपका ये कमजोर कर दे रहा है। और वही समझिए कि ये जो बच्चे लोग काफी सारे लोग स्मार्ट अपने आप को समझ रहे हैं बच्चे खास तौर पे कि टीचर थोड़े पीछे रह गए और बच्चे लोग अरे मतलब चैट से पूरा एकदम 100 पे 100 ला रहे हैं। जी कर रहे हैं। सर दिक्कत ये है कि अभी आप मतलब जब आप स्टूडेंट हो तो आपका सीखने का टाइम है। मतलब अभी आप बच्चों को हंसी-खुशी टाइम दे रहे हो कि भैया तुम सीखो ना। तुम तुम बिल का टेंशन मत लो। तुम इंश्योरेंस का टेंशन मत लो। हम ले रहे हैं वो सारा टेंशन। तुम सीखो। वो टाइम को आप खपा दे रहे हो अलसी आके वो बहुत भारी है और उसका दिक्कत वही समझिए माइंड को एक्सरसाइज चाहिए अगर वो एक्सरसाइज नहीं करता है मसल की तरह एट्रोफी हो जाएगा जैसे कि मैं अभी किताब पढ़ रहा हूं काफी डेवलपमेंट हुआ है मेरे दिमाग में तो मन शांत हो गया जहां जो जो जैसे कोर्ट जाते थे एकदम हेडेक हो जाता था फ्रस्ट्रेट हो जाते थे जी मचलने लगता था आई जस्ट लाइक जो होगा देखा जाएगा मेरे कंट्रोल में तो था ही नहीं लोड काहे ले रहे हैं वो डेवलपमेंट होता है वो एक किताब से नहीं होगा आई थिंक हम सातवां या आठवें किताब में है अभी तो मेहनत करते-करते वो तो सेम बच्चों के साथ भी होता है कि अगर बच्चे मेहनत करेंगे तभी ना उनका डेवलपमेंट होगा। डेवलपमेंट दिमाग का होगा तब जाके वो आगे का समस्या सॉल्व कर पाएंगे। क्रिटिकल थिंकिंग डेवलप नहीं करेंगे। बचपन में ही वो ढप्पा मार जाएंगे। वो एडल्ट लाइफ का तो सॉल्व ही नहीं कर पाएंगे।

तो अब बात करते हैं इस कैटलिस्ट का जो समस्या इतना तेजी से बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा ये समझिए कि वर्ल्ड जो है बहुत गधे चीजों को रिवॉर्ड करने लगा है। ये बहुत ज्यादा समस्या वाला बात है। यानी कि अगर इसको आप नहीं जानते बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर जानते हो तो आपका बीपी हाई हो जाएगा। तो ये समझिए कि इस तरह के लोगों को या एंड ट्रेट लोगों को कैसे पैसा मिल जा रहा है। या ईलॉन मस्क जब फूंक के ये बोल रहा है कि भैया मैं ना टनल करूंगा ना उससे लोग जाएंगे। इट्स लाइक और कोई नहीं चिल्ला रहा है महाराज तुम मेट्रो बता रहे हो वो भी फूंका हुआ छोटा मेट्रो जिसमें तुम शिप भी नहीं कर सकते हो एक बस में ज्यादा लोग जाते हैं कंपेयर टू जितना हो लॉस एंजेलस में ड्रिल करके हुलू कर दिया उसको पैसा कैसे मिल रहा है तो ये समझना बहुत जरूरी है कि कॉम्पिटेंसी आज के टाइम में रिवॉर्ड नहीं करती है मतलब कि कोई जेन्युइन बंदा है या बंदी है वो मेहनत कर रही है प्रोग्रामिंग कर रही है कुछ भी कर रही है उसको कुछ नहीं मिल रहा है अब वहीं पे कोई लड़की है ओनली फैमिली चली गई धड़ ध तो ये एक बहुत सीरियस वो बना देता है। बिटरनेस बना देता है। जहां पे लोग हाथ खड़ा कर देते हैं। जैसे कि एक आता है ना आप समझिए जिम में आप मेहनत कर रहा है। और हर कोई अब स्टेरॉइड्स लेके आ जाता है। एकदम फूला फुलला एकदम डल आ जाता है। आप डीमोटिवेट हो ही जाइएगा कि भैया मैं ही गधा हूं जो मैं ओरिजिनली करने की कोशिश कर रहा हूं। तो ये समझना बहुत जरूरी कि आज के टाइम में मतलब वर्ल्ड में हमेशा से ऐसा था कि जो स्मार्ट होता है लेकिन वो बहुत मेहनत करना पड़ता था तब होता है। कॉम्पिटेंसी पहले रिवॉर्ड होती थी। आज के टाइम में कंपटेंसी आपका बैंक अकाउंट में जाए जरूरी नहीं है और अभी के टाइम में स्वीट टॉकर ज्यादा चांसेस होता है कि रिच बन जाए। सिर्फ बटर लगा के बात करो बटर लगा के आ हा मतलब आपको ऑर्गेन मतलब लिटरली साइंस बताने की जगह ये ना ये ऐसे कर देगा ना ये उससे वैसे हो जाएगा ना उससे उससे ये हो जाएगा इट्स लाइक और लोग देख रहे हैं। लोग देख रहे हैं लोग पे कर रहे हैं। लोग सपोर्ट कर रहे हैं। इट्स लाइक सिर्फ चू चुना लगाया जा रहा है आपको। और ये सेल्फ फुलफिलिंग प्रोफेसी है। आप मतलब गधे लोगों को क्योंकि आपने क्रिटिकल थिंकिंग डेवलप नहीं किया। आप मूर्ख बन गए। उसने मूर्ख बेच दिया। मतलब मैं जैसे मैं हमेशा बोलता हूं ना कि अगर आप मूर्ख हो हाइड्रोजन खरीदने के लिए तो मैं समझदार हूं हाइड्रोजन बेचने के लिए। तो ये एक सेल्फ फुलफिलिंग प्रोफसी बन जा रहा है। गधे बन रहे हैं। गधे लोगों को और गधा बनाया जा रहा है। उससे और वो देख रहे हैं कि जो बचे पुचे मेहनत करने वाले हैं वो देख के सिर पिट रहे हैं कि भैया हम ही मूर्ख हैं जो मेहनत कर रहे हैं। वो भी गधे बनने लग जाते हैं। तो ये बहुत सीरियस बात है कि आज के टाइम में हार्ड वर्किंग और स्किल सेट से लोगों का भरोसा उठ गया। इसीलिए कॉलेज स्टूडेंट वाले सारे बंदे लोग हाथ खड़ा कर रहे हैं कि लाइक भाई फायदा क्या है? और मैं जेन्युइनली बोला कि मतलब ये कैसे चल रहा है ये सारी कंपनी कि भैया आपने 6000 लोगों को फायर कर रहे हैं। इसलिए 6000 लोग आप फायर कर कंपनी नहीं बंद हो रही है। यानी वो फेक हायरिंग था। फेक हायरिंग किए क्यों थे आप? मतलब बहुत ज्यादा जो धांधली चलने लगा कि मतलब भैया हम अपना टैक्स नहीं टाइम पे भरते हैं तो आप घर घुस के वो जेल भेजने आ जाते हो और यहां पे बैंक सब धांधली करती है तो उसको आप बेल आउट करते हो। ये ये समझना बहुत जरूरी है। ये बहुत बार होता है तो लोग बिटर हो जाते हैं, कड़वा जाते हैं तो मेहनत से हाथ खड़ा कर देते हैं। और यही समझिए कि इसमें दिक्कत ये है कि अगर आप वो टाइम और एनवायरमेंट को वेस्ट कर देते हैं यानी कि जो आपका अर्ली इयर्स है खासतौर पे 20 टू 30 20 30 थोड़ा लेट बता रहे हैं। आप समझिए 15 टू 25 यहीं पे चमकना है आपको और चमकना है एज इन लाइक कि मतलब सीखना है। यहां पे अगर आप सीखना शुरू कर ले तो आगे वाला आप चलते जाओगे। उसमें आप धड़ धड़ धड़ करके चलते चले जाओगे। अब वो नहीं कर पाते तो आपको दोबारा मौका नहीं मिलेगा। और ये समझिए एट्रोफीड माइंड अगर आपका हो जाता है यानी बुद्धि मंदबुद्धि बन जाता है तो आप सिर्फ सफर करोगे। आप सिर्फ कड़वे रहोगे। सिर्फ दुखी रहोगे कि भैया वो लोग क्यों बस क्यों है? जैसे सही बोला मसल है। मेहनत कीजिएगा तो रहेगा। मेहनत नहीं कीजिएगा कबाड़ हो जाएगा। जैसे कि मैं रोज शाम को टहलने जाता हूं। कुछ नहीं हो से ना मेरा डोलनेश आ रहा है ना मेरा एब्स आ रहा है लेकिन वो मुझे बिगड़ने से रोक रहा है तो मैं करता हूं क्योंकि मुझे पता है कि इट्स लाइक ये जो मैं थोड़ा सा भी एफर्ट डाल रहा हूं ये मुझे एट्रफी से बचा रहा है मन को शांत कर रहा है इट्स अ बेटर इन्वेस्टमेंट तो सेम वही वाली बात होती है कहने को आप दिन भर कॉर्न खा सकते हो बट थोड़ा मेहनत करना फायदेमंद होता है और ये मैं समझ सकता हूं कि लोगों का जो वो हो रहा है ना बिटरनेस कि अरे मैं चीटिंग करके पास हो जाऊंगा तो उस वैसे ही हो जाएगा इट्स लाइक सर आप ही नहीं सीखोगे दिक्कत ये है दुनिया को हटाओ दुनिया को आप हटा दो आप नहीं सीखोगे वो दिक्क दिक्कत है। मुझे बहुत शर्म लगता है कि जब यहां पे इंडिया में मेरे वो एसी डीसी वाले में लोग हमसे लड़ने लग जाते हैं कि भैया डीसी दूर नहीं जाता। इसलिए इंडिया वर्ल्ड लीडर है एचवीडीसी इंटरकनेक्ट्स में और हम ही पे सब लड़ रहे हैं। तो ये समझना बहुत जरूरी है कि मूर्ख होने पे आप ही मूर्ख हो। आप ही की सफरिंग होगी। आप ही ज्यादा तड़पोगे। तो ये बहुत आउट ऑफ हैंड जा रहा है कि मतलब बच्चे लोग एआई में छुपा रहे हैं। और ये उनको कोई समझा नहीं पा रहा है कि सर तुम्हें अभी ये सीखना है। जब सीख जाओगे। जैसे मैं बोल रहा हूं मैं चैनल साथ-साथ से चला रहा हूं। चैट जीपीटी मेरे लिए नया है। मैं उससे पहले से ही चैनल बना रहा हूं। तो अब अगर चैट जीपीटी करता है हम पकड़ लेते हैं। बच्चे कैसे पकड़ेंगे? क्योंकि वो तो चैट जीपीटी से ही गाड़ी खोले। वो क्यूरियस है ही नहीं। वो क्यूरियस नहीं है तो क्रिटिकल थिंकिंग डेवलप नहीं किया। क्रिटिकल थिंकिंग नहीं डेवलप की तो आगे का तो बात ही नहीं होता है। तो ये समझना बहुत जरूरी है। एट्रोफी मत करने दीजिए अपने माइंड को। मेहनत कीजिए। खुदाई कीजिए। तभी आप सुकून से रह पाएंगे। तभी आप थक के बिस्तर में सो जाएंगे और सो पाएंगे आराम से। नहीं तो बहुत बोलिएगा। इनसोमिया हो गया या डूमर हो गए। इस लाइक मेहनत नहीं कर रहे हो तो क्या होगा? तो ये समझना बहुत जरूरी है। यह कैटलिस्ट आउट ऑफ हैंड जा रहा है। मैं समझ सकता हूं कि लोग क्यों अगर इस तरह का बंदा लोग को जो मतलब सिर्फ पिप कर रहा है एंड इट्स लाइक उसको इतना ज्यादा पैसा मिल रहा है। इट्स लाइक दर्द होता है कि भैया अरे मैं इंजीनियर्स को जानता हूं। मैं टीचर्स को जानता हूं। लोग मेहनत कर रहे हैं। उनको पैसा ना इसको देंगे। इट्स लाइक तो ये था मेरा प्रेजेंटेशन कि जो एआई से हम लोग मूर्ख क्यों होते जा रहे हैं? हम लोग क्यों एट्रोफी कर रहे हैं? उम्मीद करता हूं आपको अच्छा लगा हो। कुछ सीखने मिला कुछ समझ में आया हो। अगर ऐसा है लाइक करते तो शेयर कर दे उससे मेरा काफी भला होगा। नहीं अच्छा लगा नहीं पसंद आया कोई बात नहीं आप डिसलाइक दबा सकते हैं। मैं कमेंट डिसलाइक दो बार दबाए। उससे मुझे पता चलो कितना पसंद हुआ है। मैं आपसे कहूंगा कमेंट लेके मैं हर कमेंट को पढ़ने की कोशिश करता हूं। आपसे कमेंट सब्सक्राइब कीजिए। बेल दबाइए अगर आप फ्री है तो आपने वीडियो देखा जाइन कीजिए। बहुत खुशी हुई। धन्यवाद।