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[संगीत]
बचपन से ही हम चाय पकोड़ा से लेकर दही पराठा तक कई फूड कॉमिनेशन खाते आए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत फूड कॉमिनेशन हमारी हेल्थ को खराब कर सकते हैं? नमस्कार, मैं नमृता। बहुत-बहुत स्वागत करती हूं आप सभी का हमारे कार्यक्रम 'बैक टू नेचर' में।
दर्शकों, आज इस कार्यक्रम में हम चर्चा करने वाले हैं फूड कॉमिनेशन पर। हेल्दी रहने के लिए पौष्टिक आहार और संतुलित डाइट लेना बहुत जरूरी होता है। इसलिए हम अपनी डाइट में दूध, दही, सब्जियां, फल इत्यादि शामिल करते हैं। लेकिन यह डाइट हमें तभी पोषण देती है जब हम इसे सही तरीके से लेते हैं। तो फूड कॉमिनेशन के बारे में आज इस पर हम जानकारी प्राप्त करेंगे। हमारे साथ कार्यक्रम में मौजूद हेल्थ एक्सपर्ट, नेचरोपैथ डॉक्टर एन के शर्मा जी से। तो चलिए मिलकर सर का स्वागत करते हैं।
सर, बहुत-बहुत स्वागत है आपका कार्यक्रम में।
नमस्कार।
जी सर, जैसे कि हमने आज का विषय लिया है फूड कॉमिनेशन, तो सर सबसे पहले तो यही जानना चाहेंगे कि क्या फूड को कंबाइन करके खाना चाहिए हमें?
देखिए, सबसे पहले तो सवाल यह पैदा होता है कि फूड कॉमिनेशन पैदा ही क्यों होना पड़ा? आज जितने भी लिविंग जो कि इस धरती पर जितने प्राणी जी रहे हैं, उनका अपना एक फूड है। सब अपना-अपना फूड खा रहे हैं। इनडाइजेशन, गैस, एसिडिटी, अल्सर, गैस्ट्राइटिस, ऐसे पेट के जितने प्रॉब्लम्स हैं, यह प्रॉब्लम किसी को भी संसार में नहीं है सिवाय आदमी के। है कि नहीं? तो सवाल पैदा क्या होता है कि कॉमिनेशन की जरूरत क्यों पड़ती है? एक्चुअल में देखा जाए तो कॉमिनेशन की हमें जरूरत पड़ती नहीं है। पर समय के साथ-साथ में आदमी ने इतनी तरह-तरह की वैरायटी उसने मतलब अडॉप्ट कर ली और एक साथ सब जगह इकट्ठी होकर अवेलेबल भी होने लग गई और फिर हम उसको एक साथ खाने भी लग गए। क्योंकि पहले के जमाने में क्या था कि सर्वाइवल वास द मोस्ट इंपॉर्टेंट फैक्टर। पहले हेल्थ सेकेंडरी था हमारे लिए कि भाई हमारे परिवार जिंदा रहे, हम स्वस्थ रहे मतलब हम जिंदे रहे किसी तरह। तो जैसे शुरुआत में जैसे मानव शिकारी था, नॉनवेज भी खाता था तो सिर्फ नॉनवेज खाता था। क्योंकि मारा खा लिया मान लो या नहीं तो कोई एक चीज अवेलेबल हो गई कि रूट्स अवेलेबल हो गए बहुत सारे जमीन से निकाले तो रूट्स ही खा लिए। ऐसे तो कहीं पर कोई ग्रेन अवेलेबल हो गया तो ग्रेन खा लिया। तो एक जगह सब जगह अवेलेबिलिटी नहीं थी तो पेट के रोग जो है ना वो बिल्कुल जीरो थे। क्योंकि पहले बात तो क्या थी कि आदमी भूख से ही खाता था। क्योंकि जब तक भूख लगती नहीं थी वो खाना ढूंढता भी नहीं था। आज जितने भी प्राणी हैं, भूख लगने पर खाना ढूंढते हैं। वो ऐसा नहीं वेट करते कि नहीं जी पहले लाके धो तो मैं बाद में खाना ढूंढने निकलूंगा। ऐसा होता है ना इस तरह से। तो सिंपल यानी कि मोनो डाइट खाना आदमी का नियम था। एक्चुअल में तो बॉडी क्या करती थी उस समय एक ही आहार जब पेट में जाता था तो वो अच्छी तरह से उसके ऊपर पूरे जूस निकालकर उसको डाइजेस्ट कर सकता था। मान यानी कि वो स्टार्च है तो स्टार्च के अलग जूस निकलते हैं, प्रोटीन है तो प्रोटीन के अलग जूस निकलते हैं। तो उस कंडीशन में डाइजेशन में कभी कोई इशू आया ही नहीं किसी के पेट में कभी भी मतलब कोई भी प्राणी को कभी नहीं आता था। ये शुरुआत कहां से हुई जब बहुत सारे कॉमिनेशन आदमी ने मिक्सिंग करने शुरू किए, मिक्स करना शुरू किया तो उसके बाद में फिर इस तरह की समस्याएं पैदा होनी शुरू हुई। तो अब जनरली दूध है, नट्स है, ग्रेंस है, रोटी दाल है, यह मेजर फूड तो यही है और बाकी साइड में जो है वह फ्रूट्स है और सैलेड्स है, वेजिटेबल्स है, यह सब चीजें हैं और इवन जूसेयो लेते हैं। तो अब इसमें क्या कंबाइन करना चाहिए कि जिससे कि आपको कभी इनडाइजेशन जैसा वर्ड नहीं होना चाहिए।
देखिए, हर व्यक्ति को ये समझना जरूरी है कि भगवान ने हमारा जो डाइजेशन बनाया है, वो परफेक्ट डाइजेशन करने डिजाइंड है। यानी कि इनडाइजेशन कर देना, यह शरीर का कोई नियम नहीं है। आपको जबरदस्ती गलत खाकर, कॉमिनेशन खाकर, गलत दरी को देना पड़ेगा तब जाके बॉडी मजबूरी में उनको अमेट करेगी। ठीक है? तो हमारा शरीर का जो धर्म है, वह है खाना अच्छी तरह पचाना। जैसे कोई यूं कहे कि भाई साहब मैंने जापान से, जर्मनी से मैंने करोड़ों की मशीन मंगवाई है, मैं उसमें साड़ी बनाने के लिए धागा डालता हूं। लेकिन भाई साहब गुच्छा बन के जाता। जी मेरा तो आप हंसोगे। आप कहोगे यार इतनी कॉस्टली, इतनी भारी मशीन आपने मंगवाई है और आपका खाना पेट में जाकर सड़ जाए, एसिडिटी बन जाए, गैस बन जाए, यह वास्तव में बहुत बड़ी शर्मनाक बात है। क्योंकि सवाल क्या पैदा होता है कि आप खाना क्यों खा रहे थे? कि मेरी बॉडी को मिले। पर वो मिलने के बजाय वही उसके जूसेश होकर वहीं पर अगर वो सड़ गया तो फिर आपका खाना क्या काम का हुआ? ठीक है ना? तो इसीलिए बॉडी को एक बार में एक प्रकार का स्टार्च या प्रोटीन देना चाहिए, जिससे कि बॉडी में कोई प्रॉब्लम ना हो।
तो अब यहां पर सवाल क्या होता है? क्या प्रोटींस होते हैं और क्या स्टार्चस होते हैं? तो स्टार्च और प्रोटीन का कॉमिनेशन कभी अच्छा नहीं होता। क्योंकि स्टार्च का डाइजेशन एक अल्कलाइन माध्यम में होता है और प्रोटीन का डाइजेशन एसिड माध्यम में होता है। ठीक है ना? अब प्रोटीन क्या-क्या होते हैं? सारे दूध, दही, पनीर है, सारे नट्स, सीड्स वगैरह है। तो यह सब जितने भी जो प्रोटींस हैं, वो सारे के सारे मतलब उसको सलाड और वेजिटेबल्स के साथ खाना चाहिए। अब कोई आदमी प्रोटीन खाता है, जैसे कोई भी ज दूध, दही, पनीर खाता है और तो इनको कभी भी स्टार्च स्टार्चस के साथ नहीं खाना चाहिए। जैसे जनरली लोग कॉर्नफ्लेक्स और दूध पीते हैं, ब्रेड और दूध, चीज और ब्रेड, इस तरह की कॉमिनेशन लेते ही है ना जनरली? या लस्सी पराठा खाया और लस्सी पी ली ऊपर से। तो यह सब पेट में सड़ते हैं। यानी कि दूध जो है, आपने कभी एक सिंपल सी बात नोट की होगी कि दूध भगवान ने दांत नहीं आने तक उसकी व्यवस्था की है। कि मां के दूध में भी स्तन में तब तक दूध आता है, जब तक आपके दांत नहीं आते। और इसीलिए मिल्क शुड बी ऑलवेज टेकन अलोन। दूध हमेशा अकेले ही लेना चाहिए। ठीक है? तो पर जनरली हम लोग क्या करते हैं कि दूध को किसी-किसी में मिक्स कर ही देते हैं। अब देखिए, ओके कभी कभार कोई आपने खा लिया, बॉडी टॉलरेट कर लेती है, आपको पता भी नहीं चलने देगी। लेकिन अगर आपकी रेगुलर हैबिट है कि मैं दूध और रोटी या दूध, लस्सी और पराठा या मैं ऐसे खा रहा हूं या कॉर्नफ्लेक्स मिल्क ले रहा हूं, तो फिर आपके पेट में सड़न जो है, वो काम करेगी और वो दोनों साथ में चढ़ते हैं। मतलब दूध और अनंद दालें हमेशा पेट में चढ़ते हैं। और दूध के साथ दाल ज्यादा सड़ती है। अगर आप दूध के साथ बेसन खा रहे हो, छोले खा रहे हो, राजमा खा रहे हो, ऐसा होता है ना दालें हम जो खाते हैं, तो वो तो और ज्यादा सड़ती है पेट में। तो इसीलिए कोशिश ये करें कि अगर आपको दूध पीना ही है, तो आप खाली पेट अलग से पी लें। लेकिन खाने के साथ कभी भी उसको मिक्स ना करें। यानी कि आपने खाना खा लिया, तो अब चार-पांच घंटे तक आप दूध नहीं पी सकते, यूं समझ ले। तो इस तरह से दूध को अकेले लेना चाहिए।
अब लस्सी और पनीर अगर जैसे कई लोग खाने के साथ देते हैं, दही वगर भी लेते हैं, तो ओकेज तो कभी पनीर की सब्जी खा ली आपने शौक के मारे या आपने थोड़ा दही खा लिया, इट्स ओके। बॉडी विल टॉलरेट। लेकिन आप कभी भी नोट कर लेना कि जब आप रोटी के साथ दही खा लेते हो ना, तो उसकी प्रॉब्लम कहां आती है कि दही जो है ना, पेट में जाकर लेयर बना देता है और वो हमारे स्टार्च का पाचन नहीं होने देता। फिर इस तरह से। तो इसीलिए दही भी जो है, खाने में लस्सी को भी अवॉइड करना चाहिए। क्लियर? इस तरह से। तो तो प्रोटीन जो है, वो सब के सब कोशिश करें कि वो खाने के साथ ना खाएं।
अब दाल चूकी रोटी के साथ क्यों खाते हैं? क्योंकि दाल जो है ना, वह 100% हाई केवल प्रोटीन ही नहीं है, बल्कि वह स्टार्च भी ज्यादा है। वो दोनों कंबाइन कॉमिनेशन में इसलिए पेट में गैस बनती है। आपको पता है दाल जो भी खाता है, उसके पेट में गैस बनती है। क्यों? स्टार्च प्रोटीन का एक अलग सा कॉमिनेशन है। हालांकि वो चरने वाले जानवरों के लिए दाल बनाई गई है, लेकिन हमने अडॉप्ट कर लिया, अलग बात है। तो तो दाल कभी अ अगर आपको खाना पड़े, तो उसको भिगोकर फुलाकर अ उसको खाना पड़ेगा। और अगर आपका बैठा हुआ जीवन है, तो फिर उसको वो भी अवॉइड करना पड़ेगा। क्यों? उसको रोटी के साथ दाल खाने में थोड़ी बॉडी को टाइम लगती है, येय समझ ले। तो बेटर क्या है कि प्रोटीन जो भी आप खाते हैं, मतलब आप कहते हैं साहब मैं पनीर खाना चाहता हूं, तो भैया सलाड, सब्जी के साथ खा लो। मैं लस्सी पीना चाहता हूं, दही खाना चाहता हूं, सलाड, सब्जी के साथ खा लो। हालांकि मैं दूध को इतना प्रमोट नहीं करता कभी। और कोई कहता है साहब खाने के साथ में मुझे नट्स खाने हैं, नट्स और सीड्स खाना है, प्रोटीन है, तो उसको आप सलाड के सब्जी के साथ खा लो, यूं समझ लो। तो तो फिर आपके पेट में कभी गड़बड़ नहीं होगी। पर अगर आप रोटी भी खा रहे हो, साथ में दाल भी खा रहे हो, आप पनीर भी खा रहे हो, आप देही भी खा रहे हो, आप आलू भी खा रहे हो, आप आप नट्स भी खा रहे हो, तो फिर पेट में जबरदस्त भयंकर सड़न होगी।
देखिए, हर आदमी ने ये बात महसूस की होगी कि वो शादी में जाता है और वहां जिस तरह का कॉमिनेशन खाके आता है, उस दिन आपके पेट की हालत और एक आप रोज नॉर्मल घर का खाना सिंपल रोटी सब्जी खाते हो, उस दिन पेट की हालत में दोनों में डिफरेंस तो महसूस होता है ना? क्लियर? और जिस दिन आप सिंपल दलिया खाते हो, उस दिन पेट आपका हल्का होता है। जी, क्यों? क्योंकि वो मोनो डाइट है, इस तरह से। तो प्रोटीन को जो है, वो सलाड के साथ खाने की आदत डाले और रोटी दाल खाना है, तो हमेशा सलाड के साथ खाने की आदत डाले। ठीक है?
अच्छा, अब खाने के साथ एक और कॉमिनेशन बहुत इंपॉर्टेंट है, वो है कि कभी भी खाने के साथ फ्रूट और जूसेश हैद भी क्यों मालूम है? ये शर्करा, ये शुगर हैं, ये सिंपल शुगर है जो बॉडी में जाती जल्दी पच जाना चाहिए। तो हम क्या करते हैं? हम लोग रोटी दाल खाकर, खाना खाकर उसके बाद फ्रूट्स खाते हैं। तो फ्रूट जो है ना, वह समझो हवाई जहाज है। वह पेट में जाते आगे निकल के जल्दी पच जाना चाहिए। उसको तो आधा घंटे में पच जाना होता है। तो आपने अगर आगे बेलगाड़ी भेज दी, बाद में वजज भेज रहे हो, होप से, ये समझ लो आप। तो उसके कारण क्या होता है? फल पेट में पड़कर सड़ जाता है। इसीलिए खाने के साथ जो लोग जूस पीते हैं, जैसे अमेरिकन ब्रेकफास्ट में आपने देखा ऑरेंज जूस एक कॉमन, वहां पे फाइव स्टार में भी लिखा रहता है। से वो बड़ा खतरनाक है, बता रहा हूं। बहुत खतरनाक है। जो खाने के साथ जूसेश इनडाइजेशन के शिकार होंगे ही। इसका नियम है। तो इसीलिए खाने के साथ कभी भी फ्रूट और जूसस ज्यादा ना लें। और अगर चीनी, गुर, शहद लेते हैं, तो उसकी मात्रा कम से कम रखें। क्योंकि ये हर एक के साथ सरते हैं। चीनी जो है ना, हर एक के साथ सड़ती है। इसलिए मिठाइयां सब सड़ती हैं ओरिजनली पेट में। लेकिन अब क्योंकि इतने हम दूर आ गए, सब मिठाई खाने के शौकीन हो गए हैं, तो ठीक है ओके शली एंजॉय कर लो, बॉडी टॉलरेट कर लेगी। पर बीमारी भी तो अवॉइड करना पड़ेगा उसको। तो ऐसे करके फल खाना है, तो अलग से खाली पेट खाओ। एज ए मील जूस पीना है, खाली पेट पियो। खाने के साथ कभी उसको कंबाइन मत करो। ठीक है ना? इस तरह से।
और तीसरा हमारा सबसे बड़ा प्रॉब्लम क्रिएटर कौन है? खटाई। जैसे नींबू, इमली, अमचूर, टमाटर। ये जितने भी हम खटाई है ना, ये हम जनरली हम अपने खानों में डालते हैं। तो जो सिट्रिक एसिड बोलते हैं इसको, सिट्रिक एसिड। ये स्टार्च का डाइजेशन कभी होने नहीं देती। अभी आपको एग्जांपल दे रहा हूं। आप एक रोटी खा रहे हो। अब मीठी लगेगी। मुंह में चबाओगे, थोड़ी मीठी लगेगी। अब जरा सा नींबू का अचार लेके खा लो, आपको वो बिल्कुल भी मीठी नहीं लगेगी। आपको यानी कि टाइलिन जूस निकलता ही नहीं खटास के प्रेजेंस में। तो होता क्या है कि जब आप ख खटाई डाल के कोई अनाज खाते हो ना, कोई भी स्टार्च, तो आपके आपके जो अल्कलाइन जूसेश जो है ना, पेट में सड़ने लगता है। तो इसीलिए जो लोग ज्यादा आलू के ऊपर नींबू निचोड़ देते हैं, शकरकंद पर निचोड़ देते हैं नींबू, और या दाल में नींबू डाल देते हैं, या रोटी के साथ बहुत सारी खटाई सॉस खा लेते हैं, जैसे केचप खाते हैं लोग आजकल और बहुत। तो तो ये सब चीजें जो है ना, आपके स्टार्च के डाइजेशन को हैपर करती है, यानी कि रोकती है उसको। तो इसीलिए अ अगर आपका पेट खराब है, तब तो आपको 100% खटाई टोटली खाने में से निकालना पड़ेगा। अगर आप नॉर्मल है, आप कभी-कभार ओकेज खटाई खा रहे हैं। अब जैसे ना हमारे खाने में अमचूर आ गई है, कई सब्जियों में डाली जाती है, तो उसको ऑकेजनली कभी-कभार अगर आप डाल दो, तो बॉडी टॉलरेट कर लेगी, क्योंकि वह इतना मतलब गड़बड़ तो करेगी, पर बोलेगी नहीं अभी तो। जब वो सेंसिटिव हो जाती है, जब बीमार पड़ के तब फिर वो बोलती है कि देखो जी क्या गड़बड़ है। इसीलिए तो कोशिश करें कि खाने में खटाई ना हो।
सर, यदि व्यक्ति रॉन्ग फूड कॉमिनेशन ले रहा है और उस टाइम अगर उसे नहीं पता लग रहा है, उसकी बॉडी में कुछ सिमटम्स नहीं आ रहे हैं, बट लेटर ऑन उसको बीमारियां होने की संभावना है, तो कैसे व्यक्ति को शुरू में कैसे पता चलेगा? विदाउट सिमटम्स वो कैसे डिटेक्ट करे कि उसका जो खानपान है, वो गलत है?
देखिए क्या होता है, आप जब जवान होते हैं ना, तब तक तो आपकी बॉडी में ना बहुत बड़ी डाइजेस्टिबिलिटी स्ट्रांग होती है ना, तो बॉडी पत्थर भी अम कर जाते, बोलते ना। इसलिए यंग लोग जो है ना, 20-22 साल तक जो भी खाते-पीते रहते हैं, उनकी बॉडी बोलती नहीं, उनको पता भी नहीं चलता। इसलिए वो हर दो-चार घंटे में खाते भी रहते हैं और इस तरह से। तो यह बाद में जब उनकी सेडेंटरी लाइफ स्टाइल आने लगती है, तब उनको पता चलता है। वास्तव में जब उनका मेटाबॉलिज लो आने लगता है। ठीक है? अब यहां पर पता कैसे चलेगा कि मेरा खाना गड़बड़ हो रहा है? आपको अपने स्टूल को रेगुलरली वॉच करना पड़ेगा। अगर आपका खाना भूख से गया और खाना आपका सिंपल कॉमिनेशन था, तो आपका स्टूल फॉर्मेशन में होगा, बंधा हुआ होगा, कभी पॉट पे चिपकेगा नहीं, बदबू नहीं होगी। अगर आपको लगता है कि नहीं सेमी सोलिड है, बार-बार जाना पड़ता है, कॉन्स्टिपेशन होती है और पेट में जलन होती है, ऐसे कुछ भी, तो ये स्टिकी होता है मोशन, तो याय ज्यादा पानी की जरूरत पड़ जाती है। ये ये मतलब पहचानने की बहुत बड़ी तकनीक बता रहा हूं। तो समझ लेना कि आप धागा तो डाल रहे हो मशीन में, पर क नहीं बन रहा है, गुच्छा बन के निकल रहा है। इसीलिए वहां आपको चौंकना पड़ेगा। क्योंकि आप अगर खाना खा रहे हो, तो आपका मोशन प्रॉपर आना चाहिए ना भाई? वो उसमें क्यों इतना सडन, क्यों इतना स्टिक या बदबू होनी चाहिए? तो वो अपने आप में इंडिकेशन दे रहा होता है। तो जो जा रहा है और क्या आ रहा है, अगर आप इस पर अच्छी तरह से ध्यान दे रहे हैं, तो फिर आपको पता चल जाएगा कि गड़बड़ क्या हो रही है, ये समझ ले।
सर, ये रॉन्ग फूड कॉमिनेशन कैसे हमारी फिजिकल हेल्थ को खराब करते हैं? तो आपने बताया, बट क्या ये हमारी मेंटल हेल्थ पर भी भाव डालते हैं?
याद रखना, आंत खराब तो मात खराब। गर्स इज ए सेकंड ब्रेन। जिनका पेट खराब होता है ना, आप कभी भी नोट कर लेना, उनका माइंड हमेशा चंचल रहेगा, इनसिस होगा, यानी कि निर्णय लेने में प्रॉब्लम करेगा, बेचैन रहेगा, कंसंट्रेशन करने में बहुत दिक्कत आएगी। मतलब ये बहुत बड़ा प्रभाव जो है ना, उसके मानसिक स्थिति पे पड़ता है, बता रहा हूं।
जी, तो सर इसके लिए हम किस चीज से हेल्प ले सकते हैं? क्या कर सकते हैं?
गरीब की तरह खाओ, अमीर की तरह जियो। सिंपल खाना खाओ, सिंपल वैरायटी खाओ और कोशिश करो कि एक प्रकार का एक ही डाइट लू। मतलब देखिए, हम लोग कैसे खाना खाते हैं, मालूम है आपको? आपको जान कर के हैरानी होगी। हम लोग ने सलाड, सब्जी, स्टीम सब्जी, जो भी है, उसके साथ में एक भुट्टा खा लिया, ना खाना हो गया। अब हम ना रोटी सब्जी नहीं खाएंगे। सलाड, सब्जी और भुने हुए आलू खाना हो गया। सलाड, सब्जी और शकरकंद खाना हो गया। क्यों? स्टार्च है ना, एक प्रकार का स्टार्च है। सलाड, सब्जी और स्प्राउट्स खाना हो गया। सलाड, सब्जी और नट्स खाना हो गया। सलाड, सब्जी और इडली खाना हो गया। सलाड, सब्जी और दोसा खाना हो गया। अब लोग क्या समझते हैं कि ये तो सब स्नैक्स हैं। मतलब ये सब दोसा खाना, इडली खाना, पकौड़ा खाना, बाद में खाना खाएंगे हम। अगर पकौड़ा खाएंगे ना, जिस दिन, उस दिन सलाड, सब्जी और पकड़ा ही खाएंगे। फिर मजे से। सैलेड हमें हर चीज में रखनी है। वो इसलिए कि सैलेड की आदत नेचुरल फूड तो होनी ही चाहिए ना खाने में। फाइबर तो चाहिए ना फिर? क्योंकि मैक्सिमम खाने में तो हमारे फाइबर है ही नहीं। तो इसीलिए कभी भी बात ध्यान रखना, ईट एनीथिंग व्हाट एवर यू वांट। पूरे वर्ल्ड में है ना, सलाड खाने की बहुत अच्छी आदत होती है। भारत में य आदत बड़ी कमजोर है। तो इसीलिए हमेशा याद रखो, कुछ ए ईट एनीथिंग, सलाड खाओ, सब्जी खाओ और जो आपका एक कोई सिंपल स्टार्च या प्रोटीन है, आप खा लो, खत्म। एंजॉय दैट।
सर, सलाड खाने का तरीका जो आपने बताया कि पहले खाना है, खाने से हां, ताकि वो फाइबर पहले चला जाए। तो फिर जो आपने कुछ गलत भी खा लिया, मान लो ना, कोई गलत खाना भी खा लिया। आपने कहा मैंने आज छोले बटोरे खा ली जी। सलाड तो सलाड खा के खा ले भाई। मान लो कचौड़ी खाना, सलाड खाके खा ले। तो कम से कम फाइबर जो होता है ना, वो धीरे-धीरे शुगर बॉडी में बढ़ने देता है। नहीं तो फिर बहुत जल्दी बढ़ जाती है। य
सर, आपने अभी बताया कि रॉन्ग फूड कॉमिनेशन क्या है, क्या-क्या चीजें हमें साथ में नहीं खानी चाहिए और कैसे इनडाइजेशन की समस्या होती है। और सर, जैसे आपने बताया कि खाना सर जाता है, तो बुरी तरह से हमारी आंच को प्रभावित कर रहा है वो। तो सर, इनडाइजेशन की समस्या होती है, गैस होती है, क्या इसके अलावा कोई गंभीर रोग भी होने की संभावना है?
बहुत गंभीर रोग होते हैं। देखो क्या होता है कि जनरली जब आप आपका खाना अच्छी तरह डाइजेस्ट नहीं हुआ, क्योंकि आपने वैरायटी बॉडी को दे दी और हर एक का जूसस अलग-अलग था, तो सड़क जब खाना जब पेट से निकलता है ना, तो अगर पेट में सड़ा, तो अल्सर, गैस्ट्रिक अल्सर, पेप्टिक अल्सर और यानी कि पेट वाला अल्सर और एक नम अल्सर होता है। ये दो अल्सर उसम हो सकते हैं। गैस्ट्राइटिस, पेट की सूजन होती है, वो हो सकती है उसमें। ठीक है? फिर वहां से नीचे निकलकर जब आता है, तो हमारे छोटी आंतों में भी सड़न होने से फिर टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं। उसके बाद में जब नीचे आता है, मान लो सड़क और दोबारा, तो वहां पर आईबीएस, अल्सरेटिव। देखिए, खाना पेट में गया और पचा नहीं और सड़ ज्यादा गया, तो फिर आपको उसका जो जो टॉक्सिक इरिटेशन है, वो तो कभी ना कभी आपको कुछ महीनों के बाद या सालों के बाद जबरदस्त बीमारी में डालेगा ही ना वो। तो वो बिल्कुल नेचुरल सी बात है। ठीक है ना? तो इस तरह से तो जितने पेट में गैसेस बनती है, इनडाइजेशन होता है, एसिडिटी, जो लोग बोलते हैं ना, मैंने खाना खाया तो मुझे एसिडिटी फील हो गरही है, तो क्या है? एसिडिटी क्या है? कि आपका खाना वहां सड़क फर्मेंट हो रहा है, वास्तव में। ठीक है ना? इस तरह से। तो इसीलिए इस तरह की बड़ी-बड़ी बीमारियां हम हमें हम इससे कमा लेते हैं।
जी, सर आपने बताया कि क्या-क्या फूड जो है वो गलत है कॉमिनेशन में लेना। उसके बाद आपने बीमारियां भी बताई। तो सर, क्या फूड कॉमिनेशन सही है जो हम ले सकते हैं? जैसे मान लीजिए कि हमें वेट लॉस के लिए अगर कोई फूड कॉमिनेशन लेना है, तो हम क्या फूड कॉमिनेशन ले सकते हैं?
देखिए क्या होता है, वेट लॉस जो वर्ड है ना, ये बड़ा गलत शब्द है। वास्तव में आपका वजन बढ़ाने के जो कारण आपने जोड़ लिए, वो हटा दो ना। अपने आप वेट नॉर्मल रहेगा। आज किसी प्राणी को अपना वजन घटाना, बढ़ाने का श को शौक नहीं है। अपने आप नॉर्मल रहता है। आप अपना भूख से खाना खाओ, होल समम खाना खाओ, फ्रस खाना खाओ, अपने आप वेट मेंटेन रहेगा। समझे ना आप? लेकिन कॉमिनेशन से वेट का प्रॉब्लम उतना नहीं होता, क्योंकि मेनली जो कॉमिनेशन का प्रॉब्लम है, वो सडन से ज्यादा है और उससे बड़ी-बड़ी बीमारियां। बाद में क्या होता है, जब एसिडिटी बनती है ना, तो आप क्या करते हो? आप एंटा सीड्स खाओगे, इनो, सोडा पी लोगे, है ना? तो आपको टेंपररी वो रिलीफ मालूम पड़ता है। पर बाद में वही कंटीन्यूअस इरिटेशन जो पेट में चलता रहता है, क् आपको पता नहीं है, आप इग्नोर एट हो, क् क्या सही है, गबल है, तो उस कारण क्या होता है कि बाद में जाकर वो बड़ी बीमारी में टर्न कर जाता है। जब आप सिंटोमेट्रिन स्टेरॉइड्स खा लिए, वो खा लिए, आपने किसी तरह रोक लिया सूजन को रोक लिया, एंटी इंफ्लेमेटरी मेडिसिन खा ली या अल्सर के लिए आपने कोई चीज खा ली, तो अल्टीमेटली आप कारण अगर ठीक नहीं करोगे ना, तो ये बीमारियां कभी ठीक होती भी नहीं है, वैसे भी इस तरह से। तो मैं कॉमिनेशन जैसे ही आप ठीक करोगे ना, आप अनुभव करोगे कि पेट नामक कोई चीज आपके पास है। आपको कभी पता नहीं चलेगा।
जी, सर जैसे आपने बोला कि बहुत सारी बीमारियां हो जाती हैं। अगर कारण ठीक कर लेंगे, तभी ठीक होगा। पहली बात तो ये कि अगर हमें इतनी जानकारी हो गई है कि हमें ये चीजें साथ नहीं खानी हैं, तो बीमारियां होंगी ही नहीं। लेकिन अगर अब व्यक्ति को हो चुकी है ये सारी बीमारियों से वो ग्रसित है, तो अब सर, क्या राइट फूड कॉमिनेशन क्या रहेगा उसके लिए?
देखिए, अब बीमार है, तब तो ज्यादा सीरियसली इसको फॉलो करना पड़ता है। तो आपको मोनो डाइट, यानी कि कोशिश करें कि सिंगुलर डाइट ले। यानी कि जैसे सलाड, सब्जी, रोटी खाना हो गया है ना? आप सिंपल एक दलिया खा रहे हैं, वेजिटेबल दलिया, नॉर्मल दलिया। आप सिंपल खिचड़ी खा रहे हैं। आप सिंपल चावल दाल खा रहे हैं। आप सिंपल पोहा खा रहे हैं। ऐसे, यानी कि सिंपल इडली खा रहे हैं, सिंपल उपमा खा रहे हैं। तो यानी कि आप कोशिश करें कि जब आप बीमार है, तब तो आप एक वैरायटी ले। क्योंकि अगर थोड़ा सा भी इंडा बढ़ा, तो बीमारी बड़ी समझो। ठीक है? तो और नॉर्मल कंडीशन में भी आप रेगुलर डायट तो सिंगल ही रखे ना भाई? देखिए, वैसे तो भारत में रोटी, सब्जी, रोटी, दाल ही खाई जाती है, सबज है ना? ये तो लोग जो दूध, दही, पनीर खाने में जोड़ लेते हैं, फल, जूस जोड़ लेते हैं या बहुत खटाई जोड़ ले, तो प्रॉब्लम आती है। अगर ये ना जोड़े और सिंपल जैसे भारत में रोटी, दाल खाई जाती है, तो फिर आपको उतना प्रॉब्लम नहीं आएगा। है ना? रोटी, दाल खा रहे हैं, रोटी, सब्जी खा रहे हैं, जनरली तो उससे फिर प्रॉब्लम आने की संभावना नहीं है, इस तरह से। तो अ कॉमिनेशन जो है, वो हमेशा सिंगुलर रखें, मोनो डाइट रखें, हमेशा।
जी, सर, ये तो हो गई कि फूड कॉमिनेशन हमारा क्या होना चाहिए। लेकिन जैसे अगर ये इनडाइजेशन की समस्या चल रही है या हमारी आंतों में प्रॉब्लम हो चुकी है और जैसे आपने बताया इतने सारे अल्सर अलग-अलग टाइप के हमें हो सकते हैं। तो अगर हमें ये सब बीमारियां हो चुकी हैं, तो क्या हम योग, प्राणायाम या ध्यान के माध्यम से भी हेल्प ले सकते हैं इसे हील करने में?
देखिए, ये सब चीजें जितनी भी है ना, आपके योग, ध्यान, प्राणायाम, एक्सरसाइजस, मतलब एक्यूप्रेशर, जो भी आप करते हैं, ये सब रिलीफ देकर उसकी एक ताकत, एंड्योरेंस बढ़ाने के लिए काम करेंगे। पर एक्चुअल में जो रियल में जो इंटरनल जो ठीक होगा, मतलब ये बीमारियां ठीक होगी, वो इसका इरिटेबल जो कॉज है, जो इसका इरिटेबल कॉज है, जो आप ऊपर से दे रहे हो, वो तो बंद करना ही पड़ेगा ना? अगर वो बंद नहीं हुआ, तो इरिटेशन चलता रहेगा, तो इंफ्लेमेशन मेंटेन रहेगी, अल्सरेशन मेंटेन रहेगा। समझे ना आप? तो इसीलिए द मोमेंट यू स्टॉप द कॉस, बॉडी स्टार्टस अ हीलिंग। यानी कि बॉडी है नाना, हीलिंग करना शुरू कर देती है। हील, फिर वो आप अगर 15-20 दिन अगर ऐसे आप केयर कर रहे हो, तो 15-20 दिन, दो-तीन सप्ताह में आपको वो रिकवर करने लग जाती है। सिंपल सा मामला है ये।
जी, सर, बहुत सारी जानकारी आपने दी इस कार्यक्रम में फूड कॉमिनेशन के ऊपर, उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।
नमस्कार।
तो दर्शकों, आज इस कार्यक्रम में हमने चर्चा की रॉन्ग फूड कॉमिनेशन पर, कैसे रॉन्ग फूड कॉमिनेशन हमारी हेल्थ को प्रभावित करते हैं, क्या-क्या बीमारियां हमें हो सकती हैं और क्या-क्या राइट फूड कॉमिनेशन है, यह भी हमने आपको बताया। तो आप अपने सेहत का ध्यान रखें, अपने खानपान को सही रखें। आज के लिए बस इतना ही। यदि आपके कार्यक्रम टीवी पे देख रहे हैं, तो हमें यूट्यूब पर भी सब्सक्राइब कर सकते हैं। सत्य हिंदी, बदले जीवन, बदले जीवन, घर-घर में सत्य का दर्शन, सत्य दर्शन।