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यह जो प्लेन क्रैश हुआ है, इस एग्जैक्ट सेम प्लेन में पहले भी दिक्कतें आई थी। 4 साल पहले नवंबर 2021 में यह प्लेन लंदन से हैदराबाद आ रहा था, कि फ्यूल लीक की वजह से इसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी टर्की में। बोइंग की जिस फैक्ट्री में ये प्लेेंस बन रहे थे, उस फैक्ट्री के वर्कर्स से जब अंडर कवर जाकर पूछा गया, क्या आप इस प्लेन में कभी ट्रैवल करना चाहोगे? तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। यू फाइंड वन? यू फाइंड वन। इन एम्प्लाइजस ने दावा किया था कि ड्रीम लाइनर्स के अंदर खराब पार्ट्स लगाए गए हैं। कई बारी मेटल्स के टुकड़े जैसा मलबा इन प्लेेंस के अंदर ही छोड़ दिया जाता है, और इन वायलेशंस को ना रिपोर्ट करने का इन पर प्रेशर बनाया जाता है। वहां काम करने वाले एक क्वालिटी मैनेजर ने सीधा अपनी पत्नी से कहा था कि आज के बाद वो कभी किसी ड्रीम लाइनर में ट्रैवल नहीं करेंगे। 2012 और 13 के बीच में 11 ऐसे प्लेेंस डिलीवर किए गए थे जिनकी क्वालिटी इतनी खराब थी कि सिंथिया किचंस का कहना था कि उन्हें रात को नींद नहीं आती थी।
नमस्कार दोस्तों, 12 जून 2025 दोपहर के ठीक 1:30 बजे Air इंडिया की फ्लाइट AI171 अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोडिंग बेस से बाहर निकलती है। अब वैसे तो इसे दोपहर के 1:10 पर ही लंदन के लिए उड़ान भर लेनी चाहिए थी। लेकिन आज यह फ्लाइट लेट थी। यहां इस्तेमाल किया जा रहा था बोइंग का 787 ड्रीम लाइनर हवाई जहाज, और इस दिन यह इस प्लेन की पहली फ्लाइट नहीं थी। इससे पहले करीब 12 घंटे पहले यह प्लेन पेरिस से दिल्ली आया था और फिर सुबह इसने दिल्ली से अहमदाबाद की फ्लाइट ली। इसी फ्लाइट में बैठे थे एक पैसेंजर आकाश वत्सा, जिन्होंने एक बड़ी ही अजीब चीज नोटिस करी। इन्होंने देखा कि प्लेन के विंग फ्लैप्स लगातार ऊपर नीचे हो रहे थे, और प्लेन का एसी भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। दिस एसी इज नॉट वर्किंग लुक एट एवरीवन। बाद में इन्होंने इस इंसिडेंट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। इनका कहना था सिर्फ एसी ही नहीं, प्लेन का एंटरटेनमेंट सिस्टम, रिमोट कंट्रोल कुछ भी ढंग से काम नहीं कर रहा था। प्लेन फ्लाइट एंटरटेनमेंट इज नॉट वर्किंग नथिंग इज वर्किंग नथिंग एट ऑल। लेकिन फॉर्चुनेटली 11:16 पर यह फ्लाइट अहमदाबाद में सेफली लैंड कर जाती है।
करीब 12:20 पर इस प्लेन की रिफ्यूलिंग करी जाती है, और एग्जैक्टली 42 मिनट्स का समय लगता है इस प्लेन में फ्यूल भरने में। जो कि यूजुअल से थोड़ा सा ज्यादा है। आमतौर पर 30 से 35 मिनट का समय लगना चाहिए। एक डीजीसीए के ऑफिशियल बाद में इंडियन एक्सप्रेस को बताते हैं कि यह कोई आउट ऑफ ऑर्डिनरी चीज नहीं थी। थोड़ा सा ज्यादा समय लग सकता है फ्यूल भरने में एक ऐसी मैक्स पेलोड फ्लाइट के लिए। लेकिन जब फ्यूल भर रहा था, पैसेंजर्स प्लेन में चढ़ रहे थे। एग्जैक्टली 242 लोग इस प्लेन में चढ़ते हैं। 230 पैसेंजर्स, 10 क्रू मेंबर्स और दो पायलट्स। प्लेन की कमांड संभाले हुए थे कैप्टन सुमित सबरवाल, जिनके पास 8200 आवर्स का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। इनके साथ थे को पायलट क्लाइव कुंदर, जिनके पास 10100 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। दोपहर के 1:31 पर यह प्लेन एक्टिव रनवे की तरफ जाना शुरू करता है। 1:34 पर अहमदाबाद के एयर ट्रैफिक सर्विसेस से इसे टेक ऑफ की परमिशन मिल जाती है, और ठीक 1:38 और 24वें सेकंड पर इसके सारे प्रीचेक फ्लाइट चेकक्स पूरे हो जाते हैं। टेक ऑफ करने से ठीक पहले किसी भी तरह की कोई वार्निंग नहीं थी। रनवे चेंज, थ्रस्ट मॉडिफिकेशन और फ्लैप एडजस्टमेंट की कोई भी रिक्वेस्ट नहीं आई थी। वेदर भी ठीक था और विजिबिलिटी भी अच्छी, टेंपरेचर थोड़ा ज्यादा था लेकिन ऑपरेशनल लिमिट के अंदर था। यह प्लेन रनवे नंबर 23 पर जाकर अपनी पोजीशन ले लेता है। 1:48 और 44वें सेकंड पर यह प्लेन रनवे नंबर 23 से टेक ऑफ कर जाता है।
अगर आप इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सेटेलाइट इमेजरी से देखेंगे तो आपको दिखेगा कि इसमें एक ही रनवे है, और चारों तरफ यह एयरपोर्ट घिरा हुआ है रेजिडेंशियल एरियाज से। इन्हीं आसपास के घरों में रह रहा था एक 17 साल का लड़का आर्यन, जो उस समय पर अपने दोस्तों को दिखाना चाहता था कि एक प्लेन कैसे उड़ता है, तो वो अपना फोन निकाल कर वीडियो फिल्म करने लगता है। इसके द्वारा लिए गए वीडियो में देखने को मिलता है कि कैसे प्लेन का लैंडिंग गियर ऊपर नहीं आया है। 1:38 55 सेकंड्स पर प्लेन हवा में 625 फीट की हाइट पर पहुंचता है। लेकिन इससे ऊपर नहीं जा पाता। कुछ ही सेकंड्स बाद पायलट्स एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को कॉल करके कहते हैं ट्रस्ट नॉट अचीव्ड बॉलिंग फॉलिंग मेरे मेरे। इसके बाद प्लेन का एटीसी से कांटेक्ट टूट जाता है, और एटीसी फिर से कांटेक्ट करने की कोशिश करता है, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिलता। 1:39 13 सेकंड पर प्लेन नीचे गिरने लगता है, और सिर्फ 34 सेकंड्स टेक ऑफ करने के सिर्फ 34 सेकंड्स बाद यह प्लेन एयरपोर्ट से लगभग 1.5 कि.मी. दूर रेजिडेंशियल एरिया मेघनानी नगर में बीजे मेडिकल कॉलेज के एक हॉस्टल में जाकर क्रैश कर जाता है, और इस हॉस्टल में आग लग जाती है। [संगीत] हॉस्टल में इस वक्त लंच ब्रेक चल रहा था, और लगभग 35 स्टूडेंट्स कैंटीन में जमा थे। एकदम से प्लेन आकर कैंटीन से टकरा गया। किसी स्टूडेंट को समझ नहीं आया कि यह क्या हुआ है। अपनी जान बचाने के लिए स्टूडेंट्स खिड़कियों से कूदने लगे। कोई सेकंड फ्लोर से कूदा तो कोई थर्ड फ्लोर से। वहां पास रहने वाले लोगों ने बताया कि जब प्लेन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से जाकर टकराया, तब एक बहुत ही तेज आवाज सुनाई दी, और उन्हें लगा कि जैसे कोई भूकंप आ गया हो। जब उन्होंने बाहर आकर देखा, तो चारों तरफ सिर्फ धुआं-धुआ था और जमीन पर मलबा पड़ा हुआ था।
प्लेन में मौजूद सभी लोगों में से सिर्फ एक पैसेंजर जिंदा बचे। विश्वास कुमार रमेश, एक ब्रिटिश सिटीजन, जो इमरजेंसी एग्जिट के पास सीट नंबर 11 ए पर बैठे थे। इनका कहना है कि प्लेन के जिस साइड इनकी सीट मौजूद थी, प्लेन का वो हिस्सा चांस की बात है जमीन की तरफ गिरा। उन्हें बाहर खाली जगह दिखी, तो वह इमरजेंसी एग्जिट से बाहर आ गए। लेकिन प्लेन का दूसरा हिस्सा दीवार से ब्लॉक्ड था। इसी कारण से कोई और बाहर नहीं आ पाया। सरकार ने अभी तक ऑफिशियल टोल नहीं बताया है। एग्जैक्टली कितने लोग यहां मारे गए, लेकिन अनुमान है कि यह नंबर 270 से भी ज्यादा होगा। यह प्लेन क्रैश इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा। दुनिया के सबसे खौफनाक क्रैशेस में से एक। सवाल सबके मन में एक ही है। आखिर यह क्रैश हुआ क्यों? यहां किसकी जिम्मेदारी बनती है? Air इंडिया, बोइंग या सरकार? आइए मौजूदा एविडेंस के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं कि एग्जैक्टली यहां हुआ क्या था। [संगीत]
दोस्तों, जब भी हम प्लेन क्रैश जैसे बड़े हादसों की खबर सुनते हैं, इतने कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स को फेल होते हुए देखते हैं, तो एक आम इंसान के पर्सपेक्टिव से पावरलेस फील करना बड़ी आम बात है। हम कंट्रोल नहीं कर सकते कि ये बड़ी-बड़ी कॉरपोरेशंस क्या करती हैं। इनके फैसलों का क्या असर पड़ता है हमारी जिंदगी पर। लेकिन मेरा मानना है ऐसे केसेस में बेहतर है उन चीजों पर फोकस करना जिन्हें हम कंट्रोल कर सकते हैं। हमारी जिंदगी में लिए गए खुद के फैसले। जो चीजें हमारे कंट्रोल में है उससे अपना फ्यूचर सिक्योर करें। और आज की दुनिया में अपना फ्यूचर सिक्योर करने का मतलब है हमारी लाइफ टाइम के सिंगल मोस्टेंट टेक्नोलॉजिकल शिफ्ट को मास्टर करना जो कि है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। दी मोस्ट प्रोफाउंड टेक्नोलॉजी ह्यूमैनिटी वर्किंग ऑन रियली फ्यूचर पर मोस्टेंट फाउंडेशनल टेक्नोलॉजी टाइम इट इज अ गोल्डन एआई दुनिया में हर एक इंडस्ट्री को बदल रहा है, जो लोग आज के दिन एआई का सही से इस्तेमाल करना सीख पाएंगे वो लोग आने वाले टाइम में ज्यादा प्रोडक्टिव रहेंगे, ज्यादा वैल्यूएबल रहेंगे, और उन्हें ज्यादा ओपोरर्चुनिटीज मिलेंग। और दूसरी तरफ जो लोग एआई को इग्नोर करेंगे वो लोग अनफॉर्चूनेटली पीछे रह जाएंगे। अगर आप एआई की इस फील्ड में अपने अपने को अपस्किल करना चाहते हो तो आओ जॉइ करो मेरी एआई मास्टर क्लास। यह शायद से देश की सबसे पॉपुलर एआई वर्कशॉप्स में से है। अभी तक 5000 से ज्यादा लोग इसे ज्वॉइ कर चुके हैं, और उनका फीडबैक भी बहुत जबरदस्त रहा है। इनमें से 74% लोगों ने तो यह तक कहा कि जितना वो एक्सपेक्ट कर रहे थे उससे कहीं और ज्यादा वैल्यू उन्हें इस वर्कशॉप में मिली। क्योंकि यहां इस 3 घंटे की वर्कशॉप में अब 25 से ज्यादा एआई सॉफ्टवेयर्स के बारे में सीखेंगे। अब जानेंगे एआई से फोटोस और वीडियोस बनाना, एआई के जरिए वेबसाइट्स बनाना, एआई से प्रेजेंटेशंस बनवाना। हजारों लोग इसका ऑलरेडी फायदा उठा चुके हैं, और अब आपके लिए यह आखिरी मौका है क्योंकि 29 जून को मैं एक और बार करने जा रहा हूं, और उसके बाद मैं एक ब्रेक लेना चाहूंगा, क्योंकि हर बार मैं आपको इसमें लाइव आकर सिखाता हूं तो मेरे लिए थोड़ा रेपेटेटिव हो गया है। मैं भी कुछ नया ट्राई करना चाहता हूं। लेकिन आपने अगर इसे अभी तक जॉइन नहीं किया है तो आपके लिए अच्छा आखिरी मौका है सिर्फ दो मूवी टिकटों की कॉस्ट में। लिंक इसका नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। या फिर आप इस क्यूआर कोड को भी स्कैन कर सकते हैं।
अब टॉपिक पर वापस आते हैं। इस क्रैश के बाद इन्वेस्टिगेटर्स ने कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर को रिकवर कर लिया है। जिसमें कॉकपिट में होने वाली बातचीत और साउंड्स को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके साथ ही फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर भी रिकवर किया जा चुका है। जिसमें ऑल्टीट्यूड स्पीड और इंजन परफॉर्मेंस जैसी एक्टिविटीज का डाटा रिकॉर्ड होता है। इन दोनों को मिलाकर प्लेन का ब्लैक बॉक्स बनता है, जो एयर क्रैशेस को समझने में बहुत मदद करता है। इस क्रैश की इंक्वायरी इंडिया का एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो कर रहा है। जिसमें यूके और यूएस की टीम्स मदद कर रही हैं। लेकिन इसके अलावा क्योंकि यह प्लेन एक अमेरिकन मेड बोइंग एयरक्राफ्ट है, तो इसकी वजह से यूएस का नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड एनटीएसबी भी अपनी एक पैरेलल इन्वेस्टिगेशन कर रहा है। कुछ दिन पहले खबरों में आया था कि इस प्लेन के ब्लैक बॉक्स को इंडिया से बाहर अमेरिका में भेजा जा रहा है, और इन्वेस्टिगेशन के लिए। एआई क्रैश प्रोब इज कंसर्न। वी आर नाउ लर्निंग दैट द ब्लैक बॉक्स विल बी सेंट टू द यूनाइटेड स्टेट्स एंड ऑल द डाटा इन इट विल बी रिकवर्ड इन द यूएस इटसेल्फ। लेकिन सरकार ने कहा है यह गलत है। एिएशन मिनिस्ट्री के अनुसार इस ब्लैक बॉक्स को इंडिया में ही इन्वेस्टिगेट किया जाएगा।
लेकिन इस ब्लैक बॉक्स के अलावा हमारे पास कुछ और सबूत है जो ऑलरेडी पब्लिकली मौजूद है। सबसे पहले फ्लाइट रेडार का डाटा, जो एग्जैक्ट टाइमिंग्स बताता है कि कब प्लेन से कम्युनिकेट किया गया। एटीसी ने एग्जैक्टली कब क्या कहा। कब प्लेन ने टेक ऑफ किया? इससे पहले कौन सी फ्लाइट्स ली गई? यह प्लेन कितने ऑल्टीट्यूड पर उड़ा, और इसकी स्पीड कितनी थी जब यह अपने हाईएस्ट पॉइंट पर मौजूद था। ये सारी इंफॉर्मेशन हमारे पास अवेलेबल है। और इसके अलावा मौजूद हैं दो वीडियोस। दो बड़े महत्वपूर्ण वीडियोस। एक वीडियो जो उस समय 17 साल का आर्यन अारी अपनी छत से बना रहा था। जो अपने गांव से पहली बार अहमदाबाद घूमने आया था, और अपने दोस्तों को प्लेन के वीडियोस दिखाना चाहता था। तो मतलब नजदीक से करीब से गुजर रहा था। तो उसने वीडियो बना लिया कि जाऊंगा अपना गांव देहात में दिखाऊंगा दोस्त या फ्रेंड को अपना करेंगे कि इतना नजदीकी से प्लेन उठता है यहां पे। और दूसरा जरूरी वीडियो हमारे पास आता है एयरपोर्ट पर लगे हुए सीसीटीवी से। इस दूसरे वीडियो में प्लेन के टेक ऑफ से लेकर क्रैश तक सब कुछ देखा जा सकता है, लेकिन क्वालिटी इतनी ज्यादा नहीं, लेकिन पहला वीडियो जो रिलेटिवली हाई क्वालिटी का है उसमें हमें देखने को मिलता है कि प्लेन के क्रैश होने से पहले प्लेन के लैंडिंग गिय्स बाहर निकले हुए थे। यह चीज नॉर्मल नहीं है। एरोप्लेन के टेक ऑफ होने के तुरंत बाद पायलट्स जो सबसे पहला काम करते हैं वो होता है लैंडिंग गियर को अंदर करना। इसके बाहर निकले रहने पर टेक ऑफ में दिक्कत आती है। इसके अलावा वीडियो में हमें देखने को मिलता है कि प्लेन के विंग फ्लैप्स खुले नहीं हुए थे। रिट्रैक्टेड थे। विंग फ्लैप्स हवाई जहाज के विंग्स पर एग्जैक्टली यहां मौजूद होते हैं। इन फ्लैप्स के खुलने और बंद होने से प्लेन का ऊपर नीचे जाना कंट्रोल किया जा सकता है। जब ये फ्लैप्स खुलते हैं, डिप्लॉय किए जाते हैं। डिप्लॉय किए जाने का मतलब है बाहर निकल के नीचे की तरफ पॉइंट करना। तो ज्यादा सरफेस एरिया मिलता है जिसकी वजह से लिफ्ट पैदा होती है और ड्रैग भी बढ़ता है। इसकी मदद से प्लेन टेक ऑफ के वक्त ऊपर उड़ पाता है। वैसे लैंडिंग और टेक ऑफ दोनों केसेस में प्लेन के फ्लैब्स को डिप्लॉय किया जाता है, लेकिन जिस एंगल पर डिप्लॉय किया जाता है वो अलग होता है। लेकिन सिर्फ जब प्लेन हवा में सीधा उड़ रहा होता है। फ्लैब्स को रिट्रैक्ट करके रखा जाता है। अब हमारी इस एयर इंडिया फ्लाइट में टेक ऑफ के वक्त फ्लैब्स रिट्रैक्टेड थे। सही तरीके से खुले नहीं हुए थे, और लैंडिंग गियर भी बाहर था।
अब सवाल यह कि ऐसा क्यों हुआ? इसको लेकर कई थ्योरीज बनाई गई हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने एक थ्योरी लिखी कि टेक ऑफ के बाद एक तेज आवाज आई होगी प्लेन के इंजन फेल होने की वजह से। इसे सुनकर पायलट्स घबरा गए और लैंडिंग गियर अंदर करना भूल गए। ऐसी ही एक मिलतीजुलती थ्योरी है कि को पायलट ने गलती से लैंडिंग गियर की जगह विंग फ्लैप्स अंदर कर दिए। ये सभी थ्योरीज आती है इस कैटेगरी के अंदर कि पायलट्स की गलती थी। लेकिन न्यूज़ ल्ड्री को एयर इंडिया के एक 787 के पायलट ने बताया कि इस थ्योरी के साथ बड़ी दिक्कत यह है कि ड्रीम लाइनर में बड़े वार्निंग सिस्टम्स लगे होते हैं। अगर फ्लैप्स अच्छे से सेट नहीं किए हो तो पायलट्स को वार्निंग दी जाती है। ढेर सारी वार्निंग लाइट्स बजने लगती हैं। इसके अलावा कैप्टन सुमित सबरवाल का 8000 से ज्यादा फ्लाइंग आवर्स का एक्सपीरियंस था। बहुत ही एक्सपीरियंस्ड पायलट थे वो। तो इस चीज की संभावना बहुत कम है कि यहां पर पायलट्स की तरफ से कोई गलती हुई होगी। एिएशन एक्सपर्ट कैप्टन सोहेल हांडा के मुताबिक तो अगर ड्रीम लाइनर फ्लैप्स के बिना 600 फुट तक पहुंच जाता है तो फिर कोई दिक्कत आनी चाहिए क्योंकि इसके ऊपर ले जाने के लिए एक इंजन भी काफी होता है। तो अगर यह थ्योरी सच नहीं है तो इसके बाद मोटे-मोटे तौर पर एक ही पॉसिबिलिटी बचती है। प्लेन में अचानक से टोटल पावर लॉस हो जाना। और ऐसा होने का एक बड़ा सबूत हमें आर्यन के वीडियो में देखने को मिलता है। करीब से देखोगे तो इस वीडियो में आपको प्लेन के नीचे एक और ऑब्जेक्ट सा दिखाई देगा। कई सारे एक्सपीरियंस्ड पायलट्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह चीज रैट है। रैम एयर टरबाइन। यह एक छोटा सा विंड टरबाइन है जो इमरजेंसी सिचुएशंस के लिए आज के दिन लगभग सभी एरोप्लेन में मौजूद होता है। यह आपको लैंडिंग गियर के ठीक पीछे मिलेगा। जब भी किसी एरोप्लेन के सारे पावर सोर्सेस काम करना बंद कर देते हैं, तब यह टरबाइन ऑटोमेटिकली बाहर निकल कर आता है और हवा में तेज-तेज़ घूम कर पावर जनरेट करने लगता है। इससे ज्यादा बिजली तो जनरेट नहीं होती लेकिन इतनी जरूर होती है कि इमरजेंसी सिचुएशंस में एरोप्लेन में कुछ क्रिटिकल इलेक्ट्रिकल और हाइड्रोलिक सिस्टम्स काम कर सकें। अब बात यह है कि अपनी बिजली जनरेट करता है एरोप्लेन की स्पीड की वजह से। क्योंकि एरोप्लेन उड़ रहा है तो उसकी वजह से जो हवा लग रही है इस टरबाइन पर वहां से बिजली जनरेट हो रही है। तो जितनी ज्यादा तेज प्लेन उड़ेगा और जितनी ज्यादा हाइट पर प्लेन मौजूद होगा उतना ही ज्यादा इफेक्टिवली यह रैट काम करेगा। इसको लगाने के पीछे पर्पस यही है कि पायलट्स को किसी सेफ जगह पर लैंड करने का समय मिल सकेगा। लेकिन अनफॉर्चूनेटली AI171 की फ्लाइट में ना तो प्लेन की ज्यादा हाइट थी और ना ही प्लेन ने ज्यादा स्पीड पकड़ी थी। और ऊपर से पायलट्स के पास 30 सेकंड से भी कम का समय था। तो रैट मदद नहीं कर सका। लेकिन अगर हम यह फॉर श्योर कह सकते हैं कि जो वीडियो में हमें वह ऑब्जेक्ट निकलता हुआ दिखा वो रैट ही था तो इससे यह हमें सबूत मिल जाता है कि एक्चुअली में इस प्लेन में टोटल पावर लॉस ही हुआ था। विश्वास कुमार रमेश ने अपनी स्टेटमेंट में कहा था कि क्रैश होने से ठीक पहले एक बड़ी तेज आवाज सुनाई दी थी और लाइट्स फ्लिकर करने लगी थी। एिएशन एक्सपर्ट और यूट्यूट कैप्टन स्टीव शाइबनर का कहना है कि यह तेज आवाज उस हैच के खुलने की आवाज हो सकती है जिसके अंदर रैट होता है। एंड नाउ वी गंग लाउड बैंग एंड द लाइट्स फ्लिकर्ड वेल वुड कॉज दैट द डिप्लॉयमेंट ऑफ़ द रैट। इसी तरह लाइट्स का फ्लिकर होना भी बड़ी आम बात है जब रैट डिप्लॉय होता है क्योंकि यह रिजर्व इलेक्ट्रिक पावर कोड अपने डिप्लॉयमेंट के लिए इस्तेमाल करता है जिससे बाकी सिस्टम्स अफेक्ट होते हैं। रैट के डिप्लॉय होने का एक और सबूत आर्यन के वीडियो में मौजूद है। उस वीडियो को जरा ध्यान से सुनो तो आपको एक प्रोपेलर जैसी आवाज सुनाई देती है। जब कोई 787 ड्रीम लाइनर का प्लेन इस तरीके से आपके ऊपर से गुजरेगा उसकी आवाज अलग आती है। [संगीत] इन दोनों वीडियोस को साइड बाय साइड रखकर एक बार दोबारा से सुनिए। आपको एयर इंडिया फ्लाइट वाले वीडियो में प्रोपेलर जैसी आवाज सुनाई देगी। [संगीत] इससे यह बात लगभग क्लियर हो जाती है कि रैट एक्चुअली में डिप्लॉय हुआ था।
लेकिन फिर अगला सवाल उठता है कि रैट डिप्लॉय क्यों हुआ था? मोटे-मोटे तौर पर तीन इमरजेंसी सिचुएशंस हैं जो कारण बन सकती हैं रैट के डिप्लॉयमेंट के पीछे। पहला जब प्लेन में टोटल इलेक्ट्रिकल फेलियर हो जाए। दूसरा प्लेन में हाइड्रोलिक फेलियर हो जाए या फिर तीसरा प्लेन के दोनों इंजंस फेल हो जाए और प्लेन में कोई पावर सोर्स ही ना रहे। दोनों इंजंस फेल होने को ड्यूल इंजन फेलियर कहा जाता है। जो एक्चुअली में बहुत ही रेयर चीज है। ये इतना रेयर है कि पिछले 70 साल में ड्यूल इंजन फेलियर के केवल सात मामले सामने आए हैं। लेकिन हमारे केस में एक दो ऐसी चीजें हैं जो इशारा करती हैं कि एयर इंडिया की इस फ्लाइट में शायद यही हुआ था। पहली प्लेन के क्रैश होने से पहले पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को की गई मेडे कॉल में कहा था कि थ्रस्ट नहीं मिल रहा। थ्रस्ट नॉट अचीव्डिंग मेरे मेरे मेरे। जब प्लेन उड़ता है तो उसके इंजन से जो तेज हवा पीछे की तरफ निकलती है वो उसे आगे की तरफ जोर से धक्का देती है, और इसी धक्के को थ्रस्ट कहा जाता है। थ्रस्ट ना मिलना दिखाता है कि प्लेेंस के इंजन में कुछ गड़बड़ थी। और दूसरी इसके अलावा लैंडिंग गियर का अंदर ना होना भी ड्यूल इंजन फेलियर का सबूत हो सकता है क्योंकि इतनी पावर ही नहीं थी कि लैंडिंग गियर को अंदर किया जा सके।
अब अगला सवाल यह उठता है कि अगर इस प्लेन में ड्यूल इंजन फेलियर हुआ तो वो क्यों हुआ? इसके पीछे तीन अलग-अलग थ्योरीज हैं दोस्तों। पहली और सबसे पॉपुलर थ्योरी है फ्यूल कंटैमिनेशन। नेशनल एयररोस्पेस लेबोरेटरीज के फॉर्मर डेपुटी डायरेक्टर एस जे मुरलीधर का मानना है कि इस फ्लाइट में शायद फ्यूल कंटैमिनेशन हुआ था। दे वन ऑफ द पॉसिबल रीज़ व्हाट आई कैन थिंक ऑफ इट कैन बी ड्यू टू फ्यूल कंटैमिनेशन। यानी कि जो तेल डाला गया प्लेन में प्रॉब्लम वहां थी। इनके मुताबिक फ्यूल कंटैमिनेशन होने पर या तो कम थ्रस्ट जनरेट हुई जिससे प्लेन ऊपर नहीं उड़ पाया या इसकी वजह से दोनों इंजन फेल हो गए। स्ट्रैटेजिक एिएशन सॉलशंस कंसलटेंसी के चेयर पर्सन नील हंसफोर्ड ने द गार्डियन को भी ऐसा ही कुछ कहा कि वैसे तो फ्यूल टैंक फुल था लेकिन फ्यूल कंटैमिनेट से क्लॉगिंग हो सकती है और फ्यूल ब्लॉकेज से इंजन प्रॉब्लम हो सकती है। फ्यूल कंटैमिनेशन होने के पीछे दोस्तों अपने अलग-अलग कई सारे कारण हो सकते हैं। जैसे कि फ्यूल में पानी होना, कचरा होना या क्ले, रस्ट, डर्ट, इवन माइक्रोबियल ग्रोथ बैक्टीरिया और फंगस की ग्रोथ की वजह से ऐसा हो सकता है। इसके अलावा डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड जो ग्राउंड व्हीकल्स में इस्तेमाल किया जाता है। वो अगर जेट फ्यूल के साथ मिक्स हो जाए तो नॉन सॉल्युबल क्रिस्टल्स बन सकते हैं जो एक्चुअली में जाकर एक बार फिर से क्लॉगिंग कर सकते हैं। 2019 में अमेरिका में इसी तरह के तीन केसेस सामने आए थे। मार्च 2019 में एक Boeing 787 को जापान में फ्यूल कंटैमिनेशन की वजह से ही ड्यूल इंजन मेलफंक्शन सहना पड़ा। थैंकफुल्ली इस केस में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था। पायलट सेफली इस प्लेन को लैंड करा पाए थे। इसके बावजूद भी। लेकिन, अगर इस एयर इंडिया क्रैश के पीछे कारण यही निकलता है, तो ब्लेम यहां फ्यूल सप्लायर्स पर भी आएगा। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर तीन फ्यूल सप्लायर्स हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और Reliance। फ्यूल कंटैमिनेशन होने का मतलब है कि इस फ्यूल की टेस्टिंग ढंग से नहीं हुई, और एिएशन फ्यूल की रिगरस टेस्टिंग होनी बहुत जरूरी चीज है। दूसरी पॉसिबिलिटी यहां पर आती है टोटल इलेक्ट्रिकल फेलियर। एक सीनियर पायलट ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि प्लेन के वेरिएबल फ्रीक्वेंसी स्टार्टर जनरेटर्स फेल हो गए, जो इलेक्ट्रिकल पावर देकर इंज को स्टार्ट करने में मदद करते हैं। जनरेटर्स फेल होने पर इलेक्ट्रॉनिक इंजन कंट्रोल्स ने काम करना बंद कर दिया। जब ऐसा होता है तो ऐसे सभी एरोप्लेन में ऑिलरी पावर यूनिट्स लगी होती हैं इमरजेंसी केसेस के लिए। वह बैकअप की तरह काम करती हैं इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई करने के लिए, लेकिन उन्हें स्टार्ट होने में 90 सेकंड्स तक लग सकते हैं। और इस प्लेन के पास यह 90 सेकंड्स अनफॉर्चूनेटली नहीं थे। अगर दोनों इंज और ये ऑक्सिलरी पावर यूनिट्स भी फेल हो जाए या पावर सिस्टम से डिस्कनेक्ट हो जाए तो इलेक्ट्रॉनिक इंजन कंट्रोल्स का थ्रस्ट को कंट्रोल करना बंद हो सकता है। भले ही इंजंस अभी भी चल रहे हो। ऐसी सिचुएशंस में पायलट्स अपने कंट्रोल्स के जरिए थ्रस्ट को बढ़ाने की कोशिश करेंगे, लेकिन एक्चुअली में कोई रिस्पांस नहीं आएगा क्योंकि कंट्रोल्स ही काम नहीं कर रहे होंगे। इस तरह की टेक्निकल इमरजेंसी में एक हवाई जहाज को हैंडल करना बेहद चैलेंजिंग बन जाता है, क्योंकि पायलट्स के पास नॉर्मल फ्लाइट कंट्रोल्स अवेलेबल ही नहीं रहते। ऐसा साल 2013 में जैपनीज एयरलाइंस के दो ड्रीम लाइनर्स के साथ हुआ था। बैटरी फेल होने के बाद उन्हें इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी। एक फ्लाइट में कॉकपिट में धुआं भर गया था।
वहीं दूसरी फ्लाइट में आग से इतनी हीट जनरेट हुई कि बैटरी को रैक से जोड़ने वाले बोल्ट्स ही पिघल गए। वी ऑब्जर्विड अ हैवी स्मोक कंडीशन एंड वी फाउंड अ फायर कंडीशन इन द हेवी ऑनिक्स कंपार्टमेंट्स। द स्मोक ट्रेड टू मेल्ट डाउन एंड द ड्रीम लाइनर्स लिथियम आयन बैटरीज। इन दोनों इंसिडेंट्स के पीछे कारण था मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट, बोइंग की तरफ से। और इसके बाद दुनिया भर के बोइंग 787 ड्रीम लाइनर प्लेेंस को उड़ान भरने से रोक दिया गया था।
नाउ वी हैव ब्रेकिंग न्यूज़ फ्रॉम द एफए टु नाइट दे आर ग्राउंडिंग द ड्रीम लाइनर जस्ट ओवर अ ईयर आफ्टर द 787 हेड फाइनली एंडेड सर्विस द फेडरल एिएशन एडमिनिस्ट्रेशन ग्राउंडेड द एंटायर फ्लट इट्स ग्राउंडेड अंटिल इट कैन प्रूव टू द फेडरल गवर्नमेंट द एयरलाइन हैज़ फिक्स द प्रॉब्लम विथ द बैटरी दैट कंटिन्यूस टू ओवर हीट। इंजन फेलियर का एक कारण कोई मैकेनिकल एरर भी हो सकता है और यह भी मैन्युफैक्चरिंग से रिलेटेड हो सकते हैं।
साल 2020 में एक नॉर्वेजियन एयरलाइंस ने बोइंग पर आरोप लगाया था कि ड्रीम लाइनर्स में इंजन की प्रॉब्लम्स के कारण कई सारी फ्लाइट्स उनकी डायवर्ट हुईं। उस एयरलाइंस को अपने कई सारे रूट्स बंद करने पड़े थे और दर्जनों बार अपने प्लेेंस में इंजन बदले गए थे। 2023 में इसी एयरलाइन को अपना एक ड्रीम लाइनर प्लेन कबाड़े में भी बेचना पड़ा था। वो प्लेन जो उसने लगभग 10 साल पहले करोड़ों रुपए में खरीदा था। यह एक बहुत ही कमाल का केस था। तो बोइंग के ड्रीम लाइनर प्लेन में कई बार दिक्कतें आ रखी हैं पहले भी। लेकिन फिर भी इस प्लेन टाइप को वन ऑफ द सेफेस्ट प्लेन टाइप्स माना जाता रहा है। क्योंकि इन सारे केसेस में कोई भी हादसा नहीं हुआ, किसी की जान नहीं गई। एयर इंडिया का यह क्रैश पहला प्लेन क्रैश है किसी भी ड्रीम लाइनर प्लेन का।
अगर यह प्लेन क्रैश इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल फेलियर की वजह से हुआ है, या तो यह मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की वजह से हो सकता है या फिर यह एक मेंटेनेंस फेलियर हो सकता है। अगर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट हुआ तो इसका सारा ब्लेम बोइंग पर आएगा। लेकिन अगर यह मेंटेनेंस फेलियर हुआ तो इसका ब्लेम Air इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेस लिमिटेड कंपनी पर जाएगा। Air इंडिया हालांकि Tata ओंड है लेकिन यह दूसरी कंपनी आज के दिन भी सरकारी कंपनी है जो प्लेेंस की मेंटेनेंस के लिए रिस्पांसिबल है। Air इंडिया के मेजॉरिटी 787 ड्रीम लाइनर प्लेेंस को इस सरकारी कंपनी के द्वारा ही मेंटेन किया जाता है।
अब यह जो प्लेन क्रैश हुआ दोस्तों, इस एग्जैक्ट सेम प्लेन में पहले भी दिक्कतें आ चुकी हैं। नवंबर 2021 में यह प्लेन हैदराबाद से लंदन जा रहा था और बीच में फ्यूल लीक देखने को मिला। इसकी वजह से इस प्लेन को टर्की के अंकारा में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। साथ ही इस प्लेन में बाकी ड्रीम लाइनर्स की तरह विंड शील्ड क्रैक होने के और बैटरी ओवर हीटिंग के इश्यूज भी आए थे। बैटरी ओवर हीटिंग का इशू मैंने आपको पहले भी एग्जांपल दिया था जिसकी वजह से जनवरी 2013 में ड्रीम लाइनर्स को ग्लोबली ग्राउंड कर दिया गया था। लेकिन क्रैश से सिर्फ कुछ घंटे पहले यहां पर आकाश वत्सा का भी वीडियो है। जिसमें हमें देखने को मिलता है कि इस प्लेन में ना तो एसी ढंग से काम कर रहा था, ना कोई भी एंटरटेनमेंट स्क्रीन काम कर रहा था, ना ही रिमोट कोई भी बटन दबाने पर रिस्पांस कर रहा था। सो मेनी पीपल दे आर यूजिंग दी मैगजीन। एक्साइटिंग। एसी इज नॉट वर्किंग एट ऑफ एट ऑल। एंड एज यूजुअल हियर टीवी स्क्रीन्स आर आल्सो नॉट वर्किंग। नाइदर दिस बटन फॉर कॉलिंग द केबिन क्रू नथिंग इज वर्किंग। नथिंग नॉट इवन द लाइट इज़ वर्किंग।
इस प्लेन का आखिरी कॉम्प्रिहेंसिव चेक 2 साल पहले हुआ था, जून 2023 में और इसके बाद मार्च 2025 में इसके राइट इंजन को रिपेयर किया गया था और अप्रैल 2025 में इसके लेफ्ट इंजन का इंस्पेक्शन हुआ था। प्लेन का अगला कॉम्प्रिहेंसिव चेक दिसंबर 2025 में होना था। इस मामले में दोस्तों इस प्लेन के मैन्युफैक्चरर बोइंग पर भी कई सारे सवाल उठ रहे हैं। अलजजीरा की एक इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक अमेरिका के फेडरल एिएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने ड्रीम लाइनर में मौजूद लिथियम आयन बैटरीज और कई नए फीचर्स को रिगरस टेस्टिंग के बिना ही परमिशन दे दी थी। इट्स द एफए जॉब टू रेगुलेट एयर सेफ्टी व्हेन इट कम्स टू द बैटरी बियली पुलिस इटसेल्फ द बैटरी टेस्ट इन द एफ रूल्स 787 बैटरी नेवर कैच फायर ऑन बोर्ड एयरक्राफ्ट दे फेल ट्वाइस इन जस्ट न डेज।
बोइंग के कई सारे करंट और फॉर्मर एम्प्लाइज ने यह दावा किया है कि फैक्ट्री में बहुत लापरवाही से ड्रीम लाइनर प्लेेंस बनाए जाते हैं। अप्रैल 2024 में बोइंग में एक इंजीनियर रहे सैम सलेपुर ने एफए से शिकायत की थी कि ड्रीम लाइनर्स के पार्ट्स को गलत तरीके से जोड़ा गया है जिसके कारण इनके कभी भी बीच में आसमान में टूटने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इसके पार्ट्स को अलग-अलग जगह से बनवाया जा रहा है पैसे बचाने के लिए जो एक दूसरे के साथ ढंग से फिट नहीं होते। इन इंजीनियर ने अपने सुपरवाइज़र्स को भी इन सेफ्टी इश्यूज के बारे में बताया था लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी।
2019 में न्यूयॉर्क टाइम्स की इन्वेस्टिगेशन में भी बोइंग के खुद के एम्प्लाइजस ने चार्ल्सन फैक्ट्री में बनने वाले ड्रीम लाइनर्स की सेफ्टी पर सवाल उठाए थे। इन एंप्लाइजस ने दावा किया था कि ड्रीम लाइनर्स में खराब पार्ट्स लगाए गए हैं। कई बार मेटल के टुकड़े जैसा मलबा प्लेेंस के अंदर ही छोड़ दिया जाता है और इन पर इन वायलेशंस के बारे में किसी को ना बताने का प्रेशर डाला जाता था। बोइंग की इस फैक्ट्री में काम कर रहे एक टेक्नशियन जोसेफ क्लेटन के मुताबिक उन्हें कई बार कॉकपिट के नीचे तारों के पास मेटल के टुकड़े मिले। जिसके कारण उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि वह खुद कभी भी किसी ड्रीम लाइनर में उड़ान नहीं भरेंगे। बोइंग कंपनी में 30 साल से ज्यादा काम करने वाले क्वालिटी मैनेजर जॉन बारनेट ने तब कहा था कि इस फैक्ट्री से अभी तक एक भी ऐसा प्लेन नहीं बना है जिसके बारे में वह कह सकें कि वह सेफ और उड़ान भरने लायक हो। अलजजीरा ने एक वर्कर को सीक्रेट कैमरा देकर बोइंग फैक्ट्री के अंदर फुटेज रिकॉर्ड करने को कहा। इस वर्कर ने अपने 15 साथियों से पूछा कि क्या वह खुद इन प्लेेंस में बैठेंगे? जिनमें से 10 ने साफ मना कर दिया क्योंकि उन्हें इसकी क्वालिटी पर भरोसा नहीं था। यू फाइंड वन यू यू ऑन यू व्ह यू? [संगीत]
इस तरह से दोस्तों पिछले कुछ सालों में ड्रीम लाइनर्स पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इनके डिफेंस में हमेशा से यह कहा जाता रहा है कि अगर यह प्लेन इतना ही अनसेफ है, इतना ही खराब है तो आज तक एक भी ड्रीम लाइनर क्रैश क्यों नहीं हुआ है? इस पर जॉन बार्ड ने कुछ साल पहले कहा था कि किसी भी प्लेन को बनाने में जो लापरवाही बरती गई है, उसके कारण प्लेन क्रैश होने में 10 से 12 साल तक लग सकते हैं। और अब एयर इंडिया का जो यह ड्रीम लाइनर क्रैश किया यह 11 साल पुराना था।
2009 से लेकर 2016 तक बोइंग की चार्ल्सन फैक्ट्री में क्वालिटी मैनेजर रही सिंथिया किचenस के मुताबिक एयर इंडिया को जो 787 ड्रीम लाइनर्स दिए गए हैं उनमें कई दिक्कतें थीं। 2012-13 में ऐसे 11 ड्रीमलाइनर्स डिलीवर किए गए थे जिनकी क्वालिटी इतनी खराब थी कि सिंधिया किचenस का कहना था कि कई बार तो उन्हें रात को नींद नहीं आती थी। इन 11 एलेजिडली खराब प्लेेंस में से छह एयर इंडिया को बेचे गए थे। जब उस वक्त सिंथिया किचenस ने प्रॉब्लम्स जाकर अपने एक बॉस को बताई तो उन्होंने अपने बॉस से पूछा कि क्या वो अपने बच्चों को इन प्लेेंस में लेकर कभी ट्रैवल करेंगे? तो उनके बॉस ने पता है क्या कहा था? सिंथिया नन प्ले स्टेन अमेरिका दे ऑल गोइंग ओवरसीज। व्हाट आर यू सीरियस? ये सिर्फ डेवलपिंग देशों की एयरलाइंस को दिए जाएंगे। जैसे कि बाकी देशों के लोगों की जान की तो कोई कीमत ही ना हो।
इसी तरह बोइंग के एम्प्लाइजस का इंटरव्यू करने वाले अलजजीरा के एक इन्वेस्टिगेटर ने बताया कि वो तीन प्लेेंस को लेकर खासतौर पर चिंता में थे। जिन्हें 2014 के पहले महीने में एयर इंडिया को डिलीवर किया जाना था। इन प्लेेंस में कई सारी गंभीर खामियां थीं। 12 जून को क्रैश होने वाले 787 ड्रीम लाइनर को भी इसी पीरियड में 31 जनवरी 2014 को डिलीवर किया गया था। क्या इसे यहां सिर्फ एक कोइंसिडेंस माना जाना चाहिए?
कई सालों से दुनिया भर के क्रिटिक्स कह रहे हैं कि बोइंग कंपनी को सेफ्टी से ज्यादा अपने प्रॉफिट्स की फिक्र है। यह पैसे बचाने के लिए शॉर्टकट्स ढूंढते हैं जिसकी वजह से जाकर प्लेन क्रैशेस देखने को मिलते हैं। इससे पहले अक्टूबर 2018 और मार्च 2019 में बोइंग के दो ब्रांड न्यू 737 मैक्स प्लेनेंस क्रैश हो गए थे। जिनमें 346 लोगों की मौत हुई। मामले में लीगल एक्शन से बचने के लिए बोइंग ने यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट के साथ $1.1 बिलियन का सेटलमेंट किया था। लेकिन सवाल यहां सिर्फ बोइंग से नहीं, एयर इंडिया से भी पूछे जाने चाहिए। बोइंग के प्लेेंस तो कई सारी एयरलाइंस को डिलीवर किए जाते हैं। लेकिन दुनिया में ऐसी कई सारी एयरलाइंस हैं जिनके साथ ऐसी कोई भी प्रॉब्लम नहीं आई है। क्रैश तो छोड़ो।
जब से Tata ग्रुप ने Air India को टेकओवर किया है, प्रॉब्लम्स कम नहीं हुई हैं। पायलट्स का कहना है कि उन्हें फ्लाइट्स के बीच आराम करने का मौका नहीं मिलता जिससे वो फटीगड रहते हैं। इसे लेकर मई 2024 में Air इंडिया एक्सप्रेस के 300 क्रू मेंबर्स एक साथ मास सिक लीव पर भी चले गए थे और अपने फोन्स को उन्होंने बंद कर दिया था। न्यूज़ कमिंग इन अ मास सिक लीव बाई सीनियर कैविन क्रू हैज़ हल्टेड द ऑपरेशंस अप टू 300 सीनियर के कैविन क्रू मेंबर्स हेव रिपोर्टेड सिक एट दी दिस इज़ अ लास्ट अ मिनट। इसी तरह जुलाई 2023 में डीजीसीए की टीम ने जब 13 रैंडम पॉइंट्स की जांच की तो पाया कि इन सेफ्टी पॉइंट्स का कभी ऑडिट नहीं किया गया था और एयर इंडिया ऑडिट की फेक रिपोर्ट्स दे रही थी। और ये एक दिन पहले की खबर देखो, लंदन से मुंबई जा रही एक एयर इंडिया की फ्लाइट में पांच पैसेंजर्स और दो क्रू मेंबर्स मिड एयर बीमार पड़ गए। कारण इसके पीछे सस्पेक्ट किया जा रहा है फूड पोइजनिंग।
एक्चुअली इस क्रैश के पीछे एग्जैक्ट कारण क्या था? इसको लेकर कुछ सबूत और कुछ जवाब हमें मिलने चाहिए। 12 जुलाई के आसपास क्योंकि 12 जुलाई दोस्तों वो डेट है जब 30 दिन पूरे हो जाएंगे क्रैश के और इंटरनेशनल सिविल एिएशन ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार किसी भी क्रैश के 30 दिन के अंदर-अंदर एक प्रीलिमिनरी रिपोर्ट सामने आ जानी चाहिए। लेकिन एक चीज मैं यहां जरूर कहना चाहूंगा कि मोस्ट लाइकली यहां एक से ज्यादा कारण हो सकता है। अगर आपने मेरे पुराने फ्लाइट क्रैश वाले वीडियोस देखे हैं तो आपने नोटिस किया होगा किसी भी इतने खौफनाक क्रैश के पीछे मल्टीपल रीज़ंस होते हैं। एक से ज्यादा गलतियां होती हैं। क्योंकि अगर सिर्फ एक दो ही गलती हो तो हर चीज का बैकअप है। अगर वो बैकअप फेल हो जाए तो उसका एक और बैकअप होता है। लेकिन सब कुछ फेल होकर अगर इतना खौफनाक हादसा होता है तो उसका मतलब मल्टीपल लेवल्स पर फेलियर हुआ है।
29 जून की एआई मास्टर क्लास को ज्वाइन करने का लिंक डिस्क्रिप्शन और पिन कमेंट में नीचे मिल जाएगा। और इन प्लेन क्रैश के मल्टीपल लेवल्स के फेलियर को बेहतर समझने के लिए मैं आपको यह वाला वीडियो रेकमेंड करना चाहूंगा। एक 35 साल से ज्यादा पुराना हादसा जहां पर एक प्लेन की छत ही उड़ गई थी जब वो हवा में था। इस वीडियो को देखकर आप समझेंगे कि ऐसे हादसों के बाद इन्वेस्टिगेशन कैसे होती है और फिर क्या सशंस इंप्लीमेंट किए जाते हैं एयरलाइंस और इन एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनीज़ के द्वारा ताकि ऐसे हादसे फ्यूचर में कभी ना हों। यहां क्लिक करके देख सकते हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद। [संगीत]