Transcription
[संगीत] सत्य धर्मा अवतारी, शांति प्रेमा अवतारी, सर्व धर्मा अवतारी। [संगीत]
साईं राम, ओम श्री साईं राम। ब्रह्मांड नायका, साईं हमारे ले संकल्प अवतरित हुए। कैसा संकल्प? गीता पुट पती में बैठे बैठे फैला हंगा। मैं अस्तित्व विश्व जानेगा मानव मूल्यों का जीवन में क्या है महत्व। कैसे चुना साईं ने लक्ष्य रूप में छोटे नव कोंपल से बच्चे किए संपन्न मानव मूल्यों से बाल विकास के माध्यम से।
अच्छा सुनो, सुनो भाई, सभी सुनो ध्यान लगाकर सभी सुनो। पंच मूल्य अति मूल्यवान है, चार वेदों का यही सार है। साईं का समन्वित रूप है, साईं का समन्वित रूप है। वो कैसे? वो ऐसे। साईं हमारे सत्य का ही तो रूप है, धर्म का शच पंथ है, शांति का प्रतिरूप है, प्रेम का भंडार है और अहिंसा का प्रमाण है।
गीता कुछ अच्छे से समझाओ, कुछ नाटकी अंदाज में। अच्छा तो देखो सत्य की शक्ति को देखो। क्यों कहते हैं सत्यमेव जयते? क्यों कहते हैं सत्य छुप नहीं सकता? क्यों कहते हैं सत्य सर्वोपरि है? क्यों कहते हैं सत्यम नास्ति परो धर्म? सत्य पर पृथ्वी टिकी है। जीवन में यदि सत्य को दिया हो स्थान, तो पीछे पीछे चले आते हैं धन, सदाचार, यश और दान। आओ स्वयं ही देख लो।
[संगीत]
प्राचीन काल में सत्यव्रत नाम के एक चक्रवर्ती सम्राट थे। वह सत्य के जीवां रूप थे। वह अपनी सात्विक लक्ष्य, विचार, आचरण आदि सभी का पालन करते हुए अपना राज्य शासन चला रहे थे। एक दिन हे देवी, आप कौन हैं? महाराज, मैं धनलक्ष्मी हूं। आप मेरा महल छोड़कर क्यों जा रही हैं? राजन, आपके राज भवन में मैं बहुत दिनों से रह रही हूं। अब मैं जाना चाहती हूं। कृपया मुझे जाने की अनुमति दीजिए। ठीक है, आप जाना चाहती हैं तो [संगीत] जाइए।
हे राजन, आप जिस भव्य महल में रहते हैं, अत्यंत कीमती वस्त्र और आभूषण धारण करते हैं। आप जो विलासिता पूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं, यह सभी धन के द्वारा ही संभव है। और मैं यहां से जाऊंगी तो सब कुछ ही मेरे साथ चला जाएगा। फिर भी आप मुझे जाने के लिए कह रहे हैं। कोई बात नहीं देवी, यदि धनलक्ष्मी चली गई तो मैं धन से ही तो वंचित रहूंगा। ठीक है, मैं धन के बिना भी रह सकता हूं। द्वारपालो, देवी को जाने दो। जो आज्ञा महाराज। [संगीत]
हे दिव्य पुरुष, आप कौन हैं? महाराज, मैं दान हूं। आप महल से बाहर क्यों जा रहे हैं? महाराज, मुझे क्षमा कीजिए। मैं यहां कैसे रह सकता हूं? मेरा यहां अब कोई स्थान नहीं है। जब धनलक्ष्मी ही चली गई तो यहां धन के बिना दान कैसे हो सकता है? मुझे भी जाने की अनुमति दीजिए। ठीक है, आप जा सकते हैं। राजन, क्या आप जानते हैं कि दान एक देव्य कृपा है? दान करने से हमारे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने आने वाली पीढ़ियों को आशीर्वाद देते हैं। और आप मुझे जाने की अनुमति दे रहे हैं। मान्यवर, आप जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं। मैं दान किए बिना भी रह लूंगा। द्वारपालो, इन्हें भी जाने दो। जो आज्ञा। [संगीत]
महाराज, हे सज्जन, आप कौन हैं? राजन, मैं सदाचार हूं। आप भी मेरे महल से जाना चाहते हैं? पर क्यों? राजन, धन और दान के बिना भला सदाचार का क्या काम? इसलिए मुझे भी जाने की अनुमति दीजिए। ठीक [संगीत] है, तो आप भी प्रस्थान कीजिए। हे राजन, क्या आप निश्चित रूप से मुझे यहां से जाने की अनुमति दे रहे हैं? महाराज, सदाचार अर्थात अच्छा आचरण, वो है जिसके कारण आपके परिवार के सभी सदस्य, प्रजा और समाज आपका सम्मान करते हैं। अगर मैं चला गया ना, तो आप सम्मान भी खो देंगे। ठीक है, आप जा सकते हैं। द्वारपालों, इन्हें भी जाने दो। जो आज्ञा महाराज।
हे भद्र पुरुष, आप कौन हैं? महाराज, मैं यश हूं। आप राज भवन छोड़कर क्यों जा रहे हैं? महाराज, धन, दान और सदाचार सभी यहां से चले गए हैं, तो फिर मेरा यहां रहने का कोई भी औचित्य नहीं है। आप मुझे बाहर जाने की आज्ञा दीजिए। अच्छा है, आप भी जाइए। हे राजन, सभी माता-पिता अपनी संतान को चरित्रवान बनाना चाहते हैं। यह यश ही है जिससे सभी लोग आपसे प्रेम करते हैं और समय समय पर सहायता और समर्थन भी करते हैं। यश के कारण ही आप आने वाली पीढ़ियों के दिलों में वास करेंगे। सभी लोग यश प्राप्त करने के निरंतर प्रयास करते रहते हैं। आप फिर भी मुझे जाने के लिए कह रहे हैं। बिना भी रह सकता हू। आप जा सकते हैं। द्वारपालों, इन्हें जाने दो। जो आज्ञा महाराज। [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]
हे दिव्य पुरुष, आप अत्यंत तेजस्वी लगते [संगीत] हैं। क्या आप बताएंगे कि आप कौन है और आप राज भवन छोड़कर क्यों जा रहे हैं? हे राजन, मेरा नाम सत्य है। धन, दान, सदाचार और यश सभी आपको छोड़कर चले गए। मुझे भी जाने की आज्ञा दीजिए। नहीं, नहीं, मैं आपको यहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं दे सकता, नहीं दे सकता। अरे, आप ही तो मेरा जीवन आधार है, स्वधर्म है। मैं आपके बिना जीवित नहीं रह सकता। कृपया मुझ पर दया कीजिए, मुझको छोड़कर आप नहीं जाए। मैं धन, दान, सदाचार और यश के बिना तो रह लूंगा, किंतु किंतु आपके बिना मेरा जीवन व्यर्थ है। नहीं, ये नहीं हो सकता। यह नहीं हो सकता। यह नहीं हो सकता।
महाराज, मैं आप जैसे सत्यवती राजा से पूर्ण रूप से संतुष्ट हूं। मैं सदैव आपके साथ ही रहूंगा। मैं आपको छोड़कर नहीं जाऊंगा। सत्य कहां है? सत्य कहां है? अरे, हमें तो सत्य के साथ ही रहना है। अरे, आप सभी लोग तो अपनी इच्छा से ही गए थे, फिर वापस क्यों आ रहे हैं? मैं लक्ष्मी हूं, महाराज। सत्य के आश्रय और अनुकरण के बिना मेरा कोई प्रयोजन नहीं है। लक्ष्मी को सदैव सत्य का साथ चाहिए। इसलिए आप मुझे राज भवन में वापस ने की अनुमति दीजिए। ठीक है, लक्ष्मी मां, आइए, आपका स्वागत। [संगीत]
अरे, आप भी आ गए? जी राजन, मैं दान हूं। सत्य के बिना दिया गया दान केवल आडंबर है। मुझे आडंबर और झूठी लोकप्रियता नहीं चाहिए। सत्य ही मेरा आधार है। इसीलिए मुझे सत्य के साथ रहने की अनुमति दीजिए। आइए, आपका भी स्वागत। [संगीत]
महाराज, मुझे राज भवन में रहने की आज्ञा दीजिए। मैं तो सत्य के बिना दुराचार ही हो जाऊंगा। मेरी तो उत्पत्ति ही सत्य से हुई है। कृपया मुझे सत्य के साथ ही रहने दीजिए। ठीक है, सदाचार, आप भी आइए। महाराज, महाराज, महाराज, मैं यश हूं। धन, दान, सदाचार और यश, यह सब भवन के चार स्तंभ हैं और इनका आधार स्तंभ सत्य है। मैं सत्य के बिना कैसे रह सकता हूं? कृपया मुझे भी राजभवन में रहने की अनुमति दीजिए। ठीक है, यश, आपका भी स्वागत है।
हे राजन, आपने यह सिद्ध कर दिया है कि धन, दान, अच्छी आदतें और यश, इनका वास्तविक मूल्य तब है जब वे सत्य के साथ जुड़े हो। सत्य के पालन से ही धन, दान, सदाचार और यश की सार्थकता है। आपके विचार, शब्द और कर्म में सत्य है और आपकी श्वास में भी सत्य है। इसीलिए आप सत्य व्रत हैं और वेद सत्यम नास्ति परो धर्मा, सत्यम नास्ति परो धर्मा, सत्यम नास्ति परो धर्मा की घोषणा करते हैं। [संगीत] [संगीत]
वाह, गीता, बहुत अच्छे से परिभाषित और परिलक्षित किया है सत्य को। अब बताओ दूसरे मानव मूल्य के बारे में। दूसरा मानव मूल्य है धर्म। धर्म सूर्य है, सूर्य जिससे प्रकाश प्राप्त होता है। हमें भी, परिवार को भी और राष्ट्र की प्रजा को भी। भागवत धर्म का तात्पर्य धार्मिक मान्यताओं से नहीं है, बल्कि हमारे कर्तव्यों से है। इस धरा पर प्रकृति का हो या जीव का, अपना निश्चित कर्तव्य होता है। जैसे सूर्य का कर्तव्य प्रकाश देना, वृक्ष का छाया और फल देना। और मानव का धर्म क्या है? पारिवारिक संबंधों के अनुसार आदर्श व्यवहार, सत्य हो मन में, प्राणी मात्र पर दया का भाव हृदय में, शांति और सभी के लिए प्रेम अपार। यह है मानव के धर्म की परिभाषा। महानुभाव, और इसी को अब हम देखते हैं इस मार्मिक दृश्य में। कर्म का फल। [संगीत]
साईं राम, पिताजी। अरे बेटा, आज शनिवार है। क्या तुमने अपनी सुबह की पूजा की तैयारी कर ली है? मैंने सारी व्यवस्था कर ली है, लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मुझे भगवान को भोग लगाने के लिए केले की जरूरत है और घर पर तो केले ही नहीं है। अरे हां, हमारे घर पर केले नहीं है। बेटा आद्विक, आद्विक, बेटा। जी पिताजी। तुम बाजार जाकर कुछ केले ले आओ। आप मुझे पैसे दे दीजिए। मैं अभी ले आता हूं। हां, यह पैसे ले लो और जल्दी से केले ले आओ। ठीक है, पिताजी। आदिक, जाओ बेटा और सुनो, सड़क ध्यान से पार करना। ठीक है। दादा जी, ध्यान से करूंगा। हां, जल्दी [संगीत] आना।
केले ले लो, केले, केले, सीरे की तरह मीठे, पके केले ले लो, केले, संतरे ले लो, संतरे, नागपुर के पेड़, संतरे। बाऊ जी, बाऊ जी, आ जाओ, केले ले लो मुझसे केले। भैया, केले कितने के दिए? बाऊ जी, केले चार केले आपके लिए मात्र रप। ठीक है, भैया, चार केले दे दो। यह ले लो भैया, यह लीजिए आपके [संगीत] केले।
मां, मां, मुझे बहुत भूख लगी है। हमने कई दिनों से कुछ नहीं खाया। बस और सहन नहीं होता, मां। हां, बेटा, मैं चल भी नहीं पा रही हूं। भूख के मारे बुरा हाल है। क्या करें? दया करो, भगवान, दया [संगीत] करो। नहीं, बेटा, भागो मत, भागो मत। [संगीत] मां, उठो ना, मां। क्या हुआ, मां? मां, आंखें खोलो, मां। हे भगवान, मेरी मां को क्या हुआ? मां, कुछ बोलती क्यों नहीं? मां, मां, आंखें खोलो, मां। उठती क्यों नहीं? मां, आंखें खोलो। अरे, क्या हुआ, भाई? वो, वो मां भूखी बेहोश। मैं, मैं और मेरी मां, हमने बहुत दिनों से कुछ नहीं खाया और मां कमजोरी के कारण बेहोश हो गई है। उठो ना, मां, कुछ बोलो, मां। हे भगवान, कुछ बोलो। सुनो, चिंता मत करो, घबराओ मत। यह केले लो और हौसला रखो। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। [संगीत] नहीं, बेटा, पहले तुम खाओ। तुम भी बहुत भूखे हो। मां, इन्होंने, इन्होंने हमें केले दिए। मां, भगवान तुम्हारा भला करे, सदा खुश रहो, खुश रहो। तुमने हमें भूको को खाना दिया। भगवान तुम्हारा भला करे, बेटा, भला करे। [संगीत] [संगीत]
अभी तक, अभी तक आद्विक क्यों नहीं आया? बाजार नजदीक ही है। वोह इतना समय क्यों ले रहा है? चिंता मत करो, बेटा, आक रास्ते में ही होगा। सबर रखो, बेटा, आद्विक आता ही होगा। अरे, आद्विक, तुम आ गए। तुम ठीक तो हो ना, बेटा? हां, पिताजी। और, और केले कहां है? वो एक पवित्र स्थान पर है। वो ना सड़ और ना दिखाई देंगे। यह क्या अनाप शना बक रहे हो, आद्विक? अरे, केले कहां है, केले? पिताजी, वो रास्ते में मैंने एक भूखी मां और बेटे को देखा। कई दिनों से उन्होंने कुछ नहीं खाया था। इसलिए मैंने वह केले उन्हें दे दिए।
क्या आज मेरा बेटा समझदार हो गया है? भगवान ने मेरी सभी प्रार्थनाएं स्वीकार कर ली है। बहुत अच्छा काम किया, बेटा। बेटा, भगवत गीता में भी यही लिखा है: कर्मण्य वाधिकारस्ते मा फलेशु कदाचन, मा कर्मफल र माते संगो कर्मण। इसका अर्थ यह है कि मनुष्य के पास केवल कर्म करते रहने का ही अधिकार है। फल देने का अधिकार तो परमेश्वर ही है। जीवात्मा सदैव कर्मशील रहती है और एक भी क्षण ऐसा नहीं है जब जीवात्मा बिना कर्म किए रह सकती हो। हां, दिवेक, तुमने बहुत अच्छा काम किया, बेटा। ईश्वर सदा तुम्हारी रक्षा करेंगे, बेटा। जैसे हम बैंक में पैसे जमा करते हैं और यही बचत हमारी जरूरत में हमें काम आती है, उसी प्रकार हमारे द्वारा निस्वार्थ भाव से की गई सेवा साई के पास हमारे बचत खाते में जमा होती है और यही बचत समय के साथ अधिक से अधिक बढ़ती जाती है। यही कर्म का पवित्र फल है, बेटा। यही कर्म का पवित्र फल है। हम सबको आद्विक, तुम पर बहुत गर्व है, बेटा। वी आर सो प्राउड ऑफ यू, सन, सो प्राउड ऑफ यू। [संगीत]
अरे, तुम्हें क्या हुआ? भागवत गीता, मेरे तो आंसू ही नहीं थम रहे। इस नाटक ने सिखाया है दो प्यार से सभी को अपनापन। जीवन में अनुकूलता हो या प्रतिकूलता, सदा मुस्कुराओ और रहो प्रसन्न। बिल्कुल सही। अब बताओ तीसरा जीवन मूल्य। भागवत। तीसरा जीवन मूल्य है शांति। पूरी दुनिया इसे ही पाने की अभिलाषी, पर यह बाहर तो कहीं भी नहीं रहती पाई जाती। जीवों के भीतर खोजो इसको, मन के अंदर। यदि आत्मविश्वास भरा हो, मन में आत्मनिर्भरता और संतुष्टि हो, जीवन में स्वयं मिलेगी फिर शांति की सौगात। अशांत मन की फिर क्या औकात? तो इसको कैसे समझाओ गी? आओ स्वयं ही देख लो एक लघु नाटिका।
जिनमें दृढ़ आत्मविश्वास होता है, वे सदैव ईश्वर के प्रिय होते हैं। तिनाली रामकृष्ण विजयनगर के प्रसिद्ध कवि थे। इसके अतिरिक्त वे एक हाजिर जवाब, विनोद प्रिय, मेधावी और अच्छे दार्शनिक थे। राजा कृष्ण देव राय के राजसभा में अपनी विनोद प्रियता और तीक्ष्ण बुद्धि वाले श्रेष्ठ मंत्री थे। एक बार मैं किसी खने जंगल में जा रहे थे और वे बीच में ही अपना रास्ता भटक गए। तभी उन्हें मार्ग में एक साधु दिखाई [संगीत] दिया। अरे, इस घने जंगल में साधु कौन है? मैं जाकर मिलता हूं। प्रणाम गुरुदेव। आयुष्मान हो पुत्र, जो असीम शक्ति मुझे यहां लेकर आई है, वही शक्ति तुम्हें भी यहां लेकर आई है। कौन सी शक्ति, गुरुदेव? मैं बताता हूं। मेरे पास एक शक्तिशाली मंत्र है। इसी मंत्र से मैं इस घने जंगल में अपनी साधना करता रहा। अब इस मंत्र को मैं तुम्हें देना चाहता हूं। मेरे इस नश्व शरीर को त्यागने का समय आ गया है, पुत्र। मेरे पास आओ, मैं तुम्हारे कान में एक मंत्र [संगीत] बताऊंगा। हे गुरुदेव, आपने मुझे यह अमूल्य उपहार दिया है। मैं इसका पूर्णतः पालन करूंगा। वस, अब कोई चिंता मत करो। लगातार मां काली का जप करो और देखना, माता आपसे बहुत प्रसन्न होगी। देवी मां, आप पर सदैव कृपा बनाए [संगीत] रखे। ओम श्री महाकाल काका नमः, ओम श्री महाकाय नमः, ओम श्री महाकालिका नमः। [संगीत]
हे काली मां, आज हम एक बकरे की बली चढ़ाकर आपकी कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। हे भाई, ऐसा क्यों करना चाहते हो? क्यों करना चाहते हो? बली चढ़ाना हमारी परंपरा है, जो वर्षों से चली आ रही है। पशुओं में विशेषकर बकरे की बली चढ़ाना। हे भाई, तुम इस जीव की हत्या नहीं कर सकते। पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीवित प्राणियों की मां हमारी काली मां है। तुम मां काली के बच्चों की हत्या करोगे? क्या मां आपसे प्रसन्न होगी? मां आपसे कभी प्रसन्न नहीं होगी। ओ हो हो हो, सुनो इंसान, अगर हम अपनी परंपराओं का पालन नहीं करेंगे और बकरे की बलि नहीं देंगे, तो बहुत बड़ी विपदा होगी। हमारे रास्ते से दूर रहो। प्रिय भाई, शांत, शांत, जल्दबाजी ना करें और पाप ना करें। पा अपने शरीर के सभी अंग पसंद है, सभी रचनाएं मां विश्वरूप का अंश है। किसी को भी किया गया नुकसान मां को होने वाले नुकसान के समान ही होता है। भाई, क्या आप अपनी मां को चोट पहुंचाना चाहते हैं? नहीं, नहीं, मैं मां को जरा भी नुकसान पहुंचाने के बारे में सोच भी नहीं सकता। ऐसे शांति भाव के साथ आपने हमें मां की समस्त प्राणी के साथ प्रेम बांटने का संदेश दिखाया है। इसके बाद हम किसी भी बकरी या मां की किसी भी रचना को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। मां हमें माफ कर देना, मां हमें माफ कर देना। जय काली मां, जय जय काली मां, जय काली मां, जय जय काली मां। [संगीत]
पुत्र, मैं तुमसे अत्यंत प्रसन्न हूं, क्योंकि तुमने पूर्ण आत्मविश्वास के साथ एक बहुत अच्छा कार्य किया है। मैं जानती हूं कि जिनमें आत्मविश्वास होता है, वह शांत रहकर ही बड़े से बड़ा कार्य कर सकता है। मैं तुम्हारी आध्यात्मिक साधना से भी अत्यंत प्रसन्न हूं। मैं तुम्हें वर देना चाहती [संगीत] हूं। देखो, मेरे दोनों हाथों में दो पात्र हैं। एक पात्र में दही चावल है और दूसरे पात्र में दूध अन्न है। तुम्हें इनमें से कौन सा पात्र चाहिए? हे मां, हे देवी मां, मैं जानना चाहता हूं कि यदि मैं दही चावल वाला पात्र ग्रहण करता हूं, तो इससे मुझे क्या फल मिलेगा? पुत्र, दही चावल खाने से तुम्हें सब ऐश्वर्य तथा धनधान्य प्राप्त होगा। और यदि मैं दूध अन्न वाला पात्र लेता हूं, तो इस पात्र के लेने से क्या लाभ मिलेगा, मां? पुत्र, यदि तुम अनन वाला पात्र लेते हो, तो तुम एक तीक्षण बुद्धिमान पंडित बनोगे। अब स्वयं ही बताओ कि तुम्हें कौन सा पात्र [संगीत] चाहिए? जीवन जीने के लिए बुद्धि और धन दोनों की आवश्यकता होती है। फिर धनवान बनकर बुद्धिहीन रहने से क्या लाभ है? तो क्या ज्ञान से पेट भर सकता है? यह भी तो उचित नहीं। हम, हे मां, हे देवी मां, पहले आप मुझे बताएं कि दोनों पात्रों के भोजन का स्वाद कैसा है? पुत्र, मैं कैसे दोनों पात्रों के भोजन का स्वाद का वर्णन कर सकती हूं? तुम स्वयं ही कर कर देख लो। तो मैं दोनों ही चक्के देख लेता हूं। हे तेनालीराम, तुमने यह क्या [संगीत] किया? तुम्हें इस कार्य के लिए मैं भयंकर दंड दूंगी। क्षमा करें मां, क्षमा करें। मुझे कोई भी दंड स्वीकार है। मैं जानता हूं कि मां के द्वारा दिया गया कोई भी दंड पुत्र का अहित नहीं कर सकता। हे तेनालीराम, मेरा दिया गया दंड तुम्हारा उद्धार करेगा। तुम्हारा दृढ़ विश्वास ही तुम्हारी उन्नति करेगा, क्योंकि जो दृढ़ आत्मविश्वास से कोई कार्य करता है, वह सदैव शांत रहता है। जो स्वयं शांत रहता है, वह दूसरों को भी शांति प्रदान करता है। मेरा आशीर्वाद है कि तुम एक विनोद प्रिय, महान कवि और चतुर विदूषक बनो। तुम्हारे द्वारा न्यायालय में दिए गए सला से सभी को उचित न्याय मिले। अच्छे सलाहकार बनो और लोगों का मार्गदर्शन करो। धन धान्य से परिपूर्ण बनो। तथास्तु। धन्यवाद मां, धन्यवाद।
जिस व्यक्ति में दृढ़ आत्मविश्वास होता है, वह सदैव आत्मनिर्भर, संतुष्ट और शांति प्रिय होते हैं। किसी भी विपरीत परिस्थिति से विचलित नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति सदैव ईश्वर के प्रिय होते हैं। जय बोलो काली मां की। जय। वाह, तनाली को अपने दृढ़ आत्मविश्वास और शांत स्वभाव के कारण जग जननी मां से आशीर्वाद प्राप्त हुआ। शांत व्यक्ति दूसरों को भी शांति देने की क्षमता रखता है। हां, बिल्कुल। तो अब चौथा मानव मूल्य भी बता दीजिए। चौथा मानव मूल्य है प्रेम। स्वामी कहते हैं, पृथ्वी बिना धूरी के घूम रही है, कारण प्रेम की शक्ति। सितारे बिना गिरे आकाश में लटके हैं, कारण प्रेम की शक्ति। महासागर अपनी सीमा से बंधे हैं, कारण प्रेम की शक्ति। वायु चारों ओर लगातार बह रही है, है कारण प्रेम की शक्ति। जो संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है, पूरी सृष्टि इसी से संतृप्त है। हां, कहते हैं ना, प्रेम एक र्जा है, एक संवेग है, जिसे जितना बांटो, उससे कई गुना होकर वापस लौटेगा। हां, इसी भावना को व्यक्त किया है इस कथा में। देखो और अनुभव करो। [संगीत]
एक गांव में मार्टिन नाम का एक मोची रहता था। वह छोटी सी कुटिया में रहता था, बहुत ईमानदार और नेक व्यक्ति था। एक दिन आज मैं दिन भर काम करके थक गया हूं। आज के इतने अच्छे दिन के लिए प्रभु आपका धन्यवाद। ऐसा करता हूं, अब मैं थोड़ी बाइबल पढ़कर सो जाता [संगीत] हूं। देखो, मैं दरवाजे पर खड़ा हूं और दस्तक देता हूं। यदि कोई मेरी बात सुनेगा और द्वार खोलेगा, तो मैं उस उसके पास आऊंगा और उसके साथ भोजन करूंगा। अगर जीत पाया, तो उसे मैं अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठने की अनुमति दूंगा, ठीक उसी प्रकार जैसे मैं अपने पिता के साथ उनके सिंहासन पर विराजमान हो गया [संगीत] हूं। मैं तुमसे मिलने कल आऊंगा। [संगीत] अरे, अब मैं जल्दी से अपने काम निपटा लेता हूं और मेरी से कहता हूं कि आज भोजन कुछ ज्यादा बना लेना। मेरी सुनती हो, आज भोजन और चाय कुछ ज्यादा बना लेना। अच्छा, भला, आज ऐसा क्या है कि खाना और चाय क्यों ज्यादा बनाऊ? अरे, क्योंकि रात को प्रभु मेरे सपने में आए थे और उन्होंने कहा है कि वह मुझसे मिलने आएंगे, तो उनका स्वागत ना हम चाय और भोजन से करेंगे। ठीक है ना? सच में, सच में? फिर तो मैं खुशी से [संगीत] बनाऊंगी।
अरे, प्रभु अब तक नहीं आए। मैं बाहर देखता हूं। अब भी बर्फ बारी हो रही है। उ हो, यह बुजुर्ग कर्मचारी इतनी बर्फबारी में भी सफाई कर रहा है। देखो, यह लोगों के जागने से पहले ही अपना काम समाप्त करने की कोशिश कर रहा है। बेचारा, सर, सर, आप अंदर आ जाइए। मैं, मुझे अंदर बुलाने के लिए धन्यवाद, सर। मैं बाहर क काप रहा [संगीत] था। मेरी सुनती हो, चाय लाना। अभी लाती हूं। मार्टिन, आप ना यह चाय पीजिए। इससे आपको ठंड से राहत मिलेगी। आप कुछ देर यहां चिमनी के पास बैठ जाइए। आपको थोड़ी गर्मी महसूस होगी। जी, चिमनी की गरमाहट और आपके अपनेपन से अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं। खाना बहुत स्वादिष्ट था। अंदर से काफी ऊर्जावान महसूस कर रहा हूं। आप मुझे जानते नहीं, पर फिर भी भी आपने इतना आदर सत्कार किया। गॉड ब्लेस यू, बेटा। थैंक यू। आप हमेशा खुश रहो। अब मैं चलता हूं। जी, अपना ख्याल रखना। [संगीत]
अरे, प्रभु अब तक नहीं आए। बहुत देर हो गई है। चलो, मैं फिर बाहर देखता हूं। अरे, यहां तो एक बूढ़ी औरत है। यह बहुत भूखी मालूम पड़ती है और ठंड से कांप भी रही है। यह तो एक कदम भी आगे नहीं चल पा रही है। मां, ओ मां, अंदर आ जाओ। हां, आ रही हूं, आ रही [संगीत] हूं। इतनी चिंता और स्नेह के साथ मुझे बुलाने के लिए धन्यवाद। मेरी अजी सुनती [संगीत] हो, एक शॉल ले आना और इस मां को दे देना। और हां, इनके लिए कुछ खाना भी ले आना। हां, मार्टिन, लाती हूं। [संगीत] लो, यह शॉल ड़ लो, मां। इससे आपको कुछ गर्माहट [संगीत] मिलेगी और यह भोजन।
भी कर लो। इससे आपकी भूख भी मिट जाएगी।
[संगीत]
आप दोनों बहुत प्यारे इंसान हैं। भले ही मैं एक अजनबी हूं, आपने मेरे साथ अपने परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार किया। आपने मुझे खाना और यह शॉल दिया। आप प्रेम के प्रतीक हैं। भगवान आप दोनों को बहुत आशीर्वाद दे। गॉड ब्लेस यू, बेटा।
ठीक है, मां। अपना ध्यान रखना।
[संगीत]
यह एक बहुत ही अनोखी अनुभूति है। यकीन मानो, जब इन दोनों ने हमारे घर में भोजन किया और हमें आशीर्वाद दिया, तो मुझे अंदर से बहुत ही खुशी का एहसास हुआ। लेकिन मेरी, मेरे सपने के अनुसार यीशु तो अब तक नहीं आए हैं। चलो थोड़ा और इंतजार कर लेते हैं।
मार्टिन, अब थोड़ा ही भोजन बचा है जिससे हमें यीशु को अर्पित करना है। चलो अब हम उनके आने का इंतजार करते हैं।
मां, मुझे बहुत भूख लगी है। मां, कुछ खाने को दो ना। मां, मुझे बहुत भूख लगी है।
मेरी, वो देखो, वो बच्चा कितना रो रहा है। शायद इसे भूख लग रही है। ऐसा करते हैं, इस मां को घर के अंदर बुलाते हैं और रोते हुए बच्चे को दूध देते हैं।
हां, हां, मार्टिन। मुझे भी लगता है, बुला लेते हैं। बहन, बहन, सुनिए, आप अंदर आ जाइए।
[संगीत]
बैठिए। आपका बच्चा कितना रो रहा है। मेरी, बच्चे के लिए दूध ले आओ ना। और सुनो, बहन के लिए कुछ भोजन भी ले आना।
हां, अभी लाई। बहन, यह लो भोजन और बेटा, यह गर्म दूध भी पी लो।
मेरी, प्लीज, बहन के लिए एक ड्रेस भी ले आओ ना।
जी, लाई। यह लो बहन, बहुत ठंड हो रही है। यह ड्रेस पहनकर तुम्हें कुछ राहत मिलेगी।
भाई, मैं और मेरा बच्चा आपके ऋणी हैं। आपने हमें भूख और ठंड से बचाया है। आपने हमारी मदद की है और मुझे यकीन है कि भगवान आपसे खुश है। गॉड ब्लेस यू, ब्रदर। ऑलवेज बी हैप्पी।
जी, अपना ध्यान रखना।
[संगीत]
हे प्रभु, अब तो बहुत देर हो गई है। वो देखो, सूर्य भी अस्त हो रहा है। प्रभु, आप कब आएंगे? पर अगर प्रभु आ गए, तो मैं क्या करूंगा? उन्हें देने के लिए मेरे पास ना तो दूध है और ना भोजन। अब मैं क्या करूं? कैसे अपने प्रभु का स्वागत करूंगा? कैसे अपने प्रभु का स्वागत करूंगा?
अरे, इस अंधेरे में किसके कदमों की आहट आ रही है? और ये, और यह कैसी अजीब सी रोशनी चमक रही है?
[संगीत]
प्रभु, प्रभु, वो, वो सभी कौन थे? प्रभु, क्या, क्या वह सब आप थे?
हां, मार्टिन। तुम घबरा गए? क्या उन सभी रूप में मैं ही तुमसे मिलने आया था? प्रेम से की गई सेवा मुझ तक पहुंचती है, क्योंकि मैं हर जगह मौजूद हूं। मैं कण-कण में हूं। मैं सभी जीवों में रहता हूं। मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। सभी से प्यार करो, सभी की सेवा करो। यही मुझ तक पहुंचने का आसान तरीका है।
[संगीत]
स्वामी कहते हैं ना, प्रेम सभी मानव मूल्यों का आधार है। हां, भागवत प्रेम विचार रूप में, सत्य कर्म रूप में, धर्म या सदाचार भाव रूप में, शांति और समझ के रूप में, अहिंसा है। और अहिंसा पांचवा मानव मूल्य है। अच्छा, कहते भी तो हैं, अहिंसा परमो धर्मः। हां, किसी प्राणी को शारीरिक या मानसिक रूप से दुख या कष्ट ना पहुंचाना अहिंसा है। और क्रूरता तो हिंसा की चरम सीमा को लांघ जाता है। हिंसा करने वाला मानव को कहेंगे दानव। क्या संभव है कि दानव बन जाए फिर मानव? हां, हां, स्वामी कहते हैं, प्रेम से यह भी संभव है। स्वयं ही देख लो, हाथ कंगन को आरसी।
[संगीत]
क्या? प्राचीन काल में कौशल राज्य के श्रावस्ती नामक स्थान के जंगल में एक बहुत ही खुंखार डाकू रहता था। जो भी राहगीर उस जंगल से गुजरता, तो वह डाकू उसे लूट लेता और मारकर उसकी उंगली काटकर अपने गले में पहन लेता। इसी कारण उसका नाम अंगुली माल पड़ा। एक दिन दो यात्री उस जंगल से गुजर रहे थे।
क्या तुम्हें पता है, इस जंगल में एक खतरनाक डाकू रहता है? अगर किसी को ढूंढ लेता है, तो वह उन्हें मार देता है, उनका सारा सामान लूट लेता है और उनकी उंगलियां काटकर माला बना देता है। हमारे पास बहुत सारी चीजें हैं। हमें बहुत सावधान रहना होगा।
हां, हां, मैंने भी इसके बारे में सुना है और मैं सचमुच में डरा हुआ हूं। हमें बहुत सावधान रहना होगा और साथ ही सतर्क भी रहना होगा।
[संगीत]
भाई, रुको! कौन है वोह, जो मेरे क्षेत्र में घुसने का साहस कर रहा है? मैं अंगुली माल, जिसके नाम से लोग थर-थर कांपते हैं। जो भी मेरे सामने से गुजरता है, मैं उसे मारकर उनकी उंगली काटकर उसकी माला बना लेता हूं।
हम तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। है ना, यहां, यहां जो हमारे पास है, वो ले लो। बस हमें जाने दो। हमें मारना मत। दया करो, दया करो, भाई। दया? यह क्या चीज है? तुम अपनी उंगलियां कटवाने के लिए तैयार हो जाओ।
नहीं, नहीं, मत काटो। नहीं, नहीं, मत काटना। नहीं, नहीं, मत।
[संगीत]
काटना। वाह! इन दोनों की उंगलियां मिलाकर मेरे माला में उंगलियों की संख्या 999 हो गई है। बस एक उंगली और ले लूं, तो यह हजार हो जाएगी। वो अगला कौन है? मैं उसका इंतजार कर रहा हूं।
[संगीत]
[संगीत]
ठहर जा! कहां जा रहा है? ठहर जा! मैं कहता हूं, ठहर जा! सुना नहीं? मैं तो स्थिर हूं, लेकिन तू कब स्थिर होगा? हे सन्यासी, क्या तुझे डर नहीं लग रहा? देख, मैंने कितने लोगों को मारकर उनकी उंगलियों की माला पहनी है। तुम जैसे कमजोर, हिंसक लोगों से क्या डरना? मैं तो अहिंसा का पुजारी हूं।
हे सन्यासी, क्या तुम यह नहीं जानते कि मैं कितना ताकतवर हूं? मैं चाहूं तो एक ही बार में 10 लोग के सिर काट सकता हूं।
तुम इतने शक्तिशाली हो, तो जाओ और उस पेड़ के 10 पत्ते तोड़ कर ले आओ।
यह कौन सा बड़ा काम है? कहो तो मैं पूरा पेड़ उखाड़ दूं।
नहीं, पेड़ उखाड़ने की जरूरत नहीं है। तुम केवल पत्ते तोड़ कर ले।
[संगीत]
आओ। ये लो पत्ते। यदि तुम ताकतवर हो, तो यह पत्ते जहां से तोड़कर लाए हो, वहीं जोड़ दो। जोड़ दो।
पागल हो क्या? क्या कभी टूटे हुए पत्ते भी जोड़े जा सकते हैं? यदि तुम इनको जोड़ नहीं सकते, तो भला ताकतवर कैसे हो? किसी का सिर शरीर से अलग करने में कोई बहादुरी नहीं है। शक्तिशाली व्यक्ति वही होता है, जो जोड़ने की शक्ति रखता हो। अहिंसा का मतलब सिर्फ दूसरों को शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना नहीं है, उससे कहीं अधिक है। हमें अपनी आंखों, कानों या शब्दों से किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। अहिंसा का अभ्यास केवल प्रेम को विकसित करके ही किया जा सकता है। व्यक्ति को क्रोध, इच्छा, लोभ, भ्रम, अहंकार और ईर्ष्या जैसे आंतरिक शत्रुओं को प्रेम से बदलने की आवश्यकता है।
हे सन्यासी, मुझे माफ कर दो। मैं भटक गया था। मुझे माफ कर दो। अब तक मैंने अपना जीवन बर्बाद किया है। दूसरों को चोट पहुंचाकर पाप किया है। क्या कोई प्रायश्चित है? मुझे आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है। मुझे सही मार्ग दिखाइए। मुझे सही मार्ग दिखाइए।
उठो, अंगुली माल। चिंता मत करो। आज से हर प्राणी से प्रेम करो। तुम्हारा प्यार आज से तुम्हारी श्वास, तुम्हारा हथियार और तुम्हारी सुरक्षा है। दिन की शुरुआत प्यार से करो, दिन को प्यार से भरो और दिन का अंत प्यार से करो। हिंसा छोड़कर आप परम आनंद और दिव्य शक्ति का अनुभव कर सकते हैं। उठो, मेरे साथ चलो।
[संगीत]
अनाथ पिंक, यह एक और भाई आया है। इसे अपनी संघ में शरण दो।
[संगीत]
मेरे प्रिय अनुयायियों, जीवन में तीन चीजें अवश्य करनी चाहिए। आपको उन लोगों का भला करने का प्रयास करना चाहिए जिन्होंने आपका नुकसान किया है। आपको दूसरों द्वारा किए गए नुकसान को भूलना चाहिए और दूसरों के साथ किए गए अपने अच्छे कार्यों को भी भूलना चाहिए। दूसरों ने आपके साथ जो अच्छा किया है, आपके साथ जो अच्छा किया, उसे आपको एक पवित्र चीज के रूप में याद रखना चाहिए। आपको उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहिए। अपने सभी कार्यों को धर्म के अनुरूप बनाओ। अंतर वाणी को स्मरण करके तुम जो भी कर्म करोगे, वह पवित्र हो जाएगा।
धन्यवाद, गुरुदेव। आपका ज्ञान हमें बोधि के मार्ग पर निर्देशित करता है।
सुनो, सुनो, सुनो, नगरवासियों, ध्यान से सुनो। श्रावस्ती के राजा पधार रहे हैं।
प्रणाम, महात्मा। आयुष्मान भव। सदा कल्याण हो।
राजन, ऐसा प्रतीत होता है कि तुम किसी अभियान पर निकले हो।
जी, महात्मा। मैं आज अंगुली माल को पकड़ने के लिए निकला हूं और आज उसे मार ही डालूंगा। उसने बहुत अशांति फैला रखी है। मैं आपसे आशीर्वाद लेने आया हूं।
हे राजन, मान लीजिए अंगुली माल हिंसा का मार्ग त्याग कर सन्यासी जीवन शुरू कर देता है, तो आप क्या करेंगे?
तो, तो मैं उसे प्रणाम करूंगा। किंतु, मैं अंगुली माल को सन्यासी के रूप में देखने की कल्पना भी नहीं कर सकता।
राजन, आप उस तरफ देखिए। वह पौधों में पानी दे रहा है।
वो, वो, वो अंगुली माल! हे महात्मा, जिसे मैं अपनी सैन्य शक्ति से भी काबू नहीं कर पाया, अपने प्रेम और अहिंसा से ही इस खुंखार डाकू को सन्यासी में बदल दिया। धन्य हो, भगवान! धन्य हो आप स्वयं दयालु और प्रेममय।
[संगीत]
बुद्धम शरणम गच्छामि। धम्मम शरणम गच्छामि। संगम शरणम गच्छामि।
[संगीत]
[संगीत]
तो भागवत, देखा तुमने कि कैसे सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा हमें एक सहज इंसान बनाते हैं। हां, गीता, और वह हमें भगवान के निकट पहुंचा देती है, जिससे हम उनकी कृपा का पात्र बन पाते हैं। और यह सब गुण हमारी साईं मां में कूट-कूट के भरे हुए हैं। गीता, मैंने चलती-फिरती हुई आंखों से अजा देखी है। मैंने जन्नत तो नहीं देखी, साईं मां देखी है। जय साईराम।
[संगीत]
ओ बंता सिंघ, तुसी कि जा रहे हो?
मैं साईं बाबा जी के दर्शन करने जा रहा हूं।
साईं बाबा? यह साईं बाबा जी कौन है?
तुझे मालूम नहीं? एक ओंकार सच्चे पादशाह है। साईं वाहेगुरु का पावन रूप है। साईं, ओ खुदा की नूर छलके है, जिसमें एक वही राम रहीम है। साईं, ये ऐसे महापुरुष हैं।
साईं बाबा, कुछ और भी तो बताओ।
बंता सिंह, सुनो, बापा साडे प्यारे-प्यारे, भोले-भाले, सीधे-साधे। उनकी तो है शान निराली। महिमा गाए दुनिया सारी। आओ भक्तों, आओ भक्तों, सब मिल बोलो जयकारा। साईं बाबा का जयकारा। साईं बाबा का जयकारा। साईं बाबा का जयकारा। साईं बाबा का।
मुझे भी उन करवा दो।
बंता सिंह, चलो, चलो। यह तो अपने सच्चे पातशाह का ही रूप है। वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की।
[संगीत]
फतेह। दर्शन देख जीवा, गुरु तेरा पूरण कम होई। प्रभु मेरा दर्शन देख जीवा, गुर रा। आज ता दिल खुश हो गया। दिल नचन करता है।
[संगीत]
बाबा।
[संगीत]
प्यार, सतगुरु प्यारे साईं। प्यार दि चोरी साडा हो।
[संगीत]
गया दिरी सा हो गया। हो की करिए, की करिए। दिल चोरी साधा हो गया। हो की करिए, की करिए। चरणों में साईं के हो गया। उ की करिए, की करिए। चरणों में साईं के। ो गया उ की करिए, की कर। तेरी भीम, भीमी, छल तेरे मुकुट जैसे बाल। तेरी धीमी, धीमी चाल, तेरे ट जैसे बाल। अब मैं इससे ज्यादा क्या कहूं? नश में पावला हो गया। कीए की मैं नश में बावला हो गया। सा हो गया। करय की कर।
[संगीत]
बल्ले, बल्ले, बल्ले, बल्ले।
[संगीत]
[प्रशंसा]
बल्ले होय।
[संगीत]
होय, होय, होय, होय। सुन, सुन, मुखड़ा देख के तेरा, बागो बाग हुया दिल।
[संगीत]
मेरा सुना, सुना मुखड़ा देख के तेरा, बाग माग हुया दिल। मेरा जन्म जन्म दा कट दे फेरा। होए, होए। जन्म जन्म दा कट दे तेरा। मैं ू, मैं सा बाबा तेरा। बल्ले, बल्ले, बल्ले, बल्ले।
[प्रशंसा]
[संगीत]
बल्ले। जन्म जन्म दा कट दे तेरा। मैं हं, मैं बाबा तेरा। तेरा स्वर्ग जैसा मंदिर, कर उथल-पुथल अंदर। जैसा मंदिर, करे उथल-पुथल अंदर। फिर छी मुस्कान खो गया। फिर जी मुस्कान के खो गया। ई की कर, की करिए। चोरी सा का हो गया। की करिए, करया। चोरी सा हो गया।
[संगीत]
[संगीत]
सोने वाहेगुरु जी, आसामी तेरे ना चल। देखते बाबाजी ने खुश करिए। ओए शाबा, ओए शाबा, शबा, शबा। साईं बाबा प्यारा, श्यामा। सब दि अखान तारा, श्यामा। ऐसा होर ना कोई, श्यामा। सच्चा प्यार हमारा, शाबा। पावे गुरु हमारे, शाबा। साती बिगड़ बना दे, शाबा। चल गया तेरा जादू, दिल हो गया बेकाबू। जो तेरे दर पे आए, खाली कभी ना जाए। खाली कभी ना जाए। तुम्हारी कभी ना जाए। हाथ जोड़कर प्यार, शश नवा दे। कर कृपा प्रभ धीन दयाला। मेहतर साईं बण हार। भव सागर तो लगा दे पा। भव सागर तो लगा दे पा। चोरी साडा हो गया। चोरी साडा हो गया। उकी कर, एकही करया। रणों में साईं गया। उ की ही करया। धी धीमी चाल रे, रू जैसे बा। इससे ज्यादा क्या कर? श में मामला हो गया। जो साधा हो गया।
[प्रशंसा]
की जो सा हो गया। और की करिए, की चलिए।
[संगीत]
सच्चे पादशाह जियो, सचे वाहेगुरु जी। हता तेरे हा।
[हंसी]
[संगीत]
[संगीत]
जो बोले सो निहाल। शांति प्रेमा अवतारी। सर्व धर्मा अवतारी।
[संगीत]
साईराम। श्री सत्य साई अवतारी। साईराम।