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व्हाट्स अप एवरीवन? वेलकम बैक टू द चैनल। मैक में बेटा बचा है आखिरी चैप्टर गवर्नमेंट बजट, जो कि वैसे चैप्टर नंबर 10 है। बट आपका बचा है आखिरी क्योंकि 11 और 12 हम ऑलरेडी कर चुके हैं। तो आइए आज इसको भी कंप्लीट करते हैं। जल्दी से शुरू करते हैं और समझते हैं कि ये सरकार अपना बजट कैसे बनाती है। क्या-क्या चीजें इसके अंदर होती हैं। उसके बाद इंडियन इको की बारी है। चलिए जल्दी से लेट्स बिगेन।
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स्टार्ट करते हैं बच्चों मीनिंग ऑफ गवर्नमेंट बजट के साथ। सर, मीनिंग ऑफ गवर्नमेंट बजट है क्या ये गवर्नमेंट बजट? देखो, ये एक एनुअल स्टेटमेंट है। यानी हर साल बनेगा। अब गवर्नमेंट का है तो सरकार बनाएगी। सरकार बजट में क्या लिखेगी? देखो, जैसे हम लोग अपना नॉर्मली घर का बजट कब बनाते हैं ना कि भाई इतना पैसा हम खर्चा करने वाले हैं। इतना इस सामान पे, इतना इस सामान पे, इतना हमारे पास पैसा होगा अवेलेबल होगा। उसी तरीके से सरकार भी अपना बजट बनाती है कि इस आने वाले साल में कितना पैसा हमारे पास आएगा यानी रिसीप्ट्स, कितना पैसा हम खर्च करेंगे यानी एक्सपेंडिचर्स और उनकी कैटेगराइजेशन कि एक्सपेंडिचर कौन सा रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, कौन सा कैपिटल एक्सपेंडिचर। इनको अच्छे से पढ़ेंगे। ऐसी रिसीप्ट्स में भी कौन सी रेवेन्यू रिसीप्ट्स, कौन सी कैपिटल रिसीप्ट्स। और इनका जब एक हिसाब किताब बना के सरकार पेश करेगी तो उस स्टेटमेंट को बोलेंगे गवर्नमेंट बजट।
तो क्या है गवर्नमेंट बजट? देखो क्या लिखा हुआ है? लाओ पेन निकाल लें पहले जल्दी से। हम हम इधर नहीं जाना भाई। बजट पे ही रहना है। यहां पे पेन चाहिए। देखो, इट इज़ एन एनुअल स्टेटमेंट। एनुअल का मतलब बेटा हर साल का। यानी बजट हर साल बनाया जाता है। क्या दिखाएगा? आइटम वाइज एस्टीमेट्स। आइटम वाइज मतलब मैंने बोला ना कैटेगराइज भी करेगा कि कहां पे क्या कितना पैसा आएगा, कितना पैसा जाएगा ड्यूरिंग अ फिस्कल ईयर। फिस्कल ईयर का मतलब सरकार का वो साल जो फर्स्ट अप्रैल से शुरू होगा और 31 मार्च पे खत्म होगा।
क्या बात है सर। सर, बजट क्यों बनाया जाता है? व्हाट आर द ऑब्जेक्टिव्स? सबसे पहले बोल रहा है बजट बनाते हैं टू रीएलोकेट द रिसोर्सेज। रीएलोकेट का मतलब होता है रिडिस्ट्रीब्यूट करना कि अभी रिसोर्सेज किसके पास हैं, कितने हैं, कौन कितना बेनिफिट्स का एंजॉय कर रहा है। वो सारे रिसोर्सेज को प्रॉपर्ली रिडिस्ट्रीब्यूट करना। अब रिडिस्ट्रीब्यूट करने के पीछे कुछ मोटिव्स हो सकते हैं गवर्नमेंट के। ठीक है? है। तो देखो क्या बोल रहा है। थ्रू द बजटरी पॉलिसी गवर्नमेंट एम्स टू रीएलोकेट रिसोर्सेज इन अकॉर्डेंस विद इकोनॉमिक मोटिव्स एज वेल एज सोशल प्रायोरिटीज ऑफ द कंट्री। यानी सरकार चाहती है कि रिसोर्सेज ऐसे डिस्ट्रीब्यूटेड हो कि गवर्नमेंट का कुछ प्रॉफिट भी बन जाए और समाज का भला भी हो जाए। सोशल वेलफेयर भी हो जाए।
अब गवर्नमेंट कैसे करती है? जैसे कुछ टैक्स कंसेशन दें या कुछ सब्सिडीज दें। किस चीज के ऊपर सब्सिडीज दें? जो चीजें अच्छी हैं समाज के लिए जैसे खादी को प्रमोट करती है गवर्नमेंट। है ना? या फिर हम देखते हैं क्लीनर फ्यूल्स को प्रमोट करती है गवर्नमेंट। सीएनजीस, एलपीजीस। तो वहां पे सब्सिडीज देनी है। और वहीं पे हैवी टैक्सेस लगा देने हैं। किन चीजों पे जो आपको नुकसान दे सकती हैं। जैसे अल्कोहलिक चीजें हो गई, लिकर्स हो गए, सिगरेट्स हो गए उन पे हैवी टैक्सेस। तो इससे क्या हो रहा है? हैवी टैक्स लगाने से सरकार का रेवेन्यू भी बन रहा है और ये चीजें महंगी होंगी तो शायद कुछ लोग ना ले पाए तो अल्टीमेटली क्या हो पाएगा अल्टीमेटली लोगों का भला भी होगा इससे। तो देखो क्या बोल रहा है टू एनकरेज इन्वेस्टमेंट गवर्नमेंट कैन गिव टैक्स कंसेशन सब्सिडीज टू द प्रोड्यूसर्स जैसे गवर्नमेंट डिसकरेज करता है हार्मफुल कंसमशन मना करता है जैसे लिकर हो गया सिगरेट्स हो गया इस पे हैवी टैक्सेस लगा देते हैं और एनकरेज क्या करते हैं खादी प्रोडक्ट्स क्लीनर फ्यूल्स है ना? जैसे गवर्नमेंट्स अभी सोलर पैनल्स वगैरह पे भी सब्सिडीज दे रही है। तो उसको प्रमोट कर रही है सरकार। राइट?
उसके बाद क्या आता है बच्चों? कुछ गुड्स और सर्विज डायरेक्टली बना सकती है गवर्नमेंट। डायरेक्टली बनाने का क्या मतलब होता है? डायरेक्टली बनाने का मतलब होता है कि गवर्नमेंट अपने कंट्रोल में रखती है सोशल वेलफेयर के लिए, सोशल मोटिव के लिए। जैसे वाटर सप्लाई हो गया। साफ सफाई की व्यवस्था, सैनिटेशन, लॉ एंड ऑर्डर, नेशनल डिफेंस। इनको हम बच्चों पब्लिक गुड्स भी बोलते हैं। दीज़ आर गुड्स पब्लिक गुड्स। सच एक्टिविटीज़ आर नेसेसरीली अंडरटेकन बाय द गवर्नमेंट इन पब्लिक इंटरेस्ट टू रेज सोशल वेलफेयर। ठीक है? तो सबसे पहला जो बजट बनता है, अब देखो इन सब पे खर्चा आएगा। इन सब पे रेवेन्यू भी आएगा। तो बजट में सबसे पहले ये देखा जाता है कि रिसोर्सेज को कैसे रीअलोकेट करना है।
उसके बाद बजट में हम ये भी मेक श्योर करते हैं कि इनकलिटीज कम हो। सर इनकलिटीज़ कैसे कम होंगी? टैक्स सिस्टम संभाल के। रिच सेक्शन ऑफ द सोसाइटी जिसकी जितनी ज्यादा इनकम उसका उतना ज्यादा टैक्स होना चाहिए। जिसकी जितनी कम इनकम उस पे उतना ही कम टैक्स होना चाहिए। इसको हम बोलते हैं प्रोग्रेसिव टैक्स स्ट्रक्चर। अगर आप हायर इनकम सोसाइटी में आओगे तो आपके ऊपर टैक्स ज्यादा होगा। लोअर इनकम वाले ग्रुप में आओगे तो आप पे टैक्स कम होगा। तो इस तरीके से क्या होता है कि रिच पे जब टैक्स ज्यादा लगेगा तो उसकी इनकम कम होगी। पुअर को जब बेनिफिट्स मिलेंगे तो उसकी इनकम थोड़ी सी बढ़ेगी। तो अल्टीमेटली इनका गैप कम होगा। तो इस तरीके से बजट बनाया जाता है कि रिच को टैक्स करो और पुअर को सब्सिडाइज करो। देखो क्या लिखा हुआ है। इकोनॉमिक इनकलिटी इज़ एन इनहेरेंट पार्ट ऑफ़ एव्री इकोनमिक सिस्टम। गवर्नमेंट एम्स टू रिड्यूस सच इनकलिटीज़ ऑफ़ इनकम एंड वेल्थ थ्रू। आजा भाई। थ्रू इट्स बजेटरी पॉलिसी। थ्रू इट्स बजेटरी पॉलिसी। गवर्नमेंट एम्स टू इन्फ्लुएंस डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ इनकम बाय इंपोजिंग टैक्स ऑन द रिच। अमीर आदमी पे ज्यादा टैक्स लगाओ। स्पेंडिंग मोर ऑन द वेलफेयर ऑफ़ द पुअर। गरीब पे ज्यादा खर्चा करो। इट विल रिड्यूस इनकम ऑफ़ द रिच। इनकम कम हो जाएगी रिच की और स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बढ़ जाएगा पुअर का। ठीक हो गया बेटा?
इसके बाद आता है इकोनॉमिक स्टेबिलिटी। सर, व्हाट इज़ इकोनॉमिक स्टेबिलिटी? इकोनॉमिक स्टेबिलिटी का मतलब होता है कि इकॉनमी में ना तो प्राइसेस बहुत ज्यादा हाई होने चाहिए यानी इनफ्लेशन और बहुत ज्यादा डिफ्लेशन भी नहीं होना चाहिए। यानी इकॉनमी में कोई खरीदना ही नहीं चाह रहा। उस वजह से प्राइस बहुत ज्यादा गिर गए हैं। तो ये दोनों ही इकॉनमी के लिए हार्मफुल है। यानी इकोनॉमिक मॉडल हमारा अनस्टेबल है। तो सरकार कोशिश करती है कि इस तरीके का बजट बनाया जाए कि ना तो इनफ्लेशन हो ना डिफ्लेशन हो। सर बजट का इससे क्या लेना है? देखो बेटा आपने मनी में मनी सप्लाई पढ़ा है। अगर इकोनमी में ऑलरेडी महंगाई है। ऑलरेडी बहुत कुछ महंगा चल रहा है तो गवर्नमेंट ये कोशिश करती है कि हम ज्यादा खर्चा ना करें। बजट कम से कम खर्चे वाला बनाएं। क्योंकि ज्यादा खर्चा करेंगे तो लोगों तक और पैसा पहुंचेगा। लोग और डिमांड करते रहेंगे प्राइसेस बढ़ते चले जाएंगे। तो सरकार कोशिश करती है कि अगर इन्फ्लेशन है तो ऐसा बजट बनाएं जिसमें गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर कम हो। लोगों तक पैसा कम पहुंचे। और अगर डिफ्लेशन है तो डिफ्लेशन में सरकार ये कोशिश करती है कि लोगों तक पैसा पहुंचे ताकि थोड़ी डिमांड तो बढ़े। तो पब्लिक एक्सपेंडिचर ज्यादा करती है उस केस में गवर्नमेंट। तो देखो क्या बोल रहा है? इकोनॉमिक स्टेबिलिटी मींस एब्सेंस ऑफ़ लार्ज स्केल फ्लक्चुएशंस इन प्राइसेस। फ्लक्चुएशनंस क्रिएट अनसर्टेनिटीज़। अब गवर्नमेंट कैसे कर सकती है? देखो इनफ्लेशन के केस में और डिफ्लेशन के केस में। तो इनफ्लेशन में क्या बोल रहा है? इनफ्लेशन कब आता है? व्हेन एग्रीगेट डिमांड इज़ हायर दैन एग्रीगेट सप्लाई। यानी डिमांड बहुत ज्यादा है। लोगों के पास ऑलरेडी बहुत पैसा है। तो गवर्नमेंट कैसे इसको कम कर सकता है? बाय रिड्यूसिंग इट्स एक्सपेंडिचर। खर्चा कम। डिफ्लेशन की अगर बात करें तो गवर्नमेंट खर्चा बढ़ा देता है। ठीक है। हां सर। बढ़िया हो गया ये तो।
नंबर चार मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज। सरकार की जितनी भी पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज हैं उनका भी मैनेजमेंट करना पड़ता है। उनको भी पैसे की जरूरत है। उन एंटरप्राइज को चलाने के लिए भी सारा चीजें देखनी है। तो सरकार बजट में ये भी मेक श्योर करता है कि ये देखा जाए कि जितनी भी पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजज़ हैं जितनी भी गवर्नमेंट एंटरप्राइजेस हैं उन सबको भी फंड्स एलोकेट हो और उनका भी रेवेन्यू का ध्यान रखा जाए। तो देखो बोल रहा है देयर आर लार्ज नंबर ऑफ़ पब्लिक सेक्टर इंडस्ट्रीज स्पेशली नेचुरल मोनोपोलीज़। नेचुरल मोनोपोलीज़ का मतलब जो सरकार अपने ही हाथ में रखती है मेजॉरिटी। ठीक है? व्हिच आर एस्टैब्लिश्ड एंड मैनेज्ड फॉर सोशल वेलफेयर। जैसे रेलवे हो गया जो सोशल वेलफेयर के लिए ही बनाया गया है। तो रेलवे को फंड एलोकेट होना जरूरी है ना भाई? नहीं तो दिक्कत है। बजट इज़ प्रिपयर्ड विद द ऑब्जेक्टिव ऑफ़ मेकिंग वेरियस प्रोविज़ंस फॉर मैनेजिंग सच एंटरप्राइजज़ कि हम उनको कैसे मैनेज करें? उनको कैसे फाइनेंस प्रोवाइड करें। ये सब बेटा।
देन वी हैव इकोनॉमिक ग्रोथ। इकोनॉमिक ग्रोथ की बेटा जब भी हम बात करेंगे तो ध्यान रखना जीडीपी ग्रोथ की बात हो रही है कि बजट इस तरीके से बनाओ कि जो प्रोडक्शन करने वाली फर्म्स हैं उन तक बेनिफिट्स पहुंचे। उन तक इंसेंटिव्स पहुंचे। उन तक फायदे पहुंचे ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन हो। प्रोडक्शन ज्यादा होगा तो जीडीपी अपने आप बढ़ेगा। तो देखो बोल रहा है इकोनॉमिक ग्रोथ इंप्लाइज़ अ सस्टेनेबल इंक्रीस इन द रियल जीडीपी ऑफ़ एन इकॉनमी। रियल जीडीपी का मतलब प्राइस नहीं बढ़ने चाहिए। सिर्फ क्वांटिटी बढ़नी चाहिए। दैट इज़ एन इंक्रीस इन द वॉल्यूम ऑफ़ गुड्स एंड सर्विसेज़ प्रोड्यूस्ड इन द एन इकॉनमी। बजट कैन बी एन इफेक्टिव टूल टू इंश्योर इकोनमिक ग्रोथ इन द कंट्री। ठीक है? अब सर कैसे जीडीपी बढ़ सकता है? भाई गवर्नमेंट टैक्स कंसेशन दे, अदर इंसेंटिव दे। जब गवर्नमेंट इंसेंटिव देगी तो ज्यादा से ज्यादा लोग प्रोडक्शन में लगेंगे। चाइना ने यही तो किया था। बेनिफिट्स दिए तो अल्टीमेटली मास प्रोडक्शन हुआ। आज देखो चाइना कितना आगे निकल गया हमारे से। है ना? उसके बाद पेंडिंग ऑन इंफ्रास्ट्रक्चर। इंफ्रास्ट्रक्चर रेडी करके दे सरकार। इंफ्रास्ट्रक्चर से रिलेटेड सारी चीजें चाहे वो ट्रांसपोर्टेशन हो, चाहे वो स्टोरेज फैसिलिटीज हो, चाहे वो मार्केटिंग फैसिलिटीज हो। प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए भाई। तभी तो देश आगे बढ़ेगा। इस चीज का भी बजट में ध्यान रखा जाता है।
आखिरी आता है बच्चों हमारे पास रिड्यूसिंग रीजनल डिस्पैरिटीज। रीजनल डिफरेंसेस नहीं होने चाहिए। यानी कि जो इकोनॉमिकली बैकवर्ड एरियाज हैं, जो काफी पिछड़े हुए एरियाज हैं, उनके अंदर भी आपको ध्यान रखना है कि आप इस तरीके के प्रोविज़ंस बना के रखो। आप इस तरीके का हिसाब किताब बना के रखो कि बैकवर्ड एरियाज तक भी चीजें पहुंचे, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचे, अच्छा डेवलपमेंट पहुंचे। अदरवाइज कुछ एरियाज डेवलप हो जाएंगे, बाकी रह ही जाएंगे। तो सरकार का एक ये भी मोटिव होता है कि बजट में उन एरियाज पे भी फोकस किया जाए बेटा जी जो इतने ज्यादा डेवलप्ड नहीं है। है ना? तो देखो क्या बोल रहा है। द गवर्नमेंट बजट एम्स टू रिड्यूस रीजनल डिस्पैरिटीज। हमें रीजनल डिफरेंसेस कम करने हैं। ये नहीं कि एक स्टेट बहुत आगे बढ़ गया। एक बहुत पीछे रह गया। ऐसा नहीं होना चाहिए। ठीक है? थ्रू इट्स टैक्सेशन एंड एक्सपेंडिचर पॉलिसी। फॉर एग्जांपल एस्टैब्लिशमेंट ऑफ़ स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन्स। अब स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन्स क्या होते हैं? ये ऐसे एरियाज होते हैं जिनमें गवर्नमेंट स्पेशल फैसिलिटीज देती है। अब सपोज मैं आपको बोलूं कि एक रीजन तो बहुत डेवलप्ड है और एक रीजन बहुत अंडर डेवलप्ड है। तो वो जो अंडर डेवलप्ड वाला रीजन है ना उसको गवर्नमेंट स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन घोषित कर दे। वहां पे बोले कि हम टैक्स नहीं लेंगे। रॉ मटेरियल सस्ता देंगे। सब्सिडीज देंगे बहुत सारी। हम आपको हर तरीके का बेनिफिट देंगे। तो वहां पे बहुत सारी कंपनीज़ आ जाएंगी। इंडस्ट्रीज आ जाएंगी। अपने आप एरिया की तरक्की हो जाएगी। तो गवर्नमेंट ऐसे करता है रीजंस को डेवलप करने के लिए। ठीक है बेटा?
उसके बाद एंप्लॉयमेंट जनरेशन ये तो होता ही है कि हमें अलग-अलग प्रोग्राम्स बनाने हैं ताकि लोगों को काम मिल सके, जॉब्स मिल सके। बहुत सारी स्कीम्स बेटा गवर्नमेंट की होती हैं। जैसे मनरेगा हो गया, स्वर्ण जनती शहरी रोजगार योजना हो गया, प्राइम मिनिस्टर रोजगार योजना हो गया। ये फुल फॉर्म्स इनकी मैं आपको बता रहा हूं। लेकिन आप इतना भी लिख दोगे तो चलता है। बट फुल फॉर्म लिख दोगे तो मजा ही आ जाएगा। ठीक है? महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट। स्वर्ण जनती शहरी रोजगार योजना, प्राइम मिनिस्टर रोजगार योजना। इस तरीके की स्कीम्स। ठीक है बेटा? परफेक्ट सर।
अब आ रहा है बजट के क्या-क्या कॉम्पोनेंट्स होते हैं। कॉम्पोनेंट्स की बच्चों अगर मैं बात करूं तो मैंने आपको पहले ही बताया देखो कि मेजर तो दो कॉम्पोनेंट्स हैं। कितना पैसा आ रहा है, कितना पैसा जा रहा है। है ना? भाई जो पैसा आ रहा है उसको बोलूंगा रिसीप्ट्स। जो पैसा हमारे पास से जा रहा है उसको बोलूंगा एक्सपेंडिचर्स। अब इन दोनों को ना दो-दो पार्ट्स में तोड़ा गया है। रेवेन्यू कैपिटल, रेवेन्यू कैपिटल। तो पहले रेवेन्यू वाला कॉम्पोनेंट क्या है? रेवेन्यू वाला जो कॉम्पोनेंट है उसमें है रेवेन्यू रिसीप्ट्स एंड रेवेन्यू एक्सपेंडिचर्स। ये क्या है? मैं तुम्हें अभी सारा समझा रहा हूं। ठीक है? लेकिन पहले है रेवेन्यू रिसीप्ट्स, रेवेन्यू एक्सपेंडिचर्स। ऐसे ही कैपिटल वाला कॉम्पोनेंट। कैपिटल वाला कॉम्पोनेंट कौन सा है? कैपिटल रिसीप्ट्स एंड कैपिटल एक्सपेंडिचर्स। ठीक है? ठीक है सर। बस तुम्हें इतना याद रखना है। सही है?
अब आ गया देखो रिसीप्ट्स पे। रिसीप्ट्स यानी सरकार जहां से पैसा कमाएगा। कितनी रिसीप्ट्स हैं? दो रिसीप्ट्स हैं। रेवेन्यू रिसीप्ट्स कैपिटल रिसीप्ट्स। ठीक है? अब यहां से तुम्हें मैं सारी चीजें समझाता हूं। देखो रिसीप्ट्स दो रेवेन्यू एंड कैपिटल रेवेन्यू रिसीप्ट्स एंड कैपिटल रिसीप्ट्स। ठीक है? देखो रेवेन्यू रिसीप्ट्स कौन सी रिसीप्ट्स हैं? रेवेन्यू रिसीप्ट मेरी जान वो रिसीप्ट्स हैं जिसमें दो चीजें लगेंगी। नीदर नॉर। ये ध्यान रखना। रेवेन्यू के साथ नीदर नॉर लगता है। और कैपिटल के साथ लगेगा ईदर और। ठीक है? सर ये नीदर नॉर ये क्या है? अंग्रेजी नहीं समझो। पैसा कब आएगा तुम्हारे पास? पैसा तब आएगा बेटा या तो तुम कोई एसेट बेचो। तुम्हारा एसेट कोई कम हो या तो तुम बोरो वगैरह कर लो। लोन-वोन ले लो तब भी पैसा आ जाएगा। तो जनरली रिसीप्ट का नेचर क्या होता है? ये या तो एसेट कम होता है या लायबिलिटी बढ़ती है। ऐसा कुछ होता है। अब रेवेन्यू रिसीप्ट में ये दोनों ही नहीं होंगे। नीदर नीदर डिक्रीज इन एसेट नॉर इंक्रीस इन लायबिलिटी। देखो रेवेन्यू रिसीप्ट वो रिसीप्ट्स हैं जिससे ना तो एसेट कम होगा ना लायबिलिटी बढ़ेगी। कैपिटल कौन सी है? व्हिच इदर कॉजेज़ अ डिक्रीज इन एसेट्स और कॉसेज़ एन इंक्रीज़ इन लायबिलिटी। तो ये चीज दिमाग में बिठाओ। रेवेन्यू रिसीप्ट्स कौन सी है? व्हिच नीदर क्रिएट्स अ लायबिलिटी नॉर रिड्यूसेस एनी एसेट ऑफ द गवर्नमेंट। सिमिलरली कैपिटल कौन सी है? व्हिच इदर क्रिएट्स अ लायबिलिटी और रिड्यूसेस द एसेट ऑफ़ द गवर्नमेंट। ठीक है?
अब सर इसके एग्जांपल्स बताओ। देखो एग्जांपल देखो। रेवेन्यू में सबसे पहले टैक्सेस ले लो। भाई सरकार जो तुम्हारे से टैक्स लेती है, सरकार के लिए रिसीप्ट है ना। अब जो टैक्स लेती है उससे कोई गवर्नमेंट का एसेट थोड़ी कम होता है ना ही गवर्नमेंट की कोई लायबिलिटी बढ़ती। टैक्स कोई वापस करती है जो लायबिलिटी बढ़ रही है। ऐसा तो कुछ नहीं है। टैक्सेस ले लो। सरकार आपसे फीस लेती है हर चीज की। भाई कोई भी सर्टिफिकेट लेना है, रजिस्ट्रेशन लेना है। हर चीज की तो फीस है। आधार बनवाना है, आधार पे कुछ काम करना है, चेंज कराना है, उस पे भी एक बेसिक सी फीस रखी हुई है। हर चीज पे फीस, दुनिया भर के फाइन, दुनिया भर की चालानंस, पेनल्टीज। तो कितनी सारी ये चीजें हैं बेटा? ये सारी रेवेन्यू रिसीप्ट्स हैं। ठीक है? एक पॉइंट और रेवेन्यू में ध्यान रखना। एक तो ये पॉइंट हो गया। दूसरा रेवेन्यू ना रेकरिंग होते हैं। रेकरिंग का मतलब होता है बार-बार बार-बार। सरकार को टैक्सेस मिलते ही रहते हैं। सरकार को फीस, फाइन, पेनल्टीज मिलती ही रहती हैं। ठीक है? कैपिटल में या तो यह और नॉन रेकरिंग। नॉन रेकरिंग का मतलब होता है बेटा कभी-कभी। कभी-कभी वाली चीजें हैं सरकार के लिए कैपिटल रिसेप्ट्स। अब इसमें क्या-क्या आता है? इसमें आता है लोन लेना। ठीक है? जैसे लोनस हो गए। बोरोइंग्स हो गई है ना? लोन लेना या लोन को चुका देना। रीपेमेंट ऑफ लोन। भाई अगर लोन ले लिया तो लायबिलिटी बढ़ गई। लोन चुका दिया। ठीक है? तो उस केस में क्या होगा? रीपेमेंट मत लिखो। रिकवरी लिखो। रिकवरी। रीपेमेंट तो एक्सपेंडिचर हो गया। रिकवरी ऑफ़ लोंस। ये रिकवरी ऑफ़ लोन कौन लोन चुका रहा है? हमने किसी को लोन दिया हुआ था। उसने चुका दिया। तो हमने अगर किसी को लोन दिया हुआ था तो बेसिकली वो हमारे लिए एसेट था। मैंने आपको लोन दे दिया। मेरे लिए एसेट है। मुझे आपसे पैसा लेना है। आपने दे दिया मुझे वो पैसा वापस। पैसा आ गया लेकिन मेरा एसेट तो कम हो गया। तो बोरोइंग्स हो गया। रिकवरी ऑफ़ लोन हो गया और कुछ अदर रिसीप्ट्स भी होती हैं। वो सब कैपिटल रिसीप्ट्स में आ जाती हैं। तो सरकार के लिए बेटा जो रिसीप्ट्स हैं वो ये पूरा आपको मैंने चार्ट के थ्रू समझाया। रिसीप्ट वो हैं जिससे या तो एसेट कम होता है या लायबिलिटी बढ़ती है। रेवेन्यू रिसीप्ट में इसमें से कुछ भी नहीं होता। नीदर नॉर कैपिटल में इन दोनों में से कोई एक जरूर होगा। तो इसको याद कैसे रखते हैं बेटा? रिसीप्ट्स में आर एन सी ई रेवेन्यू में नीदर नॉर, कैपिटल में इदर ऑर। आरएनसीई याद रखना। और यह जनरल नेचर तो तुम कॉमन सेंस से समझ ही सकते हो। पढ़े? चलो।
रेवेन्यू रिसीप्ट्स, कैपिटल रिसीप्ट्स। बोरोइंग्स, रिकवरी ऑफ़ लोंस, अदर रिसीप्ट्स। रेवेन्यू में टैक्सेस हो गई, फिर नॉन टैक्स हो गए। इसका स्क्रीनशॉट लो। इनको डिटेल में पढ़ाता हूं। डन। हां सर। रेवेन्यू रिसीप्ट्स रेफर्स टू दोज़ रिसीप्ट्स व्हिच नीदर क्रिएट एनी लायबिलिटी ना लायबिलिटी बनेगी नर कॉज एनी रिडक्शन इन द एसेट्स ऑफ द गवर्नमेंट। ना एसेट कम होंगे। दीज़ आर रेगुलर इन नेचर। बार-बार होंगी एंड रिसीव्ड इन द नॉर्मल कोर्स ऑफ़ बिज़नेस। सही है? परफेक्ट। इतना ही पढ़ना है बस।
उसके बाद दो सोर्सेस हैं बेटा। कौन-कौन से दो सोर्सेस हैं? सरकार को जो रेवेन्यू होता है वो या तो टैक्सेस से होता है या अदर सोर्सेस से होता है। जो टैक्स से होता है उसको टैक्स रेवेन्यू बोलते हैं। जो अदर सोर्सेस से होता है उसको नॉन टैक्स रेवेन्यू बोलते हैं। इधर से खड़े हो के पढ़ाता हूं। जो टैक्स से होगा वो टैक्स रेवेन्यू। जो अदर सोर्सेस से होगा वो नॉन टैक्स रेवेन्यू। ठीक है? टैक्स रेवेन्यू कौन सा है बेटा? टैक्स रेवेन्यू वो टोटल रेवेन्यू है जो सरकार को टैक्सेस से कलेक्ट हुआ। जो गवर्नमेंट ने आपसे टैक्सेस लिए उससे जो भी सरकार को पैसा कलेक्ट हुआ उसको टैक्स रेवेन्यू बोल देते हैं बेटा। सही है? दो प्रकार के टैक्सेस होते हैं। डायरेक्ट और इनडायरेक्ट। ये समझने वाला पॉइंट है। देखो बड़े ध्यान से समझाता हूं तुम्हें। डायरेक्ट और इनडायरेक्ट का क्या मतलब है? बच्चों, डायरेक्ट टैक्स वो टैक्स है सबसे पहले जो आपका टैक्स आप ही को भरना है। सर आपका टैक्स आप ही को भरना है। मतलब हमारा टैक्स तो हम ही भरते हैं। कोई और थोड़ी भरता है। कोई और भी भरता है आपका टैक्स। सर वो कैसे? देखो समझो फॉर एग्जांपल मैं एक चश्मा सेलर हूं। लेट्स सपोज मैं चश्मा बेचता हूं। अब ये चश्मा मैं बेचता हूं ₹1000 का और गवर्नमेंट ने मुझे बोला कि भाई इस चश्मे पे तुम्हें ₹100 का टैक्स भी देना पड़ेगा। अगर तुम्हें बेचना है तो उस टैक्स को हम सेल टैक्स बोलते हैं। आज तो जीएसटी बोलते हैं। पहले सेल टैक्स बोलते थे। तो मैंने कहा सर ₹1000 का मैं बेचता हूं। ₹100 अगर सरकार को दे दूंगा तो मेरी जेब में तो ₹900 आएंगे। तो क्यों ना मैं इसको ₹100 कर दूं। भाई 1000 तो मुझे चाहिए ना। मैं इसमें ₹100 और जोड़ दूं जो टैक्स के हैं तो कस्टमर से ही ₹100 ले लेता हूं ना और ₹100 सरकार को दे दूंगा इसमें से। तो मैंने सिंपली क्या करा जो मेरा टैक्स था वो कस्टमर से ले लिया। यानी एक टैक्स वो है जिसका बोझ मेरे पे था लेकिन मैंने उसको शिफ्ट कर दिया। कस्टमर से ले लिया। इसको बोलूंगा इनडायरेक्ट टैक्स। इसको क्या बोलूंगा? इनडायरेक्ट टैक्स। टैक्स मेरा भरा किसी और ने। जीएसटी में ऐसे ही तो होता है। जीएसटी अल्टीमेटली सेलर पे लग रहा होता है। आप भर रहे होते हो। आप किसी भी पिज़्ज़ा शॉप पे जाओ बढ़िया सी पिज़्ज़ा शॉप, रेस्टोरेंट वो आपसे जीएसटी भी ले लेते हैं। जबकि जीएसटी लगा तो उन पे था, भरा तुमने तो ये एक इनडायरेक्ट टैक्स है। लेकिन अगर मेरा इनकम टैक्स होगा, मेरा प्रॉपर्टी का कोई टैक्स होगा, मेरा वेल्थ टैक्स होगा वो तो मुझे ही भरना है ना बाबा। वो तो किसी और से नहीं ले सकता। उसको डायरेक्ट टैक्स बोलते हैं बेटा। तो दो टैक्सेस हैं। मेरा टैक्स मुझे ही भरना है। डायरेक्ट। मेरा टैक्स आप भर दोगे इनडायरेक्ट। मेरा टैक्स इनकम प्रॉपर्टी पे लगा डायरेक्ट। गुड्स और सर्विसेज पे लगा इनडायरेक्ट। समझे या नहीं समझे? यही है मेन चीज। तो देखो डिफरेंस नहीं लिखा क्या मैंने? लिखा है। देखो बेटा हमारे पास सबसे पहले लिखा हुआ है डायरेक्ट टैक्स किस पे लगेगा? भाई डायरेक्ट टैक्स लगेगा इंडिविजुअल्स पे और कंपनीज़ पे। इनडायरेक्ट टैक्स किस पे लगेगा? गुड्स पे और सर्विसेज पे। ठीक है? बर्डन ऑफ डायरेक्ट टैक्स शिफ्ट नहीं हो सकता। मेरा टैक्स मुझे ही भरना है। बर्डन ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स शिफ्ट हो सकता है। यानी कि था तो इनडायरेक्ट वो यानी कि
मेरा मेरे ऊपर था, लेकिन मैंने आगे शिफ्ट कर दिया। उसके बाद ये प्रोग्रेसिव होते हैं बच्चों। प्रोग्रेसिव का मतलब मैंने आपको अभी बताया ना, ज्यादा इनकम होगी तो ज्यादा इनकम टैक्स। कम इनकम होगी तो कम इनकम टैक्स। यानी कि आपकी इनकम के साथ टैक्स भी बढ़ता चला जाएगा। इसमें ऐसा कुछ नहीं है। ये प्रोपोर्शनल है। इसमें कुछ नहीं पता आपको। कोई बहुत भारी चीज पे कम टैक्स हो सकता है। बहुत हल्की चीज पे ज्यादा टैक्स हो सकता है। तो ये प्रोपोर्शननेट होता है। इसका कुछ नहीं पता। ठीक है?
उसके बाद इसकी लिमिटेड रीच है बेटा। लिमिटेड क्यों है? क्योंकि देखो हमारे देश में ₹12 लाख पर एनम तक की इनकम तक पे तो टैक्स ही नहीं है। तो अगर आप लाख महीना भी कमाते हो, तब भी आपको कोई इनकम टैक्स नहीं देना अल्टीमेटली। तो हर सेक्शन ऑफ द सोसाइटी तो ये भर ही नहीं रहा। लेकिन इसकी कवरेज बहुत बड़ी है। जीएसटी तो सभी भर रहे हैं। कहीं ना कहीं भाई तुम एक टॉफी भी लेने जाओगे ना ₹2 की, एक चॉकले भी लोगे ना ₹5 की, उसमें भी टैक्स है। इंक्लूसिव ऑफ़ ऑल टैक्सेस है वो। तो इसका कवरेज बहुत वाइड है। बहुत बड़ा कवरेज है बेटा। ठीक है?
तो ये तो इंडिविजुअल्स और कंपनीज़ के लिए है। ये गुड्स और सर्विज पे है। ये शिफ्ट नहीं हो सकता। ये शिफ्ट हो सकता है। ये प्रोग्रेसिव है। ये प्रोपोर्शनल है। ये छोटी कवरेज है। ये वाइड कवरेज है। एग्जांपल लिख देना। इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स। इसके एग्जांपल हो जाएंगे जीएसटी।
अब आ जाती है बेटा नॉन टैक्स रेवेन्यू रिसीप्ट्स। सर नॉन टैक्स रेवेन्यू रिसीप्ट्स कौन-कौन सी होंगी? बेटा देखो, जो टैक्स नहीं है लेकिन फिर भी सरकार के लिए रेवेन्यू ही है। यानी ना तो लायबिलिटी क्रिएट करेंगी, ना एसेट कम करेंगी। जैसे इंटरेस्ट। भाई सरकार ने क्या करा हुआ है? बहुत सारे लोन बांटे हुए हैं। उस लोन पर सरकार को इंटरेस्ट मिल रहा है। तो जो इंटरेस्ट है, गवर्नमेंट रिसीव्स इंटरेस्ट ऑन लोन गिवेन बाय इट टू स्टेट गवर्नमेंट, यूनियन टेरिटरीज, प्राइवेट एंटरप्राइजेस, जनरल पब्लिक है ना? तो जो इंटरेस्ट सरकार को मिल रहा है, वो सरकार के लिए एक रेवेन्यू रिसीप्ट है। ना तो लायबिलिटी बढ़ रही, ना एसेट कम हो रहा है ना?
इसी तरीके से प्रॉफिट्स एंड डिविडेंड। सरकार की बहुत सारी पब्लिक सेक्टर अंडरटेिंग्स हैं। बहुत सारी कंपनीज़ चल रही हैं जो बिजनेस कर रही हैं। वहां से पैसा आ रहा है। अब जो पैसा आ रहा है, उससे लायबिलिटी थोड़ी बढ़ रही है। ना ही कोई एसेट कम हो रहा, तो वो भी सरकार के लिए एक रेवेन्यू रिसीप्ट है। लेकिन नॉन टैक्स है। टैक्स के फॉर्म में तो नहीं आ रहा ये। तो इंटरेस्ट हो गया। प्रॉफिट्स हो गए। फीस हो गई। सरकार किस चीज की फीस लेती है बेटा? हर तरीके की फीस। कोर्ट फीस, रजिस्ट्रेशन फीस, इंपोर्ट फीस। बहुत सारी सर्विज जो सरकार आपको देती है, उसके लिए आपसे फीस चार्ज करती है। वो सरकार के लिए एक रेवेन्यू रिसीप्ट है। उसके बाद बच्चों हमारे पास लाइसेंस फीस। ये तो फीस में ही आ गया, तो इसको अलग से लिखने की जरूरत नहीं है। फाइन एंड पेनल्टीज। भाई कुछ भी गड़बड़ करोगे, कोई रूल्स को रेगुलेशंस को नहीं मानोगे, तो उस पे फाइन लगना, पेनल्टी लगना, ये सब बेटा इधर आ जाता है। दे रेफर्ड टू दोज़ रिसीप्ट्स, दोज़ रिसीप्ट्स व्हिच आर रिसीव्ड फ्रॉम द लॉ ब्रेकर्स। भाई जो पेनल्टीज तुमने लगाई किस पे? लॉ ब्रेकर्स पे। उनसे जो तुम्हें रिसीव हुई, वो बेसिकली क्या है? गवर्नमेंट के लिए तो रेवेन्यू रिसीप्ट है। फाइन पेनल्टीज गवर्नमेंट को रेगुलरली मिलती रहती है। कोई ना कोई बिना हेलमेट के रेड लाइट क्रॉस करेगा, ओवरस्पीडिंग करेगा। और भी 100 प्रकार के चालान हैं। वो सब सरकार के लिए रेवेन्यू रिसीप्ट है।
एस चीट। ये इंपॉर्टेंट है बेटा। एस चीट एक नंबर में पूछ लेता है। साउथर्न इंडिया सर एस चीट क्या होता है? एस चीट का मतलब होता है बच्चों, द क्लेम ऑफ द गवर्नमेंट ऑन द प्रॉपर्टी ऑफ अ पर्सन। भाई किसी इंडिविजुअल की संपत्ति है और वो इंडिविजुअल चल बसा, तो वो संपत्ति किसके नाम हो जाएगी? सरकार उसको एक्वायर कर लेगी। सरकार उसको एक्वायर करके उसको बेचेगी। पैसा रिकवर हो जाएगा गवर्नमेंट के पास। तो जो पर्टिकुलर इंडिविजुअल जो चल बसा और उसका कोई लीगल ईयर नहीं है, कोई वारिस नहीं है फर्दर। भाई वारिस है तो वो संपत्ति उसकी। लेकिन बेसिकली अगर कोई वारिस ही नहीं है, तो फिर वो किसकी हो गई? वो बेसिकली गवर्नमेंट एक्वायर कर लेती है। तो सरकार के लिए ये भी एक रेवेन्यू रिसीप्ट है। ना तो भाई लायबिलिटी बढ़ी, ना एसेट कम हुआ। है ना?
गिफ्ट्स एंड ग्रांट्स। अब मोदी जी घूमने जाते हैं कई जगह। वहां से गिफ्ट गुफ्ट ले आते हैं। वो सब भी रेवेन्यू रिसीप्ट्स हैं। फॉर फीचर। फॉर फीचर भी एक पेनल्टी है। ये जो फाइन एंड पेनल्टीज़ है ना, इसी का पार्ट है ये भी। यह एक पेनल्टी है। अगर आप कोर्ट का ऑर्डर नहीं मानते तो। कोर्ट ने आपको कोई आदेश दिया, आपने नहीं माना। कोर्ट आपके ऊपर सीधा पेनल्टी लगाएगा, क्योंकि कोर्ट को तो मानना पड़ेगा ना। आपको नहीं मानोगे, पेनल्टी लगेगी। वो भी रिसीप्ट है। ठीक है?
इसके बाद स्पेशल असेसमेंट। स्पेशल असेसमेंट क्या होता है बेटा? जैसे कोई लैंड है। ठीक है? उस लैंड की एक वैल्यू है। अब उसके आसपास कोई सरकार ने बहुत बड़ी डेवलपमेंट कर दी। अब अगर उसके आसपास सरकार ने कोई बहुत बड़ी डेवलपमेंट कर दी, तो उस सिनेरियो में बेटा, उस सिनेरियो में उस लैंड की भी वैल्यू बढ़ जाएगी। तो सरकार बोलती है भैया, ये जो वैल्यू बढ़ी, ये हमारी डेवलपमेंट की वजह से बढ़ी, तो हमें भी इसका एक वैल्यू मिलना चाहिए। तो सीधा नोटिस जाता है कि इतना अमाउंट हमें दे दो। तो सरकार के लिए वो भी रिसीप्ट है। है ना? अब ये जो सरकार को रिसीप्ट मिल रही है, स्पेशल असेसमेंट के केस में कोई लोन थोड़ी ना है। लायबिलिटी थोड़ी बढ़ रही है, ना एसेट कम हो रहा। तो ये भी रेवेन्यू रिसीप्ट है, लेकिन ये नॉन टैक्स है। ठीक है? बढ़िया सर।
फिर टैक्स और नॉन टैक्स में फर्क। टैक्स वो है जो सरकार को टैक्स रेवेन्यू से होगा जनरेट या अदर सोर्सेस से होगा। टैक्स एक कंपलसरी पेमेंट है जो करना ही पड़ता है। नॉन टैक्स कंपलसरी नहीं है। गवर्नमेंट कुछ सर्विज देती है, उसके बदले में आपको मिलता है। है ना? बेनिफिट कोई डायरेक्ट बेनिफिट टैक्स भरने वाले को नहीं मिलता। मतलब डायरेक्टली सरकार अगर आप मैं भी टैक्स भर रहा हूं, तो डायरेक्टली मुझे कुछ नहीं मिल रहा। इनडायरेक्टली बहुत सारी चीजें मिल रही है। है ना? तो डायरेक्टली कि गवर्नमेंट मेरे घर आके कोई चीज देके जाएगी, ऐसा नहीं होता। इसमें सर्विज के बदले में दी जाती हैं। ये सारी की सारी पेमेंट्स। फिर एग्जांपल्स आ गए।
फिर कैपिटल रिसीप्ट्स है बच्चों। कैपिटल तो आपको पता ही है। ईदर ऑ या तो लायबिलिटी बनेगी या एसेट कम होगा। द रिसीप्ट्स व्हिच इदर क्रिएट अ लायबिलिटी और कॉज अ रिडक्शन इन द एसेट ऑफ द गवर्नमेंट। ये नॉन रेकरिंग होंगी बेटा। ठीक है सर। इसमें क्या-क्या आता है? इसमें देखो बोरोइंग्स। बोरोइंग्स का मतलब आपने लोन ले लिया सीधा भाई। लोन ले लिया तो पैसा तो आ रहा है, लेकिन लायबिलिटी है। मुझे वापस चुकाना है। है ना? तो सबसे पहले तो आ गया बोरोइंग्स। दीज़ आर द फंड्स रेज़्ड बाय गवर्नमेंट टू मीट एक्सेस एक्सपेंडिचर। अब कहां-कहां से लोन लेती है गवर्नमेंट? जनता से, आरबीआई से, फॉरेन गवर्नमेंट से। अलग-अलग जगह से गवर्नमेंट लोन लेती है। तो ये भी रिसीप्ट है, बट नॉन रेकरिंग है। रोज-रोज़ नहीं लेती। दूसरा इससे लायबिलिटी बनती है। तो ये एक कैपिटल रिसीप्ट है।
देन रिकवरी ऑफ़ लोन। रिकवरी ऑफ़ लोन का मतलब हमने किसी को लोन दिया हुआ था। वो एसेट था। वहां से रिकवर हो गया। एसेट कम हो जाएगा यार। है ना? गवर्नमेंट ग्रांट्स वेरियस लोोंस टू द स्टेट गवर्नमेंट और यूनियन टेरिटरीज़। रिकवरी ऑफ़ सच लोन इज़ अ कैपिटल रिसीप्ट।
उसके बाद बेटा कुछ छोटी-मोटी रिसीप्ट्स हैं जैसे डिसइन्वेस्टमेंट्स। सरकार की कोई इन्वेस्टमेंट है, सरकार की कोई एसेट्स हैं उनको बेच के पैसा रिकवर कर लिया। डिसन्वेस्टमेंट। डिसन्वेस्टमेंट रेफर्स टू एक्ट ऑफ सेलिंग अ पार्ट या होल ऑफ द शेयर्स ऑफ पब्लिक सेक्टर अंडरटेिंग्स। जैसे सरकार का सपोज़ कोई एयरलाइन है। अभी बताना मुझे कमेंट सेक्शन में कौन सा एयरलाइन गवर्नमेंट ने सेल करा। तो गवर्नमेंट का वो एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेिंग का पार्ट था। गवर्नमेंट ने उसको सेल कर दिया। या एक प्राइवेट एंटरप्रेन्योर प्राइवेट कंपनी को, वहां से पैसा रिकवर कर लिया। रिसीप्ट है, लेकिन रोज-रोज़ ऐसा नहीं होता और इससे एसेट कम हो रहा है। तो ये कैपिटल रिसीप्ट है। ठीक है? इसको बोलते हैं डिसइन्वेस्टमेंट।
उसके बाद स्मॉल सेविंग्स। स्मॉल सेविंग्स का मतलब होता है बेटा पोस्ट ऑफिस वगैरह में जनता अपना पैसा जमा करती है। अब पोस्ट ऑफिस सरकार ही है। जनता अपना पैसा आके जमा कर रही है। उसके बदले में जनता को कुछ इंटरेस्ट मिल जाता है नॉमिनल सा। लेकिन सरकार के पास तो एक अमाउंट अच्छा रिसीव हो गया ना। लेकिन वो सरकार अपने पास रख नहीं सकती। कि वो वापस करना पड़ेगा। है तो लायबिलिटी, बट फिर भी पैसा तो आ रहा है ना एक बार। उसको भी हम कैपिटल रिसीप्ट में ही मान देते हैं। अदर रिसीप्ट्स में स्मॉल सेविंग्स। स्मॉल सेविंग्स रेफर्स टू फंड्स रेज़्ड फ्रॉम पब्लिक इन द फॉर्म ऑफ पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट्स बोल देते हैं। कुछ गवर्नमेंट की स्कीम्स होती है जैसे नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, किसान विकास पत्र कि कुछ टाइम के लिए पैसा जमा करो, फिर हमसे एक बड़ा अमाउंट ले लेना। ऐसी चीजें। ठीक हो गया बेटा?
रेवेन्यू और कैपिटल में डिफरेंस। रेवेन्यू आर एमसीई नीदर क्रिएट लायबिलिटी नर रिड्यूस द एसेट। ईदर क्रिएट लायबिलिटी और रिड्यूस द एसेट। रेगुलर इर्रेगुलर। कोई फ्यूचर ऑब्लिगेशन नहीं है इसमें। फ्यूचर ऑब्लिगेशन होता है। बढ़िया परफेक्ट सर।
अब आ गया खर्चे। खर्चे बता दूं अब तुम्हें फटाफट से। आ जाओ सर। जैसे रिसीप्ट्स लिखा था ना, ऐसे ही एक्सपेंडिचर्स लिखो। एक्सपेंडिचर्स बच्चों, एक्सपेंडिचर भी दो तरीके के। ये तो बहुत आसान है। रिसेप्ट्स में तो काफी कुछ था पढ़ने के लिए। इसमें नहीं है। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, कैपिटल एक्सपेंडिचर। फिर से आर एनसीई। रेवेन्यू के साथ नीदर नॉर, कैपिटल के साथ ईदर और। एक्सपेंडिचर का नेचर क्या है? खर्चा जब होता है, या तो लायबिलिटी कम होती है या एसेट बनता है। उसका उल्टा। भाई खर्चा करोगे तो एसेट बनेगा ना कोई ना कोई है ना? और या फिर लायबिलिटी चुका रहे हो तुम। तभी तुम्हारी जेब से पैसा जा रहा है। तो यहां पे क्या बोलूंगा? नीदर क्रिएट एन एसेट। ना तो एसेट बनेगा, नर रिड्यूस अ लायबिलिटी। ना तो एसेट बनेगा, ना लायबिलिटी कम होगी। कैपिटल में क्या होगा? ईदर क्रिएट एन एसेट। या तो एसेट बनेगा, और रिड्यूस अ लायबिलिटी। या एक लायबिलिटी कम हो जाएगी। ठीक है? अब समझो। रेवेन्यू में बेटा नीदर नॉर। कैपिटल में बेटा ईदर ऑर। ठीक है?
अब देखो रेवेन्यू एक्सपेंडिचर फिर से रेकरिंग होगा। रेकरिंग का मतलब होता है बार-बार बार-बार बार-बार। कैपिटल नॉन रेकरिंग होगा। कभी-कभी कभी-कभी कभी-कभी। ठीक है? जैसे सर जैसे जैसे सरकार ने करा बिल्डिंग एन एसेट। कोई एसेट बिल्ड करा। कौन सा एसेट बिल्ड करा? रोड बनाया, डैम बनाया, ब्रिज बनाया, हॉस्पिटल बनाया, स्कूल बनाया, कुछ भी बनाया। तो एक एसेट क्रिएट होगा। कैपिटल एक्सपेंडिचर। ठीक है? अब इसके अंदर जितना भी स्टाफ है, उनकी सैलरी, पेमेंट ऑफ सैलरीज़। ये रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। भाई ना तो इससे कोई एसेट बन रहा, ना कोई लायबिलिटी कम हो रही। खर्चा है, करना तो है ही। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। तो ये जो है ना बेसिकली रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, ये गवर्नमेंट के नॉर्मल फंक्शनिंग में खर्चे होते हैं। सैलरीज देनी है, कोई रिपेयर मेंटेनेंस कराना है ऑफिस का। सरकारी अफसरों के अलग-अलग खर्चे पे करने हैं। इलेक्ट्रिसिटी बिल चुकाने हैं। वो सब खर्चा तो आ ही रहा है। सब रेवेन्यू एक्सपेंडिचर है।
कैपिटल में क्या है भाई? या तो तुम कोई एसेट बना रहे हो, या लायबिलिटी कम हो रही हो। लायबिलिटी कब कम होती है? रीपेमेंट ऑफ लोंस। तुमने जो लोन लिए हुए थे, वो चुका दिए। जेब से पैसा जा रहा है। लायबिलिटी कम हो रही है। ये फिर से रेकरिंग, ये नॉन रेकरिंग। सिंपल आया समझ में? लो स्क्रीनशॉट।
एक्सपेंडिचर रेफर्ड टू एस्टीमेटेड एक्सपेंडिचर ऑफ़ द गवर्नमेंट ड्यूरिंग अ गिवन फिस्कल ईयर। दो प्रकार का रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर कौन सा है? रेवेन्यू एक्सपेंडिचर रेफर्स टू द एक्सपेंडिचर व्हिच नीदर क्रिएट एनी एसेट। ना तो एसेट बनेगा, नॉर रिड्यूस अ लायबिलिटी ऑफ़ द गवर्नमेंट। ना लायबिलिटी कम होगी। इट इज़ रेकरिंग इन नेचर। ये रेकरिंग नेचर का होगा बेटा। इट इज़ इंकर्ड ऑन नॉर्मल फंक्शनिंग ऑफ़ द गवर्नमेंट। मैंने बता दिया आपको। जैसे सैलरी देना, पेंशन देना, इंटरेस्ट देना, एडमिनिस्ट्रेशन पे खर्चे करना। ये सब। ठीक है बेटा? ये भी आपको बता दिया।
कैपिटल एक्सपेंडिचर कौन सा होगा? चलो बताओ। ईदर क्रिएट एन एसेट। या तो एसेट बनाएगा, या लायबिलिटी कम करेगा। है ना? अब इसमें क्या-क्या चीजें आ जाएंगी? इसमें बेटा आपका मेनली जो आ जाती है, वो आ जाती है रीपेमेंट ऑफ बोरोइंग्स। ये लोन चुका देना। एक्विजिशन ऑफ कैपिटल एसेट्स। एसेट्स खरीदना। इस पे ये आ जाता है। तो रेवेन्यू एक्सपेंडिचर नीदर क्रिएट एनी एसेट, नर रिड्यूस एनी लायबिलिटी। कैपिटल एक्सपेंडिचर ईदर क्रिएट एनी एसेट, और रिड्यूस अ लायबिलिटी। ये नॉर्मल फंक्शनिंग पे चलता है सरकार की। ये एसेट्स खरीदने में चलता है। ये रेकरिंग है। ये नॉन रेकरिंग है। डन बेटा जी। सॉर्टेड। क्या बात है? ये समाप्त।
इसके बाद आएगा बेटा बजट कितने प्रकार का हो सकता है? तो तीन प्रकार का। बैलेंस्ड, सरप्लस, डेफिसिट। ये शब्द तुमने बीओपी में भी पढ़े। बैलेंस्ड बजट कब होगा? जब बजट की दोनों साइडें बराबर होंगी। जितना रिसीप्ट, उतना ही एक्सपेंडिचर। उसको बोलूंगा बैलेंस। सरप्लस बजट कब होगा? जब रिसीप्ट ज्यादा, खर्चे कम। बोलूंगा सरप्लस बजट। डेफिसिट बजट कब बोलूंगा? जब खर्चे ज्यादा और रिसीप्ट्स कम। उसको बोलूंगा डेफिसिट बजट। तो तीन प्रकार के बजट हैं। कौन-कौन से तीन प्रकार के बजट हैं? बैलेंस्ड। एक्सपेंडिचर और रेवेन्यूज़ बराबर हो गए। सरप्लस, कमाई ज्यादा, खर्चा कम। डेफिसिट, खर्चा ज्यादा, कमाई कम। ठीक हो गया? परफेक्ट सर। क्या बात है सर। दिस इज़ सॉर्टेड बेटा जी।
अब डेफिसिट्स के ऊपर एक टॉपिक है जिसको डिटेल लगेगी, आधा पौना घंटा कम से कम। इस पे चर्चा कल करेंगे। चैप्टर तुम्हारा 70% खत्म है। ये 30% और है। इसके लिए वेट करो अभी, क्योंकि ये बहुत डिटेल लगेगी इसको पढ़ाने में। समझाने वाली चीज़ है। न्यूमेरिकल भी है इस पे। इसको कल करते हैं और बजट भी हमारा समाप्त। उसी के साथ मैक्रो भी समाप्त। फिर इंडियन इको कराता हूं तुम्हें बेस्ट। ठीक है? थैंक यू सो मच एवरीवन। कीप ग्रोइंग, कीप ग्लोइंग एंड कीप स्माइलिंग। [संगीत]