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Zaalim Badshah Aur Badqismat Shahzadi Ka Anokha Waqia || Moral Stories in Urdu & Hindi

VibeElevate28:18

Transcription

एक दफा का जिक्र है। एक सुल्तान था जिसमें एक बुरी आदत थी। वह बेटियों से सख्त नफरत करता था। अल्लाह की कुदरत कि उसके यहां पहले बेटा पैदा हुआ जिसे वह बहुत अजीज रखता था और जिसकी परवरिश बड़े नाजो नियम और प्यार से हो रही थी।

चंद साल बाद मलका फिर उम्मीद से हो गई। विलादत के दिन करीब थे। लेकिन सुल्तान को किसी दूसरे मुल्क के बादशाह की दावत में जाना पड़ा। जाने से पहले सुल्तान ने मलका को हुक्म दिया कि अगर मेरे आने से पहले विलादत हो बेटा हुआ तो ठीक है लेकिन अगर लड़की हुई तो उसे हल्लाक कर देना।

सुल्तान चला गया। चंद हफ्तों बाद मलका के यहां एक लड़की की विलादत हुई। मलका रोने लगी। ऐ अल्लाह अब मैं क्या करूं? विलादत के वक्त एक दाइयां मौजूद थी जो मलका की हालत झार देख रही थी। अल्लाह ने उसके दिल में रहम पैदा किया। उसने मलका से कहा ए मलका आप दिल छोटा मत करें मैं यहां से सबके सामने बच्ची को हलाक करने के बहाने से ले जाऊंगी पर मैं यहां से इसे अपने घर ले जाकर पालूंगी अगर आप किसी तरह से बच्ची के लिए खर्च वगैरह भेजती रहेंगी तो आपकी बच्ची खुशहाल और आसूदा होगी वरना मुझ गरीब को जो नसीब होगा उससे इसे भी पालने की कोशिश करूंगी।

मलका ने कुछ सोना, चांदी, जेवरात वगैरह बच्ची के वास्ते थमा दिए और बच्ची को दाया के हवाले कर दिया। महल में यह बात फैलाई गई कि दाइयां ने बच्ची को ले जाकर हलाक कर दिया है। जबकि दाइयां ने शहजादी को अपने घर लाकर पूरे नाजो नियम से उसकी परवरिश शुरू कर दी।

जब सुल्तान सफर से वापस आया तो उसे यही अहवाल सुनाया गया कि आपके जाने के बाद बच्ची की विलादत हुई और आपके हुक्म के मुताबिक उसे हलाक कर दिया गया। सुल्तान अपनी बुरी आदत के बास खुश हुआ।

दाइयां लोगों के सामने उसे अपनी नवासी जाहिर करती। कभी कभार सुल्तान से छिपछिपाकर शहजादी को लाती और मलका अपनी बेटी को देखकर उसकी ममता को करार मिलता और वह दाइयां को सोना चांदी अपनी बेटी की देखभाल के वास्ते दे दिया करती। शहजादी की परवरिश अच्छे तरीके से हो रही थी। इसलिए वह खूब कदगांठ निकाली और खूबसूरत थी ही। लिहाजा जवान होते ही दुनिया के सामने शहजादी ना होते हुए भी शहजादों की तरह दिखने लगी।

एक दिन सुल्तान की सवारी शहर से गुजर रही थी। उसी वक्त शहजादी और दाइयां भी उसी रास्ते से गुजर रही थी। सुल्तान की नजर शहजादी पर पड़ी। पूछा यह कौन है? वजीर ने कहा यह इस बेचारी औरत की नवासी है। सुल्तान ने हुक्म दिया मुझे यह बहुत पसंद आई है। कल इसके घर मेरे लिए रिश्ता लेकर जाना। क्योंकि हकीकत का किसी को पता नहीं था। इसलिए दूसरे दिन वजीर वकील वगैरह दाइयां के घर सुल्तान के लिए उसकी नवासी का हाथ मांगने गए।

अब दाइयां के ओसान खत्म हो गए कि या अल्लाह अब क्या करूं? उसने साफ इंकार करते हुए कहा मैं एक गरीब हूं। मेरी नवासी सुल्तान के लायक नहीं और ना ही सुल्तान का किसी गरीब से रिश्ता जोड़ना सही है। इसलिए दोबारा इस सिलसिले में मेरे घर मत आना। सुल्तान खुद तो नहीं आया लेकिन दाइयां के घर रिश्ते के लिए बहुत बंधे भेजे। सब ने दाइयां से बहुत मिन्नत समजत की। लालच दिए, धौस धमकी दी। लेकिन दाइयां टस से मस नहीं हुई।

तब सुल्तान ने हुक्म दिया कि दाइयां को पकड़ के खूब सजा दे दो ताकि वह रिश्ते के लिए मान जाए। सिपाही दाइयां को पकड़ कर सुल्तान के सामने लाए और उन्होंने उसे खूब कूट-कूट कर पीटना शुरू कर दिया। सिपाही ने दाइयां को कपड़े की तरह निचोड़ कर रख दिया। बेचारी पहले से ही दो हड्डियों पर थी। इतनी मार बर्दाश्त ना कर सकी और सुल्तान के सामने चीख पड़ी। सुल्तान सलामत यह कोई और नहीं बल्कि आपकी बेटी है। मैंने इसे हलाक करने से बचाकर अपने घर में परवरिश की है।

अब सुल्तान को एहसास हुआ वह क्या गलती करने जा रहा था। खुदा ने उसे गुनाह-ए अजीम से बचाया। वह और ज्यादा गुस्से में आ गया और अपने बेटे यानी शहजादे को बुलाकर हुक्म दिया कि अपनी बहन को जंगल में ले जाकर कत्ल कर दे और उसकी आंखें निकालकर और गर्दन का खून लाकर मुझे दिखा दे ताकि मुझे यकीन हो जाए।

शहजादा परेशान हुआ कि वह कैसे अपने हाथों से अपनी बहन को कत्ल कर दे। उसकी आंखें निकाल ले और उसकी गर्दन का खून लाकर बाप को दिखा दे। उसे किसी सूरत में गवारा ना था। अगरचे उसे अपनी बहन के मुतलिक कब मालूम हुआ था। लेकिन उसे पता था कि सुल्तान हर सूरत अपनी बेटी को हलाक करना चाहता है। अगर उसने उसे कत्ल नहीं किया तो सुल्तान दोनों को हलाक कर देगा। मजबूर होकर अपनी बहन को साथ लेकर जंगल की तरफ चल पड़ा।

जब दोनों जंगल पहुंच गए तो भाई की मोहब्बत बहन के लिए जोश में आ गई। मैं किसी सूरत तुम्हें अपने हाथों से कत्ल नहीं कर सकता। मैं तुम्हें यहीं छोड़ देता हूं। आगे तुम्हारी किस्मत कि तुम्हें दरिंदे खा जाए या तुम कहीं और निकल जाओ। लेकिन बहन ने भाई का हाथ पकड़ कर कहा, नहीं भाई, तुम मुझे कत्ल कर दो। मेरी आंखें और खून ले जाकर बाप को दिखा दो। नहीं तो वह तुम्हें मार देगा जो मुझे किसी सूरत में गवारा नहीं।

दोनों भाई-बहन एक दूसरे के गले लगकर रो पड़े। आखिर किसी तरह भाई ने बहन को मना लिया और शहजादी आंसू बहाते हुए घने जंगल की तरफ जाने लगी। आखिरी बार पलट कर भाई को देखा और जंगल में घुस गई। उसके बाद शहजादे ने इधर-उधर से ढूंढकर एक हिरण का शिकार किया। उसकी गर्दन का खून निकाला और आंखें निकाल कर ले जाकर सुल्तान को दिखा दी।

सुल्तान ने आईना मंगवाया और उसमें उन आंखों को और अपनी आंखों को गौर से देखा। जब उसको यकीन हो गया आंखों का रंग एक ही है तब उसे तसल्ली हुई। मलका ने किसी तरीके से शहजादे को बुलाकर उससे बेटी के मुतलिक पूछा। शहजादे ने मां के सामने सारा अहवाल घोषगुजार कर दिया। मलका ने आसमान की तरफ मुंह करके हाथ ऊपर उठाए और बेटी के लिए दुआ मांगी कि अल्लाह तू मेरी बेटी की हिफाजत कर। उसे अपनी अमान में रख और उसे किसी अच्छी जगह पार लगा।

अब आगे शहजादी का किस्सा सुनिए। शहजादी जंगल में रहने लगी और भूख मिटाने के लिए जंगली फल फूल खाकर अपना वक्त गुजारने लगी। इस दौरान बहुत सा वक्त गुजर गया। झाड़ियों और कांटों से उलझकर उसके बोसीदा कपड़े तार-तार हो गए। आखिरकार उसके बदन पर कोई कपड़ा ना रहा।

एक दिन किसी और मुल्क का बादशाह अपने लश्कर के साथ उसी जंगल से गुजर रहा था। इत्तफाकन बादशाह उसी तरफ जा निकला जिधर शहजादी थी। जब शहजादी के कानों में किसी घोड़े के कदमों की आहट पड़ी तो जल्दी-जल्दी किसी घने दरख्त पर चढ़ गई और उसके बड़े-बड़े पत्ते तोड़कर अपनी सतरपशी करके छुप कर बैठ गई। बादशाह भी आकर उसी दरख्त के नीचे ठहर गया। दरख्त घना और सायादार था। अपने घोड़े को एक तरफ बांधा और दरख्त के साए में कपड़ा बिछाकर थोड़ी देर सुस्ताने की खातिर लेट गया। क्योंकि उसका मुंह आसमान की तरफ था और वह अपने ख्यालों में घूम था। उसकी नजर दरख्त के घने पत्तों में बोसीदा किसी हैत पर पड़ी। वह उछल कर खड़ा हो गया और बुलंद आवाज से कहने लगा, ऐ अल्लाह की मखलूकम तुम कोई परी हो, फरिश्ता हो, जिन्न हो या कोई इंसान जो भी हो, अपने आप को जाहिर करो। मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा।

शहजादी ने पुकार कर कहा, ऐ मुसाफिर, मैं एक लाचार लड़की हूं। मेरे जिस्म पर कपड़े के नाम पर कुछ भी नहीं है। अगर तुम अपने नीचे बिछी चादर को मेरी तरफ फेंक दो ताकि मैं उसे ढांप कर नीचे उतरूं और तुमसे बातचीत करूं। बादशाह ने अपने नीचे बिछे कपड़े को उठाया। उसका गोला सा बनाकर उसकी तरफ फेंका। शहजादी ने उस कपड़े से अपने जिस्म को खूब अच्छी तरह ढापा और किसी ना किसी तरीके से दरख्त से उतर गई।

जब बादशाह ने शहजादी को देखा तो उसके हवास गुम हो गए। उसके पूरे मुल्क में कोई इतनी खूबसूरत लड़की नहीं थी। पूरे दिलो जान से शहजादी पर फरिफ्ता हो गया। झट शहजादी से कहा, "मैं एक बादशाह हूं। अगर तुम बुरा ना मानो, तो मैं तुमसे शादी करके अपनी मलका बनाना चाहता हूं। अंधा क्या चाहे दो आंखें, शहजादी ने हां भर दी। वह भी एक ऐसा बंदा चाहती थी, जो उसे इज्जत दे। बादशाह खुशी-खुशी शहजादी को लेकर अपने मुल्क रवाना हो गया।

अपने मुल्क पहुंचते ही बादशाह पहले वजीर के घर जा पहुंचा और उसे कहा ऐसा समझो कि यह तुम्हारी बेटी है। मैं कल रिश्ता मांगने आऊंगा और शादी ब्याह रचाकर अपनी अमानत यहां से अपने महल ले जाऊंगा। वजीर ने अदब बजाकर कहा सुल्तान सलामत आप पूरी तरह से तसल्ली रखें। यह आपकी अमानत है और मेरी बेटी जब आपका दिल चाहे इसे ब्याह कर ले जाइए। बादशाह शहजादी को वजीर के घर छोड़ आया। अगले दिन वकील काजी वगैरह बादशाह का रिश्ता लेकर वजीर के घर आ पहुंचे। वजीर ने रिश्ते के लिए हां कर दी। एक-द दिन बाद मंगनी हो गई।

बादशाह शहजादी के इश्क में सब कुछ भूल चुका था। जल्द ही शादी का नोटा भेजा और शहजादी को ब्याह कर अपने महल ले आया। बादशाह और शहजादी अपनी शादी से बहुत खुश थे। इस दौरान बादशाह ने शहजादी से उसके मुताल्लिक कुछ नहीं पूछा था।

चंद साल बाद उसके यहां बेटे की विलादत हुई। बादशाह बहुत खुश था। उसने शहजादी से जो अब मलका बन गई थी पूछा। अब जबकि अल्लाह ने हम दोनों को औलाद नरीना से नवाजा। तुम एक बेटे की मां बन गई हो। अब मुझे बताओ कि तुम कौन हो? किसकी बेटी हो? और किस जगह से तुम्हारा ताल्लुक है? शहजादी ने किसी तरीके से बादशाह को टाल दिया।

माहो साल गुजरते चले गए। बादशाह के यहां दूसरे बेटे की विलादत हुई। बादशाह ने दोबारा शहजादी से वही सवाल दोहराया। शहजादी ने फिर बादशाह को टाल दिया। आखिरकार उनके यहां जब तीसरे बेटे की विलादत हुई तो इस मौके पर बादशाह ने शहजादी की हकीकत मालूम करने के लिए बहुत दबाव डाला। आखिरकार शहजादी मान गई और बादशाह को हकीकत बताई कि वह फला मुल्क के सुल्तान की बेटी है। सुल्तान को किस तरह बेटियों से नफरत थी। उसने किस तरह मुझे मारने का हुक्म दिया और दाया ने मुझे किस तरह बचाकर अपने घर में मेरी परवरिश की। सुल्तान ने किस तरह मुझे देखा। फिर किस तरह अपने भाई के हवाले करके कत्ल करने का हुक्म दिया। मैं इस तरह जंगल में खवार जिंदगी गुजारने लगी। वहां तुमने मुझे देखा। अपने साथ लेकर आए और मुझसे शादी की।

बादशाह ने जब शहजादी की दुख भरी कहानी सुनी तो उससे कहा अपने आप को तैयार करो। मैं तुम्हें तुम्हारे मांबाप के घर ले जाऊंगा। शहजादी ने बहुत मिन्नत समाजत की कि मुझे मेरे जालिम बाप के सामने मत ले जाओ। वह मुझे कत्ल कर देगा। लेकिन बादशाह नहीं माना। आखिरकार वह मजबूर होकर अपने मां-बाप के घर जाने के लिए तैयार हो गई।

बादशाह ने पूरे जाो जलाल और कमोकाज से एक बड़े लश्कर के साथ शहजादी और तीनों बेटों को भेजा। लेकिन खुद कुछ मुल्क के जरूरी कामों की वजह से रुक गया। अपने वजीर, वकील और खाजी को शहजादी के साथ कर दिया और कहा कि तुम लोग मलका को लेकर रवाना हो जाऊं। मैं पहली, दूसरी या तीसरी मंजिल पर तुम लोगों से जरूर आकर मिल जाऊंगा। वजीर, वकील और खाजी शहजादी को लेकर लाऊ लश्कर के साथ उसके मां-बाप के मुल्क की तरफ रवाना हो गए।

शाम होते-होते उन्होंने पहली मंजिल पर पहुंचकर पड़ा ऊ डाला। खादिम ने शहजादी का खैमा खड़ा कर दिया। तभी शहजादी ने देखा कि वजीर का खैमा भी उसके खमे के बिल्कुल करीब खड़ा किया गया है। शहजादी ने वजीर को बुलाकर उससे पूछा, ए वजीर तुम जानते हो कि मैं एक बादशाह की बीवी हूं और एक बादशाह की बेटी हूं। तुम अपना खैमा यहां से दूर लगवा दो। वजीर ने कहा, मलका साहिबा, बादशाह ने हमें आपकी हिफाजत की खातिर आपके साथ रवाना किया है। अगर आप या आपके बच्चों को कुछ हो गया, तो मैं बादशाह को क्या जवाब दूंगा? शहजादी ने कहा, "मुझे कुछ नहीं होगा।" तुम अपना खैमा यहां से दूर कहीं और लगवा दो। लेकिन वजीर नहीं माना। खमे लग गए। खाना वगैरह खाया गया। रात हो गई थी। थके हारे लोग सो गए। वजीर के दिल में खोट था। उसे नींद नहीं आ रही थी। आखिर आधी रात को उठा और शहजादी के खमे में दाखिल हो गया।

शहजादी जो पहले से ही भांप चुकी थी कि वजीर बदजाद की नियत में खोट है। आहट पाकर शहजादी जाग गई। देखा कि वजीर है तो उसे ललकार कर बाहर निकलने को कहा। लेकिन वजीर आगे बढ़ने लगा। शहजादी ने कहा कि ए बदजात वजीर तुम जानते हो कि मैं एक बादशाह की बेटी हूं और एक बादशाह की बीवी ना मैंने बुराई की है और ना किसी का बुरा चाहा है। मुझे मखलूक के सामने बदनाम मत कर और मेरे खमे से निकल जा। लेकिन बेशर्म वजीर नहीं टला। जब शहजादी ने देखा कि वजीर किसी सूरत नहीं मानता तो उसने अपने बड़े बेटे को वजीर के सामने किया कि तुम्हें इस बच्चे के सर की कसम इस तरह मत करो। उसे अल्लाह का वास्ता दिया। लेकिन बदकिरदार वजीर के दिमाग में शैतान पूरी तरह घर कर चुका था। वह आगे बढ़ा और तलवार निकालकर एक ही वार से बच्चे का सर धड़ से अलग कर दिया।

शहजादी समझ गई कि बदजात वजीर बिल्कुल भी नहीं टलेगा। उसने वजीर से कहा कि तुम अब बिल्कुल भी नहीं टोगे। मैं एक पाक औरत हूं और इस वक्त भी वजू में हूं। मुझे इतना मौका दे दो कि मैं अपने वजू को तोड़ कर आ जाऊं। तब तुम्हारा जो दिल चाहे वह करना। वजीर ने कहा जाओ और जल्दी आ जाना। शहजादी खैमे से बाहर निकल गई। भागती हुई वहां से दूर एक बड़ी झाड़ी के पीछे जाकर छुप गई। वजीर कुछ देर इंतजार करने के बाद उसे ढूंढने निकल गया। इधर-उधर तलाश करने लगा लेकिन नाकाम रहा। सुबह होने वाली थी। आखिर थक हारकर दोबारा शहजादी के खमे में दाखिल हो गया। बच्चे की लाश उठाकर कहीं दूर दफन की ओर अपने खमे में आकर घुस गया। सुबह बहुत देर के बाद शहजादी अपने खमे में दाखिल हुई। अपने मकतूल बेटे को ना पाकर रोने लगी।

लश्कर दोबारा रवाना हो गया। चलते-चलते शाम तक दूसरी मंजिल पर जा पहुंचे। खादिम ने शहजादी का खैमा नसब करना शुरू किया। शहजादी ने देखा कि वजीर ने अपना खैमा बहुत दूर खड़ा करवाया है। लेकिन थोड़ी देर बाद देखा कि खुद्दाम एक और खैमा उसके खमे के करीब नसब कर रहे हैं। पूछा यह किसका खैमा है? खुद्दाम ने जवाब दिया कि यह वकील का खैमा है। शहजादी ने वकील को बुलवाया और कहा कि मैं एक औरत हूं। तुम अपना खैमा मेरे खैमे के करीब से हटवा दो। यह अच्छी बात नहीं है। वकील ने कहा, "ए मलका, सुल्तान सलामत ने मुझे आपके साजो सामान की हिफाजत के लिए आपके हमराह कर दिया है और पुरजोर ताकीद की है। अगर आपको या आपके सामान को कुछ हो गया, तो मैं बादशाह को क्या मुंह दिखाऊंगा? शहजादी ने जवाब दिया, इतने जम गफीर के दरमियान मुझे और मेरे सामान को कोई कजाक नहीं ले जा सकता। बेहतर यही है कि तुम अपना खैमा कहीं दूर नसब करवाओ। लेकिन बदकिरदार वकील टस से मस ना हुआ और अपना खैमा उधर ही नसब करवा दिया।

शहजादी पहले ही वजीर के हाथों मार खा चुकी थी। इसलिए उस रात अपनी पूरी होशो हवास में थी। वैसे भी उसे नींद नहीं आ रही थी। आज भी उसने आधी रात को किसी के कदमों की आहट अपने खैमे की तरफ आते सुनी तो मुकम्मल बेदार हो गई। जब उसने देखा कि आने वाला वकील है तो ललकारा। खबरदार मेरे खमे में आने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? निकल जाओ खमे से। लेकिन वकील अपने नापाक इरादों के साथ उस तरफ देख रहा था। शहजादी ने दोबारा उसे कहा, "तुम जानते हो मैं एक बादशाह की बेटी हूं और एक बादशाह की बीवी, एक पाक दामन औरत हूं। इसलिए मेरा पीछा छोड़ो और अपने अंजाम की फिक्र करो। लेकिन बदकिरदार वकील कहां टलने वाला था। वह आहिस्ता-आहिस्ता उसकी तरफ बढ़ने लगा। शहजादी समझ गई कि यह बदजात भी नहीं टलने वाला। तो उसने दहाई दी कि इस मासूम के सर की कसम मेरा पीछा छोड़ और निकल जा यहां से। लेकिन वकील ने भी तलवार से वार करके उसके दूसरे बेटे का सर तन से जुदा कर दिया। शहजादी ने बेचारेगी से कहा अगर तुम अपने नापाक इरादों से नहीं टलने वाले तो मुझे मौका दो क्योंकि मैं पाक साफ वजू से हूं। मुझे कुछ वक्त दे दो ताकि मैं खुद को नापाक कर दूं। उसके बाद जो तुम्हारा दिल चाहे करो। वकील ने उसे जाने दिया। खमे से निकल गई। आज भी शहजादी में जितनी हिम्मत थी निकल भागी और जहां तक उसके कदमों ने साथ दिया भागी। आखिर थक हार कर एक बड़ी झाड़ी के पीछे जाकर छुप गई। वकील ने जब देखा कि शहजादी अभी तक नहीं आई है तो उसके पीछे निकल पड़ा। इधर-उधर भागदौड़ करके उसने खूब ढूंढने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा। अब उसे डर लगने लगा कि बच्चा भी जान से गया और शहजादी भी भाग निकली। अगर किसी ने बादशाह को खबर दी तो वह मुझे खौलते तेल में दिलवा देगा। वकील जल्दी-जल्दी वापस आया। मरे हुए बच्चे को उठाकर कहीं दूर दफन किया और अपने खेमे में आकर सोता बना। जब सुबह पोहटती तो शहजादी आहिस्ता-आहिस्ता अपने खेमे में दाखिल हो गई। देखा कि दूसरे बेटे की लाश भी नहीं है। समझ गई कि बदकिरदार वकील ने उसे ठिकाने लगा दिया है। बेचारी किस पर एतबार करती इसलिए चुप रही।

लश्कर फिर शहजादी के बाप सुल्तान के मुल्क की तरफ रवाना हो गया। आज शहजादी एक बेटे के साथ गमों के अंबार लिए ऊंट पर सवार थी। जब तीसरी मंजिल पर पड़ा ऊं डाला गया तो आज वजीर और वकील ने अपने खमे शहजादी के खमे से बहुत दूर खड़े करवा दिए। वे शर्मिंदा शर्मिंदा शहजादी के सामने आ ही नहीं रहे थे। हैरानो परेशान थे कि जब बादशाह को पता चलेगा तो उसे क्या जवाब देंगे। आज जैसे ही शहजादी का खैमा खड़ा कर दिया गया तो देखा कि काजी साहब अपना खैमा उसके खमे के पास तैयार करवा रहे हैं। शहजादी ने उसे भी बहुत बार समझाने की कोशिश की लेकिन काजी बदजाज भी टलने वालों में से नहीं था। आज की रात भी शहजादी के लिए कयामत की रात थी। वह समझ चुकी थी काजी बदजाज भी उन दोनों से किसी तौर पर कम नहीं। आज रात तो शहजादी बिल्कुल भी नहीं सोई बैठी रही। जब रात आधी से ज्यादा गुजर गई तो देखा कि काजी भी रामा खरामी खमे में दाखिल हो रहा है। शहजादी ने उसे भी बहुत बार समझाने की कोशिश की। बहुत मिन्नत समजत की। अल्लाह का वास्ता दिया। यहां तक कह दिया अगर वजीर वकील जाहिल थे लेकिन तुम तो आलिम फाजिल इंसान हो। लोगों को इंसाफ फराहम करते हो। तुम्हें ऐसी हरकत जेब भी नहीं देती। लेकिन काजी भी पूरी तरह शैतान बन चुका था। उस पर इन बातों और मिन्नत समजतों का कोई असर नहीं हुआ। शहजादी ने देखा कि यह भी नहीं टलने वाला तो इस ख्याल से शायद उसके दिल में रहम पैदा हो जाए। अपने तीसरे सबसे छोटे बेटे को उसके सामने कर दिया। उसकी दहाई दी वास्ते दिए। लेकिन काजी तो उन दोनों से भी दो हाथ आगे था। काजी बदबख्त को भी रहम ना आया और मासूम बच्चे का सर कलम कर दिया। शहजादी ने उसे भी यही कहा कि मैं पाक साफ हूं। वजू से हूं। मुझे मौका दो ताकि अपना वजू तोड़ दूं। उसके बाद जो तुम चाहो करो। काजी ने भी उसे जाने दिया। जैसे ही शहजादी बाहर निकली, भागते-भागते अचानक उसने देखा कि आगे एक बहुत बड़ा दरिया है। उसके दिल में धुआं भर गया। अपने मासूम बच्चे याद आए। उसका दिल खून के आंसू रो रहा था और वह सोच रही थी कि अगर बादशाह ने पूछा कि बच्चे किधर है, तो मैं उसे क्या जवाब दूंगी? इससे बेहतर है खुद को इस दरिया के हवाले कर दूं। यह फैसला करके उसने दरिया में छलांग लगा दी। पुरशोर दरिया उसे चक्कर देकर कहीं का कहीं पहुंचाकर दूसरी तरफ निकाल ले गया।

दूसरी तरफ छह फकीर जो कि भाई थे अपने कपड़े दरिया पर धोने के लिए लाए थे। जब देखा कि दरिया में कोई औरत बहती हुई आ रही है तो पकड़ कर बाहर निकाल लाए। अब शहजादी के पैरों तले जमीन निकल गई। उसके होशो और हवास ने जवाब दे दिया कि कहां वह तीनों बदज जातातों बदकिरदार लोगों से अपनी इज्जत बचाकर भाग निकली। तो इन छह नंग धड़ंग फकीरों के हत्ते लग गई। फकीरों में से हर एक यही कह रहा था कि यह मेरी है। आखिर सलाह यही ठहरी कि इसे बाप के पास ले जाएंगे। वह जिसका कहे यह औरत उसी की है। वे शहजादी को अपने बाप के पास ले गए। उनका बाप नेक और अक्लमंद इंसान था। देखते ही समझ गया कि यह किसी शहंशाह घराने की औरत है। मेरा कोई भी बेटा इसके लायक नहीं। इसी वजह से उसने अपने बेटों को समझाया। ए मेरे बेटों तुम छह भाई हो। तुम्हारी कोई बहन नहीं है। इसे अपनी बहन बना लो। तुम छह भाई और सातवीं तुम्हारी यह बहन। इसकी खूब देखभाल करो। इसकी बरकत से तुम सब सरखुरू हो गए और अपने से बढ़कर शहजादी का ख्याल रखने लगे।

इनको यहीं छोड़कर अब बादशाह का हाल सुनिए। जब बादशाह चौथे दिन आकर लश्कर से मिला तो देखा वजीर, वकील और काजी उससे कतराते थे। उसके सामने शर्मसार थे। पूछा मेरी बीवी बच्चे कहां हैं? तीनों ने एक जबान होकर कहा मलका तो एक डायन थी। तीनों बच्चों को खाकर खुद भाग निकली। बादशाह हैरान और परेशान हो गया कि यह क्या बात हो गई। वह उन तीनों पर शक में पड़ गया। लेकिन कहां कि बाद में देखते हैं। अभी जिस तरफ जा रहे हैं वहां जाकर फैसला करेंगे आगे क्या करना है। बादशाह अपने दिल में यही सोच रहा था कि जाके अपने जालिम ससुर सुल्तान को देखूं और उससे पूछूं कि उसे क्यों बेटियों से इतनी नफरत है। उसके जुल्मो सितम की वजह से उसकी बेटी डाइन बन गई और अपने बच्चों तक को खा गई। चलते-चलते उन्होंने एक बड़े दरिया को पुल के जरिए पार किया और अपनी मंजिल की तरफ रवाना हो गए।

इधर शहजादी फकीर की बहन बनकर रहने लगी। उसे इधर-उधर से सुनगुन मिल गई और समझ गई कि अपने बाप सुल्तान के मुल्क में पहुंच गई है। उसे पता था कि उसके बाप को कस्सा सुनने का बहुत शौक है। उसने अपने फकीर भाइयों से कहा कि जाकर सुल्तान को बता दो कि हमारी बहन एक कस्सा गो है। क्या वह उसे शाही कस्सा गो के तौर पर मुलाजमत देगा या नहीं? फकीरों ने सुल्तान के दरबार तक रसाई हासिल करके उसको यह घोष गुजार किया कि हमारी एक बहन है जो बहुत अच्छी कस्सा गो है। अगर आपका हुक्म हो तो उसे कस्सा सुनाने के लिए ले आए। सुल्तान ने उन्हें इजाजत दे दी और कहा कि अगर उसके कस्से पसंद आए तो उसे शाही कस्सा गो रख देंगे।

शाम को फकीर शहजादी को लेकर सुल्तान के दरबार में हाजिर हुए। शहजादी नकाब में थी और दरमियान में पर्दा हायल था। उसने सुल्तान के लिए एक कस्सा सुनाया जो सुल्तान को बहुत पसंद आया। उसने खुश होकर फकीरों को बहुत सा इनाम और इकराम दिया। फकीर इनामो इकराम लेकर बहन के हमराह वापस घर आए। वे पहले ही भीख मांगने से बेजार थे। इसलिए बहुत खुश थे। हर रात आकर सुल्तान को एक नया किस्सा सुनाती। सुल्तान से दाद और इनामो इकराम पाकर वापस अपने फकीर भाइयों के साथ घर लौट आती। फकीरों की जान भीख मांगने से छूट गई।

एक रात जब वह आई तो देखा कि आज उसका शौहर, बादशाह, वजीर, वकील, काजी वगैरह भी उसके बाप सुल्तान के साथ बैठे हैं। शहजादी ने सोचा कि आज तो किस्सा मजा करेगा। शहजादी आज भी हर रोज की तरह नकाब में थी। पर्दे की दूसरी तरफ आकर अपनी जगह पर बैठ गई और अपने बाप सुल्तान से कहा, सुल्तान सलामत। आज मैं एक बहुत खास दास्तान सुनाने वाली हूं। अगर किसी को कोई हाजत पेश है तो अभी से उठकर रफा हाजत पूरी करें। दास्तान के दरमियान किसी को उठने की इजाजत नहीं है। अगर कोई उठ गया तो मैं दास्तान सुनाना बंद कर दूंगी और आइंदा के लिए भी कोई कस्सा सुनाने नहीं आऊंगी। सुल्तान ने सबको हुक्म दिया। सब ने इकरार किया कि वे दास्तान के दौरान नहीं उठेंगे।

शहजादी ने दास्तान सुनाना शुरू किया। एक जालिम सुल्तान था। उसे अपने घर में बेटी की पैदाइश पसंद नहीं थी। जब उसके घर में लड़की पैदा हुई तो अपनी बीवी को उसे मारने का हुक्म दिया। सुल्तान हैरान हुआ कि यह तो मेरा किस्सा है जो यह खातून सुना रही है। सुल्तान ने बहुत से हीरे जवाहरात शहजादी की तरफ फेंक कर कहा कि देखना दास्तान को बंद मत करना। शहजादी ने हीरे जवाहरात फकीरों की तरफ फेंक दिए जो उसे पाकर बहुत खुश हुए।

शहजादी ने दास्तान जारी रखते हुए कहा। सुल्तान ने बेटी को अपने बेटे के हवाले करके कहा कि इसे जंगल में ले जाकर कत्ल कर दे और उसकी आंखें और खून निकालकर उसे दिखा दे। शहजादे को भी एहसास हुआ यह तो मेरी बहन का किस्सा है। उसने बेचैन होकर कुछ हीरे जवाहरात शहजादी की तरफ फेंक दिए और कहा कि दास्तान जारी रखना रोकना मत।

शहजादी ने कहा एक दिन एक बादशाह का गुजर उसी जंगल से हुआ। लड़की को देखा और उसे अपने साथ अपने मुल्क ले जाकर उससे ब्याह रचाया। शहजादी का शौहर बादशाह जो पहले बड़ी दिलचस्पी और इनेमा से दास्तान सुन रहा था। चौंक पड़ा कि यह तो मेरा और मेरी बीवी का कस्सा है। उसने भी बहुत से हीरे जवाहरात निकाल कर शहजादी की तरफ फेंक दिए और कहा कि देखना दास्तान आखिरी तक सुनाना। मुझे इस दास्तान को पूरा सुनना है।

शहजादी ने दास्तान जारी रखी। बादशाह ने उस लड़की से शादी की। उससे उसे तीन बेटे हुए। एक दिन बादशाह ने उसे उनके बेटों के साथ अपने वजीर, वकील और काजी के हमराह उसके ससुराल रवाना किया। अब वजीर, वकील और काजी के ओसान खता हो गए और एक दूसरे की तरफ सरासीमी से देखने लगे कि यह तो हमारा किस्सा है।

शहजादी ने दास्तान जारी रखी। पहली मंजिल पर बादशाह का वज़र नापाक इरादे से उसकी तरफ बढ़ा और उसे बदी के लिए तंग किया। उसके बड़े बेटे का सर तन से जुदा किया। लेकिन लड़की किसी तरह अपनी इज्जत बचाकर भाग निकली। वजीर हकला आया। मुझे बहुत जोर से पेशाब लगा है। मैं थोड़ी देर में आता हूं। बादशाह ने उसे डांट दिया। खामोशी से बैठ बदजात कहीं के। इस वक्त तुम्हें क्यों पेशाब आ रहा है?

शहजादी ने दास्तान जारी रखी। दूसरी मंजिल पर उसी तरह वकील ने भी अपने नापाक इरादों के साथ लड़की को बदी करने के लिए तंग किया और अपने नापाक अम पूरा करने के लिए उसके दूसरे बेटे का सर तन से जुदा कर दिया। लेकिन पाक दामन लड़की ने यहां भी अपनी इज्जत बचाई और भाग कर कहीं छुप गई। अब वकील हकला आया। सुल्तान सलामत मुझे जोर की हाजत पेश आती है। बस मैं यूं गया और यूं आया। बादशाह ने वकील पर आंखें निकाल ली। बस कर बदजात और खामोशी से बैठ। जब हकीकत जाहिर हो रही है तो तुम लोगों को हाजत पेश।

शहजादी ने दास्तान जारी रखी। तीसरी मंजिल पर काजी भी अल्लाह रसूल को भूलकर लड़की को बदी के लिए तंग करने लगा। उस जालिम ने उसके तीसरे बेटे का सर कलम कर दिया। लड़की ने फिर अपनी इज्जत बचाई और भागकर एक बड़े दरिया में कूद गई। काजी ने भी कोई बहाना बनाने की कोशिश की। लेकिन बादशाह ने उसे डांट दिया।

शहजादी ने कहानी का इख्तताम किया। दरिया ने लड़की को कहीं दूसरी तरफ ले जाकर फेंक दिया। जहां उसे छह फकीरों ने देखा और उसे दरिया से निकाला। फकीर उस लड़की को अपने बाप के पास ले गए। उसके अकलमंद बाप ने उस लड़की को उन छह भाइयों की बहन बना दिया। यहां पहुंचकर उसके बाप सुल्तान का दिल चूरचूर हो गया। वह एक फरियाद कर उठ खड़ा हुआ। शहजादी ने भी अपने चेहरे से नकाब उठा दी तो उसके शौहर बादशाह ने भी शहजादी को पहचान लिया। बाप बेटी को और शौहर बीवी को पाकर बेहिश्ता खुश हो गए। दोनों ने वजीर वकील और काजी को पकड़ा। उनसे कहा कि बोल कैसी सजा चाहिए? चार चर या चाबुक या चार भटूर। यह बहुत ही सख्त सजाओं के नाम है। उन्होंने कहा कि चार भटोर। बादशाह ने 12 घोड़े मंगवाए। हर एक के हाथ पैर चार घोड़ों से चार अतरफ में बांधकर उन्हें चार मुखालिफ सिमत में दौड़ा दिया। जिनसे उनके जिस्म टुकड़ों में बट गए। इस तरह उन बदजातों को उनके किए की सजा मिल गई। और शहजादी का बाप अपनी बेटी और उसका शौहर अपनी बीवी को पाकर बहुत खुश थे और हंसीखुशी रहने लगे।