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LIVE : PM Modi participates in the 100th birth anniversary celebrations of Bhupen Hazarika in Assam

Narendra Modi1:18:26

Transcription

करूंगी कि कृपया करतल ध्वनि से श्रद्धा और सम्मान के साथ माननीय प्रधानमंत्री जी का स्वागत करें।

मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से अनुरोध करूंगी कि वे कृपया अपना आसन ग्रहण करें।

हमारे बीच उपस्थित हैं असम के माननीय राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी। असम के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. हेमंता बिसामा एवं अन्य गणयमान्य अतिथि गण।

अब मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से निवेदन करूंगी कि वे हमारे सांस्कृतिक गौरव भारत रत्न डॉ. भूपेन हजोरिका के प्रतिछवि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करें।

मैं असम के माननीय राज्यपाल और असम के माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन करूंगी कि वे कृपया इस पुष्पांजलि अर्पण में माननीय प्रधानमंत्री जी का सहयोग करें। धन्यवाद।

कृपया आसन ग्रहण करें।

अब हम अपने आदरणीय मुख्य अतिथि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी का अभिवादन करना चाहेंगे। मैं असम के माननीय राज्यपाल एवं असम के माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करूंगी कि वे कृपया हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी को सम्मानित करें।

यथा रेि सर्वप्रथम एक मोगासा से माननीय प्रधानमंत्री जी का अभिवादन किया जा रहा है। धन्यवाद।

अब माननीय प्रधानमंत्री जी को एक होराय भेंट की जा रही है। होराय असम की सांस्कृतिक विरासत का मुख्य अंग है जिसे सम्मान व श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। धन्यवाद।

अब कला और संस्कृति के संगवाहक भारत रत्न डॉक्टर भूपेन हाजोरिका की एक प्रतिछवी भेंट कर माननीय प्रधानमंत्री जी का अभिवादन किया जा रहा है। यह चित्र आहों खाम शैली में बनाया गया है जिसमें असम के स्वर्ण तुल्य मोगा रेशम पर सोने एवं प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया गया है। धन्यवाद।

अब डॉ भूपेन हजोरिका के परिजन तथा भूपेन हजोरिका कल्चरल ट्रस्ट की उपाध्यक्षा श्रीमती मोनिका हजोरिका जी और प्रतिष्ठित कलाकार तथा भूपेन हजोरिका के दीर्घ समय के सहयोगी संघी एवं सृजनात्मक साथी श्री कोमल कोतुकी जी से निवेदन है कि वे कृपया माननीय प्रधानमंत्री जी का अभिवादन करें।

धन्यवाद।

अब मैं असम सरकार के सांस्कृतिक परिक्रमा आदि विभाग के माननीय मंत्री श्री विमोल बोरा जी से निवेदन करूंगी कि वे कृपया स्वागत भाषण प्रदान करें।

हकलु के नमस्कार भारत और जख प्रधानमंत्री श्रद्धार नरेंद्र मोदी डांगोरिया अखमर माननीय राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य देव अखमर माननीय मुख्यमंत्री डॉक्टर हेमंत विश्व हर्मादेव केंद्रीय बंडर जहाज परिवहन आरु जलपथ डॉक्टर मंत्री माननीय श्री हरानंद होल डांगोरिया अरुणाचल प्रखर माननीय मुख्यमंत्री श्रीदत प्रेमा खांडू डांगोरिया गुवाहाटी लोको समस्थ हाखट श्रीता बिजुली कोलिता मेधी डांगरियानी डॉ भूपेन हजरिका देव पुत्र श्री तेज हजरिका देव डॉ भूपेंद्र हदिका देव भात्री श्रद्धा होमर हाजरिका देव डॉ भूपेंद्र हाजिका देव भगनी कविता बरवा भाई श्रद्धा होवे राइज सांगिक बंधुकल अमर गंभीर श्रद्धा कृतज्ञता ज्ञापन करिस एस पार्ट ऑफ द ब सेंटिनरी सेलिब्रेशन ऑफ द बर्ड ऑफ द ब्रह्मपुत्र डॉ भूपेन हजरिका वी हैव गैदर्ड हियर टुडे टू पे आवर हार्टफेल ट्रिब्यूट फोंडली रिमेंबर्ड एस द सुधा कंठ ही रिमेंस द कल्चरल आइकॉन ऑफ आसाम एंड इंडिया एस ही वन सेंग मोर गिटोर हजार तुम नमस्कार गिटोर हात तुम मोर प्रधान अलंकार बट टुडे द रोल्स आर रिवर्स वी आर द वइसेस एंड ही इज द लिसनर हियरिंग हिज ओन सॉन्ग्स इको थ्रू द हेवंस अबोव ही ब्रॉट ग्लोरी टू आसाम एंड आसाम पीपल ऑन द ग्लोबल स्टेज बाय प्रोजेक्टिंग द रिस हेरिटेज सिविलाइजेशन एंड कल्चर ऑफ ब्रह्मपुत्र वैली थ्रूउ हिज लाइफ द वेलेडियर संग द एंथम ऑफ ह्यूमैनिटी स्प्रेडिंग द टाइमलेस मैसेज ऑफ हार्मोनी जस्टिस कल्चरल इंटीग्रेशन एंड यूनिवर्सियल ब्रदरहुड डॉजरिकास टाइमलेस सॉन्ग्स विल कंटिन्यू टू इंस्पायर गाइड एंड मोटिवेट जनरेशन टू कम।

भूपेंद्र का हर गाना एक वाणी थी। उन्होंने गाया था इंसान इंसान के लिए जीवन के लिए जरा सी हमदर्द क्यों हकदार नाही ओ बंधु इंसान इंसान के लिए महान शिल्पी गोरा की सृष्टि देख मान लो प्रशस्ता हिसाब तथा हस्त स्मरण बाबे ए अनुष्ठान आयोजन करा होसे या सन्मुख प नेतृत्व प्रदान करिसे परम श्रद्ध माननीय मुख्यमंत्री डॉक्टर हेमंत विश्वमा डांगोरिया माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी डांगोरिया उदगत केंद्रीय सरकार 2019 सन हुक डॉ भूपेन हाजरिका मरुणत्तर भास अहामरिक हनमान भारत रत्न रे विभूित करिस भूपेंद्र प्रति ठका हे एक आस्था और श्रद्धा भाजी भूपेंद्र जन्म हटवारिक ए अनुष्ठानत उपस्थित हो प्रधानमंत्री मोदी डांगोरिया हम धन्य करिसे द टेट सिर कृतज्ञ हाथरे उष्म अभिनंदन जनाब कारण अनुरोध जनास अमेरिका दुराष्ट्र पर आ हमारे अनुष्ठान उपस्थित हुआ डॉक्टर हाजरिका देव पुत्र तेज हाका देवू भात्री हमर हाजुरिका देव भगनी कविता बमते पोरिया वर्ग को आदरणी जनाई हम विभिन्न स्थान पर आहा डॉक्टर हाजरिका देव सानिध्य लाभ करा आमंत्रित व्यक्ति हकल और शिल्पी हकल आज अनुष्ठान समवेत संगीत परिवक्षण करब का सन्मानीय हिलप्पी हकल और हुढा कंठ गुण मुग्ध राइजक हमारे जातीय जीवन और बन पुरख डॉक्टर हाद जन्म वार की ए भव्य अनुष्ठान आदर वक्तव्य हास धन्यवाद नमस्कार

धन्यवाद महाय देवियों सज्जनों अब हम प्रस्तुत करने जा रहे हैं डॉक्टर भूपेन हजोरिका के कुछ अमर गीतों के समूह गीत यह गीत ना केवल देशभक्ति, भाईचारे, एकता और मानवता का संदेश देते हैं बल्कि हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की भी सशक्त अभिव्यक्ति हैं।

अब 10100 से भी अधिक प्रतिष्ठित गायक एक ही स्वर में इन गीतों का सामूहिक गायन करेंगे। आइए हम सब मिलकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें जहां संगीत, दर्शन और जन चेतना एक साथ गूंज उठेगी।

मोर गान हो बहुता विपरीत एक गंभीर आधार गान माय सॉन्ग्स डिमांड सोसाइटी टू बी कास्टलेस क्लासलेस एंड टू लिव इन हार्मोनी पीस प्रोग्रेस यूनिटी एंड नॉन वायलेंस टू लिव द रोमांस ऑफ लाइफ प्रस धम प्रश्न कर तुम की को मन दुर्भक भाज

को काम की मज तुम्हार भक्ति खाली उदार कठिया

अब हम

पूर्व जीवन

में

पूर्व

मोरा

रे

कोया राम

तुम

करो जन्म लिया ओ जन्म किया पा

नहीं आ

पुत्र शिव गुरु नो नो पवित्र आता गुरु पवित्र मधु पवित्र मधु पवित्र

अगो

नतुन औरया

मम हुआमम

नामा

हम

मृत्यु हो जीवन को मृत्यु अप ना होिया हो

हम हमे मोरे

पुत्र हो की तो हो रे चंद्रमा तेरे चांदनी अंग जला मुझको तो रे

मैं पंख लिए फिर करे घबराम

करे जा एक बूंद कभी पानी की मोड़े अंखियों से हमे मोसी

को दीवानी तू दीिया

रे मैं देखा ना जो रे पहा की खो

उपिया

हो सृष्टि

को

सी

शाबाश श्री क्यों ना रही तुम निश्चय चेतन नहीं प्राण में प्रेरणा देती है क्यों उनकी पुरुष जननी भारत में ईश्वर के सुख समय जनते नहीं हो क्यों विस्तार में प्रजा महाकाल शब्द सदा हो गंगा तुम गंगा बहती हो

अरुण किरण शेष की धारा सुरस देश हमारा चल हमारा परम किरण शेष कुशन की धारा प्रभ सूरज सुमित देश हमारा अरुणाचल हमारा अरुणाचल हमारा चल हमारा

विशेष हो बारिया

होए

हो

के आोसी है को कैसे प्रेरिया

में प्रकाश महा ब्रह्म पुत्र महावीरा पा

से

महा

आ हा हा हा आ दुर्बल मान

जीवन

है मानुष मानुष के मानुष मानुष के

तुम ओ बंधु हिंसा हिंसा के लिए जीवन के लिए जरा सी हमदर्दी का वो क्यों हम नहीं ओ बंधु मारो और पाए

द सेम मोर द सेम इफ द सेम आ जाती हो जाती है ना रे एक रे

द सेम ब्रदर द सेम ब्रदर मोरा जाती है मोरा है की एक रेत्री एक रे

माय इंडिया इज सो डवर्स येट विल ऑलवेज यूनाइटेड थ्रू इट्स इनहेरेंट स्पिरिचुअलिटी एंड म्यूजिक वेर इन द सेम बोट टू ब्रदर वेर इन द सेम बोट ब्रदर हेल मदर हेल मदर इंडिया

यह अत्यंत हृदय स्पर्शी प्रस्तुति थी। मैं सभी सम्मानित कलाकारों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।

अब मैं डॉक्टर भूपेन हजोरिका के अनुज प्रख्यात गायक श्री होमोर हजोरिका जी से अनुरोध करती हूं कि वे इस विशिष्ट सभा के साथ कुछ शब्द साझा करें।

नमस्कार आज भारत रत्न डॉक्टर भूपेंद्र देव जन्म की वार उपल आयोजित अनुष्ठान मंच उपविष्ट विशाल व्यक्तित्व अधिकारी भारत और ज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी डांगोरिया अहम और माननीय राज्यपाल श्री लक्षण प्रसाद आचार्य डांगोरिया अहम मुख्यमंत्री डॉ हेमंत विश्वकर्मा डांगोरिया केंद्रीय मंत्री श्री हरवानंद फनवाल डांगोरिया अरुणाचल प्रदेश और मुख्यमंत्री श्री प्रेमा खांडू डांगोरिया सांस्कृतिक मंत्री श्री विमल ब डांगोरिया हंगत श्रीता बिजुली कोलिता मेडी डांगोरियानी उठाक भूपेंद्र हजरिका देव पुत्र श्री तेज हजरिका लोगते एकमात्र बारी और नाती लोरा भगनी कविता बोलवा प्रमुख अजी हाजिर हात उपस्थित विशिष्ट व्यक्तिल आर भूपेंद्र गुणम राज मोर आंतरिक श्रद्धा निवेदन करिस लगते आज भूपेंद्र गीत परिवेक्षण करा राज्य और विभिन्न प्रांत शिल्पी होकल अहम सरकारकल सावादिक बंधुकल मोर आंतरिक धन्यवाद शुभच्छा ज्ञापन करिस आज एति अति उल्लेखनीय दिनत आवत होइ ही भूपेंद्र एनगर के व्यक्ति जे गुरु जन आदर करे अनुप्राणित हो जी प्रसाद आग देव और विष्णु प्रसाद राव सानिध्य पाए संगीत जगत खोज पिल नौ वर्ष तेजपुर थका काल भूपेंद्र हजर का दिखा कुम पुत्र श्री शंकर गुरु धिसल नामरे तान हरक गीत जोते ते गीतकार हुकार रूपे संगीत जगत खत खोज फैलाई तार पास प निर और एकांत साधना जोर त एक विश्व विस्त शिल्पी निज के उित कर त लिखिल अग्न जुग फीलिंग नतुन अहम गिल अग्नि जुगर फीलिंग नतुन अहम ओम गोरी हर बहार हर बस हर बहार हर बस पुनर फिराया नतुन अहम गो नतुन भारत गो अंतर निहित हो से 1942 सन स्वाधीनता संग्रामी त्याग संकल्प कर गाथा और देहात्म बोध आज मन परिचय निरकांत का और मां शांति प्रिया जेष् अर्थात भूपेंद्र एक इतिहास सृष्टि करले लिख ओ लोगते बनते फुले बरिया जाए मोर मोना बरिया जाए ओ मोना केतिया ओ लोगते बन निर्मा जोते फुले बरिया जाए मुर मना फुले बरिया जाए ए ब द्वारा एक ढरे बांधी रख निज सर्वस अनुभूति चिंता चेतना गीत संपिति अहम और जनगण जाति ट गीट मा आान और आवेग मिश्रित जातीत अनुभूति अति गुरुत्व और बौद्धिक चेतना उद्बुद्ध ओ टू जीवन मानवता गीत भूपेंद्र प्रकृत अर्थात निज अनुस्थान प्रति आगवा सर्वस हन हो भारत रत्न मरण भूपेंद्र प्रदान करा देख सर्वस्व सम्मान भारत रत्न हम हो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी डांगोरिया उस कृतज्ञ

2018 सनत प्रधानमंत्री मोदी डांगोरिया उधन करा देखो भीतर दीर्घतम धला हदिया दलक डॉक्टर भूपेंद्र हजरी का हेतु नामकरण रे अहम बाकी तसे

जन्म जन्म के उपलक्ष प्रधानमंत्री डांगोरिया भूपेंद्र नामत एक प्रकार एटी स्मारक मुद्रा मुकट प्रति एक गंभीर हन्मान प्रदर्शन कर भूपेंद्र प्रति हनमान हमारे जाति एक प्रेरणा स्रोत ज भारत सरकार पिया हो मैं कृतज्ञता ज्ञापन

डॉक्टर भूपेंद्र हजरी का जन्म हत ब जोड़ा उद्यापन व्यवस्था ग्रहण जोरियते अहम मुख्यमंत्री डॉक्टर हेमंत विश्व डांगमा डांगोरिया उदा प्रतिमान जनाई जी किन कार्य पंथा हाथ हसा एक शिल्पी प्रति थका आंतरिक हच्छा और श्रद्धा के प्रतिफलित कर ए अनुष्ठान उद्यापन उद्योग ग्रहण करा अहम मुख्यमंत्री डॉक्टर हेमंत विश्वकर्मा डांगोरिया भूपेन हाजरिका पुर आंतरिक धन्यवाद और कृतज्ञता ज्ञापन करी मर वक्तव्य हमारी धन्यवाद नमस्कार

धन्यवाद महाय देवियों और सज्जनों अब हम डॉ भूपेन हजोरिका जी पर आधारित एक संक्षिप्त वृत्त चित्र प्रस्तुत करेंगे जो उनकी प्रेरणादाय जीवन यात्रा अद्वितीय रचनात्मकता और असाधारण व्यक्तित्व की एक झलक साझा करेंगे।

आई सिंग माय लाइफ अवे। आई एम इंटरेस्टेड इन ऑल द थिंग्स दैट आर नेसेसरी टू कम्युनिकेट गुड थॉट्स टू बी वन हु मी और लिसन टू मी

यह डॉक्टर भूपेन हजारिका की आवाज थी एक ऐसी आवाज जिसने असम और भारत तथा पूरी दुनिया के करोड़ों दिलों को छुआ।

रूप ही

भारत

हमारा को हीरो नहीं असम वह धरती जिसे ब्रह्मपुत्र ने सींचा है। डॉक्टर भूपेन हजारिका ने अपनी रचनाओं में इसी रूपों ही असम को गाया। 8 सितंबर 1926 को असम के सदिया में जन्मे भूपेन हजारिका ने बचपन से ही संगीत और शब्दों में उनकी असाधारण प्रतिभा दिखाई। सांस्कृतिक विभूतियों ज्योति प्रसाद अग्रवाला और विष्णु प्रसाद राभा से गहराई से प्रभावित होकर युवा भूपेन ने कला को सामाजिक जागरण का माध्यम माना। कॉटन कॉलेज में स्नातक करने के बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययन किया और आगे चलकर न्यूयॉर्क के कलांबिया विश्वविद्यालय से जनसंचार में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। अमेरिका में रहते हुए वे कला और नागरिक अधिकार आंदोलनों से परिचित हुए। भारत लौटकर भूपेन हजारेका की रचनात्मक यात्रा असम, बंगाल, मुंबई और विदेशों तक फैली। असमिया सिनेमा के विकास में भी उनका योगदान अमूल्य रहा। उन्होंने गीत, संगीत और निर्देशन के माध्यम से इसे नई पहचान और नई ऊंचाइयां दी। बंगाल में उन्होंने महान कलाकारों के साथ मिलकर अमर रचनाएं की। मुंबई में उन्होंने हिंदी सिनेमा को अपने सुरों से सजाया और उत्तर पूर्व की खुशबू को लोकप्रिय संस्कृति के केंद्र तक पहुंचाया। उनके योगदान को भारत के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और 2019 में मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न। लेकिन इन सम्मानों से भी बड़ा पुरस्कार है जनता का प्रेम। वह प्रेम जो आज भी उनकी रचनाओं को गाता है, उन्हें जीवित रखता है। आज जब राष्ट्र डॉ भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी मना रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एक भावपूर्ण लेख लिखकर भूपेंद्र को श्रद्धांजलि दी। जिसमें उन्होंने उन्हें असम, उत्तर पूर्व और विश्व के बीच सांस्कृतिक सेतु के रूप में वर्णित किया। माननीय मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में असम सरकार ने इस ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष को मनाने के लिए अनेक पहल की है। हुपेन हजारिका की आवाज आज भी गूंजती है। हमें एकता, मानवता और आशा का संदेश देती हुई। धन्यवाद।

अब मैं असम के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. हेमंता बिसा खर्मा जी से विनम्र अनुरोध करती हूं कि वे कृपया इस गरिमामय सभा को संबोधित करें।

आज ए स्मरणीय सभा अमर माजत उपस्थित भारत और सनानीय प्रधानमंत्री अमर शकलरे आदर आर मोरमर श्री नरेंद्र मोदी डांगोरिया अखमर सम्मानीय राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आस साई जी डांगोरिया श्री खरबानंद खनवाल डांगोरिया अरुणाचल प्रदेश मुख्यमंत्री श्री प्रेमा खांडू डांगोरिया श्री विमल बरा डांगोरिया बिजुली कोलिता मेधी डांगोरियानी डॉ भूपेन हाजोरिका सुजग संतान श्री तेज हजोरिका डांगोरिया टेकेतर खुजग्य भात्री श्रीमर हाजोरिका डांगोरिया आर टेटर हुज भगनी श्रीमती कविता बोरवा डांगोरियानी अखमर विभिन्न स्थान प्रहा हत्राधिकार प्रभु ईश्वर होकल आज अमर माजत उपस्थित बरे शिल्पी साहित्यिकल समवेत संगीत अंक ग्रहण करा कला कुखलीकल आर सम्मानीय खुधिबिंद भारत रत्न डॉक्टर भूपेन हाजरिका देवर जन्म खतवारिक मूल अनुष्ठानत निज गरिमामय उपस्थिति रे कृतार्थ करा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी डांगोरिया पवित्र अहम भूमि लई म आंतरिक स्वागतम जनाईसु ए बद अनुष्ठानत माननीय प्रधानमंत्री डांगोरिया अंख ग्रहण हमारे ये आयोजन और होस्ट अधिक वृद्धि करिले ए पवित्र खत म डॉक्टर भूपेन हजरिका देव श्री शरणत समग्र अहम बाखी राइजर हो हट कोटि प्रणिपात आर भक्ति अर्घ निवेदन करिसु महापुरु शंकर देव पिसत अन्यतम श्रेष्ठ अखमिया डॉ भूपेन हाजोरिका अखमर जातीय और अनेक आलोकमय व्यक्तित्व ज संगीत और सुर कविता कथा सलसित दृश्य आर गंभीर सामाजिक सेट जुग नतुन दिखरे बुआई धन दुखिया उ तता नेसी त गरीब खुज समता जगत लोकोज मनी मुकुटा बलिनी ता खजाई प अनि निर्सनीय संगीत खुला भरा त विश्व जनता महाविष्ट कोिसिल त अतुल्य प्रभाव जुगजई धो आज प्रजन्म प प्रजन्म स्पंदित होसे भूपेंद्र प्रतिका आंतरिक श्रद्धा निवेदन कर जुआ 8 सितंबर माननीय प्रधानमंत्री डांगोरिया लिखा प्रबंध उल्लेखिसिल भूपेन हाजरी जीवन आमा सहानुभूति हक्ति जनता कंठ सुनार शक्ति आर आमाक हपार लगत संजुक्त हो थकार ह विषय शिका से भूपेन हाजोरिका क्ल धन्य भारत अमिया ऊपर अंग्रेजी हिंदी आर विभिन्न आंशोलिक भाषा प्रधानमंत्री डांगोरिया एने धने निजर मनोभाव व्यक्त करिसिल भूपेन हाजरी का जीवनशील एक सांगीतिक महाजात्रा पुण्यभूमि अखमर मणिकसन शंकर माधव उदार मानवतावादी आदर्श हरत लोई जूतिर जेटी आर राबर आली आग भूपेन हाजरी का गान सामाजिक दायित्व उपलब्धि कोिसिल ते बुझ उठीिल गानत विनोदन और लगत क्षमा कथा मानु जंत्रना आर पुन भाषा थकीब लागबो महापुर शंकर देव बर गीत प्र आरंभ कर बिहू गीत आई नाम बिया नाम निशुकनी गीत ओनीतम जिकर काम रूपी ग्वालपरिया लुक गीत जुमूर भाटियाली बालादी लखुर होमाहारे त सृष्टि समृद्ध कोिसिल त नित गभीर तथा अकृतिम सदे प्रेम सोल चित्र तो त अवदानिल अतुलनीय देख 16त्र जगत और सर्वस्व दादा साहेब फाल के बसिल त कीर्तित स्वीकृति हटिया नृत्य राष्ट्रीय स्वीकृति प्रदानत संगीत नाटक अकादमी अध्यक्ष हिसाब पे त भूमिका अखमिया जातीय केतिया पाब नारे जनता हृदय खाकू गता गण शिल्पी गिल अनन्य श्रद्धा निवेदन करत भारत और माननीय प्रधानमंत्री डांगोरिया ए गरा की विश्व वर शिल्पिक देखोस अखाने रे भारत रत्न रे विभूित कराल अमर जाति विरल प्राप्ति मुहूर्त तदुपरी आज रे अनुष्ठानत माननीय प्रधानमंत्री डांगोरिया डॉ भूपेन हाजोर कारत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया प्रस्तुत करा एक टका मूल्य एटा बिक मुद्रा अनुष्ठानिक भादबोधन करबो धला खिया डोलंग डॉक्टर भूपेन हाजरी का नाम रे अर्पण कर अमर जाति टूक एक कृतज्ञता डोलेरे प्रधानमंत्री डांगोरिया बान खग डॉक्टर भूपेन हाजोरिका डांगोरिया जेतिया मृत्यु होसिल त समाधित अखम राय जे भारत सरकार और कोनबाज व्यक्तिक बिचारी आ बिचारी से दिन भारत और प्रधानमंत्री निजे आ डॉक्टर भूपेन हाजोरी का माल अर्पण जाति टू समृद्ध कर आज प्रधानमंत्री दिन हम खपुन हपुन हो असिल किंतु आज एक वर्ष जन्म जयंती दना डॉक्टर भूपेन हाजोरी का संवर्धना आर श्रद्धा जना बोल भारत और प्रधानमंत्री डांगोरिया उपस्थित होई अखमर मानू मन प वेदना मसीले जुआ पांचटा बस असिल अमर राज्य विकास लगते अमर संस्कृतिक आवाहन करार एक नतुन समय हमारा अखमिया भाखा ध्रुपदी भाख मजदा सराई देव मदाक विश्व ओज स्वीकृति जुमूर बिह विश्व जगत लोजवा लासी बफ सारी खतम जन्म जयंती पिपात जोवा आर आज डॉक्टर भूपेन हाजरी का एकतम जन्म खत विकित प्रधानमंत्री डांगोरिया उपस्थिति असम जाति एक नतुन गौरव खग अखम मुख्यमंत्री हिसाब मूर बाबे इति प्राप्ति हम नतुन प्रजन बाबे ई खदाए एक मीठा हो थकिबो म पुन बार कृतज्ञ असमिया जाति हो डॉक्टर भूपेन हाजोरिका का डांगोरिया श्रद्धा निवेदन कोिसु राज्य सरकार त जन्मत बार की एटा बस अत्यंत गंभीरता रे पालन करबो अखम बाकी राय म सहाय आर सहजगिता कामना करिसु पुन बार आज रे अनुष्ठानक सुंदर भूपेंद्र गाने रे खजुआ प्रति गरा की कला कुखलिक मूर धन्यवाद जनाईसु पुन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डांगोरिया मैं कृतज्ञता जसु माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आज हमारा बीच में आकर भूपेन को जैसे सम्मानित किया है। हम आसाम वासी कभी नहीं भूलेंगे और हम हमेशा प्रधानमंत्री जी को इसका इस कारण हमेशा याद रखेंगे और प्रधानमंत्री जी से मैं आशीर्वाद मानता हूं। अगली एक साल हम जन्म शतवार्षिक की भूपेंद्र का पालन करूंगा। उस पूरा साल में प्रधानमंत्री जी का आशीर्वाद हमारा साथ रहे। यही निवेदन करते हुए मैं मेरा वाणी को विराम देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद। जय हिंद वंदे मातरम जय अखम।

धन्यवाद महोदय। आपके कुशल नेतृत्व में हमारी सांस्कृतिक विरासत को नया विस्तार, नई ऊर्जा तथा नई पहचान मिल रही है।

देवियों सज्जनों कुछ ही समय में भारत रत्न डॉ. भूपेन हजोरिका के जीवनी पुस्तक का विमोचन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण कृति की लेखिका साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती अनुराधा खरमा पुजारी जी है। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि मूल लेखिका तथा अन्य 21 भाषाओं के अनुवादक गण आज हमारे बीच इस सभा में उपस्थित हैं।

अब मैं माननीय प्रधानमंत्री महोदय से अनुरोध करती हूं कि वे कृपया अपने कर कमलों से असम्या भाषा में रचित भारत रत्न डॉ. भूपेन हाजोड़िका के मूल जीवनी पुस्तक का विमोचन करें।

धन्यवाद महोदय। अब मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से पुनः निवेदन करूंगी कि इस पुस्तक की 21 अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवादित पुस्तकों का विमोचन आभासी रूप से करें।

धन्यवाद महोदय। देवियों और सज्जनों अब डॉ भूपेन हजोरिका के पवित्र स्मृति में एक स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा जो देश के इस महान सपूत के प्रति यथार्थ श्रद्धांजलि होगी और इतिहास में दर्ज एक और स्वर्णिम अध्याय होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने ₹100 के मूल्य का यह चांदी का स्मारक सिक्का निर्गत किया है।

मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से पुनः करबद्ध निवेदन करती हूं कि वे स्मारक सिक्के का विमोचन करने की कृपा करें।

धन्यवाद महोदय। अब मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से विनम्र निवेदन करती हूं कि वे कृपया अपने सारगर्भित विचारों से हमें प्रेरित और मार्गदर्शित करें।

मैं कहूंगा भूपेंद्र आप कहिए अमर रहे अमर रहे भूपेंद्र भूपें

भूपेंद्र अमर रहें असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हेमंता विश्व शर्मा जी अरुणाचल प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू जी केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी सर्वानंद सोनवाल जी मंच पर उपस्थित भूपेंद्र हजारी िका जी के भाई श्री समर हजिका जी भूपेन हजारिका जी की बहन श्रीमती कविता बरवा जी भूपेंद्र के पुत्र श्री तेज हजिका जी तेज को मैं कहूंगा केम छो उपस्थित अन्य महानुभाव और असम के मेरे भाइयों और बहनों आज का दिन अद्भुत है और यह पल अनमोल है जो दृश्य यहां मैंने देखा जो उत्साह जो तालमेल मुझे दिखा भूपेन संगीत की जो लय दिखी अगर मैं भूपेंद्र के ही शब्दों में कहूं तो मन में बार-बार आ रहा था समय ओ धीरे चलो समय ओ धीरे चलो मन कर रहा था भूपेन संगीत की ये लहर ऐसे ही हर तरफ बहती रहे बहती ही रहे।

मैं इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले सभी कलाकारों की बहुत-बहुत सराहना करता हूं। असम का मिजाज ही कुछ ऐसा है कि हर ऐसे आयोजन में नया रिकॉर्ड बन जाता है। आज भी आपकी परफॉर्मेंस के जबरदस्त तैयारी दिख रही थी। आप सबका अभिनंदन। आप सबको बधाई।

साथियों अभी कुछ दिन पूर्व ही 8 सितंबर को भूपेन हजारीिका जी का जन्मदिवस बीता है। उस दिन मैंने भूपेन दा को समर्पित एक लेख में अपनी भावनाएं व्यक्त की थी। मेरा सौभाग्य है कि उनके जन्म शताब्दी वर्ष के इस आयोजन में मुझे हिस्सा लेने का अवसर मिला है। अभी हेमंता कह रहे थे कि मैंने आकर के कुछ कृपा की है। उल्टा है। ऐसे पवित्र अवसर पर आना यह मेरा सौभाग्य है।

भूपेंद्र को हम सभी प्यार से सुधा कंठो कहते थे। यह उन सुधा

कंठो का जन्म शताब्दी वर्ष है। जिन्होंने भारत की भावनाओं को आवाज दी। जिन्होंने संगीत को संवेदना से जोड़ा। जिन्होंने संगीत में भारत के सपनों को संजोया। और जिन्होंने मां गंगा से मां भारती की करुणा को कह सुनाया।

गंगा बहती हो क्यों? गंगा बहती हो क्यों? साथियों भूपेन दा ने ऐसी अमर रचनाएं रची जो अपने स्वरों से भारत को जोड़ती रही। जो भारत की पीढ़ियों को जगजोरती रही। भाइयों बहनों भूपेंद्र सशरीर हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनके गीत उनके स्वर आज भी भारत की विकास यात्रा के साक्षी बन रहे हैं। उसे ऊर्जा दे रहे हैं।

हमारी सरकार बहुत गर्व से भूपेंद्र दा के जन्म शताब्दी वर्ष को सेलिब्रेट कर रही है। हम भूपेन हजारिका जी के गीतों को उनके संदेशों को और उनकी जीवन यात्रा को घरघर ले जा रहे हैं। आज यहां उनकी बायोग्राफी भी रिलीज की गई है। मैं इस अवसर पर डॉ. भूपेन हजारिका जी को श्रद्धा पूर्वक नमन करता हूं। मैं असम के भाई बहनों के साथ ही हर भारतवासी को भूपेंद्र के जन्म शताब्दी वर्ष पर बधाई देता हूं।

साथियों भूपेन हजारिका जी ने जीवन पर्यंत संगीत की सेवा की। संगीत जब साधना बनता है तो वह हमारी आत्मा को छूता है। और संगीत जब संकल्प बनता है तो वह समाज को नई दिशा दिखाने का माध्यम बन जाता है। भूपेंद्र का संगीत इसलिए ही इतना विशेष था। उन्होंने जिन आदर्शों को जिया जो अनुभव किया वही अपने गीतों में भी गाया। हम उनके गीतों में मां भारती के लिए इतना प्रेम इसलिए देखते हैं क्योंकि वह एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को जीते थे।

आप देखिए पूर्वोत्तर में उनका जन्म हुआ। ब्रह्मपुत्र की पावन लहरों ने उन्हें संगीत की शिक्षा दी। फिर वह ग्रेजुएशन के लिए काशी गए। ब्रह्मपुत्र की लहरों से शुरू हुई भूपेंद्र की संगीत साधना गंगा की कलकल से सिद्धि में बदल गई। काशी की गतिशीलता ने उनके जीवन को एक अविरल प्रवाह दिया। वह एक यावर यात्री बन गए। उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया। फिर पीएचडी करने अमेरिका तक गए। लेकिन जीवन के हर पड़ाव पर वो असम की धरती से एक सच्चे बेटे की तरह जुड़े रहे। और इसीलिए वह फिर वापस भारत लौटे। यहां आकर फिल्मों में वो सामान्य मानवी की आवाज बने। उनके जीवन की पीड़ा को स्वर दिया। वह आवाज आज भी हमें जगझोरती है।

उनका गीत मानू है मानु होर भावे जो दिए ओ कोनु ना भावे ओ कोनी होानुभूति रे भावी वो कोनेनु कुआ अर्थात अगर मनुष्य ही मनुष्य के सुख, दुख, दर्द, तकलीफ के बारे में नहीं सोचेगा तो फिर कौन इस दुनिया में एक दूसरे की चिंता करेगा? सोचिए यह बात में कितनी प्रेरणा हमें देती है। इसी विचार को लेकर आज भारत गांव गरीब दलित वंचित आदिवासी के जीवन को बेहतर बनाने में लगा है।

साथियों भूपेंद्र भारत की एकता और अखंडता के महान नायक थे। दशकों पहले जब नॉर्थ ईस्ट उपेक्षा का शिकार था। नॉर्थ ईस्ट को हिंसा और अलगाववाद की आग में जलने के लिए छोड़ दिया गया था। तब भूपेंद्र उस मुश्किल समय में भी भारत की एकता को ही आवाज देते रहे। उन्होंने समृद्ध पूर्वोत्तर का सपना देखा था। उन्होंने प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य में बसे पूर्वोत्तर के लिए गीत गाए थे। उन्होंने असम के लिए गीत गाया था। नाना जाति उपजाति रहो कुष्टि आंकू वाली लोई होई शील सृष्टि ऐ मोर होम देश जब हम यह गीत गुनगुनाते हैं तो हमें हमारे असम की विविधता पर गर्व होता है। हमें असम की सामर्थ्य और क्षमता पर गर्व होता है।

साथियों अरुणाचल से भी उन्हें उतना ही प्रेम था और इसीलिए अरुणाचल के मुख्यमंत्री आज विशेष रूप से आए हैं। भूपेंद्र ने लिखा अरुण किरण शीश भूषण भूमि सुरमई सुंदरा अरुणाचल हमारा अरुणाचल हमारा। साथियों एक सच्चे राष्ट्रभक्त हृदय से निकली आवाज कभी निष्फल नहीं होती। आज नॉर्थ ईस्ट को लेकर उनके सपनों को साकार करने के लिए हम दिन रात काम कर रहे हैं। हमारी सरकार ने भूपेंद्र दा को भारत रत्न देकर पूर्वोत्तर के सपनों और स्वाभिमान का सम्मान किया। और पूर्वोत्तर को देश की प्राथमिकता भी बनाया। हमने देश के सबसे लंबे ब्रिजेज में से एक असम और अरुणाचल को जोड़ने वाला ब्रिज बनाया। तो उसका नाम भूपेन हजारी का ब्रिज रखा। आज असम और पूरा पूर्वोत्तर तेज गति से आगे बढ़ रहा है। विकास के हर आयाम में नए रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं। विकास की यह सिद्धियां देश की ओर से भूपेंद्र दा को सच्ची श्रद्धांजलि है।

साथियों, हमारे असम ने, हमारे पूर्वोत्तर ने भारत की सांस्कृतिक विविधता में हमेशा बड़ा योगदान दिया है। इस धरती का इतिहास, यहां के पर्व, यहां के उत्सव यहां की कला, संस्कृति, यहां की प्राकृतिक सुंदरता, इसकी दैवीय आभा और इस सबके साथ भारत माता की आन बान शान और रक्षा के लिए यहां के लोगों द्वारा दिए गए बलिदान। इसके बिना हम अपने महान भारत की कल्पना नहीं कर सकते। हमारा पूर्वोत्तर तो देश के लिए नए प्रकाश नई रोशनी की धरती है। देश की पहली सुबह भी यही तो होती है। भूपेंद्र ने इसी भाव को अपने गीत में स्वर दिया था। ओम आ रूपो ही गुरु ना भारत तो रे पूर्वो दिखो रे हुो उठा देश [प्रशंसा] इसलिए भाइयों बहनों जब हम असम के इतिहास को सेलिब्रेट करते हैं तभी भारत का इतिहास पूरा होता है तभी भारत का उल्लास पूरा होता है और हमें इस पर गर्व करते हुए भी आगे बढ़ते रहना है।

साथियों जब हम कनेक्टिविटी की बात करते हैं तो अक्सर लोगों को रेल, रोड या एयर कनेक्टिविटी की याद आती है। लेकिन देश की एकता के लिए एक और कनेक्टिविटी बहुत जरूरी है और वह है कल्चरल कनेक्टिविटी। बीते 11 वर्षों में देश ने नॉर्थ ईस्ट के विकास के साथ-साथ कल्चरल कनेक्टिविटी को भी बड़ी अहमियत दी है। एक अभियान है जो अनावरत जारी है। आज इस आयोजन में हम इसी अभियान की झलक देख रहे हैं। कुछ ही समय पहले हमने वीर लसीद बोरफुकन की 400वीं जयंती भी राष्ट्रीय स्तर पर मनाई है। आजादी की लड़ाई में भी असम और पूर्वोत्तर के कितने ही सेनानियों ने अभूतपूर्व बलिदान दिए। हमने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान पूर्वोत्तर के सेनानियों को यहां के इतिहास को फिर से जीवंत किया। आज पूरा देश हमारे असम के इतिहास और योगदान से परिचित हो रहा है। कुछ समय पहले हमने दिल्ली में अष्टलक्ष्मी महोत्सव का भी आयोजन किया। इस आयोजन में भी असम का सामर्थ्य दिखा, असम का कौशल दिखा।

साथियों परिस्थितियां कोई भी हो असम ने हमेशा देश के स्वाभिमान को स्वर दिया है। यही स्वर हमें भूपेंद्र के गीतों में भी सुनाई देते हैं। जब 1962 का युद्ध हुआ तो असम उस लड़ाई को प्रत्यक्ष देख रहा था। तब भूपेंद्र ने देश की प्रतिज्ञा को बुलंद किया था। उन्होंने उस समय गाया था जुबान रखो रे बिंदु हा अनंत हिंदू से हाहा दुर्ज लहरे झांसी ले प्रतिज्ञा जय रे उस प्रतिज्ञा ने देशवासियों में नया जोश भर दिया था। साथियों जो भावना वो जज्बा देशवासियों के दिलों में आज भी चट्टान की तरह बना हुआ है। यह हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देखा है। [प्रशंसा] पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों को देश ने ऐसा जवाब दिया कि भारत की ताकत की गूंज पूरी दुनिया तक गई है। हमने दिखा दिया भारत का दुश्मन किसी भी कोने में सुरक्षित नहीं रहेगा। नया भारत किसी भी कीमत पर अपनी सुरक्षा और स्वाभिमान से समझौता नहीं करेगा।

साथियों असम की संस्कृति का हर आयाम अद्भुत है, असाधारण है। और इसलिए मैं कई बार कहता था कि वो दिन दूर नहीं जब देश के बच्चे पढ़ेंगे ए फॉर आसाम। यहां की संस्कृति, सम्मान और स्वाभिमान के साथ-साथ असीम संभावनाओं की स्त्रोत भी है। असम के परिधान, यहां का खानपान, असम का पर्यटन, यहां के प्रोडक्ट्स, हमें इसे देश ही नहीं पूरी दुनिया में पहचान दिलानी है। आप सब जानते हैं असम के गमोष की ब्रांडिंग तो मैं खुद ही बहुत गर्व से करता रहता हूं। ऐसे ही हमें असम के हर उत्पाद को दुनिया के कोनेकोने में ले जाना है।

साथियों भूपेंद्र का पूरा जीवन देश के लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहा। आज भूपेंद्र के जन्म शताब्दी वर्ष के इस अवसर पर हमें देश के लिए आत्मनिर्भरता का संकल्प लेना है। मैं असम के मेरे भाई बहनों से अपील करूंगा। हमें वोकल फॉर लोकल का ब्रांड एंबेसडर बनना है। हमें स्वदेशी चीजों पर गर्व करना है। हम स्वदेशी ही खरीदें और स्वदेशी ही बेचे। हम इन अभियानों को जितनी गति देंगे विकसित भारत का सपना उतना ही तेज गति से पूरा होगा।

साथियों भूपेंद्र ने 13 साल की उम्र में गीत लिखा था। अग्नि जुगोर फिरोती मोतन भारत गिम हरबो हार हरबोस पुनार फिराए आिम नतुन भारत गिम साथियों इस गीत में उन्होंने खुद को अग्नि की चिंगारी मानकर यह संकल्प लिया किया था कि नया भारत बनाएंगे। एक ऐसा नया भारत जहां हर पीड़ित हर वंचित को उनका अधिकार वापस मिले। मेरे भाइयों और बहनों नूतन भारत का जो सपना भूपेंद्र दा ने तब देखा था आज वह देश का संकल्प बन चुका है। हमें इस संकल्प से खुद को जोड़ना है। आज समय है। हम अपने हर प्रयास हर संकल्प के केंद्र में 2047 के विकसित भारत को रखें। इसकी प्रेरणा हमें भूपेंद्र दा के गीतों से मिलेगी। उनके जीवन से मिलेगी। हमारे यह संकल्प ही भूपेन हजारिका जी के सपनों को साकार करेंगे। इसी भाव के साथ मैं एक बार फिर सभी देशवासियों को भूपेन के जन्म शताब्दी वर्ष की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरी आप सब से प्रार्थना है अपना मोबाइल फोन निकालिए और मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट चालू करके भूपेंद्र दा को श्रद्धांजलि दीजिए। हजारों हजारों यह दीप भूपेंद्र दा की अमर आत्मा को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनके स्वर को आज की पीढ़ी रोशनी से सजा रही है। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। धन्यवाद महोदय। आपकी वक्तव्य के लिए हम आंतरिक आभार व्यक्त करते हैं। [प्रशंसा] तो प्रधानमंत्री का यह पूर्वोत्तर दौरा जहां पर वह गुवाहाटी पहुंचे थे। उन्होंने भूपेन हजारे का शताब्दी समारोह में वह शामिल हुए और इस मंच के माध्यम से कई बड़ी बातें उन्होंने