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धर्मस्थला सामूहिक दफन मामले में अब तक क्या-क्या अपडेट आई है? पार्ट थ्री। नेत्रावती नदी के किनारे बारिश की बूंदें गिर रही थीं। मिट्टी धीरे-धीरे ढल रही थी और उसी ढलती मिट्टी में दफन थी एक दिल दहला देने वाली दास्तान। एक सफाई कर्मचारी के दावे और 15 गुमनाम कब्रों की तलाश की वो लंबी, थकी हुई पर अजीब तरह से सन्नाटा भरी हुई खुदाई।
पहली खुदाई मंगलवार की दोपहर ठीक 12:00 बजे साइट एक पर शुरू हुई। फॉरेंसिक टीम, एसओसी (सीन ऑफ क्राइम ऑफिसर्स), एंटी-नक्सल स्क्वाड और डीआईजी की निगरानी में खुदाई शुरू हुई। मौके पर वही सफाई कर्मचारी मौजूद था जो बताता जा रहा था कि खुदाई कहां-कहां पर करनी है। लगभग 3 फीट खोदने पर गड्ढे में पानी भरना शुरू हो गया। कारण था कि नेत्रावती नदी कुल 8 से 10 मीटर की दूरी पर बह रही थी। पानी भर जाने की वजह से मैनुअल खुदाई को रोका गया और फिर अर्थ मूवर बुलाया गया। मशीन आई, पानी निकाला गया और खुदाई दोबारा शुरू की गई। धीरे-धीरे गहराई 6 फीट, 8 फीट, 10 फीट और फिर 15 फीट तक पहुंच गई। क्या कोई लाश मिलेगी? लेकिन इतनी खुदाई करने के बावजूद कोई भी लाश सामने नहीं आई। आखिरकार खुदाई को रोक दिया गया। गड्ढे को वापस मिट्टी से भर दिया गया और शाम 6:00 बजे टीम खाली हाथ लौटी।
लेकिन मामला और भी दिलचस्प मोड़ पर आ गया जब अगले दिन बुधवार की सुबह सफाई कर्मचारी के वकील मंजूनाथ एम ने एक दिलचस्प बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि साइट नंबर एक की खुदाई के दौरान लगभग ढाई फीट पर एक लाल रंग का फटा हुआ ब्लाउज, पैन कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद हुआ था। महिला का नाम लक्ष्मी लिखा हुआ था। संयोग से कुछ समय पहले कभी ऐसी ही एक लक्ष्मी गायब हुई थी।
उस दिन फिर से खुदाई साइट नंबर दो से साइट नंबर पांच तक शुरू हुई। लेकिन कहीं भी कोई भी लाश नहीं मिली। गवाह के दावे के मुताबिक इन पांच साइटों पर कुल 12 लाशें दफनाई गई थीं। एक दिलचस्प बात यह सामने आई कि साइट 13 को लेकर उसने एक बहुत बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि साइट 13 में सबसे ज्यादा लाशें मिलेंगी।
इसी बीच एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया। एसआईटी के चीफ डीजीपी इंटरनल सिक्योरिटी प्रवण मोहंती, जिन्हें बहुत ही तेजतर्रार और ईमानदार अफसर माना जाता है, उन्हें अचानक केंद्र सरकार ने तैनाती के लिए दिल्ली बुला लिया। यानी एसआईटी का नेतृत्व करने वाला एक मुख्य चेहरा इस मामले से हटाया जा सकता है।
लेकिन फिर आता है तीसरा दिन। साइट नंबर छह पर नेत्रावती नदी के किनारे खुदाई शुरू होती है। लेकिन मशीनों को हटाकर मजदूरों के हाथों से दोपहर के करीब 12:00 बजे अचानक 6 फीट नीचे मिट्टी की परत के नीचे मानव हड्डियों के अवशेष दिखाई देते हैं। इन अवशेषों की हालत इतनी ज्यादा नाजुक थी कि एक छोटी सी चोट इन्हें मिटा सकती थी। उस गवाह का कहना था कि साइट नंबर छह पर दो लाशें दबाई गई थीं। लेकिन यह जो अवशेष हैं, यह एक लाश के हैं या फिर दो लाश के, यह तो सिर्फ फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा।
पता चला कि इस गवाह ने एक और बहुत बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि खुदाई की तो ये सिर्फ एक पहली किस्त है। धर्मस्थला में कुल 50 से ज्यादा जगहें हैं जहां पर 5 से 6 किलोमीटर के दायरे में लाशें दफन की गई हैं। ज्यादातर पीड़ित महिलाएं और लड़कियां थीं। उनमें से कई के साथ बलात्कार हुआ, हत्या की गई और फिर उन्हें मिट्टी में दबा दिया गया।
अब इस रहस्य की खुदाई सिर्फ फावड़े से नहीं हो सकती। इसलिए तकनीक की मदद भी ली जा रही है। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रेडार (जीपीआर) और माउंटेन रेडार सिस्टम के जरिए पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जमीन के नीचे क्या छिपा है। हालांकि बारिश और खराब मौसम की वजह से सिग्नल में समस्या हो सकती है। लेकिन फिर भी टीम उम्मीद लगाए बैठी है।
जो मानव अवशेष मिले हैं या फिर भविष्य में मिलेंगे, फॉरेंसिक टीम के लिए सबसे बड़ा कार्य है यह पता लगाना कि वे पुरुष के हैं या महिला के हैं, कितने समय पुराने हैं और सबसे मुख्य सवाल, किसके हैं। इसलिए एसआईटी टीम ने अपील की है कि अगर आपका कोई अपना 20 से 25 साल पहले लापता हुआ था और आप जवाब की तलाश में हैं, तो इन संपर्क विवरणों पर संपर्क करें।
इसी बीच आरटीआई और कई एनजीओ के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहली पांच साइटों में भी सबूत मिले थे। जैसे कि लाल रंग का फटा ब्लाउज, एटीएम कार्ड और पैन कार्ड जो एक लक्ष्मी नाम की लड़की के थे जिसकी मौत 2009 में हुई थी। लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम तक दर्ज नहीं था।