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हमारा घर शहर से थोड़ा बाहर था। पीछे घना जंगल फैला हुआ था। पीछे की बालकनी सीधा उसी जंगल की तरफ खुलती थी।
एक रात मां-पापा को कंपनी की इमरजेंसी मीटिंग के लिए जाना पड़ा। घर पर सिर्फ मैं और मेरा छोटा भाई थे। डिनर के बाद मैंने उसे सुला दिया और रात करीब 8:00 बजे मैं अपने कमरे में मोबाइल चला रही थी।
तभी बाहर से अजीब सी आवाज आई। पहले तो सोचा शायद किसी बिल्ली की होगी। पर 5 मिनट बाद वही आवाज फिर आई। इस बार और ज्यादा तेज और डरावनी। मुझे लगा कुछ गड़बड़ है। मैंने भाई को चेक किया और धीरे-धीरे नीचे उतरी।
जैसे ही बालकनी के पास पहुंची, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां बाहर दो आदमी खड़े थे। एक के हाथ में चाकू था। वह उससे दूसरे का हाथ काट रहा था। फिर उसी खून से हमारी खिड़की पर कुछ लिखने लगा। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा और तभी दोनों ने दरवाजा ठोकना शुरू कर दिया।
मैं भागकर भाई के कमरे में गई। उसे उठाया। कहा, जल्दी खिड़की से कूदो। हम दोनों खिड़की से कूदे। पीछे से कांच टूटने की आवाज आई। हम भागते हुए पड़ोसी के घर पहुंचे और पुलिस को कॉल किया।
थोड़ी देर में पुलिस आई। उन्होंने पूरा घर खंगाला। पर टूटी खिड़की के अलावा कुछ नहीं मिला। ना वो आदमी। ना कांच पर लिखा वो रहस्यमय संदेश। आज तक नहीं पता चला। वो कौन थे और क्या चाहते थे। पर एक बात तय है अगर मैं उस रात जरा भी देर करती शायद आज यह कहानी कोई और सुना रहा।