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Cannabis sativa - Best homeopathic medicine for Urinary, Respiratory and G. I.system

Dr. Santosh Kumar Padhy9:05

Transcription

नमस्कार, मैं डॉक्टर संतोष आपका स्वागत करता हूं आज के इस नए YouTube के वीडियो में। बात करेंगे आज कैना सवाई के ऊपर। बहुत ही इंपॉर्टेंट मेडिसिन है, बहुत बार ओवरलुक कर दिया जाता है, लेकिन इसका काम बहुत बढ़िया है। जब हमने क्लिनिकली इसको ट्रायल एंड टेस्टेड किया, बढ़िया रिजल्ट आया और क्विकली रिजल्ट आया। और यह बहुत ही इंपॉर्टेंट दवा है। जीआई सिस्टम, नर्वस सिस्टम से रिलेटेड, यूरिनरी सिस्टम, हर तरह का सिस्टम को आपके शरीर में जो आपके जान के लिए इंपॉर्टेंट है, जिंदा रहने के लिए इंपॉर्टेंट है, उसके ऊपर इफेक्ट डालता है। इमरजेंसी सिचुएशन में आपकी जान भी बचा सकता है, उसका मतलब यह है।

ठीक है? तो इस दवा को डेफिनेटली अपने घर में लाकर रखिए। 3200 पोटेंसी में इमरजेंसी में काम में आएगा। सबसे पहला जो इसका उपयोग होता है, प्रयोग किया जाता है क्लिनिकली, वो है ऑस्टिनेट कॉन्स्टिपेशन। मतलब बहुत ज्यादा जब इनको कब्जियत की शिकायत रहती है। अक्सर लोग ब्रायोनिया, एलुमिना, साइलसिया, तूजा इन दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं। कभी-कभी ओपियम का भी इस्तेमाल किया जाता है, प्लम मैटेलिकम का भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बहुत ज्यादा ऑस्टिनेट कॉन्स्टिपेशन, जिद्दी कब्जियत वाले जो कंडीशन में कैनाबिस सटाइवा बहुत बढ़िया काम करता है। यूरिन रुक जाता है, यूरिन प्रॉपर तरीके से नहीं होता। स्टूल के साथ-साथ यूरिन भी रुक जाता है, बंद हो जाता है। रिटेंशन ऑफ यूरिन, उसका भी स्पेसिफिक मेडिसिन है। एनस पूरा कंस्ट्रिक्शन हो जाता है, अंदर की तरफ झुक पूरा खींच जाता है, पूरा स्टूल पास नहीं होता है। इसीलिए पूरा अंदर जो मल द्वार है, वो अंदर की तरफ पूरा खींच जाता है। सबसे मोस्ट इंपॉर्टेंट इन सिम्टम्स के आधार पर आप कैनाबिस सटेवा 30 ले सकते हैं। दिन में चार से पांच बार तक ले सकते हैं, तीन-चार दिन। फिर दिन में दो बार कर देना चार-पांच दिन। रिजल्ट डेफिनेटली आएगा। उसके बाद 200 का दिन में दो बार, एक या दो दिन काफी है।

ठीक है? नेक्स्ट जो ज्यादा यूज़ होता है क्लिनिकली, वो है डिस्लोकेशन ऑफ़ पाटला बोन। आफ्टर गोइंग टू आफ्टर्स। सीढ़ी में ऊपर चढ़ते वक्त, घुटनों की जो सामने वाली जो छोटी सी हड्डी है, राउंड वाली हड्डी है, उसको पाटला बोन बोलते हैं। आपको पता होगा, वो डिस्लोकेट हो जाता है। जैसे ही सीढ़ी चढ़ने जाओ, उसके प्रेशर आपको यहां पैरों में प्रेशर डालकर आपको ऊपर चढ़ना पड़ता है ना, तो वहां पर वो डिस्लोकेट हो जाता है। और उसके लिए आपको फिर उसको ठीक से सेट करके फिर आगे बढ़ना पड़ता है। कभी-कभी आपको डॉक्टर के पास भी जाना पड़ता है। लेकिन जब ये बार-बार हो जाए, कितनी बार हम डॉक्टर डॉक्टर के पास जाएंगे? एक्चुअल में जो मसल्स या टेंडेंस जो लिगामेंट्स उसको खींच के रखते हैं ना, घुटनों के आसपास, वो रिलैक्स हो जाता है, रिलैक्स हो जाता है। वो अपना काम प्रॉपर्ली नहीं कर पाता, इसीलिए वो बार-बार होता है। इस दवा का इस्तेमाल करने के बाद, कैना भी सटाइवा के वो पूरा टाइट हो जाता है, वो वो टिश्यू, वो टेंडन, लिगामेंट्स पूरा टाइट हो जाता है, ताकि पैटला बोन बार-बार अपनी जगह से डिस्लोकेट ना हो। जड़ से खत्म करता है इसको। सर्जरी की कोई जरूरत नहीं है। जिनको भी इस तरह का दिक्कत हो, डिस्लोकेशन ऑफ़ पैटला बोन, घुटनों की जो हड्डी है, भूल से भी उसकी सर्जरी ना करें, वरना जिंदगी भर आपको पछताना पड़ेगा, अपंग भी हो सकते हैं आप। इस दवा का इस्तेमाल करिए 30 दिन में दो बार करके 15 दिन, फिर 200 दिन में दो बार करके दो-तीन दिन। डेफिनेटली आपको इंप्रूवमेंट मिलेगा विदाउट सर्जरी।

फिर भी अगर आपको इसका कोई प्रॉपर कंसल्टेशन लेना है, पेड कंसल्टेशन, WhatsApp पे हमारे साथ संपर्क कर सकते हैं। बहुत सारे केसेस हमने ठीक किया है विदाउट सर्जरी। WhatsApp नंबर है 940040263, 9040263। फीस मात्र 350 है। आप हमसे कंसल्ट कर सकते हैं। कोई भी आपको एक्यूट है, क्रॉनिक डिजीज में, हम बिल्कुल आपकी मदद करेंगे। प्रॉपर्ली आपको गाइड करेंगे। एक नॉर्मल एक जो डॉक्टर आपके मतलब आप कंटीन्यूअसली विजिट करते हैं, उस तरह से हम आपको गाइड करेंगे। ज्यादातर लोग क्या होता है कि फोन उठाते नहीं है, एक बार बात कर लिया बस काम खत्म। हमारे साथ ऐसा नहीं है। प्रॉपर्ली हम आपको गाइड करेंगे, रिपीटेडली गाइड करेंगे जब तक आपका बीमारी पूरा ठीक ना हो।

ठीक है? डिसनिया, अस्थमा, वहां पर भी कैनाबी सवा बहुत बढ़िया काम करता है। इसका एक पर्टिकुलर सिम्टम है। पेशेंट कैन ओनली ब्रेथ बाय स्टैंडिंग अप। ठीक है? पेशेंट जब सीधे खड़ा होता है, तो ही जाकर उसका सांस सही से चलता है। जब वह बैठ जाता है, उसका जो लंग्स होता है, जो एब्डोमेन होता है, वो कंप्रेस हो जाता है, थोड़ा झुक जाता है। उसमें दबाव पैदा होता है, उसमें सांस लेने में दिक्कत होती है। खड़े रहने पर ही उसका जो अस्थमैडिक कंडीशन है, वो ठीक रहता है। वहां पर यह स्पेसिफिक सिम्टम आपको कैनाबी सबा भी मिलेगा। रोगी बोलेगा सर, मैं जब सीधा खड़ा रहता हूं, मुझे सांस ठीक से लेने को होता है। जब मैं बैठ जाता हूं या फिर लेट जाता हूं, वहां पर मुझे सांस लेने में दिक्कत होती है। दिस पर्टिकुलर सिम्टम्स इंडिकेट्स कैनबी सटाइवा स्ट्रांगली इंडिकेट करता है। वहां पर आपको बढ़िया मदद करेगा। इसको आप देकर देखिए। रिजल्ट बहुत बढ़िया आएगा।

ठीक है? नेक्स्ट इसका जो इंपॉर्टेंट क्लिनिकल फीचर है, वो है चोकिंग इन फॉलोइंग थिंग्स गो डाउन एंड रोंग वे। कुछ भी खाओ तो वो सही जगह पे ना जाकर गलत जगह पे चला जाता है। मतलब आपके फरिंस इसोफेगस के थ्रू स्टमक में ना जाकर, वो लंग्स में बार-बार चलाने की कोशिश करता है। गले में अटक जाना, लंग्स में, ब्रोंकोस में आपका चले जाना, जो वॉइस बॉक्स है या फिर रेस्पिरेटरी जो पैसेज है, स्वास श्वसन संस्थान, वहां पर चला जाता है, जो भी खाना खाते हैं निगलते वक्त। इसका क्या कारण है कि जो डिग्लूटेशन एक प्रोसेस होता है, निगलने वाला, वो सही तरीके से नहीं होता। तो वहां पर यह दिक्कत क्रिएट करता है।

ठीक है? तो इस चीज को आप हमेशा ख्याल में रखिए और रिजल्ट बहुत बढ़िया आता है। नेक्स्ट इसका जो इंपॉर्टेंट है, यूरेथ्रा इज वेरी सेंसिटिव टू टच प्रेशर। कैन नॉट वॉक वि लेग्स क्लोज टुगेदर एंड हार्ट्स यूरेथ्रा। पेशाब की जो नली है, यूरेथ्रा बोलते हैं उसको, जिस पेनिस से जो पेशाब निकलता है। ठीक है? मेल रिप्रोडक्टिव ऑर्गन जो पेनिस है, उससे जो यूरिन निकलता है, जिस रास्ते से, उसको यूरेथ्रा बोलते हैं। वो बहुत ज्यादा सेंसिटिव रहता है। यूरिन निकलते वक्त भी, चलते फिरते वक्त भी, उसको पेनिस को दबा के चलना पड़ता है। दर्द बहुत होता है, सेंसिटिव बहुत ज्यादा रहता है।

ठीक है? वो भी उस ओवर सेंसिटिवनेस को दूर करता है। नेक्स्ट इसका क्लिनिकल पॉइंट है, पेन एक्सटेंडिंग फ्रॉम ओरिफिस ऑफ यूरेथ्रा बैकवर्ड बर्निंग बाइडिंग पोस्टली मोर स्ट्रेचिंग एंड व्हाइल यूरिनेटिंग। जैसे कि अभी प्रीवियस पॉइंट में हमने देखा कि उसका बहुत ज्यादा सेंसिटिवनेस रहता है यूरेथ्रा का। पेशाब करते वक्त भी उसको जलन, दर्द, सेंसिटिवनेस बहुत ज्यादा रहता है। जस्ट लाइक कैंथेरिस। कैंथेरिस में भी यह लक्षण पाया जाता है। कैनाबिस साइमा में भी आपको मिलेगा। लेकिन कैनाबिस सवा में वो सेंसिटिवनेस बहुत ज्यादा रहता है, कैंथेरिस में जलन दर्द बहुत ज्यादा रहता है। ये चीज में आप उसको फर्क कर सकते हैं दोनों में।

ठीक है? तो ये इंपॉर्टेंट पॉइंट्स है। क्लिनिकली जो ट्रायल एंड टेस्टेड हमने ऑब्जर्व किया है पेशेंट में। 100% उनका सक्सेसफुल रेट है। उसी चीज को हमने जिक्र किया है। डेफिनेटली आप इसको अगर इसी तरीके से यूज़ करेंगे, जैसा कि हमने बताया, 30 पोटेंसी से शुरुआत करें। दिन में दो बार मिनिमम पांच से 10 दिन लीजिए। फिर एक्यूट कंडीशन में दिन में तीन से चार बार भी ले सकते हैं। कंडीशन में सुधार आते ही दवा को ड्यूरेशन आप कम कर देना या फिर दवा कम कर देना। लेने का जो फास्ट जो फ्रीक्वेंसी है, उसको कम कर देना और बंद करके 30 पोटेंसी, फिर 200 का एक या दो डोज़ लेके आप बंद कर सकते हैं। उसको भी लंबे समय तक नहीं लेना है। एक से दो दिन काफी है।

ठीक है? इससे आपको रिजल्ट बहुत बढ़िया मिलेगा। और इन सब प्रॉब्लम में कोई आपको पेड कंसल्टेशन की जरूरत है, हमसे सलाह लेने की जरूरत है, तो आप डेफिनेटली WhatsApp पे संपर्क करिए। हम आपको बिल्कुल गाइड करेंगे। WhatsApp का नंबर हमने दे दिया है। नीचे भी आपको मिल जाएगा। डिस्क्रिप्शन में भी हम दे देंगे। प्रॉपर फाइल बनने के बाद हम रेगुलरली आपको सलाह देंगे, फॉलो अप देंगे। तो बने रहिए इस चैनल के साथ। अच्छा लगे तो लाइक जरूर करिए। चैनल को सब्सक्राइब करके नोटिफिकेशन ऑल पर रखिए ताकि जब भी मैं लाइव आऊं या फिर वीडियो अपलोड करूं, आपको बिल्कुल नोटिफिकेशन तुरंत मिले। बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।