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Aapki Videos dekhne ke baad Islam chhod diya - Rabiya Khan

Ex-Muslim Zafar Heretic52:46

Transcription

[संगीत] क्या आप भी आजाद ख्याल एक्स मुस्लिम हैं? इस्लाम से परेशान हैं? लेकिन अपना हाले दिल बयां नहीं कर पाते। अब आप अकेले नहीं हैं। आगे आइए और आवाज बुलंद कीजिए ताकि बाकी एक्स मुस्लिम लोगों को हौसला मिल सके आगे आने का। और खुलकर जीने का और अपने वतन और दुनिया को इंसानियत के रास्ते पर आगे ले जाने का। मुझे ईमेल करें और मेरे लाइव शो यूं ही कोई शख्स एक्स मुस्लिम नहीं बनता में गेस्ट बनकर आए और अपनी कहानी सुनाएं। सुनेगी दुनिया बदलेगी दुनिया। जरूरी नहीं हर कोई आगे लड़ने आए। लेकिन लड़ने वालों का हौसला तो बढ़ाया ही जा सकता है। एक बार खड़े होकर अपने आप को संभाला था। अब खड़े हो जाइए दुनिया को संभालने के लिए। जय हिंद, जय विज्ञान, इंसानियत हाफिज।

यह चैनल किसी भी रिलीजन या संगठन की मदद से नहीं चलता है। इस नेक मुहिम में हमारा साथ दीजिए। इस चैनल की हर वीडियो पर पूरी एक टीम काम करती है और YouTube से कोई खास अर्निंग नहीं होती। इस चैनल और मिशन को बनाए रखने के लिए आपकी रेगुलर मंथली सपोर्ट की जरूरत है। इसके लिए या चैनल की मेंबरशिप भी ले सकते हैं या यूपीआई और PayPal के जरिए भी हर महीने अपनी फाइनेंसियल कंडीशन के मुताबिक सपोर्ट कर सकते हैं। इस मिशन के एक सिपाही बनिए और गर्व महसूस करिए सदी के सबसे बड़े मिशन के सपोर्टर होने पर।

[संगीत] जय हिंद जय इंसानियत। मैं हूं जफर हरेटिक और एक बार फिर से बहुत-बहुत स्वागत है आपका हमारे शो। यूं ही कोई शख्स मुलहिद नहीं बनता जिसमें मेरी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा एक्स मुस्लिम लोगों की कहानी आगे लाई जाए और हमारी इस कांसेप्ट को और कॉमन बनाया जा सके। सबसे पहले मुझे बता दें भाई मेरी आवाज सभी को एकदम ठीक-ठाक आ रही है। वॉइस ओके वॉइस क्लियर थैंक यू सो मच। ठीक है।

आज की जो हमारी गेस्ट हैं वो कायु जी हैं। जिनकी इस्लाम छोड़ने की जो वजह है वो बहुत ही इंटरेस्टिंग है। ये मोहम्मद साहब की बहुत बड़ी फैन थी और सिर्फ मोहम्मद साहब की नहीं बल्कि आज के जमाने के जो मोहम्मद साहब हैं यानी के जाकिर नालायक उनकी भी बहुत बड़ी फैन थी। लेकिन हमारी एक वीडियो देखने के बाद इनकी जो वो मोहब्बत थी वह कैसे खत्म हो गई वह खुद हम इनकी स्टोरी से जानेंगे और कौन सी वो हमारी वीडियो थी वो भी हम इनसे जानेंगे और आज की जो हमारी गेस्ट है बहुत ही इंटेलिजेंट है। यह एक बहुत ही ब्रेव और एक बेबाक लड़की की कहानी है। बहुत ही फायर इंटरव्यू है आज का। आपको बहुत मजा आने वाला है। तो लास्ट तक आप बने रहिएगा और मैं चाहता हूं कि जितनी मुस्लिम लड़कियां हैं जो हमारी वीडियो देख रही हैं वो कायु जी की तरह ब्रेव बनो जिंदगी में और इनसे जब मेरा डिस्कशन हुआ तो एक बात बहुत ही गहरी कही इन्होंने कि लड़कियां इस्लाम क्यों फॉलो करती हैं? तो क्यों मतलब सवाल नहीं उठाए जाते? तो सवाल जरूर उठाओ। आज की स्टोरी से आपको पता चलेगा कि सवाल कैसे उठाए जाते हैं। और अगर इनकी स्टोरी से आपको हिम्मत मिले तो आप भी अपनी स्टोरी शेयर करने के लिए हमारे शो में आ सकती हैं या आ सकते हैं। करना कुछ नहीं है। सिंपली बस आप मुझे ईमेल करें ज़फरिक@gmail.com और बताएं कि आप अपनी स्टोरी शेयर करना चाहते हैं। और फिर मैं आपको कांटेक्ट करूंगा और जो भी प्रोसीजर है उसका आगे का वह बताया जाएगा। तो बाकी मुस्लिम लोगों को हौसला देने के लिए आप लोग जरूर आगे आ और अपनी स्टोरी जरूर शेयर करें। बाकी इनको मैं ऐड करूंगा। इनकी स्टोरी सुनेंगे।

लेकिन उसके पहले एक इंपॉर्टेंट अपडेट आज मंथ का फर्स्ट सैटरडे है और हमेशा की तरह हमारा चैनल आपसे मंथ में केवल एक बार डोनेशन की रिक्वेस्ट करता है। रीज़न वही है क्योंकि चैनल की ज्यादातर वीडियोस लिमिटेड होती हैं या रिव्यू में फंसी रह जाती हैं। जिसकी वजह से उन पर जो लगी कॉस्ट है वो टीम को देनी होती है। लेकिन उससे कोई अर्निंग नहीं होती। आजकल तो व्यूज भी इतने नहीं हो रहे हैं फिलहाल के अर्निंग के अगर हो भी उसका मोनेटाइजेशन हो तब भी उसके कॉस्ट निकल आए। तो हमेशा की तरह आज सुबह मैंने डोनेशन की पोस्ट की थी जिसमें अभी तक मुझे कोई लगभग ₹5500 के आसपास की सपोर्ट मिली है। जिसमें 4000 तो हमारे एक भाई ने ही भेजे हैं। आई एम थैंकफुल टू हिम। बाकी पोस्ट की जो रीच है वो बहुत ही कम है। तो आप में से जितने लोगों को पोस्ट दिखे आप उसको लाइक और कुछ कमेंट जरूर करें। और जो फाइनेंसियल सपोर्ट करते हैं वो जरूर करें। बाकी मेरे 50% से ज्यादा टीम मेंबर की अभी पेमेंट नहीं हो पाई है। तो सपोर्ट करें ताकि उनकी पेमेंट हो पाए और बेहतर से बेहतर कंटेंट आपके लिए लाया जाए।

सीक्रेट प्रोजेक्ट की अपडेट भी मैं दे देता हूं। देखो भाई हमारा जो प्रोजेक्ट है वह कंप्लीटेड है। लेकिन अभी तक हमारे पास इतना फंड नहीं हुआ है कि हम इसको ल्च करें। पिछले हफ्ते मुझे कोई 6 या ₹6500 से ज्यादा की डोनेशन नहीं मिली और उसमें भी हमारे एक दो रेगुलर सपोर्टर भी थे। तो सब मिलाकर करीब-करीब हमारे पास अभी ₹17000 के आसपास हैं जो अब तक हम जोड़ पाए हैं और अभी हमें एडिशनल लगभग ₹1.5 लाख की जरूरत है। जैसे ही यह हमारा अमाउंट जो है यह ₹5 लाख पहुंचेगा। 1 लाख मैं अपने पास से डालूंगा। तो इसको 3.5 लाख करके हम इसका प्रमोशन स्टार्ट कर सकते हैं। और मैंने सोचा था कि जब तक ये अमाउंट जुड़ेगा तब तक हम इस प्रोजेक्ट को थोड़ा इंप्रूव करेंगे। लेकिन भाई यकीन मानो इंप्रूवमेंट पर भी खर्चा हो रहा है। हालांकि इंप्रूवमेंट बहुत जबरदस्त हुआ इस मंथ में। एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम को हमने सुलझाया है जो चलो अब इतना बता रहा हूं तो मैं बता देता हूं। अक्सर लोग कहते हैं कि यार एआई जो है ना वह इस्लाम को डिफेंड करता है। तो हमने कुछ ऐसा इंतजाम किया है अपने सीक्रेट प्रोजेक्ट में ही कि एक आम इंसान एआई से सच निकलवा सकता है। ठीक है? बहुत ही इंटरेस्टिंग चीज है लेकिन आप लोगों तक तभी पहुंच सकती है जब आप इसको ल्च करवा दें। तो भाई आप लोग लेट मत करवाओ प्लीज इस प्रोजेक्ट को बनाते बनाते देखो मैं दिवालिया हो गया। लेकिन यकीन मानो बहुत जबरदस्त प्रोजेक्ट है। जब यह ल्च होगा तो आई होप के जो जो भी दुख है हमारे वो सब खत्म हो जाएंगे। और यह मैं अकेले अपने लिए नहीं बना रहा हूं। यह पूरी हमारी एक्स मुस्लिम मूवमेंट के लिए है। इससे हर एक्स मुस्लिम को फायदा होगा जो चैनल चलाते हैं या जो नहीं भी चलाते लेकिन जिनके ऐसे सवाल हैं जो वो किसी से भी पूछने से डरते हैं। तो अगर आप इस्लाम के बारे में जानना चाहते हैं और इस्लाम की कट्टरता से लड़ना चाहते हैं तो यह प्रोजेक्ट आपको बहुत हेल्प करेगा। तो भाई आप लोग इस मंथ इसको ल्च करवा दो प्लीज। और मेरी टीम का बंदा कह रहा था कि जफर भाई अब न्यू ईयर में ल्च करोगे क्या? तो यार ये न्यू ईयर बहुत दूर है। मैं सीरियसली चाहता हूं कि बस अब इस मंथ से ज्यादा ना खींचिए। तो जितना आप लोग हमें मंथली डोनेट करते हैं उससे थोड़ा ज्यादा अमाउंट आप डोनेट करें और मुझे क्लियरली आप ईमेल में या ट्रांजैक्शन रिमार्क्स में आप बताएं कि यह एडिशनल जो अमाउंट है वो सीक्रेट प्रोजेक्ट के प्रमोशन के लिए ताकि कोई कंफ्यूजन ना हो। बाकी ऐसा ना करें भाई कोई रेगुलर डोनेशन आप देते हो उसी के रिमार्क में आप सीक्रेट प्रोजेक्ट लिख दें। तो भाई यह चैनल भी चलना जरूरी है। आपकी मदद से यह चैनल चल रहा है और बहुत ही जल्दी हम बहुत ही जबरदस्त कंटेंट लाने वाले हैं। एक सीरीज आ रही है हमारी इस्लाम इंडिया में कैसे फैला और और भी कुछ बेहतरीन वीडियोस हैं जो प्रोजेक्ट की वजह से या हमारे चैनल की रीच के रुकने की वजह से होल्ड पर हैं। बाकी हम लगातार काम कर रहे हैं और अब बहुत ही जल्दी आपको बहुत कुछ बदला हुआ दिखेगा। एक ऐसी सीरीज हमारी आने वाली है कि शायद हंसते-हंसते आपका पेट दुख जाए और सीखने को भी उसमें बहुत कुछ मिलेगा। एंटरटेनमेंट के साथ जब आप सीखते हो तो वो ज्यादा बेहतर होता है। तो जितना हो सके सपोर्ट करें। बाकी पिछले महीने जितने लोगों ने सपोर्ट किया उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया और जो इस मंथ करने वाले हैं उनका भी। यूपीआई, क्यूआर या PayPal वगैरह का लिंक आपको नीचे पिन कमेंट में मिल जाएगा और आई होप हमारे मिशन ऐसे ही चलता रहे और ऐसे ही हमारा एक्स मुस्लिम परिवार जो है वो बढ़ता रहे।

काू जी को मैं ऐड कर रहा हूं। ये एक रिकॉर्डेड कॉल है क्योंकि कायु जी के साथ में कुछ प्रॉब्लम है सैटरडे को वो टाइम नहीं मिलता उन्हें तो इसलिए शो को रिकॉर्ड कर लिया गया था तो यह रिकॉर्डिंग मैं ऐड कर रहा हूं आज हमारे साथ काू जी हैं इंटरव्यू में मैं इन्हें ऐड करता हूं बहुत-बहुत स्वागत है आपका जी का जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे शो में हेलो जी हेलो सर मेरी वॉइस आ रही है आपको? हां जी बिल्कुल आ रही है। आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे आज के शो में। शुक्रिया। तो काू जी सबसे पहले मैं चाहूंगा कि आप कोई भी एक सूर सुनाएं ताकि हमारे जो मोमिन व्यूअर्स हैं उनको ऐसा ना लगे कि हम किसी को भी उठा के ले आते हैं। तो आपको एक आईडिया होगा। तो एक कोई भी सूर जो भी आपको याद हो आप सुना दें प्लीज। फिर उसके बाद हम आपकी स्टोरी की ओर चलेंगे। जी ओके आउजब्लाह मिन शैत रजीम बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब आलमीन अर रहमानिर्रहीम मालिक यमद्दीन याबदू व नस्तईन सिरात मुस्तकीम सिरात लज़ना अनता अलह गैर मजूबी अल वन आमीन जी थैंक यू सो मच तो काू जी मैं चाहूंगा कि अब आप अपनी स्टोरी हमें बताएं बचपन से लेकर अभी तक क्या कुछ आपने देखा समझा इस्लाम को ठीक है वो सब हमें बताएं जो भी आपका एक्सपीरियंस है वो हमारे साथ शेयर करें। जी तो देखिए बचपन से ही जो भी हम होते हैं तो हमारे पेरेंट्स अपनी जो उनकी थॉट्स होते हैं वो हमारे अंदर भरने की कोशिश करते हैं। वैसे ही मेरा भी था कि मैं जहां पे पैदा हुई थी वहां पर मेरे पेरेंट्स और जितने भी आसपास के लोग थे उस वक्त तो वो सब बहुत ज्यादा जो इस्लाम फॉलो करते हैं तो उन्होंने मुझे भी यही सिखाया। कुरान पढ़ाया और मस्जिद में भेजा। क्या कहते हैं? अलीिफ पढ़ाने के लिए और क्या कहते हैं कुरान शरीफ पढ़ाने के लिए। लेकिन मुझे हमेशा से यही लगता था कि जो कुरान शरीफ है कि वो अरबी में जैसे होती है लेकिन अरबी हमारी नेटिव लैंग्वेज नहीं है। तो मुझे समझ नहीं आता था जिसमें जो कुछ भी लिखा है ये मतलब क्या लिखा है क्या बोल रहे हैं। सिर्फ पढ़ तो लेती थी लेकिन समझ नहीं आता था। तो मैं अपनी मम्मी से भी बोलती थी कि मम्मी मुझे लगता है कुरान को हिंदी में पढ़ना चाहिए। तो मम्मी कहती थी कि नहीं उसमें सवाब नहीं मिलता है। अगर आप हिंदी में पढ़ोगे ना तो आपको वो सवाब नहीं मिलेगा जो अरबी में पढ़ के मिलेगा। अरबी में पढ़ना कहा जाता हां तब तो छोटे होते हैं ये बात तो बाद में पता चली कि लैंग्वेज तो कोई भी हो लैंग्वेज से सवाब का कोई लेना देना नहीं है एक्सक्टली तो उसके लिए फिर क्या कहते हैं मुझे ये लगता था हमेशा से लेकिन मतलब अल्लाह के लिए और प्रॉफेट मोहम्मद के लिए तो बहुत ज्यादा इज्जत थी अगर कोई कहता भी था ना तो मतलब प्रॉफिट मोहम्मद के बारे में तो कुछ भी नहीं सुनना होता इतनी ज्यादा मोहब्बत हो जाती है तो शुरू से ही था और ऊपर से सब कहते भी थे कि नबी ने हमारे लिए इतना किया उम्मत के लिए किया ताकि उनकी उम्मत जहन्नुम में ना जाए और वो हमेशा हक का साथ देते थे बाततिल से टकराते थे और ऐसे कर करके मतलब हमारा पूरा माइंड फीडिंग कर रखी थी कि कितने ज्यादा अच्छे थे रसूल अल्लाह और उन्होंने कितना ज्यादा हम लोगों के लिए किया उनके और ये भी बताते थे कि उनके जो नाती थे हजरत हुसैन उन्होंने भी हमारे लिए कुर्बानी दी है तो हमें उनकी रिस्पेक्ट करनी है उनके जनरेशंस की रिस्पेक्ट करनी है बहुत ज्यादा तो ये सभी बताते थे लेकिन जब आसपास का माहौल देखो ना जैसे जैसे हमेशा मैं देखती थी कि जो वुमेन और मैन है ना उसमें इक्वलिटी नहीं दिखती थी। समाज में ही नहीं दिखती है। जैसे कि वुमेन को हमेशा घर के अंदर रखते हैं और क्या कहते हैं जहां भी वो बाहर जाए बुर्के में जाए। तो मुझे ये हमेशा बुरा लगता था कि कोई भी औरत है उसको अपना चेहरा आप छुपाने के लिए क्यों कह रहे हो? मैम अपनी मम्मी को भी यही कहती थी कि मम्मी क्यों आप ये शक्ल ढकते हो? ये तो नहीं ढकनी चाहिए। और शक्ल तो पहचान होती है मेन तो। आइडेंटिटी होती है इंसान की। तो वो क्यों आप छुपा रहे हो? तो मम्मी कहती है तुम नहीं समझती हो कुछ। ऐसे नहीं कहते हैं। और यह तो पुरानी बातें हैं। यह तो अल्लाह पाक जन्नत में भेजेंगे जो ऐसेसे करते हैं, नमाज पढ़ते हैं, जो रोजा रखते हैं। ऐसे बस कह देते थे और हम भी इतना अपने मतलब स्कूल की पढ़ाई में इनवॉल्व रहते थे कि इन सब चीजों पे ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। कभी-कभी मौका मिलता था तो बोल देते थे। तो बस ऐसी लाइफ चल रही थी। उसके बाद फिर ऐसे ही चलती गई। रमजान आ गए तो रोजा रख लिया, नमाज पढ़ ली और उसके बाद बस क्योंकि मैं मॉडर्न फैमिली से थी ना तो मेरी फैमिली ज्यादा मेरी एजुकेशन पे जो हमारी वैसी एजुकेशन है मैथमेटिक्स, साइंस इन सब पे ज्यादा कंसंट्रेशन देती थी कि तुम ये ज्यादा पढ़ो। कुरान पे भी देती थी लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। तो क्योंकि थोड़े मॉडर्न मुस्लिम लाइफ थे तो इतना ज्यादा नहीं करते थे। तो हमारी लाइफ अच्छे से जा रही थी। हालांकि जो मेरा ब्रदर है वो तो मैं समझती हूं शुरू से ही एथिस्ट ही है। वो अभी भी नहीं मानता है और पहले भी नहीं वो कभी मानता था। उसने अपनी लाइफ में कभी मतलब इस्लाम कबूल ही नहीं किया। ये समझ लो आप वो बस मुसलमान घर में पैदा हुआ था और जबकि मैं जो मैं जो थी ना वो मैं मैं काफी ज्यादा बिलीव करती थी और मुझे सबसे ज्यादा मोहम्मद जो हमारे हजरत मोहम्मद है उनसे बहुत ज्यादा मोहब्बत थी मुझे सबसे ज्यादा तो लेकिन उसके बाद फिर क्या हुआ मैं बहुत ज्यादा वो नहीं करती थी फिर मे बी 2017 की बात है मैं सेवंथ क्लास में होंगी उस वक्त तो मेरी लाइफ में एंट्री हुई बहुत बड़े खलनायक डॉक्टर जाकिर नायक की तो उनकी हां उनकी वीडियोस मतलब आई तो मैंने देखा क्योंकि सेवंथ क्लास में आप देखो कितना ही दिमाग होता होगा। हम तो हां वो बहुत ही मतलब साइंटिफिक बंदा बनता था और कोट पट पहन के पूरी इंग्लिश बोलते थे। तो मुझे लगता था कि नहीं ये थोड़ा एजुकेटेड इंसान है तो शायद इसकी बात में भी लॉजिक होगा। हालांकि ऐसा होता नहीं है। तो फिर क्या कहते हैं? मैं उनकी मैंने भाई देखनी वीडियो शुरू की एक एक दोद घंटे की। उसमें उनकी एक ये भी वीडियो थी कुरान और साइंस में जो बताते थे वो कि क्या-क्या है उसमें रिलेशन उन्होंने हां सब कुछ और उन्होंने वो कोई शुतुरमुर्ग का अंडा ऐसे करके कि शुतुरमुर्ग का अंडा और उसकी शेप से जो अर्थ है वो गोल ऐसे बता दी कि ये कुरान में है। बिग बैंग कुरान में है। ऐसे कर के इन्होंने बहुत ज्यादा वो किया और मैं इतनी समझ लो जाहिल थी कि मैं मानती गई उनकी बात को और मुझे लगा क्योंकि इस्लाम पे था तो पहले ही बिलीव था है ना अब और ज्यादा हो गया था कि हां भाई ये बंदा बोल रहा है तो सच तो होगा ही इतना एजुकेटेड है ये तो बाद में मैं अब सोचती हूं कि मैं कितनी मतलब बेवकूफ हुआ करती थी फिर मैंने मतलब इस्लाम को बहुत ज्यादा मैंने सोचा कि नहीं नहीं अब तो मुझे पढ़ना चाहिए फिर मैं रोजे भी रखने शुरू कर दिए सारे और नमाजें भी मैं पांचों पढ़ती थी कहीं मिस ना हो जाए और थोड़ा बहुत जन्नत का भी मुझे लालच होने लगा था उसकी वीडियो देख के हम नहीं तो के लिए तो कुछ भी नहीं होता ना जन्नत में नहीं नहीं वो जैसे बताते थे ना कि मतलब आपका तो मकाम ही आला दर्जा है आपका आपको बहुत इज्जत मिलेगी अल्लाह पाक आपसे बहुत ज्यादा खुश होंगे तो ऐसे करके ये बोलते थे और फिर मैं भी और ऊपर से सबसे ज्यादा डर होता है जहन्नुम का डर कि आग में जलाएंगे आपको है ना लालच से ज्यादा ज्यादा डर होता है। हालांकि लालच से ज्यादा डर होता है। बहुत सारे और ये जो लालच और ये जो डर है ना ये दोनों चीज इंसान के अंदर नहीं होनी चाहिए। अगर ये दोनों में से कोई भी है ना तो आप एक अच्छे इंसान नहीं बन पाओगे। ये मुझे बाद में बात पता चली समझ में आई मुझे। तो मैं फॉलो करती रही करती रही। फिर आई थिंक 2019 का टाइम था और ज्यादा फोकस तो मेरा अपनी एजुकेशन पे ही रहता था। मैं इन सब चीजों पे मतलब कमी ही करती थी फोकस और उसके बाद फिर डॉक्टर विकास दिव्य कीर्ति सर है मतलब दृष्टि के होस्ट है वो काफी मतलब एजुकेटेड इंसान है आईएएस की टशंस देते हैं वो ओके तो हां तो फिलॉसफी का एक लेक्चर YouTube पे आ रहा था उनका फर्स्ट टाइम पे तो मैंने वो देखा तब मैंने फिलॉसफी का पहली बार नाम सुना कि अच्छा फिलोसफी भी कुछ कोई सब्जेक्ट होता है उसके बाद फिर मैं उसमें थोड़ा पढ़ने लग गई फिलॉसफी और मैंने सोफीस वर्ल्ड बुक पहले पढ़ी तब मेरा थोड़ा बहुत मुझे लगा कि कुछ तो है ये इस्लाम का रिलीजन का थोड़ा लोचा चल रहा है क्योंकि उसमें सभी मतलब जितने भी हमारे फिलॉसफर्स हैं उनके बारे में भी काफी बताया उन्होंने और ऐसे करके फिर मैं फिलॉसफी पढ़ने लग गई तब मुझे गॉड पे डाउट होना शुरू हुआ फिलॉसफी पढ़ के फिर मुझे लगा कि हां ये सारी चीजें फिर गॉड पे मेरा डाउट आने लगा लेकिन मेरा डाउट मोहम्मद पे कभी भी नहीं आया रसूल अल्लाह पे और मैं मेरा डाउट आता था तो गॉड पे आता था लेकिन मैं ये सोच के चुप कर जाती थी कि मतलब रसूल अल्लाह कहते हैं कि जो कुरान है वो अल्लाह का कलाम है और वो क्योंकि मेरे बचपन से मेरे माइंड में ये बात पीट थी कि वो बहुत ही ज्यादा सच्चे थे और वो तो इतने अच्छे थे कि उनके ऊपर कोई कूड़ा भी फेंकता था तो वो जाकर मतलब उसके घर में झाड़ू लगाते थे। तो इतना ज्यादा अरे नहीं भाई नहीं मतलब हमें ये बताया गया है ना बताने को तो कुछ भी बता दो तो हमें यही बताया गया है तो मैं सोचती थी कि हां भाई जो इंसान मैं ये सोचती थी कि जो इंसान इतना अच्छा है वो झूठ क्यों बोलेगा इतना बड़ा झूठ क्यों बोलेगा कि ये कुरान अल्लाह का कलाम है ये सब तो मैं यही सोचती थी उसके बाद फिर क्या हुआ एक दिन ना मतलब मैं ऐसे ही देखती रही देखती रही फिर आपका वीडियो पता नहीं कहां से आ गया मेरे उसमें है ना तो आपकी हजरत आयशा हां हजरत आयशा और नबी अल सलाम की क्या कहते हैं उनकी शादी की वीडियो थी तो मुझे इससे पहले लिटरली मुझे पता नहीं था कि उनकी मतलब एक छ साल की बच्ची से शादी भी हुई है। मुझे नहीं पता था इस बारे में। तो जब मैंने फर्स्ट टाइम देखा तो मैं तो यही देख के शॉक हो गई कि अच्छा उनकी शादी भी हुई है। ये क्या बोल रहे हो आप? मुझे लगा ये कोई प्रोपेगेंडा कर रहे हो। कुछ मतलब इस्लाम को ऐसे बुराई कर रहे हो आप। हां हां लेकिन आप एविडेंस हां हां हां वही तो लेकिन क्या कहते हैं मेन थिंग ये थी कि आपने बकायदा हदीसों के रेफरेंस दे रखे थे ठीक है कोई ऐसे तो आप बोल नहीं रहे थे कि मैं इग्नोर कर दूं उसको तो मैं मतलब फिर मैं मेरे क्या कहते हैं मुस्लिम ऐप जैसे मैंने डाउनलोड कर रखा था और और भी हदीस वगैरह लेकिन मैं पढ़ती नहीं थी ज्यादा तो मैंने जब आपकी वीडियो देखी फिर मैं गई वहां पे मतलब मैंने Google भी किया और मैंने पढ़ा तो मैं एक टाइम के लिए तो मैं शॉक ही हो गई कि ये क्या है मतलब कि ये रसूल अल्लाह को तो इतना अच्छा बताते हैं। ये छ साल की बच्ची से शादी कैसे कर सकते हैं? तो क्योंकि छ साल मैं मैं तो बाल विवाह के इतनी ज्यादा खिलाफ हूं। 18 ईयर की लड़की की भी अगर शादी होती ना मेरे यहां तो मुझे लगता है कि यार इसकी लाइफ आप क्यों बर्बाद कर रहे हो? पहले इसको पढ़ जाने दो अच्छे से फिर इसको इंडिपेंडेंट बनने दो। फिर आप उसकी शादी करो। देखो 18 साल जो है ना वो तो इंडिया में जैसे कानून बनाया वो एक मिनिमम एज है। 18 में भी इतनी मैच्योरिटी नहीं होती कि कोई अपने हां मतलब शादी हो जाए अपना घर संभालना बैठ जाए। राइट राइट एक्सजेक्टली क्योंकि आपकी पढ़ाई होती है। आपकी ग्रेजुएशन में ही आपको

बहुत ज्यादा टाइम लग जाता है। जब तक आपकी ग्रेजुएशन कंप्लीट होती है, तब भी तभी आप 18 से प्लस हो जाते हो। उसके बाद फिर आपको अपने करियर पर भी फोकस करना होता है। बहुत सारी चीजें होती हैं।

वही तो, तो फिर मैंने देखा, मैंने कहा यार छह साल की बच्ची और फिर मुझे ये भी नहीं पता था इनकी नौ शादियां हुई हैं। तो मैंने कहा ये नौ शादी का क्या चक्कर है? फिर मैं बहुत ज्यादा डिप्रेशन में आ गई। मतलब मुझे ये लगा कि जिस इंसान को, मतलब बहुत ज्यादा इतना वो किया मैंने, अपने पेरेंट्स के बाद सबसे ज्यादा उसको इंस्पायर मानती थी मैं, उसको इंस्पिरेशन मानती थी मैं अपनी, और मैंने कहा ये क्या हो गया? तो अचानक से जैसे होता नहीं है कि आपके धुंधला पूरा हो जाता है सब कुछ, कि ये एकदम अलग ही चीज आ गई सामने। तो मुझे ये लगा।

फिर उसके बाद फिर, लेकिन थोड़ा सा टाइम लगा एक्सेप्ट करने में। वो, वो वाली वीडियो आई थी मेरी जिसके अंदर मैंने आयशा की उम्र के बारे में बात की है, राइट? हां, हां, हां, उनके हजरत आयशा और मोहम्मद की शादी की वीडियो थी वो। तो वो मैंने, और उसी में फिर नौ शादियां का भी आया जिक्र आया था। लेकिन मैंने बचपन से यही सुना था कि जो मौलवी वगैरह अगर होते थे, तो मैंने यही सुना था कि उन्होंने तो जब वह 25 साल की उम्र में थे, तो उन्होंने एक विधवा से शादी की थी, है ना? हजरत खदीजा से। तो मुझे लगता था कि देखो कितना अच्छा बंदा है, और बताओ उन्होंने समाज की प्रथाओं को वो करके, मतलब एक विधवा से शादी की, कितना अच्छा इंसान है ये। तो मतलब मेरी एक जगह, हां, आपको सेकंड पार्ट नहीं पता था ना? यही आदमी एक जगह तो प्रथाओं को तोड़ के 25 साल की उम्र में 40 साल की औरत से शादी कर रहा है। सेम आदमी उन्हीं प्रथाओं को और मजबूत कर रहा है, जहां छोटी-छोटी बच्चियों से शादी होती है। हां, छह साल की लड़की से शादी करके और उस पर कह रहे हैं कि ये तो क्या कहते हैं, उम्मत की भलाई के लिए। आप छह साल की लड़की से शादी करो, उसमें उम्मत की क्या भलाई है? मुझे यही नहीं समझ में आ रहा है। मतलब कुछ भी, कुछ भी बोलोगे आप, हम कुछ भी मान लेंगे। ये क्या बात हुई? तो ऐसे करते हैं ये लोग।

फिर मैं धीरे-धीरे, हालांकि, लेकिन मेरा इस्लाम से तब भी मुझे ये लगा कि यार कहीं कुछ गलत तो मैं नहीं सोच रही हूं? कहीं शैतान मुझे भटका तो नहीं रहा है? एक तो शैतान का भी बहुत बड़ा बड़ा कॉन्सेप्ट है इस्लाम में कि ये, ये तो शैतान बसवसे डाल रहा है। ऐसी बात है नहीं। ऐसे कहते हैं लोग। तो फिर मैंने उसके बाद ना, आपकी एक वीडियो आई थी ज़द और पता नहीं उनकी वाइफ का क्या ज़ैनब नाम था। पता नहीं, मैं भूल गई हूं शायद। हजरत मोहम्मद के गोद लिए हुए बेटे नहीं थे, उनकी बीवी थी ज़ैनब। हेलो जी। हेलो। हम, हां बिल्कुल, बिल्कुल आवाज आ रही है आपकी? हां जी। तो मैंने जब यह देखा कि हजरत मोहम्मद के बेटे जो, जिनको उन्होंने गोद लिया था ज़द को, उनकी बीवी से, मतलब उनकी शादी का और यह बात कुरान में आ रखी है, तो मैं तब फिर मैंने उस टाइम पे फिर मैंने छोड़ दिया। मैंने कहा कि कुरान अल्लाह का कलाम है। ऊपर से ये कहते हैं कि कायनात, मतलब जब कयामत आएगी तब तक के लिए ये आखिरी किताब है। और ऐसी किताब में आपने ऐसी जाहिलियत वाली बातें लिख रखी हैं। मतलब क्या है इसका लॉजिक? कि मतलब वो वीडियो भी देखी है हमारी जो ज़द, ज़द की वाइफ से, जो मतलब इनके बहू से शादी हुई है उस, हां जी, हां जी, वही देख के वहीं से फिर मैंने फाइनली मैंने कहा, अब कुछ भी, अब तो मैं जहन्नुम ही जाऊंगी। ऐसे लोगों की जन्नत में मुझे नहीं जाना। बहुत बढ़िया। हां, तो मैंने कहा ये क्या बात है? मतलब कि आप इतने सारे लोगों को इन्होंने बेवकूफ बना के रखा। मैंने कहा ये देख लो, क्या इन्होंने चालाकी की, पॉलिटिक्स खेली बहुत बड़ी, और एकदम सियासतदान थे बहुत बड़े वाले। सच में। कि कितने, और ऊपर से फिर मैं, मैंने शबे मेरा का भी नहीं पढ़ा था। फिर मैंने सोचा कि अब तो पढ़ती हूं। फिर मैं हदीस भी पढ़ने लग गई आपकी वीडियोस वगैरह देखने के बाद। हम्म।

फिर वहां पे हदीस का जब मैंने पढ़ा, उनकी वो नमाज़ें पांच नमाज़ें नहीं, 50 नमाज़ें फर्ज हुई थी। पांच नमाज़ें हो गई थी बाद में। हां, वो 50 लेकर, हां, शबे मेरा आई, हां, शबे मिराज का। तो वहां पे कहते भी, ऊपर से आप ये देखो, ये तो कहते हैं अल्लाह पूरी कायनात का, मतलब मालिक है, क्रिएटर ऑफ द यूनिवर्स है, और उसने आप देखो कि जो क्रिएटर ऑफ द यूनिवर्स है, उसने कितनी परफेक्टली इस यूनिवर्स को क्रिएट किया है, उसको इन्होंने इतना डंप यहां पे शो किया है कि वो कह रहे हैं कि 50 नमाज़ें आपको हमने क्या कहते हैं, गिफ्ट दी है एज अ गिफ्ट। आप और आप ये देखो कि 24 घंटे में अगर एक इंसान 50 नमाज़ें उसपे फर्ज होंगी, तो यानी उसको 29 मिनट्स का बीच में सिर्फ टाइम मिल रहा है। तो इस टाइम में वो अपनी खेतीबाड़ी करेगा, वो अपना खाना बनाएगा, वो अपना सोशल कल्चर देखेगा, मतलब पढ़ेगा लिखेगा, क्या नमाज़ ही पढ़ता रहेगा मतलब सारा टाइम? फिर अगर नमाज़ ही पढ़ता रहता वो 50, तो आप देखो कि आज इतनी साइंटिफिक रेवोल्यूशंस जो हो रही हैं, जो हम पहाड़ से लेकर यहां तक आज बिल्डिंग्स बना रहे हैं, और चांद पे लोग जा रहे हैं, वो कैसे हो पाता पॉसिबल? आप ये देखो इन्होंने अल्लाह को कितना डम दिखा दिया खुद को सुपीरियर साबित करने के लिए।

और काली जी, एक, एक और इंपॉर्टेंट बात थी उस वीडियो में और वो ये थी कि ये अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गए थे। हां, हां, हां, मैंने वो भी, हां, मैंने पढ़ा था वो भी। जी। और उन्हीं के घर से निकले और बहाने देखो कैसे मार रहे हैं। मतलब ऑन द स्पॉट बंदे ने पूरी स्टोरी गढ़ ली, देखो आप। नहीं, नहीं, ऑन द स्पॉट नहीं गड़ी होगी वो। दरअसल, नहीं, हां, इन्होंने एक प्लानिंग करके रखी होगी कि अगर मैं कभी पकड़ा गया तो मैं बोलूंगा। यह तो है। मतलब बहुत देख लो कितनी शातिरता से ऐसे इन्होंने मैनपुलेट किया है। मैं तो जब सुनती हूं, आप अब मैं देखती हूं ना न्यूट्रल हो के, जब आप पढ़ो ना कुरान को पढ़ो या हदीस को, आप न्यूट्रल हो के पढ़ोगे ना, आपको किसी और चीज की जरूरत नहीं है। आप वैसे ही छोड़ दोगे इस्लाम। इतना ज्यादा, इतना ज्यादा वो कर रखा है इन्होंने।

और मेरी जो फ्रेंड्स वगैरह हैं, जैसे वो पढ़ती भी हैं, मान लो हदीस। अवल तो मदरसे में जब आप स्टार्टिंग में जाओ ना, तो आपको हदीस नहीं, वो रट्टा मरवाते हैं बस। कि पहले तो वो आपको अरबी की प्रोनाउंसिएशन अच्छे से सिखाएंगे एक साल, और तो कुछ भी नहीं सिखाएंगे। क्योंकि मेरी खुद की बेस्ट फ्रेंड है ना, वो मदरसे जाती है, तो उनको यही करते हैं। और जब इनका पूरा दिमाग पक्का हो जाता है, मतलब पूरा इस्लाम इनके दिमाग में गढ़ देते हैं, उसके बाद फिर इनको हदीसे वगैरह देते हैं पढ़ने के लिए। तब तक इंसान पूरा वो हो ही जाता है उसका ब्रेन वॉश, कि वो सोच ही नहीं पाता। फिर वो जो पढ़ता है, एक्सेप्ट कर लेता है उसको। हम्म। ऐसे करते हैं ये लोग। पूरा मैनपुलेट करके रखा हुआ है इन्होंने।

तो आपने किसी को कन्वर्ट करने की ट्राई किया था क्या? आपने किसी रिलेशन? मेरी, हां, हां, हां, मेरी फ्रेंड है, वही मदरसे वाली। मैंने उसको पूछा। मैंने क्वेश्चन किया उसको। मैंने उससे पूछा कि यही ज़द और ज़ैनब का। मैंने कहा कि अच्छा, जो गोद लिए होते, बूहे बच्चे होते हैं, उनको क्या कहते हैं, शादी कर सकते हैं क्या उनसे या उनकी वाइफ वगैरह से? तो कहती, हां, कर तो सकते हैं। तो मैंने कहा, ये गलत नहीं है? तो कहती, नहीं, गलत तो है, लेकिन बस एक परमिशन दे दी है। तो मैंने कहा कि क्यों, ये जब सबसे, मतलब अच्छा दीन है, सबसे अच्छा वो है, और आखिरी है, मेन बात तो आखिरी है, तो इसमें क्यों इतनी सारी गलत चीजें लिख रखी हैं? तो कहते, अरे ये तो बहुत पुरानी वो है, और क्या कहते हैं, करता कौन है? ये तो लिख दिया है बस, करता कौन है? मैंने कहा, ये तो समाज की चलो अच्छाई है कि वो नहीं करता। समाज चलो, हां। नहीं, तो आपने तो लिख ही रखा है। ये तो गलत बात है ना। तो कहती, अरे नहीं, नहीं, ऐसे शैतान बसवसे डाल रहा है तुम्हारे अंदर। तुम ना नमाज़ पढ़ा करो और कुरान पढ़ा करो और ये सब, मतलब कुरान की तिलावत करो। ये सब मत बातों में पढ़ो। मैंने कहा, ये क्या बात हुई? कोई क्वेश्चन करो तो बस नमाज़ पढ़ो। तुम तुम्हारे बसों से आ रहे हैं। ये ऐसे करते हैं बस।

एक, एक हमारे साथी हैं जिनसे मेरी कई बार बात हुई है। अभी तक इंटरव्यू देने वो नहीं आ पाए। लेकिन उन्होंने मुझे ये बात बताई है कि उनका इस्लाम छोड़ने का रीजन यही है कि उन्होंने एक बच्चे को लेकर पाला था। उसे वो अपना ही बच्चा समझते हैं। और जब उन्हें ये बात पता चली कि जब वो बड़ा हो जाएगा तो उनकी वाइफ को अपने ही बच्चे से, उस उस बेटे से अपने से, उससे पर्दा करना पड़ेगा। हम्म। ठीक है? और इन बस जब उन्हें यह बात पता चली, तो इस बात पर उन्होंने इस्लाम छोड़ दिया। हम्म। वही तो है कि मेनली ना एजुकेशन बहुत जरूरी है पहली बात तो। और वो भी क्या कहते हैं, हायर एजुकेशन। आप ये ए बी सी डी पढ़ के, आप ये थोड़ी बहुत वो पढ़ के, आप ये नहीं कर सकते। मैंने खुद देखा है, मेरा ब्रदर है, मतलब कज़न ब्रदर है वो मेरा। इंजीनियरिंग की है उन्होंने, और वो मतलब WhatsApp पे स्टेटस उनके, ये दुआ करो तो तुम्हें ये मिल जाएगा। ये दुआएं पढ़ा करो तो तुम्हें वो होगा अच्छे से। मतलब क्या बात हुई? आप दुआएं पढ़ के अब दुनिया चलेगी क्या? मतलब देख लो, जो लोग आप देखो कि इतने सारे साइंटिस्ट, वो बेचारे दिन रात लैब लैबोरेटरी में इतना दिमाग खपा रहे हैं, और डॉक्टर्स इतना ज्यादा पढ़ लिख के इलाज कर रहे हैं हॉस्पिटल्स में, मतलब उनको कोई क्रेडिट नहीं देते ये लोग। सारा क्रेडिट अल्लाह को, सारा क्रेडिट पैगंबर मोहम्मद को। सारा क्रेडिट, जो मेहनत कर रहे हैं, उनको कोई क्रेडिट। पैगंबर मोहम्मद कुछ बना के तो दिखाते। एक माचिस। हां, वही तो। हां, उन्होंने तो बस चांद के दो टुकड़े कर दिए, बताओ। और चांद के दो टुकड़े कर दिए। अब ये सोचो, मैंने देखी वो चांद के दो टुकड़े वाली वीडियो देखी आपने? हां, हां, हां, मैंने देखी। मैंने पहले सुना भी था उसके बारे में, तो मैं यही सोचती थी, ये चांद के कैसे दो टुकड़े हो सकते हैं? मतलब ये, मैं सोचती थी पहले। आप ये देखो कि ये कह रहे हैं कि हम, मतलब एक रात में, कि कोई लाइट के से भी ज्यादा स्पीड थी इनकी, कि ये मतलब सातों आसमानों को पार करके, मतलब चले गए। कहां से कहां तक और वापस भी आ गए। और बीच में वो उन्होंने इमाम, क्या कहते हैं, सभी इमामों को नमाज़ भी पढ़ा दी वहां पे मस्जिद अक्सा में जाके। मतलब इतने, इतने सारे काम कर दिए इन्होंने। हां, यहां पे ये साइंस घुसा देते हैं कि क्योंकि जब लाइट की स्पीड से चलते हैं, तो टाइम रुक जाता है। चलो ठीक है। ये बात हमने मान ली। ठीक है? साइंटिफिक बात है कि वो जो घोड़ी थी, वो उसकी लाइट की स्पीड से चली, टाइम रुक गया, इसलिए वो उतने टाइम में वापस भी आ गए। ठीक है? अगर हम इस साइंटिफिक कॉन्सेप्ट को मान रहे हैं, तो हम ये क्यों नहीं मान रहे कि जब वो ऊपर गए, आसमानों में गए, तो वहां पर उन्हें फिर ऑक्सीजन की जरूरत क्यों नहीं पड़ी? वही तो। ये, ये नहीं करते हैं ये सब। हम्म। और फिर उस आदमी के, उसी आदमी के जंगूद में दांत कैसे टूट गए? हां। फिर इन, ये सारे क्वेश्चन के आंसर ही नहीं देते ये।

और आप ये देखो कि अगर इतनी उनमें और, मतलब आप ये देखो कि इतने सारे ये कहते हैं प्रॉफेट्स और भी आए इनसे पहले, ठीक है? जो हजरत ईसा अल सलाम आए, हजरत युसुफ अल सलाम, इतने सारे। उसके इन सबके बावजूद भी, जो हजरत हुसैन हैं, उनको कहते हैं जन्नत के शहजादे वो होंगे, और वो बाकी सारे प्रॉफिट्स का क्या? उनके साथ तो आप इंसाफ ही नहीं कर रहे हो अच्छे से। अच्छा, हम है ना, ये देखते ही नहीं। अपनी फैमिली ट्री से इन्ह, इन्हने सारा बना रखा है। ऊपर से आप ये देखो, ये जितने भी प्रॉफिट्स हैं, इन्होंने एक फैमिली ट्री बना रखी है। मतलब आप देखिए, जो हजरत इब्राहिम हैं, उनके चलो दो बेटे, फिर उनसे उधर वो आई और जनरेशन, और इनसे इधर कह देते हैं इस्माइल अलम से, ये कहते हैं कि मोहम्मद कह देते हैं ये। अब पता नहीं है भी या नहीं, हमें क्या। अरे इन्होंने, इन्होंने एक शजरा बना रखा है, पता है आपको? इन्होंने मोहम्मद का जो एक इन्होंने शजरा बनाया है, उसमें इन्होंने कंप्लीट ट्री बना दी है, मतलब अपनी मनमर्जी से इन्होंने कुछ भी नाम जोड़ दिए हैं वहां पे। वही तो। और उसे ले जा के इन्होंने इस्माइल और फिर इस्माइल से इब्राहिम और फिर इब्राहिम से ऊपर की तो खैर जो भी डिटेल्स हैं, वो तो फिर इन लोगों ने पहले से ही बना रखी है ना, यहूदी और क्रिश्चियंस लोगों ने, वो ऑलरेडी बना रखी है। तो इन्होंने क्या करा है कि इन्होंने मोहम्मद को वहां तक जोड़ दिया है। और अगर आप उन सबकी ऐज निकाल लो ना, तो वो मुश्किल से 600, 700 साल बैठेगी। हम्म। ज्यादा। हम्म। अब आप खुद सोचो यार। हां, हां। दुनिया को हमें, मतलब कार्बन डेटिंग से हमें पता चला है आज के टाइम पे कि के इंसान कितना पुराना, पुराना है। होमोसेपियंस कितने पुराने हैं। ठीक है? ये लाखों साल का इवोल्यूशन है, और आपने यार, मतलब हजार, 2000 साल में आपने पूरी पूरी दुनिया ही समेट दी आपने। मोहम्मद पैदा हो गए हजार, 2000 साल के अंदर-अंदर ही। आप ये देखो कि ये लोग एवोल्यूशन को नहीं मानते हैं। कहते हैं, मैंने एक मौलवी का वो देखा था। कहते हैं, एवोल्यूशन तो जी थ्योरी है। अरे थ्योरी, ये क्या थ्योरी साइंस की? तो थ्योरी भी इतनी ज्यादा वो ऐसे नहीं बस लिख दी, और तुम्हारी कुरान की तरह लिख दी, और जी हो गई थ्योरी। वो पूरी क्या कहते हैं, साइंटिफिकली प्रूफ्स हैं उसके। आप ये देखो कि अगर एवोल्यूशन नहीं हुआ है, तो इनसे पूछो कि जो चिंपैंजी हैं, और क्या कहते हैं, ह्यूमन में 97% डीएनए मैच होता है, वो क्यों होता है फिर? हम, अगर ये एवोल्यूशन ही नहीं हुआ है, अल्लाह को बस ऐसे ही मजा आ रहा था, अल्लाह ने सोचा चलो कोई बात नहीं यार, थोड़ा सा कॉपी पेस्ट करके कर देता हूं। ये बिल्कुल ऐसे करते हैं ये।

और मेनली सबसे ज्यादा मुझे लगा स्लेवरी का। देखो आप इन्होंने कितना ज्यादा वो किया है। मतलब जो स्लेव्स है ना, उनको तो ये ह्यूमन बीइंग ही कंसीडर नहीं कर रहे हैं। एक्सैक्टली। ये सबसे बड़ा पॉइंट है। देखो यहां पर आके ना, इस्लाम की पूरी की पूरी जो दीवार है, वो ढह जाती है कि ये आखिरी रिलजन है। भाई तुम्हारा अगर आखिरी रिलजन था, तो तुम्हें दुनिया की सबसे बड़ी बुराई गुलामी। कम से कम इसे तो खत्म कराते आप। वही तो बात है। ऊपर से औरतों को गुलाम बना रहे हो। देखो उनके, मैंने अपनी एक फ्रेंड है, वही मेरी फ्रेंड। मैंने उसको बोला कि यार कि जो प्रॉफेट है, उन्होंने जंग की थी खैबर में, और क्या कहते हैं, उसके हस्बैंड को मार के उसी फिर नेक्स्ट डे उन्होंने शादी कर ली, और फिर क्या कहते हैं, उनके साथ फिजिकल रिलेशन भी बनाए। तो ये क्यों किया? ये तो गलत बात है ना। तो आप उनके उस औरत के बिल्कुल भी जज्बातों का कोई ख्याल नहीं। उस, वो औरत की फीलिंग्स की कोई कदर नहीं, ऐसे करके। तो वो कहती, मेरे से इतनी, एक तो बदतमीजी वाली बात उसने कही, कहती, वो हमारे प्रॉफेट थे, वो औरत तो बहुत खुद को खुशनसीब समझ रही होगी कि उसे प्रॉफेट से शादी करने का मौका मिला है। मैंने कहा, वो कितनी ज्यादा क्या कहते हैं, ओपन माइंडेड होगी कि जिसका शौहर को आपने कल ही मार दिया, और वो आज हैप्पीली, मतलब आपसे शादी कर रही है। कितनी ओपन माइंडेड लड़की होगी वो उस जमाने की, देख लो। ऐसे डिफेंड करते हैं। बताओ। मैंने कहा, ये क्या बात हुई?

कायु जी, एक डिटेल मैं यहां पर ऐड कर दूं छोटी सी। जिन लोगों को ऐसा लगता है, उन्हें मैं बता दूं के जब मोहम्मद साहब उनसे अपनी शादी रचा रहे थे ना, रात को अपनी सुहागरात में, सुहागरात नहीं करना चाहिए क्योंकि वो कुछ और था। उस वर्ड को हम नहीं लेंगे यहां पे। जब ये सब कर रहे थे वहां पे, तब इनका एक साथी तलवार लेके बाहर खड़ा था। हां। और जब सुबह, हां, सुबह को वो पूछते हैं कि भाई, तुम क्यों खड़े थे यहां पे? तो उसने यह बकायदा उसने यही बात बोली कि आपने कल ही उसके मां-बाप को, उसके हस्बैंड को सबको मारा था। तो मुझे इस बात का डर था कहीं आपको मार ना दे। इसलिए मैं यहां तलवार लेके खड़ा हुआ हूं। तो यहां से क्लियरली पता चल रहा है भाई, कि उस समय के क्या हालात थे। क्या था वहां पर? जी। हम्म।

उनको ये सब बताओ ना। तो वो कहती है, ये जईफ है। अच्छा, जितनी भी क्या कहते हैं, हदीसे इनके फेवर में होंगी ना, वो कोई भी आप देखिए जईफ नहीं निकलेंगी। लेकिन जो थोड़ी सी क्या कहते हैं, क्वेश्चननेबल होंगी, वो जईफ हो जाती हैं। मतलब हमें यह तो बता दो कि ये जईफ है और ये सही है। आपको कैसे पता कौन सी जईफ है और कौन सी सही है? आप क्या जा के आए हो वहां पे? ऐसे करते हैं ये? बिल्कुल, बिल्कुल। देखो ग्रेडिंग जो इन लोगों ने बहुत पहले करी थी ना, जईफ की। ठीक है? और सही की, वो आज के टाइम पे जो बहुत ही ऑथेंटिक ग्रेडिंग, सही ग्रेडिंग हुई हुई है, उसे भी ये कह देते हैं, नहीं जी, ये वाली जो है, ये सही तो है ये। यह सही ऑथेंटिक है। लेकिन इसका जो रावी था, वो वैसा कजाब था। अरे भैया, कजाब था, तो जिन लोगों ने, जिन लोगों ने उन हदीसों को कंबाइन करके, उन पे ग्रेडिंग दी है, वो बेवकूफ थे क्या? हम्म। ये ऐसे करते हैं।

और ऊपर से इन्होंने देखो, चार शादियां का कर रखा है। ये कितनी गलत बात है। ऑन एन एवरेज आप देखिए कि मैन और वुमेन जो है ना, उनकी रेशो इक्वल है। अगर आप एक बंदे को चार, अगर आप एक बंदी की कम भी हो रही है, क्योंकि कम हो रही है। राइट, राइट। हां, तो अगर आप एक बंदे को चार की वो कर रहे हो, तो बाकी तीन बंदों का जो आप हक मार रहे हो उनसे, नहीं, पहले की सोसाइटी में प्रॉब्लम्स नहीं होंगी। उनसे, नहीं, रेप बढ़ेगा। अगर आप इतना ही बहुत ज्यादा दिमाग लगाते हो, तो अपने फेवर में बातें करते हैं ये। सिर्फ अपने फेवर में बात करते हैं। ये आप देखिए, प्रॉफेट मोहम्मद ने नौ औरतों से शादी की। यानी उन्होंने आठ बंदों का तो हक वैसे ही मार लिया, और ये इंसाफ करने चलेंगे। ये इंसाफ करेंगे। दरअसल नबी को ऐसा लगता था कि जैसे उस दौर में जंगे हुआ करती थी। तो उन्हें लगता था ऐसे ही जंगे होती रहेंगी। ऐसे ही आदमी मरते रहेंगे। हां, हां। और ऐसी ही जो औरतें हैं, वो ज्यादा हो जाएंगी। अब जब वो ज्यादा हो जाएंगी, तो फिर एक-एक मर्द पे चार-चार औरत सही हैं। और एक और हमें, एक और हमें हदीस भी मिलती है, जिसमें ये कहते हैं कि जब उसका टाइम आएगा ना आखिरत का, जब टाइम आएगा, तो उस टाइम पे एक-एक आदमी पे 10-10 औरतें, 12-12 औरतें होंगी। तो इन्होंने, हां, इनका आईडिया बस यही चल रहा था। इन्हें यही लग रहा था कि दुनिया ऐसी ही चलती रहेगी, जिस तरह से आज के टाइम पे चल रही है, जो 1400 साल पहले चल रही थी। एक्सैक्टली। इनकी ना, इनकी सोच शरीर से कभी आगे बढ़ी नहीं, और ये बस उसी में रहे। ये औरतों को बस पर्दा करा लो। ये सब, क्योंकि इनकी खुद की सोच इतनी घटिया थी, तो ये सोचते थे कि ऐसे ही सारी दुनिया को समझते थे। इतनी गलत किया ना इन्होंने, पूछो मत। मतलब खुद तो चले गए हैं। अब देखो 1400 सालों से बाकियों का जीना इन्होंने दोहाल कर रखा है। मुझे तो ये सबसे बड़ी आयरनी लगती है।

अभी जो हम पीछे बात कर रहे थे कि एक आदमी अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गया, और उसकी वजह से आज इंसान पांच बार अपना माथा फोड़ रहा है। हां, ये देखो। और उसमें भी जाकिर नायक जैसे लोग कहते हैं, ये तो योगा से भी ज्यादा अच्छा है। एक्सरसाइज होती है। मतलब आप ये देखो, कोई इंसान कल को जॉब करने जाएगा, कौन होगा इतना बड़े दिल वाला कंपनी का ओनर कि जो अपने एम्प्लाइजस को कहेगा कि नहीं, नहीं, तुम तो नमाज़ ही पढ़ लो, और मेरा।

काम पेंडिंग पड़ा है भाई। मतलब इतना किसके पास टाइम है भाई। ये अलग ही है इनका। हम 50 रखा था, हम बताओ 50। और फिर पांच कर दी। और उसमें भी कहते हैं कि 10 का आपको चलो एक करोगे तो 10 का मिलेगा सवाब। सवाब के चक्कर में इन्होंने वो कर रखा है। हम ऊपर से कुरान की भी इतनी या।

अब आज के टाइम पे आप देखो कि लोग इतने ज्यादा कुछ वो हो चुके हैं कि कहते हैं कि रमजान में। मेरे ही घर की बात है ये कि एक कुरान हो गई जी। अब दूसरी लाओ। अब दूसरी हो गई जी, तीसरी लाओ। मतलब ये क्या लॉजिक है ये। आजकल के लोग करते हैं रटते रहते हैं बस चीजों को कि सवाब मिल रहा है, सवाब मिल रहा है। ऐसे करते हैं। अच्छा नया नया खरीद लेते हैं।

नहीं नहीं, आप समझे नहीं। मतलब एक बार जैसे मैंने अभी अलम पढ़ा। फिर एक वो। मैं समझ गया। वो तो वो तो हां, मैं समझ गया। सारी सुर मैंने पढ़ ली। फिर दोबारा। मतलब ऐसे ही लोग करते हैं। पता नहीं बिल्कुल दिमाग ही नहीं लगाते कुछ।

हम नहीं, वो पढ़े जाते हैं ना क्योंकि हमारे यहां ये माना जाता है कि जो जितना ज्यादा पढ़ेगा ना। ये एक बहुत ही दिखाने दिखावा करने वाली बात होती है। तो हमारे जैसे बचपन में ये होता था कि जैसे किसी ने दो कुरान खत्म किए तो उसका नाम होता था कि अरे इसने रमजान में दो कुरान खत्म। हां, बहुत नाम। फिर कोई तीन वाला निकल के आ गया तो कोई अरे भैया इसने तो तीन खत्म करे। फिर कोई चार वाला आ गया। अरे हां, ये तो आप हमारे मोहल्ले की बात बता रहे हो। मतलब मेरी दादी के यहां ऐसे ही होता है।

ये सब जगह, सब जगह होता है। हां। ऊपर से भाई इसने तो 30 रोजे रखे हैं। वाह, क्या बात है। ऐसे ही ये तो पूरा बुर्का ले रही है। अब इसको लड़के इसके लिए अच्छे आएंगे। अच्छे रिश्तेदार मिलेंगे कि हां भाई, हमारी बहू तो नमाजी है। हमारी बहू तो कुरान पढ़ती है। ये पर्दा करती है बहुत ज्यादा। ऐसे सोचती हैं लड़कियां। इसलिए ज्यादा करती हैं। मैं समझती हूं लड़कियां इसलिए ज्यादा करती हैं कि हमारे रिश्ते अच्छे आएंगे। रिश्ता, रिश्ता अच्छा आएगा। हां।

ऊपर से सोसाइटी में उनको रिकॉग्निशन अच्छा मिल जाता है ना कि ये फलाने की बेटी बहुत अच्छी है। ये ऐसे कर रही है, वैसे कर रही है। ये ये नहीं देखती है कि हमारा लॉन्ग टर्म कितना लॉस होगा। इससे इनकी खुद की आइडेंटिटी कितनी दब जाती है। ये सोचती नहीं है बिल्कुल।

एक्सजेक्टली। पूरी जिंदगी फिर उन्हें पर्दे में ही रहना पड़ता है। सही है। उन्हें रिश्ता जो मिल जाएगा, ठीक है। किसी मौलाना, मौलवी का रिश्ता। मौलाना आज के टाइम पे बहुत अच्छा पैसा कमाते हैं। आई नो। ठीक है। किसी मौलाना का रिश्ता आ जाएगा। अब देखो कि आगे आपकी लाइफ कैसी होगी। एक मौलाना आया। ठीक है। वो मौलाना तीन शादी और करेगा। मुफ्ती, मौलाना जो होते हैं ना ये बहुत ज्यादा सुन्नत पे भागते हैं। हां। सुन्नत पे भी भागते हैं ये। और इनका रहता है कि नहीं भैया, हमें तो करनी है ज्यादा से ज्यादा। ये मुफ्ती तारिक मसूद को देख लो। जितने भी हैं, मोस्टली ये करते ही हैं। तो मुफ्ती आपके।

हां जी, कुछ कहना है आपको उनके बारे में? मैं हां, बहुत बिल्कुल शौक से। मैं तो मतलब उस बंदे से तो मुझे इतनी ज्यादा चिढ़ है, पूछो ही मत आप। मुफ्ती तारिक मसूद मतलब हर गलत चीज को डिफेंड करने की आदत है उसको। चाइल्ड मैरिज को डिपेंड करेगा, स्लेवरी को डिपेंड करेंगे और चार शादी को इतना डिपेंड करते हैं, इतना कि पूछो मत।

हम वो उस बंदे ने बोला है कि अगर मैं चार को विधवा करके नहीं मरा ना, तो मेरे लिए इंसर्ट की बात। ये कहा है उसने। हम आप इसकी एक वीडियो आई थी। कहता कि तुम अगर पता नहीं ऐसे कह रहा था कि बहुत ज्यादा अच्छे मुसलमान बन जाओगे तो तुम्हारी क्या कहते हैं, हो जाएगी तुम्हारी भी शादी हो जाएगी 16 साल की लड़की से। और अगर 16 साल की लड़की से नहीं हुई तो चार-चार साल की लड़कियों से चार शादियां कर लेना। इतनी बदतमीजी देख लो इसके अंदर है। बताओ हद है। मतलब क्या ये औरतों को तो इंसान ही नहीं समझते हैं। बिल्कुल एकदम मेल सेंट्रिक रिलीजन है ये।

हम और मेल सेंट्रिक में भी इन्होंने क्या कहते हैं, ये देखो इतनी गलत प्रथा ये चलती है सरकमसीजन की। ये जो खतें करवाते हैं। सोचो आप कि कितनी गलत है ये। हम्म, बिल्कुल। उसमें हां, पूरे पूरे शहर को बुलाएंगे। ये दावतें भी करवाते हैं। बताओ। मैं तो सोचती हूं कि ये क्या कर रहे हैं? इतना क्या ही बताएं।

अब इसमें खास बात ये है इसकी कि इसे कहा भी जाता है कि सुन्नत। मतलब सुन्नत तो देखो जरूरी नहीं होना चाहिए। ठीक है? हां, लेकिन सब करते हैं। उसके बाद भी इसे हां, वाजिब के तौर पे किया जाता है। जैसे वाजिब हो। बिल्कुल ऐसे वाजिब के तौर पे हम ऐसे करते हैं ये।

अच्छा, मुझे यह बताएं आप कायु जी के जी, बहुत सारी हमारे चैनल पर लड़कियां कमेंट करती हैं। मुस्लिम लड़कियां हमें गालियां भी देती हैं। क्या लगता है आपको? क्योंकि इस्लाम में औरतों के ही हक सबसे ज्यादा दबाए गए हैं। हां, बिल्कुल। बाद भी वो उसे डिफेंड कर रही होती है। क्या लगता है आपको? क्यों डिफेंड करती है इतना?

ये तो पता है बचपन से ही इनके माइंड में एक चीज डाल दी गई है कि जो नबी है, रसूल हैं, वही हैं सब कुछ। और अल्लाह की क्या कहते हैं? बिल्कुल उनके खिलाफ नहीं जाना है। और दूसरी चीज इनको सोसाइटी से रिकॉग्निशन भी मिल रहा होता है कि ये बहुत ज्यादा अच्छी लड़की है। अगर ये नकाब करती है, पर्दा करती है और ऊपर से ये खुद अपने दिल में बहुत ज्यादा मान चुकी होती हैं कि अल्लाह ही है जो सब कुछ है। रसूल अल्लाह ही है। और इनके खिलाफ कोई कुछ भी बोलेगा तो ये इनसे बर्दाश्त ही नहीं होता है। ऊपर से मेरे ख्याल इनको बहुत ज्यादा जो ग्राउंड रियलिटी है ना कि ये पढ़ती नहीं है ज्यादा कि इस्लाम आया कैसे? क्या कैसे क्या हुआ? कौन सी आयत कब हुई? क्यों हुई? ये कारण भी ढूंढने की कोशिश नहीं करती हैं। मेनली यही रीजन मुझे तो लगता है।

हम एक्सक्टली। ब्रेन वाशिंग बहुत ज्यादा है। हम बहुत ज्यादा। मैं मेरी नानी के घर में मतलब जो मेरी नानी के घर है ना, वो तो ज्यादा ही रिलीजियस है। मतलब जो मेरी मम्मी के दादा हैं। उन्होंने तो खुद एक मस्जिद घर के सामने बनवा रखी है। आज भी है वो मस्जिद चलती है बकायदा। खेत-खेत दो-दो नाम उनके करके गए हैं मस्जिद के कि जो भी उससे होगा वो सब मस्जिद में जाएगा। तो वहां तो सारी लड़कियां मैं देखूं मतलब सर पर दुपट्टा, छोटी-छोटी बच्चियां सर पर दुपट्टा और नकाब ऐसे जो हिजाब होता है वो लेकर अबया पहनेंगी जो छोटी-छोटी है उनको अबया पहनाएंगे जो बड़ी है वो तो पूरा बस उनकी आंखें दिखती हैं ऐसे मतलब इतना ज्यादा कवरिंग और आप ये देखो कि धूप में ब्लैक कलर और ज्यादा गर्मी देता है। ऊपर से ये पूरे अब्सॉर्ब कर लेता है। बिल्कुल हां, अब्सॉर्ब कर लेता है हीट को। तो उसके बावजूद ये बेचारी इतनी गर्मी में मतलब कहीं जाती है अगर अगर बाजार वगैरह तो पूरा बुर्का वगैरह लेकर तो मुझे तो बहुत इनके लिए बुरा लगता है। मगर इनको खुद खुद को अपने लिए बुरा नहीं लगता है तो बताओ क्या करें?

हम वो आइस ही नहीं रेज करना चाहती हैं बिल्कुल भी। हम बिल्कुल सही कहा आपने।

अच्छा ओके। मुझे आपसे ये पूछना था। जी बिल्कुल पूछ रहे हैं आप। हां। मुझे आपसे पूछना था कि आपकी मम्मा पापा को पता है आपके मतलब एक्स मुस्लिम के बारे में?

नहीं देखो मेरे पेरेंट्स को भी नहीं पता है और हां मेरी फैमिली में जैसे जो मेरे सिबलिंग्स वगैरह हैं तो वो सभी एक्स मुस्लिम है बस पेरेंट्स पेरेंट्स को नहीं पता है और ना ही क्योंकि मेरा मानना है कि बस ठीक है यार अब जिनकी एज हो गई है ना उन्हें कहना सही भी नहीं है। राइट राइट। हमारा जो फोकस होना चाहिए ना वो नेक्स्ट जनरेशन पे होना चाहिए। हां, होना चाहिए। हां, एक्सजेक्टली बिल्कुल।

और कुछ पूछना है आपको तो? जी हां, बस अब मुझे लास्ट सवाल मेरा आपसे यही है कि आप क्या आप जो मुस्लिम लड़कियां हैं उन्हें आप क्या मैसेज देना चाहेंगे?

हां जी, मैं उनको एक ही मैसेज देना चाहती हूं कि मैं उनको बताना चाहती हूं कि बच-बच के जरा मिंबररे मेहराज से चलना। खुद बोलकर कहते हैं खुदा बोल रहा है कि आप ये। मैं तो कहती हूं ये मस्जिद मदरसों से दूर ही रहो क्योंकि ये आपका ब्रेन वाश करने में नंबर वन का काम करते हैं।

हम हम एक्सक्टली बहुत ज्यादा। चलिए थैंक यू सो मच। बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके कायु जी।

मुझे भी आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा और मेरी जो ये सच की जर्नी है वो आपकी वजह से ही कहीं ना कहीं शुरू हो पाई है क्योंकि मुझे मतलब साइकोलॉजी भी मतलब फिलोसफी भी जब मैंने पढ़ी थी तो उसमें गॉड के बारे में तो काफी था लेकिन इस्लाम रिलीजन का मुझे ये था कि मैं ये कैसे पता करूं कि मतलब मोहम्मद वगैरह के बारे में लेकिन आपकी वीडियोस वगैरह देखकर क्योंकि हमारी खुद की स्कूलिंग इतनी पढ़ाई हो जाती है कि हम हम नहीं अलग से इतने सारी हदीसे देख सकते ना लेकिन आपने जो काम बहुत ज्यादा इजी कर दिया है और बहुत ज्यादा आपने बोल्डनेस का काम किया है तो मैं तो आपको बहुत ज्यादा थैंक यू बोलना चाहूंगी और मैं हमेशा यही कहना चाहूंगी कि आप जब भी अपनी लाइफ में पूरे खुश रह और बहुत ज्यादा आपने ब्रेव काम किया है और मतलब बहुत ज्यादा लाइफ में आगे जाए आप बस एप्रिशिएट इट।

का जी रियली थैंक यू सो मच। बहुत अच्छा लगता है जब मुझे पता चलता है कि मेरी वजह से कोई अंधेरे से बाहर निकल गया है। आई रियली अप्रिशिएट इट और जो हमारे ये इंटरव्यू शोज़ होते हैं इनसे भी बहुत लोगों को अकल आती है। अब आप आई आपने अपना इंटरव्यू दिया। ठीक है? तो इससे भी बहुत सारी लड़कियां होती हैं जो मतलब बाद में सुनती हैं सुनने के बाद में और वो इन चीजों से बाहर आते हैं और बाद में मुझे मतलब ईमेल भी आते हैं। बहुत सारी लड़कियां क्योंकि देखो अब आपका तो ये है कि आपने आपको मौका मिल गया बात करने का। हां जी। आपके घर में आप मॉडर्न है आपकी फैमिली भी तो प्रॉब्लम नहीं है कि आप एटलीस्ट आपको इतना मौका मिल गया कि आपने बात कर ली। हां जी। लेकिन सप्रेशन इतना ज्यादा है इस कम्युनिटी में कि फीमेल बेचारी घर से बाहर ही नहीं निकलती हैं। राइट राइट। तो वो हां तो वो ईमेल करके बताती हैं अपनी प्रॉब्लम्स को। वो बताती हैं कि आपकी वजह से हम इससे बाहर आ गए। लेकिन अपनी स्टोरी शेयर करने वो नहीं आगे आ पाती। तो आई रियली अप्रिशिएट के आप आगे आई क्योंकि आप लोग जब आते हैं आगे और आप अपनी स्टोरी शेयर करते हैं ना तो इससे बहुत बहुत सारे लोगों को इससे इससे इनकरेज होते हैं वो तो आई रियली अप्रिशिएट इट और रियली होप कि आज का जो हमारा शो है ये भी ज्यादा से ज्यादा लड़कियों तक पहुंचे और वो भी इस अंधेरे से बाहर निकलें।

जाइन करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आपका। जी। थैंक यू। थैंक यू। ओके। थैंक यू।

यह स्टोरी थी कायु जी की। बहुत ही इंटेलिजेंट लड़की है यार और बहुत ही बढ़िया शो रहा। वैसे जब ये रिकॉर्डिंग हो रही थी तो तब थोड़ा सा बिजी था मैं कहीं पे इसलिए बीच-बीच में आपने नोटिस किया होगा कि मेरा ध्यान कहीं कहीं-कहीं पर मेरा ध्यान नहीं था। तो उसके लिए रियली सॉरी। नेक्स्ट टाइम से मैं इस चीज का ध्यान रखूंगा। वैसे काू जी की स्टोरी और ख्यालात बहुत ही जबरदस्त थे। ब्रेव। आई होप कि इनकी जो स्टोरी है ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम लड़कियों तक यह वीडियो पहुंचे और आप पहुंचाने में कोशिश भी करें। ठीक है? ताकि ये लड़कियां भी आगे आए। अपनी लाइफ में आगे बढ़े और ये भी अपनी स्टोरी शेयर करें एक दिन हमारे इस प्लेटफार्म पर आकर। तो आप सभी से मेरी गुजारिश है कि इस वीडियो को जितना हो सके फीमेल मुस्लिम तक पहुंचाने की आप कोशिश करें और आज हम आप लोगों को लाइव में नहीं जोड़ पाएंगे क्योंकि मुझे कहीं अर्जेंट में निकलना है और एक भाई ना नीचे कमेंट में बोल रहे थे लिंक दे कई मैसेज आए इनके शेख जमीर नाम से तो महाराज आप हमारे नेक्स्ट शो में जरूर आना आपको बात करने का पूरा मौका मिलेगा ठीक है और एक वीक का मैं आपको पूरा टाइम दे रहा हूं अच्छे से आप इस्लाम को स्टडी करना ठीक है और इस्लाम की बेस्ट नॉलेज लेनी है तो मेरी की वीडियोस देख लोगे ना तो वो बहुत बहुत है आपके लिए। जी बाकी मैं एक बार सुपर चैट्स वगैरह भी पढ़ देता हूं। मनमोजी शर्मा जी कह रहे हैं गुड वर्क सर। थैंक यू सो मच। गजानन चावन जी का सुपर स्टीकर है। थैंक यू। शाह सिंह जी का है। थैंक यू सो मच। अतुल भट्ट जी का है। मैसेज कह रहे हैं गुड सोच सिस्टर। नाइस वन सोच। थैंक यू सो मच। इस्लामिक नॉलेज चैनल कह रहे हैं बहन तुमने किताब पढ़कर बहुत बड़ी गलती कर दी। आई थिंक बहुत अच्छा किया। कम से कम बाहर तो आ गए उससे। सभी को पढ़नी चाहिए। राकेश कह रहे हैं कि डॉक्टर स्टीवसन टीम ने 5000 रिब्थ केसेस वाले बर्थ मार्क्स लाइक बुलेट शॉर्ट स्टडी किया जब वेरीफाई किया तो सही था यूनिवर्सिटी ऑफ वर्क के रिसर्च वीडियो देखो। थैंक यू सो मच। काफिर मौलाना साहब हमारे भाई हैं। अमेरिकन भाई कह रहे हैं कि हम सबकी शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए। रबिया जी यू आर अ वेरी ब्रेव वुमन। प्लीज कंसीडर स्टार्टिंग ए चैनल। जफर मियां यू आर ए लेजेंड लव यू। थैंक यू सो मच। अ हमारे काफिर मौलाना साहब नेक्स्ट मैसेज है गामीदी इंस्टट्यूट ऑफ पतरंगी जलेबी कह रहे हैं कि अगर लाइफ एक टेस्ट है तो टेस्ट तो ऑप्शनल होना चाहिए था। टेस्ट लेने से पहले पूछा पूछना चाहिए कि तुम टेस्ट देना चाहते हो या नहीं। ऊपर से फाइनाइट लाइफ के लिए इनफाइनाइट पनिशमेंट किस बात का हम। सही बात है। यहां सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि यार लोगों को पता ही नहीं होता उनका टेस्ट चल रहा है। अब जो बेचारे नॉन मुस्लिम है उन्हें क्या पता। मुस्लिम वाले जो पैदा हुए थे घर में उन्हें तो बता दिया गया तुम्हारा टेस्ट चल रहा है। जो नॉन मुस्लिम है उन बेचारों को तो पता ही नहीं। उनकी तो सबसे ज्यादा लगने वाली है। तो यह गलत है। सबकी स्टार्टिंग लाइन सेम होनी चाहिए ना। रेड ब्रेड कह रहे हैं दिस सुपर चैट इज फॉर दिस ब्रेव गर्ल का यू। थैंक यू सो मच। वो है नहीं। एक्चुअली ये रिकॉर्डेड शो है। अदरवाइज उनसे भी मैं थैंक यू बुलवा देता। राकेश जी का मैसेज है। नेक्स्ट कह रहे हैं कि ओनली कर्म मैटर्स। एक रिसर्च में एक मुस्लिम ने हिंदू फैमिली में नया बर्थ लिया। दो-ती साल में अपने आप नमाज पढ़ता था। पुरानी फैमिली का नाम भी बोला। बर्थ मार्क भी सेम थे यूनिवर्सिटी ऑफ़ वर्जीनिया। अच्छा ये जो इन्होंने अभी बुक बताई थी उसी का आगे इन्होंने एक और मैसेज दिया। ठीक है। थैंक यू सो मच। एक्स मुस्लिम अजीम इनका एक सुपर स्टीकर है। थैंक यू सो मच। सभी का थैंक यू सो मच। शो को खत्म करने से पहले एक बार मैं फिर से बता देता हूं कि आज मंथ का फर्स्ट सैटरडे है और हमारा चैनल मंथ में एक बार आपसे डोनेशन की रिक्वेस्ट करता है। तो जितना हो सके हमें सपोर्ट जरूर करें और हर वीक आपको सीक्रेट प्रोजेक्ट की अपडेट भी दी जा रही है। तो मैंने सीक्रेट प्रोजेक्ट की अपडेट वीडियो के शुरू में दिया था। तो जिन लोगों ने अभी ज्वाइन किया है वो वीडियो की स्टार्टिंग में थोड़ा सा आप जाकर देखें। आपको अपडेट मिल जाएगी पूरी। बाकी एक बार फिर से डोनेशन के लिए मैं याद दिला रहा हूं कि भाई क्यूआर, PayPal, यूपीआई वगैरह का लिंक नीचे पिन कमेंट में मिल जाएगा। जितना हो सके सपोर्ट करें और जो फाइनशियली हमें नहीं सपोर्ट कर सकते वो लाइक, कमेंट, शेयर करके हमारे काम को ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाएं। सभी का ज्वाइन करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। अपना ख्याल रखें। कट्टरता से बचें। इंसानियत हाफिज।