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प्रोसीजर टू सेटल दी फायर इंश्योरेंस क्लेम। सपोज कि आपने जो है या फिर मिस्टर एक्स ने जो है उन्होंने एक फायर इंश्योरेंस परचेज किया था अपने घर के लिए और उनके घर में आग लग जाती है तो अब जो है वह कैसे क्लेम को इंश्योरेंस कंपनी से पा सकते हैं। क्लियर कैसे क्लेम कर सकते हैं जो उन्होंने फायर इनसेंस लिया था उसको कैसे क्लेम कर सकते हैं।
तो सबसे पहली चीज कि जैसे ही मिस्टर एक् के घर में आग लगी तो जैसे ही आग लगी उनको इमीडिएट इफॉर्म करना है इंश्योरेंस कंपनी को इन राइटिंग एंड विद एस्टीमेट अमाउंट ऑफ लॉस। इफ देयर आर एनी डैमेज और लॉस अराइजिंग ड्यू टू फायर देन द पॉलिसी होल्डर शुड इमीडिएट इनफॉर्म द इंश्योरेंस कंपनी इन राइटिंग एंड विद एस्टीमेट अमाउंट ऑफ लॉस। तो यानी कि कितना नुकसान हुआ है उसका एक एस्टीमेट अमाउंट उसको रिटन में इमीडिएट इफॉर्म करना है इंश्योरेंस कंपनी को। क्लियर।
उसके बाद फिर जो इंश्योरेंस कंपनी वो क्या करेगी वो सर्वे करवाएगी। सर्वे करवाएगी अब सर्वे करवाने में भी दो तरीका है। एक होता है कि अमाउंट छोटा है तो वो अपने ऑफिस से भेज देंगे किसी को। अगर अमाउंट बड़ा है तो गवर्नमेंट से अपॉइंटेड जो है है वो जो है उसको सर्वे करने के लिए भेजें।
तो दूसरा क्या होगा सर्वे रिपोर्ट। इफ द अमाउंट ऑफ लॉस इज स्मॉल द इंश्योरेंस कंपनी मे डेप्यूट एन ऑफिसर टू सर्वे द लॉस एंड डिसाइड ऑन द सेटलमेंट ऑफ द लॉस ऑन द बेसिस ऑफ़ द क्लेम फॉर्म एंड द ऑफिसर्स रिपोर्ट। यानी कि अगर स्मॉल अमाउंट में है लॉस तो उस केस में जो है ऑफिस से ही से किसी को भेज दिया जाएगा सर्वे करने के लिए और वहां पर जो है वह सर्वे रिपोर्ट लगाएगा उसके बेसिस पे जो है क्लेम सेटलमेंट वहां पर तैयार किया जाएगा।
वहीं पर अगर अमाउंट बड़ा है लार्ज लॉस है तो उस केस में इंडिपेंडेंट सर्वेयर जो है वो ड्यू लाइसेंस्ड बाय गवर्नमेंट गवर्नमेंट द्वारा लाइसेंस किया हुआ सर्वेयर जो है वहां पर भेजा जाएगा और वो जो है अपनी रिपोर्ट वहां पर बताएगा कि कितना लॉस हुआ है कैसे ल हुआ।
तो जो सर्वे रिपोर्ट होता है उसमें क्या-क्या डिटेल्स होती हैं। द सर्वे रिपोर्ट वुड जनरली डील विद द फॉलोइंग मैटर। कॉज ऑफ लॉस तो सबसे पहली इंपॉर्टेंट चीज कि जो लॉस हुआ है उसका प्रॉक्सिमेट कॉज क्या है और फायर इंश्योरेंस में प्रॉक्सिमेट कॉज फायर ही होना चाहिए। क्लियर। तो कॉज ऑफ लॉस क्या है वो सर्वे रिपोर्ट में बताया जाएगा। एक्सटेंट ऑफ लॉस कितना लॉस हुआ है पूरा नुकसान हो गया है या फिर कुछ पोर्शन बचा भी है तो एक्सिडेंट ऑफ लॉस।
उसके बाद अंडर इंश्योरेंस इफ एनी। कई बार होता क्या है कि जो पॉलिसी होल्डर होते हैं प्रॉपर्टी की कीमत जो होती है वो 10 लाख होती है और उन्होंने फायर इंश्योरेंस दे रखा होता है 7 या 8 लाख का तो इस केस को अंडर इंश्योरेंस कहा जाता है और इस केस में जो क्लेम होता है फिर वहां पर जो है क्लेम भी 78 लाख के अकॉर्डिंग ही मिलता है 10 लाख के अकॉर्डिंग वहां पर नहीं दिया जाता यानी कि प्रोपोर्शनेट हो जाता है। तो अंडर इंश्योरेंस कभी भी नहीं लिया जाना चाहिए अगर आप इंश्योरेंस लेते हैं।
नेक्स्ट जो है डिटेल एंड वैल्यू ऑफ सॉल्वेस एंड हाउ इट हैज बीन डिस्पोज्ड ऑफ और प्रपोज टू बी डिस्पोज्ड ऑफ। यानी कि जो आग लगने से बच गया या फिर आग लग गई थी उसमें से जो चीजें बचा ली गई वो सॉल्वेस तो उसकी डिटेल उसकी वैल्यू कितनी है उसको कैसे डिस्पोज किया जाएगा या फिर कैसे किया गया उसको जो डिटेल यहां पर लिखी जाएगी सर्वे रिपोर्ट में।
देन डिटेल ऑफ एक्सपेंसेस। यानी कि आपने जो है जो मिस्टर एक्स है उनके घर में आग लगी तो उन्होंने क्या फायर ब्रिगेट को बुलाया होगा तो फायर ब्रिगेट का कितना एक्सपेंस आया उसकी डिटेल जो है वहां पर सर्वे रिपोर्ट में रहेगी।
देन कंप्लायंस विद पॉलिसी कंडीशंस एंड वारंटीज। यानी कि जो भी पॉलिसी में कंडीशंस या वारंटीज थी क्या उसको कंप्लायंस है क्या उसको जो है फॉलो किया गया है फुलफिल किया गया है उसको चेक किया जाएगा।
Then detail of other insurances policies on the same property and the apportionment of the loss and expenses among co-insurances। यहां पर भी क्या है को इंश्योरेंस वाली चीज है डबल इंश्योरेंस वाला जो चीज होता है यहां पर। तो यहां पर क्या होता है कि अगर जो फायर इंश्योरेंस लिया गया है वो दो-तीन इंश्योरेंस कंपनी से लिया गया यानी कि सेम प्रॉपर्टी के लिए दो-तीन इंश्योरेंस से आपने फायर इंसुरेंस लिया है तो उस केस में जो है बाकी लोगों से भी जो है रिकवर किया जाएगा आपको टोटल अमाउंट मिल जाएगा जितना आपका बन रहा होगा लेकिन जो इंश्योरेंस जो आपको पूरा पेमेंट कर रही होगी बाकी इंश्योरेंस से भी जो वहां पर क्लेम कर लेगी या फिर सारी इंश्योरेंस कंपनी मिलकर जो है आपको वो अमाउंट पे करेंगे। तो ये सारी डिटेल वहां पर जो है सर्वे रिपोर्ट में रहती है।
उसके बाद फिर जो जिसकी प्रॉपर्टी थी उसको क्लेम फॉर्म फिल अप करना पड़ता है। क्लियर। द पॉलिसी होल्डर विल सबमिट दी क्लेम फॉर्म विद दी फॉलोइंग इंफॉर्मेशन। तो उसमें क्या-क्या इंफॉर्मेशन होती है। नेम एंड एड्रेस ऑफ द इंश्योर्ड। डेट ऑफ लॉस। टाइम एंड प्लेस फ्रॉम वयर द फाइल स्टार्टेड। यानी कि कहां पर जो है किस तारीख को लॉस हुआ किस समय पे हुआ कहां पर आग लगी। कॉज ऑफ फायर। फायर क्यों लगी। डिटेल ऑफ द प्रॉपर्टी डैमेज सच एज डिस्क्रिप्शन। यानी कि जो प्रॉपर्टी डैमेज हुई उसके पूरे बारे में उसकी पूरी डिटेल आप लिखेंगे। वैल्यू एट द टाइम ऑफ फायर। वैल्यू ऑफ सॉल्वेस एंड द अमाउंट ऑफ लॉस। यानी कि जो फायर लगी है जब तो उस वक्त प्रॉपर्टी की क्या वैल्यू थी सेलवेज की क्या वैल्यू थी अमाउंट कितना नुकसान हुआ है उसका अमाउंट जो है मेंशन करेंगे।
Detail of other policies on the same property giving the name of the insurer policy number and sum insured। तो यहां पर क्या है कि अगर आपने जो है सेम प्रॉपर्टी के लिए दो से तीन दो या तीन पॉलिसी ले रखी अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनी से तो उसकी भी डिटेल आपको देनी होगी कि आपने किस-किस इंश्योरेंस कंपनी से कितना इंश्योर्ड सम इंश्योर्ड का जो है पॉलिसी लिया है और उसका पॉलिसी नंबर भी आपको लिखना होगा।
Fire brigade report detail। फायर ब्रिगेड में आपने बुलाया होगा तो उसकी रिपोर्ट जो है उसकी डिटेल आपको बतानी होगी। एफआईआर एट द नियरेस्ट पुलिस स्टेशन रिगार्डिंग थर्ड पार्टी लायबिलिटी इफ एनी। यानी कि अगर किसी थर्ड पार्टी ने आग लगाई है तो उसके बाद उसके लिए भी जो है आपने एफआईआर अपने नियरेस्ट पुलिस स्टेशन में करवाया जाना चाहिए और उसकी कॉपी भी वहां पर आपको लगानी होगी।
तो यह जो है पूरा क्लेम फॉर्म में आपको लगाना पड़ेगा। उसके बाद भी जो है सर्वे रिपोर्ट के बेसिस पे और जो आपने क्लेम फॉर्म फिल अप किया है उसके बेसिस पे वहां पर सेटलमेंट हो जाता है क्लेम का।
तो ऑन द बेसिस ऑफ़ द क्लेम फॉर्म एंड द सर्वे रिपोर्ट डिसीजन इज टेकन अबाउट द सेटलमेंट और अदर वाइज ऑफ़ द लॉस। तो जो भी लॉस हुआ है कैसे से सेटलमेंट हो र है कितना आपको पेमेंट हो रहा है वो सारी चीजें क्लेम फॉर्म और सर्वे रिपोर्ट के बेसिस पे वहां पर फाइनलाइज की जाती है इंश्योरेंस कंपनी द्वारा। क्लियर।
तो ये जो है पूरा प्रोसीजर होता है फायर इंश्योरेंस क्लेम के सेटलमेंट का। क्लियर। तो यहां पर सर्वेयर आता है वो पूरी रिपोर्ट लगाएगा आपकी उसके बाद फिर आपसे भी डिटेल ली जाती है कि आपने कहां-कहां पर किससे किससे इंश्योरेंस लिया है कब कब जो है आग लगी कितना नुकसान हुआ कितना बचाया गया एफआईआर फाइव गेट का रिपोर्ट पूरी डिटेल उसके बाद फिर उसके बेसिस पे वहां पर क्लेम को कैलकुलेट किया जाता है और फिर जो है क्लेम को सेटल किया जाता है। विश यू ऑल द बेस्ट कीप वाचिंग।