Transcription
किसान हर रोज पेड़ से अमरूद तोड़ता है।
लेकिन एक दिन किसान को अमरूद के पेड़ में कुछ अजीब लगता है। जैसे कोई उसके अमरूद चुरा रहा हो। तो किसान चोर को पकड़ने के लिए झोपड़ी में छिप कर नजर रखने लगता है।
तो कबूतर हर दिन की तरह आज भी अमरूद चुराकर जाने लगती है। तो किसान कबूतर का पीछा करता है और कबूतर अपने घर आ जाती है और अमरूद को झोपड़ी में रख देती है।
किसान समझ जाता है कि कबूतर मां बनने वाली है। इसलिए वह अपने बच्चों के लिए खाना इकट्ठा कर रही है।
फिर एक दिन बहुत तेज बारिश होने लगती है। किसान दौड़ता हुआ आता है और कबूतर को अपने साथ ले आता है। कबूतर का घर पानी में बह जाता है।
अब कबूतर कुछ दिन में अंडे देती है और उनसे बच्चे निकलते हैं। फिर किसान रोने लगता है।
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