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Vedic Dincharya - स्वस्थ्य रहने के लिए वैदिक दिनचर्या | Daily Routine as per Vedas - 01

Cool Self12:40

Transcription

[संगीत] लघु निवे समाम त दस पंच च नाटिका तेदे मोरत प्रहरा यमा तुवार चत्वारि मर्तन महनी उभे। इस श्लोक के अनुसार 15 लघु एक डंड के बराबर होती है। दो डंड एक मोहत के बराबर होती है। 30 महर्तो के मेल से एक अहोरा आतम बनते हैं और ह्यूमन बीइंग के एक अहोरात्र में आठ प्रहर होते हैं और सभी प्रहर तीन-तीन घंटे तक चलती है।

और ये जो लघु ंड मोहर अवराम प्रहर है ये यूनिट ऑफ टाइम है जो कि हमारे वैदिक टेक्स्ट में यूज किए जाते थे जैसे पूरे 24 घंटे को एक अरा राम कहते हैं और इसी एक अवराम में तीन-तीन घंटे करके आठ प्रहर होते हैं। सुबह के 6:00 बजे से लेकर शाम के 6:00 बजे तक दिन का प्रहर कहते हैं, जो कि है पूर्वाहन 6:00 बजे से लेकर 9:00 बजे तक, मध्यान 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक, अपराहन 12:00 बजे से लेकर 3:00 बजे तक और साई काल 3:00 बजे से लेकर 6:00 बजे तक।

इसी तरह शाम के 6:00 बजे से लेकर सुबह के 6:00 बजे तक रात का प्रहर कहता है, जो कि है प्रदोष शाम के 6:00 बजे से लेकर 9:00 बजे तक, निशिद 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक, त्रियामा 12:00 बजे से लेकर 3:00 बजे तक और उषा 3:00 बजे से लेकर सुबह के 6:00 बजे तक। कुल मिलाकर आठ प्रहर होते हैं और सभी प्रहर का अपना-अपना इंपॉर्टेंस है। अगर आप गलत प्रहर यानी कि गलत टाइम पर गलत चीज करोगे तो यह आपको नुकसान ही पहुंचाएंगे, फायदा नहीं।

इसलिए सभी प्रहर को ध्यान में रखते हुए धर्मशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, आयुर्वेद शास्त्र और मॉडर्न लाइफ स्टाइल को देखकर ये वीडियो बनाया जा रहा है। इसके पहले हम आयुर्वेदिक रूटीन भी आपसे शेयर कर चुके हैं। अब आप लोग के भारी डिमांड के कारण स्पिरिचुअल रूटीन भी बनाना पड़ा। इस रूटीन में हम सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक हर एक छो छोटे से छोटे चीज के बारे में बात करेंगे, जो आपको स्पिरिचुअल यानी कि अध्यात्म की ओर ले जाए।

इसमें हम दैनिक नित्य कर्म, साधना, श्लोक, ब्रह्म मुरत में जागना, उष पान, स्नान यानी कि नहाने का नियम, तिलक, पूजा पाठ, मंत्र जाप, व्यायाम, प्राणायाम, वस्त्र धारण, भोग अर्पण, भोजन यानी कि खाने का नियम, सय यानी कि सोने का नियम, पूर्व सय यानी कि सोने का पहले का नियम और भी बहुत सारी चीजों के बारे में बात करने वाले हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि आई एम नॉट इंटरेस्टेड इन स्पिरिचुअलिटी और एनी टाइप ऑफ स्पिरिचुअल रूटीन। और रियली, पहली बात तो ये इंटरेस्ट की बात है ही नहीं और दूसरी बात, फॉलो दिस रूटीन जस्ट फॉर वन मंथ, उसके बाद आपको खुद पता चल जाएगा हाउ पावरफुल इज स्पिरिचुअलिटी। ये जो आपका इरेगुलर स्लीप पैटर्न, इरेगुलर ईटिंग टाइम, किसी काम में मन ना लगना, लैक ऑफ फोकस, लैक ऑफ प्रोडक्टिविटी, लैक ऑफ कंसंट्रेशन, स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंजाइटी, प्रोक्रस्टेस, पास्ट के बारे में सोचना, फ्यूचर के बारे में चिंता करना, मोटिवेशन की कमी, सेल्फ डिसिप्लिन का ना होना, इन सभी चीज का कनेक्शन कहीं ना कहीं आपका डेली रूटीन से है और इन सभी चीजों को दूर सिर्फ आप एक चीज करके दूर कर सकते हो, जो कि है द परफेक्ट डेली और अच्छे से बोले तो वैदिक दिनचर्य, जो आपके जीवन को पूर्णत बदल के रखे।

आइए शुरुआत करते हैं सबसे पहले इस रूटीन को चार पार्ट में डिवाइड करते हैं। पहला प्रभात चर, इसमें हम दिन की शुरुआत करेंगे। दूसरा साधना चरि, इसमें हम उन सभी साधना को प्रैक्टिस करेंगे जो हमारे स्पिरिचुअल लाइफ को और स्ट्रांग बनाएगी। तीसरा दिन चरि है, इसमें हम उन सभी चीजों के बारे में बात करेंगे जिससे हमारा पूरा दिन हेल्दी, प्रोडक्टिव और एनर्जेटिक हो और चौथा रात्रि चर, इसमें हम रात के बारे में स्पेशली स्लीप यानी कि नींद के बारे में बात करेंगे।

अब इतने सारे चीज को एक वीडियो में बता पाना इंपॉसिबल तो नहीं बता सकते हैं, लेकिन इससे होगा कि इतने सारे चीज को देखकर ही आप डर जाओगे, करना तो दूर की बात है। इसलिए इसे हम चार पार्ट में डिवाइड कर रहे हैं। इस वीडियो में प्रभात चर के बारे में बात करेंगे, फिर पार्ट टू में साधना चार्य, तीसरा दिनचर्य और चौथा रात्रि चर। इस वीडियो में हम संपूर्ण प्रभात चर के बारे में बात करेंगे। मैं हर चीज को करने में कितना समय लगेगा ये भी बताऊंगा, साथ ही हम एग्जांपल के लिए खुद से रूटीन भी बनाएंगे जैसे दे कर आप फॉलो कर सकते हो।

शुरुआत करते हैं सुबह उठने से कि एक्चुअल में हमें उठना कब चाहिए। अगर प्रहर की बात करें तो उषा प्रहर में, अगर मोहत की बात करें तो ब्रह्म मूर्त में और अगर समय की बात करें तो 3:00 बजे से लेकर 6:00 बजे तक हमें उठ जाना चाहिए।

अब ऐसा क्यों? एज वी ऑल नो, हमारा बॉडी पंच महाभूत यानी कि पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्नि के मेल से बना हुआ है और इन्हीं पंच तत्त्वों के आपस के मेल से हमारी बॉडी के तीन मुख्य दोषा का निर्माण होता है। जब वायु और आकाश का मेल होता है तब वात दोष का निर्माण होता है। वात दोष हमारी बॉडी में मूमेंट की कार्य करती है। ये 2:00 बजे से लेकर 6:00 बजे दिन रात दोनों टाइम सबसे ज्यादा डोमिनेंट रहता है। जब जल और अग्नि का मेल होता है तब पित्त दोष का निर्माण होता है। पित्त दोष हमारे बॉडी में एनर्जी देने का कार्य करती है। ये 10:00 बजे से लेकर 2:00 बजे के बीच डोमिनेंट रहता है और जब जल और पृथ्वी का मेल होता है तब कफ दोष का निर्माण होता है। कफ दोष हमारे बॉडी में लुब्रिकेशन का कार्य करती है। ये 6:00 बजे से लेकर 10:00 बजे के बीच डोमिनेंट रहता है।

अकॉर्डिंग टू आयुर्वेदा, जब हमारे बॉडी में सबसे ज्यादा कफ दोष डोमिनेंट होता है तब हमें सो जाना चाहिए यानी कि 9-10 बजे के बीच और जब हमारे बॉडी में सबसे ज्यादा वाथ दोष डोमिनेंट होता है तब हमें उठ जाना चाहिए यानी कि 4:00 से 6:00 बजे के बीच और इसी दौरान ब्रह्म उम्रत की स्टार्टिंग होती है। इसलिए शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त में उठने की सलाह दी जाती है।

अगर आपको ब्रह्म मुहूर्त के एग्जैक्ट टाइम कैलकुलेट करना है तो सिंपली आपको कोई भी सर्च इंजन पर सर्च करना है सनराइज टाइम इन योर लोकेशन। जैसे मैं सर्च करता हूं सनराइज टाइम इन ननी ताल, तो जो भी सनराइज का टाइम है उससे 1 आवर 36 मिनट सबस्टैक कर देना है। जो भी टाइम आया वही ब्रह्म मूरत के स्टार्टिंग का टाइम।

अब सबसे बड़ा चैलेंज हमारे सामने यह आता है कि हम ब्रह्म मूरत में उठ तो जाते हैं पर हमें समझ ही नहीं आता कि उसके बाद करें क्या। तो आज हम उसी के बारे में बात करेंगे कि ब्रह्म अमृत में जागने के बाद हमें क्या करना चाहिए। इन माय केस, ब्रह्म अमृत की स्टार्टिंग इस टाइम होता है और अगर आप रेगुलर बेसिस पर प्रैक्टिस करते हो ब्रह्म अमृत में जागने की तो मुश्किल से आपको 2 मिनट लगेंगे ब्रह्म अमृत में जागने के लिए।

अब बात करते हैं कि आगे करना क्या है। दूसरा कर दर्शन। जब आप ब्रह्म अमूर्त में उठ जाओ तो सबसे पहले आपको अपने हथेलियों को आपस में रगड़ करर अपने आंखों पर रखना है। ऐसा आपको इसलिए करना है क्योंकि हमारी बॉडी की मैक्सिमम नाड़ी का एंडिंग हमारे हाथों में ही होता है। इसलिए जब हम अपने हथेलियों को रब करते हैं तब हमारी बॉडी की नाड़ियों के साथ-साथ एक्यूप्रेशर पॉइंट भी एक्टिवेट हो जाता है जिससे हमारा ओवरऑल सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। इसलिए अपने हथेलियों को रब करके अपने आंखों पर जरूर रखें।

फिर धीरे से आंख खोलकर अपने हथेलियों को आपस में मिलाकर पुस्तक की तरह खोल के देखते हुए इस श्लोक को बोलना है: कराग्रे वस्ते लक्ष्मी, कर मध्य सरस्वती, कर मूले तू गोविंद, प्रभाते कर दर्शन। अर्थात मेरे हाथों के अग्र भाग में माता लक्ष्मी, मध्य भाग में माता सरस्वती तथा मूल भाग में गोविंद निवास करते हैं। हर प्रभात को मैं सर्वप्रथम हथेलियों में इनका दर्शन करना चाहिए। इस मंत्र का मतलब है कि हमें प्रोस्पेरिटी, विजडम और गॉड यानी कि भगवान के शरण में रहकर अपने कर्मों को पालन करना चाहिए।

इसके बाद पाद स्पर्श। कर दर्शन के बाद सबसे पहले राइट पैर को भूमि पर रखकर अपने हाथों से पृथ्वी को स्पर्श कर फिर अपने मस्तक पर लगाइए। फिर पांव रखने के लिए धरती माता से क्षमा मंत्र बोलिए। ये रहा मंत्र और इसका मीनिंग। इसे करने में आपको 1 मिनट समय लगे।

इसके बाद आपको पांच छोटे-छोटे चीज करना फटाफट बताते हैं। नंबर वन अरमेस्टेड पॉजिटिव सेंटेंस या फिर वर्ड, जिसे हम बार-बार रिपीट करते हैं, जैसे आई एम हैप्पी, आई एम हेल्थी, आई एम ग्रेटफुल। इस तरह के जब हम सेंटेंस बोलते हैं तब हमारे अंदर एक पॉजिटिविटी आती है, हमारा कॉन्फिडेंस बूस्ट होता है और इससे हम पूरे दिन एक पॉजिटिव माइंड सेट के साथ जीते हैं। इसे आप अपने अकॉर्डिंग डिजाइन करके यूज करो। नंबर टू मेक योर बेड। जहां भी आप सोते हो, सुबह उठकर अपना बिस्तर को जरूर बनाओ। नंबर थ्री पुशअप्स। बॉडी को थोड़ा एनर्जाइजर के लिए अकॉर्डिंग टू योर कैपेसिटी जितना हो सके उतना पुशअप लगाए या फिर थोड़ा मोड़ा कुछ एक्सरसाइज कर ले जिससे हमारे बॉडी में सारा तमस निकल जाएगा और हमारे अंदर एक अलग फुर्ती आएगी। नंबर फोर मांगलिक वस्तुओं का द। कुछ ऐसे वस्तुओं को आपको देखना है जिससे आप अच्छा फील करो। आप इन सारे वस्तुओं को देख सकते हैं। नंबर फाइव माता-पिता, गुरुजन और बड़े को प्रणाम। इतने सुबह मम्मी पापा उठते ही नहीं तो वीडियो को शेयर कर दो, आप भी उठ जाओगे, मम्मी पापा भी उठ जाएंगे।

अफर मेंे करने के लिए आपको दो मिनट लगेंगे, अपने बेड या फिर रूम को साफ करने में 5 मिनट लंगे, पुशअप या फिर थोड़ा सा एक्सरसाइज करने के लिए आपको पाच मिनट लंगे, मांगलिक वस्तुओं को या फिर मम्मी पापा को प्रणाम करने के लिए एक-एक मिनट लेंगे।

अब बढ़ते हैं उष पान की ओर। उषा का मतलब होता है भोर या फिर सूर्योदय के पहले और पान का मतलब होता है है पीना। इसलिए उष पान का अर्थ है सूर्योदय के पहले पानी पीना। इसमें बहुत से मिसकनसेप्शन है जैसे ब्रश के पहले उषा पान करें या फिर ब्रश करने के बाद। तो इन सारे चीजों का मैंने आंसर इस वीडियो में दिया है, आप जाकर देख सकते हैं। अभी बताते हैं उसा पान करना कैसे है। रात में जब आप सोने जाओ तो सबसे पहले तांबे के बर्तन में जल भरकर सोना है और सुबह उठकर अपने कैपेसिटी के अकॉर्डिंग दो से चार गिलास पानी पीना है और ध्यान रहे कि पानी हमेशा बैठकर ही पीना है और उसा पान करने के लिए आपको मैक्सिमम थ्री टू फव मिनट लगेंगे।

अब स्वचा चार के नियम देखो। हमारे स्क्रिप्चर में शुद्धि के अनेक को नियम मेंशंड है, जिसे फॉलो करना आज हर कोई नहीं चाहेगा और आज उस तरह का एनवायरनमेंट है भी नहीं कि हम उन सारे रूल्स को फॉलो कर पाए। बस इंफॉर्मेशन पर्पस के लिए कुछ चीजें बता देते हैं, फिर आज के मॉडर्न लाइफ स्टाइल के अकॉर्डिंग कैसे करें इस पर भी बात करें। तो देखो शुद्धि दो प्रकार के होते हैं भाई यानी कि एक्सटर्नल शुद्धि और अभ्यंतर यानी कि इंटरनल शुद्धि। एक्सटर्नल शुद्धि यानी कि बाहरी वस्तु से हम अपने आप को शुद्ध करते हैं, जैसे पानी या फिर साबुन से और अभ्यंतर शुद्धि यानी कि अंदर की शुद्धि या फिर मन की शुद्धि। इस पर हम आने वाले वीडियोस पर बात करेंगे। अभी बात करते हैं बाय शुद्धि स्पेशली स्वच के नियम के बारे में।

इसके पहले मैंने आपको उषा पान के बारे में बताया तो जब आप रेगुलरली उषा पान करोगे तो इसके कुछ समय बाद ही आपको नेचुरली सॉच का वेग आएगा और इस समय के दौरान हमारी बॉडी में वात दोष का प्रभाव बना रहता है जिससे हमारे इंटेस्टाइन की परेटिक मूवमेंट भी अच्छी होती है जिससे हमारी बॉडी की सारी वेस्ट प्रोडक्ट इजली आउट हो जाते हैं और सोच आपको हमेशा मलासन में ही करना है यानी कि कुछ इस तरह के पोजीशन में। आज जो ये वेस्टर्न कल्चर के टॉयलेट आता है, ये जो पोजीशन है, ये गलत है। इन सारी चीज को को यूज नहीं करना है। मॉडर्न बनने के चक्कर में अपना हेल्थ को मत बिगाड़।

अब सौज के बाद शुद्धि देखो। मैंने विष्णु पुराण, गरूर पुराण, मनुष स्मृति, दक्ष स्मृति, बदुल स्मृति और एक दो ग्रंथ परे जिसमें मैंने कुछ बातें कॉमन देखी जैसे सॉच करने के बाद इन पार्ट्स को एटलीस्ट इतने बार मिट्टी से जरूर धोना है। लेकिन आज हम ऐसा नहीं करते हैं क्योंकि आज का समय बिल्कुल अलग है। इसलिए मल त्याग के बाद एटलीस्ट दो बार अच्छे से जरूर धोए और मूत्र त्याग के बाद एटलीस्ट एक बार अच्छे से जरूर धोए और एक बात मल त्याग के बाद 12 कुल्ले और मूत्र त्याग के बाद चार कुरले जरूर करें।

दंत धावन यानी कि तित क्लीनिंग। अब देखो सुबह-सुबह में इतना मॉडर्न बनते हैं मतलब वेस्टर्न कल्चर के जो टॉयलेट है उसे यूज करके हमारा मॉडर्निटी खत्म नहीं होता है। अब हम लोग दांतों के सफाई के लिए प्लास्टिक ब्रश, अभी तो इलेक्ट्रॉनिक ब्रश भी आ गया है और क्या कहते हैं केमिकल पेस्ट, सॉरी टूथपेस्ट का यूज करते हैं। 100 ग्राम का 50 यानी कि ₹5000000 यूज करते हो, उसके इंग्रेडिएंट्स लिस्ट निकालकर एक-एक इंग्रेडिएंट्स को अच्छे से रिसर्च करो, फिर आपको पता चलेगा कि टूथपेस्ट है या फिर केमिकल पेस्ट। ये सब बंद करके दतवन का इस्तेमाल में लाओ। दतवन के लिए आप इन सारी चीज को यूज कर सकते हो। दतवन कैसे करना ये रहा और अगर फिर भी टूथपेस्ट और टूथब्रश का यूज करना पड़ा तो आप इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

जीवा निर्लेप यानी कि टंग क्लीनिंग। अब फिर देखो जिस ब्रश हम दांतों की सफाई करते हैं उसी ब्रस हम जीव की भी सफाई कर रहे हैं। ये कहां का अज्ञानता है। ऐसा आपको कभी नहीं करना चाहिए। अगर आप दतवन का इस्तेमाल करते हैं तो दतवन को बीच से फार करर अपना जीभ साफ करें या फिर टंग क्लीनिंग का इस्तेमाल करें।

स्नान यानी कि नहाना। आप में से मैक्सिमम लोगों को बाथिंग यानी कि नहाने का एक्चुअल मेथड पता ही नहीं। आपको लगता कि इस नहाने से क्या फायदा, लेकिन डीप एंड पर बहुत से ऐसे काम होते हैं जिसके बारे में आपको शायद ही पता हो। जैसे नहाने के बाद हम इतना ज्यादा रिलैक्स फील कैसे करते हैं? क्योंकि नहाने के दौरान हमारे बॉडी की पैरा सिंपैथेटिक सिस्टम एक्टिवेट हो जाती है जिससे हमारा स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंजाइटी का लेवल कम होने लगता है। इसलिए हम हमारे शास्त्रों में स्नान को इतना ऊंचा स्थान दिया गया है और अगर आप गलत तरीके से नहाते हो तो इससे हमारा पूरी ओवरऑल हेल्थ पर इफेक्ट पड़ता है। इसलिए आज हम बाथिंग यानी कि स्नान के रिलेटेड कुछ ऐसे सीक्रेट्स के बारे में जानेंगे जिसके बारे में आपको शायद ही पता हो।

स्क्रिप्चर में चार तरह के स्नान के बारे में डिस्क्राइब किया गया है। सुबह 4:00 बजे से लेकर 5:00 बजे के बीच यानी कि ब्रह्म मुहूर्त के दौरान किया गया स्नान को मुनि स्नान कहते हैं। 5:00 बजे से लेकर 6:00 बजे के बीच किया गया स्नान को देव स्नान कहते हैं। 6:00 बजे से लेकर 8:00 बजे के बीच किया गया स्नान को मानव स्नान कहते हैं और 8:00 बजे के बाद किया गया स्नान को राक्षस स्नान कहते हैं। इसलिए जितना पॉसिबल हो सके आठ पेस से पहले ही स्नान जरूर कर ले।

अब स्नान के भी अलग-अलग क्लासिफिकेशन है। शास्त्रों में इन पांच तरह के स्नान के बारे में बात कही गई है। अब स्नान कैसे करना है इस पर बात करते हैं। सबसे पहले आपको कमर के नीचे के पार्ट्स को ढक लेना है किसी भी कपड़े से क्योंकि संपूर्ण नग्न होकर कभी नहीं स्नान करना चाहिए। उसके बाद आपको हमेशा ऊपर से नीचे की ओर स्नान करना है यानी कि सबसे पहले आपको मस्तिष्क पर पानी डालना है, फिर शरीर पर, फिर पैर पर। ऐसा करने से आपका मस्तिष्क का गर्मी पैर से निकल जाती है और अगर अगर आप पैर से शुरुआत करोगे तो आपका गर्मी मस्तिष्क पर चढ़ जाएगी। इसके बाद संपूर्ण स्नान के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें। आप स्नान के लिए केमिकल साबुन के जगह आप मदानी मिट्टी, बेसन, मिल्क, कर्ड का इस्तेमाल कर सकते हो। यह केमिकल साबुन से सस्ती आती है, ना कि महंगी तो आप इन सारी चीज को इस्तेमाल जरूर कर सकते हैं।

अब स्नान के कुछ इंपॉर्टेंट रूल। इसे आप स्टॉप करके एक बारी जरूर पढ़े। आज के लिए बस इतना [संगीत] ही।