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Pakistan को मिले USA और China के हथियार! Mexico भी लगायेगा Tariff!!

World Affairs Insights21:55

Transcription

साथियों नमस्कार।

साथियों, सबसे पहले तो मैं माफ़ी चाहूंगा, इतने दिनों से कोई वीडियो नहीं आया क्योंकि मैं कहीं बाहर गया हुआ था। मुझे टाइम नहीं मिल पाया था। लेकिन अब वीडियोस लगातार आएंगे।

आज हम चर्चा करेंगे किस तरह से अमेरिका और उसके आसपास के देश भारत के अगेंस्ट फैसले ले रहे हैं। अलग-अलग इस तरह के टेरिफ लगाए जा रहे हैं जिससे भारत को नुकसान पहुंचाया जा सके और किसी भी तरह से भारत को प्रेशराइज करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि ट्रंप चाहते हैं कि एक इस तरह की डील भारत कर ले जिससे अमेरिका को और ट्रंप को फायदा हो जाए। भारत उनकी इस बात में आ नहीं रहा। भारत उनकी किसी तरह की शर्त को मान नहीं रहा। लेकिन ट्रंप अलग-अलग तरीकों से भारत को मनवाने की कोशिश कर रहे हैं।

जिसमें एक नई खबर आई है कि अब मेक्सिको भी ये कह रहा है कि भाई हम भारत पर 50% टेरिफ लगाएंगे। जिससे भारत के जो ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट्स हैं उस पर $1 बिलियन डॉलर का असर पड़ेगा। साहब, अमेरिका तो अमेरिका, मेक्सिको भी उस लाइन में खड़ा हो लिया।

एक खबर और है कि भाई यह जो तस्वीर है पुतिन जी के साथ, यह अमेरिका में खलबली मचाई हुई है और इस समय अमेरिका में जो विपक्षी दल है वो यह साफ-साफ कह रहा है कि भारत के और अमेरिका के संबंध खराब हो चुके हैं। यह तस्वीर दर्शाती है कि भारत किस तरह से अब जिओपॉलिटिक्स में आगे बढ़ रहा है और ट्रंप ने भारत के साथ सभी संबंधों को सबसे निचले स्तर पर ले जाकर खड़ा कर दिया है।

सारी चीजें क्या हो रही हैं? आप एक-एक करके पहले सिंपल भाषा में समझिए। फिर मैं सभी के आपको लिंक्स दिखा दूंगा, प्रूफ दिखा दूंगा। है ना?

देखिए, हो क्या रहा है। सबसे पहले तो यूएसए ने क्या किया? अब ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसके जो दिमाग में आ जाए वो कर देता है। ठीक है? ट्रंप को एक दिन ये लगा कि भाई मुझे चाइना के ऊपर और इंडिया के ऊपर टेरिफ लगाने चाहिए। पहले चाइना की बात करते हैं। तो इन्होंने चाइना पर टेरिफ लगा दिए। चाइना ने कहा अच्छा, तुम टेरिफ लगा रहे हो। चाइना ने बदले में क्या किया? अमेरिका से जो एक्सपोर्ट्स आते थे उन पर काफी हद तक रोक लगा दी जिसमें एक बड़ा व्यापार सोयाबीन का प्रभावित हो गया जो यूएसए से चाइना में आता था।

अब यूएसए में कई सारे फार्मर्स ऐसे हैं जो बड़े-बड़े फील्ड्स में सोयाबीन का उत्पादन करते हैं और वो सोयाबीन बड़े स्तर में चाइना एक्सपोर्ट होता था। अब ट्रंप ने जब टेरेफ लगाया, चाइना ने फिर काउंटर स्टेप लिया तो उसके बाद यह सोया को खरीदेगा कौन? वो सब के सब फार्मर अपना सोया ले बैठे रहे। ट्रंप को याद आया कि यार ये तो मैं गड़बड़ कर गया। अब उन फार्मर्स का जो गुस्सा है वो ट्रंप की तरफ निकल रहा है। और वो सारे के सारे फार्मर ऐसे हैं जो ट्रंप के ही वोटर हैं।

अब ट्रंप को समझ में नहीं आ रहा कि इस सोया का मैं करूं क्या? अब ट्रंप ये चाहते हैं कि इस सोया को इंडिया खरीद ले। सोया के साथ और भी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट हैं जिस पर असर पड़ा है और वो ये चाहते हैं कि इंडिया ना खरीद ले। इंडिया क्यों खरीद ले भाई? इंडिया अपने फार्मर्स का आइटम नहीं खरीदे। हमारे किसानों को ऑलरेडी इतना घाटा हो जाता है। हमारे किसानों की आय अभी भी बहुत कम है। हम अपने किसानों को मजबूती देने के बजाय तुम्हारे किसानों का आइटम खरीदें क्योंकि तुम्हारे किसानों का आइटम बिक नहीं रहा और वो भी तुम्हारे एक फितूर के चक्कर में। हम वो खरीदने को तैयार ही नहीं है।

ट्रंप चाहते हैं कि हम कैसे भी खरीदें। तो वो जो ट्रेड डील होनी है भारत और यूएसए के बीच में वो डील यही है कि हम कुछ उससे खरीदेंगे। वो कुछ हमसे खरीदेगा। कुछ इस तरह की बात होनी है। जिसमें अमेरिका पीछे पड़ा हुआ है कि हम उसका एग्रीकल्चर उत्पादन खरीदें। हम नहीं खरीदना चाहते। हम अभी तक इस डील पर पहुंचे ही नहीं है। ये डील अभी हमने क्लोज करी ही नहीं है। अभी भी नेगोशिएशंस चल रहे हैं।

अब हालांकि ट्रंप ने इस बीच भारत पे भी टेररिफ लगा दिया। 50% टेरिफ भारत पे भी लगा हुआ है। भारत उस टेरिफ के साथ भी अपनी इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। और आप जानते हैं किस तरह से 8% से भी ज्यादा हमारी ग्रोथ ग्रोथ रेट चल रही है।

एक चीज पर गौर और करिएगा। मेक्सिको चाइना पर भी टेरिफ लगाने की बात कर रहा है। इस पर मैं बाद में आऊंगा। पहले मैं आपको एक चीज दिखाता हूं। अ देखिए अभी एक खबर चली कल की कि यूएस के ऑफिशियल्स कह रहे हैं कि इंडिया एक बेस्ट एवर ट्रेड डील ऑफर कर रहा है बट अभी भी क्रैक नहीं हो पा रही है। भारत ने भी कुछ एक डील तैयार करके यूएसए को ऑफर करी कि भाई इस पर नेगोशिएशन कर लो। यूएसए अभी भी इस पर फाइनललाइज नहीं कर पा रहा है। लेकिन यूएस के ऑफिशियल कह रहे हैं कि भाई बहुत अच्छी डील भारत दे रहा है। लेकिन ट्रंप तो ट्रंप है। वो मान ही नहीं रहे।

अब भारत डील क्लोज क्यों नहीं कर रहा? क्योंकि भारत इंतजार कर रहा है एक टाइम का। अभी यूएसए में यूएसए के सुप्रीम कोर्ट ट्रंप की जो ये टेरिफ बाजी चल रही है, इस पर फैसला सुनाने वाली है कि ये टेरिफ बाजी सही है या गलत है। भाई यूएस में आप राष्ट्रपति बन गए। इसका मतलब यह थोड़ी है कि एक सुबह आपको ख्याल आया कि अच्छा उस देश पर टेरिफ लगा देता हूं। चलो लगा दिया। आपके ऊपर भी कोई है जो आप पर नजर रखे हुए है। तो यह सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टेरिफ पर फैसला लेने वाली है। और हो सकता है ट्रंप के टेरिफ हट जाए पूरी तरह से या काफी हद तक नेगलिजिबल हो जाए। इस तरह का फैसला सुप्रीम कोर्ट सुना दे। और अगर इस तरह का फैसला सुना दिया फिर तो कोई बात ही नहीं है। तो भारत इंतजार कर रहा है इस फैसले का। और कई बड़े विशेषज्ञ यह कह भी रहे हैं कि भाई यूएस की सुप्रीम कोर्ट हो सकता है एक डिसाइसिव वाइल्ड कार्ड बन के सामने आए इंडिया यूएस ट्रेड डील के अंदर।

अगर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आता है कि ट्रंप के टेरिफ्स हटाए जाते हैं। ये इललीगल है तो फिर ट्रंप की सारी धमकी और सारा कुछ रखा रह जाएगा। ट्रंप क्यों टेरिफ लगा रहे थे ताकि हम उसकी इस डील में आए। ट्रंप क्यों बार-बार धमका रहे थे कि भारत रशिया से तेल ना ले हम ऐसा कर देंगे हम वैसा कर देंगे ताकि हम इस डील को माने। ट्रंप क्यों बार-बार ये बयान देते थे कि भाई इंडिया यूएस की सॉरी इंडिया पाकिस्तान की वॉर में इतने जहाज गिरे उतने जहाज गिरे एक तरह से संकेत ये देते थे कि भारत का ही नुकसान हुआ है। ट्रंप क्यों बार-बार ये कहते थे कि मैंने ही सीस फायर कराया है। आप समझ रहे हैं ट्रंप क्यों कहते थे कि भारत की इकॉनमी तो डेड इकॉनमी है। ये सारी बातें सिर्फ इसलिए ताकि हम इस डील को कर लें।

ध्यान रखिएगा ट्रंप एक बिजनेसमैन है। वो बिज़नेस पहले देखते हैं उन्हें बिज़नेस से मतलब है। कोई भी बिज़नेस दे दे, उन्हें भारत दे दे, पाकिस्तान दे दे, चाइना दे दे, कोई भी दे दे। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि उसका यूएस के साथ रिलेशन कैसा रहा है। उस देश की आईडियोलॉजी क्या है? कोई मतलब नहीं है। सिर्फ और सिर्फ बिजनेस से मतलब है। भारत इनके इस जाल में फंस नहीं रहा।

किस तरह से यूएस पूरी दुनिया को चलाता है। आप खुद देख लीजिए। डब्ल्यूटीओ डब्ल्यूटीओ एक बॉडी बनाई गई है। सिर्फ इसलिए ताकि वो इस चीज पर निगरानी रखे कि किसी देश के किसानों को नुकसान ना हो। कहीं कोई किसी पर जबरदस्ती चीजें थोपे ना। जैसे यूएस अपने किसानों का आइटम हमको बेचना चाह रहा है या अपना डेयरी प्रोडक्ट बेचना चाह रहा है। तो इस तरह की चीजों को इस तरह की चीजों में कोई गलत चीजें ना हो या इमंबैलेंस ना हो इस चीज की निगरानी के लिए डब्ल्यूटीओ बनाया गया था। लेकिन अभी भी डब्ल्यूटीओ डिस्फंक्शन है क्योंकि यूएस ने उसमें अड़ंगे अड़ा रखे हैं। तो यूएस इस तरह से बड़ी-बड़ी संस्थाओं में अड़ंगे अड़ा करके उनको भी डिस्फंक्शन कर देता है।

और सुनिए यूएस के अड़ोसी पड़ोसी जितने भी देश हैं ये सब यूएसए के किस तरह के गुलाम हैं वो सब हम देख ही रहे हैं। आज मेक्सिको कह रहा है कि हम टेरिफ लगाएंगे। कनाडा भी यूएसए के सुर में सुर मिला रहा है। यूरोप के कई सारे देश हैं जो काफी हद तक अमेरिका के प्रभाव में आकर के अपना डिसीजन सुनाते हैं। यूरोप के अलग-अलग राष्ट्रध्यक्ष, प्राइम मिनिस्टर, राष्ट्रपति ट्रंप के सामने किस तरह से नतमस्तक हो जाते हैं आप सब देखिए। देख ही रहे हैं।

ऐसी स्थिति में जब भारत अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। यूएस के सामने झुक नहीं रहा है। भारत अपने हिसाब से फैसले ले रहा है। तो आप इस बात पर गर्व करिए कि भारत कितनी अच्छी स्थिति में है। मैं बात किसी एक विशेष सरकार की नहीं कर रहा। कोई भी सरकार हो यह भारत की विशेषता है कि आज हम इतनी बड़ी इकॉनमी हैं। आज हम जनसंख्या में भी काफी हद तक बढ़े हैं। मार्केट भी बहुत बड़ा है और हमने इस तरह का बैलेंस बनाया हुआ है। इस तरह की ग्लोबल नीति बनाई हुई है कि हमें कोई एक देश इस तरह से झुका नहीं सकता। तो इसीलिए हम इंतजार कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का। ठीक है?

एक चीज मैं आपको और बताता हूं। हो क्या रहा है और देखिए मेक्सिको कह रहा है कि हम लगाएंगे 50% टेरिफ। मेक्सिको लगभग 50% टेरिफ तक टेरिफ चाइना पे भी लगाएगा। उधर यूएस पाकिस्तान को $86 मिलियन डॉलर दे रहा है जिससे कि पाकिस्तान के F16 जो जहाज हैं जो यूएस ने ही दिए थे उनको अपग्रेड किया जा सके और 2040 तक उन्हें चलवाया जा सके बढ़िया तरीके से। जी पाकिस्तान की एयरफोर्स को मजबूत करने के लिए यूएस उनको फंड दे रहा है। वैसे तो यूएस के पास पैसे नहीं है। ट्रंपर होते रोते रहते हैं। हम पे पैसा नहीं है। हम पे पैसा नहीं है। H1V वीजा कम करो, ये करो, वो करो, गोल्ड कार्ड निकाल दो। अब इनके पास इतना पैसा है कि पाकिस्तान को ये फंड कर रहे हैं।

आगे देखिए। आईएमएफ आईएमएफ के बोर्ड ने पाकिस्तान को 1.2 बिलियन डॉलर का फंड रिलीज कर दिया है। यह भी कब जब पाकिस्तान पुराना नहीं लौटा पाया है। यानी आईएमएफ पाकिस्तान को और कर्ज दे रहा है कि भाई अपने जो भी पोर्ट्स वगैरह तुम्हारे टूटे थे जितना भी स्ट्राइक हुई थी उन सबको मरम्मत करा लो और भी अगर कोई अपग्रेडेशन चाहिए हो तो कर लो। कहीं से कोई हथियार खरीदने हो तो हथियार खरीद लो। आप खुद देख लीजिए डब्ल्यूtओ किस तरह से अमेरिका के प्रभाव में काम नहीं कर रहा। आईएमएफ किस तरह से अमेरिका के प्रभाव में लोन पकड़ा रहा है। यूएन तो किस तरह से अमेरिका का गुलाम है। अब आप देख लीजिए और फिर बात करी जाती है इस देश में डेमोक्रेसी की। ठीक है? फ्रीडम ऑफ प्रेस की और ह्यूमैनिटी की। यह सारे जो शब्द यूज किए जाते हैं हमारे देश में इन शब्दों को यूज करके यहां नैरेटिव्स चलाए जाते हैं जिससे कि उन सब बातों को यहां पर थोपा जा सके जो वेस्ट चाहता है।

मैं डेमोक्रेसी लिटरेसी और फ्रीडम ऑफ प्रेस इनके खिलाफ नहीं हूं। पर जो आंकड़े हमें और आपको दिखा करके बरगलाया जाता है वो सब आंकड़े वेस्ट से तैयार हो के आते हैं। और वेस्ट इन सब बड़ी-बड़ी बॉडीज में कितना प्रभावशाली है आप देख रहे हो। तो वो आंकड़े तो क्या ही हैं। किसी एक रोज आप उठते हो और आप देखते हो कि भाई डेमोक्रेसी में भारत बहुत नीचे चला गया तो आपको चिंता होने लग जाती है। किसी एक रोज आप उठते हो आपको पता चलता है फ्रीडम ऑफ प्रेस तो बहुत कम हो गई है। तो आप टेंशन में आ जाते हो। फिर आप अपनी सरकार के खिलाफ हो जाते हो। तो भाई जो लोग रैंक निकाल रहे हैं वो कौन है? गोरे लोग हैं। वो कुछ भी रैंक निकाल सकते हैं। आपको बरगला सकते हैं और आप अपनी सरकार के खिलाफ हो जाते हो। फिर आप ऐसी सरकारें ले आते हो जो उनके अनुसार काम करती हैं। तो इन सब चीजों से बचें। मैं यह सब आंकड़े आपको इसलिए दिखा रहा हूं कि देख लो किस तरह से वेस्ट अपने प्रभाव में या यूएसए अपने प्रभाव में दुनिया को चलाता है। इस प्रभाव में आने से बचें।

और देखिए साहब पाकिस्तान सिर्फ अमेरिका से अपनी एयरफोर्स को ही मजबूत नहीं कर रहा है बल्कि चाइना से अपनी नेवी को भी मजबूत कर रहा है। और अगले साल यह अपनी सबमरींस को डिप्लॉय कर देगा जो कि चाइना से प्राप्त कर रहा है। यूएस को इसमें भी कोई दिक्कत नहीं है। अब भाई पाकिस्तान को इतना मजबूत किसके लिए किया जा रहा है बताइए जाहिर सी बात है भारत के लिए। ठीक है? किस तरह से चल रही है दुनिया देख रहे हैं आप।

उसके बाद ये जो कांग्रेसमैन है यूएस में कांग्रेस वुमेन है सॉरी मैन नहीं सिडनी कामगर डो इन्होंने इस तस्वीर की चर्चा करते हुए पूरी कांग्रेस में यह बताया कि देखो किस तरह से भारत और रशिया नजदीक आ रहे हैं। किस तरह से मोदी और पुतिन अपनी जुगलबंदी दुनिया को दिखा रहे हैं और किस तरह से भारत और यूएस के संबंध बिल्कुल लोएस्ट लेवल पर आ गए हैं ट्रंप की वजह से। तो बात इनकी ये भी सही है। ठीक है?

इसके अलावा ये मैंने आपको बता ही दिया। सुप्रीम कोर्ट वाला भी बता दिया। उसके बाद ट्रंप ने अपने फार्मर्स को सपोर्ट करने के लिए सोचो उनके फार्मर्स का माल बिक नहीं रहा है। इसलिए ट्रंप ने उनको सपोर्ट करने के लिए 12 बिलियन डॉलर फंड रिलीज़ किया है। कितना ज्यादा उनको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और सोयाबीन एक्सपोर्ट तो क्रैश कर गया है 78% तक। इसलिए यह पूरा प्रभाव है। अच्छा आप यह कहेंगे कि ट्रंप ने सोचा नहीं था चाइना पे कोई भी टेरिफ लगाने से पहले कि चाइना अगर काउंटर टेरिफ लगा देगा तो मेरे फार्मर्स का क्या होगा? नहीं सोचा था। इतना ही सोच लिया होता तो फिर ट्रंप ट्रंप ना होते। समस्या तो यही है।

अच्छा भारत यहां पर भी यह देख रहा है कि बस कोई एक सिचुएशन ऐसी आ जाए जहां पर भारत एकदम अपना पंजा दबा दे। भारत उस एक पॉइंट का इंतजार कर रहा है जहां पर भारत अपना दांव खेल दे एकदम और सामने वाला पछाड़ खा जाए। वो पॉइंट क्या हो सकता है बताऊंगा अभी। भारत यह भी देख रहा है कि अभी सिर्फ एक ट्रंप हैं जो इस तरह के फैसले लेकर के पूरी जिओपॉलिटिक्स को बिगाड़ रहे हैं। ये ट्रंप कब तक हैं? दो दो ढाई साल और हैं। दो तीन साल और हैं। इनका कार्यकाल खत्म हो जाएगा। फिर कोई और आएगा। तो एक सरफरे राष्ट्रपति की वजह से भारत अपने संबंधों को यूएस के साथ पूरी तरह से खत्म करना नहीं चाहता। यह एक मैच्योर देश की निशानी होती है। तो भारत बड़े सदके और बड़े पेशेंस के साथ कदम उठा रहा है। ठीक है जी।

इसके साथ ही एक लिंक और है जो मैं आपको बताना चाहूंगा कि भाई आप सभी के कहने पर आप लोग ये चाहते थे कि कुछ करंट अफेयर्स का माल आपके पास हो जिससे कि आप पूरे साल का यानी 2025 का करंट अफेयर तैयार कर सकें। तो मैंने खुद एक किताब तैयार करी है। नाम लिखा है। आप देख सकते हैं। एक किताब तैयार करी है जिसमें पूरे साल का हर सेक्टर का करंट अफेयर है। जिसको पढ़ करके जिसको रट करके आप किसी भी एग्जाम में जा सकते हैं। चाहे यूपीएससी दे रहे हो, चाहे आप पीसीएस दे रहे हो, एसएससी हो, बैंक हो, क्लर्क हो, सीयूईटी हो, एमबीए हो, आरबी आरआरबी हो, एनडीए हो, सीडीएस हो, सीएपीएफ हो, सीआरपीएफ हो, कोई भी हो। इसमें वन लाइनर्स भी हैं, रटने वाले फैक्ट भी हैं, डिटेल्ड जानकारी भी है। जिस टॉपिक की जानकारी होनी चाहिए और साथ ही इसमें आपको स्टैटिक पोर्शन का भी एक हल्का सा रिवीजन वाला पोर्शन दिया गया है जिससे कि आप अपना स्टैटिक भी जल्दी से रिवाइज कर सकें।

मैं आपको इसमें इंडेक्स दिखा देता हूं। नेशनल घटनाएं हैं, इंटरनेशनल घटनाएं हैं, माइंड मैप्स हैं। ठीक है? अलग-अलग सेक्टर के कॉज और इफेक्ट, क्वांटम कंप्यूटिंग वो सारी चीजें दे रखी हैं जो आप सुनते हो। पूरे साल आप सुनते आए हो। इंडिया के स्पोर्ट्स के बारे में जो सुनते आए हो, है ना? इंटरनेशनल स्पोर्ट्स के बारे में सुनते आए हो। एग्रीकल्चर, बैंकिंग, रेलवे के बारे में जो अलग से थोड़ी बहुत जानकारी चाहिए होती है वो भी यहां पर है। ठीक है? स्टेट वाइज़ कंपैरिजंस आपको अगर इंडेक्सेस कंपेयर करने हो तो वो भी यहां पर दिया गया है। सारी चीजें आपको मैंने यहां पर अ कंप्रेस करके दे दी हैं। फ्रॉम द आर्काइव्स 50 साल 100 साल पुरानी जो चीजें हैं वो भी दे दी गई हैं। प्लेसेस जो न्यूज़ में रहती हैं बड़ी काम की वो भी आपको बताई गई हैं। कौन-कौन सी पुरानी साइट्स ऐसी हैं जो चर्चा में इस बार रही हैं। करंट अफेयर नेशनल इंटरनेशनल के अलग-अलग टॉपिक्स के भी दे रखे हैं।

अच्छा एक चीज़ और दिखा दूं आपको। ठीक है? है वो सब आप देख ही रहे हैं इसमें। अ देखिए कुछ की इवेंट्स भी हैं। जैसे जनरल नॉलेज में कुछ स्टैटिक पोर्शन होता है। हिस्ट्री, पॉलिटी, ज्योग्राफी, एग्रीकल्चर, रेल्वेज़, इकोलॉजी, एनवायरमेंट, इकोनमी। तो आदमी ये चाहता है कि भाई एक ही किताब में मैं स्टैटिक पोर्शन भी ऐसा इतना कर लूं कि मेरा एक रिवाइज़ हो जाए। तो वो भी यहां पर दिया गया है। उसका भी मैं आपको एक उदाहरण दिखा देता हूं। देखो ये पिटी का थोड़ा सा है। आप देख सकते हो। ठीक है?

तो अगर आप इस किताब को मंगवाना चाहते हैं तो आप Amazon पर जा सकते हैं। वहां पर आपको यह 24% के डिस्काउंट पर अभी मिल जाएगी। हमारे द्वारा लिखी गई है। अभी ये इंग्लिश में अवेलेबल है और बड़ी आसान भाषा में है। कोई भी भाषा वाला इसे समझ सकता है। तो इसके द्वारा आप अपनी तैयारी को और अच्छा कर सकते हैं। ठीक है? तो आप लोगों की इस समस्या का भी समाधान कर दिया। जो लोग मेरे से कमेंट करके मैसेज करके पूछते थे कि भाई करंट अफेयर कैसे करें? तो मैंने कहा भाई एक किताब लाते हैं पूरे साल भर की तो वो ये है। ठीक?

अब आपको आगे की कहानी मैं बताता हूं। देखो अभी भारत इंतजार क्या कर रहा है और यूएस क्या करने वाला है? यूएस एक ट्रेड डील कह लीजिए या ट्रेड एग्रीमेंट कह लीजिए करना चाह रहा है मेक्सिको और कनाडा के साथ। यह तीनों मिलकर के अपना एक ट्रेड डील करने वाले हैं। इसलिए मैक्सिको इंप्रेस करना चाह रहा है यूएस को कि देखो यूएस तुम्हारी तरह हम भी इंडिया पर 50% का टेरिफ लगा रहे हैं। मेक्सिको कह ये रहा है कि हम ये इसलिए लगा रहे हैं क्योंकि हम अपने यहां पर प्रोडक्शन को बढ़ाना चाहते हैं। हम मेड इन मेक्सिको को बढ़ाना चाहते हैं। वही वाली बातें हैं जो यूएस वाली बातें हैं। लेकिन कहीं ना कहीं यूएस को इंप्रेस करना चाह रहा है मेक्सिको। इसलिए ये काम किया गया है।

इधर आइए पाकिस्तान की अगर हम बात करें यूएस पाकिस्तान को पैसा दिलवा रहा है। हथियार दे रहा है। कोई दिक्कत नहीं है। देता रहे। यूएस भारत को इनडायरेक्टली प्रेशराइज करना चाह रहा है कि देखो मैं पाकिस्तान को मजबूत करके पाकिस्तान के पीछे खड़ा रह करके तुमको प्रेशराइज कर सकता हूं। तो भारत उसमें भी अभी हो नहीं रहा है। ठीक है साहब।

चाइना भी पाकिस्तान को हथियार दे रहा है। देता रहा है। कुछ नया काम नहीं कर रहा। ठीक है? यूएस का नया इसलिए है क्योंकि यूएस को ज्यादा ही एग्रेसिवली हथियार और फंड इसको दिलवा रहा है। पहले भी यूएस हथियार और फंड पाकिस्तान को देता रहा है। पर इंटेंसिटी इतनी नहीं रही है जितनी अब है। चाइना हमेशा से देता आया है। तो उसी क्रम में अभी भी दे रहा है। तो चाइना की तरफ से हमें बहुत ज्यादा कुछ नया सोचने की जरूरत नहीं है। यूएस की तरफ से सोचने की जरूरत है।

भारत इंतजार कर रहा है यूएस के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की। वो फैसला क्या आता है? जहां तक है वो फैसला ट्रंप के अगेंस्ट ही आएगा और साथ ही भारत इंतजार कर रहा है पाकिस्तान की क्योंकि पाकिस्तान के सिंध में इस समय बहुत बड़े स्तर पर लोग प्रोटेस्ट कर रहे हैं। कारण है पानी ना मिलना। कारण है एग्रीकल्चर बर्बाद हो जाना। कारण है फंड ना मिलना। फंड पानी और एग्रीकल्चर पे क्यों ध्यान नहीं जा पा रहा सिंध पर पाकिस्तान का? क्योंकि इस समय जो पंजाबी जितने भी हैं ये आर्मी वाले और जितने भी ऑफिशियल्स हैं ये लगे हुए हैं अफगानिस्तान को रोकने में, टीटीपी को रोकने में और बलोच को रोकने में। यहां अपने आप में आफत आई हुई है। तो पाकिस्तान एक बार में कहां-कहां देखें और इमरान खान के सपोर्टर भी गरम बैठे हुए हैं वो किसी भी वक्त फूट सकते हैं। तो भारत इस समय पाकिस्तान का भी इंतजार कर रहा है कि यार यहां पर कुछ हो जाए। कोई बड़ा प्रोटेस्ट हो जाए। भारत उधर के सुप्रीम कोर्ट का इंतजार कर रहा है कि यार वहां का क्या फैसला आए। आप समझ रहे हैं और साथ ही भारत अपने ट्रेड को डायवर्सिफाई भी कर रहा है। यूरोप के साथ डील्स कर रहा है। इधर आप देखें पुतिन के साथ अभी रशिया के साथ भी डील्स चल रही हैं। इधर साउथ ईस्ट एशिया में भी भारत डील्स कर रहा है। भारत थोड़ी डील्स को भी डायवर्सिफाई कर रहा है। भारत किसी तरह के कोई डायरेक्ट युद्ध में किसी डायरेक्ट बहसबाजी में नहीं पड़ रहा है। क्योंकि एक गलत मूव बहुत कुछ बिगाड़ देता है। आसिम मुनीर टेंपरेरी है। बहुत टेंपरेरी है। ट्रंप टेंपरेरी है। बहुत टेंपरेरी है। लेकिन यूएसए टेंपरेरी नहीं है। जिओपॉलिटिक्स टेंपरेरी नहीं है।

हमने एक गलती करी है। हमें इस पर विचार करना चाहिए कि जब हमने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को दो-तीन दिन तक मार लगाई थी। उसके बाद हम एकदम से रुक गए पाकिस्तान के कहने पर हमें नहीं रुकना था। हमें उसको एटलीस्ट इतना बर्बाद कर देना चाहिए था कि उसकी बर्बादी दुनिया को दिखाई दे। कुछ नहीं तो कराची पोर्ट को ही डिस्ट्रॉय कर देते। अब जिस तरह से पाकिस्तान नैरेटिव चला रहा है कि देखो हमने भारत को हरा दिया। देखो आसिम मुनीर महान है। ठीक है? जिस तरह से पाकिस्तानी को ये लगता है कि उन्होंने हमको हरा दिया। हमारे जेट गिरा दिए? ये सब इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि हमने उसको एक पॉइंट के बाद रोक दिया। हम उसे बहुत बर्बाद कर देना चाहिए था। इतना बर्बाद कर देना चाहिए था कि दुनिया कितना भी उसे फंड दे लेती उसको उभरने में एक एक डेढ़ दो साल लग जाते। ये शायद गलती हमने कर दी। और अगर हमें दूसरा राउंड भी करना है तो मुझे लगता है वो भी अब ज्यादा दूर नहीं है।

आने वाले 6 महीने बहुत क्रूशियल हैं। आप यह मान के चलिए। आने वाले इन्हीं 6 महीने में आप देखोगे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और नीचे जाएगी। इन्हीं 6 महीने में आप देखोगे पाकिस्तान में और ज्यादा प्रोटेस्ट होंगे। इन्हीं 6 महीने में आप देखोगे जो मैं बोल रहा हूं कि जो भारत इंतजार कर रहा है ना सुप्रीम कोर्ट का इसका उसका पांच छह समीकरण ऐसे हैं जिसका भारत इंतजार कर रहा है। वो इन 6 महीने में हो लेंगे। इन्हीं 6 महीने में आप देखोगे हो सकता है बांग्लादेश में किसी चुनाव की घोषणा हो जाए। इन्हीं 6 महीने में बंगाल में चुनाव है। ठीक है जी। इस एंडे को भी भूलना नहीं चाहिए। इन्हीं 6 महीने हमारे यहां पर जितने भी ये अवैध तरीके से लोग आए हैं वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करा लिया। ये भी धीरे-धीरे सब बाहर हो लेंगे। ठीक है? इन्हीं 6 महीने में आप यह भी देखेंगे कि पाकिस्तान में पानी रोकने से जो समस्याएं उत्पन्न हुई है उनके इफेक्ट और देखने को आपको मिलेंगे। ठीक है जी। और इन्हीं 6 महीने में हो सकता है ट्रंप के ऊपर भी कोई ना कोई वहां पर क्योंकि उनके भी चुनाव होने अगले साल। ठीक है जी। तो उस पर कोई फैसला आ जाए। हो सकता है ईरान पर कोई फैसला आ जाए। बहुत कुछ इन छ महीनों में होना है। बहुत चीजें बिल्कुल टिकी हुई है बस कैसे भी करके। 6 महीने में कौन कहां कैसे गिरेगा कुछ पता नहीं। इसलिए बड़ा सद के मूव खेलना है यहां पर। एक गलत मूव इकॉनमी को बहुत बड़ा धक्का दे सकता है। तो ये सारी चीजें चल रही है। हम सिर्फ सिचुएशन का वेट कर रहे हैं। जैसे ही वो सिचुएशन आती है हम तुरंत हिट करेंगे। फिर कोई कुछ नहीं कर पाएगा। फर्ज करो एक सिचुएशन ऐसी आ जाए यहां की कोर्ट कोर्ट इनके अगेंस्ट फैसला दे दे। यहां एकदम प्रोटेस्ट बिल्कुल चरम सीमा पर पहुंच जाए। हो सकता है पाकिस्तान हमारे यहां कोई हिमाकत करे जिसके बाद हम भी स्टार्ट हो जाए। हो सकता है उधर बांग्लादेश कुछ करे। कुछ भी हो सकता है। वी आर वेटिंग फॉर दैट पर्टिकुलर मोमेंट। जहां पर चीज़ मोर देन 50% हमारे फेवर में आ जाए। फिर आप देखिएगा भारत क्या करता है।

तो आप में से कई लोग इंपेशेंट हैं कि भाई ऑपरेशन इंदौर पार्ट टू कब होगा? पाकिस्तान कब टूटेगा? ये चीजें इतनी आसान नहीं होती कि जब हमने चाह लिया था हो जाए। हमें सिचुएशनंस का इंतजार करना होता है और आप यकीन मानिए सिचुएशन हमारे फेवर में बन रही हैं। अभी बन रही हैं। तो ये सारा एक पूरा सिनेरियो चल रहा है। उम्मीद है मैं समझा पाया होगा। बाकी मिलते हैं अगले वीडियो में। किसी को लिंक चाहिए हो तो मैंने डिस्क्रिप्शन में दिया हुआ है। वहां से और कमेंट बॉक्स में पिन किया हुआ है। वहां से किताब का लिंक ले सकता है। बाकी अगले वीडियो में चर्चा करेंगे। तब तक के लिए, नमस्कार।