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जंगल झाड़ था यहां झाड़ीवड़ी था तो जब यह बन रहा था चौतरा, उस समय हम लोग अंबेडकर जयंती मना रहे थे। उस समय साफ सुथरा हो रहा था तो उस समय बुनियाद जब कटाया, उस समय कोई नहीं आदमी रोकने के लिए आया। से मांडू ब्लॉक से और नापी करके सिर्फ चिन्हित किया है कि 94 ही 95 है। रही बात कि 9495 अब रहती है कि गरम मजुआ है क्लियर नहीं किया है ये तो पूरा जीएम लैंड का जमीन। अच्छा और यहां पे जीएम लाइन का जमीन होने के बाद ही काम शुरू हुआ। काम शुरू होने होने के उपरांत जब हम लोग बाउंड्री शुरू करने लगे तो बाउंड्री का जब सीमाना यहां पे आने लगा तब इनका विवाद शुरू किया गया है।
बाल बच्चा या महिला लोग नहाने के लिए जाती थी कपड़ा खींचने के लिए जाती थी। तो उसमें वो बोलता था कि चमार लोग कहां से आ गया? नमस्कार, जोहार। इस वक्त ले चलते हैं झारखंड के रामगढ़ जिला अंतर्गत मांडू प्रखंड के मंजला चुंबा पंचायत में। देख सकते हैं मजला चंबा पंचायत के लुकैया टांड में है और लुकैया टांड में देख रहे हैं हमारे पीछे महिला और पुरुषों की संख्या है जहां पर दलित समाज के लोग हैं जो कि यहां अंबेडकर अंबेडकर भवन जो है बना हुआ है और देख सकते हैं चार दीवारी निर्माण भी किया गया है। और यहां बताया जा रहा है कि इस चार दीवारी निर्माण को लेकर ही जो है यहां पर विवाद खड़ा हुआ है और इस विवाद खड़ा होने के बाद जो है दो पक्षों में जिस तरह से यहां विवाद हुआ, खासकर यहां लुकैया टांड के रहने वाले दलित समाज के लोग और महिला चुंबा में कुछ साह समाज के लोग थे और यहां के यहीं के जो है एक निवासी हैं रमन कुमार जिनके पूर्वज का नाम जो है बताया जा रहा है कि जमीन है। खासकर यह जमीन जो है रैती बताया जा रहा है और रैती के बगल में गिरमजुरवा भी है जो कि यह भवन बना हुआ है। देख सकते हैं थे।
क्या मामला था यहां पर? यह मामला आज जो देख रहे हैं आपका भवन जो भीमराव अंबेडकर का जो लुकैया में बना हुआ है। यह बहुत पहले से इस जमीन को एक स्टेज है वहां पुराना 2011-12 में यहां बना हुआ था। और यह है गर्म मजुआ जैसी जमीन जो 9495 का है। तो यहां से सीआई साहब म आए थे और अमीन आए थे ब्लॉक से मांडू ब्लॉक से और नापी करके सिर्फ चिन्हित किया है कि 94 ही 95 है। रही बात 9495 अब रैती है कि गरम मजुरवा है क्लियर नहीं किया है। ये सस्पेंस में रखा गया है। तो खैर ठीक है, जो विवाद था एक रमन साहब के जो कर रहे थे दावा कर रहे थे कि मेरा जमीन है और वही विवाद के देखिए दीवाल दे रहा था बाउंड्री पीछे से म चार दीवारी का यहां ये सरकारी फंड या जो भी से म हुआ हो रहा था इसको रोका गया और यही विवाद बढ़ गया आक्रोश में बढ़ गया कि भाई यह जो संविधान निर्माता है यह किसी एक का नहीं है रमन साह जी का भी है आदिवासी मूल निवासी पूरे भारत का यह संविधान निर्माता जी है उन्हीं का एक भवन बन रहा था और यही म चबूतरा में जो जयंती मनाता है तो इसमें तो हम लगता है कि किसी विवाद नहीं होना चाहिए था विवाद माने कर दिया गया तो खैर विवाद अब सीओ के पास में जब वो रिपोर्ट देंगे आज तो फिर हम लोग भी इधर से जाएंगे और हम लोग फिर क्या है किसका है खुला करेंगे कि जमीन चिन्हित किन्ही आदमी का है रहती है कि गरमा मजुरवा उसके बाद में फिर यहां का जो अभी जनता जो बैठा है और यही निर्णय मिलेगा। फिर आगे के काम देखा जाएगा।
परिचय परिचय आदिवासी जन परिषद के केंद्रीय महासचिव प्रकाश मुंडा। जमीन बल्कि कई विगत वर्षों से हम लोग यहां अंबेडकर जयंती मनाते आ रहे हैं और इस जमीन में पहले कोई भी विवाद नहीं था। जिस समय आपका देख रहे हैं कि ये जो स्थल बना हुआ है चबूतरा का ये आज से 15 साल पहले बना हुआ है और उस वक्त तक इनको नहीं लग रहा था कि मेरा जमीन है। उस वक्त इनके पास कोई कागजात कोई पेपर नहीं था। उस समय विवाद भी नहीं था। लेकिन आज जब चार दीवारी हो रहा है और चार दीवारी के क्रम में ये एक से डेढ़ महीना पहले ये रोक रहे हैं। बोल रहे हैं कि नहीं ये मेरा निजी जमीन है। ये मेरा खतियानी जमीन है और इसी को लेकर के जो है कि आगे कार्यालयों में कागज दे के काम को स्थगित किया गया है।
कितना खाता का मामला है ये? ये लगभग 24 खाता का मामला है और देख रहे हैं कि अभी ब्लॉक से पदाधिकारी लोग भी आए हैं और भूमि का जो है निरीक्षण कर रहे हैं। इससे पूर्व दो दिन पहले भी आए थे आपका अनुमंडल से और क्या बोलते हैं? अंचल से अधिकारी लोग लेकिन यहां पे क्या हुआ कि उन लोग जब जमीन मिलाने लगे तो कहीं से मिल नहीं रहा था और जब देखे तो उन लोग को लग रहा था यह फॉरेस्ट का जमीन है इसीलिए उन्होंने कहा ग्रामीणों से कि नहीं ये पहले जांच का विषय है हम लोग पहले जांच करेंगे उसके बाद जमीन का माप करेंगे। कितना डिसमिल का ये मामला? लगभग चार से पांच छह डिसमिल इतना ही इतने ही डिसमिल का मामला है लेकिन देखिएगा कि अभी तक वो पेपर का जो जांच है अभी तक हम लोग को पता भी नहीं कि पेपर जांच हुआ है कि नहीं हुआ है और अभी अधिकारी लोग जो है कि नापी शुरू कर दिए हैं।
कौन दावा कर रहे हैं? कौन लोग हैं? इसमें दावा करने वाले रमन शाह वगैरह के लोग हैं। जो बगल में ही उनका घर है। समझे ना? वही उन्हीं का दावा है कि यह जमीन जो है एक मेरा है। और इनके दादा जी जो है कि अमीन भी थे। इसके लिए आप देखिएगा कि पूरा चुंबा में सबसे ज्यादा गैर मजुरा जो जमीन है इन्हीं के कब्जा में है। आप देखिएगा कि बगल में एक तालाब भी था। उस तालाब में हमारी माताएं महिलाएं पूर्व में नहाया भी करती थी। आजू तालाब को जो है कि क्या बोलते हैं समतल कर दिया गया है और वो वो भी जीएम लाइन का जमीन जो है कि अपने कब्जे में करके रख लिए हैं।
ये बाउंड्री वाल जो कराया जा रहा है ये सरकारी विभाग से हो रहा है? जी हां सरकारी विभाग से है। आपका जिला से इसका योजना निकला हुआ था। वहीं से काम चल रहा है। डीएफटी फंड से तो ये जांच नहीं हुआ बनाने जो बाउंड्री वाल का जो जब एस्टीमेट बना उस समय जांच नहीं हुआ? नहीं ये तो पूरा जीएम लैंड का जमीन है। और यहां पे जीएम लाइन का जमीन होने के बाद ही काम शुरू हुआ। काम शुरू होने के उपरांत जब हम लोग बाउंड्री शुरू करने लगे तो बाउंड्री का जब सिमाना यहां पे आने लगा तब इनका विवाद शुरू किया गया है। यही इनका जो है कि सोच है। इन लोग को लग रहा है कि भाई यहां पे बगल में स्टैचू है। अब भवन बन गया है। अगर ये लोग इसी तरीके से दिन प्रतिदिन बढ़ते जाएंगे तो हम लोगों का जो है कि यहां पे मतलब अंबेडकर वाली विचारधारा इन लोग को थोड़ा सा नहीं छता है। नहीं इन लोग को पछता है। वही कारण है कि बाबा साहब का विरोधी विचार में ये लोग आज भी जमीन का विवाद सामने लाए हैं।
भवन बने हुए कितना साल हो गया? भवन तो नया बन रहा है। हमको लगता है कि चारप महीना से शुरू हुआ है। छ महीना छ महीना लगभग उससे पहले और उससे पहले आंगनबाड़ी भी बना हुआ था। लेकिन आंगन 20 साल पहले का बात है लेकिन आंगनबाड़ी के समय भी इन लोग कोई विरोध नहीं किए और यहां पे जो है कि मंदिर भी बगल में बना उसमें भी कोई विरोध नहीं हुआ है। अचानक देखिएगा कि यहां पे जब बाउंड्री वाल हो रहा है तब इनका विवाद शुरू हो गया है। बना हुआ है।
अभी ये जो मेला यहां पर भीड़ जो है क्या जिला या फिर अंचल से पदाधिकारी लोग आए हैं? जी हां अंचल से पदाधिकारी लोग आए हैं और हमारा कुजीओपी थाना से भी बड़ा बाबू आए हुए हैं। उनके समक्ष और प्रशासनिक विभाग से लोग आए हुए हैं।
क्या चाहते हैं आप लोग? हम लोग यही चाहते हैं कि देखिए, जो भी है आप देख रहे हैं आपके सामने सारा कुछ है। यहां भवन है। यहां पे आंगनबाड़ी केंद्र है और ये जमीन भी जब यहां से लेकर यहां तक जीएम लाइन का जमीन है। तो बीच में चारप डिसमिल किसी का रेती नहीं हो जाता है। अगर रेती होता तो 15 साल पूर्व में ये रेती जमीन का कागज दिखा करके और ये अपना दावेदारी ठोक सकते थे। लेकिन अचानक अगर ये दावेदारी ठोक ठोक रहे हैं तो इससे यही स्पष्ट होता है कि फर्जरी कागज बना करके ही लाए हैं। ये जांच का विषय है और जांच में अभी तक हम लोग को बताया नहीं गया कि जांच में जमीन वाकई में खतियानी है कि नहीं है और अचानक नापी हो रहा है। इसीलिए हम लोग को समझ में भी नहीं आ रहा है कि आखिर नापी कैसे हो रहा है। ग्रामीणों को पहले स्पष्ट करना चाहिए कि ये जमीन रहती है कि नहीं है।
सो ये जब भवन का निर्माण हो या बाउंड्री वाल का उसमें आम सभा हुआ होगा? बिल्कुल आम सभा हुआ था। आम सभा हुआ ग्रामीण आए। ग्रामीण आने के बाद यहां पे तय किया गया उस समय कि भवन बनेगा कहां तो हम लोगों ने जगह देखा जगह वहां पे वहां पर जब जगह बना तो भवन शुरू भी हो गया में और रमन साहब भी लिओट में रहे हैं जो अमीन के रूप में हैं वो अच्छा वो भी थे हां वो अमीन का काम करते हैं वो भी थे अभी उन्हीं के द्वारा विवाद किया अभी उन्हीं के द्वारा विवाद किया जा रहा है।
अपना परिचय बता दीजिए। मेरा परिचय सत्येंद्र कुमार दास और मैं मूल निवासी विद्यार्थी संघ का पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हूं। ये लुकैया टोला में बहुत कम घर था ठीक है और कम घर रहने का कारण जो है कि कुछ हम लोग को ऐसा समस्या पड़ता था जैसे मान लीजिए महिला लोग को पूजा करना जाना है तो बस्ती जाना होता हसालंग जाना होता है ना ये सारा चीज म देखा गया कि भाई इन लोग को कठिनाई होता है तो हम लोग एक गांव में मीटिंग बैठाए है ना गांव समाज में कि भाई ये एक ठो मंदिर यहां गांव में रहना बहुत जरूरी है। ठीक है? तो देखिएगा कि हम लोग पूरा लुकैया टोला में हम लोग और 32 भी आदमी बुलाए और यहां मंदिर को स्थापना किया गया और इसमें देखिएगा कि रामकुमार साह जी थे अमीन साहब वो भी पहल लिए थे मोती साहब था रामकुमार साहब के बड़े लड़का वो भी पहल लिए थे और जगदीश भैया थे वो भी पहल लिए थे और पूरा गांव समाज के जितना लोग हैं तमाम लोग के निगरानी से और उन लोग को कहना पर जो है कि हम लोग के जमीन को म दिखाया गया कि जमीन में मंदिर बनेगा और इसी में जो है कि म जो है म पूजा पाठ आदमी करेगा यहां महिला लोग है जेंट्स लोग हो जो भी करना है यहां मंदिर बनाने से हम लोग को सुविधा होगा उस समय रोड भी बन नहीं था है ना नदी नाला दें करके पार होते थे तो ये विचार बना और विचार के तहत जो है कि हम लोग की मंदिर बनाए मंदिर के बाद जो है कि ये जो है देख रहे हैं ना ये आंगनबाड़ी बना है आंगनबाड़ी में बनने के समय में देखिएगा कि राजपूत लोग का जमीन है। सब उन लोग रोकने के लिए आया था तो उस समय उन लोग के साथ समझौता हुआ कि भाई यह गरम मजुरवा जमीन है। यहां बन ना दिया जाए। यहां बच्चा लोग पढ़ेगा। है ना? इस टाइप के उन लोग को जो है कि समझा-बुझा करके हम लोग भेजे और रामकुमार साह या रमन साह कभी नहीं बोला जिंदगी में कि ये मेरा रेती प्लॉट है। ऐसे समझे ना? ये जब भवन बनने शुरू हुआ तब से दो-ती महीना से ये रट लगाया हुआ है कि हम मेरा ये रेती प्लॉट है और ये जमीन जो है हम छोड़ेंगे नहीं तो हम लोग बोले भाई जब ऐसा बात है तो कागज दिखाओ और जो है कि हम लोग देखेंगे कहां तक जमीन पड़ता है समझे ना तो ये कागज मने दिखाया लेकिन यहां के सीओ वीडियो को भी कंप्लेन वही किया कि यहां हमरा जमीन में अतिक्रमण कर रहा है या दबाव के माध्यम से जो है कि म दबाया जा रहा है छीना जा रहा है सीओ वीडियो भी आए थे सीआई साहब आए थे एक दिन तीन दिन के पहले वो पेपर मांगे उनसे कि भाई कहां तो जमीन है वो बताओ जमीन के कागज लाओ वो दिखाया लेकिन मैच नहीं कर रहा था तो सीआई साहब बोले कि ठीक है ये तो अब खतियान में नहीं जुड़ रहा है ये जंगल झाड़ दिखा रहा है तो दो दिन के समय लीजिए म लेते हैं और ये सब बाउंड्री वगैरह जो कर रहे हैं आप लोग ये बंद कर दीजिए दो दिन के कम से कम मोहलिया दीजिए तो सीआई साहब आज शुक्रवार के डेट लिए थे आए हैं। अब वो कहां बोलेंगे और उसी को माध्यम से जो भी निर्णय होगा वो गांव स्तर से और दूसरी बात है कि यह सिर्फ रोविदास समाज के नहीं है। अमितकर भवन बना है तो ये सारा समाज के लिए है। शादी विवाह हो या जो है कि माने बरबर बाराती हो ठहरने का एक स्थान हम लोग को यही है। इसीलिए हम अंचल के द्वारा जमीन अमन शाह हो अमन शाह हो रमन साहब रमन साह के पक्ष में अगर निकाल देते हैं तो फिर आप लोग क्या करेंगे? हम लोग बैठ के देखेंगे समझौता उस समय तो नहीं उस समय अगर बोलते कि मेरा जमीन है रेती प्लॉट तो ये सरकारी स्टेज चौतरा नहीं बनता समझे ना उसको दादा की जानकारी जब था उसको बाप के जानकारी था तो उस समय तो रोकना चाहिए लेकिन उन लोग को सहमति से बना खाता प्लॉट बता रहे हैं रमन साहब खाता प्लॉट है कितना है वो 24 खाता का है 525 हां और 25 है काट 594 प्लॉट नंबर अच्छा रकबा कितना है? रकवा 60 डिसमिल बता रहा है अपने से। हम लोग तो म अभी सुन रहे हैं। नहीं पहले से तो जानिए नहीं रहे। है कि देखिए ये बोलता है कि इन लोग रविदास समाज के जो है इन लोग दबाव से हमरा म जमीन छीना जा रहा है। तो हम कहते हैं कि रविदास छीन रहा है कि ये रमन साहब के खानदान छीन रहा है। अभी देखिएगा कि सरकारी वहां जो पोखर म खोदाया गया था। है ना? तालाव खोदाया गया था। तो वहां देखिएगा कि हम लोग को बाल बच्चा या महिला लोग नहाने के लिए जाती थी कपड़ा खींचने के लिए जाती थी तो उसमें वो बोलता था कि चमार लोग को कहां से आ गया इसी तरह से माने कि मैटर बना करके और देखिएगा कि यही डज़र से जो है कि ये समतलीकरण करा करके और अपना निजी चार दीवारी दे दिया है और वो बंद कर दिया तालाब कब का मामला है? एक मामला है करीब 15 हां करीब दो चार महीना की बात है चार महीना पहले की बात है हां चार महीना पहले तालाब अभी है या नहीं है? अभी तालाब खत्म कर भर दिया समतलीकरण कर दिया हां समतल हो गया फिर आप लोग कहां जाते हैं? अब अब हम लोग जाते हैं नदी नाला में कहीं नहाते हैं या म कोई चपाकल कोड़ा है कोई कुआं खोदा है उसमें नहाता तो होता है नहीं तो पहले हम लोग सब सारा चीज वही करते थे यहां झाड़ीवड़ी था तो जब ये बन रहा था चौतरा उस समय हम लोग अंबेडकर जयंती मना रहे थे उस समय साफ सुथरा हो रहा था तो उस समय बुनियाद जब कटाया उस समय कोई नहीं आदमी रोकने के लिए आया सब बन गया यहां म आंगनबाड़ी बना उस समय कोई नहीं रोकने आया और आज 15 20 साल से 25 साल हो गया तो आज रमन साहब बोल रहे हैं मेरा जमीन है ये मेरा जमीन को छोड़ दीजिए तो मान लो उस समय जब कट रहा था बुनियाद काट रहा था आदमी काम कर रहा था उस समय रोकना चाहिए उनको तो मेरा जमीन है मेरा जमीन में काहे काट रहे हैं गाट रहे हैं उस समय नहीं रोके नहीं रोके नहीं रोके अभी क्या कह रहे हैं अभी बोल रहे हैं मान मेरा जमीन है मेरा जमीन में छोड़ दो चौतरा तोड़ दो तो मतलब सरकारी भवन बना है तो कैसे चौतरा तोड़ेगा पूरा दीवार तोड़ रहे हैं तो यहां अभी अंचल से नाभि करने के लिए आए हैं। हां। अगर माफ़ी में जो है मान लीजिए अमन साहू का निकल जाता है अमन साहू का तो फिर आप लोग क्या कहेंगे? नहीं टूटेगा। अब निकल जाएगा तो मान उसको देखा जाएगा। अगर बाय द वे निकल जाए उसको तो मान लो बना हुआ चीज तोड़ेगा नहीं ना सर। वो तो टूटेगा नहीं। जो उसका दिया जाएगा जो मुआवजा होगा दिया जाएगा। तोड़ेंगे नहीं हम लोग। और क्या दिक्कत है? कोई सुरक्षा नहीं तोड़ेंगे। और क्या दिक्कत है? दिक्कत है वही म हम जो बनाए हैं वो चीज टूटेगा नहीं और म उसको जो बोलेगा तोड़ के हमको दीजिए वो नहीं हम लोग देंगे देंगे हम लोग कितना कितना जमीन है यहां कितना जमीन है तो टाइम कितना ये लोग जाने का कितना ना पाए यहां से? क्या नाम हुआ आपका? हम मेरा नाम है फुलमती देवी। ठीक है। को लेकर के आगे बातचीत करने की कोशिश करते हैं। फिलहाल और भी ऐसे ही खबरों को आप देखने के लिए द ट्रेवल पोस्ट नेशनल मीडिया को फॉलो करें सब्सक्राइब करें तब तक के लिए अशोक खां। हां।