📱

Get Our Mobile App

Take your business learning on the go!

Download on the App StoreGet it on Google Play

Bolne Wala Tota, Shehzadi Or Faqeer Ka Anokha Qissa || Moral Stories in Urdu & Hindi

VibeElevate47:14

Transcription

प्यारे दोस्तों, कुछ जमाने की बात है कि एक वसीय सल्तनत में एक बादशाह अहमद हुकुमरानी करता था। उसकी सिर्फ एक ही बेटी थी। बेटा कोई ना था और वह अपनी बेटी से बहुत मोहब्बत करता था।

एक दिन ऐसा हुआ कि उसकी बेटी जिसका नाम शहजादी गुलाब था, शदीद बीमार पड़ गई। बादशाह ने उसका नाम गुलाब इसलिए रखा था कि वो हीरे की तरह निहायत खूबसूरत, सुर्खी माइल और चमकदार चेहरे वाली थी। मगर जब वह बीमार हुई तो उसकी सारी चमक मंद पड़ गई।

शहजादी के इलाज के लिए हजारों हकीम बुलाए गए और बेशुमार दवाइयां दी गई। मगर कोई फायदा ना हुआ। वो इतनी कमजोर हो गई कि चलना फिरना तो दूर की बात। बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया। किसी की समझ में ना आता था कि आखिर इतनी खूबसूरत और तंदुरुस्त शहजादी को कौन सी बीमारी लग गई।

एक रोज वजीर अली ने बादशाह के दरबार में हाजिर होकर अर्ज की। "बादशाह सलामत अगर इजाजत हो तो कुछ अर्ज करूं।" बादशाह ने कहा, "बोलो।"

वजीर ने कहा, "हजारों हकीम इलाज करते-करते थक गए मगर कोई फायदा ना हुआ। मेरी बेटी दिन ब दिन कमजोर होती जा रही है।"

"और अब तुम कौन सा नया नुस्खा ले आए हो?" बादशाह ने पूछा।

वजीर ने हाथ जोड़कर कहा, "हुजूर मैंने सुना है कि अगर किसी का मर्ज लालाज हो जाए तो जादुई आम खाने से वह लम्हों में सेहतयाब हो जाता है।"

बादशाह यह सुनकर हैरान रह गया और दरबारी भी दंग रह गए। "आम और वो भी जादुई। यह कहां से मिलेगा?" बादशाह ने तज्जुब से कहा। फिर उसने वजीर को घूरते हुए पूछा, "क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है? जादुई आम भला कहां मिलेगा? कुछ पता भी है या बस यूं ही कह रहे हो?"

वजीर ने खौफजदा होकर कहा, "बादशाह सलामत आपकी सल्तनत में एक आलिम साहब रहते हैं। शायद वह इस बात में कुछ जानते हो।"

वो बहुत गरीब थे मगर निहायत नेक दिल और मददगार इंसान थे। उनके पास कोई औलाद ना थी। बस वो दोनों मियां बीवी अपनी तन्हाई दूर करने और घर में रौनक रखने के लिए एक तोता पाले हुए थे। यह तोता आम तोतों की तरह ना था बल्कि एक खास नस्ल से ताल्लुक रखता था और इंसानों की तरह साफ अल्फाज में बातें करता था।

वजीर ने कहा, "मैंने एक बार सुना था कि एक शख्स शदीद बीमार हो गया था और उसके बचने की कोई उम्मीद बाकी ना थी। मगर आलिम साहब के तोते ने उसके घर वालों को एक मुखसूस जड़ी बूटी का नाम बताया। वो बूटी बहुत मुश्किल से मिली। मगर जब उसे पीसकर मरीज को पिलाया गया तो चंद दिनों में वो मुकम्मल सेहतयाब हो गया। देखने में ऐसा लगता था जैसे वह कभी बीमार ही ना हुआ हो।"

बादशाह यह सुनकर गहरी सोच में पड़ गया। आखिर उसने फैसला किया कि आलिम साहब से मशवरा लेने में कोई हरज नहीं। उसने हुक्म दिया, "वजीर फौरन जाओ और आलिम साहब को इज्जत एहतराम के साथ दरबार में ले आओ।"

वजीर फौरन रवाना हुआ और आलिम साहब के घर पहुंचा। आलिम साहब और उनकी बीवी निहायत सादा मिजाज और शरीफ लोग थे। वजीर को दरवाजे पर देखकर घबरा गए और बोले, "वजीर साहब क्या हमसे कोई खता हो गई जो हमें दरबार में तलब किया जा रहा है?"

वजीर ने मुस्कुराकर उन्हें तसल्ली दी, "ऐसी कोई बात नहीं। बादशाह सलामत ने आपको शहजादी गुलाब के इलाज के लिए बुलाया है।"

यह सुनकर आलिम साहब परेशान हो गए और बोले, "मगर वजीर साहब मैं तो कोई हकीम नहीं हूं। हां दुआ जरूर कर सकता हूं।"

वजीर ने जवाब दिया, "असल बात यह है आलिम साहब कि हमने सुना है कि आपका तोता बड़े से बड़े मर्ज का इलाज बता सकता है।"

यह सुनते ही आलिम साहब खौफजदा हो गए। वो डरने लगे कि कहीं बादशाह सलामत उनसे उनका तोता ना छीन ले। क्योंकि यह तोता उन दोनों मियां बीवी का लाडला था जिसे उन्होंने बड़े प्यार से पाला था। आलिम साहब और उनकी बीवी उस तोते को अपनी औलाद की तरह चाहते थे।

उनका परेशान चेहरा देखकर वजीर नरमी से बोला, "आप बिल्कुल फिक्र ना करें। आपका तोता आप ही के पास रहेगा। बस आप इतना करें कि शहजादी साहिबा की हालत उसे बताकर दुआ पूछ लें। मैंने बादशाह सलामत को यकीन दिलाया है कि तोते की बताई हुई दुआ से शहजादी बिल्कुल सेहतियाब हो जाएगी। अगर ऐसा हो गया तो बादशाह सलामत आपका घर सोने चांदी और हीरे मोती से भर देंगे।"

आलिम साहब ने सर झुकाकर जवाब दिया, "वजीर साहब हमें ना सोना चाहिए ना चांदी और ना हीरे मोती। जो कुछ हमारे परवरदिगार ने हमें अता किया है हम उसी में खुश हैं। हमारे ना कोई औलाद है ना कोई जिम्मेदारी तो यह दौलत हमारे किस काम की? हां अगर शहजादी वाकई हमारे तोते की बताई हुई दुआ से ठीक हो सकती है तो हम हाजिर हैं। चलो हमें बादशाह सलामत के दरबार में ले चलो।"

जैसे ही वजीर आलिम साहब को लेकर दरबार पहुंचा। बादशाह ने निहायत इज्जत एहतराम के साथ आलिम साहब को अपने बराबर बिठाया और कहा, "हजरत मैं हर मुमकिन इलाज करवा चुका हूं मगर शहजादी गुलाब की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। खुदा के बाद अब बस आपका सहारा है। सुना है आपका तोता किसी जादुई आम के बारे में जानता है जो अगर किसी बीमार को ला दिया जाए तो वह सेहतमंद हो जाता है। क्या यह सच है?"

आलिम साहब ने आहिस्ता से कहा, "हुजूर अगर मेरी जान भी शहजादी के काम आ जाए तो मैं हाजिर हूं। मैं अपने तोते से पूछता हूं और अभी आपको बताता हूं।"

यह कहकर आलिम साहब दरबार से निकले और सीधे अपने घर पहुंचे। आलिमा बीवी बहुत परेशान थी। बार-बार दरवाजे पर आकर देखती कि आलिम साहब कब वापस आएंगे? जैसे ही उन्हें आते देखा अल्लाह का शुक्र अदा किया और जल्दी से पूछा, "क्या हुआ? बादशाह ने क्यों बुलाया था?"

आलिम साहब ने तमाम बात बताई तो वह फौरन तोते के पास गई और बोली, "मियां मीठू शहजादी गुलाब बहुत बीमार है उसके लिए कोई दवा बता दो।"

तोता उस वक्त अमरूद खा रहा था। उसने अपनी गोल-गोल आंखें घुमाई और बोला, "शहजादी की दवा कोको ऑफ के जादुई दरख्त पर लगे जादुई आम में छुपी है। अगर बादशाह सलामत जादुई आम लाकर शहजादी को खिला दें तो वह फौरन बिस्तर से उठ खड़ी हो जाएगी।"

तोते की यह बात सुनकर आलिम साहब लाठी टेकते हुए आगे बढ़े और नरमी से बोले, "मेरे प्यारे मीठू मियां यह तो बताओ कि वो जादुई आम मिलेगा कैसे? कोको ऑफ तो यहां करीब नहीं वो तो बहुत दूर है आखिर उसे लेकर कौन आएगा?"

तोता फौरन बोला, "बादशाह सलामत के पास हजारों बहादुर और वफादार आदमी है कोई ना कोई वो आम जरूर ले आएगा। मैं रास्ता बता दूंगा।"

आलिम साहब ने कहा, "अच्छा तो मीठू मियां हमें रास्ता बता दो।"

तोता अमरूद खाना छोड़कर अपने पंजे से सर खुजाने लगा और बोला, "जब मैं अपने मां-बाप के साथ था और मुझे परिंदे पकड़ने वाले ने ना पकड़ा था तब मैं अपने अब्बा तोते और अम्मी तोती के साथ झुंड में शामिल होकर लंबी-लंबी परवाजें करता था। आप जानते हैं कि हमें तोतों को आम बहुत पसंद है। इसलिए हम हमेशा आम के बाघात की तलाश में रहते थे। उड़ते-उड़ते एक दिन हम कोको ऑफ की तरफ निकले। वहां हमने एक ऐसा बाघ देखा जो बिल्कुल सोने की तरह चमकता था। दिन की रोशनी में अगर उस बाघ को देखो तो आंखें छपई और रात में वो ऐसा दमकता था कि लगता था कोई ख्वाब देख रहे हैं। हर दरख्त पर सुनहरी रंग के आम लगे होते थे और शाखों पर सुनहरी रंग की खूबसूरत चिड़िया उड़ती रहती थी। उन आमों का मजा ना पूछो आलिम साहब। ऐसा लगता था जैसे हम जन्नत के किसी मेवे का मजा ले रहे हो। और उन आमों में यह खासियत है कि चाहे कोई भी बीमार हो अगर वह एक आम खा ले तो फौरन सेहतयाब हो जाता है। अगर बादशाह सलामत किसी तरह उनमें से एक आम हासिल कर ले तो शहजादी गुलाब की जान बच जाएगी।"

आलिम साहब और उनकी बीवी ने आपस में गौर फिक्र किया मगर कोई रास्ता ना दिखाई दिया। आखिर उन्होंने तोते से कहा, "बादशाह सलामत के आदमी वो आम नहीं ला सकेंगे। वहां तक पहुंचना नामुमकिन है। चाहे कोई अपनी जान भी दे दे।"

तोते ने एकदम चोंच मारी और बोला, "हां यह तो है। कोई इंसान वहां बस ख्वाब में ही जा सकता है। ऐसे तो वहां ना जाया जा सकता। रास्ते में कई नदियां आती हैं। बेशुमार खौफनाक जंगल पड़ते हैं और आखिर में जो नदी आती है वो इतनी गहरी और तेज है कि उसे पार करना गोया मौत के मुंह में जाने के बराबर है। उस नदी में हजारों खौफनाक शार्क मछलियां रहती है। भला कौन अपनी जान खतरे में डालेगा कि उसे पार करने का सोचे।"

आलिम साहब ने गहरी सांस लेकर कहा, "तो मियां मीठू यह रास्ता सिर्फ तुम ही पार कर सकते हो क्योंकि तुम वहां तक आसानी से जा सकते हो।"

तोता बोला, "हां मैं वहां जा सकता हूं क्योंकि मुझे नदी के अंदर उतरने की जरूरत नहीं। मैं उड़कर नदी को पार कर लूंगा। कई रोज का रास्ता है अब्बा मगर मैं जा सकता हूं। इसी बहाने एक बार फिर जादुई आम का बाग देखूंगा और उसके मजेदार आमों का मजा लूंगा। मगर इसके लिए आपको मुझे आजाद करना होगा।"

यह सुनते ही आलिमा जी का दिल दहल गया। उन्होंने सीने पर हाथ रखकर रुंध हुई आवाज में कहा, "कभी नहीं। अगर तुम आजाद हो गए मीठू बेटे तो फिर हमारे पास वापस ना आओगे। लोग कहते हैं कि तोते बेवफा होते हैं। अगर तुमने भी बेवफाई की तो यह समझ लो मैं जिंदा ना रह पाऊंगी।"

"नहीं नहीं अम्मी," तोते ने नरमी से समझाया, "आप बिल्कुल परेशान ना हो। यह कहना बिल्कुल गलत है कि तोते बेवफा होते हैं। लोग यही हमें बदनाम करते हैं। हम अपने मालिक से जो हमें खिलाता पिलाता है, बहुत मोहब्बत करते हैं। मगर हां, यह भी सच है कि हमें अपनी आजादी सबसे ज्यादा अजीज है। हर परिंदा आजाद रहकर उड़ना चाहता है। कैद में रहकर हमारे पर बेकार हो जाते हैं। खुली फजाओं के बजाय पिंजरे की सलाखें हमारा मुकद्दर बन जाती हैं। तब हमारा दिल रोता है और आजादी मांगता है।"

आलिमा जी ने गहरी सोच में सर हिलाया फिर बोली, "ठीक है हम तुम्हें आजाद कर देंगे मगर एक शर्त पर।"

"वो क्या है मां?"

तोता खुश होकर बोला।

आलिमा जी ने नरमी से कहा, "तुम दिन भर जितना चाहो घूमो सैर सपाटे करो मगर रात होने से पहले हर हाल में हमारे पास वापस आ जाना। आराम से खाना पीना और अपने पिंजरे में सोना। सुबह हम तुम्हें फिर आजाद कर देंगे मगर बेटे अपना ख्याल रखना कहीं कोई चील कौवा बिल्ली कुत्ता या आदमी तुम्हें नुकसान ना पहुंचा दे।"

आलिमा जी ने बड़े प्यार से तोते को पिंजरे से निकाला और उसके नरम परों को सहलाने लगी। तोते ने ठरठर करके उनके हाथों को अपनी नन्ही सी जुबान से छुआ और अपनी नुकीली चोंच से धीरे-धीरे खुश किया। "मैं अपना ख्याल रखूंगा मां। आप फिक्र ना करें। बस मुझे खुदा हाफिज कह दें। मैं शहजादी याकूद के लिए जादुई आम की तलाश में निकलना चाहता हूं।"

आलिम साहब और आलिमा जी ने तोते को खुदा हाफिज कहा। तोते ने अपने पर खोले फिर फड़फड़ाए और खुशी से टिन टिन करता हुआ उड़ गया। शुरू में उसे कुछ मुश्किल हुई क्योंकि कायद के दिनों ने उसके पर सुस्त कर दिए थे। वो जल्द ही थक जाता मगर फिर उसकी ताकत और हौसला वापस आ जाता।

कई तोतों से उसकी दोस्ती हो गई। एक बूढ़े तोते ने कहा, "तुम एक नेक मकसद के लिए निकले हो। मैं तुम्हारी मदद करूंगा। चलो मेरे साथ। शायद तुम्हें जादुई बाघ का रास्ता याद ना हो। मगर मुझे याद है मैं तुम्हें बताता चलूंगा।"

तोता खुश हुआ। वाकई वो रास्ता भूल चुका था। बूढ़े तोते की मौजूदगी ने उसका हौसला बढ़ा दिया। दोनों चोंच की सीध में दिन भर उड़ते थक कर दरख्त पर बैठते कुछ खाते, बातें करते और फिर उड़ने लग जाते। यूं कई दिन बीत गए। कई नदियां अबूढ़ हुई। कई जंगलों से गुजर हुआ। कई परेशानियां आई। कभी बिल्ली ने सताया, कभी बाज ने, कभी चील ने पीछा किया।

एक बार वह एक मैदान में लगे जाल में बाल-बाल बचा। चिड़िया मार ने यह जाल परिंदों को पकड़ने के लिए बिछाया था। तोता भूखा था। गंधुम और मक्ख के दाने देखकर नीचे उतरने ही वाला था कि बूढ़े तोते ने पुकारा, "नहीं बच्चे, नीचे ना जाना। यह शिकारी के बिछाए दाने हैं। तुम जाल में फंस जाओगे।"

तोते ने फौरन खुद को संभाला और शाख पर जा बैठा। बूढ़े तोते की बात सच निकल गई। जैसे ही कुछ चिड़ियाओं दाना चुगने उतरी जाल में फंस गई। वो बेबसी से फड़फड़ा रही थी और चिड़िया मार खुशी से जाल समेट रहा था। "खुदा का शुक्र है मैं बच गया।" तोते ने पंजे जोड़कर आसमान की तरफ चोंच उठाई। "मेरे बूढ़े आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।"

बूढ़ा तोता मुसलसल उसे सबक देता रहा और कई मुश्किलात से बचाया। "यह तवील सफर है बेटा। हमेशा होश होशियार रहो।"

कुछ दूर उठाने के बाद उन्हें एक चमकते पानी का चश्मा नजर आया। किनारे पर जंगली बेर और रस भरे की झाड़ियां थी। दोनों ने शुकाओ शुमार होकर बेर खाए। रस भरे के मजे लिए और ठंडामीठा पानी पिया। कुछ देर आराम के बाद वो फिर रवाना हो गए।

कई दिनों बाद बूढ़े तोते ने खुशी से कहा, "अब हम अपनी मंजिल के करीब हैं। यह जंगल जादुई बाग के बिल्कुल करीब है। इस घने और ऊंचे दरख्त से कोको ऑफ की सरहदें शुरू होती हैं।"

"अरे वाह!" तोते ने खुशी से टाई टाई करते हुए कहा, "हमारा सफर कामयाबी के करीब है।"

दो दिन बाद वो जादुई आम के सुनहरे बाग में पहुंच गए। आम के सारे दरख्त सोने की तरह झिलमिलाने लगे थे और उनकी शाखों पर सुनहरी चिड़िया चहचहा रही थी। एक बूढ़ी चिड़िया ने तोते को पहचान कर कहा, "खुशामदीद बड़े भाई, बहुत अरसे बाद नजर आए हो तबीयत कैसी है?"

"हां बहन, मैं ठीक हूं। मगर इस दौरान मेरी तोती अल्लाह को प्यारी हो गई। बुढ़ापे में यह सदमा सहना बहुत मुश्किल था।" तोते ने ठंडी सांस भर कर कहा।

सुनहरी चिड़िया ने अफसोस का इजहार किया। फिर पूछा, "यह कौन है? क्या तुम्हारा बेटा है?"

बूढ़े तोते ने प्यार से छोटे तोते के सर पर पंजा फेरा और कहा, "बेटा ही समझो। बहुत नेक बच्चा है। एक बीमार लड़की के लिए इतना लंबा सफर करके जादुई आम लेने आया है। प्यारी बहन क्या तुम हमारी मदद करोगी?"

सुनहरी चिड़िया बोली, "भाई मैं जरूर मदद करूंगी क्योंकि एक बार तुमने भी मेरे बच्चे को चील की चोंच से बचाया था। अगर तुम हिम्मत करके शोर ना मचाते और चील की आंख पर पंजा ना मारते तो वह जख्मी ना होती और मेरे बच्चे का बचना मुश्किल था। मैं तुम्हारा एहसान कभी ना भूलूंगी। मगर भाई यहां का चौकीदार काला देव बहुत जालिम है। वो रोज बाग में घूमकर तमाम आम गिनता है और उन्हें तोड़कर गोरी परी के पास ले जाता है। गोरी परी इस बाग की मालिक है। हर रोज यहां आमों की फसल तैयार होती है और रोज ही तोड़ ली जाती है। सारी परियां इन्हीं आमों का नाश्ता करती है। आज वो आम गिन करके जा चुका है और जल्द आकर टोकरी भर कर ले जाएगा। अगर एक भी आम कम हुआ तो हमारी खैर नहीं। वो चुन चुन कर हम सबको खा जाएगा।"

यह सुनकर बूढ़ा तोता घबरा गया, "तो फिर क्या होगा?"

सुनहरी चिड़िया बोली, "मैं कोई तदबीर निकालती हूं। तुम फिक्र ना करो। मगर यह बताओ क्या एक आम से तुम्हारा काम चल जाएगा?"

"हां बस एक ही आम चाहिए।" बूढ़े तोते ने जवाब दिया।

तब छोटे तोते ने आहिस्ता से कहा, "चाचा जान, मुझे भी एक आम चाहिए। बहुत दिनों से मैंने जादुई आम ना खाया। दिल चाह रहा है कि फिर से उसका मजा चखूं।" यह कहकर उसने अपनी नन्ही जुबान चोंच पर फेरा और राल टपकाई।

सुनहरी चिड़िया ने उसकी सरगोशी सुन ली थी। छोटी सी गुलाबी चिड़िया ने अपनी नन्ही चोंच खोलकर मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है मियां मियां। अपनी तरफ से एक आम मैं तुम्हें भी दे दूंगी। बेफिक्र रहो।"

फिर उसने दोनों मेहमान तोतों को जादुई बाग के सुनहरे हिस्से से ताजा ठंडा और मीठा पानी पिलाया और उन्हें मुख्तलिफ जगहों पर घुमाने ले गई।

रात के वक्त देव आया भारीभरकम खौफनाक और देव हीकल मखलूका। देखकर नन्हे तोते का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मगर बूढ़े तोते ने आहिस्ता से अपनी चोंच से उसकी पीठ पर थपकी दी और सरगोशी में कहा, "घराओ नहीं बेटा, मौत बैठो। यह जल्द ही सो जाएगा और सुबह होने तक ना जागेगा।"

देव ने पूरा बाघ घूमकर हर दरख्त के आम गिने। फिर बाघ के बीच में बने सुनहरे चबूतरे पर जाकर सो गया। उसके खौफनाक खर्राटों की गूंज से पूरा बाघ लरज रहा था। नन्हा तोता रात भर जागता रहा। देव के खर्राटों की आवाज ने उसे नींद ना आने दी।

सुबह होने में अभी कुछ देर बाकी थी कि सुनहरी चिड़िया दोनों के करीब आई और सरगोशी में बोली, "भाई तोता मैंने एक तदबीर सोच ली है। थोड़ी देर बाद मैं गाना शुरू कर दूंगी और मेरे साथ और भी चिड़िया शामिल होंगी। हमारा गाना कालादेव को बहुत पसंद है। जब वो हमारे गाने में खो जाएगा तो आमों की गिनती भूल जाएगा। बस यही वक्त मैं चुपके से दो आम गिनती से पहले ही गायब कर दूंगी और तुम्हें दे दूंगी।"

फिर उसने तनबीह की, "मगर याद रखना जैसे ही आम लो फौरन बाग से निकल लेना। जरा सी देर भी खतरनाक हो सकती है। इन आमों की खुशबू इतनी तेज होती है कि चाहे उन्हें किसी भी कोने में छुपा लो। इनकी महक फिर भी फैलती रहती है। अगर उसे पता हो गया तो बस समझ लो कलयामत आ जाएगी।" सुनहरी चिड़िया ने खबरदार किया।

बूढ़े तोते ने शुक्रगुजारी से कहा, "चिड़िया बहन, तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया। शहजादी के मां-बाप की दुआएं तुम्हें जरूर लगेंगी और तुम्हारी औलाद खूब फले फूलेगी। अब जल्दी गाना शुरू करो।"

चिड़िया ने एक बहुत मीठा गीत गाना शुरू किया। जैसे ही उसकी मधर आवाज बाग में गूंजी तमाम चिड़ियावा उसके गर्द जमा हो गई और सबने मिलकर गाने में साथ दिया। पूरे बाग में एक अजीब सा समा बंध गया। सुनहरा सूरज दरख्तों के पीछे से उभर रहा था। ठंडी हवा चल रही थी। नरम रोशनी हर सु फैल रही थी और सुनहरे दरख्त झिलमिलाने लगे जैसे पूरा बाग झूम उठा।

कालादेव ने अंगड़ाई ली, करवट बदली और गाने की दिलकश धुन सुनकर वो इतना खुश और मग्न हो गया कि आमों की गिनती करना ही भूल गया। उसी लम्हे सुनहरी चिड़िया ने अपने दो साथियों को इशारा किया। वो चुपके से उड़े। जल्दी से दो आम तोड़े और बूढ़े तोते और नन्हे तोते के पास ले आए। दोनों तोतों ने आम अपनी चोंच में दबाए और बिजली की तेजी से बाग से बाहर निकल गए।

वो बहुत दूर तक झपट्टे से उड़ते रहे। यहां तक कि जब उन्हें यकीन हो गया कि वह बाग से काफी दूर आ चुके हैं तब एक ऊंचे दरख्त पर जाकर सांस लिए। बूढ़ा तोता बहुत थक गया था। मगर उसकी खुशी का कोई ठिकाना ना था। आम इतने खूबसूरत और चमकदार थे कि बस देखते ही रहो।

थोड़ी देर आराम करने के बाद वो दोबारा उड़ने लगे। उन्हें शहजादी की हालत की फिक्र थी। कहीं देर होने से वह मजीद बीमार ना हो जाए। क्योंकि वह उड़ते रहे और जब थक जाते तो दरख्त पर कुछ देर रुक जाते या रात को बैठकर सो जाते। मगर एक लम्हे के लिए भी आमों को अकेला ना छोड़ा। वो जहां भी रहते आमों की खुशबू से हवाएं महक उठती और रात में उनकी झिलमिलाहट दूर से नजर आती।

एक रात वह जिस दरख्त पर बैठे थे उसके नीचे एक आदमी आकर लेट गया। वह किसी सफर पर जा रहा था। मगर रात हो जाने की वजह से वह वहीं रुक गया था। आदमी ने सफर जारी ना रख सका। उसने अपने थैले से खाना निकाल कर खाया। बोतल से पानी पिया। फिर चादर बिछाकर लेट गया।

दोनों तोते चुपचाप बैठे रहे। मगर आमों की खुशबू थी कि चारों तरफ फैलती जा रही थी। नीचे लेटे आदमी ने खुद से कहा, "यह कैसी खुशबू है? बड़े अजीब मगर खुशगवार महक है। यह किसी फूल की है या किसी फल की? कुछ कुछ तो आम जैसी लगती है।"

बूढ़े तोते ने परेशानी से अपने नन्हे साथी से कहा, "यह तो बड़ी मुसीबत हो गई। अब बस अल्लाह ही हमें बचाए।"

नन्हे तोते ने गहरी सांस ली और आहिस्ता-आहिस्ता आमों को घने पत्तों के नीचे छुपाने की कोशिश करने लगा। मगर इसी कोशिश में एक आम फिसल कर नीचे जा गिरा और सीधा उस आदमी की नाक पर आ गिरा।

आदमी ने एक जोरदार चीख मारी और घबरा कर उठ बैठा। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वह समझा कि कोई चोर उसका सामान ले जाने की कोशिश कर रहा है और उसने घास में उसकी नाक पर मुक्का मार दिया है। "कौन है? किसने मुझे मारा?" वो डरी हुई आवाज में चिल्लाया।

नन्हे तोते ने फौरन अपनी आवाज भारी बनाकर खौफनाक अंदाज में कहा, "मैं भूत हूं। मैं तुम्हें खा जाऊंगा।"

"क्या कहा?" आदमी की सांस अटकने लगी। वो कांपने लगा। उसी वक्त उसकी नजर जमीन पर पड़े उस चमकते हुए आम पर पड़ी जो सोने की तरह दमक रहा था। "तुम भूत हो और यह चमकने वाली चीज क्या है?" वो घबरा कर पीछे हटने लगा।

नन्हे तोते ने फौरन कहा, "यह मेरे जादू की गोली है। अगर तुमने उसे छुआ तो पल भर में गायब हो जाओगे।"

"ठहरो ठहरो, कहां जा रहे हो? तुमने मेरे..."

दरख्त के नीचे पड़ाव डाला। उसकी सजा तो तुम्हें मिलेगी। यह कहकर नन्हे तोते ने अपने पर फैलाए और जोर-जोर से फड़फड़ाने लगा। जंगल के सन्नाटे में उसके परों की आवाज इतनी भयानक सुनाई दी कि आदमी के होश उड़ गए। वो मुसाफिर इतनी तेजी से भागा कि पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत ना की और जाने कहां निकल गया।

बूढ़े तोते ने हंसते हुए नन्हे तोते को शाबाश दी और नीचे उतर कर वो चमकता हुआ आम चोंच में दबाकर दरख्त की शाख पर ले आया। उसके बाद दोनों पूरी रात जागते रहे और सुबह होने का बेसब्री से इंतजार करते रहे। जैसे ही उजाला फैला वो फौरन उड डीएच निकले। दोपहर तक मसलसल उड़ते रहे। मगर जब थकन और भूख से निढाल हो गए तो एक नदी के किनारे झाड़ियों में उतर आए। पानी पिया आम झाड़ियों में छुपाकर खाने के लिए कुछ तलाश करने लगे।

उधर वह थोड़ी दूर गए ही थे कि एक लोमड़ी वहां आ निकली। उसने झाड़ियों में चमकते हुए दो आम देखे तो सोचा कि शायद किसी जानवर के अंडे हो। उसने इरादा किया कि उन्हें सांप राजा के बिल के सामने रखकर उसे बुलाए और कहे आओ मेरे राजा मजे से खा जाओ बस फिर मेरे बच्चों को ना खाना। यह सोचकर लोमड़ी ने दोनों आम मुंह में दबाए और तेजी से दौड़ने लगी।

उधर वो जा रही थी और इधर दोनों तोते उसी तरफ एक जंगली दरख्त पर बैठे रस भरे फल खा रहे थे। जब उन्होंने एक मोटी लोमड़ी को आते देखा तो फौरन एक ऊंची शाख पर जा बैठे। मगर यह देखकर हैरान रह गए कि जादुई आम लोमड़ी के मुंह में दबे हैं। वह फौरन टिनटिन करते हुए लोमड़ी के गर्द चक्कर लगाने लगे। बूढ़े तोते ने कहा, घबराओ नहीं हिम्मत से काम लो। इस मक्कार लोमड़ी को अपनी तेज चोंच से जख्मी करो। मगर होशियारी से कहीं वो तुम्हें पकड़ ना ले।

नन्हे तोते ने परजश होकर जवाब दिया, चाचा जान, मैं होशियार रहूंगा। यह मुझे ना पकड़ सकेगी क्योंकि इसके मुंह में तो आम दबे हैं। फिर उसने झपट झपट कर लोड़ी पर हमले शुरू कर दिए। जितनी तेजी से लोमड़ी दौड़ती उतनी ही तेजी से वह उड़ता और अपनी नुकीली चोंच उसकी नरम खाल में तीर की तरह चुभा देता। बूढ़े तोते ने भी यही हथकंडा अपनाया और दोनों ने मिलकर लोमड़ी को जख्मी कर दिया। लोमड़ी के जिस्म से खून बहने लगा और वह शदीद तकलीफ में मुबतला हो गई। आखिरकार जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो वह चीखते चिल्लाती जमीन पर लौटने लगी। जैसे ही वह तड़पी उसके मुंह से दोनों आम जमीन पर गिर पड़े और लुढ़कते हुए उधर-उधर रुक गए।

तोतों ने एक लम्हा भी झाया ना किया। फौरन दोनों ने एक-एक आम अपनी चोंच में दबाया और आसमान की तरफ बुलंद हो गए। वो किसी सूरत रुकना ना चाहते थे, मगर रात होने को थी और कहीं ना कहीं ठहरना जरूरी था। आखिरकार एक जगह उन्हें रुकना ही पड़ा। यह एक छोटा सा गांव था जहां जगह-जगह चिरागा रोशन थे। दोनों तोते खामोशी से एक झोपड़ी की छत पर जा बैठे और एहतियात से दोनों आमों को फूंस के अंदर दबा दिया ताकि उनकी चमक नजर ना आए। अगर किसी की नजर पड़ जाती तो वो आम हासिल करने की धुन में दीवाना हो जाता।

खुदा-खुदा करते सुबह हुई और जैसे ही रोशनी फैली दोनों तोते खुशी के मारे टिन टिन करने लगे। यह गांव राजधानी के करीब ही था और दूर से आलिम साहब के घर की मस्जिद की बुलंद मीनार दिखाई दे रही थी। नन्हा तोता खुशी से पंजे बजाने लगा। हम आखिरकार अपनी प्यारी शहजादी के पास पहुंच गए। दोनों खुशी से गाते हुए आलिम साहब के घर की तरफ उड़ने लगे। जो भी उन्हें चोंच में आम दबाए देखता हैरत से दूसरों को दिखाने लगता। अरे वो देखो आलिम साहब का तोता जादुई आम ले आया।

यह खबर बादशाह तक जा पहुंची। मारे खुशी के वो अपनी कीमती हीरे जड़ी जूतियां महल में छोड़कर नंगे पांव बाहर निकल आया। पूरे शहर में जश्न का समा बन गया और लोग खुशी से झूमने लगे। इधर शहजादी की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। बस सांसे बाकी थी। उसका जिस्म बेझान हो चुका था और चेहरा जो कभी लाला की तरह खिलता था अब सफेद कागज की तरह हो गया था। बादशाह तोते से मायूस हो चुका था और अक्सर कहा करता जब आदमी का एतबार नहीं तो परिंदे पर क्या भरोसा अब मेरी बेटी जिंदा ना बचेगी यह कहकर वो रो पड़ता मल्लिका भी रोती और जब मल्लिका रोती तो पूरी रियाया सूख में डूब जाती मगर आज जैसे ही तोते की आमद की खबर मिली बादशाह खुशी से भूल ना समटा और जब उसने आलिम साहब को कुंडे पर दोनों तोते बिछाए हाथ में जादुई आम लिए आते देखा तो खुशी के मारे नंगे पांव दौड़ पड़ा और आलिम साहब को गले लगा लिया।

अब वो खुशी के आंसू बहा रहा था। आलिम साहब आलिम साहब मैं आप और आपके प्यारे तोते का शुक्रिया किस तरह अदा करूं? बादशाह जज्बाती लरजती आवाज में बोला। आलिम साहब मुस्कुराए और नरमी से बोले शुक्रिया मेरा नहीं अल्लाह ताला का अदा कीजिए। उसी की कौदत ने यह मोजजा दिखाया है। वरना मुट्ठी भर पर वाला एक परिंदा इतनी हिम्मत कैसे कर पाता? फिर वह जल्दी से बोले, अब देर ना कीजिए। एक-एक लम्हा कीमती है। फौरन महल में तशरीफ ले जाइए और शहजादी को आम खिलाइए। खिलाने के साथ सूंघाइए।

नन्हा तोता बोला। जैसे ही शहजादी आम की खुशबू सूंघ फौरन होश में आ जाएगी और होश में आते ही उन्हें आम की एक कास खिला दीजिए। इससे उनमें कुछ ताकत आ जाएगी। फिर दूसरी कास दीजिए और बस इधर आम पेट में गया। उधर वह अपने बिस्तर से उठ खड़ी होंगी। यह सुनते ही तमाम लोग भागमभाग महल के अंदर पहुंचे। शाही हकीम शहजादी के सराहाने बैठे मायूसी के साथ उसका जर्द चेहरा तक रहे थे। आलिम साहब ने आगे बढ़कर जादुई आम शहजादी की नाक के करीब कर दिया। सब लोग दम साधे खड़े देख रहे थे। जैसे ही आम की खुशबू शहजादी की नाक में पहुंची, उसके जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गई। उसने एक लंबी सांस ली। फिर दूसरी, तीसरी और चौथी और फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी पलकों में लजिश होने लगी। एक लम्हा बाद उसने आंखें खोल दी।

जैसे ही शहजादी ने आंखें खोली, आलिम साहब ने जल्दी से आम की एक छोटी सी कहास काटी और उसके लबों से लगा दी। शहजादी ने अपने मुरझाए हुए होंठ खोले और कास मुंह में रख ली। मुश्किल से दो कहास खाई होंगी कि उसके चेहरे का रंग बदलने लगा। जर्द चेहरा सुर्खा होने लगा जैसे गुलाब की ताजा कली खिल रही हो। मुरझाए लब फिर से गुलाबी पंखुड़ियों जैसे हो गए। आंखों में चमक लौट आई और नाजुक आवाज में वो बोली अब्बा हुजूर अम्मी हुजूर यह सुनते ही पूरे दरबार में खुशी की लहर दौड़ गई। हर तरफ से मुबारकबाद की आवाजें गूंजने लगी और महल में जश्न का समा बंध गया। पूरे महल में खुशियां मनाई जा रही थी। दरबारियों ने खुशी से नारे बुलंद किए और शहर भर में जश्न का ऐलान कर दिया गया।

बादशाह ने आलिम साहब को गले लगाया और कहा कि वो उनका शुक्रिया कैसे अदा करें? आलिम साहब ने मुस्कुरा कर जवाब दिया कि शुक्रिया अल्लाह ताला का अदा करना चाहिए जिसने यह मोजजा दिखाया। वरना एक छोटा सा परिंदा इतनी हिम्मत कैसे कर पाता। बादशाह ने फौरन हुक्म दिया कि दोनों तोतों के लिए शाही बाग में बेहतरीन जगह बनाई जाए। मगर नन्हे तोते ने कहा कि वह कैद में ना रह सकता। बादशाह ने हंसते हुए कहा कि वह आजाद रहेंगे मगर हमेशा शाही महल के करीब रहेंगे। शहजादी ने दोनों तोतों को अपने हाथों पर बिठाया और प्यार से उनके परों को सहलाने लगी।

जश्न अभी जारी था कि अचानक एक दरबारी घबराया हुआ महल में दाखिल हुआ और खबर दी कि कालादेव को पता हो गया है कि उसके जादुई आम चुराए गए हैं और अब वह अपनी जादुई ताकत के साथ बादशाही पर हमला करने आ रहा है। यह सुनते ही महल में सन्नाटा छा गया। बादशाह ने फौरन फौज को तैयार होने का हुक्म दिया। मगर नन्हे तोते ने कहा कि ताकत से ज्यादा अकल काम आती है और वह देव को शिकस्त देने की तदबीर सोच सकता है। बादशाह ने हैरत से देखा मगर आलिम साहब ने कहा कि जिस तरह यह नन्हे परिंदे शहजादी की जान बचा सकते हैं। उसी तरह देव को शिकस्त भी दे सकते हैं। बादशाह ने इजाजत दे दी और दोनों तोते फौरन महल से निकले और सीधा कालादेव के जंगल की तरफ रवाना हो गए।

कालादेव अपने गले में गुस्से से आग बगोला हो रहा था और कह रहा था कि वह इस रियासत को जलाकर राख कर देगा। अभी वह अपनी जादुई ताकत इकट्ठी कर रहा था कि अचानक दोनों तोते उसके कैले में पहुंच गए। नन्हे तोते ने चालाकी से देव को ललकारा कि वह बहुत ताकतवर है। मगर फिर भी दो नन्हे तोते उसे चकमा दे गए। क्या उसे शर्म नहीं आती? कालादेव का गुस्सा और बढ़ गया और वह उन्हें भस्म करने के लिए आगे बढ़ा। मगर नन्हे तोते ने हंसते हुए कहा अगर वह वाकई ताकतवर है तो यह खाकर साबित करें। कालादेव ने हैरानी से पूछा क्या मतलब? तो नन्हे तोते ने अपने परों में छिपी हुई एक सुनहरी कास निकाली और देव की तरफ उछाल दी और कहा अगर वह वाकई ताकतवर है तो यह खाकर साबित करें।

कालादेव ने गुरूर में आकर कास उठाई और फौरन खा ली। मगर जैसे ही वह उसकी हलक में उतरी, उसके चेहरे पर हैरत के आसार उभर आए। उसका जिस्म कांपने लगा और वह तकलीफ से चिल्लाने लगा। बूढ़े तोते ने मुस्कुरा कर कहा, "यह वही आम है मगर चोरी का खाया हुआ फल हमेशा झर बन जाता है।" देव ने अपनी ही जादुई ताकत को गलत तरीके से इस्तेमाल किया और अब वही ताकत उसे खत्म कर रही है। काला देव तड़पने लगा। उसका कद छोटा होने लगा और आखिरकार वो एक आम आदमी जितना होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसकी तमाम जादुई ताकत खत्म हो चुकी थी।

दोनों तोते फौरन उड़कर वापस महल पहुंचे और बादशाह को सारी कहानी सुनाई। यह सुनकर बादशाह और तमाम रियाया ने शुक्राने के नफल अदा किए। शहजादी ने आगे बढ़कर दोनों तोतों को अपने हाथों पर उठाया और कहा कि आज वो जिंदा है तो सिर्फ इन मासूम परिंदों की वजह से। बादशाह ने ऐलान किया कि आज से नन्हा तोता और बूढ़ा तोता इस रियासत के शाही मुहाफिज होंगे। क्योंकि उनकी बहादुरी और अकलमंदी की वजह से सब महफूज रहे। महल में एक और जश्न का आगाज हो गया। शहजादी मुकम्मल सेहतियाब हो गई। बादशाहत खुशहाल हो गई और दोनों तोते हमेशा के लिए बादशाह के सबसे अजीज दोस्त बन गए। यूं अकल और हिम्मत के जरिए एक खौफनाक देव को शिकस्त दी गई और पूरी रियासत में अमन और खुशी का दौर दोबारा हो गया।

महल में जश्न कई दिनों तक जारी रहा। हर गली हर कूचे में खुशी का समा था। लोग घरों के दरवाजों पर दिए जला रहे थे। बच्चों में मिठाइयां बांटी जा रही थी और हर तरफ शहजादी की सेहतयाबी और देव की शिकस्त की बातें हो रही थी। बादशाह ने ऐलान किया कि नन्हा तोता और बूढ़ा तोता ना सिर्फ महल के मुहाफिज हैं बल्कि उन्हें शाही दरबार में खास जगह दी जाएगी। एक दिन जब सब कुछ मामूल पर आ चुका था। शहजादी ने दोनों तोतों से कहा कि वह उनकी बहादुरी की दास्तान हमेशा के लिए संभाल कर रखना चाहती है। उसने बादशाह से दरख्वास्त की कि उनकी इजाजत में एक यादगार तामीर करवाई जाए जहां उनकी अकल और बहादुरी की कहानी हमेशा याद रखी जाए। बादशाह ने फौरन हुक्म जारी कर दिया और महल के करीब ही एक खूबसूरत बाग में एक अजीमोशान मीनार तामीर करवाने का ऐलान कर दिया। जहां दोनों तोते आजादाना रह सके और आने वाली नस्लों को अपनी कहानी सुना सके।

सब कुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन एक और परेशानी आ पहुंची। शहजादा जमीटल जो पड़ोसी सल्तनत का वारिस था और शहजादी का करीबी दोस्त भी था। अचानक महल पहुंचा। उसका चेहरा उतरा हुआ था। आंखों में बेकरारी थी। बादशाह ने फौरन उसे गले लगाया और परेशानी की वजह पूछी। शहजादा जमीदल ने बताया कि उसकी सल्तनत पर काला जादू करने वाले एक खतरनाक आमिल ने हमला कर दिया है। जिसकी वजह से वहां के दरख्त सूख रहे हैं। दरिया का पानी जहरीला हो रहा है और लोग बीमार पड़ रहे हैं। बादशाह और शहजादी यह सुनकर चौंक गए। नन्हे तोते ने फौरन कहा कि वह इस मुसीबत को खत्म करने में मदद करेंगे। बादशाह ने पहले तो मना किया कि वह नन्हे परिंदे हैं और उन्हें खतरा हो सकता है। मगर आलिम साहब ने कहा कि यह वही तोते हैं जिन्होंने कालादेव को शिकस्त दी थी। यह अगर हिम्मत करे तो कुछ भी मुमकिन है। आखिरकार बादशाह ने इजाजत दे दी और शहजादा जमीज़ अल शहजादी दोनों तोते और कुछ बहादुर सिपाही उस सल्तनत की तरफ रवाना हो गए।

जब वो वहां पहुंचे तो वाकई हालात बहुत खराब थे। बागात उजड़ चुके थे। खेत वीरान हो चुके थे और हर तरफ उदासी फैली हुई थी। शहजादा जमीगल ने बताया कि यह सब एक जालिम आमिल जालिम की वजह से है जो पहाड़ों की गार में बैठा मंत्र पढ़कर पूरे इलाके को तबाह कर रहा है। नन्हे तोते ने सोचा और बोला कि हमें उसके जादू को तोड़ने का रास्ता निकालना होगा। रात के वक्त सब ने गुलाम शाह की गार की निगरानी की। वह देख रहे थे कि आमिल एक बड़े तांबे के कटोरे में कोई स्याह माया घोल रहा था जिससे नीली नीली रोशनी निकल रही थी। बूढ़े तोते ने कहा कि अगर हम इस माया को गिरा दें तो शायद उसकी ताकत खत्म हो जाए। नन्हे तोते ने आहिस्ता से पर हिलाया और कहा कि वह जाकर यह काम करेगा। वो उड़कर आमिल के करीब पहुंचा और एक जोरदार चीख मारी जिससे आमिल चौंक गया। उसने आसमान की तरफ देखा कि यह कौन परिंदा है जो रात में शोर कर रहा है। जैसे ही वह ऊपर देखने लगा, बूढ़े तोते ने पीछे से एक पत्थर जोर से उसके हाथ पर मारा जिससे तांबे का कटोरा उलट गया और सारा काला माया जमीन पर बह गया। आमिल जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसके मंत्र अधूरे रह गए और अचानक एक तेज झटके के साथ वो जमीन पर गिर पड़ा। जैसे ही वह जमीन पर गिरा, अचानक जादू का असर खत्म होने लगा। दरख्तों की सूखी शाखों में हरियाली आने लगी। दरिया का पानी साफ होने लगा और बीमार लोग उठकर चलने फिरने लगे। यह माजरा देखकर सब हैरान रह गए। शहजादा जमींदल और शहजादी खुशी से झूम उठे। जबकि बादशाह की फौज ने आमिल को गिरफ्तार करके कैद में डाल दिया।

जब वह सब महल वापस आए तो लोगों ने उनका गर्मजशी से इस्तकबाल किया। बादशाह ने ऐलान किया कि आज से दोनों तोते ना सिर्फ उनके महल के मुहाफिज हैं बल्कि रियासत के सबसे बड़े हीरो भी हैं। शहजादा जमीदल ने नन्हे तोते और बूढ़े तोते को अपनी सल्तनत में हमेशा के लिए रहने की पेशकश की। मगर नन्हे तोते ने कहा कि वह आजाद परिंदे हैं और जहां चाहे जा सकते हैं। बादशाह ने वादा किया कि वह हमेशा उनकी हिफाजत करेंगे और उनके लिए महल के बाग में एक खूबसूरत जगह मुखतस कर दी गई। जहां वो जब चाहे आ सकते थे। यूं दोनों तोतों की बहादुरी, अकल और होश दिमागी की कहानियां नस्ल दर नस्ल सुनाई जाने लगी। उनकी बहादुरी के चर्चे ना सिर्फ बादशाहत में बल्कि दूरदराज की राजाओं तक भी पहुंच गए। लोग उन्हें देखने आते, उनसे कहानियां सुनते और हर तरफ उनकी अक्लमंदी और वफादारी की मिसालें दी जाती। शहजादी और शहजादा जमीयल की दोस्ती और मजबूत हुई और महल में खुशी, हंसी और सुकून हमेशा के लिए लौट आया।

महल में जश्न कई दिनों तक जारी रहा और दोनों तोते बादशाह के खास मेहमान बन गए। हर शाम महल के बाग में दरबारी वजीर और शहर के लोग जमा होते। जहां शहजादी आलिम साहब और बादशाह सबके साथ बैठकर उन बहादुर परिंदों की कहानियां सुनते। नन्हा तोता और बूढ़ा तोता हमेशा हंसीखुशी सबको अपनी मुहिमात सुनाते। मगर उनके दिल में एक नया सफर करने की ख्वाहिश भी जाग रही थी। एक रोज जब शहजादी ने उन्हें महल के बाग में बैठे पाया तो वो उनके पास आई और बोली मेरे प्यारे दोस्तों तुम दोनों ने मेरी जान बचाई। मेरी सल्तनत को दोबारा खुशियों से भर दिया। मगर मैं देख सकती हूं कि तुम्हारी आंखों में कोई और ख्वाब है। बूढ़े तोते ने सर झुका कर कहा, हम हमेशा तुम्हारे शुक्रगुजार रहेंगे। मगर हमें एक बार फिर दुनिया की वसत में परवाज करनी है। नन्हे तोते ने फौरन कहा, हम चाहते हैं कि एक आखिरी मुहिम पर जाए। शायद हमें कोई और जरूरतमंद मिल जाए जिसकी मदद की जा सके।

शहजादी ने आंखों में नमी लिए उनकी बात सुनी। मगर वह जानती थी कि आजादी ही उनकी असल खुशी थी। बादशाह ने महल के तमाम कारीगरों को हुक्म दिया कि वह इन तोतों के लिए सुनहरी निशान बनाए ताकि जहां भी वह जाए उन्हें हर कोई पहचान सके कि यह वही बहादुर परिंदे हैं जिन्होंने शहजादी को बचाया था। चंद दिनों बाद सुबह के वक्त शहजादी, बादशाह, मल्लिका और आलिम साहब सब महल के बाग में जमा हुए ताकि उन बहादुर परिंदों को अलविदा कह सके। जैसे ही सूरज की पहली किरण महल पर पड़ी, दोनों तोतों ने पर फड़फड़ाए और हवा में बुलंद हो गए। शहजादी ने हाथ हिलाकर दुआ दी। अल्लाह तुमको हर आफत से महफूज़ रखे और तुम्हारी अकल और बहादुरी से दुनिया को रोशनी मिलती रहे।

तोते ऊंची उड़ान भरकर महल से निकल गए और नीले आसमान में गुम हो गए। कई दिनों तक वो अलग-अलग जंगलों और वादियों में घूमते रहे। कभी दरिया के किनारे आराम करते, कभी किसी अजनबी शहर के दरख्तों पर बस ना करते। मगर उन्हें कोई ऐसी जगह ना मिली जहां उनकी जरूरत हो। फिर एक दिन जब वह एक घने जंगल के ऊपर से गुजर रहे थे। उन्हें नीचे से किसी की मदद के लिए चीखने की आवाज आई। उन्होंने नीचे झांका तो देखा कि एक छोटा सा लड़का दरख्त पर चढ़ा हुआ था और नीचे एक खतरनाक शेर खड़ा घरा रहा था। लड़का खौफ से कांप रहा था। उसका चेहरा जर्द था और वह नीचे देखने की भी हिम्मत ना कर रहा था।

नन्हे तोते ने फौरन कहा, "हें कुछ करना होगा।" बूढ़ा तोता बोला, "यह शेर बहुत खतरनाक है। हमें होशियारी से काम लेना होगा।" दोनों तोतों ने जंगल में नजर दौड़ाई, तो उन्हें एक दरख्त पर शहद का एक बड़ा छत्ता दिखाई दिया। नन्हे तोते ने मुस्कुराकर कहा, यही हमारा हथियार है। वो फौरन उस दरख्त के करीब पहुंचे और अपनी तेज चोंच से छत्ते को हिलाना शुरू कर दिया। शहद की मक्खियां गुस्से में भिन्न-भिन्न करते हुए बाहर निकल आई और चारों तरफ फैल गई। बूढ़े तोते ने नीचे बैठे शेर की तरफ इशारा किया और दोनों परिंदे जोर-जोर से चीखने लगे ताकि मक्खियां नीचे का रुख करें। जैसे ही शहद की मक्खियां नीचे आई, उन्होंने शेर पर हमला कर दिया। शेर जोर-जोर से दहाड़ लगा। उसके जिस्म पर मक्खियां डंक मारने लगी। वो उधर-उधर भागने लगा। मगर मक्खियां उसका पीछा कर रही थी। आखिरकार शेर तेजी से जंगल में भाग गया और आंखों से ओझल हो गया।

लड़का दरख्त से नीचे उतरा और खौफजदा मगर खुश नजर आ रहा था। वो बोला तुम दोनों ने मेरी जान बचाई। मैं तुम्हारा शुक्रिया कैसे अदा करूं? नन्हे तोते ने खुशी से कहा, हमारा शुक्रिया अदा करने की जरूरत नहीं। बस हमेशा हिम्मत और अकल से काम लेना। लड़के ने बताया कि वो अपने गांव का चरवाहा है और अपने मवेशियों के लिए चारा लेने जंगल आया था। मगर गलती से यहां आ गया और शेर ने उस पर हमला कर दिया। फिर उसने उन्हें अपने गांव आने की दावत दी ताकि सब लोग उन बहादुर परिंदों को देख सकें।

जब वो गांव पहुंचे तो सब लोग हैरान रह गए। वो तोते जो बादशाह के दरबार में इज्जत याफ्ता थे। अब उनके छोटे से गांव में आए थे। गांव के बूढ़ों ने उन्हें खुशामदीद कहा। उनके लिए ताजा फल रखे और सब ने उनके कारनामे सुनने के लिए एक बड़ी महफिल सजाई। यहां भी उनकी बहादुरी के किस्से ज़बाने आम हो गए। बच्चे उनके पीछे दौड़ते। बूढ़े उनकी अकलमंदी की दाद देते और चरवाहे उनकी होशियारी को देखकर हैरान होते। चंद दिन बाद दोनों तोते एक बार फिर परवाज के लिए तैयार हो गए। गांव के लोगों ने उन्हें तोहफे में एक छोटा सा सुनहरी पर दिया जो वह हमेशा अपने साथ रख सकते थे। जब वह उड़ने लगे तो नीचे से गांव के बच्चों ने हाथ हिलाकर उन्हें अलविदा कहा और यूं यह बहादुर परिंदे एक और मुहिम के लिए रवाना हो गए। नई मंजिल की तलाश में जहां उनकी अकल और बहादुरी की जरूरत हो सकती थी।

तोते हवा में बुलंद हुए और एक बार फिर नीले आसमान के वसीय दामन में खो गए। वो कई दिनों तक मुख्तलिफ जंगलों और बस्तियों के ऊपर से गुजरते रहे। मगर कहीं उन्हें कोई ऐसी जगह ना मिली जहां उनकी अकल और बहादुरी की आजमाइश हो सकती हो। फिर एक दिन जब वह एक ऊंचे पहाड़ के करीब से गुजर रहे थे। उन्हें नीचे एक सुनसान वादी में एक परासरार साया नजर आया। वो नीचे झुके तो देखा कि एक खूबसूरत मगर अफसरदा लड़की एक बड़े पत्थर पर बैठी आंसू बहा रही थी।

नन्हे तोते ने फौरन कहा, "यह लड़की क्यों रो रही है? हमें जाकर देखना चाहिए। बूढ़े तोते ने सर हिलाया और दोनों नीचे उतर आए। जैसे ही वह करीब पहुंचे, लड़की ने चौंक कर उन्हें देखा और हैरानी से बोली, तोते, तुम यहां कैसे आए? बूढ़े तोते ने नरमी से पूछा, बेटी, तुम यहां इस सुनसान वादी में अकेली बैठी हो। तुम्हारे आंसू बता रहे हैं कि तुम किसी बड़ी मुश्किल में हो।

लड़की ने आह भरी और कहा, "मेरा नाम सहा है। मैं एक करीबी गांव की शहजादी हूं। मगर मेरा गांव एक खौफनाक जादूगर के कब्जे में चला गया है। उसने हमारे बादशाह, मेरी मां और तमाम लोगों को कैद कर लिया है। मैं किसी तरह बचकर यहां आ गई हूं। मगर अब ना मेरे पास कोई ताकत है ना कोई रास्ता कि मैं अपने गांव को बचा सकूं। नन्हे तोते ने जोश से कहा यह जादूगर कौन है? हमें उसके बारे में सब कुछ बताओ। शायद हम तुम्हारी मदद कर सकें।

सहा ने कहा उसका नाम जालिम जादूगर जाम है। वो काले जादू का माहिर है और उसके पास एक तिलिस्मी आसा है जिससे वह किसी को भी पत्थर बना सकता है। मेरे वालिद ने उसका मुकाबला करने की कोशिश की थी। मगर वह सब कैद हो गए। अब पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। किसी में हिम्मत नहीं कि वह उसके खिलाफ जाए। बूढ़े तोते ने गहरी सोच में डूब कर कहा, "यह वाकई एक बड़ी आजमाइश है। मगर अगर हमने अकल से काम लिया तो शायद हम जादूगर को शिकस्त दे सकें। नन्हे तोते ने जोश से कहा, "हम हमें फौरन गांव जाना चाहिए।"

सहा ने थोड़ी हिम्मत जमा की और दोनों तोतों के साथ गांव की तरफ रवाना हो गई। जब वह गांव के करीब पहुंचे, तो वहां का मंजर खौफनाक था। हर तरफ सन्नाटा था। दरख्त सूखे हुए थे और आसमान पर स्याह बादल छाए हुए थे। महल की दीवारें जादू के अस्र से नीली पड़ चुकी थी और हर दरवाजे पर झाम के साए नजर आ रहे थे। बूढ़े तोते ने सरगोशी की। हमें सीधा जादूगर के महल में जाना होगा। मगर सीधे उसके सामने जाना खतरनाक हो सकता है। पहले हमें उसका राज मालूम करना होगा कि उसकी ताकत कहां से आती है। नन्हे तोते ने कहा हां हमें चुपके से महल में दाखिल होना होगा और देखना होगा कि वो किस चीज से सबसे ज्यादा डरता है।

वो तीनों आहिस्ता-आहिस्ता महल के अंदर दाखिल हुए। सहा ने उन्हें एक खुफिया रास्ते से लेकर एक पुरानी लाइब्रेरी में पहुंचा दिया। जहां बादशाह के कदीम कुतुब खाने की किताबें रखी थी। उन्होंने जल्दी-जल्दी सब हाथ पलटे और आखिरकार एक पुरानी किताब में झाम के जादू का राज पा लिया। बूढ़े तोते ने जोर से पढ़ा जाम की सारी ताकत उसके जादुई आशा में है। मगर वह आसा सिर्फ चांद की रोशनी में अस्र करता है। अगर सूरज की रोशनी उस पर पड़ जाए तो वह हमेशा के लिए बेअसर हो जाएगा। सबीहा ने परजश होकर कहा इसका मतलब है कि अगर हम सूरज की रोशनी को महल के अंदर ले आए तो जादूगर की सारी ताकत खत्म हो जाएगी। नन्हे तोते ने फौरन कहा यह काम हमारे बस का है। हम अपने परों से जादुई आशा पर सूरज की किरणें डाल सकते हैं। मगर हमें यह एहतियात करनी होगी कि वह हमें ना देख ले।

रात भर वह तीनों अपने मंसूबे पर गौर करते रहे और जैसे ही सुबह की रोशनी नमूदार हुई दोनों तोते उड़कर महल की ऊंची दीवारों पर पहुंच गए। सूरज की किरणें अभी कमजोर थी। मगर जैसे ही वह बुलंद हुई, बूढ़े तोते और नन्हे तोते ने अपने परों को हरकत देना शुरू किया और सूरज की रोशनी को महल के अंदर जादूगर झाम के आसा पर डालने लगे। जादूगर जो अभी गहरी नींद में था, अचानक चीख कर जाग गया। उसने देखा कि उसका आसा चमक रहा है और उसकी ताकत तेजी से खत्म हो रही है। उसने फौरन आशा को बचाने की कोशिश की मगर जैसे ही रोशनी पूरी तरह उस पर पड़ी आसा एक धमाके से छिट गया और झाम जमीन पर गिर पड़ा। जैसे ही आशा टूटा पूरा गांव एक झटके से जाग उठा। सब कैदी आजाद हो गए। महल की दीवारों का नीला रंग खत्म हो गया और आसमान एक बार फिर साफ हो गया। सबीहा के वालिद जो अब आजाद हो चुके थे हैरान रह गए कि उनकी बेटी और दो बहादुर तोतों ने पूरे गांव को बचा लिया था। बादशाह ने खुशी से सहा को गले लगाया और दोनों तोतों की तरफ बढ़कर कहा तुम ना होते तो हम हमेशा के लिए जादूगर के कैदी बने रहते। पूरा गांव खुशी के नारों से गूंजने लगा। सबने शहजादी सबीहा नन्हे तोते और बूढ़े तोते को सलाम किया और उनकी बहादुरी की कहानियां बयान करने लगे।

चंद दिन बाद जब हर चीज दोबारा मामूल पर आ गई। दोनों तोतों ने एक बार फिर उड़ान भरने की तैयारी की। सबीहा ने उनके लिए खास सुनहरी पर तैयार करवाए और दुआ दी। अल्लाह तुम्हें हमेशा सलामत रखे और तुम्हारी हिम्मत कभी कम ना हो। दोनों तोते एक बार फिर नीले आसमान में बुलंद हुए। नई मुहिम की तलाश में जहां उनकी बहादुरी और अकल की जरूरत पड़े।