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How ASUS Killed Its Own Phones – The Zenfone Disaster Explained!

Utsav Techie12:09

Transcription

Asus एक ऐसी कंपनी थी जिसने Zenfone की लाइन अप के साथ एंट्री इंडिया में तब ली थी जब इंडिया के अंदर 2014 में Xiaomi, Oppo, Vivo ये सब कंपनीज़ आ रही थी। और इन चाइनीस कंपनी के साथ Asus भी आ गई मार्केट के अंदर और ASUS को ये लगा था कि जैसे उन्होंने एक पीसी बिज़नेस के अंदर एक मोनोपोली यहां पे क्रिएट कर ली और अपने प्रोडक्ट्स यहां पर निकाल दिए। वैसे ही ये लोग अपने Android फोंस भी यहां पर बेच लेंगे।

वो शुरुआती दिनों में इनके Android फोंस भी काफी इंटरेस्टिंग थे। शुरुआती दिन में जो Asus की Zenfone सीरीज थी वहां पर आपको Intel पावर प्रोसेसर्स के साथ फोंस देखने को मिलते थे। उसके बाद वो अपनी Asus की Zenfone 2 सीरीज लाई जिसके अंदर बजट के अंदर Zenfone 2 लेज़र जैसा फोन लेकर आए थे। Snapdragon के फ्लैशिप प्रोसेसर के साथ भी उन्होंने अपने फोंस को निकाला था।

इसके बाद कहानी में चेंजेस तो तब आते हैं जब Zenfone 3 लाइन अप आते हैं और इनके फोंस पहले अफोर्डेबल अट्रैक्टिव होते थे। कंपैटिटिव होते थे। एकदम से प्रीमियम हो जाते हैं और एकदम से इनके फोंस की कीमत बहुत ज्यादा हो जाती है। हालांकि उस जमाने में Asus को काफी ज्यादा नेगेटिव फीडबैक, नेगेटिव बैकलैश मिला था और फिर 2018 में Zenfone अपनी अभी तक की सबसे पॉपुलर लाइनअप को निकाल थी जो थी Zenfone Max Pro M1 और Pro M2 सीरीज। यह एक ऐसे फोन थे बजट कैटेगरी के अंदर जो बहुत ही ज्यादा कमाल के थे और जिन लोगों ने इनके फोंस को यूज किया था उन लोगों को इनके फोंस बहुत ही ज्यादा पसंद आए थे क्योंकि प्रोडक्ट अच्छा था, क्वालिटी थी और उस जमाने के हिसाब से ओवरऑल एक अच्छी स्पेसिफिकेशन दे रहे थे।

इवन सरप्राइजिंग चीज तो यह थी कि Asus उस जमाने में हेड टू हेड कमट कर रही थी Xiaomi से जो अपनी Redmi की Note सीरीज निकाल रहा था। उस जमाने में Realme बिल्कुल नई-नई शुरू हुई थी। लेकिन Realme के साथ भी कॉम्पटीशन था और Asus भी बहुत अच्छे फोंस यहां पर निकाल रही थी। लेकिन फिर 2019 के बाद से कुछ ऐसा होता है जिसके बाद Asus के फोंस इंडिया में आना बिल्कुल ही बंद हो जाते हैं और आफ्टर 2020 इनके मोबाइल फोन में इंटरेस्ट टोटली खत्म होता हुआ चले जाता है। और कभी ऐसा सोचा कि ऐसा क्यों हो गया कि 2020 के बाद बिल्कुल ही मोबाइल फोंस बनाने में बिल्कुल भी इंटरेस्ट नहीं रहा। इवन हर साल एक ऐसी रिपोर्ट भी आती है जिसमें ये क्लेम किया जाता है कि शायद Asus अपनी Zenfone की लाइन अप को टोटली यहां पे खत्म कर दे और शायद आने वाले कुछ साल में बिल्कुल सच भी हो सकता है।

देखो उसके सिंपल से रीज़न है कि Asus उस जमाने में इंडिया में आई थी जब इंडिया के अंदर स्पेसिफिकेशन वॉर प्राइस वॉर चल रही थी और लोगों को कम से कम रेट में अच्छे से अच्छा फोन दो और Asus ने ये चीज शुरुआती दिनों में दी थी और Asus के फोंस मार्केट में पॉपुलर भी हुए थे। ऑनलाइन मॉडल के अंदर इन्होंने अपने बहुत बढ़िया फस को यहां पर बेचा था। लेकिन प्रॉब्लम तब आई जब ये ऑफलाइन के अंदर जा रहे थे। अपनी ब्रांड इमेज के अंदर इतने बड़े चेंजेस कर रहे थे कि जैसे उस जमाने में Oppo और Vivo एडवरटाइजिंग में करती थी। लेकिन ये स्ट्रेटजी उनकी बिल्कुल ही बैकफायर हो गई। फिर Max Pro M1, Max Pro M2 ऐसे प्रोडक्ट थे जो इंडिया में ऑनलाइन लेवल पे इनके काफी ज्यादा सक्सेसफुल हुए थे।

लेकिन 2019 में एक ऐसी चीज थी जिसने इंडिया में जा रही एक अच्छी कंपनी को ना सीधे-सीधे यहां पर रोक दिया। और वो था इनका Zen मोबाइल के साथ लीगल इशू जिसके अंदर इनके ऊपर यह क्लेम था कि Zen का जो ट्रेडमार्क है यह दूसरी कंपनी के साथ है और Zenfone नाम से आप अपने फोंस को इंडिया में नहीं बेच सकते। इस वजह से उस जमाने में जो Asus के फोंस आ रहे थे जो इनोवेटिव थे जिसके अंदर रोटेटिंग कैमरा लगा हुआ था। ट्रू बज़लस डिज़ था उनको Asus अपनी Zee सीरीज बना के लाया था।

फिर देखा जाए तो Asus अपने एट और नाइन इन फोंस के ऊपर फोकस करता है। अराउंड 2020 जब ग्लोबल लेवल पे पेंडेमिक सिचुएशन थी। और Asus अपने छोटे और कॉम्पैक्ट फोंस को लेकर आता है। देखो छोटे और कॉम्पैक्ट फोंस ग्लोबल लेवल पर कुछ हद तक चलते हैं लेकिन नीश मार्केट रहता है। और यह वाली चीज Asus को समझ में आ गई थी कि यहां पे अगर छोटे कॉम्पैक्ट फोन अगर वो निकालता रहेगा तो एक छोटा सेगमेंट मार्केट का पकड़ सकता है। लेकिन उसको यह भी पता था कि गेमिंग वाला मार्केट बढ़ रहा है और गेमिंग को हम बहुत अच्छे तरीके से टारगेट कर सकते हैं। इसलिए 2018 में ही जब इंडिया और ग्लोबल लेवल पे PUBG मोबाइल बहुत ज्यादा पॉपुलर हो रहा था तभी Asus अपनी ROG गेमिंग सीरीज लेकर आता है और ROG के जो फोंस होते हैं टोटली गेमिंग सेंट्रिक होते हैं। यानी कि बढ़िया प्रोसेसर देंगे, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले देंगे। अलग-अलग एक्सेसरीज देंगे जिस कारण से गेमर्स इसके फोन को पसंद करें। और ये चीज यहां पे चलती है। गेमिंग के लिए लोग इनके फोंस को लेते हैं।

लेकिन वही प्रॉब्लम है कि इनके जो फोंस रहते हैं बहुत ही ज्यादा प्रीमियम रेंज के अंदर आते हैं। और इतने महंगे फोंस शायद लोग अफोर्ड ना कर पाए। यह एक सबसे बड़ी दिक्कत है क्योंकि गेमिंग के बारे में बात यह कि आज भी अगर 2025 की बात करें कि यहां पे जो लोग एक्सजेक्टली में गेमिंग करते हैं ना उनके फोंस का जो बजट होता है वो ₹00 से कम ही रहता है और लोग ₹15,000 से लेके ₹25,000 ₹00 तक ही स्पेंड करते हैं एक अच्छे गेमिंग फोन के लिए क्योंकि उन्हें उसमें गेमिंग करनी है और जैसे ही ₹00 के ऊपर का बजट जाता है तो ज्यादातर लोग जो मोबाइल फोन खरीद रहे हैं उनके पास शायद गेम खेलने का भी टाइम नहीं रहता। इस वजह से वहां प्रायोरिटी अलग बदल जाती है।

यह एक छोटा सा एक रीज़न है कि गेमिंग फोन कभी भी इंडिया में इतने ज्यादा पॉपुलर और सक्सेसफुल नहीं हो पाए क्योंकि इनकी पोजीशनिंग ही वैसी नहीं थी जहां पे लोगों को अट्रैक्ट किया जा सके गेम खेलने के लिए क्योंकि गेमिंग फोन के अंदर एक हाई एंड प्रोसेसर होता है। एक अच्छे क्वालिटी का डिस्प्ले दिया जाता है और ओवरऑल एक गेमिंग का एक अच्छा एक्सपीरियंस दिया जाता है। लेकिन अगर मैं ओवरऑल प्रोडक्ट के बारे में बात करूं तो गेमिंग फोन बनाते बनाते प्रोडक्ट की कीमत महंगी हो जाती है और उस रेंज में कंज्यूमर की प्रेफरेंस बदल जाती है। गेम खेलने वाला ₹00 ₹0000 नहीं डालने वाला। वो सिर्फ इसलिए क्योंकि गेमिंग के लिए वो उतना अच्छा फोन तो ले लेगा लेकिन उस रेंज में जब फोन खरीदने जाते हैं लोग तो गेमिंग तो एक प्रायोरिटी है लेकिन लोगों को एक अच्छा डिज़ कैमरा लुक सॉफ्टवेयर सारी चीजें चाहिए। जिस वजह से गेमिंग फस का जो मार्केट है वो इंडिया में बिल्कुल ही नॉन एकिस्टेंट हो गया।

हालांकि Asus अपने ROG सीरीज के फोंस इंडिया में निकालती है। लेकिन ROG सीरीज को इंडिया में इतनी ज्यादा सक्सेस मिली नहीं। इवन ग्लोबल लेवल पर भी टाइवान और जो साउथ ईस्ट एशिया रहते हैं वहां पे हैंडल्ड गेमिंग का कल्चर ज्यादा है। जिस वजह से वहां पे जो Asus के गेमिंग फोन है वो चलते हैं। और यही देख के Asus ने अपनी ROG एल सीरीज निकाली है जिसमें एक हैंड हेल्ड पॉकेट गेमिंग कंसोल जैसा उन्होंने बनाया कि लोग गेमिंग को एक हैंड हेल्ड कंसोल में यूज़ कर सकें और ट्रिपल ए टाइटल्स को वहां पे एंजॉय कर सकें। वो भी एक इंटरेस्टिंग और एक नीश कांसेप्ट है जो Asus वहां पर ले गए। लेकिन इस टाइप की भी प्रोडक्ट कैटेगरी इंडिया में इतनी ज्यादा नहीं चलती क्योंकि इंडिया में जो मेजॉरिटी गेमिंग होती है मोबाइल फोन के थ्रू रहती है और लोगों का इतना बजट नहीं है कि ज्यादा महंगे कैसा प्रोडक्ट यहां पर जाकर ले।

लेकिन कहानी सर यहीं पे खत्म नहीं होती। Asus की अगर मैं वापस Zenfone वाली लाइनअप पे आऊं तो उनके साथ इशूज़ थे। जैसे कि शुरुआती दिनों में कॉम्पैक्ट फोन निकाले। लेकिन यहां पे प्रॉब्लम्स आई थी इनके बूट लोडर अनलॉकिंग के साथ जहां पे इन्हें काफी ज्यादा इशू देखने को मिला। यहां तक कि क्लेम किया गया था इनका सॉफ्टवेयर में काफी रिफाइनमेंट होंगे। काफी फीचर्स आएंगे। वहां पे सॉफ्टवेयर अपडेट के अंदर डिले था। यहां तक कि कुछ Asus के फोंस के अंदर हार्डवेयर इश्यूज भी थे। जिस कारण से मार्केट के अंदर काफी बड़ा नेगेटिव परसेप्शन बना। और इसी वजह से Asus जैसी कंपनी दुनिया भर में कई जगह फोन बेचती थी। इंडिया की बात नहीं लेकिन कई जगहों से उन्होंने कटबैक किया और इंडिया में भी जो Zenfone की Zee सीरीज आती थी वो भी यहां पे खत्म कर दी। और फिर एक जमाने में जब कॉम्पैक्ट फोन यहां पर चलाते थे तो वो भी इन्होंने यहां पर खत्म करके अल्ट्रा वाले फोंस को निकालना शुरू कर दिया। लेकिन प्रॉब्लम वही थी कि लोग इनके अल्ट्रा फोन को क्यों लेंगे? जब मार्केट में ऑलरेडी Samsung का अल्ट्रा मौजूद है। चाइनीस कंपनीज़ का अल्ट्रा मौजूद है। तो Asus के पीछे यहां पर क्यों जाएंगे?

देखो सिंपल सा रीज़न ये है कि Asus का देखा है तो बिज़नेस बहुत बड़ा था और बहुत अलग-अलग लेवल पर काम करते थे। फॉर एग्जांपल Asus यहां पे पीसी हार्डवेयर बिज़नेस से आया था और पीसी हार्डवेयर में एक अच्छा नाम कमाया था। फिर ये फोन बिजनेस और लैपटॉप बिनेस में धीरे-धीरे ग्रो करने लगे। लेकिन कुछ इशूज़ थे। स्पेशली बात किया जाए तो सर्विस का एक इशू है जिसके अंदर देखा जाए तो अभी भी यहां पे थर्ड पार्टी सर्विस सेंटर्स के ऊपर ये लोग रिलाई करते हैं और आज भी थर्ड पार्टी सर्विस इतनी अच्छी नहीं प्रोवाइड कर पाते Asus के लैपटॉप्स को और यही सेम चीज Asus के फोंस वगैरह के साथ भी कंटिन्यू थी।

हालांकि फोन के अंदर इन्होंने देख लिए चाइनीस कंपनी से कम्पीट करके जहां पे इन्हें समझ में आया कि चाइनीस कंपनी से कमट करना उनके लिए कोई सेंस नहीं बनाता। क्योंकि जहां चाइनीज़ कंपनीज़ सस्ते से सस्ते में प्रोडक्ट निकालती रहेंगी, तो उन्हें भी यहां पे कट डाउन करना पड़ेगा और चाइनीज़ के पास यहां पे ग्लोबल सप्लाई चेन और ग्लोबल एडवांटेज है। जिस कारण से वह डायरेक्टली कम्पीट नहीं कर सकते। इसी वजह से इन्होंने यहां पे बीच में ही रास्ता छोड़ दिया। यानी कि कोशिश करने के बाद इन्हें समझ में आया कि लंबे समय तक यह प्राइस वॉर वाला गेम नहीं खेल सकते। इसलिए वहां से क्विट हो जाओ और वहां फोकस करो जहां पे Asus अच्छा काम करती है। जैसे कि पीसी हार्डवेयर हो गया, आपका ग्राफिक कार्ड्स हो गए, लैपटॉप्स हो गए वहां पे फोकस करो। और आज भी देखा तो Asus जैसी कंपनी इंडिया के टॉप फाइव पीसी मेकर्स में आती है। जहां पे HP, Lenovo, DEL, Aser के बाद Asus का नंबर आता है। Asus के लिए नंबर वन प्रायोरिटी पीसी वाला बिज़नेस है। जहां पे वो लोग नई-नई चीजें और नई-नई इनोवेशन, नई-नई चीजें ट्राई आउट करते रहते हैं। लेकिन फिर भी मार्केट के अंदर आफ्टर सेल सर्विस वाली इशू एक ऐसी चीज़ है जिससे आज भी यहां पे थोड़ा सा जूझ रहा है।

इवन देखा तो आने वाले कुछ साल के बाद अगर Asus अपने Zenfone डिवीज़ को टोटली यहां पर बंद कर दे तो भी कोई यहां पे सरप्राइजिंग चीज नहीं होगी। इवन यह भी हो सकता है कि आगे चलके ROG फोन ये लोग बनाते हैं इसको भी यहां पे टोटली खत्म कर दे और जो हैंड हेल्ड ROG एलi जो गेमिंग कंसोल हैंड हेल्ड बना रहे हैं सिर्फ उसी पर फोकस करें तो ये बात भी हो सकती है।

देखो सिंपल सी बात है स्मार्टफोन बनाने में बिज़नेस जो रहता है ना वो बहुत कंपेिटिव रहता है। यहां पे आपको हर वक्त कुछ ना कुछ नया करते रहना पड़ता है और मार्केट के अंदर रेलेवेंट बने रहना पड़ता है। जिस वजह से आप यहां पे चलते हो। Asus के साथ यही प्रॉब्लम थी। यह कंपेटिटिव कभी-कभी होते थे हर बार नहीं होते थे। अगर लगातार कंपेटिटिव होते रहते और कुछ ना कुछ यहां पर निकालते रहते। भले ही कंपनी इतना ज्यादा पैसा फोन बिनेस से ना कमाए लेकिन आपके पास दूसरा सेगमेंट है पैसे बनाने का। अगर वहां से ज्यादा बनाते रहते और यहां पे थोड़ा बर्न करते रहते तो शायद लंबे समय तक बहुत ही एक अच्छी ब्रांडिंग क्रिएट कर लेते और इंडिया में चाइनीस कंपटीशन के खिलाफ एक तैवानीज़ कंपटीशन भी यहां पे क्रिएट हो सकता था।

इसके साथ ही बात की जाए तो ROG फोन के ऊपर थोड़ा ज्यादा फोकस करना मेरी तरफ से थोड़ा मिस्टेक थी क्योंकि गेमिंग एक ऐसी कैटेगरी थी जो ग्रो तो हो रही थी लेकिन लोग उसके लिए ज्यादा पैसा देना पसंद नहीं कर रहे थे और वो चीज आज भी ट्रू है। अगर आरजी जैसी सीरीज में अगर एक अच्छा गेमिंग फोन अगर मिड रेंज में निकालते तो वो यहां पे ज्यादा सक्सेसफुल हो जाता। यानी कि इंडिया के लिए अगर आप इंडिया में फोंस बना रहे हो, प्रोडक्ट बना रहे हो तो इंडिया के इस से थोड़ा सा डिजाइन होना चाहिए। ऐसा नहीं कि आप एक महंगा ग्लोबल लेवल पर प्रोडक्ट बनाए। उसी को ग्लोबल लेवल की प्राइसिंग पर इंडिया में ले आओ और वो इंडिया में चल जाए। ऐसा नहीं होने वाला। इंडिया में अगर फोन बना रहे हो तो प्राइसिंग, फीचर हर एक चीज का बैलेंस होना चाहिए और उसे उस रेट में मिलना चाहिए जिस रेट में इंडिया का कंज्यूमर यहां पे डिमांड करता है।

लोगों की डिमांड और परसेप्शन चेंज होता रहता है। लेकिन एक चीज जो चेंज नहीं होती वो होती है कीमत। लोग आज भी ज्यादा पैसा खर्चा करना पसंद नहीं करते किसी प्रोडक्ट के ऊपर। इसीलिए आज भी स्कीम डिस्काउंट ऑफर्स का वेट करते हैं और जब सेल आती है तभी यहां पर लोग जाके मोबाइल फोन लेते हैं।

इसके साथ ही बात की जाए तो हां Asus जैसी कंपनी के लिए फीडबैक इधर ये रहेगा कि अगर फ्यूचर में अगर वो मोबाइल फस लेकर आना चाहे तो कंपैटिटिव प्राइसिंग में एक अच्छे प्रोडक्ट को अगर इंडिया में अगर इंट्रोड्यूस करें तो शायद यहां पे एक अच्छा कमबैक हो सकता है। इसके अलावा बात की जाए तो लैपटॉप बिज़नेस इनका थोड़ा सा यहां पे लूज़ हुआ है। जहां पे ये लोग सीधे फिफ्थ पोजीशन पर आ गए हैं। जहां एक जमाने में टॉप थ्री पे खेला करते थे। तो वो भी एक नेगेटिव साइन हो सकता है कि Asus को ना अपने प्रोडक्ट और पोर्टफोलियो को भी थोड़ा चेंज करने की जरूरत है और यहां पे अपने प्रोडक्ट को ड्यूरेबल बनाने की जरूरत है कि प्रोडक्ट एक ऐसा बनाओ जिसके अंदर आगे चलके कोई इशूज़ ना आए और अगर इशूज़ आते हैं तो आफ्टर सेल सर्विस के ऊपर काम करो जिससे लोगों को जो प्रॉब्लम हो रही है लैपटॉप्स के अंदर वो उन्हें लंबे समय तक देखने को ना मिले। इसके लिए वो फर्स्ट पार्टी सर्विस सेंटर वगैरह अगर ओपन करना चाहे खुद के बनाए हुए तो वो ओपन कर सकते हैं।

और फाइनली बात यह रहेगी कि Asus को ना यहां पे अगर इंडिया के अंदर अभी भी फोन बिज़नेस में आना है तो सच बता रहा हूं। अभी भी मौका है कंपेटिटिव प्राइसिंग के अच्छे प्रोडक्ट निकाल के अभी भी इंडियन मार्केट को क्रैक कर सकती है क्योंकि इंडिया मार्केट अभी भी ग्रोथ में है। ग्लोबल लेवल पर डिक्लाइन आ गया लेकिन इंडिया में अभी भी मौका है ग्रो करने का। देखते हैं क्या रहता है। लेकिन फिलहाल के लिए बात करें तो शायद Zenfone की जो सीरीज है अब शायद बहुत ही कम चांस नहीं कि आपको कभी यहां पर देखने को मिले। देखते हैं क्या होता है।

मेरे को एक जमाने में Zenfone के फोंस काफी ज्यादा पसंद थे। लेकिन हां दिक्कतें थी, सॉफ्टवेयर इतना अच्छा नहीं हुआ करता था, सर्विस अच्छी नहीं थी। और अगर वो छोटी-छोटी चीजें सॉल्व करते, प्राइसिंग अगर अच्छी रखते और नए-नए चिपसेट्स के साथ बढ़िया फोन निकालते तो शायद आज के समय में कहीं ना कहीं शायद इंडिया के टॉप फाइव स्मार्टफोन मार्केट में होते। क्योंकि बात यही है कि 10 साल पहले इंडिया मार्केट में एंट्री ली थी। 2018 में भी एक अच्छा कर रहे थे। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे नीचे चलते चले गए। बाकी अगर आप लोगों ने Asus वगैरह के फोन्स अगर यूज़ करें तो आपका जो फीडबैक वगैरह है ना नीचे कमेंट में जरूर बता सकते हैं। थैंक यू बने रहने के लिए। मैं आपसे मिलता हूं अपने नेक्स्ट वीडियो के अंदर।

[संगीत]