📱

Get Our Mobile App

Take your business learning on the go!

Download on the App StoreGet it on Google Play

World Education vs Indian Education: फ़र्क़ साफ़ है

Manish Sisodia at Work7:12

Transcription

दुनिया क्या कर रही है? मैं थोड़े से समय आपका इस पर भी लेना चाहूंगा। मैं क्योंकि एजुकेशन पर काम करता हूं। उस पर रिसर्च करता रहता हूं। पढ़ता रहता हूं। मैं दुनिया क्या कर रही है? उसको देखता रहता हूं।

आज जापान पांचवी क्लास से अपने बच्चों को कोडिंग सिखाता है। दूर दराज के किसी गांव में भी कोई बच्चा स्कूल में पढ़ता है तो वहां भी जापान के उस स्कूल में कंप्यूटर लैब होगी, एआई की लैब होगी और वहां पांचवी क्लास का बच्चा कोडिंग सीख रहा होगा। जापान में छठी क्लास का बच्चा ऐप बनाना सीख जाता है। जापान में आठवीं क्लास तक आतेआते बच्चा रोबोटिक्स पर काम करना शुरू कर देता है। 11वीं 12वीं तक आतेआते तो एडवांस लर्निंग और मशीन लर्निंग और इस पर पहुंच जाता है।

और हम हम टूटी हुई छत के नीचे अपने बच्चों को मरने के लिए मजबूर कर रहे हैं। या अगर पढ़ा रहे हैं देश के गांव में, देहात में, कस्बों में, सरकारी स्कूलों में तो पढ़ा रहे हैं। टूटी हुई फटी हुई टाट पे बिठा बिठा के उनको पढ़ाने का ड्रामा कर रहे हैं। पढ़ाना की तो बात छोड़ दीजिए कि क्या पढ़ा रहे हैं। तो एक तरफ जापान जैसा देश है जो अपने बच्चों को पांचवी क्लास से एआई एक्सपर्ट एआई वर्ल्ड में जीने के लिए, नौकरियां करने के लिए, एआई वर्ल्ड को रूल करने के लिए तैयार कर रहा है। और हम हम तो उनको एआई मजदूर बनाने लायक भी तैयार नहीं कर रहे हैं अगर वह जिंदा रहे तो। हम अपने बच्चों को एआई मजदूर बनाने वाली एजुकेशन भी नहीं दे पा रहे हैं। और वह अपने बच्चों को एआई एक्सपर्ट बनाने की एजुकेशन दे रहे हैं। जापान जैसे देश और हम यहां ढोल पीट रहे हैं। हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हम पांच साल से एजुकेशन पॉलिसी को सेलिब्रेट कर रहे हैं।

कोरिया छठी क्लास से बच्चे रोबोटिक्स पढ़ने लगते हैं। नौवीं क्लास से बच्चे रोबोटिक्स क्लब्स सब बच्चों के लिए मैंडेटरी हो जाता है। सारे बच्चों के लिए एआई लैब्स कोरिया ने बना रखी है। 11वीं, 12वीं के बच्चे तो बड़े-बड़े टेक कंपनियों के साथ में हर बच्चा किसी न किसी बड़ी टेक कंपनी के साथ में पार्टनरशिप में अपना कोई ऐप, अपना कोई रोबोट बना रहा होता है। और हम 11वीं और 12वीं के गांव के स्कूलों में चले जाइए। वहां पे अगर कहीं आपको कंप्यूटर लगा हुआ दिख जाएगा। आप 11वीं, 12वीं के बच्चे से पूछ लीजिए। वहां उसको कंट्रोल वी और कंट्रोल सी की कमांड सिखा रहे होते हैं। पेंट कैसे किया जाता है? लाइनें कैसे खींची जाती है? हम 11वीं, 12वीं के बच्चों को वो सिखा रहे हैं। कोरिया के बच्चे 11वीं और 12वीं में आते-आते कोरिया का हर एक बच्चा सीख रहा है कि दुनिया की सबसे टॉप एआई कंपनी के साथ मिलके ट्रैफिक के सॉल्यूशन, हेल्थ के सॉल्यूशन, मेंटल प्रॉब्लम्स के सॉल्यूशन कैसे निकाले जाएंगे। और हमारे बच्चे 11वीं और 12वीं के अगर कहीं सीख भी रहे हैं कंप्यूटर उनके सामने भी रखा है तो कंट्रोल वी और कंट्रोल सीख रहे हैं। इसमें बात ही नहीं हो रही है। इसमें बात ही नहीं होने दे रहे। वो हिस्ट्री बना रहे हैं। हम हिस्ट्री बदल रहे हैं।

कोरिया मैंने बोला चीन सारे दुनिया के मार्केट में उसका सामान है। सारी दुनिया के लोग जानते हैं चीन के लोग कितने मेहनती अपनी मेहनत के दम पे आगे बढ़ रहे हैं। हाई स्कूल में एआई 2018 में चाइना ने अपने पाठ्यक्रम का मैंडेटरी हिस्सा बना दिया था। हम तो बात ही नहीं कर रहे। हम तो केवल इतिहास की चार किताबें छेड़ के खुश होना चाहते हैं। उसप बहस कराना चाहते हैं देश में। क्यों नहीं हमारे देश में एआई हाई स्कूल में पाठ्यक्रम का हिस्सा बना? क्यों नहीं हमारे देश में जैसे जापान अगर पांचवी क्लास में अपने बच्चों को कोडिंग सिखा सकता है तो भारत अपने बच्चों को पांचवी क्लास में कोडिंग और ऐप बनाना क्यों नहीं सिखा रहा है? क्यों हम बच्चों को केवल लड़ना सिखा रहे हैं? क्यों हम धर्म और जाति के नाम पे केवल लड़ना सिखा रहे हैं? उस इतिहास में घुसा के उनको लड़ाना चाहते हैं? ये पांचवी पांच साल है ना नई एजुकेशन पॉलिसी के।

चीन में दसवीं क्लास तक आते-आते बच्चे रियल टाइम डाटा पर वेदर प्रेडिक्शन जैसी चीजें करने लगते हैं। एआई के बेस पर और कैलकुलेशन बेस पे। 12वीं क्लास तक आतेआते तो ऑटोनॉमस ड्रोनस बनाने लगते हैं। सारे बच्चों के लिए मैंडेटरी है ऑटोनॉमस ड्रोनस बनाने पे। सिंगापुर जैसा छोटा सा देश सातवीं क्लास से हर बच्चे को डेटा साइंस स्टडी करना मैंडेटरी कर रखा है वहां की सरकारों ने अपने करिकुलम में। नवीं क्लास में मैथमेटिक्स और साइंस में वो केवल अपने बच्चों को कोडिंग, डाटा साइंस, रोबोटिक्स सिखाते हैं। सिंगापुर के लोग। ग्रेड 10 में स्टूडेंट एआई ड्रिवन एप्स बनाने लगते हैं। फाइनेंसियल लिटरेसी के, टीचिंग के, एक दूसरे को बजटिंग और इन सबके। 11वीं, 12वीं में वो एआई और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी सारे बच्चों को सिखा देते हैं सिंगापुर में।

हम एजुकेशन पर काम ही नहीं कर रहे हैं। हम एजुकेशन पर केवल बहस कर रहे हैं। हम टीचर ट्रेनिंग नहीं करा रहे हैं। सिंगापुर ने एआई आने के बाद 2018 के बाद से अपने हर एक टीचर को 100 आवर्स की एआई बेस्ड टीचिंग ट्रेनिंग उसने मैंडेटरी कर दी है। सबको कंप्लीट टारगेट कर लिया उन्होंने। और हम तो टीचर ट्रेनिंग के नाम पर भी कुछ नहीं कर रहे हैं। वो अपने बच्चों को स्मार्ट सिटी बनाना सिखा रहे हैं। हम बच्चों को स्मार्ट बोर्ड तक नहीं दे पा रहे अपने बच्चों को।

अमेरिका ग्रेड सिक्स से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स अमेरिका के हर बच्चे को मैंडेटरी पढ़ाया जाता है। मैंडेटरी और वहां उसके एजुकेशन नहीं होती है। एग्जाम नहीं होते हैं। वहां उसको उसके प्रोजेक्ट से के बेस पर उसको जज करते हैं। रियल टाइम प्रोजेक्ट देते हैं। उसको जज करते हैं। हम रोट लर्निंग सिखाते हैं। वो अपने बच्चों को रोबोट बनाना और रोबोट चलाना सिखा रहे हैं। और हम जहां कहीं पढ़ा भी रहे हैं रोबोट तो रोबोट की परिभाषा रट के एग्जाम में लिख के पास करना सिखा रहे हैं। यह अंतर हमारे एजुकेशन सिस्टम में है।

यूनाइटेड स्टेट में दसवीं क्लास के बच्चे एआई के चैट बॉट बनाते हैं। सारे बच्चे क्लब और उनके उनके क्लबों में कॉम्पटीशन होते हैं। नौवीं दसवीं के क्लास के बच्चों में 11वीं 12वीं के बच्चे एमआईटी जैसी संस्थाओं के साथ टाई अप करके हाईटेक एआई ड्रिवन कैंसर डिटेक्शन मॉडल्स इस जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे होते हैं। उनके यहां वोकेशनल ट्रेनिंग अभी स्किल इंडिया की हम बात करते हैं ना अमेरिका के 52% बच्चे वोकेशनल कोर्सेज में जाते हैं और वहां वोकेशनल कोर्सेज किस बात के हैं? एआई साइबर सिक्योरिटी रोबोटिक्स उनके टेक करियर्स बनाने के लिए होते हैं। और हमारे देश में नौवीं, 10वीं, 11वीं, 12वीं की बात के हाथ में मैंने बताया कि कंट्रोल अगर कहीं कंप्यूटर दे भी रखा है तो कंट्रोल वी और कंट्रोल सी सिखा रहे हैं।

आप किसी भी मैं तो सारे पत्रकारों को भी रिक्वेस्ट करता हूं। झालावाड़ की गिरती हुई बिल्डिंग दिखा रहे हैं। आप बहुत अच्छी बात है। आप टीचर्स की कमी है। यह दिखा रहे हैं। बहुत अच्छी बात है। जहां सब कुछ है, जहां स्कूल की बिल्डिंग भी है, जहां टीचर भी है, जहां कंप्यूटर भी है, जहां कंप्यूटर टीचर भी है। वहां के बच्चों के सामने भी माइक लगा के पूछ लीजिए कि आज कंप्यूटर क्लास में क्या सीखा? शर्म आती है कि हमारे यहां जब 11वीं, 12वीं का बच्चा कहता है हम उससे पूछे कि 11वीं, 12वीं के बच्चे ने क्या सीखा आज कंप्यूटर क्लास में? तो वो आपको बताएगा आज मैंने पेंटिंग सीखी। आज मैंने कंट्रोल वी कंट्रोल सी करने की कमांड सीखी वर्ड पे। तो कहां ले जा रहे हैं हम अपनी नेक्स्ट जनरेशन को?

ये सब माता-पिता का दर्द है जो मैंने आपके सामने रखा। सारे बच्चों का दर्द है और समझ लीजिए किसका दर्द है ये? 31 करोड़ बच्चे इस देश के स्कूल कॉलेजेस में पढ़ते हैं। जिनमें से 25 करोड़ बच्चे इस वक्त स्कूल्स में हैं और बाकी कॉलेज में हैं। इन 25 करोड़ में से 15 करोड़ बच्चे केवल और केवल सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। और सरकारी स्कूलों के तो 90% बच्चों की यह हालत है जो मैंने बताया।