Transcription
मेरे नबी मेंबर पर आए क मा मा वो कौन आ रहा है सा व कौन आ रहा है फर आपने कहा व कौन आ रहा हैमर खड़े हो गए या रसूल अल्लाह अनजल क्या कोई वही आ गई क ना क्या कोई दुश्मन आ गया नहीं तो फिर कौन आ रहा है आपने कहा रमजान आ रहा है रमजान आ रहा है शहर रमदान अ उ कुरान रमजान के लफ्ज और रोजे में क्या जोड़ है रमजान कहते हैं जल जाना जल जाना जल जाना तो इसको रोजे के साथ क्या मुनासिब है कि जब कोई मर्द औरत रोजा रखता है या रखती है तो पिछले 330 दिन के गुना आज रोजा रखा भट्टी तैयार हो गई गुनाह डाल के जलाओ दूसरे दिन और गुनाह जलाओ तीसरे दिन और गुनाह चौथे दिन और तीव दिन सारे गुनाहों को अल्लाह ताला जला के राख करके ईमान वाले मर्द औरत को पाक करके साफ करके आखिरी रात कहता है जाओ बख्शे बख्शा ए चले जाओ बाकी कुछ नहीं रोजा साल के बाद है व अभी आ रहा है मेरे नबी पर नौ रमजान आए नौ मेरे नबी पर नौ रमजान आए मदीना जाने के बाद हिजरत के दूसरे साल शाबान की दो तारीख को पीर के दिन रोजे का फरज होना नाजिल हुआ और मेरे नबी सितंबर में पहुंचे हैं मदीना मुनव्वरा और रमजान यू पीछे जा रहा है सितंबर से अगस्त में आया है अगस्त से जुलाई में आया है और जुलाई से जून में आया है और मेरा नबी अल्लाह के पास चले गए सारा रमजान मेरे नबी ने गर्मी का गुजारा नौ रमजान सारे गर्मी के रोजे और मेरे नबी की इता सहरी होती थी दो खजूर और एक गिलास पानी पर रोजा रखते थे आम तौर पर कभी-कभी खाने को भी मिल जाता था लेकिन दो-तीन खजूर और एक गिलास पानी इस पर मेरे नबी ने नौ रमजान गुजारे तकाफ करके दिखाया पूरा महीना 20 दिन 10 दिन फिर सारी जिंदगी 10 दिन का तकाफ फरमाया शब कदर की तलाश में और उम्मत को खुशखबरी सुनाई रमजान आ रहा है तो मैं थोड़ी सी तफसील बता दूं मेरे नबी मेंबर पर आए क मायकम माल वो कौन आ रहा है साबा वो कौन आ रहा है फिर आपने कहा वो कौन आ रहा है उमर खड़े हो गए या रसूल अल्लाह अनजल क्या कोई वही आ गई क ना क्या कोई दुश्मन आ गया नहीं तो फिर कौन आ रहा है आपने कहा रमजान आ रहा है रमजान आ रहा है ज जनत के दरवाजे खुल गए जहन्नुम के दरवाजे बंद हो गए रात की तरावी की नमाज मिली आपका रमजान आजकल बड़ा औखा होगा लेकिन अजर भी बड़ा होगा मैंने एक दिन पहले वापसी रखी 18 घंटे कौथे बुखा रवे आप तो फसे हुए मैं तो ना फसू तो उसका अजर भी उसके मुताबिक होगा अजर भी उसके मुताबिक होगा तो मेरे नबी का सारा रमजान गर्मियों में गुजरा है गर्मियों में गुजरा है और आपने तीन दिन तरावीह की नमाज पढ़ाई पहले किसी उम्मत प तरावीह नहीं आई हमारी उम्मत इस उम्मत पे तरावीह की नमाज आई पहली उम्मत का रोजा मुश्किल तो हमें एक आसानी मिली कैसन सरिमा पहली उम्मत का रोजा 24 घंटे 24 घंटे 24 घंटे जब हमारे ऊपर रमजान आया 24 घंटे पहला रोजा दूसरा रोजा कसन सरमा एक सहाबी है ऊंट चराने वाले अगला रोजा कैसे शुरू होता था सूरज डूबने के बाद आंख लग गई रोजा शुरू हो गया रोजा शुरू हो गया जब तक जाग रहे हो खाते रहो आंख लगी रोजा शुरू हो यह घर आए कहने लगे बीवी से कोई इफ्तारी है कहने लगे वेले बैठे हैं क कोई नहीं फिर कहने लगी तू इतना थक के आया है तो चलो मैं तेरे लिए कुछ इंतजाम करके लाती हूं अब य थके हु आए थे य लेटे और आंख लग गई सूर डूब गया बेगम को आने में देर हो गई जब व आई देखा तो सोए हुए कलकता बना सारमा अरे सारमा के बेटे तेरा तो कम हो गया उनकी आंख खुली क्या हुआ अगला रोजा शुरू हो गया तो जोहर की नमाज में आए में होश होक गिर गए तो अल्लाह के नबी ने पूछा इसको क्या हुआ या रसूल अल्ला यह सहरी के बगैर रोजा शुरू कर दिया तो मेरे नबी का दिल एकदम मुट्ठी में आया तो मेरे अल्लाह ने कुरान उतारा चल मेरे हबीब आपको रंजीदा नहीं देख सकता आपकी उम्मत को इजाजत है सहरी तक खाओ ल शरब ह रात को आसानी कर दी खाओ पियो पहले जब रोजा शुरू हुआ तो हर शय हराम हो गई बीवी भी हराम हो गई खाव भी हराम हो ग हर श हराम होग एक दो वाकत इस तरह ऊपर नीचे आए कि मेरे रब ने सारा निजाम बदल एक और बद्दू आ गया या रसूल अल्लाह मैं तो मारा गया आपने कहा क्या हुआ क मैं रोजे की हालत में बीवी के पास चला गया आपने कहा अच्छा तो गुलाम आजाद कर कहा मैं गरीब बंदा कहां से गुलाम आजाद कर हमने कहा तो फिर 60 मिस्कीन को रोटी खिला कहने लगा मैं आप मस्कीन मैं कि रोटी खवा आपने कहा अच्छा फिर 60 रोजे रख कहने लगा एक रोजे आ काम केता 60 रोजे की एक रोजे में यह चांद चढ़ाया 6 रोजों में क्या करूंगा तो आप बड़ा हंसे आपा बै जा थोड़ी देर गुजरी तो एक सहाबी आया या रसूल अल्लाह ये सदके की खजूर हैं आओ कि बैठा क रया यह ले जा और मदीने के 60 गरीबों को दे दे व कहने लगा या रसूल अल्लाह अल्लाह की कसम मदीने में मुझसे बड़ा गरीब कोई नहीं ूज करो मेरा जुर्माना मैंने हलाल करो तो आप इतना हंसे के ये दांत नजर आने ये ये ये दाड़े नजर आ इतना हंसे यहां तक आखिरी दांत नजर आने लगे आपने कहा अच्छा भाई तेरा जुर्माना तनही हलाल कीता पर और किसी वास्ते नहीं सिर्फ तेरे वास्ते तोय पर नीचे ऐसे काम हुए तो मेरे रब ने कर्म किया क चलो तुम्हारे लिए रात सारी हलाल है हर हलाल चीज हलाल है सहरी के बाद खत्म तो रोजा खाने का टाइम तब्दील किया एक नमाज का इजाफा किया तरावी व चक मुश्किल होती है तो अल्लाह ने अजर बढ़ा दिया मेरे नबी ने खुशखबरी सुनाई मेरी बात ध्यान से सुनना रमजान आने वाला है तरावीह आने वाली तरावीह के हर सजदे पर 00 नेकी 00 नेकी यहां की सबसे बड़ी मस्जिद कौन सी हैला की जामिया इस्लामी जामिया इस्लामी स्ला की मस्जिद वाले डेज नेकी आपको समझ में नहीं आएगी एक छोटा सा इश्तिहार लगा दें जो हमारी मस्जिद में तरावी पड़ेगा उसको 15 मिलेंगे हर सजदे पर 15 ल अगले तुसी दादिया नेचा के ले जाओगे दादिया तो तो लड़ाई शुरू हो जा अम्मा तो मेरे नाट दादी तो मेरे ना अल्टर मेरे नबी की खुशखबरी डेढ हजार नेकी तीन सेकंड का सजदा हर सजदे पर जन्नत में सुर्ख याकूत का एक महल जिसके 6 हजार सोने चांदी के दरवाजे तुझ एक घर लेकर सारी जिंदगी कर्ज लाई रख दे हो नहीं एक सजदे पर एक सजदे पर एक सजदे पर जन्नत में इतना बड़ा घर कि 6 हज सोने चांदी के दरवाजे हर सजदे पर जन्नत में एक दरख्त सोने चांदी का जिसका नीचे 100 साल घोड़ा दौड़ सके एक रोजा एक रोजा रमजान का कभी सोचा रमजान का मतलब क्या है रमजान को र रजान क्यों कहते हैं अल्लाह ने 11 महीनों के नाम अरबों से रखवा है और रोजे के महीने का नाम खुद रखा कुरान में शहर रमदान अल्जी उनल फल कुरान मुहर्रम सफर रबील अव्वल रबी सानी जुमा ला जमाद सानी रजब शाबान शव्वाल जुल कायदा जुल हज यह अरबों ने नाम रखा और रमजान पहले से रखा जा चुका था अरबों से रखवाया रमजान के लफ्ज और रोजे में क्या जोड़ है रमजान कहते हैं जल जाना जल जाना जल जाना तो इसको रोजे के साथ क्या मुनास बत है कि जब कोई मर्द औरत रोजा रखता है या रखती है तो पिछले 330 दिन के गुना आज रोजा रखा पट्टी तैयार हो गई गुनाह डाल के जलाओ दूसरे दिन और गुनाह जलाओ तीसरे दिन और गुनाह चौथे दिन और तीवें दिन सारे गुनाहों को अल्लाह ताला जला के राख करके ईमान वाले मर्द औरत को पाक करके साफ करके आखिरी रात कहता है जाओ बख्शे बख्शा है चले जाओ जाओ बख्शे बख्शा है चले जाओ तो मेरे नबी तो दो खजूर पर रोजा रोजा रखते थे और एक बड़ा खूबसूरत वाकया है रमजान का कहीं से बकरे की सिरी पकी हुई आ गई तो बड़े शौक से खा रहे थे और साथ ए रवाज बन सारिया भी थे हजरत अली भी थे और हजरत मेक दद भी थे तीन चार आदमी सेहरी खा रहे थे बिलाल रज अल्ला ताला अन आए कि या रसूल अल्लाह सेहरी का टाइम खत्म हो गया है मैं अजान देने जा रहा हूं आप खाना पीना बंद फरमा दें अब मैंने कहा ठीक है वो बाहर चले गए अजान देने लगे फिर ख्याल आया मैं देख लूं कि आपने खाना छोड़ा कि नहीं छोड़ा वापस आए तो आप खा रहे थे उ कहा रसल अल्लाह वल्लाल कता अल्लाह की कसम सुबह हो गई आपने हाथ पीछे कर लिया कहा अरे बिलाल नहीं हुई थी नहीं हुई थी तेरे कसम खाने पर अल्लाह ने पहले निकाल दिया उस कि तेरी कसम झूठी ना पड़े हजरत अली ने फरमाया अगर बिलाल कसम ना उठाते तो जब तक मेरे नबी खाते रहते अल्लाह सुबह को पीछे हटाते जाते हटाते जाते दे पक रही थी अबू उ बैदा रजला ताला बिन जर्र वो देख पका रहे थे बकरा आपने कहा अबू बैद यह मुझे बकरे की दस्ती पकड़ना अगले बाजू आपको अगले बाजू का गोश्त पसंद था गर्दन का गोश्त पसंद था ये कमर के पुट का गोश्त आपको पसंद था दूध पसंद था बरनी खजूर पसंद थी अजवा खजूर पसंद थी ताजा रोटी पसंद थी आप या ताजा खाते थे या फाका तो तरह नहीं अठ पका के फड ठोक दे तो कट कट के गर्म कीती रखो तो खाती रखो या आप ताजा खाते थे या फाका फरमाते थे एक दफा फत मक्का पर उम्मे हानी के घर आपने बासी रोटी खाई वरना आपने हमेशा ताजा या फाका या ताजा या फाका कभी जिस खाने पर रात गुजर जाती उसे नहीं खाते थे ी माशाल्लाह अठ हट रातो जान जान हां तो कहने लगे उबैद ये दस्ती पकड़ा ना तो उन्होने ऐसे बकरे का बाजू निकाल के पूरा आपने यूं पकड़ा नोच के फेंका क दस्ती पकड़ा ना आपने उन्होंने यूं निकाला डोई सर आप ने पकड़ा खाया कहा मुझे बकरे का बा दस्ती पकड़ा ना या रसूल अल्लाह बकरे की दो ही होती है आपने तेरा भला हो जाए अगर तू मेरे कहने पर डाल देता जब तक मैं कहते रहता अल्लाह मुझे निकाल के खिलाता रहता अल्लाह मुझे निकाल के खिलाता रहता अल्लाह ने रमजान भेज भेजा हुआ है रमजान आ रहा है अल्लाह की रहमतों का बर जन्नत के दरवाजे खुल गए जहन्नुम के दरवाजे बंद हो गए एक दूसरे को माफ कर दो रोजे की हिफाजत करो आप बहुत से बहन भाई आए बैठे हो लड़े हुए हो गए नाराज हो गए मियां बीवी लड़े हुए होंगे भाई बहनें लड़ी होंगी रमजान आ रहा है तैयारी करो जैसे हज पर जाने से पहले माफियां मांगते हो रमजान से पहले भी एक दूसरे से माफी मांगो एक दूसरे को माफ करो एक दूसरे को दरगुजार करो खुद जाकर माफी मांग लो अल्लाह आपका मकाम ऊंचा कर देगा मर्तबा ऊंचा कर देगा आखिरी रात अल्लाह ताला फरमाते हैं जाओ तुम्हारे रात की कयाम और दिन के रोजे के बदले तुम्हें सबको माफ कर दिया मांगो और एक रात अल्लाह ने शब कदर बनाई जो हजार रातों के बराबर कर दी वह आज आपकी तो रातें बड़ी छोटी हैं पांच रातें लो घंटे द भी नहीं रात तो तो पांच रातें जालो 21 23 25 27 29 इनमें से एक रात जरूर शब कदर होगी एक रात का जागना 80 साल की इबादत से बढ़िया हो जाएगा सिर्फ एक रात का जागना एक रात का जागना एक शर्त है दिल में बगज ना हो नफरत ना हो ह कात ना हो किसी मुसलमान को हकीर ना जानो बल्कि किसी इंसान को हकीर ना जानो तो आपकी बंदगी अल्लाह की बारगाह में पहुंच कर आपके मकाम को ऊंचा कर देंगी तो इबादत में एक नमाज है फिर एक रोजा है फिर जकात और हज मालदार लोगों का फरीजा है गरीबों का नहीं है मुत वसत तबके का नहीं है तो इबादत का जो निसाब है बड़ा मुख्तसर है पांच नमाज पे कितना वक्त लगता है रोज साल के बाद आते हैं गुंजाइश है बीमारों बाद में रख लो मरीजों बाद में रख लो जकात सारे साल में किसी वक्त दे दो हज जिंदगी में कब किसी वक्त कर लो यह एक छोटा सा निसाब है दूसरा मेरे नबी की जिंदगी का पहलू जिसे मैं हाईलाइट करना चाहता हूं जो नुमाया है जो रोशन है वो मेरे नबी की जिंदगी है वो मेरे नबी के अखलाक हैं वो मेरे नबी का दरगुजार है मेरे नबी का पैगाम मोहब्बत है