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Satvahanas Dynasty | Deccan Region | Ancient History for UPSC

Bookstawa16:38

Transcription

हेलो फ्रेंड्स, आज की वीडियो में हम लोग सातवाहन आज की कंप्लीट हिस्ट्री को कवर करेंगे। शुरुआत करते हैं बैकग्राउंड से।

232 ई. में अशोक की डेथ हो गई और उनके बाद उनके जो सक्सेसर थे, वो काफी वीक थे। ऐसे में मौर्य एम्पायर दो पार्ट्स में डिवाइड हो गया: वेस्टर्न पार्ट और ईस्टर्न पार्ट। वेस्टर्न पार्ट को रूल कर रहे थे कुणाल और ईस्टर्न पार्ट को रूल कर रहे थे दशरथ। बट मौर्य एम्पायर के वेस्टर्न पार्ट पर नॉर्थ वेस्ट से लगातार फॉरेन इनविजिबल हो रहे थे। ऐसे में मौर्य एम्पायर का जो वेस्टर्न पार्ट था, वो उनके हाथ से निकल गया और इधर ईस्टर्न पार्ट में दशरथ के जो सक्सेसर थे, वो भी काफी वीक निकले। इस मौके का फायदा उठाकर मौर्य एम्पायर के कई सारी प्रोविंसेस ने अपने आप को इंडिपेंडेंट डिक्लेयर करना शुरू कर दिया। ऐसे ही दो बड़ी प्रोविंसेस थी कलिंग और सातवाहन।

आप यहां पर मैप में सातवाहन आज की लोकेशन देख सकते हैं। ये लोग डेक्कन एरिया में रूल क्या करते थे। तो यहां पर सबसे पहले हमें यह जानने की जरूरत है कि डेक्कन किस एरिया को कहा जाता है। इसके लिए हम लोग मैप की मदद लेंगे। वेस्टर्न घाट इसकी वेस्टर्न बाउंड्री फॉर्म करते हैं और इसकी ईस्टर्न बाउंड्री है ईस्टर्न घाट। तो हम कह सकते हैं कि बिंदिया हिल्स, वेस्टर्न घाट और ईस्टर्न घाट मिलाकर जिस ट्रायंगुलर रीजन को फॉर्म करते हैं, उसे डेक्कन एरिया कहा जाता है। यहां पर आप नर्मदा रिवर की लोकेशन को देख सकते हैं। कहा जा सकता है कि नर्मदा रिवर भी डेक्कन रीजन की नॉर्दर्न बाउंड्री फॉर्म करती है। तो अब हम लोग डेक्कन रीजन की लोकेशन को अच्छे से समझ चुके हैं और यही वो डेक्कन रीजन है जहां पर सातवाहन आज रूल क्या करते थे।

सातवाहन आज को आंध्राज भी कहा जाता है और आशुका ने भी अपने 13th रॉक एडिट में आंध्राज का जिक्र किया है। अशोक ने अपनी इनस्क्रिप्शन में इन्हें बॉर्डर पीपल कहकर मेंशन किया है और बताया है कि यह भी अब धम्मा फॉलो करने लग गए हैं। पर शुरुआती दौर में सातवाहन आज पूरे डेक्कन में नहीं हुआ करते थे। यह लोग अपर गोदावरी वैली में रूल क्या करते थे और ऐसा पता चलता है असली कोइंस और इनस्क्रिप्शन से। इनफैक्ट ऋग्वेद के अटरिया ब्राह्मण में कहा गया है कि आंध्राज पहले नॉर्थ इंडिया के यमुना बैंक के आसपास रहा करते थे, लेकिन यह लोग माइग्रेट करके साउथ इंडिया में चले गए थे। तो ये एक इनफॉरमेशन है जो हमें ऋग्वेद से मिलती है। इसके अलावा हमने देखा कि असोकन इनस्क्रिप्शन से भी आंध्राज के बारे में पता चलता है और तीसरी इनफॉरमेशन हमें मिलती है पुराणों से। पुराणों में भी इन्हें आंध्राज कहा गया है। इनफैक्ट यहां पर जो टर्म यूज की गई है इनके लिए, वो है आंध्र वृत्तीय। है कुछ हिस्टोरियन मानते हैं कि आंध्र वृत्तीय का मतलब है सबोर्डिनेट्स ऑफ द मौर्य, बिकॉज मौर्य सर्वेंट को वृत्तीय कहा करते थे। बट इसके अलावा ऐसे भी कुछ हिस्टोरियन हैं जिनका यह मानना है कि आंध्र वृत्तीय का मतलब है सर्वेंट ऑफ आंध्राज, यानी यह लोग आंध्र रीजन को सर्व क्या करते थे। हो सकता है कि यह लोग आंध्र रीजन के रूलर हुआ करते हों और यह लोग अपने आप को आंध्र रीजन के सेवक बताते हों।

अब अगर पूछा जाए कि कौन से ऐसे पुराण हैं जहां पर आंध्राज के बारे में कुछ डिटेल्स दी गई हैं, तो ऐसे पुराणों के नाम हैं वायु पुराण, मत्स्य पुराण और ब्रह्मांड पुराण। वायु पुराण में कहा गया है कि आंध्राज ने इस रीजन में अराउंड 300 सालों तक रूल किया। इसके अलावा मत्स्य पुराण और ब्रह्मांड पुराण में यह कहा गया है कि इन्होंने 400 साल तक रोल किया। और मतभेद सिर्फ नंबर ऑफ इयर्स को लेकर नहीं है। सातवाहन आज के कितने राजा हुए, इसके बारे में भी वायु पुराण, मत्स्य पुराण और ब्रह्मांड पुराण में अलग-अलग बातें कही गई हैं। बट हिस्टोरियन के बीच में एक बात पर जनरल कंसेंसस है और वो ये कि सातवाहन आज मौर्यांस के सबोर्डिनेट हुआ करते थे, जो कि इनिशियली आंध्र रीजन को गवन करते थे। बट इनका रूल कब शुरू हुआ, इसके बारे में कोई भी कंक्रीट डिटेल नहीं है। कुछ हिस्टोरियन कह सकते हैं कि इनका रूल 271 ई. के आसपास शुरू हुआ, कुछ मानते हैं कि इनका रूल 30 ई. के आसपास शुरू हुआ और इनके रूल की जो एंड डेट है, उसको 220 एड माना जाता है। कहने का मतलब इन लोगों ने 250 से 450 सालों तक डेक्कन रीजन में रूल किया होगा।

शुरुआत में ये लोग आंध्र रीजन को गवन कर रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे ये लोग अपर डेक्कन रीजन की तरफ शिफ्ट हो गए और जब मौर्य एम्पायर वीक हुआ, तो सातवाहन ने अपने आप को इंडिपेंडेंट डिक्लेयर कर दिया और अपनी कैपिटल फॉर्म की प्रतिष्ठान में, जिसे पठान भी कहा जाता है। मौर्य के बाद गंजेटिक वैली में शुंगों का रूल शुरू हुआ और उनके बाद आए कण्व। कहा जाता है कि सातवाहन ने फर्स्ट सेंचुरी ई. में कण्वों को डिफीट भी किया था और यह इनफॉरमेशन मिलती है हमें। सातवाहन आज के अगले एरिया और सेंट्रल इंडिया के स्मॉल पार्ट को ओकेपाई कर लिया था। बट यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि ग्रेटेस्ट कंपीटीटर्स कण्व या फिर शुंग नहीं थे, बल्कि शक थे, जिन्होंने अपर डेक्कन और वेस्टर्न इंडिया में अपनी पावर को एस्टेब्लिश किया था। और एक वो समय आया जब शक ने सातवाहन आज को उनकी जगह से हटाकर महाराष्ट्र और वेस्टर्न इंडिया पर अपना पूरा कंट्रोल स्थापित कर लिया था। सकस के इन अटैक्स की वजह से सातवाहन आज को अपर डेक्कन रीजन को छोड़कर जाना पड़ा था। बट बाद में ग्रेटेस्ट सातवाहन रूलर गौतमीपुत्र शातकर्णी ने शक रूलर को डिफीट किया और अपनी लॉस्ट टेरिटरीज को रीगेन किया। इस चीज को हम लोग आगे और डिटेल में कवर करने वाले हैं।

बट अभी के लिए मैं आपको एक छोटी सी मैथ कैलकुलेशन करने के लिए कहूंगा। आप बताओ कि एक डायनेस्टी जिसने 450 इयर्स तक रोल किया हो, इन टोटल इस डायनेस्टी में कितने राजाओं ने रूल क्या होगा? तो अगर आप यह हिसाब लगाओ तो यह तो तय है कि अराउंड 25 से 30 राजाओं ने यहां पर रूल क्या होगा। अगर आप ऑनलाइन एवरेज एक राजा के रूल को 15 साल के आसपास भी मान लो, तब भी इस डायनेस्टी के राउंड 25 से 30 राजाओं ने रूल क्या होगा। बट यूपीएससी एस्पायरेंट्स के लिए अच्छी बात यह है कि सातवाहन आज के सिर्फ सात ही ऐसे राजा हैं जिनके बारे में हमें पढ़ने की जरूरत है, क्योंकि उन्हीं के बारे में हिस्टोरिकल डिटेल्स अवेलेबल हैं। इनमें पहले हैं सुमुख, जिन्हें सातवाहन डायनेस्टी का फाउंडर माना जाता है। दूसरे हैं कान्हा। तीसरे श्री शातकर्णी। इनके बाद 100 फेर तक किसी भी रूलर की हमारे पास कोई भी इनफॉरमेशन अवेलेबल नहीं है। और फिर आते हैं 17th रूलर जिनका नाम है हाल। और हाल के बाद फिर से कई सारी जेनरेशन की डिटेल्स मिसिंग हैं। और फिर सीधे हमें हिस्टोरिकल डिटेल्स मिलती हैं गौतमीपुत्र शातकर्णी की और उनके सक्सेसर वशिष्ठ पुत्र पुलियामी की, जिन्हें हम लोग वशिष्ठ पुत्र शातकर्णी भी कहते हैं। इन दोनों रुलर्स के बाद इनके सक्सेस की डिटेल्स अवेलेबल नहीं है। और ऐसा माना जाता है कि जो लास्ट ग्रेड है वो और इनके पास कुछ और रुलर्स हुए और अंत में 220 एड में सातवाहन रूल एंड हो गया।

सातवाहन आज वाकई यूपीएससी एस्पायरेंट्स फ्रेंडली है। एक तो इनके इतने सारे रुलर्स में से सिर्फ सात ही ऐसे रुलर्स हैं जिनके बारे में हमारे पास इनफॉरमेशन अवेलेबल है। इनमें से भी तीन रूलर्स ऐसे हैं जिनका नाम शातकर्णी है। थर्ड रूलर श्री शातकर्णी, जिन्हें फर्स्ट ग्रेट रूलर ऑफ सातवाहन माना जाता है। उनके बाद गौतमीपुत्र शातकर्णी, जिन्हें सातवाहन डायनेस्टी का ग्रेटर रूलर माना जाता है। और अंत में यज्ञ श्री शातकर्णी, जिन्हें सातवाहन डायनेस्टी का लास्ट ग्रेट रूलर माना जाता है। तो ये तो हो गया एक ओवरव्यू। चलिए अब इन सभी रुलर्स की डिटेल्स को समझते हैं।

शुरुआत करते हैं सुमुख से। सुमुख के बारे में आपको तीन बातें पता होनी चाहिए। पहले, सातवाहन डायनेस्टी के फाउंडर थे। दूसरी, यह ब्राह्मणिज्म को फॉलो करते थे, लेकिन इसके बावजूद इन्होंने बाकी धर्मों के प्रति टैलेंट रिलीज को अपनाया था। इनके बारे में इतनी डिटेल्स काफी हैं, जो कि हमें जानने की जरूरत है। इसके बाद दूसरे रूलर कान्हा के बारे में यह कहा जाता है कि इन्होंने सातवाहन आज की टेरिटरी को वेस्ट में नासिक तक एक्सटेंड किया था। और थर्ड रूलर हैं श्री शातकर्णी, जिन्हें फर्स्ट ग्रेट रूलर ऑफ सातवाहन माना जाता है। इन्होंने सातवाहन आज की टेरिटरी को काफी एक्सटेंड किया। कहा जाता है कि इन्होंने सातवाहन आज की टेरिटरी को वेस्ट में मालवा और विराट तक एक्सटेंड किया। बेरार वही रीजन है जिसे हम लोग आज की डेट में विदर्भ के नाम से जानते हैं। ये महाराष्ट्र के ईस्टर्न रीजन में है। इन रीजंस को ओकेपाई करने के बाद इन्होंने अश्वमेध यज्ञ को परफॉर्म किया। इनके द्वारा किए गए टेरिटोरियल एक्सपेंशन को हम लोग नाना घाट डिस्क्रिप्शन में देख सकते हैं। नाना घाट बेसिकली वेस्टर्न घाट का एक पास है, जहां पर यह इनस्क्रिप्शन दक्षिणपथा का मतलब होता है लॉर्ड ऑफ दक्षिणपथ। इसके अलावा नाना घाट डिस्क्रिप्शन में उन रीजंस को भी मेंशन किया गया है, जो कि श्री शातकर्णी के टेरिटोरियल रीजन का पार्ट हुआ करते थे या जिन्हें एक्वायर कर लिया गया था। ये रीजंस हैं आकार यानी अपर नर्मदा वैली, अनूप यानी लोअर नर्मदा वैली, अनारथा यानी विदर्भ रीजन और जैसा कि हमने कहा कि विरार इसे अलसो पार्ट ऑफ विदर्भ रीजन। इसके अलावा यहां पर कुछ और रीजंस भी मेंशन किए गए हैं, जैसे कि अपरान्ता यानी अपर कोकण कोस्ट। इसके अलावा सौराष्ट्र यानी गुजरात का रीजन, कच्छ यानी गुजरात का कच्छ रीजन, मालवा और राजस्थान का रीजन। एरिया मारु। कहा जाता है कि इन सब रीजंस पर श्री शातकर्णी ने सातवाहन आज का रूल एस्टेब्लिश किया था और इसीलिए इन्हें सातवाहन के पहले ग्रेट रूलर के रूप में देखा जाता है। अगर हम इनके पूरे कैरियर को समराइज करें, तो हम कह सकते हैं कि श्री शातकर्णी जी ने अपने रीजन को काफी ज्यादा एक्सटेंड करते हुए वेस्टर्न मालवा और विरार को सातवाहन एम्पायर का पार्ट बना लिया था। इसके बाद इन्होंने अश्वमेध यज्ञ को परफॉर्म किया और इनकी वाइफ नागानिका ने नाना घाट इनस्क्रिप्शंस को इनस्क्राइब कराया था।

इनके बाद के काफी सारे रुलर्स की डिटेल्स हिस्टोरियन नहीं जान पाए हैं, क्योंकि उनसे रिलेटेड ना तो कोई इनस्क्रिप्शंस है, ना कोई कोइंस और ना ही कोई लिटरेरी सोर्स अवेलेबल है। इसीलिए हमें डायरेक्टली आना पड़ रहा है 17 सातवाहन रोलर हाल की इनफॉरमेशन पर। और इनके बारे में भी हमें इसीलिए पता है, क्योंकि इन्होंने एक बुक कंपोज की थी जिसका नाम है गाथा सप्तशती, जिसे सत्य साई भी कहा जाता है। इस बुक को हाल ने कंपोज किया था, जिसमें इन्होंने पैसाची प्रकृति लैंग्वेज का यूज करते हुए 700 इरॉटिक वर्सेस लिखे हुए थे। इनका रूल 20 एड से 24 एड तक चला।

इनके बाद जिस रूलर के बारे में हमें इनफॉरमेशन मिलती है, वो है सातवाहन डायनेस्टी के ग्रेटेस्ट रूलर गौतमीपुत्र शातकर्णी। इन्होंने 106 एड से 138 एड तक रूल किया, यानी ऑलमोस्ट 24 इयर्स तक इन्होंने रोल किया और इन्हें सातवाहन डायनेस्टी का ग्रेटर रूलर माना जाता है। इन्होंने अपने रूल के दौरान नापान को डिफीट किया था। नापान एक वेस्टर्न क्षत्रप था और नासिक रीजन के आसपास रूल क्या करता था। और जैसा कि हमने कहा कि यह एक वेस्टर्न क्षत्रप था, इसीलिए आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह बेसिकली एक शक रूलर था और इनके अगेंस्ट फाइट में गौतमीपुत्र शातकर्णी ने इन्हें खत्म कर दिया। और ना सिर्फ नापानो को खत्म किया, बल्कि इनकी पूरी लाइनेज को खत्म कर दिया, यानी इनकी पूरी ब्लडलाइन को खत्म कर दिया था। गौतमीपुत्र शातकर्णी की इस जीत को एक रिमार्केबल विक्ट्री के रूप में देखा जाता है।

अब आप पूछोगे कि यह कहां से पता चलता है कि गौतमीपुत्र शातकर्णी ने नापान को हराया? तो बात यह है कि गौतमीपुत्र शातकर्णी की यह जीत इस बात से प्रकट होती है कि नासिक के रीजन के अराउंड 8000 से भी ज्यादा ऐसे सिल्वर कोइंस मिले हैं, जहां पर नहापाना की मोटिव के ऊपर गौतमीपुत्र शातकर्णी ने अपने थप्पड़ लगवाए हैं। यानी नापान की कोइंस को गौतमीपुत्र शातकर्णी द्वारा स्ट्राइक डाउन किया गया था। और यह तो तभी हो सकता है जब एक राजा दूसरे राजा को हराकर उसके एरिया में रूल कर रहा हो।

अब इसके अलावा अगर पूछा जाए कि गौतमीपुत्र शातकर्णी ने अपने रूल के दौरान और किन-किन राजाओं को डिफीट किया, तो यहां पर नाम आएंगे नासिक रूलर नहापाना, मालवा रूलर और काठियावाड़ रूलर। और ये तीनों की तीनों रूलर्स शक रूलर थे। चलिए अब बात करते हैं गौतमीपुत्र शातकर्णी के टेरिटोरियल एक्सपेंशन की। तो इनकी टेरिटोरियल एक्सपेंशन से रिलेटेड डिटेल्स हमें मिलती है नासिक इनस्क्रिप्शन पर, जिसे गौतमीपुत्र शातकर्णी की डेथ के बाद उनकी मदर गौतमी बालश्री ने स्क्राइब कराया था। यहां पर नासिक इनस्क्रिप्शन में कहा गया है कि गौतमीपुत्र शातकर्णी ने पूरे डेक्कन रीजन को कैप्चर कर लिया है और अपने एम्पायर को एक्सटेंड किया है मालवा और सौराष्ट्र। इसके अलावा अपनी टेरिटरी की सदन बाउंड्री को इन्होंने रिवर कृष्णा तक एक्सटेंड कर लिया था। गौतमीपुत्र शातकर्णी के बारे में यह भी कहा गया है कि इन्होंने ब्रह्मीनिज्म को फॉलो किया था और अपने आप को ओनली ब्राह्मण बताया था। और इसके बावजूद यह दूसरे रीजंस के प्रति टोलरेंट थे, जिसके चलते इन्होंने बुद्धिस्ट को भी काफी सारी डोनेशन दी। और यह बात नासिक इनस्क्रिप्शन में भी मेंशंड है। तो हमने देखा कि ग्रेटेस्ट रूलर गौतमीपुत्र शातकर्णी ने पूरे डेक्कन और मालवा रीजन को कॉन्सर्ट किया था और इंसुलेटेड डिटेल्स हमें नासिक इनस्क्रिप्शन में देखने को मिलती है।

अब बात करते हैं वशिष्ठ पुत्र पुलियामी की, जिन्होंने 138 से 154 एड तक रूल किया। यही वो समय था जब शक रूलर रुद्रदामन फर्स्ट भी रूल क्या करते थे। और ऐसा माना जाता है कि रुद्रदामन फर्स्ट ने वशिष्ठ पुत्र पुलियामी को दो बार डिफीट किया, लेकिन उन्हें पूरी तरह से डिस्ट्रॉय नहीं किया था, क्योंकि वशिष्ठ पुत्र पुलियामी और रुद्रदामन फर्स्ट के बीच में एक मैट्रिमोनियल अलायंस था। रुद्रदामन फर्स्ट के बारे में हम लोग पहले भी पढ़ चुके हैं। अगर आप लोग एंशिएंट हिस्ट्री की प्लेलिस्ट को फॉलो कर रहे हैं, तो आप लोग रुद्रदामन फर्स्ट के बारे में जानते होंगे, क्योंकि हम इनके बारे में ऑलरेडी काफी सारी डिटेल्स कवर कर चुके हैं। रुद्रदामन फर्स्ट काठियावाड़ के शक रूलर थे।

चलिए एक बार देखते हैं कि वशिष्ठ पुत्र पुलियामी और रुद्रदामन के बीच में ऐसा कौन सा रिलेशन था, जिसकी वजह से रुद्रदामन इनको बार-बार हारने के बाद भी पूरी तरह से डिस्ट्रॉय नहीं कर रहे थे? तो बात यह है कि वशिष्ठ पुत्र पुलियामी की जो वाइफ थी, वो रुद्रदामन की बेटी थी। यानी इनका जो रिलेशन था, वो था ससुर जी और दामाद का। रुद्रदामन ने जूनागढ़ इनस्क्रिप्शन में मेंशन भी किया है कि वशिष्ठ पुत्र पुलियामी को वह दो बार हरा चुके हैं, बट क्या करें, उनको डिस्ट्रॉय नहीं कर सकते। एक्चुअली एक और भी इनस्क्रिप्शन है, जहां से हमें यह बात फिर से पता चलती है कि रुद्रदामन वशिष्ठ पुत्र पुलियामी के फादर इन लॉ थे। यह इनस्क्रिप्शन वशिष्ठ पुत्र पुलियामी की वाइफ ने कनेरी की केव्स में सब्सक्राइब कराई थी। कनेरी केव्स महाराष्ट्र में हैं। वशिष्ठ पुत्र पुलियामी के बारे में एक और इंपॉर्टेंट इनफॉरमेशन है और वो ये कि इन्होंने अमरावती स्तूप को रिपेयर कराया था, जो कि काफी पुराना हो चुका था। और साथ ही साथ इन्होंने सातवाहन एम्पायर की टेरिटोरियल एरिया को वापस से कृष्णा रिवर तक एक्सटेंड किया था। इसके अलावा इन्होंने कुछ कोइंस भी इशू किए थे, जिन पर शिप का मोटिव था। इससे नवल पावर और मैरिटाइम ट्रेड की इनफॉरमेशन रिवील होती है। तो हमने देखा कि वशिष्ठ पुत्र पुलियामी ने सातवाहन आज की पावर को कृष्णा रिवर की मौत तक एक्सटेंड किया था और इन्होंने जो कोइंस इशू किए, उनसे उनकी पावर का पता चलता है।

अब बात करते हैं सातवाहन आज की लास्ट ग्रेट रूलर यज्ञ श्री शातकर्णी के बारे में, जिन्होंने 165 एड से 194 एड तक रोल किया। इन्होंने अपने रूल के दौरान सातवाहन आज की टेरिटोरियल एरिया में मालवा को ऐड किया। आपने देखा था कि गौतमीपुत्र शातकर्णी के रूल के दौरान सातवाहन आज ने मालवा को भी कॉंकर कर लिया था, बट वापस से शक रूलर्स ने उसे एक्वायर कर लिया था। तो यहां पर यज्ञ श्री शातकर्णी ने मालवा को शक रूलर से रिकवर किया था।

तो ये थी डिटेल सातवाहन की। इंडियन हिस्ट्री, इंडियन पॉलिटी और इंडियन इकोनॉमी को डिटेल में कवर करने के लिए इसको फॉलो कीजिए। थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग एंड सपोर्टिंग बुक्स दवा।