Transcription
उस वक्त मैं अपनी पिज़्ज़ा शॉप चलाता था। एक रात करीब 12:00 बजे दुकान बंद करने ही वाला था कि अचानक एक ऑर्डर आ गया। कस्टमर ने कहा डिलीवरी चाहिए। बी अपार्टमेंट रूम 2001 में नेविगेशन के सहारे मैं उस पुराने अपार्टमेंट पहुंचा।
जगह बहुत पुरानी थी। टूटी दीवारें, अंधेरी सीढ़ियां, खराब लाइट्स। मैंने मोबाइल का टॉर्च ऑन किया और ऊपर चढ़ने लगा। आखिरकार 200 नंबर का दरवाजा मिला। नॉक किया। अंदर से आवाज आई। आ रही हूं मगर दरवाजा नहीं खुला। सोचा शायद पैसे ढूंढ रही होगी। पर वह तो ऑनलाइन पेमेंट था। दोबारा नॉक किया, डोर बेल दबाई फिर भी कोई जवाब नहीं। अंदर से हल्की रोशनी और बातों की आवाजें आ रही थी। मतलब कोई था फिर दरवाजा क्यों नहीं खोला?
मैंने कस्टमर को कॉल किया। वो बोला भाई मैं तो ऑफिस में हूं। पिज़्ज़ा घर वालों के लिए था। मैंने कहा पर दरवाजा कोई खोल नहीं रहा। वो बोला आप शायद गलत जगह पहुंच गए। हम बी ब्लॉक में रहते हैं। वो बी दो ब्लॉक तो 5 साल पहले बंद हो चुका है। मैं सुन रह गया। क्योंकि जिस घर से अभी आवाजें आ रही थी वो तो खाली था। मैं डर के मारे नीचे भागा। नीचे पहुंचा तो पूरी बिल्डिंग अंधेरे में डूबी थी। जब आया था तब लाइट्स जल रही थी।
फिर असली बी ब्लॉक पहुंचा। 200 का दरवाजा एक बुजुर्ग औरत ने खोला। डिलीवरी पूरी हुई। लेकिन मेरा स्कूटर अब भी उसी भी दो बिल्डिंग के पास था। वहां लौटा तो सन्नाटा था। पर सवाल आज भी वही। अभी थोड़ी देर पहले जो हंसी की आवाजें थी, वो किसकी?