Transcription
च हमदुलिल्लाह रल आलमीन ला सलाम अला रसू करीम। न आज हम सबसे पहले सरल फलक लेंगे और कोशिश करते हैं कि सरल फलक की मुख्तसर तफसीर हो जाए और सरलास की भी। तो तिलावत से शुरू करते हैं। इशाला सर फलक की तिलावत पहले करते हैं, उसके बाद फ तर्जुमा तफसीर। [संगीत]
अजु बिल्ला मिन शता रम। बिस्मिल्लाह रहमान रहीम। श मा श न इ वब व शफ फ व हान इ हसद। जकला खैर। सूरतुल फलक की जो है आपने तिलावत सुनी थी। अभी इसका एक बार लजीज तर्जुमा ले लेते हैं। अगर किताब आपके पास है, मैं चाहता हूं साथ साथ आप किताब से भी देखें जो जो भी हम पढ़ेंगे। बिस्मिल्लाह रहमान रहीम। शुरू करते हैं। शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से जो बड़ा ही मेहरबान रहमान और रहीम है। उसके बाद कुल कुल का मतलब कह दीजिए। अजु में पनाह में आता हूं। बरबिल फलक सुबह के रब की। मिन शरी हर उस चीज के शर से। मा खलक जो उसने पैदा किया। व और व मन शरस और अंधेरी रात के शर से। इ वकब जब वह छा जाए। जब वो रात आ जाए छा जाए। वमन शरत और फके मारने वालियों के शर से। फिल कद गिरो में गिरा जो होता है उसकी जमा गिरो में। और हसद करने वाले के शर से जब वह हसद करे। अच्छा सूरत नास और सूरतुल फलक इसका आपको एक हमने नाम बताया था। माते माशाला। मान का मतलब क्या है? दो पना लेने वाली चीजें। ठीक है तो व इशारा है दोनों सरतो की तरफ। और जिस तरह हदीस में आता है कि अल्लाह के रसूल सल्ला सलम ने फरमाया कि व यह वो दो बेहतरीन सूरत जिससे बंदा अपने रब से पनाह मांग सकता है। अपने रब की पनाह में आ सकता है। अच्छा सूरत नास की तो तफसीर हो गई थी और उसमें हमने आपको बताया था कि किस तरह बंदा अल्लाह ताला की रब बिनास मलिक नास इला नास अल्लाह की मुख्तलिफ सिफात का वसीला लेता है और कौन से शर से पनाह मांग रहा होता है। वसवसे के शर से। सूरतुल नास और सूरतुल फलक में अगर आप कंपेरिजन करेंगे ना आपको एक बड़ा मोटा फर्क नजर आएगा। वो क्या है कि सूरत नास में एक ही चीज है जिससे आप पनाह मांग रहे होते हैं। सरत नास में कौन सी चीज थी? वसवसे से। लेकिन आप जब अल्लाह ताला की सिफत का वसीला ले रहे होते हैं तो कितनी सिफात का लेते हैं? रब्ब नास मलिक नास और इलाही नास। तीन। सरल फलक में आप एक ही सिफत का वसीला लेते हैं और वह कौन सी है? रब्बिल फलक। एक सिफत का वसीला लेते हैं लेकिन उसके बाद आप अलग अलग तरह के शर का जिक्र करते हैं। म एक स और बाकी सारे शर का जिक्र करते हैं। अच्छा इसका तर्जुमा भी आपके सामने रखा। सबसे पहले कुलर फलक। कुल यह अल्लाह ताला नबी सलम को डर देते हैं कि आप कह दीजिए। लोगों से। में पनाह में आता हूं। बरल फलक। अच्छा मैं चाहता हूं सब अपनी बुक खोले और देखें। फलक का तर्जुमा क्या लिखा हुआ है। स्क्रीन पर देखें। तर्जुमा कुछ और आ रहा है। फलक का जो लजीज माना वो क्या है? फाड़ना। किसी चीज को फाड़ना। अल्लाह ताला ने कुराने मजीद में कहा। फल इबा सीड जो होता है ना प्लांट्स का जो सीड होता है। घटली जो होती है उसको फाड़ने वाला। तो पौधा जो होता है व अपनी घटली से अपने दाने से फट कर निकलता है। तो अल्लाह ताला कहता है। तो असल में फलक का जो लजीज माना वो फाड़ना। लेकिन आप अक्सर देखेंगे तर्जुमा में क्या लिखा होता है? सुबह के रब की। इसकी कोई मुनासबत या कोई बता सकता है कि ऐसा क्यों होता है? हां माशाल्लाह। यह दोनों सूरत जो है फलक और नास जो है ये आपको शर से बचाने के लिए अपने ऊपर दम करने के लिए। तो आमतौर पर रात जो होती है उसमें क्या होता है कि रात का एक अंधेरा होता है और जब सुबह निकलती है ना तो सुबह जो है वो रात को फाड़ कर निकलती है। हत्ता कि हम लोगों ने तो कभी सूरज को उस तरह निकलते हुए नहीं देखा। जो सूरज की रोशनी आती है ना फजर के टाइम पर वो दो तरह की रोशनी होती है। सबसे पहले एक पतली सी रोशनी निकलती है और सीधी आसमान में जाती है और अभी तक किसी को जो है ना वो धूप नजर नहीं आ रही होती। यह होती है वर्टिकल सीधा ऊपर जाती है और खत्म हो जाती है। थोड़ी देर के लिए आती है फिर खत्म हो जाती है। जैसे ये खत्म होती है उसके बाद ऐसे हॉरिजॉन्टल टाइप में सूरज की रोशनी जो है निकलना शुरू होती है। इसके बाद तो यह जो रोशनी होती है ना यह रात के अंधेरे को फाड़ कर निकलती है। तो इसलिए आप इसके अक्सर तर्जुमे में देखेंगे रब्बिल फलक के सुबह का रब क्यों है कि वो जो है सुबह जो होती है रोशनी वो रात को फाड़ कर निकल रही होती है। और अक्सर मुफस्सिर ने इस रब्बिल फलक की इस सूरत के साथ जो मुनासिब दीया ना वो यह कि आमतौर पे जादू हो जाना। बंदा बीमार हो जाता है। परेशान हो जाता है। हसद का शर होता है। तरह-तरह की बीमारी होती है। मुसीबत होती है। और अंधेरा जो है यह सारी चीजें जो है ना एक यानी शर की तरफ निस्बत दे रहा है। बंदा बीमार है एक नेगेटिव चीज है। परेशान है एक नेगेटिव चीज है। जादू हो गया उस परे एक नेगेटिव चीज है। यानी वो एक मुसीबत में है। लेकिन जो रोशनी है जो दिन की रोशनी होती है यह एक उम्मीद देती है कि अब वो अंधेरा जा रहा है जिंदगी से। अब वो अंधेरा खत्म हो रहा है। तो मुसन कहते हैं जो रब्बल फलक है इसकी मुनासिब इस चीज से है कि जो बंदा की जिंदगी में मायूसी आ चुकी है। डिप्रेशन में जा चुका है। यह जो रोशनी है यह उसकी जिंदगी में उम्मीद देती है। उसको वह सारे डिप्रेशन के बाद एंजाइटी के बाद परेशानियों के बाद यह उम्मीद है जो फाड़ है और उस अंधेरे को खत्म कर देती है। तो यह है कुलर फलक के मैं सुबह के रब की पना आता हूं।
अच्छा उसके बाद है मिन श मा खलक। आपने सबसे पहले अल्लाह की एक सिफत का वसीला लिया ना रबल फलक। अब आप अल्लाह से एक तरह से दुआ मांगना शुरू करते हैं कि सबसे पहले मैं किस चीज से अपने आप को चाहता हूं। अल्ला तू मुझे बचा ले। वो है मिन शर मा खलक के हर उस चीज के शर से जो अल्लाह ने पैदा किया। अब मखलूक में कौन-कौन आता है? अल्लाह ने क्या क्या चीजें पैदा की हुई है? जी इंसान है, हैवान है, और जिन्नात है और बस नबतात हो गए। बस ये मखलूक है। समुंदरी मखलूक है, आसमानी मखलूक है जिनका पता आसमानी मखलूक चले कुछ को तो पता में कौन-कौन सी है? जी फरिश्ते हो गए। ठीक है जो ऊपर होते हैं। इसी तरह जो अल्लाह की मखलूक है। प्लेनेट वगैरह है। सार सब अल्लाह की मखलूक है। तो बंदा कहता है कि मिन शमा खलक हर उस चीज के शर से जो उसने पैदा किया। यानी इन चीजों में चाहे व शैतान हो इंसान हो जिस तरह देख रहे हैं जानवर हो कुछ भी हो उनके अंदर जो जो शर वाला पार्ट है अल्लाह मुझे उससे बचा ले। अच्छा शैतान में खैर है या शर है? शर है। इंसान में खैर है या शर है? दोनों है। जिन्नात में खैर है या शर है? दोनों है। जानवरों में क्या हो गया? मिक्स हो गए। खैर है शर है दोनों ही है उसमें। तो आप यह नहीं कहते कि अल्लाह मुझे उस शख्स से बचा ले। नहीं उसके उस चीज के अंदर शर वाला पार्ट है मुझे उससे बचा ले। अब एक इंसान जो है अगर उसम खैर है तो आप उ रेडी महफूज है। आपको जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वह शर कुछ आपके साथ करता है तो फिर आप अल्लाह से पनाह मांग रहे होते। मन श माल मुझ शर से बचा ले। तो इसमें हर चीज शामिल है। किसी किस्म का भी शर हो किसी किस्म का भी नुकसान हो चाहे वह मखलूक में से कोई भी आपके साथ करे। हवान हो जानवर हो इंसान हो। हत्ता कि मिसाल तेज हवाए भी जब चलती है तो उनमें भी शर होता है। वो आपको नुकसान दे सकती है। आप तरह तरह का नुकसान हो सकता है। आप उससे भी अल्लाह की पनाह मांग रहे होते हैं। बल्कि तेज हवाओं के मौके पर तो खास दुआ भी आती है कि बंदा अल्लाह से दुआ मांगता है। अल्ला मैं दुआ करता हूं कि मैं तुझसे उस चीज का सवाल करता हूं कि इस हवा में जो खैर तूने भेजी वो मुझे मिले और जो शर है उससे मुझे बचा ले। तो हर चीज में खैर भी है शर भी है। हम इन जनरल यय आयत पढ़ते हुए हर चीज के शर से अल्लाह की प्रोटेक्शन मांग रहे होते हैं। अल्लाह की हिमायत मांग रहे होते हैं। मिन शरी मा खलक हर चीज। उसके बाद अगली आत कौन सी है? न च। उस आयत से पहले यह स्लाइड आप देख रहे हैं। च ऑनलाइन वालो को तो क्योंकि पीडीएफ सब कुछ नजर आ रहा है। आप लोगन लेते देखि मलूका जो है ना व तीन तरह की होती है। इसको नोट करले य थोड़ी इमी तफसील है इसमें। एक खैर के लिहाज से और कुछ है शर के लिहाज से। खैर के हा से कौन कन सी मखलूक है जिनम खैर ही खैर है? माशाल्लाह सही जवाब दिया। कहां से? फरिश्ते और जिनम खैर ही खैर है। अंबिया हो गए। माशाल्लाह अल्लाह के रसूल हो गए। तो फरिश्ते और नबी या रसूल जो है इनमें सिर्फ खैर है। इनम कोई शर नहीं है। तो यह मखलूक की पहली कैटेगरी है। पहली किस्म है। अच्छा दूसरी किस्म व है जिसमें सिर्फ शर है। कौन है ये कौन? शैतान में कोई खैर है? वह आपका नुकसान ही हमेशा करना चाहता है। तो यह दूसरी कैटेगरी है। शर के तबार से। तीसरे कैटेगरी कौन बता सकता है मुझे? हा मा सही बोला है। क्या बोला? आवाज नहीं आई लेकिन हा जिसम दोनों है। मिक्स खैर भी है शर भी है। उसमें कौन कौन है? इंसान है, जि मखलूक। इनके अलावा बाकी सारी आ मखलूक जो है उनमें खैर भी है शर भी है। तो ये तीन तरह की मखलूक है। आप जब कहते तो जहां जहां भी शर है आप उससे अल्लाह की पनाह मांग रहे होते हैं। फरिश्तों में कोई शर है? नहीं है। तो आपको वहां से पनाह मांगने की जरूरत ही नहीं है। नबियों में कोई जरूरत नहीं है। बल्कि वहां से खैर की आप जो है तलब कर रहे होते हैं। हां लेकिन शैतान उसमें है। इंसानों में है। जानवरों में है। जिन्नात में है। तो आप यह सब चीज की शर से पनाह मांग रहे होते हैं। अच्छा अब जो अगली आयत है ना यहां पर एक थोड़ा सा चेंज आया। अगली आयत कौन सी थी? ये कौन सी जो दूसरी आय थी? मिन श मा खलक। इसमें आपने आम शर हर चीज अल्लाह से दुआ मांग द कि जो जिस तरह के भी शर मुझ उससे बचा ले। अब जो अगली आयात है ना तीन आयात इनमें आप खास स्पेसिफिक चीजों का जिक्र करते अल्लाह के सामने। अल्लाह मुझे इस चीज से तू खास बचा ले। तो उसम पहली चीज कौन सी है? ये न अंधेरे के शर से जब वो छा जाए। अच्छा कौन बता सकता है अंधेरे के शर से हम क्यों पनाह मांगते हैं? रात का चांद निकल जाना उसमें कोई शर है? जी फरहान ने माशाल्लाह सही जवाब दिया। क्या दिया फरहान? फरहान नहीं रेहान जी। हां शयान जो है यह कब निकलते हैं? सूरज गुरूब होते ही। शयानो हो रहा हो तो अपने बच्चों को अपने पास समेट लो। अपने जानवर को भी अपने पास समेट लो। क्यों? क्योंकि इस वक्त शती जो है वो निकल जाते हैं। फैल जाते हैं और किसी बच्चे को अकेला देखते हैं तो उनको उसको डराते हैं। तो इसलिए अंधेरे के शर से। और अंधेरे में कौन-कौन से शर होते हैं? हां शयानो औरों की ड्यूटी कब शुरू होती है? रात में शुरू होती है ना दिन में तो चोर ड्यूटी नहीं करते। शायद आराम कर रहे होते हैं। तो इसी तरह चोरी हो गया। रात का नुकसान और कत्ल करने वालों को भी ड्यूटी कब शुरू होती है? रात में होती है। डाका कोई धूप में कोशिश करते हैं ना ही डाले। शोर डाका डालने वाले जो होते हैं व क्या होता है कि रात में अंधेरे में करना है। तो अंधेरे में जिस जिस तरह के भी शर है आप उससे पना मांग रहे होते हैं कि चाहे वह मेरे रूहानी ईमान को नुकसान पहुंचाए। शर की शक्ल में। गुनाह की शक्ल में। हत्ता कि गुनाह भी अक्सर कब होते हैं? रात के अंधेरे में होते हैं। दिन की रोशनी में नहीं होते। तो आप चीज से पनाह मांग रहे होते कि अंधेरे से जब वो छा जाए और उसमें अ रात के अंधेरे में जिस जिस तरह के भी शर है। रात में शर नहीं है। रात में अच्छे काम भी होते हैं। लेकिन जो जो उसमें शर वाला पार्ट है उससे आप पनाह मांगते हैं। तो अभी आपने जो चीजें बता द सब इसमें आती है। चोरी होती है, कतल होते हैं, तरह तरह के नुकसा होते हैं। हत्ता कि नुकसान देने वाले जानवर कब निकलते हैं? ये लोग भी रात में निकलते हैं। तो इसीलिए हर तरह की चीज से हर तरह के नुकसान से। जादू करने वाले अर जादू कहां करते हैं? अंधेरी जगह पर करते हैं। रोशनी में नहीं करते। वो अंधेरी जगह की तलाश करते हैं। वहां पर शैतान को राजी करते हैं। उसकी इबादत करते हैं और हत्ता के जादू भी जो करते हैं वो किसी अंधेरे में जाकर करते हैं। आपको नबी सलाम के ऊपर जो जादू का वाकया बताया था उसमें क्या बताया था कि जिस चीज पर जादू किया था उसको कुए के अंदर गहराई में डीप जाकर एक पत्थर के पीछे छुपाया था। अंधेरे में। यहां तक के कितने सारे केसेस आते हैं कि जादूगर जो अपना जादू है उसको क्या करते हैं? किसी कबर को में मैयत को दफनाते हुए अंदर छुपा देते हैं। अंधेरा। तो जितने भी शर है ये अंधेरे की तरफ होते हैं। अंधेरे में होते हैं। तो हम हर तरह के शर से पनाह मांगते हैं कि अल्लाह हमें बचा ले इससे। उसके बाद अगली आयत कौन सी है? मुझे इसका तर्जुमा में सुनना चाहता हूं। कौन बता सकता है? पढ़ के तर्जुमा। किताब से पढ़ ले कोई मसला नहीं है। और चले आपने सही तमा पढ फूंके मारने वालियों के शर से। ये किसकी तरफ इशारा है? मर्द की तरफ? औरत की तरफ? औरत की तरफ। यानी मर्द के अगर जादू करेगा उससे शर की जरूरत नहीं है। उससे पनाह मांगने की जरूरत नहीं है। अच्छा इशारा किस तरफ है? फूंकने मारने वालियों के से। फूंकने मारना क्या होता है? हा ये जादूगर की तरफ इशारा है। जादू जो है फिलक आप देख रहे हैं। गिरा में जादूगर का काम यही होता है। वो गिरा बांधते हैं। गिरा बांधते हुए अपने खास कुछ कलेमा मंत्र टाइप चीज होती है पढ़ते हैं और फकते हैं। उसमें कुरान की आयात को उल्टा करके मिक्स करके कुछ और अल्फाज के साथ मिक्स करके फिर कुछ शैतानी कमात होते हैं उन चीजों के साथ मिक्स करके पढ़ते हैं और उस पर फकते हैं और गिरा बांध देते हैं। जादू को उस परे टाइट कर देते हैं। लेकिन मसला यह है। मसला नहीं समझ ये हमें जानना है कि औरतों की तरफ इशारा है तो इसके पीछे क्या हिकमत है? इसमें क्या हमें समझ आती है? औरतें ज्यादा मायल है। और एक जवाब आ एक और जवाब य आ कि जो नबी सलाम पर जादू किया था वो औरत ने किया था। लेकिन बाज यतो में आता है कि औरत ने किया था। बाज रिवाय में आता है कि मर्द ने किया था। लबी बिन आसम जो है बाज यतो में उसका नाम आता है। बाज में आता उसकी बेटियों ने उसकी बहनों ने मिलकर किया था। तो चले दूसरा जवाब भी आ गया। और भी कोई जवाब है? जी औरत कती हा वो। अच्छा चले आपने कहा माइल ज्यादा औरत होती है। आपने कहा तादाद ज्यादा है औरतो की। एक और जवाब में जानना चाह रहा हूं। चलिए माशाल्लाह। आपने थोड़ा साइकोलॉजिकल जवाब दिया। मर्द को जब किसी से बदला लेना होता व क्या करता है? व अपनी जिस्मानी ताकत दिखाता है। उसको मार पड़ी है व जाकर उसको मारता है। एक थप्पड़ के बदले 10 मुक्के मारेगा। यह मर्द की खासियत है आमतौर पर। ठीक है मर्द होते हैं कुछ कमजोर भी होते हैं। लेकिन मर्दों के हां आमतौर पर इस तरह होता है। औरतों के यहां कभी आपने सुना है कि उसने मारा उसने उसको लात मारी उठके? औरतों में क्या होता है कि जिस्मानी लिहाज से कंपेरटिवली मर्दों से कमजोरी है। तो औरतों में फिर क्या होता है? इन चीजों की तरफ जल्दी मायल हो जाती है। यह रास्ता एक नजर आता है कि जादू की तरफ जाते हैं। बाज मुफस्सिर ने ये हिकमत बयान की है कि मर्द मर्दों में जो है वो आमतौर पर जिस्मानी बदला लेकर अपना बदला पूरा कर लेते हैं। लेकिन औरतो में क्या होता है कि वो इस तरफ चले जाते हैं क्योंकि उनको पता है कि हम उसका बदला ले नहीं सकते। तो उनको ये एक रास्ता नजर आता है। बाज मुफस्सिर ने एक और इस आयत में क्या बात की है के मर्द अगर जादू करे उसका असर होता है। लेकिन औरत जो जादू करती है उसका ज्यादा खतरनाक असर होता है। क्यों? क्योंकि देखिए जादू करते हुए आपको सारे वो काम करना होते हैं। जादूगर को को जो अल्लाह को नाराज करे और किसको राजी करें? शैतान को। तो ऐसे ऐसे काम करने पड़ते हैं कि आप हैरान हो जाएंगे। बाथरूम में नाजु बिल्लाह कुरान मजीद के सफत को शहीद करके रखना फिर उसके ऊपर पेशाब करना पैखाना करना। इस तरह की चीजें मर्दों को करनी होती है। औरतें बाज औकात क्या करती हैं? उनका जादू इतना खतरनाक क्यों होता है कि वो अपने हैज के खून को भी इस्तेमाल करती हैं। उसमें मतलब एक मिसाल बाज मुफस्सिर ने दी है कि तरह-तरह की जो चीजें हैं ना उसमें। इसलिए इस आयत में जो है इशारा औरतों की तरफ है। अगरचे हम हर शर से पनाह मांग रहे होते हैं। चाहे वो मर्द जादूगर हो या औरतें जादूगर हो दोनों के शर से। लेकिन क्योंकि इसमें हिकमत य है कि बाज कात औरतों का जो जादू होता उसका नुकसान ज्यादा खतरनाक होता है। तो हम उससे पनाह मांग रहे होते हैं। र के हमें जो है अल्लाह फूंकने मारने वालियों के शर से। लेकिन इशारा किस तरफ है? जादू की तरफ इशारा है कि जो जादू करने वाला चाहे मर्द हो या औरत हो उससे बचा ले। औरतों का ज्यादा खतरनाक होता। तो जाहिर सी बात अगर मर्द का कम खतरनाक है आप उससे भी पनाह मांग रहे होते। अल्लाह से। वाज हो गई आत। तो यह दूसरा दूसरा स्पेसिफिक खास शर है जो आप अल्लाह से दुआ मांग रहे। मुझे बचा ले। पहला कौन सा था? खास खास जो आपने कौन सा था? किससे? हा अंधेरे से। दूसरा जादू से। अब तीसरा कौन सा है? जो आखरी है। न हसद करने वाले के शर से जब वह जब व क्या करें? जब वो हसद करे। हसद क्या होता है? कौन बता सकता है? जी जलन। ठीक है और और क्या होता है? हसद कौन एक्सप्लेन कर सकता है? ठीक है। एक जवाब एक और सही आ गया। एक तो जलन दूसरा क्या होता है कि उस जलन में बंदे को जलन किस वजह से हो रही होथ है कि अल्लाह ने खास नेमत उसको दे दि है। तो आप दुआ कर। आपको यह ख्वाहिश होती कि उससे छिन के मेरे पास आ जाए। माशाल्लाह यह हसद में एक और मिसाल है। एक हसद की किस्म ये होती है जो अभी उन्होंने बताई कि आप कहते हैं कि उससे छीन के मेरे पास आ जाए। एक ही होती है कि मेरे पास हो या ना हो उसके पास नहीं होनी चाहिए। फर्क समझ आ गया आपको? पहली तो आप ये कह रहे ना मेरे पास आ जाए। दूसरी ये है कि मेरे पास आए या ना आए उसके पास नहीं होनी चाहिए। और दुख भी यही होता है सबसे बड़ा कि बंदा कम से कम ये बोल दे। अच्छा इसका हल क्या है? बंदा अगर कभी नेमत देखे क्या करें? अल्लाह से बरकत की दुआ करे और साथ शुक्र भी अदा करे और ये दुआ करे कि अल्लाह जो तूने उसको दिया इस तरह मुझे भी दे दो। उससे अच्छा मुझे दे दे। लेकिन हसद में और इसमें फर्क है कि हसद में आप दूसरे के नुकसान की तमन्ना कर रहे होते हैं कि ये नेमत इसके पास क्यों है इस वजह से आप जल रहे होते हैं और हसद जो है अकीदत बड़ा गुनाह है। इसमें इंसान अल्लाह ताला की तकदीर पर तराज कर रहा होता है कि इसको क्यों दिया अल्लाह ने जबकि तकदीर के सारे फैसले अल्लाह ताला करने वाला है। अल्लाह ने आप के तकदीर में कोई चीज लिखी है। दूसरे की तकदीर में कोई और चीज लिखी है। लेकिन हसद करने वाला इनडायरेक्टली अल्लाह की तकदीर पर तराज करता है कि यह अल्लाह ने क्यों ऐसा फैसला किया कि इसको ये नेमत देनी है। तो इसलिए हसद जो है यह नाजु बिल्लाह बहुत बड़ा जुर्म है और हसद करने वाले के हवाले से बुरी नजर भी उसकी लग जाती है। नहीं लगती? उसकी बुरी नजर भी लगती है। हसद जब करता है वह तो जाहिर सी बात है वो अल्लाह का नाम नहीं लेता। वह आपके ऊपर नेमत का बार-बार जगह-जगह पर जिक्र करता है कि भाई इसके पास तो वो है। जान ताकि जो है व अल्लाह का नाम ना लिया जाए और उसको किसी किस्म का नुकसान हो जाए। कोई बुरी नजर इसको लग जाए। कुछ हो जाए। इसके साथ नुकसान हो जाए। तो यह एक और चीज है। इसीलिए उलमा कहते हैं कि हसद करने वाले के लिए अल्लाह ने जहन्नम में भी क्या सजा रखी है कि जिस तरह यहां यह जलता है वहां अल्लाह इसको जलाए। जहन्नम में अल्लाह ने इसको जलाना है और बाज उलमा ने इसकी पीछे हिकमत क्या बयान की है कि हसद करने वाला ऐसा यह गुनाह है हसद कि अल्लाह ने इसकी सजा दुनिया रखी। जब कोई हसद करने वाला हसद शुरू करता है वहीं पर उसको सजा मिलना शुरू हो जाती है। कौन बताता है किस कौन बता सकता है किस तरह उसको सजा मिलती है? जी कभी सुकून नहीं मिलता उसको। हसद करने वाले को कभी नहीं चैन में आएगा वो। तो यह उसकी पहली सजा जो उसी वक्त अल्लाह शुरू कर देता है। और दूसरी सजा अल्लाह उसको उसी वक्त उसके दिल में जलाना शुरू कर देता है। इसीलिए हसद करने वाले को जनन होती है। अंदर से वो जो जल रहा होता है य उसकी पहली सजा है और साथ ही दूसरी। अब उसको चैन नहीं मिलने वाला। इसीलिए तकदीर पर ईमान रखना और अल्लाह की नेमत पर अल्हम्दुलिल्लाह कहना और इफा करना यह बहुत बड़ी नेमत है जो बहुत कम लोगों को मिलती है कि आप यह कहे कि जो अल्लाह ने मुझे दिया अल्हम्दुलिल्लाह। जो अल्लाह ने उसको दिया अल्हम्दुलिल्लाह। माशा अल्लाह तबारक रहमान उसको कहे। दुआ करें अल्लाह ने उसको जो दिया है उसम बरकत डाले और अल्लाह मुझे भी दे दे। लेकिन यह तमन्ना ना करें कि उससे खत्म हो जाए। और अक्सर मुसलमानों का अफसोस हाल क्या है कि हसद करेंगे लेकिन रश्क नहीं करेंगे। रश्क क्या होता है? रश सुना आपने या नहीं सुना पहले क्या होता है रश? हां के हसद जो है जलता है दूसरे के नुकसान की तमन्ना करता है। रश्क में आप दूसरे के नुकसान की तमन्ना नहीं करते। उसको बरकत की दुआ देकर आप यह दुआ करते हैं। अल्लाह मुझे भी खैर दे दे। उस तरह की उससे अच्छी खैर दे दे। आप हमेशा दुआ करें अल्लाह मुझे और अच्छा उससे दे दे। लेकिन कभी भी दूसरे के नुकसान की जो तमन्ना है वो ना की जाए। तो यह है सूरतुल फलक की मुख्तसर सी जो है तारीफ तफसीर। और इससे आपको समझ आती है कि यह कितने मुशे के अहम अहम गुनाह है जो यहां पर जिकर है। इसको जब इंसान पढ़ता है तो अल्लाह से मोटे मोटे अहम अहम गुनाहों से जो है वह मांग रहा होता है पनाह अल्लाह की। चलिए कोशिश करते हैं अगली सूरत भी लेते हैं। तो यह वीडियो भी स्टॉप करते हैं और इंशाल्लाह फिर एक और इखलास की जो है वो शुरू करते हैं तफसीर।