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अस्सलाम वालेकुम। मेरा नाम रम श सुल्तान है और आज हम अयूब अल सलाम का वाकया सुनेंगे।
अयूब अल सलाम अल्लाह के एक ऐसे नबी थे जिनको अल्लाह ने बहुत आजमाया। पर अयूब अलैहि सलाम ने इतना बेहतरीन सब्र किया कि उसकी मिसाल अल्लाह ने कुरान में दी है।
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चलिए शुरू करते हैं विद द रियल लाइफ स्टोरी ऑफ प्रोफेट अयूब अल सलाम।
अल्लाह ने अयूब अल सलाम को सीरिया में कौम सरान की तरफ भेजा। अयूब अल सलाम बहुत ज्यादा मालदार थे। अल्लाह ताला ने उन्हें बहुत ज्यादा नेमतों से नवाजा था।
उनके पास ला तादाद नौकर चाकर थे और बेशुमार भेड़ बकरियां थीं। अल्लाह ने अयूब अल सलाम को बहुत सारी जमीन और जायदाद भी अता की थी।
अयूब अल सलाम कारोबार करते थे। उनका बिजनेस दूर-दूर तक फैला हुआ था। अल्लाह ने अयूब अल सलाम को बहुत सारी औलाद भी अता फरमाई थी।
उनके सात बेटे और सात बेटियां थीं। अय्यूब अल सलाम खुद भी सेहतमंद और बेहद ताकतवर थे। जाहिर है, इतने अमीर और जमील इंसान के दोस्त भी बहुत होते हैं।
हर कोई अयूब अलैहि सलाम से दोस्ती रखना चाहता था। अल्लाह ने अयूब अलैहि सलाम को बेशुमार नेमतों से नवाजा था और रूहे जमीन पर अयूब अलैहि सलाम नेमतों से माला माल शख्स थे।
फिर अल्लाह ने अयूब अल सलाम को आजमाना चाहा ताकि बाद में आने वाले लोगों के लिए अय्यूब अलैहि सलाम सब्र की मिसाल बन जाएं।
फिर अयूब अल सलाम पर आजमाइश का वक्त शुरू हो गया। उनका सारा कारोबार बंद हो गया और सब माल खत्म हो गया।
यहां तक कि अयूब अलैहि सलाम फकीर हो गए। अयूब अल सलाम की जिंदगी ही में उनकी सारी औलाद मर गई। औलाद का खो जाना बहुत बड़ा गम होता है।
अयूब अल सलाम के सात बेटे और सात बेटियां उनके सामने फौत हो गए। यही नहीं, उनके सारे जानवर और मवेशी भी हलाक हो गए।
इसके साथ-साथ अयूब अल सलाम से उनकी सेहत भी छीन ली गई और वह शदीद मर्ज में बीमार रहने लगे।
बीमारी इस कदर शदीद थी कि अयूब अल सलाम चलने फिरने से भी मजूर हो गए, यानी पैरालाइज हो गए। उनमें उठने तक की सलाहियत नहीं बची।
यहां तक कि उनकी बॉडी के मस घुलने लगे। अयूब अल सलाम की आजमाइश इंतहा को पहुंच गई। अब उनके सारे दोस्त उनका साथ छोड़ने लगे।
उन्हें यह खौफ था कि यह कहीं फैलने वाली बीमारी ना हो और अय्यूब अल सलाम की बीमारी उन्हें भी ना लग जाए।
इस तरह सब दोस्त और रिश्तेदार अय्यूब अलैहि सलाम का साथ छोड़ गए। अयूब अल सलाम की खिदमत के लिए बस उनकी बीवी रह गई।
वह बहुत वफादार बीवी थी। वह अय्यूब अल सलाम की खिदमत करती थी, उन्हें खिलाती पिलाती थी और उन्हें लाती भी थी।
फिर नौबत यहां तक पहुंची कि सारा माल बिल्कुल खत्म हो गया। बेचने के लिए भी कुछ नहीं बचा था।
फिर अयूब अल सलाम की बीवी ने लोगों के घरों में नौकरानी का काम करना शुरू किया ताकि कुछ कमा कर ला सकें और अपने शौहर की दवाई और खिदमत पर खर्च कर सकें।
अय्यूब अल सलाम पर यह आजमाइश एक दो महीने नहीं, बल्कि पूरे 12 साल जारी रही। एक रिवायत के मुताबिक, आजमाइश का यह अरसा 18 साल था।
अल्लाह हु आलम। अयूब अल सलाम इतने लंबे अरसे तक सब्र करते रहे। उन्होंने कभी किसी से शिकवा तक नहीं किया।
साल दर साल ऐसे ही गुजरते रहे। अयूब अल सलाम की बीवी ने उनसे अर्ज किया कि आप अल्लाह के रसूल हैं।
अगर आप अल्लाह से दुआ करें तो वह आपकी बीमारी को खत्म कर देगा और आपके हालात को बदल देगा।
अयूब अल सलाम ने अपनी बीवी से फरमाया। उनकी बीवी ने जवाब दिया 80 साल। यह सुनकर अयूब अल सलाम ने फरमाया, मुझे अल्लाह से दुआ करते हुए शर्म आती है।
क्योंकि जितना अरसा खुशहाली में रहा, अभी उतना अरसा बीमारी और तंगदस्ती में नहीं गुजरा।
इसलिए मैं अभी यह दुआ नहीं करूंगा कि अल्लाह मुझे शिफा अता कर दे या मेरी इस हालत को बदल दे जब तक 80 साल ना गुजर जाएं।
जिस तरह मैंने नाजो नयत में 80 साल गुज गुजारे हैं, उसी तरह मैं 80 साल इस बीमारी और तंगदस्ती पर सब्र करता रहूंगा।
यह सुनकर अयूब अलैहि सलाम की बीवी मायूस हो गई। क्योंकि उन्हें यकीन था कि अगर अयूब अल सलाम अल्लाह से दुआ कर लें तो यह आजमाइश फौरन खत्म हो जाएगी।
अब नौबत यहां तक आ गई थी कि लोगों ने अय्यूब अलैहि सलाम की बीवी को काम देने से इंकार करना शुरू कर दिया था।
इस डर से कि कहीं अयूब अल सलाम की बीमारी उनकी बीवी के जरिए उन लोगों को भी ना लग जाए।
हालात इतने खराब थे कि एक दिन अय्यूब अल सलाम की बीवी को अपने बाल काटकर बेचने पड़े ताकि उन्हें घर खर्च के लिए कुछ पैसे मिल जाएं।
यह देखकर अयूब अल सलाम को बहुत ज्यादा तकलीफ हुई और उन्होंने अल्लाह से दुआ की, "या अल्लाह, मुझे बीमारी लग गई है और तू रहम करने वालों से ज्यादा रहम करने वाला है।
मुझे आजमाइश ने आ लिया है और तू अरहम राहिनी है। मेरी हालत को तू ही बेहतर जानने वाला है।"
अल्लाह ने अयूब अल सलाम की दुआ को फौरन कबूल कर लिया और उनकी आजमाइश खत्म कर दी।
पहले भी ऐसे कितने मौके आए थे कि आप दुआ करते तो फौरन कबूल हो जाती। मगर अयूब अल सलाम ने अपनी आजमाइश पर सब्र किया।
इसलिए सब्र की मिसाल जब भी दी जाती है तो सब्र अयूब का जिक्र होता है।
अल्लाह ने अयूब अल सलाम से फरमाया, "अपना पैर जमीन पर मारो। यह नहाने और पीने के लिए ठंडा पानी है।"
जब अय्यूब अल सलाम ने अपना पांव जमीन पर मारा तो पानी का एक चश्मा जारी हो गया।
जब उन्होंने उस पानी से गुसल किया तो उनके जिस्म के बाहर की बीमारी खत्म हो गई।
और जब वह पानी पी लिया तो जिस्म के अंदर से बीमारी खत्म हो गई। अयूब अल सलाम फिर से सेहतमंद हो गए जैसे पहले हुआ करते थे।
जब उनकी बीवी वापस घर आई तो वह उन्हें बिल्कुल पहचान नहीं पाई। उनसे पूछने लगी, "क्या आपने अल्लाह के नबी और मेरे खवंद यानी मर्ज में मुब्तिला शख्स को देखा है?"
"अल्लाह की कसम, जब मेरे खाव सेहतमंद थे तो बिल्कुल आप जैसे थे। मैंने आपसे बढ़कर उनसे मिलता-जुलता आदमी आज तक नहीं देखा।"
इस पर अयूब अल सलाम बोले, "क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं?" उन्होंने हैरान होकर पूछा, "आप कौन हैं?"
तब वह बोले, "मैं अयूब हूं।" तब वो बोली, "सुभान अल्लाह, इसका मतलब है बीमारी खत्म हो गई। अल्लाह ताला का एहसान हो गया।"
अल्लाह ने अयूब अल सलाम की बीवी को भी जवानी लौटा दी। क्योंकि उन्होंने भी अल्लाह की आजमाइश पर बेहतरीन सब्र किया था।
इसके बाद अल्लाह ने उन्हें फिर से औलाद अता करी। उनके यहां 26 बेटे बेटियां हुए।
एक रिवायत में है कि 26 सिर्फ बेटे थे, बेटियां अलग से थीं। मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, "जब अय्यूब अल सलाम गुसल फरमा रहे थे तो उन पर सोने की टिड्डियों की बरसात होने लगी।"
अल्लाह अयूब अल सलाम को गुसल करने के दौरान ही नवाज लगा। अयूब अलैहि सलाम ने उन सोने की टिड्डियों को अपने कपड़ों में जमा करना शुरू कर दिया।
इस पर अल्लाह ने फरमाया, "ऐ अयूब, क्या मैंने तुम्हें मालदार नहीं बना दिया और इस नए नाजिल होने वाले माल से बेपरवाह नहीं कर दिया?"
अयूब अल सलाम ने अर्ज किया, "जी हां, मेरे परवरदिगार, लेकिन मैं आपकी रहमत और बरकत से तो बेपरवाह नहीं हो सकता।"
अल्लाह ने अयूब अल सलाम की जवानी और सेहत वापस कर दी। माल और दौलत वापस कर दिया। खानदान और औलाद फिर से अता कर दिए।
अल्लाह जिसे चाहे उसे आजमा आता है और जिसे चाहे उसे नवाजता है।
और अगर अल्लाह हमसे कुछ ले ले तो उससे बेहतर अता करता है।
अल्लाह ने कुरान में अयूब अल सलाम के सब्र की तारीफ की है और उनकी जिंदगी को सब्र करने वालों के लिए मिसाल बनाया है।
आजमाइश हर किसी की जिंदगी में आती है, पर अल्लाह यह देखना चाहता है कि मुश्किल वक्त में हमारा क्या रवैया होता है और हमारा ईमान कितना मजबूत रहता है।
इसलिए हमारी जिंदगी में जब भी मुश्किलें आएं तो हमें सब्र करना चाहिए और हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
तो यह था अयूब अलैहि सलाम का वाकया। अयूब अलैहि सलाम से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे ऊपर कोई भी मुसीबत क्यों ना आ जाए, हमें उस पर सब्र करना चाहिए और हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
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दिस इज मी रम श सुल्तान, साइनिंग ऑफ।