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Facebook एड्स कोर्स विद AI.
दोस्तों, आज के इस वीडियो में मैं आपके संग 15 Facebook स्ट्रेटजीज़ डिस्कस करने वाला हूं जो हम अपनी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में अप्लाई करते हैं। बेसिकली ये वो बेस्ट स्ट्रेटजीस है। वो बेस्ट प्रैक्टिससेस हैं जो रिजल्ट लाने में हमारी मदद करती हैं। तो जैसे कि हम अपने क्लाइंट्स के लिए क्वालिटी सेल्स जनरेट करते हैं, क्वालिटी लीड जनरेट करते हैं और इन सब स्ट्रेटजीस का यूज़ करते हैं। तो आप भी कर सकते हैं।
तो दोस्तों एज अ बिगिनर लेवल आप लोगों के लिए यह वीडियो बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट है। बिकॉज़ ये आपको हेल्प करेगा आपके रिजल्ट्स बूस्ट करने में। तो उम्मीद करता हूं वीडियो आप एंड तक अच्छे से देखेंगे और आप ये पूरा कोर्स हमारे Facebook एड्स विद आई का पूरा कोर्स अच्छे से सीखिए। प्रैक्टिस कीजिए ताकि आपको भी Facebook एड्स एक्सपर्ट में अगर आप इस इंडस्ट्री में जाना चाहते हो तो आपको जॉब मिल सकती है। आप फ्रीलांसिंग कर सकते हो। आप अपने बिज़नेस के लिए सीख सकते हो।
तो दोस्तों अब एक-एक करके स्ट्रेटजी जानते हैं। सबसे पहले जो लोग नए हैं चैनल पर प्लीज चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए। बेल आइकॉन दबा दीजिए ताकि एक भी चीज आपसे मिस ना हो।
सबसे पहला जो हमारा पॉइंट है वो है प्रोडक्ट एंड ऑफरिंग्स। दोस्तों Facebook कैंपेन रन करने से पहले सबसे इंपॉर्टेंट क्या है? कि हम क्या प्रोडक्ट सेल करने जा रहे हैं? क्या उस प्रोडक्ट की डिमांड है? क्या उसका प्राइसिंग है? और उससे रिलेटेड हम क्या मार्केट में ऐसा ऑफर पब्लिक को देने जा रहे हैं कि वह हमारे कॉम्पिटिटर्स की जगह हमारे ऐड को देखें। हमारे ऐड पर क्लिक करें। तो दोस्तों जब तक आपके पास एक पावरफुल प्रोडक्ट नहीं होगा जब तक आपके पास एक पावरफुल ऑफरिंग या ऑफर नहीं होगा तब तक आप ज्यादा आई बॉल्स अट्रैक्ट नहीं कर पाओगे। तो हमेशा Facebook एड्स में लोग सोचते हैं कि हमें इसमें मास्टर करनी है। Facebook ऐड में रिजल्ट लेकर आना है। हमें सारी सेटिंग्स आती है। हमारे सारे फीचर्स आते हैं। वो सब अच्छी बात है और आना भी चाहिए। मगर जब तक हमारे पास प्रोडक्ट ही अच्छा नहीं है। हमारे पास हम हमारे पास ऑफर ही हमें बनाना नहीं आता। हमें ऑफरिंग ही क्रिएट नहीं करनी आती। तो हम कैसे कॉम्पिटिटर्स को पछाड़ेंगे? तो इसलिए यह टिप हमेशा ध्यान में रखिएगा। आपको जितनी मेहनत Facebook कैंपेन चलाने पर करनी है उससे पहले प्रोडक्ट को राइट बनाना है। उसकी बढ़िया से बढ़िया ऑफरिंग क्रिएट करनी है। ताकि जब आप अपने कैंपेन चलाएं तो कस्टमर्स या यूज़र्स जब आपका ऐड देखें तो कॉमटीिटर्स के ऐड की जगह वो आपके ऐड पे क्लिक करना ज्यादा पसंद करें। इससे Facebook भी आपके जो रिजल्ट्स को बूस्ट करता है, आपके एड्स को प्रायोरिटी देता है। बिकॉज़ आप ज्यादा लोगों को एंगेज कर रहे हैं।
Second इंपॉर्टेंट स्ट्रेटजी आपको जो ऐड क्रिएटिव्स हैं वो ऑब्वियसली कैंपेन बनने से पहले आपको क्रिएट करने होते हैं। दोस्तों ऐड क्रिएटिव्स में मेजरली दो ही चीजें हैं हमारे पास। या तो हम एक इमेज क्रिएट करते हैं। तो जो इमेज है वो हाई क्वालिटी हाई डेफिनेशन इमेज होनी चाहिए। कम शब्द में ज्यादा बात ठीक है इमेज का लिमिटेड यूज़ बट ओवरऑल जो कॉम्बिनेशन हो आपके ऐड क्रिएटिव का बड़ा इंपैक्टफुल हो तो इसलिए जब आप ऐड क्रिएटिव बनाएं तो आपको क्वालिटी के साथ-साथ आपको कितना कंटेंट रखना है कि कैसी इमेज रखनी है ठीक है रेलेवेंसी कैसी है हर बात का आपको ध्यान रखना पड़ेगा मतलब मोर और लेस आपको जो ऐड क्रिएटिव बनाना है वो बहुत ही इफेक्टिव बनाना आई कैची बनाना है।
तीसरा हमारा जो पॉइंट है वो भी इसी से ही रिलेटेड है। वो है एंगेजिंग वीडियो बनाना। हम सबको पता है आज का जो जमाना है वह वीडियो और वीडियो मार्केटिंग से रिलेटेड है। जितना इमेजेस हम लोगों को हमारे यूज़र्स को एंगेज करने में हेल्प करती हैं उससे ज्यादा वीडियोस करती हैं। वीडियोस लोगों को देखने में ज्यादा पसंद आती हैं। वीडियोस के थ्रू आप अपनी बात ज्यादा अच्छे से बोल पाते हो, बता पाते हो और ऑडियंस भी उसके संग ज्यादा कनेक्ट करती है। बिकॉज़ वो एक मल्टीमीडिया एक ऑप्शन होता है जो उसमें इमेज भी है, वीडियो भी है, साउंड भी है, हर चीज़ है उसके अंदर। तो दोस्तों, जब आप वीडियो ऐड क्रिएट करते हैं तो स्पेशली ध्यान रखिए आपकी इंगेजिंग वीडियो होनी चाहिए। साथ के साथ हुकू होना चाहिए वीडियो के अंदर। उसके अलावा अगर आप वीडियो क्रिएट कर रहे हैं तो आप एक बात का हमेशा ध्यान रखिएगा कि यूजीसी कंटेंट जितना ज्यादा से ज्यादा हो तो अच्छा है। यूजीसी कंटेंट के अंदर मतलब अगर कोई ह्यूमन उस वीडियो को बना रहा है चीज को बता रहा है तो लोग ज्यादा रिलेट करते हैं या आप अपने जो कस्टमर्स के टेस्टीिमोनियल्स रिव्यूज वगैरह भी वीडियोस में दिखा सकते हैं। लोग उस पे बहुत ज्यादा रिलाई करते हैं, ट्रस्ट करते हैं।
Fourth है ऑडियंस टारगेटिंग। दोस्तों सबसे इंपॉर्टेंट ऑडियंस टारगेटिंग है। बिकॉज़ ऑडियंस के अंदर कई तरीके से हम ऑडियंस टारगेट कर सकते हैं। जो कि हमारी लोकेशन है, एज है, जेंडर है। उसके अलावा जो सबसे इंपॉर्टेंट है हमारी डिटेल टारगेटिंग जिसके अंदर बिहेवियर, इंटरेस्ट और डेमोग्राफिक्स के हिसाब से हम ऑडियंस चूज़ करते हैं। तो दोस्तों जब कभी भी आप ऑडियंस सेलेक्ट करें तो उधर आपको अननेसेसरी की लोकेशनेशंस या वो एज ग्रुप के भी एक्स्ट्रा एज ग्रुप आप ऐड कर रहे हैं जो आपके मतलब उतना ज्यादा हाई पोटेंशियल नहीं है या प्रोडक्ट आपका ज्यादातर मेन के लिए है या वुमेन के लिए और आप दूसरे जेंडर को भी टारगेट कर रहे हैं। या फिर जब आप डिटेल टारगेटिंग करते हैं तो वहां पर मान लीजिए अगर मेरे को डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स सेल करना है तो वहां पर मैं डिजिटल मार्केटिंग का इंटरेस्ट टारगेट कर देता हूं तो वो तो बहुत ब्रॉड हो गया ना ऑडियंस क्योंकि जितने भी लोग डिजिटल मार्केटिंग में इंटरेस्ट रखते हैं क्या वो मेरा कोर्स खरीदेंगे ऐसा नहीं है तो वहां पर हमें अपनी जो टारगेटिंग है उसको नैरो रखना होगा नैरो का मतलब ये नहीं है कि बिल्कुल इतना नैरो कर दो कि रीच ही ना आए बट हमें पता होना चाहिए कि हमें किन ऑडियंस को अपना ऐड दिखाना है। लाइक डिजिटल मार्केटिंग में मैं एसइओ वालों को, सोशल मीडिया वालों को जो एमबीए मार्केटिंग में कर रहे हैं, बीबी मार्केटिंग में कर रहे हैं या फिर जो लोग जॉब करते हैं सेल्स मार्केटिंग के अंदर उनको दिखाना है। इस तरीके से मेरे को स्पेसिफिकली ऑडियंस टारगेटिंग करनी है। नैरो टारगेटिंग करनी है ना कि उठा के बस डाल दिया मार्केटिंग। टारगेट कर दिया। एडवर्टाइजमेंट टारगेट कर दिया और मैंने डिजिटल मार्केटिंग टारगेट कर दिया। तो इससे तो बहुत ब्रॉड हो जाएगा। फायदा ही नहीं है ना। तो ये बजट ऑप्टिमाइजेशन का भी एक बहुत बेस्ट तरीका है और साथ के साथ अगर आप परफेक्ट ऑडियंस टारगेट करना चाहते हैं तो वो नैरो होनी चाहिए। बिल्कुल वही ऑडियंस टारगेट होनी चाहिए जो आपके लिए हाई पोटेंशियल है। दोस्तों जब कभी भी आप कोई भी कैंपेन बनाते
फिफ्थ पॉइंट दोस्तों एबी टेस्टिंग वन ऑफ़ द मोस्टेंट स्ट्रेटजी। देखिए जब कभी भी हम कोई कैंपेन बनाते हैं उसके अंदर हम कोई ऐड क्रिएटिव यूज़ करते हैं, कोई हम ऐड कॉपी बनाते हैं या ऑडियंस टारगेट करते हैं। ठीक है? तो दोस्तों क्या हमें पता है कि वो सबसे बेस्ट हम क्रिएट कर रहे हैं और वो सबसे ज्यादा चलेगा या हमारी ऑडियंस पसंद करेगी? नहीं ना? तो इसलिए एबी टेस्टिंग हमें भी फायदा देता है। हमारी ऑडियंस के लिए फायदेमंद है। और हमारा जो ये जो प्लेटफार्म है Facebook इनके एआई सिस्टम के लिए भी ये ऑप्शन बेस्ट है। यहां पर विन विन विन सिचुएशन होनी चाहिए। अब एबी टेस्टिंग का मतलब क्या है? जब आप कोई ऐड क्रिएटिव बना रहे हैं, ट्रेंड के हिसाब से बना रहे हैं। अपनी इंडस्ट्री के हिसाब से बना रहे हैं। लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के हिसाब से बना रहे हैं। तो आप उसके मल्टीपल ऐड क्रिएटिव्स बनाइए। आप कोई वीडियो बना रहे हैं। मल्टीपल वीडियोस बनाइए। आप कोई ऑडियंस टारगेट कर रहे हैं। अलग-अलग एडसेट के अंदर अलग-अलग ऑडियंस टारगेट कीजिए। ठीक है? इससे क्या होगा कि जब हमारे हमने कई सारे ऑप्शंस बिल्कुल रिसर्च के बाद कॉम्पिटिटर्स को देखते हुए बेस्ट टू बेस्ट क्रिएट करके दिए हमने अपनी सेटिंग्स में डाले। तो Facebook का जो एआई सिस्टम है वो उनमें से सबको टेस्ट एंड ट्राई करेगा अलग-अलग तरीके से। और जो बेस्ट विनिंग तरीका निकल के आएगा उस विनिंग फ़ूले को उस विनिंग ऐड को या ऐड सेट को कैंपेन को ज्यादा बूस्ट करेगा और आपको बेटर रिजल्ट्स आएंगे। दिस इज़ वन ऑफ़ द बेस्ट वे ऑफ़ बजट ऑप्टिमाइजेशन और साथ के साथ रिजल्ट लेकर आने का सबसे बढ़िया तरीका है।
सिक्स्थ हमारा जो पॉइंट है दोस्तों हमें हमें जो ऐड कॉपी क्रिएट करनी होती है ना। ठीक है? ऐड कॉपी एज अ कंटेंट राइटर मत क्रिएट करो। कंटेंट राइटिंग से भी ऊपर है कॉपी राइटिंग। क्योंकि वहां पर ऐड कॉपीज में हमें बहुत ज्यादा शब्दों की गुंजाइश नहीं होती। वहां पर बहुत कम से कम ही हम वर्ड्स का यूज कर सकते हैं। तो कम शब्दों में आपकी बात तीर की तरह किसी को लग जाए। वहां पर आप अपने प्रोडक्ट या ऑफर के बारे में बता सकते हो। वहां पर आपको अपने यूएसपीस वगैरह भी बतानी होती हैं। वहां पर डिस्काउंट्स वगैरह में बताना होता है। जब इतनी सारी चीजें बतानी होती है और लिमिटेड हमारे पास ऑप्शंस होते हैं तो वहां पर कॉपी राइटिंग स्किल्स का इस्तेमाल करना होता है ताकि आप एक परफेक्ट ऐड कॉपी बना पाए और एक नहीं मल्टीपल ऐड कॉपीज़ आपको बनानी है।
सेवंथ हमारा जो पॉइंट है वो छोटा सा पॉइंट है इमोजीस। जब आप अपने ऐड क्रिएट करते हैं तो आप अपने प्राइमरी टेक्स्ट वगैरह में इमोजीस वगैरह का यूज़ कीजिए कैप्शनंस में। बिकॉज़ दोस्तों वो ना आपके ऐड को ना एक अलग से ही दिखाता है। ठीक है? आपके पॉइंटर्स को अलग से दिखाता है। उसमें खुशी के एक्सप्रेशनंस हो सकता है। सरप्राइज का एलिमेंट हो सकता है। राइट पॉजिटिव साइन हो सकते हैं। तो इमोजीस का यूज़ जरूर करें। ये आपके ऐड को चार चांद लगा देता है।
एट्थ पॉइंट है क्लियर कॉल टू एक्शन। दोस्तों सीटीए हर एडवर्टाइजमेंट का सबसे इंपॉर्टेंट मतलब आप समझ लीजिए एक ऐसी चीज है सीटीए कि अगर आपने राइट सीटीए नहीं दिया तो आपको कभी राइट रिजल्ट मिलेगा भी नहीं। इवन जब आप लैंडिंग पेज भी बनाते हो तो वहां पर भी अगर आप सही प्लेसमेंट नहीं करोगे सीटीए की तो हो सकता है आपको उतने कन्वर्जंस नहीं आए जितने आ सकते हैं। तो आपके एडवर्टाइजमेंट के अंदर सीटीए बहुत क्लियरली मेंशंड होना चाहिए और आपके लैंडिंग पेज में भी सीटीए बहुत क्लियरली मेंशंड होना चाहिए। ठीक है? तो ये भी एक्सपीरियंस से आता है कि हमें क्या सीटीए देना है, किधर हमें सीटीए दिखाना है। तो क्लियर कॉल टू एक्शन इज़ वेरीेंट।
नाइंथ स्ट्रेटजी है हमारी। दोस्तों एडवांटेज प्लस प्लेसमेंट्स। मैं आपको एडवांटेज प्लस प्लेसमेंट्स ऑप्शन चूज़ करने को क्यों बोल रहा हूं? दोस्तों देखिए जब हम कैंपेन बनाते हैं तो हम मैनुअली उसके अंदर बहुत सारी चीजें सेट करते हैं। चाहे वो क्रिएटिव्स है, ऑडियंसेस है, कुछ भी बजट भी। मगर जो प्लेसमेंट है अब Facebook के मल्टीपल प्लेटफॉर्म्स हैं। Facebook है, Instagram है, थ्रेड है, मैसेंजर है। उसके अलावा अब नया उसके अंदर जो उनके संग जुड़ा हुआ है ऑडियंस नेटवर्क जो अलग-अलग एप्स वेबसाइट्स Facebook के संग जुड़ी हुई है वो ऑडियंस नेटवर्क है। अब इतने सारे प्लेसमेंट्स मतलब प्लेटफॉर्म्स उन प्लेटफॉर्म्स में भी कई सारी प्लेसमेंट्स कोई फीड है, मार्केट प्लेस है, स्टोरी है, रील है, अलग-अलग और भी होंगी। तो एज अ बिगिनर भी और एज अ एक्सपीरियंस्ड पर्सन भी हम कब तक कहां तक यह देख पाएंगे कि यह पर्टिकुलर ऐड इस जगह प्लेसमेंट पे लगना चाहिए। इस जगह पे दिख शो होना चाहिए यहां पर होना चाहिए। तो इसलिए आप जो भी अलग-अलग ऐड फॉर्मेट्स हैं उनको क्रिएट कीजिए और ऑटोमेटिक प्लेसमेंट जिसको पहले बोलते हैं तब एडवांटेज प्लस प्लेसमेंट्स कहते हैं। ये काम Facebook के एआई के ऊपर छोड़ दीजिए। क्योंकि जब आपने ऑडियंस सही सेट कर दी। सारे आपने कंटेंट वगैरह सही से डाला है। आपने अलग-अलग ऐड के फॉर्मेट्स भी सही रेश्यो में बना के डाले हैं। तो इनका जो एडवांटेज प्लस का जो ऑप्शन है इनका एi सिस्टम काम करेगा। आपकी सही ऑडियंस को सही प्लेटफार्म पे कब ऐड दिखाना है, कहां ऐड दिखाना है, यह अपने आप ही सब कुछ हैंडल करता है और बेटर रिजल्ट्स लाके देता है।
10थ और मोस्टेंट स्ट्रेटजी Facebook, पिक्सल्स एंड कन्वर्शन ट्रैकिंग। दोस्तों, आप किसी भी प्लेटफार्म पे एड्स चला रहे हैं। अगर वहां का जो ट्रैकिंग कोड है, वो आपकी वेबसाइट, ऐप या लेंडिंग पेज में इंस्टॉल्ड नहीं है, तो आप एड्स की परफॉर्मेंस को कभी ट्रैक ही नहीं कर सकते। जो डाटा है आप अभी कभी कलेक्ट ही नहीं कर सकते। तो इसलिए सही तरीके से Facebook पिक्सल्स या आपकी कन्वर्ज़ ट्रैकिंग हो रही है नहीं हो रही है आपको इंश्योर करना है, चेक करना है, सही से लगाना है ताकि इसके कई फायदे हैं। पहली बात तो एड्स की ट्रैकिंग हो गई। आपके जो डाटा आ रहा है जो यूज़र्स उसकी ट्रैकिंग हो गई। ठीक है? जो डाटा गैदर हो रहा है वो होगा। रीम मार्केटिंग आप अच्छे से कर सकते हो। कन्वर्ज़ ट्रैकिंग अच्छे से कर सकते हो। सारी चीजें तभी हो पाएंगी जब आपने पिक्सल्स और ट्रैकिंग कोड वगैरह सही से लगा रखे हैं और वो सही से वर्क कर रहे हैं। और हमने अपने Facebook एड्स के कोर्स में हर एक चीज प्रैक्टिकल लेवल पे अच्छे से सिखाई भी हुई है। उम्मीद करता हूं आपने सीखी होगी।
11th हमारी स्ट्रेटजी है हमेशा जब कभी भी आप एक कैंपेन बनाएं उसमें मल्टीपल एडसेट्स और मल्टीपल एड्स क्रिएट करें। दोस्तों कोई भी बिजनेस अगर उसकी मल्टीपल सर्विज हैं या मल्टीपल प्रोडक्ट्स हैं तो क्या वो एक कैंपेन के अंदर बजट डालेगा और एक एडसेट बना के उसी के अंदर मान लीजिए मेरा बिज़नेस डिजिटल मार्केटिंग का भी है। मैं डिजिटल मार्केटिंग की सर्विज भी देता हूं। मैं डिजिटल मार्केटिंग की कोचिंग भी देता हूं। तो क्या मैं अपनी दोनों सर्विज एक ही एडसेट के अंदर बना के और एक ही ऐड कैंपेन बना के खत्म कर दूंगा। तो ना तो ऐड रेलेवेंसी बनेगी और ना मेरा ऐड परफॉर्म करेगा ना मेरे को रिजल्ट्स आएंगे। तो यहां पर अगर मेरी दो सर्विज हैं, ज्यादा सर्विज हैं, तो मैं एक कैंपेन अगर बना रहा हूं तो उसमें एक एडसेट में डिजिटल मार्केटिंग सर्विज का बनाऊंगा और एक एडसेट में डिजिटल मार्केटिंग अ कोचिंग का बनाऊंगा, ट्रेनिंग का बनाऊंगा। और उसके अंदर जब मैं ऐड ऐड अपने क्रिएट करूंगा, तो कम से कम एक एडसेट में दो से तीन ऐड क्रिएट करूंगा। ताकि एक ऐड के अंदर मैं इमेज का यूज़ करूं, एक ऐड में वीडियो का यूज़ करूं, एक ऐड में क्राउज़ का यूज़ करूं और अलग-अलग ऑडियंस का यूज़ करूं। अह जब मैं अह मल्टीपल एडसेट बना रहा हूं तो उसकी ऑडियंस अलग होगी। जो एक एडसेट मेरा सर्विसेस का है और जो एडसेट मेरा इसका है अह लाइव कोचिंग का उसकी ऑडियंस अलग सेट करूंगा। तो इस तरीके से क्या होता है कि हम ज्यादा रेलेवेंट और जो इनके प्रोटोकॉल होते हैं, पैराटर्स होते हैं, गाइडलाइंस होती है, उसके हिसाब से हम कैंपेन बना पाएंगे और ज्यादा बेहतर रिजल्ट लेकर आ पाएंगे।
12th दोस्तों इसमें आपको तीन बातों का ध्यान रखना है। जब कभी भी आप कोई कैंपेन बनाते हैं तो ये तीनों जो स्ट्रेटजीस है सही से आपको चूज़ करनी है। पहला जब कैंपेन बनाएंगे तो राइट ऑब्जेक्टिव चूज़ करना है। राइट ऑब्जेक्टिव चूज़ कर लिया तो उस ऑब्जेक्टिव के हिसाब से कैंपेन के हिसाब से आपको राइट बिडिंग स्ट्रेटजी चूज़ करनी है। और जब आपने राइट बिटिंग स्ट्रेटजी चूज़ कर ली, ऑब्जेक्टिव चूज़ कर लिए तो उसके बाद आपको अपने कैंपेन का परफॉर्मेंस गोल बिल्कुल सही से चूज़ करना है। तो जब कभी भी आप एक कैंपेन बना रहे हैं तो आपको राइट, राइट ऑब्जेक्टिव, राइट बिडिंग स्ट्रेटजी और राइट परफॉर्मेंस गोल्स का ध्यान रखना है।
13थ दोस्तों, रीमार्केटिंग कैंपेन का यूज़ करें। क्योंकि क्या होता है कि जब हम रीमार्केटिंग करते हैं तो एक तो हमारे को कॉस्टिंग भी कम आती है और जब तक हम अपने ब्रांड को, अपने प्रोडक्ट्स को, अपनी सर्विज को, अपनी टारगेट ऑडियंस को मल्टीपल टाइम्स ना शो करें, उनकी नजरों में ना बने रह। ठीक है? तो जो चांस होता है कि वो हमारे प्रोडक्ट सर्विज पे क्लिक करें, ऐड पे क्लिक करें और एक्सप्लोर करें, बाय करें या लीड आए तो कम हो जाता है। तो रीमार्केटिंग या रीिटारगेटिंग एक बहुत ही अच्छी स्ट्रेटजी है। अगर आपको कन्वर्जंस लेकर आने हैं या एंगेजमेंट बढ़ानी है अपने ब्रांड की, अपने प्रोडक्ट की, अपने मतलब जो फ्यूचर के कस्टमर्स हैं उनके साथ।
14th दोस्तों Facebook एड्स कैंपेन अगर आप चला रहे हैं मेटा एड्स आप रन कर रहे हैं और आपने मेटा एड्स पॉलिसीज एडवरटाइजिंग पॉलिसीज अगर आपने कभी पढ़ी नहीं है गो थ्रू नहीं करी उनको बेधानी कर दी कि क्या फर्क पड़ता है ऐड तो मुझे चलाना आता ही है तो कहीं ना कहीं जाके आप किसी कैंपेन में आपके ऐड अकाउंट में कभी ना कभी प्रॉब्लम आ सकती है बिकॉज़ अगर आप मल्टीपल क्लाइंट्स के लिए काम करते हैं मल्टीपल नीश के लिए काम करते हैं तो सबके लिए जो एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी है वो एक नहीं होती है। तो अगर आपको एडवर्टाइजमेंट पॉलिसीज की पूरी अच्छे से समझ होगी तो आप एक Facebook ऐड एक्सपर्ट कहलाओगे। बिकॉज़ आधी से ज्यादा प्रॉब्लम्स तो आप वहीं सॉल्व कर लोगे जब आपको पॉलिसीज के बारे में पता है। क्यों? क्योंकि जब पॉलिसीज पता है तो पता है कि भाई किसका ऐड चलाना है, किसका चल सकता है, किसका नहीं चल सकता है या किसका चलेगा। तो उनमें किन बातों का ध्यान रखना है और कौन-कौन से ऐसे प्रैक्टिससेस है जो करनी ही नहीं है। ठीक है? तो दोस्तों एडवरटाइजिंग पॉलिसीज मेटा एड्स की आपको अच्छे से पता होनी चाहिए अगर आप वाकई में Facebook एड्स एक्सपर्ट बनना चाहते हैं।
और 15th हमारा जो पॉइंट है लास्ट पॉइंट है बट बड़ा इंपॉर्टेंट है। हम सब कुछ कर लें। मगर दो चीजें तो सबसे इंपॉर्टेंट है। पहला जो आपका जो Facebook का जो अकाउंट है Facebook का अकाउंट वेरीफाई होना चाहिए। टू स्टेप वेरिफिकेशन होनी चाहिए। सिक्यर्ड होना चाहिए। उसकी इंपॉर्टेंट सेटिंग्स आपने कर रखी होनी चाहिए। और साथ के साथ जो आपका Facebook ऐड मैनेजर मतलब बिजनेस मैनेजर अकाउंट है वो वेरीिफाइड होना चाहिए। आपका बिज़नेस वेरीिफाइड होना चाहिए। तो इन बातों का जरूर ध्यान रखिएगा। यह है बेस्ट प्रैक्टिससेस इन 2025 Facebook एड्स कोर्स विद AI। उम्मीद करता हूं वीडियो आपको पसंद आया होगा। थैंक यू।