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तो यह वीक हम इस फाइनेंशियल ईयर के लास्ट ट्रेडिंग वीक में हैं। अब जैसे मैंने फ्राइडे की वीडियो में बहुत सारी चीजें आप लोग को बताई थीं, क्या-क्या चीजें आप लोग मॉनिटर कर लीजिएगा, टैक्सेशन रिलेटेड एंड ऑल। वो एक बार फ्राइडे वाली वीडियो ही चेक कर लीजिएगा। मैं दोबारा रिपीट नहीं करूंगा उन चीजों को। बट एक यूजुअल पैटर्न या अनयूजुअल पैटर्न आप कह सकते हैं, 15 मार्च को अपना लास्ट इनकम टैक्स का एडवांस टैक्स पेमेंट का वो था। ठीक है? तो सबने एडवांस टैक्स वगैरह अच्छा-खासा पे कर दिया। और जनरली मैं आपको बताता हूँ, हम लोग, मैक्सिमम लोग, हम लोग एडवांस टैक्स में जितना भी होता है, उसे थोड़ा ज्यादा पे कर देते हैं। पता है क्यों? क्योंकि पता है थोड़ा भी पैसा छूट जाना है, ये लोग लगते हैं इंटरेस्ट, इंटरेस्ट ये सब करके स्क्रूटनी में फाइल डालने एंड ऑल दैट। तो मान लीजिए किसी की लायबिलिटी आ रही है 100, तो वो 105 जमा कर देता है, ताकि झमेला ही ना। ठीक है? और उसके बाद फिर लायबिलिटी कैलकुलेट होगी, क्योंकि प्रॉपर ऑडिट वगैरह होता है। ऑडिटर कोई चीज अलाउ करेगा, कोई चीज नहीं करेगा। बहुत सारे वो आते हैं। अब नॉर्मल लोगों को ये सब बातें नहीं समझ में आती हैं, क्योंकि उनका लेवल जितना है, उतना ही उनको समझ में आएगा। मैक्सिमम लोग जो लोग बिज़नेस में इवॉल्व्ड हैं, जो लोग इस तरह का काम वगैरह करते हैं, उनको पता है कि यह सब चीजें 192 आते रहती हैं। कुछ ये ऑब्वियस सी बात है। अगर मेरी लायबिलिटी लाख-दो लाख ही बने, तो मैं जून-जुलाई में ही पे कर दूँगा। कितना इंटरेस्ट आ जाएगा? हज़ारों डेज आ जाएगा। बट लायबिलिटी अगर लाख में जाती है, करोड़ों में जाती है, तो मैटर करता है, क्योंकि फिर वो इंटरेस्ट कॉस्ट भी ना पिंच करता है। ठीक है? तो मैक्सिमम लोग ज्यादा पे कर देते हैं।
15 के बाद, 15 मार्च के बाद मैक्सिमम ट्रेडर्स का मैंने यह नोटिस किया है कि लोग ना अपनी पोजीशन साइज़ को लाइट रखते हैं या पोजीशन लेंगे भी ना, वो तो इस व्यू से लेंगे कि एटलीस्ट इस 15 दिन में ना काटना पड़े। काटेंगे तो अप्रैल में काटेंगे। वैसे पोजीशन जनरली लोग लेते हैं। ऐसा नहीं है कि कोई नहीं लेता है। लेते ही हैं। ट्रेडर वगैरह, इंस्टिट्यूशन वगैरह लेंगे ही अपने पोजीशंस को। बट आपने नोटिस किया होगा कि ओआई में बहुत शार्प डिक्लाइन हो रहा है। यूजुअली क्या होता था कि ओआई में डिक्लाइन होता था, तो नेक्स्ट एक्सपायरी में वो ऐड होते थे। ये चीज अभी नहीं हो रही है। इसका मेन रीज़न क्या है? कि कोई भी ओआई कैरी फॉरवर्ड नहीं करना चाहता है। डज़ नॉट मीन कि कोई शॉर्ट नहीं कैरी करना चाहता है, लॉन्ग नहीं कैरी करना चाहता है। लोग फ्रेश पोजीशन नहीं ऐड करना चाहते हैं। भाई आप ऐड कर लोगे, तो आप कैरी फॉरवर्ड करोगे। इससे बढ़िया इसी साल का जो प्रॉफिट है, लॉस है, वो इस साल एडजस्ट करके खत्म करो। तो वो चीज है। तो अभी काफी लोगों का वो सब प्लानिंग चल रहा है।
अच्छा, कोई इम्पोर्टेंट न्यूज़, फॉलो वगैरह चल रहे हैं क्या? देखिए, ऐज़ सच, एट दिस पॉइंट ऑफ़ टाइम, इस पर्टिकुलर वीक या वीकेंड में कोई बड़े न्यूज़ वगैरह नहीं हैं। व्हाट द वर्ल्ड इज़ वेटिंग इज़ दैट ट्रम्प का टैरिफ का जो बात है, वो आने का टाइम आ गया है। फ्रॉम फर्स्ट ऑफ़ अप्रैल ही है सेड कि वो टैरिफ, सॉरी, सेकंड ऑफ़ अप्रैल वो टैरिफ एप्लीकेबल कर देगा। नाउ, थर्सडे या फ्राइडे को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रहा था, एंड उसने फिर से मेंशन किया अबाउट इंडिया। अब बार-बार ये इंडिया का जो मेंशन करता है ना, मेरे को ये चीज सही नहीं लग रहा है कि बार-बार इंडिया मेंशन करने का ज़रूरत क्या है? ठीक है? उसका मुँह है, वो कुछ भी बोल सकता है। मैं ये मना नहीं कर सकता किसी को, लेकिन पॉइंट ये है कि बार-बार इंडिया मेंशन करने का ज़रूरत क्या होता है? मतलब टेक्निकली ये नहीं होता है कि इग्नाइट करना, मतलब ठीक है? मैं खुद गवर्नमेंट को बहुत ज़्यादा पसंद नहीं करता हूँ। मेरा खुद का व्यू हमेशा यही रहता है कि ये मतलब लोगों की गवर्नमेंट है। ये मेरा पर्सनल व्यू है। लेकिन डज़ नॉट मीन कि इंडिया को इस तरह से उल्टा-सीधा बोलना, हम बोले ठीक है, चलो भाई। अपने आप को तो अपने घर में तो सब लोग एक-दूसरे को गाली देते हैं। बाहर वाला कोई बोले, ठीक नहीं लगता है। अब ये बार-बार कर रहा है, मतलब इतना बार बोल दिया, सेम चीज, मेरे को लॉजिक नहीं समझ में आता है कि बार-बार, भाई तुमको बता दो ना सीधा कि टैक्स लगेगा तुम्हारे ऊपर। तो लग जायेगा, लग जायेगा, क्या फर्क पड़ता है? नहीं खरीदेंगे तुम्हारा सामान, भाई। या तुम हमारे प्रोडक्ट्स पर लगा दोगे, तो वहाँ पर जो इंडियन… वो सफ़र करेंगे। टेक्निकली वहाँ पर जो इंडियन-अमेरिकन कम्युनिटी है, उसको थोड़ा सा हिट होगा। हम जैसे लोगों को क्या फर्क पड़ता है? तुम अगर इंडियन प्रोडक्ट्स को वहाँ पर लगा दोगे, तो हाँ, येस, इंडिया का ज्वैलरी बिज़नेस इफ़ेक्ट होगा, इंडिया गवर्नमेंट बिज़नेस इफ़ेक्ट होगा। आई एग्री टू दैट, बट ठीक है, मतलब बार-बार एक ही चीज को बोल-बोल के, बोल-बोल के…
अच्छा, मैं खुद, मेरा अभी तो चलो फिर भी मेरे इतने सारे व्यूवर्स वगैरह हो गए हैं, तो मेरा जो सॉस भी जो मैं खाता हूँ, बफ़ेलो सॉस, वो यूएस का इम्पोर्टेड होता है। तो वहाँ पर वो $3 में मिल जाता है, जो कि 50 होना चाहिए, क्योंकि इंडिया में 200 पर, नॉन-एसेंशियल इम्पोर्ट्स पे, क्योंकि सॉस नॉन-एसेंशियल इम्पोर्ट है, क्योंकि वो कहते हैं कि इंडिया में किसान का केचप मिल ही रहा है, तो तुम क्यों बफ़ेलो सॉस खाना चाहते हो? तो उस पे 300 पर टैक्स है, तो इंडिया में वो 100 का मिलता है। ओके? सो प्रॉब्लम ये है कि जो कंज्यूम कर रहा है, वो देने को रेडी है, तब ना कंज्यूम कर रहा है। बट अमेरिका में वही चीज आप डबल एक्सपेंसिव कर दोगे। ऑलरेडी जो इंडियन प्रोडक्ट्स के यूएस में प्राइस होते थे, बहुत हाई लगते थे मुझे। वहाँ 400-450 केजी चावल खाना पड़ता था, अगर बासमती चावल खाना है, तो। यहाँ पे हमको ₹100 में अच्छा बासमती चावल मिल जाता है। अप्पर रेंज कुछ भी हो सकता है, 200-250 भी हो सकता है। बट यूएस में 450-500 स्टार्टिंग रेंज था, अगर आप बासमती चावल खाना है, तो। वो थर्ड ग्रेड थाईलैंड, वियतनाम वाला जो राइस होता है, जैस्मिन राइस जिसको बोलते हैं, नॉट टू से थर्ड ग्रेड, बट हम लोग को नहीं समझ में आता है वो चीज। वो सब राइस वहाँ पर 300-350 का मिलता था। तो पॉइंट ये है कि ऑलरेडी एक्सपेंसिव था, अब उसको आप क्या करना चाहते हो? डबल, ट्रिपल कर देना चाहते हो? कर दो। बाय 12 वर्ष पुराने, क्या है? ऑलरेडी यही सबका बेनिफिट वगैरह देने के लिए जितने लोगों ने एफ़-35 वगैरह का डील करवा दिया। ठीक है? अब एफ़-35 एयरक्राफ्ट, तो नेचुरली हमको चाइना से थ्रेट है, तो हमको हेल्प तो चाहिए ही। नो डाउट, ऑब्वियस सी बात है, हमको चाहिए। बट पॉइंट यही है कि यार हर चीज धमका-धमका करना एक पॉइंट के बाद ठीक नहीं लगता है। हाँ, ठीक है, जैसा हमारा लीडरशिप है, इनको डराना ज़रूरी भी है, बट रोज-रोज का ये ड्रामा ठीक नहीं लगता है। ठीक है?
तो अभी जो टैरिफ वगैरह का जो मार्केट में फियर है ना, मार्केट में फियर नहीं है। कुछ भी फैक्ट बताता हूँ आपको। बस फियर ये है कि जब तक ये प्रोडक्ट्स पर है, कोई इशू नहीं है। इंडिया से यूएस सबसे ज़्यादा एक्सपोर्ट होता है सर्विसेज़। ए चैलेंज ये है कि कहीं सर्विसेज़ पर कोई इशू ना क्रिएट हो जाए। नहीं तो फिर क्या होगा? जो इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो ये सबके इश्यूज़ हैं। ठीक है? फिर उसके जितने बिग फोर हैं, पी डब्ल्यू सी, केपीएमजी, ईवाई, ऑल दैट। फिर उसके बाद जितने भी ग्लोबल बैंक्स के ऑफशोर अकाउंटिंग यूनिट्स या उनके बैक एंड यूनिट्स इंडिया में या बैक ऑफिस इंडिया में हैं, लाइक से बैंक ऑफ़ अमेरिका, न्यूयॉर्क मिलान। फिर उसके बाद आपके जेपी मोर्गन, ये सबके ऑफशोर यूनिट्स इंडिया में हैं, जहाँ पे ऑफशोर अकाउंटिंग वगैरह ये सब होती है। तो ऐसे बहुत सारे हैं। एक-दो मैंने एग्ज़ांपल दिया। क्रेडिट सुइस वगैरह सबका इंडिया में ही है। कहीं पुणे में है, कोई बैंगलोर में है, कोई मुंबई में है, कोई चेन्नई में। बार्कलेज़ वगैरह का चेन्नई, बैंगलोर दोनों जगह है। स्टैण्डर्ड चार्टर्ड का बैंगलोर में है। फिर बार्कलेज़ का दिल्ली में भी है। बहुत जगह मतलब भरे हुए हैं। कोलकाता में किसका-किसका है? तो सिर्फ़ पी डब्ल्यू सी का ही सबसे बड़ा यूनिट है। बाकी सब, बाकी बिग फोर्स का है और नहीं है। एचएसबीसी का कोलकाता में है। तो अलग-अलग जगह अलग-अलग हैं। लेकिन अगर सर्विसेज़ पे इशू आता है ना, तो फिर इन कंपनीज़ पे भी कहीं ना कहीं देर-सवेर असर पड़ेगा। वो नहीं पढ़ना चाहिए। बस प्रोडक्ट्स पे रखा हो ना, यार। प्रोडक्ट्स का अल्टरनेटिव खोज लेंगे या नहीं खरीदेंगे लोग। सर्विसेज़ पे आएगा, तो हमारे जॉब, एम्प्लॉयमेंट में फर्क पड़ेगा। वो नहीं होना चाहिए। बस। अब यही चैलेंज है। पहले कैसा था कि कॉस्ट ना इंडियन एम्प्लॉयी का बहुत कम होता था कंपेयर टू द यूएस। तो क्या होता था कि वहाँ से बहुत सारा काम इंडिया में दिया जाता था। जैसे-जैसे इंडिया थोड़ा-थोड़ा-थोड़ा-थोड़ा मतलब केपीओ एंड बीपीओ मार्केट बढ़ते गया, बढ़ते गया, लोग समझने लग गए कि यूएस वाले कितना कमाते हैं, तो चार्जिंग यहाँ भी थोड़ी बढ़ने लग गई। अभी भी नॉट द थर्ड कॉस्ट है, लेकिन एक समय पे थर्ड कॉस्ट हुआ करता था। जो यूएस में करने का लगता, उसका प्लस यू हैव कंपटीशन फ्रॉम अदर कंट्रीज़ आल्सो। वो एक चैलेंज आ गया है। जैसे हम बीपीओ, केपीओ के लिए अकेले एक सिंगल यूनिट होते थे दुनिया में आउटसोर्सिंग के लिए। वो चैलेंज अब डेवलप हो रहा है थ्रू कंट्रीज़ लाइक ब्राज़ील, अर्जेंटीना, फिलीपींस, मलेशिया, श्रीलंका टू एन एक्सटेंट। ये सब धीरे-धीरे डेवलप होते जा रहा है। तो वहाँ भी हमको चैलेंज फेस करना है। अभी इस समय पे टैरिफ वॉर एंड ऑल, हम कंडीशन में नहीं हैं फाइट करने के। चाइना ने क्या बोला? वी आर रेडी टू फाइट एनी काइंड ऑफ़ वॉर, वेदर इट इज़ टैरिफ और टेरिटोरियल, मतलब वो जमीन पे भी लड़ाई हो, तो वो लड़ने को रेडी हैं। वो चीज नहीं है इंडिया का कंडीशन। करेंटली वी कैन नॉट फाइट एनी काइंड ऑफ़ वॉर एट दिस पॉइंट ऑफ़ टाइम। सो उसका बस कोई ज़्यादा असर हमारे यहाँ ना पड़े।
अब रहा मार्केट, तो बुलिश चल रहा है। ठीक है? तो काफी लोग अभी चालू हो जाएँगे कि देखो, मार्केट वापस बुलिश हो गया एंड ऑल। तो मैं 22 पे खुद ही कह रहा था ना कि 22,000 पे छह महीने मार्केट ने टाइम बिताया है। वो बहुत अच्छा बेस बिल्डिंग है। वो सपोर्ट को इतना इज़ीली नहीं तोड़ेगा। तोड़ेगा। मार्केट एक-दो लोगों का मैं कमेंट पढ़ रहा था कि सर आपका वो 18,900 नहीं आया या 18,000 नहीं आया। ऐसा लग रहा है जैसे मार्केट कल से बंद हो चुका है। अरे यार, मार्केट चालू है। ठीक है? चल रहा है। येस, यू में से कि जो 18,000 का नंबर है, वो थोड़ा सा बढ़ के धीरे-धीरे-धीरे-धीरे ऊपर अपने आप आ जाएगा, बिकॉज़ ऑफ़ कॉर्पोरेट अर्निंग्स एंड ऑल। लेकिन जब वो आएगा, तब आएगा ना, अभी तो नहीं है ना। तो जब तक नहीं आता, तब तक देखते हैं। एंड उसके बाद देखेंगे ओवरऑल क्या सिनेरियो रहता है, दुनिया में क्या-क्या चीजें रहती हैं, हम कितनी चीजों को किस तरीके से मैनेज कर सकते हैं। ठीक है? एंड बहुत सारी चीजें अभी बाकी है होना। ठीक है? तो ये इतनी ज़्यादा खुशी मत ले आइए अभी कि फिर बाद में दुःखी होना पड़े। अगर सही में खुशी आनी है, तो अच्छी बात है ना। आप लोग तो एसआईपी चालू कर ही चुके थे ना, जब सब एसआईपी रोकने का सोच रहे थे, तब मैं बोल रहा था कि नहीं, एसआईपी रोको मत, अभी चालू करने का टाइम है। तो वो भी डिफ़रेंस समझो आप। ठीक है? हाँ, लेकिन ये है कि लम्सम इन्वेस्टमेंट का अभी भी मेरे हिसाब से टाइम नहीं आया है। आ जाएगा टाइम, बहुत ज़्यादा टाइम नहीं लगेगा आने में। आ जाएगा। चीजें चीजें जल्दी बदलती हैं, एंड बहुत जल्दी बदल जाएँगी। टाइम उसमें नहीं लगता है। अभी शॉर्ट कवरिंग में तो इंडेक्स इतना ऊपर आ गया। बस देखना ये है कि फर्स्ट अप्रैल से जब दुनिया चालू होगी फिर से या नया फाइनेंशियल ईयर चालू होगा फिर से, तब क्या होता है? तब रियल समझ में आएगा कि हाँ, कितने पानी में हम हैं। अब कुछ लोगों को लगेगा कि यहाँ से मार्केट और 24,000 जाएगा। तो 600 पॉइंट दूर तो आप हो, 22,000 पे ऊपर नहीं बढ़ सकते। आप तो 22,000 पहुँच ही गए। आप तो 2,000 पॉइंट का ली काउंट हो जाएगा। आप 1,500, 1,400 पॉइंट, 1,600 पॉइंट बढ़ चुके हो। 2,000 पॉइंट की रैली काउंट हो जाएगी। बट उससे रियल लाइफ़ में कोई असर पड़ेगा? क्योंकि निफ़्टी तो ऐसे भी नहीं गिरा था जितना कम बाकी इंडेक्सेज़ गिरे हैं, जितना बाकी स्टॉक्स गिरे हैं, उस कंपेरिज़न में तो इंडेक्स कुछ भी नहीं गिरे हैं। स्टॉक्स तो 50-50%, 60-60% पे वाइप आउट हुए हैं। उसमें 5% के गेन में इतना नाच रहे हैं लोग, तो मुझे तो बुद्धि पे हँसी आती है। बट ठीक है, मैं कौन होता हूँ हँसने वाला? क्योंकि मैंने हर तरह के सिचुएशन को देखा है, हर तरह के मार्केट को डील किया है, इसलिए मेरा काम है हँसना, और मुझे हँसी आती है उन लोगों पर जो दूसरों पर हँसते हैं। तो ठीक है, चलिए, कोई बात नहीं। किया जाएगा।
अब आते हैं कि पर्टिकुलर वीक में हम क्या आउटलुक मानें? देखिए, हर इंडेक्स, हर सेक्टर, कॉशस वे में ही चलना चाहिए। मेरे हिसाब से इस पर्टिकुलर वीक, इस पर्टिकुलर में बहुत ज़्यादा बुलिश मैं एक्सपेक्ट नहीं कर रहा हूँ। येस, ग्लोबल इंडेक्सेज़ के, मतलब ग्लोबल इंडेक्सेज़ के जो इंडियन इंडेक्सेज़ हैं या इंडियन एलोकेशन है, उसके री-शफलिंग के कारण, जैसे लास्ट दो दिन में उनके कारण 15,000-12,000 करोड़ रुपये इंडिया में आया। उसी तरह लास्ट वीक भी और नंबर्स आए कि इसके कारण इतना इनफ्लो आएगा, इसके कारण इतना इनफ्लो आएगा। तो जो बाहर में लोकेशन है, उसका इनफ्लो जो आना है, वो आएगा। ठीक है? वो आने देते हैं। बट उसके बाद क्या? वो आएगा रियल चैलेंज कि उसके बाद का क्या? ठीक है? देखते हैं, उसके बाद कब क्या आता है। जब तक वो नहीं आता है, तब तक साइलेंट रहते हैं। और वहाँ से मार्केट कितना रैली करता है, ये मेन एक कॉज़ ऑफ़ कंसर्न रहेगा। वहाँ से मार्केट कितना कर सकता है, कितना नहीं कर सकता है। अब कुछ लोग बोलेंगे, सर बता दो कर सकता है कि नहीं कर सकता है? देखिए, मैं कौन होता हूँ बताने वाला कि कर सकता है कि नहीं कर सकता है? मैं बस रियलिटी बता सकता हूँ। और कॉर्पोरेट अर्निंग्स आने में टाइम नहीं लगेगा। 31 मार्च को कार सेल्स के नंबर्स आ जाएँगे। बाय 10थ ऑफ़ अप्रैल गाइडेंस आने लग जाएगा सारे मेज़र यूएस आईटी कंपनीज़ का। उससे हमारी आईटी कंपनी का गाइडेंस आप मान सकते हो। एक्सेंचर के रिजल्ट्स आए हैं, सब लोगों ने देख ही लिया है कैसा है। उससे कोई बहुत ज़्यादा अगर उम्मीद लगा लेगा इंडियन आईटी कंपनी से, तो वो बेवकूफ़ी है। और ये खाली बस इतना बोलेंगे, रिजल्ट्स आर बेटर देन एक्सपेक्टेड। इतना ही होने वाला है। इससे ज़्यादा कुछ शायद ही हो। तो चलिए, ये तो पहली कहानी हो गई। अब इससे कहानी खत्म तो होती नहीं है। कहानी तो यहाँ से चालू होती है। ये फर्स्ट चीज हुआ। सेकंड चीज क्या रहेगा? सेकंड चीज ये रहेगा कि उसके बाद बैंक्स वगैरह भी अपने नंबर्स डिस्क्लोज़ करना चालू करेंगे कि उनका कितना करेंट अकाउंट ग्रोथ हुआ, कितना ये ग्रोथ हुआ, कितना वो ग्रोथ हुआ। मेरे आरएम का कॉल नहीं आया अभी तक कि सर एफ़डी करो। ठीक है? यानी कि उनके एफ़डी के टारगेट तो मीट हो चुके हैं या फिर लास्ट वीक में कॉल आएगा। नहीं तो मेरे आरएम का कॉल ज़रूर आता है कि सर दो-तीन एफ़डी कर दीजिए ना, दो-तीन एफ़डी कर दीजिए ना। तो वो कॉल्स आता तो ज़रूर है। अभी तक तो नहीं आया है। तो मोस्टली या तो टारगेट मीट हो गया, टारगेट है नहीं। जिस तरह से आरबीआई को लिक्विडिटी इन्फ़्यूज़ करना पड़ा सिस्टम में, हो सकता है बैंक्स के पास ऐसे ही पैसे का लिक्विडिटी क्राइसिस चल रहा हो। उसमें एफ़डीओ करवाना चाहेंगे या नहीं चाहेंगे, ये पता नहीं। देखना होगा कि लोन ग्रोथ कितना होता है, डिपॉज़िट ग्रोथ कितना होता है, कैश रेशियो क्या मेंटेन रहता है। ये सब आने दीजिए नंबर्स को। जब नंबर्स पब्लिश होंगे, देखेंगे हम लोग, फिर डिस्कस करेंगे। अभी उसमें टाइम है। तो ये वीक, पूरा वीक कॉशस वे में निकाल दीजिए। सुपर ऑप्टिमिस्टिक, सुपर बुलिश मत हो जाइए। फॉर फ्यूचर, चीजें बहुत ज़्यादा नहीं बदली हैं। बहुत अच्छे सिचुएशन में हम आज भी नहीं हैं। और रहा स्टॉक मार्केट में 1,400-1,500 पॉइंट का रैली, तो ये 5% का रैली है। अगर स्टॉक्स 50-50% पे गिर के 5% पे ऊपर आ गए और निफ़्टी के स्टॉक्स 20-25%, 2% पे गिर के 5-10% पे ऊपर आ गए हैं, तो उसमें बहुत ज़्यादा खुश आप हो जाएँगे, तो वो आपकी बेवकूफ़ी दर्शाता है, आपका समझदारी नहीं दर्शाता है। हाँ, ये है कि येस, जब सब एसआईपी रोकने का सोच रहे थे, उस समय स्ट्रॉन्ग रह के एसआईपी ऑन रखना ज़रूरी था आपके लिए। वो आप रखते हो, तो बहुत अच्छी बात है। एंड फॉलिंग मार्केट में ज़्यादा एसआईपी करनी चाहिए, राइज़िंग मार्केट में एसआईपी कम करनी चाहिए। अभी राइज़िंग मार्केट समझ रहे हो? फॉलिंग मार्केट, मार्केट बहुत नीचे अभी भी है, बहुत ऊपर नहीं आया है मार्केट, तो उसमें वो रही है। लेवल्स वगैरह ज़्यादा डिस्कस करने को नहीं रहेगा। मोस्टली इंट्राडे में जो होना होगा, वही होगा। अभी के लिए नंबर मान-मान के रखिए। आपकी 23,300 का जोन जो है, छोटा-मोटा सेलिंग के लिए 23,300 है। कि 23,300 के नीचे टूटा, 23,280 बन गया। 23,280 के नीचे टूटा, तो 23,200 तक बन गया। बट वो बड़ा फॉल का नहीं है। नंबर, बड़ा फॉल का नंबर आपके लिए क्या होगा? बड़ा फॉल का नंबर होगा कि 23,200 हम क्लोजिंग बेसिस से फिर से तोड़ दें। मार्केट ने क्या किया है? एग्ज़ैक्टली आके हर्डल लिया है 100 एंड 200 डेमा पे, डेली मूविंग एवरेज पे जाके एग्ज़ैक्टली हर्डल ले लिया है। वही रियल चैलेंज है हमारे लिए कि वो आके एग्ज़ैक्ट नंबर पे आके हर्डल ले लिया। अब वो चूँकि वहाँ पे आके हर्डल लिया है ना, तो ऐज़ अ बियर मुझे ये नहीं समझ में आ रहा है कि मैं जो पोजीशनल शॉर्ट्स हैं जो अदर एक्सपायरी में हैं, अप्रैल में, जून ये सब में हैं, उनको मैं एग्ज़िट करूँ या ना करूँ। मुझे वो थोड़ा सा डाउटफुल आ गया। तो आई एम जस्ट वेटिंग कि क्या होगा। इंट्राडे में 23,400 के ऊपर अगर मार्केट निकाल देता है, तो वो 23,500-23,530 की तरफ़ इज़ीली बढ़ेगा। क्लोजिंग बेसिस पर अगर 23,400 के ऊपर क्लोज करता है, मेरा मानना ये है कि पोजीशन शॉर्ट्स एग्ज़िट कर देना चाहिए या फिर हेज खरीद लेना चाहिए, एट द मनी का। ये कर लेना चाहिए। हेज कॉस्ट मान लीजिए लगेगा, लगेगा। बट खरीद लीजिए। ये मेरा मानना है। तो देख लेते हैं कि क्या होगा, क्या नहीं होगा। बट उसके पहले, ठीक है? शांति से रहिए और उसके हिसाब से प्लानिंग करिए। ज़्यादा बहुत ज़्यादा एग्रेसिव कुछ हो जाने की ज़रूरत नहीं है।
बैंक निफ़्टी में सेम चीज की अगर हम बात करें, तो बैंक निफ़्टी में ये लेवल्स आपके लिए निकल… अच्छा बैंक निफ़्टी ना, टुवर्ड्स द एंड ऑफ़ फ्राइडे सबसे ज़्यादा बुलिश हो के बंद हुआ था। तो बैंक निफ़्टी में ना ये नंबर आपको देखना रहेगा। बैंक निफ़्टी में ये नंबर आपको कितना देखना रहेगा? रुक जाइए। हाँ, 45,500 का लेवल। जब तक 45,500 शॉर्ट नहीं बनेगा, ठीक है? एंड अप साइड के लिए क्या लेवल ध्यान रखने हैं? अप साइड के लिए लेवल हमको ध्यान रखने हैं, बैंक निफ़्टी में, अप साइड के लिए लेवल हमको ध्यान रखने हैं हैं 45,650 के। उसके ऊपर निकलता है, 45,800, 46,000 की तरफ़ इज़ीली अप्रोच कर सकता है। इस पूरे फॉल में सबसे स्ट्रांग बैंक निफ़्टी चला था, और वही अभी भी चल रहा है। पूरे राइज़ में सबसे स्ट्रांग चला था। आईटी, फ़ार्मा, ऑटो एंड एफ़एमसीजी वो सब आज भी वीक हैं। तो बैंक निफ़्टी टू एन एक्सटेंट पुल कर सकता है। बट उसके बाद रैली लेने का मेन वही आएगा। अभी बैंक निफ़्टी में देखते हैं कि क्या हो रहा है, क्योंकि आईआईसी तो पुल किए जा रहा है, किए जा रहा है, किए जा रहा है। उसके नंबर्स पता नहीं कितने सॉलिड आने हैं कि इतना पुल किया जा रहा है कि 45,350 पे पहुँच चुका है। लेट्स सी क्या होना है, क्या नहीं होना है। नंबर्स वगैरह सब कुछ बता देंगे, एंड अकॉर्डिंग हम प्लान करेंगे। और ये वीक मंथली एक्सपायरी का वीक भी है, तो बाकी इंडेक्सेज़ पर भी फ़ोकस ज़रूर रखिएगा। वीडियो अच्छी लगी हो, तो लाइक ज़रूर कर दीजिएगा। एंड क्रिप्टो भी पूरा साइडवेज़ ही चल रहा है, तो बहुत ज़्यादा वहाँ पे मेरे को बताने का कुछ है नहीं। वीडियो अच्छी लगी हो, तो लाइक ज़रूर कर दीजिएगा।