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श्रीमद भागवत कथा || परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज || Day- 6 || Pune Hadapsar ||

Lokanath Swami Official 2:44:00

Transcription

गोविंदा गोविंद राधे राधे राधे गोविंदा गोविंद राधे गोविंदा [संगीत] राधे गोविंद राधे गोविंद राधे गोविंद राधे सुंदर कमल नयन दल लोचन सुंदर कमर लोचन सुंदर कमल नयन तल लोचन सुंदर कमल नयन दल लोचन सुंदर कमल सुंदर कमल यन दल लोचन सुंदर कमल दया मा की चितवन हारी पाख चित बन हारी पाख चित वनहा बाकी चित मनहा राधे रज जनमन सुख कारी राधे श्यामा श्यामा श्याम राधे ब्रज जन मन सुख कारी राधे श्याम श्यामा श्याम राधे बज ज नवाना सुख का राधे श्यामा श्यामा श्याम राधे ब्रज जन मना सुख कारी श्याम श्यामा श्याम राधे ब्रज जनमन सुख कर राधे श्यामा श्यामा [प्रशंसा] श्यामा राधे ब्रज जनमन सुख कारी राधे श्याम श्यामा श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम राधे श्यामा श्यामा श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम राधे गज जन मन सुखद राधे श्यामा श्यामा श्यामा ब्रज जन मन सुख कारी राधे श्याम श्यामा श्याम राधे श्यामा श्यामा श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम सुंदर कमल नयन दल लोचन सुंदर कमल नयन दल लोचन बा की चित बन हारी बा की चित बन [संगीत] हारी बाकी चित वनहा बाकी चित वनहा राधे श्यामा श्यामा श्या राधे श्याम श्याम श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे श्याम श्यामा श्याम हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे राधे ब्रज जनमन सुख कारी राधे श्याम श्यामा श्याम बज जन मन क ह कृ राधे श्याम श्यामा श्याम राधे जन मन सुख काली राधे श्याम [संगीत] श्याम हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे श्या श्या हरे रामा हरे रा रामा रामा हरे हरे श्याम श्याम श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे श्याम श्याम रंदरा श्रीमद् भागवत महापुराण की भागवत कथा महा महोत्सव की जगतगुरु शील प्रभुपाद की परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज की तो अभी यहां पर हमारे धीर शांत प्रभु जी जो आए हैं श्याम सुंदर प्रभु एवं शुभांगी माता जी के सुपुत्र हैं महाराज श्री के शिष्य हैं तो समग्र परिवार भगवान का भक्त है इस कन के शरणागत भक्त हैं समस्त परिवार तो ध्रुव प्रभु जी क्षमा कीजिए धीर शांत प्रभु जी जो है वह महाराज जी का माल्यार्पण करके सत्कार करेंगे तीर शांत प्रभु जी सबसे निवेदन है दोनों हाथ उठाकर जोरदार पुन एक बार हम लोग महामंत्र कहेंगे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज की बहुत बहुत धन्यवाद

तो पुनः एक बार आप सभी श्रोता गणों का मैं स्वागत करना चाहता हूं आप लोग यहां पर इतनी अच्छी संख्या में उपस्थित होते हैं हम लोगों का उत्साह वर्धित हो जाता है महाराज श्री बड़ी सुंदर कथा भागवत के प्रथम स्कं अंतर्गत यह कथा चल रही है कल परीक्षित महाराज जी की कथा हम लोग श्रवण कर रहे थे महाराज श्री ने बताया कि यह हमारे आदर्श राजा है परीक्षित महाराज महाराज जो केवल राजा ही नहीं थे अपितु ऋषि भी थे इसलिए इन लोगों को राजर्षि कहा जाता है क्या कहा जाता है राजर्षि राजा भी है और साथ ही साथ ऋषि भी है तो इस प्रकार से हमको धन की ज्ञान की और इन दोनों के साथ भक्ति की भी विशेष आवश्यकता होती संस्कृति की आवश्यकता होती है जीवन मूल्यों की अपेक्षा होती है आवश्यकता होती है एक छोटा सा मैसेज पढ़ रहा था जहां पर यह बताया जा रहा था कि किस प्रकार से किसी देश के ऊपर आप बम भी गिरा दो तो वह देश नष्ट नहीं हो सकता वह पुनः खड़ा हो सकता है इसका उदाहरण हम लोग जापान को देखकर ले सकते हैं जापान के ऊपर बम गिराने पर भी वह देश खड़ा हो गया और एगजैक्टली दूसरी ओर आप यह देख सकते हैं कि अफगानिस्तान जैसे देश हैं जो धर्म हो गए हैं जिन्होंने सही मात्रा में या सही प्रकार से धर्म की रक्षा नहीं की धर्मो रक्षति रक्षित ऐसे कहा गया है तो ऐसे देश का अदह पतन निश्चित है और इसके ठीक अपोजिट इजराइल जैसे देशों से हम सीख सकते हैं समझ सकते हैं जिन्होंने अपने जीवन मूल्यों को अच्छी तरह से संभाला तो इतने आप देख सकते हैं विविध प्रकार की विकृति के अलावा भी और बहुत प्रकार के संकटों के बाद भी वह देश स्वावलंबी है अपने पैर पर खड़ा है इसलिए हम यह बताना चाहते हैं धन के साथ ज्ञान के साथ कल जैसे महाराज जी कह रहे थे कि लोग सुशिक्षित तो हो रहे हैं दे आर वेल एजुकेटेड बहुत सीखे सवरे लोग तो हैं लेकिन धीरे-धीरे अपनी संस्कृति खोते जा रहे हैं दे आर नॉट कल्चरड धीरे-धीरे संस्कृति खोते जा रहे हैं जैसे महाराज जी हमेशा बताते हैं जो मां होती है हम लोग उसको मम्मी मम्मी कहते हैं क्या कहते हैं मम्मी और मम्मी जो होती है आप लोग जानते हैं इजिप्त वगैरह प्रदेश में जो मुर्दे गाड़े जाते हैं उनको मम्मी कहते हैं और दूसरे तरफ पिताजी को हाय ड बाय डड ऐसे कते डड डड मतलब वो भी डेड हो गए हरे कृष्णा तो इस प्रकार से आध्यात्मिक मराठी में आई कहते हैं तो एक कीर्तनकार कह रहे थे आध्यात्मिक ईश्वरा दर्शन घड़ो नारी ती आई तो हमारे इकन के इकन पुणे के अध्यक्ष श्रीमान राधेश्याम प्रभु जी यहां पर उपस्थित है माल्यार्पण करके कथा के भी अध्यक्ष राधेश्याम प्रभु जी और महाराज जी का माल्यार्पण करेंगे हरि बोल इस प्रकार से परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज की श्रीमान राधेश्याम प्रभु जी की हरे कृष्णा बहुत-बहुत धन्यवाद

एक थोड़ी एक दुखद घटना का उल्लेख करने का आदेश मुझे प्राप्त है मैं आप लोगों की सूचना के लिए बताना चाहता हूं हमारे आदरणीय माननीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी साहब जो हैं उनके माता श्री अभी मैं कह रहा था आध्यात्मिक ईश्वर का दर्शन कराने वाली वह मां जो आदि गुरु मानी जाती है पहली भागवत में काफी स्थान पर माता के लिए माता-पिता के लिए गुरु शब्द आया जैसे रामचरित्र में सुखदेव गोस्वामी कहते हैं गुरुवर थ तक्त राज तो माता जो है व पहली मां है पहली गुरु है जो बच्चे को सिखाती है पढ़ाती है तो र मोदी साहब की मातो श्री माता जी जो है हीरा बाजी दामोदर मोदी उनका आज वैकुंठ गमन हो चुका है परलोक में सिधार चुकी है तो उनके कल्याण के लिए उनके आत्मा के उद्धार के लिए हम लोग हरे कृष्ण महामंत्र का उच्चारण करेंगे ताकि उनकी विशेष विशेष सद्गति हो तो सबसे निवेदन है भाव पूर्ण होकर दोनों हाथों को उठाकर हम लोग महामंत्र कहेंगे हीरा बा दामोदर दास जी मोदी उनके लिए हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे मैं महाराज श्री के चरणों में निवेदन करता हूं कि वे इस छठवें सत्र का आरंभ करने करें और अपनी सुमधुर वाणी से हमें कृतार्थ करें ग्रंथ राज श्रीमद् भागवत महापुराण की जगतगुरु शील प्रभुपाद की थाई गौर प्रेमानंदे हरि हरि बोल क्या कृष्णा हरे हरी आप तैयार हो धन्यवाद

आज की कथा है आज कृष्ण कथा हो गई प्रथम प्रथम स्कंद से हम दसव स्कंद जंप करेंगे इसीलिए कृष्ण का गा गीत गान भी गाते हैं उसके लिए आप तैयार हो कृष्णा जिन का नाम [संगीत] है गोकुल जिनका धाम [संगीत] है का कहां तैयार हो कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिन का धाम है क जिन का धाम है गोकुल जिन का धाम है ऐसे श्री भगवान को मेरे बारंबार प्रणाम है ऐसे श्री भगवा न को मेरा बारंबार प्रणाम है ऐसे श्री भगवान को मेरे बारंबार प्रणा नाम है ऐसे श्री भगवान को मेरे बारंबार [संगीत] प्रणाम मन ही मन मन ही मन प्रणाम भी कीजिए बारंबार यशोदा जिन की मैया है नंद जी बपया हैन की मैया है नंद जीया समझ में आ ही रहा होगा यशोदा मैया कीन बाबा की यशोदा जिन की मैया है नंद जी बपया हैन की मैया मैया हैया ऐसे श्री गोपाल को में मेरे बारंबार प्रणाम है श्री गोपाल को मेरे बारंबार प्रणाम ऐसे श्री गोपाल को मेरे बारंबार प्रणाम हैसे श्री गोपाल मेरे बारंबार नाम है कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिन का थाम है जिन का नाम है गोकुल जिन का नाम है राधा जिन की जाया है अद्भुत जिनकी माया है जिन की मा श्री राधे जिन माया [संगीत] राधा जिन की जाया है अद्भुत जिनकी माया है धा जिनकी है प्र जिनकी माया है मोड़ में आइए ऐसे श्री घनश्याम को मेरे भरम बार प्रणाम हैसे श्री घनश्याम बारंबार प्रणाम है ऐसे श्री घनश्याम को मेरे बारंबार प्रणाम ऐसे श्री घन श्याम को मेरे बारंबार प्रणाम है कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिन का [प्रशंसा] [संगीत] धाम [संगीत] अपना भाव अपना भाव भक्ति नृत्य के माध्यम से भी प्रकाशित होती [संगीत] है श्री श कृष्ण चैतन्य महाप्रभु या और कई सारे भक्त कीर्तन प्रारंभ होते ही बस बैठना [संगीत] कठिन कूद पड़ते नाचते [संगीत] गाते हम भक्ति कर रहे हैं तो वृंदावन में भक्ति देवी सदैव नृत्य करती [संगीत] है लूट लूट दधि माखन खायो ग्वाल बाल संग धेनु चरा लूट रही मान खा च लूट लूट दध माखन खायो ग्वाल बाल संग धन चरा लूट रही माखन आयो लल संग माखन छोड़ ऐसे लीला धाम को मेरे बारंबार प्रणाम हैसे लीला धाम को मेरे बारबार प्रणाम है ऐसे चोर को भी प्रणाम चोर को इस जगत में कोई प्रणाम नहीं करता लेकिन ये चोर तो हरी हरी और महा चोर चोरों में अग्रगण्य [संगीत] चोर लूट लूट दधि माखन खायो ग्वाल बाल संग धनु चरा लूट दध माखन खायो [संगीत] ऐसे लीला धाम को मेरे बारंबार प्रणाम [संगीत] हैसे लाधा धाम को बारंबार प्रणाम कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका नाम है कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है ऐसे [संगीत] श्री भगवान [संगीत] को [संगीत] बारंबार [संगीत] बारंबार प्रणाम [संगीत] है [संगीत] कृष्ण जिनका नाम है गोकुल जिनका धाम है कृष्णा जिनका नाम है गोकुल जिनका नाम है ऐसे श्री भगवान को मेरे बारंबार प्रणाम है ऐसे श्री भगवान को मेरा प्रणाम है हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे [संगीत] हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे हरे रा हरे रामा राम रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे [संगीत] हरे हरे कृष्णा हरे कणा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे हरे रामा हरे रा रा रा हरे [प्रशंसा] हरे क हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे राम हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे थाई गौर हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल गौर हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल हरि बोल जया प्रभु पदा प्रभु पदा प्रभु पदा श्र प्रभु पदा प्रभु पदा प्रभु पदा प्रभु पदा प्रभु प्रभु पदा प्रभु पदा प्रभु पद श प्रभु [संगीत] प्रभ प्रेमानंद [संगीत] धन्यवाद

राधे श्याम राधे श्याम से फ्यू वर्ड हरे कृष्णा हम लोगों का यह परम सौभाग्य है कि हमारे यहां पर इसकन पुना स्कोन पुना के अध्यक्ष श्रीमान राधेश्याम प्रभु जी यहां पर उपस्थित है हरि बोल तो हमारे भागवत सप्ताह समिति के अध्यक्ष श्रीमान केशव प्रभु जी से मैं निवेदन करूंगा कि वह प्रभु जी का इंट्रोडक्शन यहां पर देंगे और मैं राधेश्याम प्रभु से निवेदन करूंगा कि वे अपना मनोगत यहां पर व्यक्त करेंगे श्रीमान प्रभु जी माल्यार्पण भी करो हरे कृष्णा सभी भक्त हाथ ऊपर करके प्रेम से एक बार हरे कृष्णा मंत्र बोलेंगे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा 2002 की बात है जब हम राधेश्याम प्रभु से पूछ रहे थे कि पुना में कैसे प्रचार बढ़ेगा महाराज जी भी थे महाराज जी ने कहा भागवत से घर घर में भक्ति जागृत होगी और तब से हरि बोल श्रीमद् भागवत कथा की तो तब से राधेश्याम प्रभु जी के मार्गदर्शन में हम यह भागवत कथा कर रहे हैं प्रभु जी आईआईटी पवई से खास टॉपर रैंक में है साथ में विदेशों में एमटेक मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी आईईटी मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी से है बहुत बड़ी गुणवत्ता होते हुए भी उन्होंने भौतिक उपाधि न ग्रहण करके कृष्ण की उपाधि ग्रहण की और पूरा अपना जीवन कृष्ण भावना में अर्पित कर दिया है श्री परम पूज्य राधानाथ स्वामी महाराज के बड़े ही प्यारे शिष्य है प्रभु जी यू चार में नंबर वन है इनकी कृपा से जब हम प्रचार करते थे तो बहुत सारे भक्त थे परंतु युद्ध की बहुत कम थी तो प्रभु जी ने पुना में युद्ध प्रचार शुरू किया और धीरे-धीरे इसको बढ़ा के पूरे इंडिया ही नहीं वर्ल्ड में भी जितने सेंटर है उस जगह प्रभु जी के शिष्य प्र शिष्य है और वह सब जगह सेवा कर रहे हैं अभी हम ज्यादा समय नहीं लेते हुए इसकन पुना का हमारे इसकन एनवी सीसी कोंडवा का कात्रज बायपास राधा कुंज बिहारी मंदिर और हड़पसर सेंटर उत्तम नगर ऐसे सभी सेंटरों के प्रभु जी हमारे प्रेसिडेंट है और हमारी एक कमिटी है टेंपल मैनेजमेंट कमिटी उनके अंडर सेवा करती है साथ में प्रभु जी नगर औरंगाबाद और कई जिलों में जोनल सुपरवाइजर भी है इस प्रकार पूरे महाराष्ट्र और देश विदेशों में भी प्रचार करते हैं प्रभु जी अत्यंत कोमल स्वभाव और शास्त्र को लोगों के भाषा में वैज्ञानिक भाषा में कैसे प्रस्तुत करना यह इनकी विशेषता है माइंड कंट्रोल सेवन स्टेप बहुत सारे कोर्स प्रभु जी ने लिखे गीता हमारे जीवन में कैसे अभ्यास के साथ होनी चाहिए ऐसे कई किताबों को भी उन्होंने हमारे भक्तों के लिए लिखा है तो प्रभु जी को हम विनंती करते हैं कि आपकी दिव्य वाणी भक्तों पर कृपा वर्षा कीजिए हरे कृष्णा मैं श्रीमान केशव प्रभु से निवेदन करना चाहूंगा प्रभु जी का माल्यार्पण करके सत्कार करेंगे सब लोगों को जोरदार हरि बोल बोलना है तीन बार हरि बोल हरि बोल हरि बोल श्रीमान राधेश्याम प्रभु जी की हरे कृष्णा सुना दे रहा है क्या पीछे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ओम अज्ञान जंजन सलाया चुन मतम येन तस्मै श्री गुरवे नमः नम ओम विष्णु पादा कृष्ण पृष्ठ भूतले श्रीमते भक्ति वेदांत स्वामि निति नामनेर स्वत देवे गौर वाणी प्रचार निर् विशेष शून्यवाद पा त्य देश तारि पांचा कल्पतरु कृपा सिंधु एव पता नाम पावन वैष्णव नमो नमः जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री अद्वैत गदाधर श्रीवा सादि गौर भक्त वृंद हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज के मुखारविंद से हम लोग पिछले पांच दिन से भागवत कथा सुनते आए हैं इस दुनिया में भगवान कैसे अवतरित होते हैं अवतरित होकर बहुत विविध सुंदर सुंदर लीलाओं को रचाते हैं भगवान और उसके बाद अपने स्वधा म लौट जाते हैं तो क्यों ऐसे भगवान करते हैं भगवान खुद ही बताते हैं मैं धर्म के स्थापन के लिए आता हूं भक्तों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए आता हूं दुष्टों का दमन करने के लिए आता हूं और मेरे प्रेमी भक्तों के साथ प्रेम का आदान प्रदान करने के लिए मैं आता हूं साथ-साथ इस दुनिया में रहने वाले सब जीवों को बैकुंठधाम लौटाने के लिए शिक्षा देने के लिए आता हूं तो महाराज जी दोनों भगवत गीता एक अर्जुन को बोला गया एक उद्धव को बोला गया दोनों के बा महाराज जी ने हमको परिचय दिलाया और हमें ज्योतिसर में लेकर गए कुरुक्षेत्र में जो पेड़ है अक्षय वट जिधर भगवान कृष्ण अपने मुख विदों से गीता का उपदेश दिया अर्जुन को तो महाराज ने उसके बारे में बताया तो और महाराज जी पिछले पांच दिनों में बहुत सुंदर तरीके से विविध लीलाओं का वर्णन की कैसे ब्रह्मा जी के भी गुरु बनते हैं भगवान सर्वप्रथम आदि काल में जब भगवान ने इस दुनिया की निर्माण की क्यों निर्माण किया क्योंकि हम सब एक आध्यात्मिक स्थिति को छोड़कर इस दुनिया में आए हैं कुछ अलग प्रोग्राम बनाने के लिए अपने अपने इंद्रियों की र्पण के लिए इस दुनिया में सब जीव आए हैं तो उनके लिए भगवान इतने बड़े दुनिया बनाए हैं दुनिया बनाकर ब्रह्मा जी को एक लीडर बनाकर छोड़ा है सबको रोटी कपड़ा मकान की व्यवस्था करो इस मतलब भुवन बनाया गया उर्म गति सत्व मध्य राजसा जगन गति तामसा सत्व लोगों को उर्द लोको में भेजो रग लोगों को धरती में और तमग लोगों को रको में इस तरह स्थान दिया गया सबको सबको भोजन की व्यवस्था किया गया 84 लाख योनियों में जन्म लिया हुआ जीवों के लिए भोजन की व्यवस्था भगवान ने व भी की है इसके बाद सा जीव उत्पात मचाते हैं इसलिए भगवान ब्रह्मा जी को दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं खुद ही और बोलते हैं ब्रह्मा कोवे को जनता को प्रदान करो इसको पढ़कर समझकर चित्त को शुद्ध करके जीव अपने भगवान के धाम लौट सकते हैं उस उद्देश्य से भगवान ने वेद पुराण इत्यादि की माया मुग जीव नाही स्वत कृष्ण ज्ञान अव कोल कृष्णा वेद पुराण इस तरह भगवान बड़े अति कृपाल परम दयालु है हम जीवों के ऊपर सिर्फ खाने पने की व्यवस्था ही नहीं किया है साथ साथ हमको ऊपर उठाने के लिए अपने सधा में लेने के लिए भगवान ने उपाय बनाया है तो महाराज जी बता रहे थे ब्रह्मा जी एक महाजन है उनको कैसे भगवान ज्ञान देते हैं महाराज जी ने ये भी बोला भीष्म पितामह जब शर सेय में लेटे थे उनके समक्ष बैठकर भगवान ने विष्णु सास नाम सुनी और भगवान के मुख बंदों को निहारते हुए विष्णु पिता हमने इच्छा मृत्यु के अनुसार संक्रांति के समय भी जनवरी में अपने शरीर त्याग वो इस तरह भगवान के शुद्ध भक्त भगवान के साथ कैसे प्रेम का आदान प्रदान करते हैं तो और कैसे भागवत बोला गया इस दुनिया में वेदव्यास को नारद मुनि की उपदेश मिली उसके बाद भागवत ग्रंथ रचाया तो महाराज उसके बारे में भी बोले आप लोग अनेक पुराण के बारे में जानते हो आप लेकिन भागवत पुराण खास पुराण है इसका कारण क्या है बाकी सब पुराण में बताया गया कि इस दुनिया में अगर आपकी कुछ कठिनाई हो तो उसको कैसे सुल जाना और थोड़ा और क और थोड़ सुविधा को कैसे बढ़ाना इस दुनिया के अंदर लेकिन भागवत आपको सिखाता है इस दुनिया को छोड़कर हम बैकुंठ कैसे लौटना यह भागवत सिखाता है तो अगर मान लीजिए अगर कोई अरवाड़ा जेल में कोई कदी हो उसको ठंडी बज रहा है तो आप ब्लांकेट देते हो मच्छर काट रहा तो मच्छर दने देते हो बड़ी काम नहीं है अगर जेल से बाहर लाने के लिए उसके हृदय को सुधारते हो व सबसे बड़ा काम है तो यही भागवत करता है तो महाराज जी भागवत को ही आधार बनाकर भगवान विष्णु और ब्रह्मा के बीच में संबंध के बारे में बोला उसके बाद भीष्म पिता के बारे में हमने सुना और कैसे भगवान कृष्ण अद्भुत लीलाए करते हैं बैठे थे रथ के ऊपर लेकिन अचानक उतरा बागती हुई आई रोती हुई कृष्ण कृष्ण महायोग देव देव जगतपते नान्य तदम प यत्र मृत्यु परस्पर हे भगवान मृत्यु इतने निकट आ गया पांडव भी मुझे बचा नहीं सकते तो आपके पास ही आई हूं मेरे योनि में जो शिशु है छोटा शिशु अंतिम शिशु है पांडव वंश के उसको बचाइए मैं भी मरने के लिए तैयार हूं लेकिन शिशु को बचाइए ताकि पांडव वंश के अच्छे कार्य इस दुनिया में चलता रहेगा तो तुरंत भगवान उनके योनि में प्रवेश करके अपने हाथ में गधा लेकर गोल गोल घूमकर परीक्षित को सुरक्षा प्रदान की साथ-साथ पांडवों के ऊपर चलाया गया जो दूसरा जो ब्रह्मास्त्र था उसको भी भगवान अपने चक्र को लेकर पराजित कर दिया इस तरह कुंती माता ने देखा कि भगवान दो ब्रह्मास्त्र को परास्त करके अश्वथामा की जो योजना था उसको टकरा दिया भगवान ने और इस तरह भगवान अद्भुत कार्य करते हैं कैसे अपने भक्तों को रक्षा करते हैं भगवान कृष्ण इस दुनिया में भगवान के बच्चे मासूम बच्चे जैसे हैं भगवान के भक्त भगवान के ऊपर एकदम निर्भर है अनन्य भक्त होते हैं पांडव लोग ऐसे तो इस तरह महाराज जी परीक्षित के बारे में पांडवों के बारे में भी लीला बताया उन्होंने और कांट नूपुर में रुक्मिणी जी के अवतरण साथ साथ उसके साथ जोड़कर पंढरपुर में एक बहुत बड़ा मंदिर बनने जा रहा है महाराज जी के नेतृत्व में सकड़ से भी ज्यादा बड़ा प्रोजेक्ट है उसकी उसके मैप प्लान भी आपको दिखाया गया आपको और इस तरह भागवत से अनेक विषयों को लेकर महाराज जी बहुत मधुर तरीके से जाते हैं उनके पांच दिन के प्रवचन में मुझे एक प्रवचन सबसे बहुत हृदय स्पर्शी रहा वो इस विषय के ऊपर महाराज जी बता रहे थे कि भगवान ने हम लोगों के लिए एक मैप दिया है शवास दम सर्वम य जगत जगत दुनिया में हर एक जीव के लिए कोटा दिया भगवान ने तुम अपने अपने कोटा को लो दूसरे लोगों के पॉकेट में हाथ मत डालो और कुश रहो जो भगवान ने दिया है अगर भगवान को केंद्र बिंदु बनाकर अह बीज प्र भगवान बताते हैं सब सारे जीव सोचेंगे कि सब मेरे भाई बहन है इस दुनिया में हम सब भगवान के ही बच्चे हैं हम एक दूसरे को क्लेश नहीं देना चाहिए सब लोग भगवान की इच्छा के अनुसार अपने

जीवन चलाना चाहिए। अगर इस बात को अगर लोग समझ लेते हैं, साथ-साथ अपने संकुचित हृदय को छोड़कर विशाल हृदय अपनाएँगे। लोग उसके बारे में महाराज ने एक श्लोक बोला— अयम निज परो वेति गण नाम लघु चेत साम उदार चरिता नाम। तो वसुदा येव कुटुंबकम। ये वसुदेव कुटुंबकम मतलब सारे दुनियाय कुटुंब है। भगवान परम पिता है, विठ्ठल रखुमाई वो हमारे परम माता-पिता हैं। हम सब जीव उनके बच्चे हैं और भगवान की इच्छा अनुसार अपने जीवन चलाना चाहिए।

और भगवान की इच्छा क्या है? क्यों इस दुनिया का निर्माण किया है? सिर्फ़ खाओ, पियो, सोओ, मज़ा करो, इसके लिए नहीं बनाया भगवान ने। ऐसे भोग करने से रोग होता है। रोग करने से इंसान विविध क्लेश में तड़पता है। अगर हम भोग करने के बदले भगवान के साथ हम भक्ति योग में जुड़ेंगे, उससे हम लोग चित्त को शुद्ध कर सकते हैं। और उसके लिए बहुत सरा एक औषधि है, दो औषधि है। सुंदर चत स् महाराज की भवा औष शत्र मनो बरामा। भागवत के अंदर बताया गया कि भागवत एक भव औषधि है और भगवान के हरिनाम भी औषधि है। इन दोनों औषधियों को अगर हम गंभीरता से लेंगे, हम आसानी से संसार सागर को पार करके हम बैकुंठ पहुँच जाएँगे।

हम तो इस तरह महाराज जी बता रहे थे कि आप सब लोग इकट्ठे हुए हो, इधर सात दिन के कार्यक्रम में आप लोग आए हो। तो महाराज हम लोगों को यह सिखा रहे हैं कि हम इस दुनिया में शांति से कैसे जी सकें, भगवान की भक्ति में जुड़कर कैसे रहें, भगवान की इच्छाओं को कैसे समझें शास्त्रों के द्वारा और कर अपने जीवन को जीवन में उसको उतार कर परमानंद को हम कैसे प्राप्त करें। हम अपने सब नाता रिश्ता सब लोगों को भक्ति में जोड़कर इस दुनिया में भी शांति, सुख और आनंद को कैसे हम प्राप्त करके अंतिम काल में भगवत चिंतन करते हुए वैकुंठ धाम कैसे हम लौट सकें। इसके लिए बहुत सुंदर प्रोग्राम महाराज जी हम लोगों को सिखा रहे हैं।

तो इस तरह सात दिन का भव्य कार्यक्रम हड़पसर में जो आयोजित हुआ है, श्रीमान केशव प्रभु और उनके टीम के द्वारा, यह पहली बार इस तरह का बड़ा कार्यक्रम इधर हो रहा है। इसके पहले महाराज जी उधर गणेश कला कड़ा केंद्र में करते थे। बहुत सालों से, 20 साल से कर रहे हैं महाराज जी इस तरह के सुंदर कार्यक्रम। 4000-4000 लोग आ जाते थे हर दिन ऐसे महाराज के कार्यक्रम में। महाराज मधुर कीर्तन भी करते हैं, मधुर लीला भी बताते हैं और महाराज जी पिछले 1987 से लेकर ब्रजमंडल परिक्रमा लेकर आए हैं। तो उसमें हजारों-हजारों भक्त जुड़ते हैं और महाराज सबको 30 दिन के लिए वृंदावन में परिक्रमा के लिए लेकर जाते हैं, सारे कार्तिक महीने में। तो इस तरह महाराज धाम दर्शक हैं, भगवान के लीला चेष्टा को मधुर तरीके से समझाकर हमारे चित्त में भगवान को बसाने में भगवान महाराज जी बहुत बड़े निपुण हैं। तो हम लोगों का परम भाग्य है कि महाराज इस बार गणेश क्रीड़ा केंद्र में करने के बदले हड़पसर में पहली बार कर रहे हैं। इसका एक मूल कारण है, इसका क्यों? क्योंकि हड़पसर में श्रीमान केशव प्रभु और उनके के टीम के भक्त लोग बहुत सालों से प्रचार करते आए हैं। उनका इधर-उधर दो-दो तीन छोटे-छोटे सेंटर्स हैं। लेकिन महाराज जी की भी इच्छा है और सब भक्तों की इच्छा है कि हड़पसर में एक सुंदर मंदिर हो, ताकि सब भक्त लोग आ सकते हैं और भगवान के दर्शन कर सकते हैं, भक्ति कर सकते हैं। मंदिर का मतलब पाँच चीज आपको प्राप्त होगा मंदिर में: भगवान का दर्शन, भगवान के संबंध में किताबें (इसको कृष्ण शिक्षा बोलते हैं), और भगवान के भक्तों का संग, और भगवान के नाम का जपमाला और भगवान के दिव्य प्रसाद। तो यह पाँच चीज प्राप्त होता है आपको मंदिर में। अनेक मंदिर भारत में उधर दर्शन प्राप्त होता है, थोड़ा प्रसाद प्राप्त होता है, लेकिन शिक्षा और भक्त संग, नाम इत्यादि नहीं मिलता लोगों को। लेकिन इस तरह की मंदिर, सुंदर मंदिर बनेगा हड़पसर में और महाराज जी की इच्छा है कि हड़पसर के सब कांग्रेगेशन, डिवटी, अनेक भक्त हैं, युवक हैं, सब लोगों को मौका मिले भगवान कृष्ण शिव ग्रह की सेवा करने के लिए, मौका मंदिर में आकर जुड़कर एक दूसरे को मदद करते हुए भगवान के गुणगान किया जाए और हजारों संख्या में प्रचुर मात्रा में लोग आकर भक्ति मार्ग में जुड़कर लाभान्वित हों। यह महाराज जी की इच्छा है।

तो आप हड़पसरवासी इधर जो जुटे हुए हो, सब लोग आप इस सुंदर महाराज की इच्छा की आकर देना चाहते हो तो मैं आपसे एक विनंती करना चाहता हूँ कि यह सात दिन का कार्यक्रम कल हो जाए। उसके बाद साप्ताहिक, हफ़्ते में एक दिन होने वाला एक प्रोग्राम, गीता का क्लास चालू होने वाला है। इधर अनेक प्रचारक, महाराज के शिष्य बहुत सुंदर तरीके से प्रचार करते आए हैं, सालों साल। तो वह लोग अलग-अलग गीता कोर्सेस लेने वाले हैं। आपको एंट्रेंस में आपका नाम रजिस्टर होगा, आप नाम दे दीजिए, आपको बुलावा आएगा, फ़ोन कॉल आएगा आपको। आप लोग कार्यक्रम में जुड़िए। हम लोग साल में अगर सात दिन का प्रोग्राम अटेंड करके ले बजाकर चले गए, तो बाकी टाइम महाराज बता रहे थे कल कली पुराण बोल रहे थे, न्यूज़पेपर, ऐसे सिनेमा इन चीज़ में अगर मन डूब जाएगा तो यह किसके समान है? अगर बहुत बड़े समुद्र में एक डब्बा हींग को मिला दिया आपने, हींग का असर नहीं पड़ेगा। इसलिए हम लोग साल में एक बार सुनना अच्छी बात है, उससे भी अच्छा बात क्या है? हर हफ़्ते सुनना चाहिए हमको। कम से कम हफ़्ते में एक दिन आकर भक्तों के साथ संग करना, प्रसाद पाना, प्रवचन सुनना। महाराज जी के अनेक लेक्चर हैं, महाराज जी के सुंदर कीर्तन के ऑडियो हैं। अगर आप लोग, अनेक लोग नए, पहली बार आए हो, आप लोग महाराज के इस तरह के प्रवचनों को सुनना चाहते हो और उनके ग्रुप में जुड़कर रहना चाहते हो तो आप नाम भर दीजिए और कोर्स अटेंड कीजिए और आपको इस तरह के इकट्ठे के सुंदर भव्य कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आपको मौका मिलेगा।

तो महाराज जी उनका जन्म हुआ अरवाड़े में और पंढरपुर में, अरवाड़े में, बीड़ में, शोलापुर में, नोएडा में, ऐसे अनेक स्थानों में महाराज जी मंदिरों का निर्माण करके हजारों-लाखों भक्तों को जोड़ रहे हैं। महाराज जी भारत में भी और पाश्चात्य देशों में भी। तो प्रभुपाद जी कहा करते थे, महाराज जी को, तुम इतना मधुर कीर्तन करते हो, तुम महाराष्ट्र के तुकाराम हो। तो इस तरह महाराज जी अपने युवक अवस्था से लेकर अभी तक महाराज जी दिन-रात त्रपा जी के मिशन में जुड़कर योगदान दे रहे हैं और हम पुणे के भक्तों का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि महाराज जी अक्सर आते हैं पुणे में। जैसे उन दिनों में महाराज चार-पाँच बार आते थे, अभी कम से कम तीन बार आते हैं। दंड यात्रा में एक बार आते हैं, भागवत कथा के टाइम आते हैं। इस तरह हम फेस्टिवल में भी बुलाते हैं महाराज जी को। तो महाराज की इच्छा को आकार देने के लिए हम आप लोगों से विनंती करते हैं कि आप हड़पसरवासी, आप लोगों के द्वारा ही यह सुंदर प्रोजेक्ट आने वाला है और आप लोग भागवत कथा सुनकर सुरक्षित होकर आपके मन में इस उत्साह को लेकर प्रपात की किताबों को भी लीजिए, पढ़िए, नाम जप कीजिए। प्रभु बताते हैं, अगर सत्संग करते हो रोज़ और चार नियम पालन करते हो, भक्तों के संग में रहते हो, कृष्ण को अपना स्वामी के रूप में स्वीकार कर अपने सारे जीवन कृष्ण को केंद्र बिदु बनाकर चलाते हो तो इसी जन्म में आप भगवत नाम लौट जाओगे और आपको दूसरा कुछ चीज़ करने की ज़रूरत नहीं है।

तो केशव प्रभु और उनकी टीम बहुत सुंदर तरीके से बड़े प्रसाद आयोजित किया है। हर दिन आप लोगों के लिए इतने सुंदर पंडाल, इतने स्टेज डेकोरेशन, इतने सुंदर कीर्तन, इतने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाने वाले, मधुर तरीके से और इस तरह अनेक लोगों का योगदान है। मैं उन सब भक्तों को नमन करता हूँ और और धन्यवाद प्रकट करता हूँ, क्योंकि इस तरह के भव्य कार्यक्रम पुणे में सालों साल होते आया है। भगवान की कृपा है, प्रभुपाद जी की कृपा है और महाराज जी के हमारे ऊपर उनके कारण्य कटाक्ष है। हम महाराज को भी धन्यवाद देते हैं, इन सब भक्तों को धन्यवाद देते हैं। हरे कृष्णा। शल प्रभुपाद की जय। हरे कृष्णा राधे श्याम। प्रभु जी ने हमें बहुत ही अच्छा बताया है कि हमें इधर एक परमानेंट यह जो कथा है, जैसे कल हमारे एक प्रभु जी बताते थे, एक पिक्चर होता है और उसका एक ट्रेलर होता है, वो एक ही मिनट का होता है, पिक्चर लंबा होता है, वैसे ही हमारा सब मंदिर का दर्शन, गौर, नित्यनाई, राधा, गिरिधारी, सीताराम, लक्ष्मण इनका परमानेंट मंदिर यहाँ पर बनना चाहिए और हजारों लोग उस मंदिर में आने चाहिए, दर्शन करने चाहिए और सबको कृष्ण भावना मिलनी चाहिए। इसके लिए हम एक सुंदर मंदिर यहाँ हड़पसर परिसर में बनाने का संकल्प किया है। हमारे साथ हमारे उत्सव प्रमुख श्रीमान विकास जी अन्ना राकर और बहुत सारे भक्त लोग लगे हुए हैं, उन्होंने भी इस कार्यक्रम के लिए संकल्प किया है। तो आप सब लोग एक बार हरे कृष्ण मंत्र बोलकर प्रार्थना कीजिए कि हमें जल्दी से जल्दी भूमि प्राप्त हो जाए और यह कार्यक्रम अगली साल अपने इकट्ठे की जगह पर ही हो। तो हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। बहुत-बहुत धन्यवाद। साथ में ही सात दिन का गीता कोर्स रखा गया है हमारे गोयल गंगा की ओर से, गीता माता जी भी आ गई है, तो इनका भी हम हार्दिक स्वागत करते हैं। हरि बोल। तो भगवत गीता का सात दिन कोर्स है, इसमें भगवत गीता भी आपको मिलेगी, नया साल का कैलेंडर भी मिलेगा और सात सेक्शन में सात दिनों तक प्रसाद भी मिलेगा। तो पूरा गीता यह सब 00 सिर्फ़ रजिस्टर फी है, आप जल्दी से जल्दी वहाँ पर कर लीजिए और इस गीता में आप जुड़ जाइए जिससे आपके जीवन में दिव्य आनंद प्राप्त होगा और हर एक को इस यज्ञ में आहुति चढ़ानी चाहिए। तो कल हमारा खास श्री श्री लक्ष्मी बालाजी यज्ञ की, तो कल शाम को 4 बजे से 6 बजे तक यह बालाजी यज्ञ होगा। जो भी भक्तों की इच्छा है कि हमारा इतना, हजारों लोगों को भंडारा चल रहा है और 100 लोगों को हम प्रसाद खिलाएँगे, तो यदि 5000 की अपनी सेवा करते, एक व्यक्ति को पूरी दाल, चावल, जी, स्वीट के लिए 50 खर्चा है तो 4000 से ज़्यादा लोग डेली भोजन कर रहे हैं। तो जिसकी भी इच्छा है कि भाई हम इसमें सेवा करें एक 100 लोगों के लिए, तो यदि 5000 की सेवा करते हैं तो उनको यज्ञ, श्री यंत्र, बालाजी का कैलेंडर, चादर और पूर्ण आहुति प्राप्त होगी। तो जो भी भक्त इच्छा है वह अपना नाम लिख सकते हैं। अभी समय नाते हुए हमारे प्यारे गुरु महाराज जी को हम विनंती करते हैं कि आपकी मधुर कथा शुरू कीजिए। परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज की जय। जगतगुरु शील प्रभुपाद की जय। भागवत सेट एकदम सस्ते में यहाँ पर आ गए पीछे, तो जो भी भक्त लेना चाहते हैं स्टॉल से ले सकते हैं, अपना नाम दे सकते हैं। हमारे परम गति प्रभु आपकी वाह रा देख रहे। हरे कृष्णा। डिस्काउंट है ना आज, विशेष डिस्काउंट है। 5500 का यह भागवत हम सेट मराठी वाला 3500 में दिया जाएगा। इसके लिए हमारे कई भक्तों ने स्पॉन्सर किया है, योगदान है और यह आज और कल ही रहेगा, उसके बाद फिर फिर 5500 में लेना पड़ेगा। तो कृपा करके हमारे पास सिर्फ़ 100 और 100 ही सेट हैं और उसमें से 30 से ज़्यादा 40 तक सब चले गए, अभी 50-60 ही बचे हैं। जल्दी से जल्दी ले लीजिए। थैंक यू वेरी मच। हरे कृष्णा। महाराज के हाथ से साइन भी होगा। हरि बोल। ओ ज्ञान मरस ज्ञानांकुर उन मितम न तस्म श्री गुरुवे नमः। श्री चैतन्य मनो विषम स्पता निन भूतले स्वयं रूप कदा मम ददाति स्व पदा [संगीत]। हे कृष्णा करुणा सिंधु, दीन बंधु जगतपते, गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमोस्तुते। तब त कांचन [संगीत]। गौरंगी राधे वृंदावन शवरी प्रण मामी हरि प्रिय पां कल्प करू कृपा सिंधु वच पतित नाम पावन वैष्णव नमो नमः। कृष्णाय वासुदेवाय देवकी नंदनाय च नंद गोप [संगीत] कुमारा गोविंदाय नमो [संगीत] नमः। सुंदरते ध्याना उभे विटेवरी कर कटावरी हुनिया तुलसी हर गड़ा का से पीतांबर आवड़ निरंतर ची [संगीत]। ध्यान मकर कुंडले तड़पति श्रवण कंठी कौस्तुभ मण विराजित तुका [संगीत] मने [संगीत] माझे हेची सर्व सुख पाहि न श्रीमुख आ वड़ी [संगीत] ने नमो महा बदा न्याय कृष्ण प्रेम प्रदाय कृष्णाय कृष्ण चैतन्य नाम ने गर नमः कदा दक्षम नंदस [संगीत] [संगीत] बालकमेल नंदस [संगीत] बालक आराध भगवान ब्रजेश तनय धाम वृंदावनम रम्या काज उपासना बज वधु वर्ग नया कल्पिता श्रीमद भागवत मलम प्रेम पु मर्थ महा श्री चैतन्य महाप्रभु मतदम धरना पर नम ओम विष्णु पादा कहिए जानते हो प्रणाम विष्णु पादा कृष्ण प्राय [संगीत]। भूतले श्रीमते भक्ति वेदांत स्वामि नाम नमस्ते सारस्वती देवे गौर वानी प्रचार [संगीत] ने निर् विशेष शून्यवाद पाश्चात्य देश ने श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री अद्वैत गदाधर शी वासद गौर भक्त वृंद हरे कृष्ण हरे कृष्णा [संगीत] कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओ नमो भगवते वासुदेवाय नमो भगवते वासुदेवाय नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय राधा वृंदावन चंद्र की जय। राधा कुंज बिहारी लाल की जय। श्री श्री जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा की जय। श गनि की जय। ग्रंथ श्रीमद भागवत की जयति। ता चार्य श्रील प्रभुपाद की जय। ताई गौर प्रेमानंदे हरि हरि [संगीत] बोल। ल ग्लोरी समस्त उपस्थित भक्त बंद की जय। अनंत कोटि व वृंद की जय। कितने-कितने भक्त वृंद अनंत और कोटि हो जाए, ऐसे भी अधिक वैकुंठ में वहाँ की आबादी अधिक है। आप जानते होंगे, वहाँ की पॉपुलेशन अधिक है। बहुत बड़ा साम्राज्य है, अलौकिक दिव्य बैकुंठ धाम। उसे भी ऊपर महेश धाम भी है, शिव जी का धाम भी है। शिव जी का धाम में से आधा इस जगत में, अपने इस जगत में और आधा बैकुंठ में है। फिर हरि धाम मतलब भगवान के जो नाना अवतार हैं, अवतार, एक-एक अवतार, एक-एक वैकुंठ में अनंत कोटि, जैसे ब्रह्मांड भी हैं, अनंत कोटि ब्रह्मांड। नाय कृष्ण कन्हैया लाल की अनंत कोटि वैकुंठ भी हैं और वैकुंठ से ऊपर है साकेत अयोध्या धाम और उसके ऊपर है गोलोक धाम। और गोलोक धाम में भी तीन विभाग हैं: एक है द्वारका धाम, दूसरा है मथुरा धाम और तीसरा है वृंदावन धाम। वैसे फिर वृंदावन के भी दो विभाग हैं: एक श्वेत द्वीप या नवद्वीप कहलाता है जहाँ श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु कीय पंचतत्व, श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु उनके-उनके लीलाएँ और अधिकतर हरे कृष्णा हरे कृष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम वहाँ भी होता है और दूसरे वृंदावन में गोलो केर वैभव लीला प्रकाश करीला गोकुल वृंदावन वृंदावन वृंदावन। हम जिन लीलाओं को जानते हैं, या केवल लीलाओं को ही नहीं, श्री राधिका माधव योर पार माधुर्य लीला गुण रूप नाम नाम प्रतिक्षण आस्वादन लोलु पस वंदे गुरु श्री चरण [संगीत]। अरविंदम। या जो हम भगवान के को जानते हैं, रूप को जानते हैं, लीलाओं को जानते हैं, उनके पर करों को जानते हैं, उनके धाम को जानते हैं। श प्रभुपाद कहा करते थे कि हम जो भी जानना चाहते हैं कृष्ण के संबंध में, वह सब जानकारी कृष्ण कैला वेद पुराण भगवान ने व शास्त्रों में उसकी रचना की हुई है। श्रील व्यास देव के रूप [संगीत] में जिन लीलाओं को जहाँ यहाँ कृष्णा लीला प्रकाशित करते हैं, प्रदर्शित करते हैं, रचना भी भागवत में और पुराणों में [संगीत] भी। लेकिन वैसे कृष भागवत हम कृष्ण स्पेशलाइज, कृष्ण अधिक फोकस है ग्रंथ श्रीमद् भागवत में। उस दिन हम ट्रेलर की बात हुई तो श्रीमद् भागवत के प्र प्रथम स्कंद के तृतीय अध्याय में 22 अवतारों का उल्लेख किया व्यास देव ने, वो ट्रेलर है। फिर आगे नरसिंह भगवान की, उनकी लीला सातवें स्कंद में है। फिर आगे वामन लीला की, वामन भगवान की, वामन रामायण आपको भागवत में मिलेगा, न स्कंद में कम से कम दो अध्यायों में रामायण भी [संगीत] है और ग्रंथ राज का एक विषय वस्तु 10 में से एक विषय का नाम है आश्रय, आश्रय और वे आश्रय हैं श्री कृष्ण कन्हैया लाल की और हम उनके आश्रित हैं। तो श्रीमद् भागवत में जो 335 अध्याय हैं, ये दूसरी बार हम कह तो रहे हैं, याद रखोगे, क्योंकि आपको भी हम प्रेरित तो कर ही रहे हैं, इस कथा का प्रचार और प्रसार होना चाहिए और कथा का प्रचार प्रसार करने का केवल हमने ही ठेका नहीं लिया [संगीत] है, आपको भी योगदान देना है। थम भूत गुणो हरि। वैसे भगवान है ही वैसे। जब हम सुनते हैं कृष्ण के संबंध में, श्रवंती गायति गण साधव, श्रवंती गायति गण अभन शहा, दो बार ये बात कही है। तो वह जिसे प्रेम होता है, शुरुआत में तो हम छिप-छिप के प्रेम करते होंगे, पप-छप के ता किसी को पता ना चले, लेकिन फिर ऐसा समय आता है, इतना प्रेम हो जाता है, इतना प्रेम हो जाता है कि फिर हमसे रहा नहीं जाता और हम उस व्यक्ति का फिर नाम भी लेते हैं, क् नाम ही नहीं लेते, फिर उसका काम भी, उसका जॉब भी, उसका देश-वान, ऐसे सुंदर है, ऐसे है, वैसे है, चर्चा शुरू ही होती है। शोत ब्यादि राजेंद्र रणाम संती सहस्त्र स सुखदेव गोस्वामी कहे। ऐसे जहाँ तक बोलने के हैं, कितने टॉपिक्स हैं, सहस्त्र स संसार के लोगों के पास हजारों टॉपिक्स हैं, विषय हैं, हरी अरी किंतु वह तो काम की बात है, हमें प्रेम की बात करनी है या कृष्ण की बात करना। वैसे प्रेम की बात, कृष्ण प्रेम की बात या कृष्ण की बात, कृष्णा मत चित्ता मद गत प्राण बोद यंत परस्पर कथ यंत समाम नित्यम तुष्यंति चरमंत च बोध यंत परस्पर। एक दूसरे को बोध करो, कृष्णा सेडस राम ने यह कहा और इन्होंने इस महाजन ने यह कहा। नारद जी ऐसा कहे, शी प्रभुपाद के, श प्रभुपाद ने कहा, तुका मने माझे जी सर्व सुख। तो कृष्ण की बातें या कृष्ण के संबंध में और ने ने कही हुई, ऋषि मुनियों ने, भक्तों ने, संतों ने कही हुई बातें हमें, हमें भी बोध यंत परस्पर। आप इसको शेयर कीजिए। न कवर्ड बॉयज, ग्वाल बाल कृष्ण के सखा, दिन भर कृष्ण के साथ ही, पूरा दिन कृष्ण के साथ जाते हैं और कई सारी लीला के अंग होते ही हैं। अघासुर का वध हुआ और यह हुआ फिर वो हुआ। अरी अरी ग्वाल बाल संग धनु चराय, दिन भर कृष्ण के साथ गाय चराते हैं। आप भी चाहोगे कृष्ण के साथ, आप भी गाय चराने के लिए जाएँ। य आपकी फैक्ट्री ठीक है, फैक्ट्री इंडस्ट्री, उद्योग, उद्योगपति। यह तो हुआ तो गल बाल। हम सायंकाल को जब पहुँचते हैं अपने-अपने घरों में तो हर ग्वाल बालक, गल गवाला, ग्वाले अपने मम्मी, डैडी, मम्मी, पिता श्री, अभी तो मम्मी और डैडी, डैड की बात चल रही थी, वहाँ नहीं कहते मम्मी और डैडी, मैया क दे मैया, चाँद खिलौना, यशोदा मैया की, मैया और बाबा, पिता श्री, तो उनको बिठा के दिन भर की सारी जो लीलाएँ हैं, अपने माता-पिता को और जो भी उनके परिवार के सदस्य हैं, पड़ोसियों को बुला के ग्वाल बास सुनाते, शेयर करते। हमने यह देखा, हमने यह सुना और इस प्रकार पूरे ब्रज में टॉक ऑफ़ द टाउन होता ही है और कृष्ण ने उस दिन खेली हुई लीलाएँ सारे ब्रज मंडल के हर नगर आदि ग्रामों में पहुँच जाती हैं। तो वैसे ही भी सोच रहे थे, यहाँ जो हड़पसर में भोसले मैदान, क्या भोसले, सले गार्डन, ओके, सले गार्डन कहाँ है? गार्डन। आप वैसे फूल तो हो, एक-एक फूल हरी देवा घरची मल मजे देवाघर च फुल अपन मलत नहीं हरी। तो यहाँ सुनी हुई कथा फिर आपको औरों को सुनानी [संगीत] है और जो सुन सुनाएँगे कथा या फिर कथा को दे भी सकते हैं, ग ग्रंथ रा श्रीमद् भागवत के रूप में ज्ञान का दान करो, ज्ञान का दान करो या सुनी हुई कथा को [संगीत] कहो। आपका ज्ञान घटेगा [संगीत] नहीं, दाने न वर्ध। यह ज्ञान की विशेषता है, दान, ज्ञान देने से बढ़ता है, घटता नहीं। वैसे ही कोई कह रहा था, धन देने से भी भगवान को, भगवान के भक्तों को आध्यात्मिक कार्यकलापों के लिए तो आपका धन कभी घटेगा नहीं। या देने वाले कुछ मुँडी भी हिला रहे, अपना अनुभव बता रहे हैं। एक माता जी बैठी है ऑल द वे फ्रॉम दिल्ली, नोएडा से कथा श्रवण के लिए आई है और खूब दान देती रहती है, हरी-हरी। और वैसे देने का जो आनंद है, देने में जो आनंद [संगीत] है, वो देने वालों को पता है और वो आनंद भगवान ही देते हैं। भगवान की सेवा की, भगवान की कथा सुनाई, भगवान का की भगवत गीता, भागवत औरों को दी, अपने लिए भी लिया। चैरिटी बिगिन एट होम और औरों को भी दिया। तो वैसे कृष्ण कहे हैं या देखिए, प्रभुपाद किसी लाइफ में मे को ग्रंथों का सेट दे रहे हैं श्रीपाद की। तो कृष्ण कहे हैं, जो देता है नच तस्मान मनुष्य कसिन में प्रिय कतम, उसे और कोई व्यक्ति या भक्त मुझे प्रिय नहीं है, किससे? जो वो तो गीता की बात कर रहे, कृष्ण अर्जुन का जो संवाद है, इसको जो औरों को सुनाता है, सुनता है, सुनाता है या पढ़ता है, पठन फिर पाठन और औरों को सुनाता है या फिर पूरा ग्रंथ ही ले लो, तो ऐसा व्यक्ति, ग्रंथ का वितरण करने वाले, ज्ञान, भक्ति का प्रचार प्रसार करने वाले व्यक्ति भगवान का अति प्रिय है। आप प्रिय बनना चाहते हो, कृष्ण के प्रिय बनना चाहते हो? हरि [संगीत] हरि। सोचा तो था, अभी सोच ही रहा, अभी सोच तो रहा ही हूँ, आपको कृष्ण ला सुनाऊँ। हरे [संगीत] अरी आप देख तो रहे हो हमारे पास के बिफोर आई स्पीक, हमारे पास एक शॉर्ट वीडियो है जिसमें भगवान के के गुणों का वर्णन है, उसको देखना चाहोगे? कृष्ण में कितने गुण हैं, कितने गुण हैं? 64 क्वालिटीज ऑफ़ कृष्णा, जस्ट स्मॉल लिस्ट, सैंपल। कृष्ण के गुण तो कृष्ण गुणों की खान है, उसमें से मोटे-मोटे नाम गुणों के या लिए जा रहे हैं। या रूप गोस्वामी प्रभुपाद सुनाए हैं। आर यू रेडी? हाँ। इट वर्स। उसका इसका थोड़ा अंग्रेजी में टेक्स्ट है, हम अनुवाद नहीं कर [संगीत] [संगीत] पाए। गुण नीचे लिखे हैं अंग्रेजी में। नंबर वन [संगीत] ब्यूटीफुल, नंबर टू सर्वा [संगीत] कर्षक, ओजस्वी [संगीत] तेजस्वी, शक्तिमान [संगीत] सदैव युवक रहते हैं, लिंग्विस्ट, बहु भाषा भाषी, सत्य वचनी, प्लीजिंग [संगीत] टॉक, मुरली वाद, विद्वान [संगीत] बुद्धिमान, जीनियस, कलाकार, कलाबाज, चतुर चालक [संगीत] कुशल, री एक्सपर्ट, ग्रेटफुल [संगीत] कृतज्ञ, जज, सही निर्णय सही समय पर लेने वाले, प्रमा [संगीत] पर्यर, पवित्र, सेल्फ कंट्रोल, इंद्रिय निग्रह, स्थिर [संगीत] स्थैर्य, सहनशील, क्षमाशील [संगीत] गंभीर, भ भीर, कृष्ण का सेल्फ सेटिस्फाइड, आत्मा संतुष्ट, आत्माराम, दयालु, परोपकारी, धार्मिक, रोइ।

[संगीत] रो कृपालु दयालु और उनका सम्मान करने वाले जेंटल जेंटल मन कोई है तो कृष्णा है। लिबरल दानी कभी शर्माते भी है, भक्त वत्सल ऑलवेज हैप्पी ऑलवेज हैप्पी सदैव सुखी रहते हैं। अपने भक्तों के हित चिंतक, कंट्रोल बाय लव, भक्तो पराधीन, अपने भक्त के पराधीन, मांगल्य से पूर्ण, मंगलमय, मोस्ट पावरफुल, मस्ट पावरफुल, शक्तिमान। [संगीत] [संगीत] स मोस्ट पॉपुलर [संगीत] प्रसिद्ध [संगीत] निष्पक्ष, स्त्रियों को के मनों मनों को भी आकृष्ट करने वाले, आराध्य देव, सभी के आराध्य। [संगीत] वैभव से [संगीत] पूर्ण, सम्माननीय, अध्यक्ष, नियंता [संगीत] कंट्रोलर [संगीत] नेवर चेंजिंग [संगीत] अपरिवर्तनीय, सच्चिदानंद विग्रह, उनका विग्रह सच्चित आनंद [संगीत] पूर्ण। उनके विग्रह से कई अनंत कोटि ब्रह्मांड उत्पन्न होते [संगीत] हैं और शत्रुओं को भी मुक्ति प्रदान करने वाले, मुक्ति दाता। ये 6 और चार क्वालिटीज है कृष्णा की। चार माधुर्य, उनकी लीला, उनका लीला माधुर्य, बाल लीला [संगीत] माधुर्य [संगीत] कृष्णा [संगीत] कृष्णा कैसे हैं? कृष्णा आपको पसंद है? हम जानते नहीं। दिस इज द ट्रबल, या इसीलिए ना तो उनकी शरण में आते हैं, ना तो उनसे प्रेम करते हैं, ना तो उनकी प्रेममय सेवा करते हैं, ना तो उनके धाम लौटने की तैयारी करते हैं। दि ल बिकॉज ऑफ इग्नोर। यह सब हमारे अज्ञान के कारण है। अज्ञान जज एक शब्द [संगीत] है। जज उत्तर भारत में क उत्तर भारत में क ज इसमें दो का उल्लेख है। न प्ले किसी का कंट्रोल है, मतलब केवल ञ मतलब भगवान होता है। ञ मतलब जानकार जन उसी से होता। ज भगवान है और हम अजन है तो ञ ञ और अञ साथ में कहेंगे, दो हो गए, द्विवचन तो जयो ऐसा होता है। तो यह समस्या है हम और इसीलिए ये भागवत कथा और इकान इकान भगवान की कथा को फैला रहा है, भगवान के संदेश को फैला रहा है, भगवान के नाम को फैला रहा है। जॉइन अस। अंतरराष्ट्रीय श्री कृष्ण भावना मृत संघ के सदस्य बनिए। यह पार्टी कौन सी है? आम आदमी पार्टी नहीं है, आम आत्मा पार्टी। आम आम आत्मा पार्टी, वही बात। अरे अरे या आम आदमी पार्टी? आम आत्मा पार्टी क हो या य कृष्ण पक्ष है। ये कौन सा पक्ष? पक्ष की बात करनी, पक्ष कौन सा है? कौन सा है? कृष्ण पक्ष। अपनी मते कोणाला ऐसा दो चार बार कहाय? किसको? किस कोणाला? रावण आला रावण राज करना रला, राम राजा की आवश्यकता है, कृष्ण राज्या की आवश्यकता है। हरी हरी। क्या हुआ? प्लीज जॉइन अस। इसीलिए भी जैसे आप सुन रहे हो, इकान इकान की नजर बहुत समय से हड़प सर के ऊपर थी। अब तो हम हम आते जाते थे, लेकिन अभी जो आए हैं, वी आर हियर टू स्टे। जिसको अंग्रेजी में क वी आर हियर टू स्टे। हम लोग अभी विजिटर नहीं रहेंगे। हमारे केशव एंड कंपनी, कई सारे भक्त, आप भी कृष्ण भावना की स्थापना सस पार्ट ऑफ ने हम करना चाहते हैं। आप जवाइन करोगे? और यह गीत है, उसमें भी कई लीलाओं का या कृष्ण के कई गुणों का उल्लेख [संगीत] है। उसी के माध्यम से भी कुछ कथा लीला आपको सुनाएंगे। आप भी सुनिए और फिर पीछे गाइए भी। अधरम मधुरम। य हैव न द स्क्रीन। यस। अधरम मधुरम वदनम मधुरम नयनम मधुरम सितम मधुरम [संगीत] मधुरम वदनम नयनम [संगीत] मधुरम। भगवान के अधर अधर मधुर है। समस। यह कुछ शब्द हम लोग सभी नहीं जानते। अधर क्या होता है? ओट। वदन क्या होता है? मुख। नयन क्या होते हैं? आखें। हसी तम तो जानते। यह सब मधुर है। य का हर आइटम जो कहा है, यह कैसा है? कैसा है? मधुर है। इसीलिए हर पंक्ति के अंत में इसका नाम ही है। श्री मधुरा अष्टकम। कैसा अष्टक? मधुराक। यह वल्लभाचार्य की रचना है। वल्लभाचार्य पुष्टि मार्ग के वल्लभाचार्य। मधुराष्टकं। ओके। अधर मधुरम वदनम मधुरम नयनम मधुरम हसित मधुरम [संगीत] मधुरम हृदयम मधुरम गमनम मधुरम हदय मधुरा जमना मधुरा मधुराधिपते रखिम मधुरम। मधुराधिपते रखम मतलब माधुर्य के पति है, स्वामी है। मधुराधिपते अखिलम म हर बात मधुरम वचनं मधुरम चरितम मधुरम वसन मधुरम चरत मधुरम वनम मधुरम वलित मधुरम वसन मधुरम मधुरम चलित मधुरम भ्रमित मधुरम [संगीत] चर मधुराधिपते अखिलम मधुरम [संगीत] मधुराम [संगीत] मधु [संगीत] इसको थोड़ा और मधुर बना दो। आप वादन से वाद्य से वेणु मधुरो रेनर मधुर रेनर मधुरो। मधु मतलब क्या? वेणु। वेणु मधुर है और रेणु रेणु क्या होता है? भगवान के चरणों की धूल को रेण कहते हैं। वृंदावन की वेण रेण और धेनु भी प्रसिद्ध है। धनु भी जानते हो ना? पानी मधुरा पाद मधुरो म पानी मतलब पीने का पानी नहीं। या पानी मतलब क्या? थ चक्र। पानी के हाथ में चक्र। तो पानी मधुरा पा दो हाथ और उनके पैर भी मधुर है। [संगीत] नृत्यम मधुरम सख्यम मधुरम त्य मधुरम सत्यम मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरम मधुराम मधुरम गीतम मधुरम पीतम मधुरम मधुरम मधुरम भुक्त मधुरम सुक्तम मधुरम भत मधुर सु मधुर। भगवान जब भोजन करते हैं, भगवान को जब हम भोग लगाते हैं और भगवान उसका आस्वादन करते हैं तो भुक्त भी मधुर है और और फिर भोजन के उपरांत सुक्तम उनका सोना भी मधुर है। हर बात रूपम मधुरम तिलक मधुरम रूप मधुरम तिलक मधुरम मधुराधिपते रखिम मधुरम [संगीत] मधुर करणम मधुरम तरण मधुरम मधुरम शरण मधुरम रणम मधुरम रमण मधुरम ह मधुरम रमण मधुरम। कुछ हर लिया, कोई मधुर है। गोपियों के वस्त्र हरण करते हैं या कई घरों से माखन की चोरी करते, मतलब माखन को हर लेते हैं और उनका रमन वृंदावन रमणीय स्थल है। रमणीय रमण रमन रेती भी है वृंदावन में। रमन रेती जहा रमन करते हैं। हमारा वृंदावन में इकान का मंदिर कृष्ण बलराम की जय हो। कृष्ण बलराम मंदिर रमन रेती में है, जिस रेती में धूल में कृष्णा रमन किए है राधा के साथ। राधा रमन या गोपी रमन या और भक्तों के ग्वाल बालों के साथ रमण। गायों के साथ रमण या विहार ममित मधुरम सितम मधुरम एव मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरा गुंजा मधुरा माला मधुरा मधुरा माला मधुरा गुंजा। गुंजा के बीज आते हैं और उसकी माला भी बनती है। गुंज माला। गुंजा मधुरा माला मधुरा तो माला वैसे पुष्प की माला भी। फिर वो पुष्प यदि पद्म के है, पद्मा तो पद्म माली कहते भगवान को। वन के कुछ ऐसे वन के फूलों का चयन करके उसकी माला बनाई तो वनमाली बन जाते [संगीत] हैं और जब अलग अलग पांच प्रकार के फूल जो पांच अलग-अलग रंग के भी है उसकी जब माला बनाते हैं और काफी लंबी होती है, भगवान के घुटनों तक पहुंच जाती है, उस माला को वैजयंती माला कहते हैं। व वैजयंती माला नहीं, वैजयंती माला। फिर कृष्णा और भी सुंदर लगते हैं। य मैंने ठीक नहीं कहा वैसे वैसे उस माला का सौंदर्य बढ़ता है कृष्ण ने पहनने से और और वस्त्र भी जो कृष्णा पहनते हैं उसे कृष्णा अधिक सुंदर नहीं ल दिखते, वस्त्र अधिक सुंदर दिखने लगते हैं। कृष्णा इतने सुंदर है, हम तो इतना ही कैसे इतने सुंदर है? आगे ज्यादा कुछ कह तो नहीं सकती, इतने सुंदर [संगीत] कृष्णा, उतने सौंदर्य का हम पान भी नहीं कर सकते। तो ब्रज के कुछ भक्त आचार्य गण कहते हैं, भगवान के सौंदर्य को छिपाने के लिए उनको वस्त्र पहनाए जाते हैं, क्योंकि कौन डाइजेस्ट करेगा इतना सौंदर्य? कौन देखे? जमुना मधुरा बीचो मधुरा यमना मधुरा ब म जमुना मैया की जमुना भी मधुर है। जमुना में जो लहर तरंगे उठती है, य भी मधुर है। सलिलम मधुरम कमलम मधुरम मधुर क मधुर। देखिए कैसे शब्दों का वापर सलिलम कमलम। सलील क्या होता है? सलील मतलब जल। सलील मतलब जल तो वो भी मधुर है और कमलम कमल का पुष्प। इसीलिए अंबुज कहते। कमल का अंबुज। अंबू मतलब जल। अ मतलब जल जो जल जल में ज जन्म लेता है [संगीत] अंबुज मधुराधिपते रखिम मधुरम मधुराधिपते रखिम [संगीत] मधुरम। गोपी मधुरा लीला मधुरा। गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्त मधुरम भुक्त मधुरम मधुरम मधुरम टम मधुरम लिम मधुरम कृष्म मधुरम शम मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरम। गोपी मधुरा गाओ मधुरा ग मधुरा गाओ मधुरा। या एक एक का नाम जब या लिया जा रहा है कृष्ण के माधुर्य का तो उसका हमें स्मरण करना है। या गोपी मधुरा का गोपी मधुरा और लीला मधुरा है। ये देखिए गोपियों का हाल [संगीत] कृष्ण के मुरली की नाथ सुने, गो बैक तो दौड़ पड़ी कृष्ण की ओर। जिस बन से कृष्ण मुरली को ध्वनित किए [संगीत] [संगीत] सर्वोपरि प्रेमी भक्त तो गोपिया है और देन उनकी लीडर राधा महा भावा ठाकुरानी [संगीत] कैसी है राधा? राधा महा भावा [संगीत] ठाकुरानी। उसकी जो आराधना है, राधा का नाम। राधा क्यों आराधना करती है? प्रधान आराध्या तो राधा रानी ही है। गोपी मधुरा गाव मधुरा मधुरा मधुरा। गाय भी मधुर [संगीत] है। ऐसे हर हर एक का ज य उल्लेख हो रहा है, एक एक आइटम का खूब वर्णन हो सकता है, उपलब्ध भी है। गायों के बारे में बोलते रहो। कितनी गाए हैं कृष्ण के? कितनी गाए हैं? 9 लाख गाए [संगीत] हैं और उनके नाम भी है हर गाय का। कम से कम एक नाम, फिर निकनेम भी हो सकते हैं और कृष्णा सभी गायों के नाम जानते हैं। सायंकाल को गो धुली बेला जिसको कहते हैं, जब गाय लौट रही है, कृष्ण बलराम गल बाल भी अब नंदग्राम की ओर लौट रहे हैं, अपने अपने गांव घर लौट रहे हैं। तो गाय जब चलती है तो उनके चलने से वृंदावन की रज ब्रज रज आसमान में बड़ी हल्की फुल्की र रज आसमा आसमान में उठती है, उड़ती है तो उस समय को गो धुली बेला कहते हैं। गो गाय और जब चलती है तो धूल उड़ती है। वह समय बेला मतलब समय। द टाइम। कृष्णा अभी भगवान की जो अष्ट काली लीला है, अष्ट आठ काल, 24 आवर्स को आठ कालों में पीरियड्स में उसका विभाजन हुआ है और भिन्न भिन्न प्रकार की या तो सख्य रस वाली लीलाएं अपने मित्रों के साथ या वात्सल्य रस पूर्ण लीला नंद बाबा यशोदा के साथ या माधुर्य लीला गोपिया और राधा रानी के साथ। ऐसे अलग-अलग समय पर अलग-अलग लीलाए। दिस इज द टाइम कृष्णा इज कमिंग बैक होम। देखिए यशोदा और नंद बाबा स्वागत कर रहे हैं कन्हैया [संगीत] का। गायों से प्रेम करते हैं तो प्रेम ही नहीं, प्रेममय सेवा। गायों की सेवा करते हैं कृष्णा। इसीलिए गोपाल गोपाल कहलाते हैं [संगीत]। यटर मधुरा सृष्टि मधुरा मधुरा सट मधुरा। यटी मतलब छड़ी, स्टिक। यटी मधुरा सृष्टि भगवान की सृष्टि भी मधुर है। दलित मधुरम फलितम मधुरम दलित मधुरम फलितम मधुरम मधुराधिपते रखिम मधुरम मधुराधिपते रखिम मधुरम मधुराधिपते रखिम मधुरम मधुराधिपते म [संगीत] अखिलम अखिलम [संगीत] मधुरम मधुराधिपते अखिलम मधुरम मधुराधिपते मधुराधिपते अखिलम [संगीत] मधुरम मधुरा [संगीत] फते [संगीत] मधुरा पते अखिलम [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] मधुरा मधुरा मधु मधुराधिपते [संगीत] [संगीत] धु हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे हरे [संगीत] कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम रामरा राम हरे हरे हरे कृष्णा [प्रशंसा] हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे [प्रशंसा] रामा हरे रामा रामा [संगीत] रामा हरे [संगीत] हरे [संगीत] [प्रशंसा] कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे [संगीत] राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे [प्रशंसा] हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे सिट डाउन। अपने अपने आसन ग्रहण कीजिए। मेरी य आईडिया है। आईडिया मैं उतना तो आईडिया बाज नहीं हूं, लेकिन सोच रहा हूं। हम लीला अलग से कुछ तो जो भी बातें है वैसे कृष्ण कथा ही है या कृष्ण का गीत भी कृष्ण कथा ही है किंतु थोड़ा विस्तार से कहने का विचार भी था किंतु इतनी सारी लीलाएं हैं तो किसको कहे? किसको ना कहे? और किसको कितना विस्तार से कहे? इसस लीला को संक्षिप्त में कहे य थोड़ा क्योंकि हम लोग हरी टीम हम क्या करते हैं? हमने एक पीपीटी समझ पीपीटी बनाई है। आपको आपको दिखाते हैं। कृष्ण को देखना चाहोगे? य कुड सी कृष्ण। आई वा सी [संगीत] यू तो ओके। दिखा दो तो ये हम लोग ल गो फ्रॉम एक लीला नेक्स्ट लीला नेक्स्ट लीला यथा संभव मैं कुछ कमेंट करूंगा या शायद समय भी नहीं होगा तो आप समझ लीजिए या दर्शन कीजिए और यह तो आप जानते हो वसुदेव देवकी का विवाह के समय कंस ने जब सुना, अब मैं विस्तार से कह रहा हूं। इसका आठवा पुत्र तुम्हारे मृत्यु का कारण होगा तो तो देवकी की हत्या का प्रयास तो किया। सम हाउ वसुदेव ने उनको समझाया बुझाया तो विवाह हुआ तो व एक एक करके छह पुत्रों का वध किया ये बदमाश मथुरा नरेश मथुरा का नरेश राजा तो था तो व और सातव पुत्र बलराम की उनका गर्भा हुआ। एक गर्भ से दूसरे गर्भ में वसु देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में पहुंचा दिया तो फिर सुरक्षित रहे वे बच गए और फिर आठवे थे कृष्ण कन्हैया लाल की। यस। नेक्स्ट लीला ही दिखाते जाओ या तो कृष्ण का जन्म हो गया। वसुदेव ता भागवत में कहा है वसुदेव ने देखा तो वह कृष्ण ने फिर कहा मुझे फॉर सेफ की कहो मुझे गोकुल ले जाओ तो यहां जमुना को पार करते हुए भी वसुदेव वासुदेव को गोकुल ले जा रहे हैं। नेक्स्ट। यह कृष्ण बलराम का नामकरण हो रहा है। नेम गिविंग सेरेमनी। गौशाला में एकांत में गोशाला गाय देख रहे हो। कोई गाजा बाजा का क्या ऐसा नहीं है। छिप छिप के वैसे ताकि कंस को पता नहीं चले या उसके मन में कोई शंका उत्पन्न नहीं। यह कौन है बालक? इसका गर्गाचार्य नाम नामकरण करते हैं तो इसीलिए युक्ति पूर्वक य गौशाला में नामकरण हुआ कृष्ण बलराम का। नेक्स्ट या पूतना का वध। कृष्ण जब छ छ दिन के थे तो पूतना का वध हुआ। हरि बोल। आप नहीं क हरि बोल? आपको य बात अच्छी नहीं लगी? कृष्ण ने या आप कुछ पतना के आप कुछ लगते हो? क्या रिलेट देवता तो स्तुति करते हैं, पुष्पों की वृष्टि करते हैं। जब जब कृष्णा विनाशा च दुस्ता दुष्टों का संहार करते हैं। नेक्स्ट और य शकता सुर। कृष्ण जब तीन महीने के थे तो एक शकट मतलब बैलगाड़ी वो एक राक्षस ही बैलगाड़ी के रूप में वहा आया था। भगवान ने उसका वध किया। नेक्स्ट ये त्रवर्त एक त्रवर्त व विन डी मन आया और कृष्ण को उठाकर आकाश में ले गया। उसका भी वध किए कृष्णा। यहां दूसरे चित्र में आप देख रहे हो। इसको ब्रह्मांड घाट नाम का घाट है उसका नाम ही क्योंकि कृष्ण ने यशोदा को अपने मुख में पूरे ब्रह्मांड का दर्शन कराया इसलिए ब्र ये ब्रह्मांड घाट है। नेक्स्ट और वसे दीपावली के दिन जिस दिन य दामोदर लीला भी हुई तो उसी दिन कृष्ण ने वहा नंद बाबा के कोर्टयार्ड में दो वृक्ष थे नल कुवर और मनी ग्रीव नाम नामक दो पुत्र थे तो उनको उखाड़ लिया वृक्षों को उखल के मदद से तो उनका उद्धार भी यहां देख रहे हो आप तो फिर यशोदा ने कृष्ण को उखल के साथ बांध दिया। बांधा उखड़ आला याला बांधा। उखड़ आला नंदाचा चोर याला बांधा। मराठी में खूब चलता रहता है य कृष्ण का श्रृंगार कर रहा हो रहा है यशोदा। ओके। नेक्स्ट य अघासुर आ गया। वैसे पूतना के एक भाई थे बकासुर और और एक भाई थे अघासुर। देखिए क्या कैसी कैसा परिवार है। उतना अघासुर बकासुर या अघासुर का भी वद हुआ है तो माय लेफ्ट साइड जैसा मैं देख रहा हूं और उसके उपरांत कृष्णा जमुना के तट पर भोजन कर रहे हैं। व मध्य में है और या नेक्स्ट भोजन लीला। भोजन स्थली नामक यह ब्रह्म मोहन लीला श्रीमद् भागवत के दसव स्कंद के 14 अध्याय में 13 14 अध्याय में यह ब्रह्म विमोह लीला बड़ी प्रसिद्ध लीला। ब्रह्मा ने चोरी की भगवान के मित्रों की और बछड़ों की भी और फिर ऐसे उसे कुछ बिगाड़ तो नहीं हुआ ऐसा सोचा तो था। सारी लीला ठप हो जाएगी लेकिन कृष्ण स्वयं ही बने जितने बालक थे और जितने जितने बछड़े थे तो एक वर्ष के उपरांत ब्रह्मा वापस आके लौट के देखते हैं तो बिजनेस एज यूजुअल जिसको कहते सब भगवान की लीला यथावत चल ही रही है तो समझ गए य उन्होंने खूब अपराध किया तो य क्षमा मांग रहे हैं और भगवान की स्तुति भी कर रहे हैं। नेक्स्ट या गर्द बासर या और क्या नाम है? धेनुका सुर का वध हो रहा है वृंदावन के एक ताल वन में। नेक्स्ट और यहां यह कालिया दमन लीला। जमुना के जमुना को सट के ऐसा हिंदी में कते जमुना को सट के एक कालिया रिद या कालिया द डो डो जालान मराठी म मन तो वहा कालिया का य दमन व तो नहीं किया वहां से भगा दिया उसको। गेट आउट ऑफ हियर और वहा भी उ जा के फीजी फीजी के पास के सागर में वह रहता है। इसीलिए श्रील प्रभुपाद ने फीजी में जो मंदिर बनाया इस्कान का तो वहां कालिया कृष्णा का मंदिर बनाए वहां और या हम भी गए हैं। मैं कई बार फीजी भी गया मैंने दर्शन किया। नेक्स्ट यह प्रल बा सूर। भांडीर वन नाम का एक वन है। भांडीर वन में बलराम ने प्रलंबित वध करने का उसका उद्देश्य था लेकिन बलराम ने ही प्रल बासुर का वध किया। हरि बोल। नेक्स्ट वन को लगी आग एक समय और गाय और भगवान के मित्र सारे फसे थे तो कृष्ण ने कहा मा भट निमी लयत लोचना नि आखे बंद करो और भय मत करो तो सभी मित्रों ने आंखें बंद की तो कृष्ण ने क्या किया? ही ड्रैक द फायर। अग्नि का पान किए और इसी के साथ सारे अग्नि को बुझाए और अपने मित्रों और गायों की रक्षा किए। ऐसा कृष्ण कर सकते हैं। नम भक्त प्रणति। भगवान ने कहा मेरे भक्तों की रखवाली करने की रक्षा करने की मेरी जिम्मेदारी। माय रिस्पांसिबिलिटी। बस हमें भक्त बनना है। बस हमें भक्त बनना है। देन वी आर सेफ इन हैंड्स ऑ कृष्णा। नेक्स्ट कृष्णा गिरिराज गोवर्धन की गोवर्धन की तल हटी में कृष्णा बलराम भी है मयूर नृत्य कर रहे हैं और व कल्प वृक्ष है और कई सारे जलाशय है। दिस ल टूरिस्ट स्पॉट कहो। वृंदावन का बड़ा ही प्रेक्षणीय दर्शनीय शोभन स्थली है गिरिराज गोवर्धन तो वहां गोचा लीला हो रही है। नेक्स्ट य भी गोपियों के साथ हर मध्यान के समय कृष्णा राधा कुंड जाते हैं। राधा कुंड की राधा कुंड में गोपी कृष्ण राधा कृष्ण की लीलाए जल क्रीड़ा झूलन यात्रा इत्यादि इत्यादि यात्राएं होती है। रात्र के समय रास डांस भी होता है, रास नृत्य होता है तो दो काल टू पीरियड्स आर फॉर गोपी। एक मध्यान के समय और फिर मध्य रात्रि के समय। नेक्स्ट या रास डांस हो रहा है और वहा वैसे हर दिन वह फुल मून नाइट होती है वृंदावन में। पूर्ण चंद्र प्रतिदिन और नो आर्टिफिशियल लाइट्स वगैरा नॉट रिक्वायर्ड। नेक्स्ट भगवान ने गोपियों के वस्त्रों की चोरी करके र पेड़ पर कदम के वृक्ष पर जाकर बैठे हैं। वस्त्र हरण गोपी वस्त्र हरण लीला चिर घाट चिर घाट नाम का एक घाट है। चिर मतलब वस्त्र व की लीला। नेक्स्ट या कृष्ण बलराम अब लौट रहे हैं सायंकाल के समय तो पुनः गोपिया जिनको दिन में मिले थे लेकिन पुनः कृष्ण के दर्शन के लिए खड़ी है अपने अपने भवनों के आगे या छतों पर। नेक्स्ट गिरिराज गोवर्धन की ये बड़ी मधुर लीला। कृष्णा सात दिन और सात रात गोवर्धन को धारण किए। अ ब्रज के सभी भक्त ऑल डिटीज उस गराज के छत्र छाया में कृष्ण का सानिध्य स संगति ध ध्यान दर्शन स्मरण कर रहे थे। जो पंडाल है पंडाल पंडाल भी लग छत मानो कृष्णा उसको उठाए हैं और हम पिछले छह सात दिनों से या कृष्णा की लीला कृष्ण को देख रहे हैं, कृष्ण को सुन रहे हैं, कृष्णा हमारी रक्षा कर रहे हैं। दिस सेफ लोकेशन। नेक्स्ट या फिर इसी के साथ इंद्र के गर्भ को चूर या चूर्ण बनाया और अभी वे आए हैं क्षमा मांग रहे हैं क्योंकि उनके कारण ही तो उन्होने इतनी वर्षा की इतनी वर्षा की। इसीलिए कृष्ण ने फिर छाता ही उठाया गोवर्धन को छाता बनाया। ल सेफ। तो अंततोगत्वा इंद्र आते हैं और क्षमा याचना मांगते हैं और कृष्ण का अभिषेक भी करते हैं और स्वर्ग से जल लाए हैं व ऐरावत है और सुर भी गाय का दूध से कृष्ण का अभिषेक हुआ और अभिषेक का जल और दूध एक कुंड में इकट्ठा हुआ है उसको कते गोविंद कुंड। गोविंद कुंड के गोवर्धन के बगल में ही है लाटी में ही है। या समथिंग इ हैपनिंग हियर। ओके आई सी। य कृष्ण बलराम य पहुंचे हैं। कौन से देव? ये वरुण वरुण देव। क्योंकि वरुण ने नंद बाबा को चोरी करके ले गए तो कृष्ण बलराम वहां गए हैं और ही रेस्क्यूड तो नंद बाबा को लेकर पुनः वृंदावन आए। या गोपिया कृष्ण के साथन का मिलन हो रहा [संगीत] है। मोर रास डांस या होली खेल रहे हैं कुंजो में। निकुंज में विराजो घनश्याम राधे राधे। निकुंज गाएंगे नहीं। इसको तो व ज माधु सूर्य लीला संपन्न होती। निकुंज कहते निकुंज निकुंज निकुंज फॉरेस्ट गार्डेंस जहार कुंज बिहारी जय राधा माधव। कुंज बिहारी कुंज में विहार करते हैं कृष्णा गोपी राधा। नेक्स्ट नेक्स्ट वट इ ये कोई राक्षस? वन इ दिस? अच्छा अरिष्ठा सुर कोई गधा बन के आता है, कोई बैल बन के आता है, कोई घोड़ा बन के आता है, कोई गधा बन के क्या क्या बनके य सब वासुर आते रहे और कृष्णा सब का स्वाहा उनका कल्याण करते रहे, उद्धार करते रहे, उनकी जान वध करते रहे या अरिष्ठा सुर। नेक्स्ट या क्रूर कंस ने अक्रूर को भेजा वृंदावन कृष्ण बलराम को ले आने के लिए तो रास्ते में उन्होंने भगवान के चरण चिन्ह देखे तो रथ से धड़ाम करके गिरे और भगवान के चरण चिन्हों का दर्शन और स्पर्श और वह धूली को अपने माथे पर ले रहे हैं। नेक्स्ट वन अदर साइड यहां अब दूसरे दिन जब ले जा रहे थे अक्रूर कृष्ण बलराम को तो सब गोपियों ने घेराव किया या चक्का जाम। इस रथ का हम जाने नहीं देंगे। तुम कैसे क्रूर? तुम तो क्रूर हो हमारे प्राण नाथ?

को ले जा रहे हैं हमारे प्राण की जा रहे हैं। कृष्ण बलराम के साथ। नेक्स्ट ओके। तो वहाँ कृष्ण बलराम को ले गए मथुरा। अब कृष्ण बलराम मथुरा में हैं। या कंस का वध होना है, तो उसके पहले कृष्ण बलराम मथुरा नगरी का भ्रमण कर रहे हैं। यहाँ कोवल या पीड़ नाम का एक विशेष बलशाली हाथी का भी वध किए कृष्णा और उनके उनके दांतों को उखाड़ के। बलराम, तुम इसको ले लो। तो कृष्ण ने एक दाँत को अपने कंधे पर रखा। बलराम ने दूसरे दाँत को अपने कंधे पर लगा रखा। इसको लेकर जहाँ ये जो कुश्ती का जंगी मैदान, स्टेडियम फॉर रेसलर, और वहाँ कंस मामा भी बैठे थे। तो जैसे ही देखा, कंस ने देखा कृष्ण बलराम को किसके साथ, दाँतों के साथ। वो समझ गया किसके दाँत हैं, मेरे हाथी के। ऐसे बलवान। तो उसी के साथ वो कपने लगा और आई एम द नेक्स्ट वन। समझ में आ रहा है कितने बलवान हैं कृष्ण बलराम। नेक्स्ट [संगीत] यह यहाँ कब्जा कब्जा के साथ कुब्जा कुबड़े इन थ्री प्लेसेस। लेकिन कृष्ण ने क्या किया जब उसने कृष्ण के अंग पर चंदन लेपन किया सर्वांग में, तो कृष्ण प्रसन्न हुए। तो जो तीन जगह बैठी थी, खब कृष्ण ने अपने चरण उसके पैर पर रखे हैं, जैसे आप देख रहे हैं। और फिर यहाँ उसको सीधा कर दिया, बिकम स्ट्रेट। हरि बोल। यह अच्छा। वहाँ यह थोड़ा उल्टा हुआ। यह चित्र ऑर्डर। तो यह जा रहे हैं वहाँ कंस कंस टीला कहते हैं, जहाँ कंस का वध और जहाँ पर कुश्ती का मैदान भी था और हजारों लाखों प्रेक्षक वहाँ एकत्रित हैं। और इस बदमाश ने वसुदेव और देवकी को भी वहाँ लाकर रखा था। देखने दो कृष्ण बलराम का वध आज होगा। कुश्ती खेलते खेलते उनको इनकी जान लेंगे। तो देखने दो वसुदेव और देवकी को। इस विचार से। तो यहाँ यज्ञ हो रहा था, धनुर यज्ञ। तो कृष्ण बलराम उस धनुर धनुष को उठाए हैं, उसके दो टुकड़े किए और उसी के साथ कृष्ण बलराम ने एक-एक लिया और सभी को यमपुरी भेजा, वहाँ जो उपस्थित थे। और रास्ते में एक माली, उसने भगवान के लिए माला अर्पित की। इनका नाम भी शायद सुदामा ही था। सुदामा, और सुदामापुरी के सुदामा नहीं। और यहाँ हो गया कंस का वध मथुरा में। पहली लीला तो एक कंस वध की ही है और मथुरा में ही है। मथुरा से अब तक पढ़ाई नहीं हुई थी, गाय चराने ही जाते थे वे। अब 11 साल के थे कृष्णा और बलराम। बलराम 12 साल के, कृष्णा 11 इयर्स ओल्ड। तो माता-पिता ने, वसुदेव देवकी ने उनको उज्जैन भेजा, अवंतीपुर। जहाँ ये मुनि, कौन से मुनि? सांधपाणि मुनि का आश्रम। और सांधपाणि मुनि ही वहाँ के आचार्य थे। तो वे बने गुरु और कृष्ण बलराम को 64 दिनों में 64 कलाएँ या साइंस, आर्ट इत्यादि इत्यादि खूब सिखाया। या नेक्स्ट। तो दक्षिणा क्या? उनके पुत्र जिसकी मृत्यु हुई थी उसको लौटा दिए कृष्ण [संगीत] बलराम। यह दक्षिणा। यह नेक्स्ट कृष्णा ने भेजा है उद्धव को। वह जो मूर्ति है, व्यक्तित्व है, दिखते कि नहीं कृष्ण जैसे? मैंने कहा था आपको कल या परसों, वे बिल्कुल कृष्ण जैसे दिखते हैं। इसको स्वरूप सिद्धि कहते हैं। कृष्ण का जैसा स्वरूप है, ऐसे स्वरूप वाले कुछ भक्त भी हैं। सुखदेव गोस्वामी वैसे ही हैं। यह उद्धव भी वैसे ही है। तो उद्धव संदेश कृष्ण का पत्र को पढ़ के सुना रहे हैं गोपियों को और वहाँ राधा भी है। जय श्री राधे राधे राधे। नेक्स्ट। और यह है, इज़ दिस द्वारका? यस। व्हाट इज़ द केस? लेट्स स्टॉप हियर। अब तक हम वृंदावन और मथुरा की लीला, मथुरा की पूरी नहीं हुई। इतना देखे तो व आज के कथा को, अपने वाणी को और आपके कानों को या थोड़ा विराम देते हैं। थैंक यू। प्रेमानंदे बचा हुआ देखते हैं, दिखा सकते हैं कल। परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज की ग्रंथ, राज श्रीमद् भागवत महापुराण की। हरे कृष्णा। तीन बार जोरदार हरि बोल बोल के हम महाराज जी का धन्यवाद देंगे। हरि बोल। हरि बोल। हरि बोल। श्रीमान केशव प्रभु जी से निवेदन करता हूँ, आइए मंच पर आएंगे। श्रीमान केशव प्रभु जी की अध्यक्षता में गए 19 वर्षों से भागवत कथा नित्य निरंतर हो रही है। पिछले दो सालों में कोरोना के कारण यह कथा में थोड़ा सा खंड सा आ गया था। एक बहुत बड़ा नाटक है, ड्रामा होगा यहाँ पर। सबसे निवेदन है, बैठिए। अब तक की लीला जो हमने प्रत्यक्ष यहाँ पर देखी, उससे आगे की लीला द्वारका की एक विशेष लीला, सुदामा की भेट द्वारकाधीश से। बड़ा सुंदर नाटक है। तो सबसे निवेदन है, कृपा करके धैर्य धारण करें यहाँ पर बैठे रहें। तो श्रीमान केशव प्रभु भागवत सप्ताह समिति के अध्यक्ष हैं। आज उनके हाथ के नीचे उनके तीनों पुत्र हैं: कन्हैया कृष्ण प्रभु जी, श्री मधुमंगल प्रभु जी और कृष्णा प्रभु जी। तो उनके जो बड़े पुत्र हैं, वह बहुत विशेष भागवत सप्ताह के समय नित्य निरंतर अब यहीं पर आप दिन भर उनको देखेंगे। कन्हैया कृष्ण प्रभु यहीं बैठे रहते हैं। तो उन्हीं के मार्गदर्शन में, संचालन में बड़ा पंडाल खड़ा होना, अन्य जितनी भी प्रैक्टिकल ऑन फील्ड जो कार्य हैं, वह सारे कन्हैया कृष्णा प्रभु की देखरेख में होते हैं। तो आज केशव प्रभु की जो बड़ी बहु रानी है, स्नेहल माता जी, उनका जन्मदिन है। तो जन्मदिन भी यहाँ पर मनाया जाएगा। और श्रीमान राम सेवक प्रभु एवं उनके जो कौंसिल ग्रुप है, उनके द्वारा द्वारकाधीश की सुदामा से भेंट बड़ा सुंदर नाटक यहाँ पर प्रस्तुत होने जा रहा है। और एक छोटी सी अनाउंसमेंट: एक माता जी बहुत अधिक परेशान हैं। कल उनका बहुत महंगा वाला आईफोन यहाँ पर गिर गया है और उसके ऊपर पीला कवर भी है। शिंदे माता जी करके है। किसी को मिल गया हो, प्राप्त हो गया हो, तो कृपा करके यहाँ पर आप लाकर दे सकते हैं। कल से वह बहुत परेशान है। नए भक्त हैं, जुड़े हैं मंदिर से, लेकिन बहुत परेशान है। किसी को मिल गया हो तो कृपा करके। फोन का, उसमें कार्ड है, आईफोन है, पीले रंग का, उस पर कवर है, तो लाकर आप जरूर दीजिए। तो मैं ड्रामा टीम से निवेदन करना चाहता हूँ कि यहाँ पर ड्रामा प्रस्तुति करें। स ना हा हा। संजय जी बालव करर यहाँ पर उपस्थित हैं और उनका जो भी मित्र परिवार है, उनसे भी मैं निवेदन करूँगा कि ड्रामा के पश्चात जब आरती होगी तो आरती के लिए वे मंच पर पधारे। हरे कृष्णा। तो कुछ मान्यवर उनको मैं निवेदन करना चाहूँगा आरती के लिए वे उपस्थित रहें। उन लोगों के नाम इस प्रकार से हैं: श्याम सुंदर प्रभु एवं शुभांगी माता जी के सुपुत्र धीर शांत प्रभु जी, ऑस्ट्रेलिया से; जय गोविंद प्रभु जी; पवन अग्रवाल जी; विकास रास्कर जी; ब्रज जन रंजन प्रभु; राकेश जी अग्रवाल; आनंद प्रधा माताजी, नोयडा से; सरस्वती प्रिया माताजी; उमेश प्रभु; नायडू परिवार; रविंद्र कुंजीर जी; वामन चरण प्रभु; सीनियर पीआई पुलिस इंस्पेक्टर अशोक इंकर जी; उद्योजक सुदेश होनरा जी; जयतीर्थ प्रभु; रामलीला माता जी, सोलापुर से; माननीय श्री राजू गुजराती, मोरिया रियल स्टेट के प्रॉपराइटर; श्री प्रिया गुजराती; रतन लाल गुर्जर जी एवं परिवार; मंदाकिनी मेधा सीए; श्रवण सूरत वाला जी; दिव्या सूरत वाला; मारुति आबा तपे नगर सेवक हैं, उनसे भी मैं निवेदन करता हूँ; प्रशांत प्रशांत भानु सुरसे जी, अध्यक्ष ओबीसी कांग्रेस; बालव करर संजय जी एवं परिवार; डॉक्टर विना प्रकाश जी; राहुल पाटील जी; और डॉक्टर बीना कोकिल; वृषभानु सूता माता जी। तो यह लोग आरती के लिए, इनका स्वागत है। तत्प पूर्वी यहाँ पर कन्हैया कृष्ण प्रभु जी और उनकी सौभाग्यवती स्नेहल माता जी उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन है, तो महाराज जी के सानिध्य में उनका विशेष बर्थडे मनाया जा रहा है। हरि बोल। मुंबई से जितने भी भक्त आए हैं, खरगर, भोई, सर, ठाणे से सभी भक्तों का विशेष विशेष स्वागत है। हरे कृष्णा। जी अजय गौरांग प्रभु जी यहाँ पर उपस्थित हैं जो भविष्य में यहाँ पर महाराज जी जैसे बचा बता रहे थे केंद्र होने वाला है, तो वहाँ पर मृदंग करताल सिखाने की विशेष सेवा प्रभु जी करने वाले हैं। तो जिनको भी अपना नाम रजिस्टर करना है उनके पास आप कर सकते हैं। हरे कृष्णा। विशेष सूचना इस प्रकार से: परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज जी द्वारा मराठी में लिखित ग्रंथों का संच है। 100 का संच, केवल 100 का संच जो केवल 100 में आपको मिल रहा है तो जरूर महाराज जी का स्टॉल लगा हुआ है आप वहाँ से ले सकते हैं। हिंदी के तीन विशेष ग्रंथ हैं जिनका संच 500 में मिल रहा है। श्री कृष्ण स्वरूप चिंतन, यह बड़ा नया ग्रंथ महाराज जी के द्वारा लिखा हुआ। प्रभुपाद एवं कुंभ बाकी सभी पुस्तकों पर 10 से 30 प्रतिशत की छूट मिल रही है आज और कल के लिए आप ले सकते हैं। श्रीमद् भागवत का एक विशेष अनाउंसमेंट सुनिए: मराठी श्रीमद् भागवत संच, 40 संच यहाँ पर बुक हो चुके हैं। हरि बोल। उनमें से 18 संच को लेने के लिए यहाँ पर 18 भक्त आएंगे जो महाराज जी के हाथों से उनको ले रहे हैं और उनको एक-एक ग्रंथ के ऊपर महाराज जी सिग्नेचर करके दे रहे हैं। हरे कृष्णा। तो ड्रामा करने वाले भक्तों से मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि वे लोग अपना ड्रामा प्रस्तुत कर सकते हैं। हरे कृष्णा। हाँ, नाम बोलिए।