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Allah Pak Se Baatain Kijiye | Converse with Allah | Abdul Habib Attari

Abdul Habib Attari2:28

Transcription

अल्लाह से बातें किया करो। [संगीत] करो। अल्लाह से बातें किया करो। यह कमाल है। यकीन बताऊ आपको? दुनिया में बड़े आदमी से बात करने का मौका नहीं मिलता। टाइम पहले लेना पड़ता है। अव्वल तो टाइम ही नहीं मिलता। मिल भी जाए तो किसी सेक्रेटरी के थ्रू टाइम मिलता है। वह पहले ही बता देता है, "साहब बहुत बिजी है। पांच मिनट से ज्यादा बात नहीं कर सकते।" इतना मुश्किल है दुनिया में बड़े लोगों से बात करना।

मगर मैं बताता हूं, जिसने कायनात बनाई है, उससे बात करना कितना आसान है। मेरे और रब के बीच में कोई सेक्रेटरी नहीं है। हाथ उठाओ और डायरेक्ट बात करना शुरू कर दो। जितनी देर करनी है करो ना बात। और वो खुद फरमाता है, "उनी मांगो, मैं तुम्हें अता करूंगा।" वो देने के लिए तैयार है। हम पुकारते हैं, हमें जल्दी इतनी है। हमें उसके घर में चैन ही नहीं आ रहा। अरे दो रकत नफल पढ़ ली, कभी तस्बीह पढ़ ली। सब चले गए तो कोने में अल्लाह से बातें शुरू कर दी।

सोचो ना, अपनी मां से जब आप तड़प कर बात करते हो तो मां सीने लगा लेती है। जब अल्लाह से अर्ज करोगे कि मौला, परेशान हूं। मेरे मौला, फंस गया हूं। अल्लाह, बहुत गुनाह हो गए हैं, नहीं छूट रहे गुनाह। मालिक, किसी तरीके से बचा ले। अल्लाह, हराम रोजी से बचा ले। बोलो ना, जो दिल में। अल्लाह से कौन रोक रहा है तुम्हें? और जिस जबान में बात करनी है, करो। अरे, वो तो दिलों के हाल जानता है। वो तुम्हारी कैफियात को देख रहा है। उसके घर में आए हो तो मांगो ना उससे।

अरे, तुम्हारा मेहमान तुम्हारे ड्राइंग रूम में बैठ जाए और रोना शुरू कर दे कि परेशान हूं, तो क्या धक्के देके निकालो? तुम बोलोगे, "घर के अंदर आ गया है मेहमान है, कुछ तो करना पड़ेगा।" अरे, करीब के घर में आ गए जब तुम और इधर आंसू बहाना शुरू कर दिए, तो क्या खाली लौट आएगा? तुम्हें अंदाजा ही नहीं कि उसके घर में आकर दिल से मांगने पर वो क्या-क्या अता फरमाए। आना जाना रखो, थाम लो मस्जिद को। उलमा कहते हैं, अगर किसी के किसी के ईमान को चेक करना है ना, उसके ईमान की स्ट्रेंथ को चेक करना है, तो यह चेक करो कि वो मस्जिद में कितना आता जाता है। अब अपने अपने आप से सवाल कर लो कि हमारा मस्जिद में कितना आना जाना है। खुशनसीब है वो लोग, वाकई खुशनसीब है जिनकी जमात नहीं जाती। जमात को थाम लो।