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The Day of Judgment & Yajooj Majooj: Understanding the End Times

Zulfiqar8:20

Transcription

दज्जाल के कत्ल के बाद लोग अमन के साथ जिंदगी गुजारेंगे। इसी दौरान अल्लाह हजरत ईसा अलैहि सलाम को हुक्म देगा कि तमाम मोमिनों को माउंट सीना यानी कोहेतूर पर ले जाएं। वही जगह जहां हजरत मूसा अलैहि सलाम अल्लाह से बात किया करते थे। क्योंकि अब कुछ ऐसे वहशी लोग छोड़ दिए जाएंगे कि कोई कौम उनसे लड़ नहीं सकेगी। तो हजरत ईसा अलैहि सलाम तमाम मुसलमानों को माउंट सीना के किले में ले जाएंगे और वही रहेंगे। फिर याजूज माजूज को छोड़ दिया जाएगा।

याजूज माजूज इतनी बड़ी तादाद में जाहिर होंगे कि जब इनका पहला गिरोह दरिया ए तिब के किनारे से गुजरेगा तो इसका पानी पीकर इसे खुशक कर देगा। और जब दूसरा गिरोह वहां पहुंचेगा तो सोचेगा कि वहां कभी पानी था ही नहीं। वो चींटी और टिड्डियों की तरह चारों तरफ फैल जाएंगे और जमीन पर तबाही मचाएंगे। जमीन पर हंगामा और कत्ल गारत करने के बाद वो कहेंगे हमने जमीन की तमाम मखलूक को कत्ल कर दिया है। अब हम आसमान वालों को मार डालेंगे। और फिर वह आसमान की तरफ तीर चलाएंगे। कुदरत के तरीके अजीब हैं; उनके तीर खून आलूद होकर वापस आएंगे। एक तरफ वह अपने शैतानी कामों में मसरूफ होंगे और दूसरी तरफ हजरत ईसा अलैहि सलाम अपने साथियों के साथ माउंट सीना के किले में ठहरे होंगे।

जहां उन्हें इस कदर शदीद भूख का सामना करना पड़ेगा कि एक इंसान के सर गाय की कीमत 100 सोने के सिक्कों से कहीं ज्यादा होगी। इस नाजुक मोड़ पर हजरत ईसा अलैहि सलाम अपने साथियों के साथ अल्लाह से दुआ करेंगे। अल्लाह इनकी दुआ कबूल करेगा और याजूज माजूज की गर्दन में एक किस्म का जरासी पैदा करेगा जिससे वो एक ही रात में मर जाएंगे। याजूज माजूज के खात्मे के बाद हजरत ईसा अलैहि सलाम और इनके साथी माउंट सीना से नीचे उतरेंगे और देखेंगे कि सारी जमीन इनकी लाशों और बदबू से भरी होगी। वो फिर अपने साथियों के साथ अल्लाह से दुआ करेंगे। अल्लाह एक तेज हवा भेजेगा और एक किस्म के चिड़िया आएंगे और लाशों को उस जगह ले जाएंगे जहां अल्लाह उन्हें ले जाने का हुक्म देगा। इनके थर और कमान इतनी तादाद में होंगे कि मुसलमान इनको सात साल तक आग की लकड़ी के तौर पर यूज करेंगे। इसके बाद बारिश होगी जो जमीन को बराबर कर देगी।

अब अल्लाह जमीन को फल पैदा करने का और आसमान को अपनी नीमत बरसाने का हुक्म देगा। अल्लाह की इतनी रहमत होगी कि एक अनार को लोगों का एक गिरोह अच्छे से खा सकेगा और गाय का दूध एक कबीले के लिए काफी होगा और बकरी का दूध एक खानदान के लिए काफी होगा। हजरत ईसा अलैहि सलाम 40 साल तक मुसलमानों की इमामत करेंगे और दुनिया में इंसाफ से हुकूमत करेंगे। इन 40 सालों में दज्जाल के कत्ल के सात साल भी शामिल हैं। हजरत ईसा अलैहि सलाम शादी करेंगे और इनके बच्चे भी होंगे। वो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कब्र मुबारक पर सलाम कहेंगे और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इसका जवाब देंगे। वो उमरा या हज करने के लिए मदीना के करीब रूहा नाम की एक जगह के रास्ते मक्का जाएंगे। इन तमाम वाकयात के होने के बाद वह वफात पा जाएंगे। मुसलमान इनको रोजा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पहलू में दफन करेंगे।

हजरत ईसा अलैहि सलाम की वफात के बाद यमन का रहने वाला कबीला कहता से जहजा नाम का इंसान खलीफा बनेगा। इसके बाद कुछ और बादशाह होंगे जिनके दौर में कुफ्र फैलेगा। इस दौरान एक घर मगरिब में और दूसरा मशरिक में जमीन में धंस जाएगा जहां तकदीर के मुकर्रर रहते होंगे। फिर एक अजीब किस्म का धुआं आसमान से नीचे जमीन तक पूरी दुनिया को सियाह करता हुआ नजर आएगा। यह 40 दिन तक जारी रहेगा और मोमिनों को ठंडा करेगा और काफिरों और मुनाफिकों को बेहोश कर देगा। कुछ एक दिन बाद होश में आ जाएंगे, कुछ दो दिन बाद और कुछ तीन दिन बाद। और फिर जुल् हिज्जे के महीने में एक रात कुर्बानी के दिन के बाद आएगी जो इतनी लंबी होगी बच्चे रोने और नूहा करने लगेंगे, मुसाफिर थक जाएंगे और मवेशी चरने के लिए बहुत बेचैन होंगे। लोग रोएंगे और माफी मांगेंगे। आखिरकार सूरज तकरीबन तीन या चार रातों के बाद मगरिब से तलू होगा, जैसे चांद ग्रहण बेचैनी की हालत में हल्की सी रोशनी डालता है। यह आसमान के दरमियान तक जाएगा और फिर वापस मगरिब में गरू हो जाएगा। इसके बाद सूरज हर रोज मशरिक में तलू होगा।

कयामत की इस निशानी के जाहिर होने के साथ ही तौबा के दरवाजे सब पर बंद हो जाएंगे। काफिरों का कुफ्र छोड़ना और गुनाहगारों की गुनाहों से तौबा कबूल नहीं होगी और इस्लाम कबूल करना भी कबूल नहीं होगा। मुसलमान अभी तक सूरज के मगरिब से निकलने के सदमे में ही होंगे। इसके बाद एक अजीब जानवर मक्का के करीब एक सफ़ा नामी पहाड़ी से निकलेगा और दुनिया के तमाम शहरों और हिस्सों में इतनी तेजी से जाएगा कि कोई भागने की कोशिश करेगा तो इससे बच नहीं सकेगा। यह बोल भी सकेगा और इसके एक हाथ में हजरत मूसा अलैहि सलाम का असा और दूसरे हाथ में हजरत सुलेमान अलैहि सलाम की अंगूठी होगी। यह हजरत मूसा अलैहि सलाम के असा के साथ हर मोमिन की पेशानी पर एक हल्की लकीर खींचेगा जिससे मोमिन का काला चेहरा भी चमक उठेगा और यह अंगूठी से हर काफिर की पेशानी पर मोहर लगा देगा जिससे इसका चेहरा गंदा हो जाएगा। इस तरह फिर तमाम मोमिन और काफिर खुल जाएंगे। ईमान और कुफ्र की ये निशानियां कभी नहीं बदलेंगी। काफिर कभी भी कुफ्र से नहीं हटेंगे और मोमिन इस्लाम पर कायम रहेंगे। यह पहले यमन में जाहिर होगा फिर नजद में और फिर गायब हो जाएगा और तीसरी बार यह मक्का में जाहिर होगा।

कयामत के 40 साल पहले एक खुशबूदार हवा लोगों की बगलों के नीचे से गुजरेगी जिससे तमाम मुसलमानों की मौत हो जाएगी। कोई मोमिन और परहेज़गार बाकी नहीं रहेगा सिवाय काफिर के। अफ़्रीकी लोग ग़लबा हासिल करेंगे और हुकूमत करेंगे। वह काबा को तोड़ देंगे। खुदा का खौफ़, शर्म और हया नहीं रहेगी। हुक्मरानों के जुल्म और आवाम के आपस में झगड़े बढ़ेंगे। बुद्धों की पूजा, जुल्म, कानून के ख़िलाफ़ वर्ज़, भूख और बीमारी फैलेगी। दुनिया की ऐसी अफ़सोसनाक हालत में शाम का कुछ भला होगा। बाकी सारे मुल्क के लोग अपने खानदान के साथ शाम की तरफ रवाना हो जाएंगे। इसी दौरान साउथ की तरफ से एक बड़ी आग नज़र आएगी जो दुनिया के तमाम लोगों को शाम में जमा होने पर मजबूर करेगी और फिर ग़ायब हो जाएगी। यह 30 साल दुनिया के ख़ात्मे की तरफ़ इस हालत में गुज़रेंगे कि कोई नया बच्चा पैदा नहीं होगा, यानी सब 40 साल के होंगे और कोई मोमिन नहीं होगा सिवाय काफिरों के।

अचानक जुमे के दिन जो कि मुहर्रम की 10 तारीख होगी, इस दिन सारे लोग अपने कामों में मसरूफ़ होंगे और अल्लाह सुबह के वक़्त इसराफ़ील को सूर फूंकने का हुक्म देगा और फिर इसराफ़ील सूर फूंकेंगे जिसकी आवाज़ से यूनिवर्स के सारे इंसान, जानवर तबाह हो जाएंगे। यहां तक कि अल्लाह के फ़रिश्ते जिब्राईल, मिकाईल और इसराफ़ील सबको मौत आएगी और सिर्फ़ अल्लाह और इज़राईल यानी मौत का फ़रिशता बाकी रहेंगे। फिर अल्लाह हजरत इज़राईल को हुक्म देगा कि अपनी रूह क़ब्ज़ करो। हजरत इज़राईल जब अपनी रूह को क़ब्ज़ करेंगे तो वह ऐसी चीख मारेंगे कि अगर कोई इंसान ज़िंदा होता तो इस चीख को सुनकर उसे दोबारा मौत आ जाती। इसके बाद कोई ज़िंदा नहीं होगा सिवाय अल्लाह के, वो जो हमेशा से था और हमेशा रहेगा। फिर अल्लाह जमीन को अपने थामेगा और आसमान को अपने सीधे हाथ में लपेट लेगा और कहेगा कि मैं बादशाह हूँ, कहाँ हैं जमीन के बादशाह? इसके बाद अल्लाह जमीन पर पानी बरसाएगा। यह अजीब सा चिपकने वाला पानी होगा। जब यह पानी जमीन पर गिरेगा तो इस पानी से क़ब्र में पड़े मुर्दे दोबारा ज़िंदा हो जाएंगे। फिर अल्लाह इसराफ़ील को दोबारा ज़िंदा करेगा और कहेगा दोबारा सूर फूँक। जब हजरत इसराफ़ील दोबारा सूर फूंकेंगे तो इस दुनिया में पैदा हुए सारे इंसान यह देख रहे होंगे, जमीन बिल्कुल सीधी और साफ़ हो चुकी होगी और यही से हिसाब का दिन शुरू [संगीत] होगा।