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दो हफ्ते मैं जीत गया। मैं जीत गया। चिल्लाने के बाद अब डॉल्ड ट्रंप के सुर कुछ बदले बदले नजर आ रहे हैं। अब वह इस बात से खफा हैं कि अमेरिका की मदद करने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है। वह तो धमकियां देने पर उतर आए हैं कि अगर तुम हमारी मदद नहीं करोगे तो मैं तुम्हें बाद में देख लूंगा। और तो और अपने देश में ही मीडिया को फांसी देने की बात कर रहे हैं। क्योंकि कई अमेरिकन मीडिया आउटलेट्स ने ट्रंप की हार का पोल खोल दिया है। जिसे ट्रंप एज अ एक्ट ऑफ ट्रीजन बता रहे हैं।
लेकिन एक तरफ जहां आप ट्रंप को देखेंगे बड़बड़ाता हुआ, छटपटाता हुआ, वहीं इजराइल चुपचाप से अपना काम किए जा रहा है। उसे कोई खास बेचैनी नहीं हो रही है। जहां दुनिया की नजरें ईरान पर टिकी हुई है। उसी समय लेबन में एक गाजा पार्ट टू चल रहा है। लाखों लोगों को अपने घरों से बेदखल कर दिया गया है। वाइट फास्फोरस जैसे बैंड केमिकल्स का प्रयोग किया जा रहा है लोगों के ऊपर।
अगर आप अमेरिका और इजराइल के रवैया को इस युद्ध में देखोगे तो आपको एक शार्प कंट्रास्ट मिलेगा। अमेरिका इस युद्ध में आया था इजराइल के कहने पर, तेल की लालच में और अपनी ऐड जमाने के लिए। लेकिन इजराइल का एंड गेम ना तो तेल है, ना तो ईरान पर कब्जा है और ना ही अमेरिका के वर्चस्व को बढ़ावा देना। उसका तो अलग ही गेम चल रहा है और वो बहुत खूबी से इस गेम को खेल भी रहा है।
इजराइल के लिए एक धर्म युद्ध है ये जूस और मुसलमानों के बीच में और ये युद्ध के बीच स्थित है जेरूसलम जिसे दुनिया का सबसे पवित्र जगहों में से एक माना जाता है। इस धर्म युद्ध में इजराइल के पक्ष में कई अमेरिकन पॉलिटिशंस आपको खड़े मिल जाएंगे। जैसे कि ट्रंप के खास लिंजी ग्रेहेम यह लगता है इजराइल के लिए ही काम करते हैं। इनके लिए अपने देश से ज्यादा इजराइल की जीत जरूरी है। दिस इज़ अ रिलीजियस वॉर हु्स इट एट द एंड ऑफ़ द डेडिकल इस्लामिक टेररिस्ट किल ऑल द बिकॉज़ गड टोल्ड टू वाल इस्लाम टू रिजेक्टेशन एंड मेक एवरीबडी दिस इज़ अ बिग डील ये बयान दिया गया था वॉर शुरू होने से पहले ग्रहम पर बाय द वे आरोप भी ये लगे हैं कि उन्होंने ट्रंप को इस युद्ध में घसीटने में एक अहम भूमिका अदा की है और वो भी ट्रेनिंग इनको इजराइल में ही मिली थी इसके लिए और सिर्फ यही नहीं करंट यूनाइटेड स्टेट सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेक्स की 2018 वाली यह बयांबाजी सुनी है। जेरूसलम में एक इवेंट के दौरान उन्होंने कहा था कि इसका कोई कारण नहीं है कि टेंपल माउंट पर दोबारा मंदिर ना बन सके। नो रीज़ व्हाई द मिरेकलस्टब्लिशमेंट ऑफ़ द टेंपल ऑन द टॉस। आई डोंट नो हाउ इट वुड हैपन। यू डोंट नो हाउ इट वुड हैपन बट आई नो इट। हेक्सेथ यहां बात कर रहे हैं जूइश थर्ड टेंपल के बारे में। एक ऐसी बिब्लिकल प्रोफेसी जो बहुत से जूस के लिए काफी मायने रखता है। लेकिन जिस जगह जूस का सबसे पवित्र फर्स्ट और सेकंड टेंपल हुआ करता था वहां आज अल अक्सा मॉस्क खड़ा हुआ है जो इस्लाम धर्म का तीसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।
बात सिर्फ एक मंदिर बनाने तक की नहीं है। यूएस इजराइल के ईरान पर हमले के सिर्फ एक हफ्ते पहले जब इजराइल में अमेरिका के एंबेसडर माइक हकबी से यह पूछा गया कि क्या वो इजराइल के इस दावे को सपोर्ट करते हैं जिसमें नाइल रिवर से लेकर यूफिटीज रिवर तक सिर्फ जमीन इजराइल के कंट्रोल की बात की गई है तो उन्होंने जवाब दिया कि भाई बाइबल के मुताबिक तो यह जमीन इजराइल को दी गई थी। एक ऐसा बयान जो सीधा-सीधा इशारा करता है ग्रेटर इजराइल की तरफ।
लेकिन ग्रेटर इजराइल सिर्फ एक जाइनिस्ट कल्पना नहीं है। ये सिर्फ एक मंशा नहीं है। ये एक एक्टिव प्रोजेक्ट है जिस पर नितिन याहू सालों से काम करते आए हैं। ईरान पर जो हमला हुआ है, गाजा में जो नरसंहार हुआ है, लेबन पर जो कब्जा चल रहा है, वेस्ट बैंक में जो आतंक चल रहा है, इसी प्रोजेक्ट का जीता जागता हिस्सा है। तो अगर आपको ईरान के युद्ध को पूरी तरीके से समझना है तो इजराइल के मंसूबों को समझना होगा। लॉन्ग गेम को समझना होगा कि आखिर है क्या ये ग्रेटर इजराइल? क्या सच में बाइबल में इसका जिक्र आता है? क्या है ये थर्ड टेंपल की प्रोफेसी? क्यों जेरूसलम का अल अक्सा मॉस्क जूस वर्सेस मुसलमानों की लड़ाई का अब एक केंद्र बन सकता है? क्या ये वाकई में एक रिलीजियस वॉर बन रहा है? और कैसे इजराइल इस प्रोजेक्ट पर चुपचाप काम करते आया है।
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ग्रेटर इजराइल का कांसेप्ट सबसे पहले एक्सप्लोर किया था थिएडोर हत्सेल ने जिन्हें फादर ऑफ पॉलिटिकल जायनिज्म भी कहा जाता है। इस आईडिया का सबसे बड़ा जो एक्सपेंशनिस्ट वर्जन है बाइबल की बुक ऑफ जेनेसिस के एक वर्स में मिलता है। इस वर्ष के मुताबिक भगवान ने अब्राहम से एक एग्रीमेंट किया था जिसमें उनके वंशजों को नाइल रिवर से लेकर यूफिटीज रिवर तक की जमीन देने का वायदा बताया जाता है। नाइल से लेकर यूफिटीज तक आज के डेट में इस एरिया में आते हैं पेलेस्टाइन, लेबन, जॉर्डन के साथ-साथ सीरिया, इराक और इजिप्ट और सऊदी अरेबिया के कुछ अहम हिस्से। इब्राहिम के वंशजों में आते हैं जुइश लोग। क्योंकि ट्राइब्स ऑफ इजराइल को इब्राहिम के बेटे आइजक के वंशज वो माने जाते हैं। लेकिन इसी के मुताबिक इब्राहिम के दूसरे बेटे इस्माइल के वंशज भी इसमें आते हैं। यानी अरब्स क्योंकि इस्माइल को अरब्स का फोरफादर माना जाता है। पर ज्यादातर जस इसे अपना हक मानते हैं। बाइबल की कुछ और वर्सेस में भी इस आईडिया का जिक्र है। पर उसमें टेरिटोरियल स्कोप थोड़ा कम क्लियर है। जो लोग इसे मानते हैं उनके लिए ग्रेटर इजराइल सिर्फ एक पॉलीटिकल या एक्सपेंशनिस्ट प्रोजेक्ट नहीं है। उनके लिए ये एक डिवाइन मैंडेट है। एक ऐसी जमीन को वापस पाने की कोशिश जो उनके हिसाब से उन्हीं की थी।
2022 में करंट इजली गवर्नमेंट के सत्ता में आने के बाद ग्रेटर इजराइल का जिक्र आपको अब ज्यादा सुनने को मिलेगा। लेकिन सबसे ज्यादा चौंका देने वाला बयान खुद नैतिन याू का था। अगस्त 2025 में एक इंटरव्यू के दौरान जिसमें फॉर्मर राइट विंग एमपी शान गैल ने प्रॉमिस्ड लैंड का एक एमुलेट माने एक ताबीज नितिन याहू ने एक्सेप्ट किया। 31 अरब और मुस्लिम देशों के एक कोिशन ने इजरली प्राइम मिनिस्टर द्वारा दिए गए इन बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे अरब नेशनल सिक्योरिटी देशों की सोवनिटी और रीजनल और ग्लोबल पीस के लिए सीधा-सीधा खतरा बताया। लेकिन इजराइल रुकने वालों में से कहां था? 2024 में याद रखिए इजराइल के फाइनेंस मिनिस्टर का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें वो इजरायली बॉर्डर्स को एक्सपेंड करने की बात कर रहे थे ताकि उसमें सीरिया के कैपिटल डेमास्कस को भी शामिल किया जाए। उनका लॉजिक था कि ये लिखा हुआ है कि जेरूसलम का फ्यूचर है डेमोस्कस तक एक्सपेंड होना। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे इजराइल सिर्फ सारे पैलेस्तीनियन टेरिटरीज को ही नहीं बल्कि जॉर्डन, लेबनॉन, इजिप्ट, सीरिया, इराक, सऊदी अरेबिया के कुछ हिस्सों तक भी फैल सकता है। स्मोट्रिक इससे पहले भी 2023 में पेरिस में एक मेमोरियल सर्विस के दौरान ग्रेटर इजराइल का आईडिया सामने रख चुके थे। वहां तो वो एक मैप के सामने खड़े होकर बोल रहे थे जिसमें इजराइल की टेरिटरी में जॉर्डन भी शामिल था।
ग्रेटर इजराइल के सपने को साकार करने के लिए इजराइल ने अब तक कितनी जमीन पर कब्जा ऑलरेडी कर लिया है। उस पर भी एक नजर डाल लेते हैं कि यह कितनी काल्पनिक है और कितनी फ़क्चुअल है। आज का इजराइल 1948 में ब्रिटिश मैंडेट फॉर पैलेस्टाइन से आता है। ये मैंडेट वर्ल्ड वॉर वन और यूनाइटेड किंगडम के पैलेस्टाइन पर कब्जे के बाद बनाया गया था। इस मैंडेट ने इजराइल की ज्योग्राफिकल बाउंड्रीज तय की थी। मैंडेट के खत्म होने के बाद जो 1948 अरब इजराइली वॉर हुआ था। उसमें इजराइल ने लगभग पूरे मैंडेटरी पैलेस्टाइन पर कब्जा कर लिया। वेस्ट बैंक और गाजा स्ट्रिप को छोड़कर पूरा एरिया अपने अंडर ले लिया। लेकिन जल्द ही इजराइल ने अपनी टेरिटरी को और बढ़ाना शुरू कर दिया। 1967 में इजराइल ने अरब फोर्सेस को हराया और इजराइल ने वेस्ट बैंक, गाजा साथ ही इजिप्ट के सेनाई, पेनसुला और सीरिया में गोलान हाइट्स पर भी कब्जा कर लिया। तब से लेकर अब तक इजराइल ने इंटरनेशनल लॉ को दरकिनार करके पैलेस्तीनियन और सीरियन जमीन पर अपना कब्जा वो बनाए रखे हुए हैं। सिनाई पेनसुला को छोड़कर जो उन्होंने 1982 में इजिप्ट को वापस कर दिया था। और पिछले कुछ सालों में अपने पड़ोसी मुल्कों की सोवनिटी को ताक पर रखकर सीरिया और लेबन की जमीन पर भी वो कब्जा कर कर बैठे हुए हैं।
और वॉर के बीच 12 मार्च को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नितिन याू ने इन हमलों के लिए धर्म को जिम्मेदार ठहराया। एक्सट्रीम इस्लाम टू द एंटायर वर्ल्ड। वी कांट से दिस वुड इटसेल्फ कंटिन्यू टू स्ट्राइक आवर एनिमी ओवर एंड ओवर अगेन। इजराइल का एजेंडा छुपा नहीं है। वो साफ दिखता है जिन्हें देखना है उन्हें। जब जहां ओपोरर्चुनिटी मिलेगा और ज्यादा जमीन पर कब्जा कर लो ग्रेटर इजराइल का सपना पूरा करने के लिए। और इस ग्रेटर इजराइल प्रोजेक्ट में सिर्फ एक देश है था जिसके पास वो ताकत है, जज्बा है इजराइल के सामने खड़े होने की, इजराइल को रोकने की। इजराइल जानता था कि वो ईरान के साथ अकेला लोहा नहीं ले सकता है। ईरान को अकेले हरा नहीं सकता है। इसीलिए इस काम के लिए वो एक अमेरिकी राष्ट्रपति ढूंढने लगा। बहुत सालों से ढूंढ रहा है। बहुत सारे प्रेसिडेंट्स पर ये चीज कोशिश किया गया था कि भैया किसी प्रेसिडेंट को इन्फ्लुएंस करके ईरान पर हमला करवा दो। फाइनली उन्हें मिला एक यूज़फुल इडियट डोनाल्ड ट्रंप जिसने इजराइल का काम कर दिया। आज ईरान से मुंह की खाने के बाद डोनल्ड ट्रंप खुद ही सोच रहे हैं कि यार इस ईरान के युद्ध में मैं उलझा क्यों? मुझे क्या मिल रहा है? अब तो अमेरिकनंस को भी साफ-साफ दिख रहा है कि उनका देश इजराइल चला रहा है। उनका प्रेसिडेंट इजराइल का पपेट है। उनके वेलफेयर से पहले इजराइल के वेलफेयर के बारे में सोचा जाता है।
लेकिन इजराइल की प्लानिंग सिर्फ जमीनी कब्जे तक सीमित नहीं है। प्लान उससे भी बड़ा है। अगर ग्रेटर इजराइल का सपना पूरा भी नहीं हुआ तो उससे भी ज्यादा एंबिशियस गोल है जेरूसलम में जिसे होलीियस स्पॉट ऑन अर्थ कहा जाता है। जेरूसलम में है फाउंडेशन स्टोन। वो पत्थर जिसे जूस बांधते हैं। दुनिया की शुरुआत हुई थी। जूस इस जगह को टेंपल माउंट कहते हैं। जहां उनके हिसाब से एक टेंपल हुआ करता था जिसे दो बार इतिहास में तोड़ा गया है। पहला टेंपल 1000 बीसीई से लेकर 586 बीसीई तक था जिसे किंग सोलमन ने बनवाया था और बैबलोनियंस ने ध्वस्त किया था। दूसरा टेंपल था 55 बी सीई से लेकर 70 एडी तक जिसे रोमंस ने तोड़ा क्रिश्चियनिटी के आगमन के बाद। सेकंड टेंपल के साइट पर आज स्थित है अल अक्सा कॉम्प्लेक्स जिसमें अल अक्सा मॉस्क खुद शामिल है जिसे इस्लाम का थर्ड होलियस्ट साइट माना जाता है। मुसलमान इसे वो जगह मानते हैं जहां से प्रॉफेट मोहम्मद स्वर्ग की तरफ गए थे। इस स्ट्रक्चर का निर्माण उमयत कैलिफ अब्दुल मलिक इब्न मारवान ने 691 या 692 सीई के बीच में करवाया था। सेकंड टेंपल का आज सिर्फ एक हिस्सा बाकी रह गया है अल अक्सा मॉस्क में जिसे वेस्टर्न वॉल या वेलिंग वॉल के नाम से जाना जाता है। यह वही जगह है जहां इजराइली और अमेरिकन पॉलिटिशंस आपको अक्सर जाकर दिखेंगे माथा टेकते हुए।
1967 में जेरूसलम पर इजरायली ऑक्यूपेशन शुरू होने के बाद ये जगह लगातार तनाव का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ मुसलमान है और दूसरी तरफ वो ग्रुप्स है जो यहां पूरा जइश कंट्रोल चाहते हैं। पैलेस्तीनियंस और दुनिया भर के मुसलमान के लिए अल अक्सा मॉस्क एक प्रतीक है उनके धर्म का, उनकी आइडेंटिटी का। लेकिन कई इजराइलियों के लिए ये वो जगह है जहां तीसरा जूइश टेंपल बनना चाहिए। और कई कट्टर जायनिस्ट के हिसाब से थर्ड टेंपल तब तक नहीं बन सकता है जब तक अल अक्सा मॉस्क को गिराकर पूरे कंपाउंड को प्यूरिफाई ना किया जा सके। दशकों से इस जगह को इसीलिए एक इंटरनेशनल अरेंजमेंट के तहत गवर्न किया जाता है जो उसे एक्सक्लूसिवली इसे एज एन इस्लामिक रिलीजियस शाइन का स्टेटस देता है। हालांकि यह बात सच है कि मेन स्ट्रीम जइश रिलीजियस लीडर्स ने थर्ड टेंपल के आईडिया का विरोध किया है। लेकिन उसके बावजूद पिछले कुछ दशकों में मस्जिद गिराकर थर्ड टेंपल बनाने की मांग को रिलीजियस और पॉलिटिकल सपोर्ट मिलते आया है। पर जुइश स्कॉलरशिप के हिसाब से थर्ड टेंपल तभी बन सकता है जब वो मसाया आएगा। किंगडम ऑफ गॉड की शुरुआत करेगा। और नितिन याू की हाल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह बात साफ हो जाती है कि वह इस दिशा में काम कर रहे हैं। वी आर वर्किंग अगेंस्ट ईरान इन मेनी वेज़ एंड इन वेज़ दैट वुड बी रिवील्ड एट अ लेटर स्टेज एंड आई कैन से दैट इजराइल इज़ मच स्ट्रोंगर मच ग्रेटर देन इट हेज़ बीन इन द पास्ट वी नीड टू रिकग्नाइज़ दिस एंड आई बिलीव वी ऑल रिकग्नाइज दैट दैट वी टू द किंगडम वीक दिस विल नॉट हैपन नेक्स्ट थर्सडे तो नितिन याहू तो इस प्रोफेसी को पूरा करने में लगे हुए है अच्छी बात है।
पर इस सब में अमेरिकनंस की दिलचस्पी क्या है? किसी का रिलीजियस एंगल है तो लगता है किसी का पॉलिटिकल एंगल है। कई क्रिश्चियन जायनिस्ट ग्रेटर इजराइल को बाइबल की प्रोफेसी का फुलफिलमेंट मानते हैं और कहते हैं ये दुनिया खत्म होने से पहले ये काम करना काफी जरूरी है। कुछ अमेरिकन क्रिश्चियंस का मानना है कि थर्ड टेंपल के बनने से जीसस की वापसी का रास्ता खुल जाएगा। फिर बेशक उसके लिए कुछ एक्सट्रीम कदम उठाना पड़े तो सही। क्रिश्चियन से वी हैव पीस इस्लाम इस्लाम से देर बिफोर आई से इन दिस दे हैड चाक दे ग्रेट बिग मिस विकिंग राइट नाउ सो वी गेट जीसस।
लेकिन इसमें पॉलिटिक्स भी साफ-साफ इनवॉल्वड है। सिर्फ धर्म की बात नहीं है। यूनाइटेड स्टेट सेक्रेटरी ऑफ़ वॉर बीट हेक्स ने 2018 वाले स्टेटमेंट में अटेंडस को यह भी कहा था कि ट्रंप ही अच्छा लीडर है आपके लिए। डोनल्ड ट्रंप के पावर में रहते हुए ही उनके लिए फायदा है। क्योंकि वो जो चाहे इस रीजन में वो कर सकते हैं क्योंकि वाशिंगटन डीसी में ऐसे ट्रू बिलीवर्स बैठे हैं जो उनका साथ देंगे। जबकि यूएस सेनेटर लिंजी ग्रेहेम ने इसे रिलीजियस वॉर बताते हुए कहा कि ये आने वाले कई सालों के लिए एक डिफाइनिंग मोमेंट रहेगा और ट्रंप हमेशा उनके साथ रहेगा। व्हाट वी आर फेसिंग राइट नाउ इज ए मोमेंट डिसीजन दैट विल सेट द कोर्स ऑफ़ द फ्यूचर द फॉर थाउजेंड इयर्स।
तो ये जंग कितने हद तक धार्मिक युद्ध बन चुका है? रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरली फोर्सेस के कुछ सोल्जर्स और कुछ अमेरिकन सोल्जर्स तक अपनी यूनिफार्म पर थर्ड टेंपल के पैचेस लगाते हैं और इजराइली सोल्जर्स अपनी मिलिट्री गाड़ियों पर अल अक्सा के कॉन्क्वेस्ट के बैनर्स लगाते देखे गए हैं। लेकिन सबसे साफ संकेत इस बात का इससे होता है कि यूएस इजराइल का पहला टारगेट इस वॉर में आयतला खमीनी थे जो कि ना सिर्फ ईरान के हेड ऑफ स्टेट थे बल्कि एक रिलीजियस लीडर भी थे। दुनिया भर के शिया मुसलमान के लीडर माने जाते थे वो और उन्हें रमजान के महीने में अससिनेट किया गया था। क्या इसके कॉन्सिक्वेंसेस के बारे में सोचा गया था? क्या दुनिया भर के मुसलमान खासतौर पर शिया मुसलमान में एक रिजेंटमेंट पैदा होगी इस चीज को लेकर जो दशकों तक फैल सकती है? नई लड़ाईयां इस वजह से शुरू हो सकती है या फिर मकसद था नई लड़ाईयों को शुरू करना। क्या यही कारण है? क्या इजराइल ने मिडिल ईस्ट के कुछ और देशों पर जैसे सऊदी हो, साइपरस हो फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन कराए ईरान के साथ कॉन्फ्लिक्ट को बढ़ावा देने के लिए कि सारे देश ईरान पर अटैक कर दे ताकि मिडिल ईस्ट के देश आपस में लड़े, भिड़े, मरे और फिर इजराइल अपने आप को पूरे एरिया का डॉन, अपने आप को पूरे एरिया का गुरु बना ले।
ऑल वी कैन से इस दैट एक्सपर्ट्स के मुताबिक तो यह बात साफ हो चुकी है कि इजराइल द्वारा शुरू किया यह वॉर का मकसद है ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना और अगर इसमें ग्लोबल इकॉनमी की तबाही हो जाए तो मंजूर है। ईरान को डिस्ट्रॉय करना मकसद है यूएस का इस्तेमाल करके जिससे वो रीजनल सुपर पावर बन सके। इजराइल पावर बन सके। उसके बाद गल्फ नेशंस का भी सत्यानाश कर सके। तुर्की को भी वॉर में घसीट सके और फाइनली ग्रेटर इजराइल का निर्माण कर सके। इनफैक्ट इजराइल चाहता है कि ईरान और यूएसए एक दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाए ताकि इजराइल इस लड़ाई के बाद और भी मजबूत और भी ताकतवर उभरे। और वो वेस्ट एशिया और नॉर्थ अफ्रीका का भी टेकओवर के भी सपने देख रहा है।
ग्रेटर इजराइल और थर्ड टेंपल में विश्वास रखने वाले लोगों का मानना है कि यह सब एक गोल्डन एज की शुरुआत करेगा। जहां जइश सुप्रीमसी होगी और बाकी देश उसके इन्फ्लुएंस या कंट्रोल के नीचे होंगे। जी हां, अमेरिका समेत। इस बात की तरफ इशारा नितिन याू ने जंग के बीच खुद किया है। दीज़ अचीवमेंट्स आर इनक्रीसिंग द स्टेटस ऑफ़ इजराइल एस सुपर पावर मोर देन एवर। वी रीजनल सुपर पावर। एंड मेनी रेस्पेक्ट्स ग्लोबल सुपर पावर। वी हैव द पॉवर। टू पुश अवे थ्रेट्स एंड इंश्योर आवर फ्यूचर।
जब रीजनल डोमिनेंस की लड़ाई और रिलीजियस प्रोफेसी एक दूसरे को ओवरलैप करने लगे तब लड़ाईयां और भी ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड हो जाती हैं। और उसका असर सिर्फ एक रीजन तक सीमित नहीं रहता है। ना सिर्फ एक जनरेशन तक। ऐसी लड़ाईयों के नतीजे अक्सर कई दशकों तक चल सकती हैं। सदियों तक महसूस की जा सकती है। जेरूसलम और अल अक्सा सिर्फ जमीन के टुकड़े नहीं है। ये फेथ, ये आइडेंटिटी, ये इतिहास का केंद्र है। अगर ये लड़ाई वाकई में एक धर्म युद्ध बन चुका है तो इसका अंजाम सिर्फ मिडिल ईस्ट के फ्यूचर को तय नहीं करेगा बल्कि आने वाले टाइम में ग्लोबल पॉलिटिक्स और ग्लोबल स्टेबिलिटी के रुख को यह बदल सकता है।
क्या इसको रोका जा सकता है? क्या यह जो कांड होने वाला है उस पर फुल स्टॉप लगाया जा सकता है? पॉसिबल है लेकिन मुश्किल है। उसके लिए अमेरिका की जनता को जगना पड़ेगा, समझना पड़ेगा कि उसको इजराइल अपने काम के लिए कैसे झाड़ू पोछे की तरह इस्तेमाल कर रहा है। कैसे उसके राष्ट्रपति को अपना पपेट बना कर रखा है। तो फिर हो सकता है कि इजराइल के ये बढ़ते कदम ये ग्रेटर इजराइल का निर्माण अभी के लिए स्थगित हो सके। मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं।
देशभक्त पर इस युद्ध को, इसके फॉल आउट को दुनिया भर पे, भारत पर इसका जो इफेक्ट होगा वो हम पूरा कवर करते आए हैं देशभक्त पर। आपका सपोर्ट इसके लिए काफी जरूरी है। चैनल को जरूर सब्सक्राइब करिएगा। अभी भी 50% ऑफ रेगुलर व्यूअर्स ही सब्सक्राइबर्स हैं। तो जरूर सब्सक्राइब करिए अगर आप इस चैनल को देखते हैं। अगर हो सके तो जरूर हमें सपोर्ट करिए। बाय गोइंग टू patrion.com/ देशभक्त। अगर आप एक एनुअल मेंबर बनते हो तो आपके लिए एक डिस्काउंट भी है। वेरी थैंक्स फॉर वाचिंग मोर एपिसोड्स कमिंग अप।