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Israel's GRIP on USA: Money, Blackmail, Corruption?

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रनिंग, दिस इजराइल अमेरिका को कंट्रोल करता है। एंड अगर इसके बारे में आपको जरा भी डाउट हो तो बस आप यही सोच लो कि अमेरिका की मिडिल ईस्टर्न पॉलिसी क्या है? पॉलिसी ऑफ़ कंटीन्यूअस वॉर्स एंड इनकी जो मिडिल ईस्ट पॉलिसी है वो इजराइल चलाता है। अमेरिका चलाता ही नहीं है।

एंड इसका एक क्लियर कट एग्जांपल है हमारे पास क्लीन ब्रेक स्ट्रेटजी जिसमें यह बताया गया है कि कैसे-कैसे मिडिल ईस्ट में किस तरीके से रिजीम चेंज कराया जाएगा। ठीक है? और किस तरीके से कहां पे वॉर्स कराए जाएंगे। एंड ये स्ट्रेटजी पता है किसकी बनाई हुई है? इजराइल के करंट प्राइम मिनिस्टर बेंजमिन नेतन याहू की।

अब आप यह सोचो कि मिडिल ईस्ट में जितने भी देशों को तबाह किया अमेरिका ने, चाहे वो इराक हो, लिबिया हो, सीरिया हो, इससे किसको फायदा हो रहा है? इससे इजराइल की जो पावर है रीजन में वो बढ़ रही है। क्योंकि जो अच्छे खासे देश थे आपने उनको जाके तबाह कर दिया। अब ये जो ईरान वाला वॉर है ये कोई भी नहीं चाहता। कोई भी नहीं चाहता। सिर्फ इजराइल चाहता है। एंड ये बात हमको जॉन शमर खुद ही बता रहे। जस्ट थिंक अबाउट्री कंट्री मिडिल ईस्ट एक्सेप्ट मेरे टू अवॉयड दिस वॉर द चाइनी रश डोंट वांट दिस वॉर ट्रंप रियली डजंट वांट दिस वॉर वांट्स दिस वॉर बेंजमिन तो सवाल ये उठता है यार इतना पिद्दी सा देश इजराइल कैसे इतना कंट्रोल एग्जर्ट कर लेता है ओवर यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका तो ये अलग-अलग भाग में डिवाइडेड है।

सबसे पहले बात करते हैं ब्राइबरी की। तो इजराइल देश जीवित ही आज के डेट में इसलिए है क्योंकि उसको यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका से फॉरेन एड आती है व्हिच इज इन बिलियंस एंड ये दो पार्ट में डिवाइड हो जाता है। एक पार्ट जो है वो चला जाता है यूएस डिफेंस पेंडिंग में तो उससे जो हमारी मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स है कंपनी सच एज लॉकीड मार्टिन बोइंग नॉर्थ ऑफ ग्रूमन ये सब खुश हो जाते हैं क्योंकि भाई ये लोग तो पैसा कमा रहे हैं। इन लोग को तो वॉर्स चाहिए ही चाहिए। एंड इजराइल एक ऐसा देश है जो परपेचुअली वॉर करता ही रहता है। तो भाई ये लोग तो सेटिस्फाई हो गए। ठीक है? तो भाई अब जो एड जाती है टू इजराइल वो भी देख लो। सिंस इट्स इंसेप्शन जब से इजराइल देश बना है तब से $300 बिलियन डॉलर्स की एड मिल चुकी है। जिसमें से 200 बिलियन तो मिलिट्री स्पेंडिंग के लिए थे। तो भाई मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स वाले तो खुश एकदम। यस वेरी गुड। हमारे पास तो पैसे आ रहे हैं। हम शांति से बैठे रहेंगे। तुमको आर्म्स बेचते रहेंगे। तुम जाके इसका जो करना है कर लो। जेनोसाइड करना है कर लो। वी डोंट केयर।

इसके अलावा जब से गाज़ा में जेनोसाइट चालू हुई है सिंस द सेवंथ ऑफ अक्टूबर 21.7 बिलियन डॉलर्स इन मिलिट्री असिस्टेंस दी गई है इजराइल को और ये वाला जो फिगर है ये सिर्फ अक्टूबर 2025 तक का है। इसके अलावा अमेरिका ने खुद इजरायल को हेल्प करने के लिए काफी सारे ऑपरेशंस कैरी आउट करे हैं। फॉर एग्जांपल इन्होंने जाके जो यमेन के अगेंस्ट अटैक किया था जो ये एक्चुअली हार गए थे पूजस के अगेंस्ट अटैक किया था उसमें एंड और जो भी ऑपरेशंस उन्होंने कैरी आउट करे हैं। फॉर एग्जांपल एक और ये देख लो जब ईरान बमार्ड कर रहा था मिसाइल्स इजराइल के ऊपर तब थर्ड मिसाइल्स लॉन्च कर रहे थे अमेरिका उन्होंने अपने बहुत सारे जो नेवल फ्रीट है उसको भी वहां पे पहुंचाया हुआ था डिफेंड करने के लिए इजराइल को इस सब का कॉस्ट रफली टिल नाउ है $ बिलियन फ्रॉम अक्टूबर सेवंथ टिल नाउ ऑलमोस्ट 3132 बिलियन अमेरिका खर्च कर चुका है इन लोग के ऊपर ये था आधा पैसा ठीक है जो आ गया मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स के पास ठीक है और अब जो दूसरा पैसा है वो कौन-क लोग को जाता है इनके बेसिकली कुछ सिलेक्टिव लोग हैं जो अमीर एकदम वेल्दी टाइप के लोग हैं उन लोग के पास जाता है। ठीक है?

अब इस बात को साबित करने का ऐसा कोई प्रूफ नहीं है। पर आप यही सोच लो ना यार सिंपल एक बात जो एक बिजनेसमैन है तो वो तो ये देखिएगा मुझे बिजनेस कहां से मिल रहा है। अब ये एड जो जाती है इजराइल को वो वापस आ जाती है इन डोनर क्लास के पास। तो फिर वो जाके फिर लॉबी करते हैं उनके लिए कि ठीक है इजराइल से मुझे इतना पैसा आ गया। मैंने अपना बिजनेस वज़नेस भी बढ़ा लिया। अब वो सारी चीजें करते हैं जिससे इजराइल को बेनिफिट हो सके। फॉर एग्जांपल जाके घूस देंगे। जो इनके कांग्रेस के मेंबर्स हैं उनको जाके घूस देंगे। ये ट्रंप को घूस देंगे। उसके और जो आसपास के नेतागण हैं उनको घूस देंगे। ये जो एपक है जो बेसिकली लॉबिंग फर्म है इजराइल के लिए। ठीक है? कोई भी फॉरेन लॉबिंग फर्म मतलब कोई भी दूसरी देश की लॉबिंग फर्म अगर कोई है वो यूएस में रजिस्टर्ड ही नहीं हो सकती। अगर है तो एज अ फॉरेन लॉबिंग फर्म रजिस्टर होती है। पर ये एपक को कुछ अलग ही अपने प्रिविलेजेस मिले हुए हैं। ठीक है? तो ये लोग जाके एपक अपना खरीदता है। लिटरली खरीदता है वहां पे जो उनके कांग्रेस के मेंबर्स हो गए मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बोल लो। बेसिकली नेता लोग को जाके खरीदता है। एंड इन्हीं लोगों को कहते हैं डोनर क्लास।

अब भाई मैं तो कहूंगा ये एक मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम है। सिमिलर टू जैसे यूक्रेन में ये लोग बेचते हैं एड। फिर उसके बाद यूक्रेन से ही वो पैसा आ जाता है वापस अमेरिका। तो भाई मनी लॉन्ड्रिंग हो गई ना? एंड उस पैसे के बदले ये लोग वहां पे आर्म्स भेज देते हैं। ठीक है? सिमिलरली चीज इजराइल में हो रही है। अमेरिका से जाता है पैसा इजराइल। ठीक है? अब इजराइल से वही पैसा वापस आ जाता है अमेरिका एंड उसके बदले में उनको मिलते हैं वेपन्स। उसके बदले में उनको मिलता है वहां पे पॉलिटिकल क्लास जो है उनका पूरा सपोर्ट।

अब आपको बताते हैं कुछ-कुछ एग्जांपल्स। फॉर एग्जांपल ये मिररियम एडलसन का एग्जांपल ले लो। ठीक है? ये जो फ्रीकी लुकिंग वुमन है, इसकी ड्यूल सिटीजनशिप है। इजरली भी है ये, अमेरिकन भी है। अब आप पूछ लो कि भाई इसकी असली में जो क्या कहते हैं? लॉयल्टी है, वो कहां पर है? ठीक है? इसने डोनेशन दी थी ट्रंप को टू द ट्यून ऑफ $100 मिलियन एंड उसके बदले में ट्रंप पूरी जी हजूरी कर रहा है। सवाल तो यह भी उठता है ना कि यह सब लोग अमीर हैं सिर्फ अपने बिजनेस की वजह से अमीर है क्या? या यह जो पैसा आता है इजराइल से ये इसको भी यूटिलाइज करते हैं अपनी वेल्थ बढ़ाने के लिए। एंड इन टर्न इजराइल को भी हेल्प करते हैं। एंड मार्को रूबियो जो आज के डेट में इनका सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट है नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर दोनों पद होल्ड करता है ये इंसान। इसको ट्रंप ही बोलता था कि यह तो एडिलसन का पपेट है। एंड यह आज की डेट में इतना इंपॉर्टेंट इंसान इसीलिए बना हुआ है क्योंकि इसके पास एडिलसंस का सपोर्ट है।

अब देखो यहां पे एप्सन कनेक्शन भी आ जाता है। वैसे जहां जेफरी एपस्टीन की बात हो रही है कि अगर आप सोचो कि उसने ऐसा पैसा कहां से कमाया? उसका दिमाग तो था नहीं इन सब चीजों में। वो तो एक स्कूल टीचर था। वहां पे भी ही वाज़ अनसक्सेसफुल। उसके बाद उसने एक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ज्वाइन करी। वहां पे भी ही वाज़ अनसक्सेसफुल। तो उसके पास ये पैसा आता कहां से था? ऐसे क्या कभी किसी ने सोचा है कि ये सब जो बिलिनेयर्स हैं इनको भी तो इन्वेस्टिगेट करो भाई कि ये इतने प्रो इजराइल बने फिरते हैं इनके पास भी पूरा पैसा कहां से आता है ये पूरा लेजिट है या नहीं है अब ये लेक्स वेक्सनर की बात करो तो ये अपना क्या कहते हैं ल्जरी और बहुत सारी ब्रांड्स ओन करता है फॉर एग्जांपल विक्टोरिया सीक्रेट ओन करता है ये फुल फ्लेजेड ये जेफरी एपस्टीन के साथ मिला हुआ था फुल फ्लेजेड उसका हाथ था जेफरी एफस्टीन को प्रमोट करने में इसके अलावा यह जो एहूद बाराक जो इजराइल का फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर था उसके अगेंस्ट इसको पैसे भी मिलते थे फ्रॉम वैक्सनर फाउंडेशन। ठीक है? कहां से आया यह सब पैसा? क्या इसमें इजराइल का कोई हाथ था?

अब ये देखो लेक्स वेक्सनर तो आज के डेट में एक्सपोज हो गया। ठीक है? ये मिररियम मेडलसन के तो पैसे चल ही रहे हैं। फंडिंग लाइन चालू है। यह भी बताया जा रहा है कि अभी मिड टर्म इलेक्शन होंगे तो यह और पैसे कंट्रीब्यूट करेगी टुवर्ड्स द ट्रंप कैंपेन। ठीक है? अब आज के डेट में देखो अभी लेटेस्ट किसके पास पैसे हैं जो इजराइल को हेल्प करने लगा है। वो है ओरेकल का फाउंडर लैरी एलिसन। इसने अभी रिसेंटली सीबीएस न्यूज़ खरीद लिया। TikTok के यूएस ऑपरेशंस खरीद लिए क्योंकि TikTok पे बहुत ही ज्यादा बेसिकली कंटेंट चल रहा था अगेंस्ट इजराइल। बेसिकली फुल फ्लेजेड जेनोसाइड लोग वहां पर बता रहे थे कि किस तरीके से जेनोसाइड चल रहा है। तो इनको लगा TikTok ही खरीद लेते हैं हम। एंड यह बंदा ऐसा है। इसने खुद 16.6 मिलियन आईडीएफ को डोनेट किए हुए हैं।

अब इसके आगे और आ जाओ। तो बिलकम की बात करते हैं। ठीक है? यह भी फुल फ्लेजेड इजराइल सपोर्टर है। ठीक है? जइश बिलियर है ये। ठीक है? एंड यह ही इज द वॉल स्ट्रीट गाय। हैच फंड ओन करता है यह। एंड यह भी आगे जाकर बताता है कि मैं तो इजराइल में और पैसा इन्वेस्ट करूंगा। क्या करूंगा? तो भाई इन सबके पास कहां से पैसा आ रहा है? नीड्स टू बी इन्वेस्टिगेटेड। या तो इनका पूरा रैकेट बना हुआ है। ठीक है? जाइनिस्ट का कि हम एक दूसरे को सपोर्ट करेंगे। ठीक है? एक दूसरे को पैसे लेंड करते रहेंगे एंड इजराइल को भी सपोर्ट करते रहेंगे। या फिर यह इतना जो पैसा इजराइल में एड के तौर पे जाता है, इट गेट्स इन्वेस्टेड बैक। इन्वेस्टेड बैक विद दीज़ बिलिनेयर्स। एंड बिलिनेयर्स के पास कहीं पैसे आते हैं यह सारे एंड फिर वो उससे अपना धंधा भी चलाते हैं, अपनी वेल्थ भी बढ़ाते हैं एंड प्रो इजराइल भी बने फिरते हैं। मैं एक चीज बहुत क्लियर करना चाहता हूं कि मैं यह नहीं कह रहा हूं ऐसा हुआ है। पर मैं यह बताना चाह रहा हूं कि इन लोग का ट्रैक रिकॉर्ड देख के ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं इस तरीके की पर्टिकुलर स्कीम चल रही है जिससे लोग अपना पेट भी भरते हैं और प्रो इजराइल भी बने रहते हैं। अब इसमें ऐसे बहुत सारे लोग होंगे एंड अलग-अलग टाइप की सर्चेस करके यू कैन आप बेसिकली कोशिश कर सकते हो टू आइडेंटिफाई कि यह लोग कौन होंगे। ठीक है?

तो इजराइल की पहली डिमांड क्या होती है? भाई पैसे भेजो। ठीक है? एंड अगर कोई भी ऐसा इनका मेंबर ऑफ पार्लियामेंट या जैसे लोग कहते हैं कांग्रेस विन अगर वो थोड़ी भी आनाकानी करे तो वो उसके अपोनेंट को फाइनेंस करने लगेंगे। या तो आप एपक के साथ हो और अगर आप नहीं हो तो यह पावर ऑफ मनी यूज़ करके आपको हरवा ही देंगे इलेक्शन। फॉर एग्जांपल जैसे कोरीब के साथ हुआ था। इतना भी बड़ा इलेक्शन नहीं था यह। एंड जब रीइलेक्शन हुआ तब उन्होंने कोरी बुश के अलावा जो दूसरा डेमोक्रेट था उसको फंड किया। 8.5 मिलियन खर्च किए उन्होंने ताकि उसको जीता सके। इनके पास इतना ज्यादा पैसा है कि यह ऑलमोस्ट जो नॉन एपक कैंडिडेट्स हैं उनको हराने के लिए ऑलमोस्ट $ मिलियन खर्च कर चुके हैं। एंड एपक की जी हजूरी करते हुए आपको सारे यूएस के पॉलिटिशियंस मिल जाएंगे। जिसमें करंट प्रेसिडेंट्स भी होंगे, पुराने प्रेसिडेंट्स भी होंगे, वाइस प्रेसिडेंट्स होंगे, सब के सब होंगे। एंड एपक खुद ही बहुत ओपनली बताता है कि हम तो पैसे खर्चते हैं। ठीक है? अपने कैंडिडेट्स के ऊपर एंड 97% ऑफ एप पैक अप्रूव्ड कैंडिडेट्स विन। इनका इतना ज्यादा होल्ड है इलेक्शंस के ऊपर। एंड यू विल बी सरप्राइज्ड टू नो कि एक रिपब्लिकन सेनेटर हैं मैसी। उन्होंने आकर खुद बताया था टकर कासन के पडकास्ट पर कि जितने भी लोग होते हैं उन सबका एक ए पैक हैंडलर होता है। मतलब अगर आपको वहां पर पॉलिटिक्स में रहना है तो ए पैक की ब्लेसिंग्स आपको चाहिए ही चाहिए। रिपब्लिक कम टू मी ऑन द फ्लोर से आई विश आई वुड जस्ट टेक टू मच फ्लैक बैक होम एंड आई हैव रिपब्लिकन हु कम टू मी एंड से दैट्स रोंग एपक डूइंग टू यू लेट मी टॉक टू माय एपक पर्सन बाय वेवरीबडी बट मी हैज़ एन एपक पर्सन इतने तक ही नहीं सीमित है इट गेट्स वर्स आप यह देख लो जाके कि कितने सारे ऐसे कांग्रेसमैन है इनके बेसिकली इनके मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट है जिनके पास ड्यूल सिटीजनशिप है। अमेरिका की सिटीजनशिप है एंड इजराइल की सिटीजनशिप है। अरे यार मतलब मैं तो चौंक गया ये देख के बिकॉज़ आपकी लॉयल्टी कहां है? टुवर्ड्स इजराइल है या टुवर्ड्स यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका है। एंड आप देखो ये जीनियस आईडिया है इनका जाइनस का। जो एड्स जाती है अमेरिका से इजराइल। ठीक है? जिसके बदले में ये लोग आर्म्स खरीदते हैं। ठीक है? एंड जाके पूरा अपना ये रैकेट चलाते हैं। लोगों को ब्राइब्स देते हैं सारे कांग्रेसमैन को। यह पैसा कहां से आता है? यह पूरा अमेरिकन टैक्स पेयर का पैसा है। पूरा का पूरा अमेरिकन टैक्स पेयर का पैसा है। सिंपल बात है। अगर अमेरिका एड भेजनी बंद कर दे इजराइल को तो ये जो पूरी साइकिल है यह बंद हो जाएगी। ये मनी लॉन्ड्रिंग भी खत्म हो जाएगी। अमेरिकन लोगों के पैसे वहीं पे लगेंगे। अमेरिका में ही लगेंगे वहां पे डेवलपमेंट करने के लिए। ठीक है? इतनी जो बेरोजगारी हो रखी है। इतने जो होमलेस लोग हैं शायद वो पूरी प्रॉब्लम सॉल्व हो जाए। एंड मोस्टेंटली अगर ये एड बंद हो जाती है तो इजराइल आई वुडंट से कि खत्म हो जाएगा बट एटलीस्ट उसको गुड बॉय बनके तो रहना ही पड़ेगा। आज के डेट में जैसे पूरा अपना क्या कहते हैं? हेजमोन बनने की कोशिश कर रहा है। पूरा गुंडा बना हुआ है मिडिल ईस्ट में। यह गुंडागर्दी नहीं कर पाएगा अगर ये एड खत्म हो जाती है तो। एंड अगेन लोग इजराइल को कुछ ज्यादा ही क्रेडिट दे देते हैं। ठीक है? मैं तो यह पूछता हूं कि वहां पे जब इतने फ्री के पैसे आ रहे हैं तो कोई भी देश प्रोस्पर ही करेगा ना। तो भाई अमेरिकन पर्सपेक्टिव से अगर आप सोचो वहां पे जो मेडिकल केयर है इतनी महंगी है। ठीक है? एजुकेशन महंगी है एंड इजराइल में ये सब फ्री मिलता है। मतलब उनके पैसे से इजराइल में मौज हो रही है। ये चल रहा है एक्सैक्टली। एंड ये सब क्यों हो रहा है? क्योंकि पॉलिटिशंस करप्ट हैं।

तो भाई सवाल तो ये उठता है कि एड्स चालू ही क्यों हुई? क्योंकि ऐसा रिपोर्ट किया जा रहा है कि जो सुएस कैनाल था उसको वो चाहते थे कि वो सोवियत यूनियन के इन्फ्लुएंस में ना आए। इसलिए इजराइल को अपना पेट बनाना जरूरी था। तो इसलिए तब से एड चालू हो गई। एंड ये बात तो इनफैक्ट रनाउंड जर्नलिस्ट मैक्स लुमथोली बताते हैं कि जब यन कपूर वॉर के दौरान जब इजराइल एकदम हार रहा था सारे अरब कंट्रीज से तब उन्होंने एक्चुअली ब्लैकमेल किया था कि अगर आप हमको एड नहीं भेजोगे मिलिट्री एड अच्छी खासी तो फिर हम तुमको ही न्यूक कर देंगे। एस अ रिजल्ट उस टाइम पे अंडर ऑपरेशन निकल ग्रास बहुत सारी एड भेजी गई थी टूरली न्यूक्लियर आर्म्स रेस इन द मिडिल ईस्ट रीजन बाय ईरान हैविंग ब्रेक कैपेसिटी हैविंग सीक्रेट न्यूक्लियर प्रोग्राम अर्थक शुड हैव बीन स्टोरी ग्लोबल सिग्निफिकेंस ऑन द फ्रंट पेज वेस्टर्न न्यूज़ेपर सीक्रेट फैसिलिटी देर डिफेंस सिस्टम फाइनली हेड क्वार्टर्स नर्थ टेलवी सोसाइटी कम बैक एंड देन दे वुड यूनाइटेड स्टेट्स इन द वर्ल्ड न्यूक्लियर वेपन देपलेस यूएसपान बिकनी रिपोर्ट्स देफ इन ऑर्डर टू फोर्स नजर टू रीप्लाई व्हेन इज वा फेसिंग एन एक्सिस्टेंशियल कटस्टफी ड्यूरिंग द 1973 यमके वॉर सो इट्स इज दैट इज ड्राइविंग द न्यूक्लियर आर्म्स रेस एंड इसके अलावा यह वाला पॉइंट भी आता है कि अमेरिका को एक चाहिए थी भी अपनी सेटेलाइट स्टेट मिडिल ईस्ट में अपना दबदबा बनाने के लिए क्योंकि मिडिल ईस्ट में है ऑइल एंड ऑफ कोर्स ये भी लोग कहते हैं कि इजराइल इज द लास्ट स्टेज ऑफ कॉलोनाइजेशन ऑफ ऑफ यूरोपियन कॉलोनाइजेशन। वैसे इस टॉपिक पर हमने डिटेल वीडियो बनाया है। इसको भी जरूर चेक आउट करना।

अब ये इजलीज ऐसे दोगलेबाज हैं। इन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के जो सीक्रेट्स थे मतलब जो फर्स्ट स्ट्राइक प्लांस थे वो सब किसको बेच दिए थे? सोवियत यूनियन को बेच दिए थे इन एक्सचेंज ऑफ कि भाई सोवियत यूनियन से बहुत सारे जश लोग आ जाएंगे इजराइल। क्योंकि इजराइल को वाइबल स्टेट बनाने के लिए लोग तो चाहिए ही थे ना। एंड ये चीज वाशिंगटन पोस्ट जैसे न्यूज़पेपर में भी रिपोर्टेड है।

अब जो इसका जो एक और दूसरा पहलू है वो है ब्लैकमेल। एंड इसमें हमको बहुत ज्यादा डिटेल में जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि जेफरी एपस्टीन की फाइल्स बाहर आ चुकी हैं जितनी भी क्लासिफाइड थी काफी सारी। वैसे उनमें से ओनली 2% हैज़ बीन रिलीज्ड। बट उससे यह क्लियर होता है कि भाई किस तरीके से ये पूरा ब्लैकमेल रिंग था। आप लोगों को बुलाओ। ठीक है? उनसे पीडोफिलिया वाली एक्टिविटीज करवाओ। फिर उस चीज को पूरा रिकॉर्ड कर लो। ठीक है? ये पूरा पीडोफाइल रिंग एकदम आपने बना लिया जिसके थ्रू आप लोगों को ब्लैकमेल करते हो। वैसे इस टॉपिक पर हमने डिटेल वीडियो बनाए हैं बट आपके बहुत सारे ऐसे बिलिनेयर्स हैं जो इस चीज में इन्वॉल्व रहे हैं। फॉर एग्जांपल लेक्स वेक्सनर लन ब्लैक ग्लन डबलिन। ठीक है? ये सारे जश जाइनस से। एंड सिंपल बात है एप्सन के पास कहां से पैसे आए? एंड असली स्पाई तो इसमें उसकी पार्टनर थी गिसिन मैक्सवेल। एंड वही अगेन सिंपल बात पैसे आते थे इजराइल से। यह लोगों को ब्लैकमेल करते थे। एंड उनसे जो चीज चाहो फिर वो करवा लो आप। एंड इसमें दुनिया भर के पॉलिटिशियंस, दुनिया भर के बिजनेसमैन कौन-कौन नहीं था इनवॉल्वड? एंड मैं तो सिंपल एक बात यह भी कहता हूं कि जो आपका लिंजीगम है वैसे उसके ऊपर हमने एक चार थप्पड़ बनाया है। जरूर चेक आउट करना। ठीक है? जो किस-किस टाइप की घटिया बातें बोलता है। एकदम ही सर पैर नहीं होता उन चीजों का। इजराइल ने उसको किस हद तक ब्लैकमेल किया होगा आप सोच लो। एंड सबसे ग्रैंड एग्जांपल तो आज के डेट में है डॉनल्ड ट्रंप। एस्टीन फाइल्स में कितनी बार इसका नाम है। एंड यही एक बंदा है जिसने जो एंबसी थी यूनाइटेड States of America की वो जेरूसलम शिफ्ट कर दी। यही बंदा है जिसने एग्री भी किया। इजराइल की बेसिकली विशेस थी कि भाई आपको ईरान के न्यूक्लियर जो प्लांट्स हैं उनको अटैक करना है। तो इसने जाके वो भी कर दिया। इससे ज्यादा कॉम्प्रोमाइज्ड आदमी आज के डेट में शायद ही कोई हो। एंड देखो यह भी मैं कहीं पढ़ ही रहा था दैट इनका जो रिंग होता है ना यह जो ऊपर में लोग बैठे रहते हैं बिल्कुल ये चाहते हैं कि आप कॉम्प्रोमाइज्ड हो क्योंकि अगर आप कॉम्प्रोमाइज्ड होगे तो ही तो आप वो सारी चीजें करोगे जो बाकी लोग चाहते हैं एक दूसरे के बेनिफिट के लिए ऐसे ही देश बेचे जाते हैं एंड जैसे अमेरिका बिक रहा है आज के डेट में।

अब इसके बाद एक और पहलू आ जाता है मीडिया। जब लोगों को कुछ पता ही नहीं चलेगा या जैसे इजराइल ने अपनी इतनी अच्छी इमेज बनाई हुई थी कि ओ ओनली डेमोक्रेसी इन द मिडिल ईस्ट गे राइट सपोर्ट करते हैं हम एंड मोस्ट मोरल आर्मी इन द वर्ल्ड वैसे अब वो प्रोपगेंडा प्रोपोगेंडा ही रह गया है पर मीडिया कैसे किस तरीके से प्रोपगेंडा मशीन की तरह यूज की जाती है यह इजराइल से हमें पता चलता है अमेरिका से हमें पता चलता है। वैसे इजराइल का प्रोपेगेंडा तो इंडियन मीडिया भी करती है। अब देखो मीडिया इस हद तक बिकी हुई है। वेस्टर्न मीडिया की भी बात करें। इंडियन मीडिया का तो क्या ही कहना कि किस-किस टाइप के झूठ उन्होंने बोले। उन्होंने बोला कि अक्टूबर सेवंथ के दौरान जो हुआ था तब बिहेडेड बेबीज थे। कुछ भी नहीं मिला। ठीक है? एंड बीबीसी कितनी कॉम्प्रोमाइज्ड है। आई वुड आस्क यू टू लुक अप करिश्मा पटेल जो बीबीसी में जर्नलिस्ट थी। उन्होंने अपना जॉब छोड़ दिया है अब। एंड वो बताती हैं कि जो हिंदा की स्टोरी थी मैं उसको अच्छे से कवर करना चाहती थी। बट यह लोग ने मुझे करने ही नहीं दिया। मतलब एक छ साल की बच्ची थी वो। 6 साल की बच्ची को मीडिया में कैसे बताया जा रहा है। यंग लेडी थी। ऐसे बताया जा रहा है। ठीक है? कई कई मीडिया हाउसेस ने यह क्राइम किया। जो पैलेस्तीनियन जर्नलिस्ट है उनको जब इजराइल मार देता है तो वो कहते हैं अरे ये तो हमास के मेंबर्स थे। ये तो हमास की प्रोपगेंडा मशीनरी थी। ठीक है? लोग वहां पर मर जाते हैं जिसको फुल्ली रिपोर्ट भी नहीं किया जा रहा। ठीक है? तो ये कहते हैं कि जितने भी लोग मरे हमास रन हेल्थ मिनिस्ट्री बता रही है हमें। ठीक है? वहां पे एयर स्ट्राइक से लोग मर जाते हैं। एंड देखो किस टाइप की हेडिंग अपना न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है। कहता है एक्सप्लोजंस गाजन से वास एयर स्ट्राइक लीव्स मेनी कैजुअल्टीज इन डेंस नेबरहुड। सबसे पहले तो अंग्रेजी इसमें गलत कर दी है। हेडलाइन छुपाने के चक्कर में। गाजन से क्या होता है? एयर स्ट्राइक थी। लोग मरे पूरी दुनिया जानती है। बट नहीं नहीं ये जो स्ट्रेट कंट्रोल मीडिया है इसको जो यूएस गवर्नमेंट कहती है इनको वही सब बोलना है। एंड जो इजराइल के टॉकिंग पॉइंट्स हैं इनको वही सब बोलना है। एंड यह कैसे होता है? देखो मीडिया को कंट्रोल करना इतना कोई मुश्किल बात है नहीं। ऐड मनी ये सब जितने भी मीडिया है आपको न्यूज़ फ्री में मिलती है। आपको लगता है कि आपको फ्री न्यूज़ मिल रही है बट यू नॉट एक्चुअली गेटिंग न्यूज़। यू आर गेटिंग प्रोपगेंडा। ठीक है? तो ऐड मनी से आप कंट्रोल कर सकते हो। दूसरा अगर सर्वाइव करना है तो जो लाइन सरकार पकड़ के बैठी है आपको वही करना पड़ेगा। इसलिए यू हैव टू पे टू कीप न्यूज़ फ्री। इसलिए मैं न्यूज़ ल्ड्री का सब्सक्राइबर हूं। मैं उनको यहां पे कोई ऐसे प्रमोट नहीं कर रहा हूं। हूं। बट आई एम जस्ट टेलिंग यू कि अगर आपको इंडिया में ढंग की न्यूज़ चाहिए, यू शुड गो एंड सब्सक्राइब टू न्यूज़ लॉन्ड्री।

अब देखो, फाइनल नेल इन द कॉफ़िन बताते हैं आपको। अमेरिका में जितनी भी कंपनीज़ है, Fortun 500 कंपनीज़ जिसको कहते हैं, जैसे इंडिया का निफ्टी होता है, ससेक्स होता है, उसमें 35 कंपनीज़ होती हैं या निफ्टी 50 में 50 कंपनीज़ होती हैं। ऐसे अमेरिका का होता है SNP 500। ठीक है? जिसमें 500 टॉप कंपनीज़ रहती हैं। 88% ऑफ दीज़ कंपनीज़ में पता है बिगेस्ट शेयर होल्डर कौन है? इन तीन नामों में से हमेशा एक मिलेगा आपको। ब्लैक रॉक, स्ट्रेट स्ट्रीट, वैनगार्ड। अब आप यही पूछोगे कि भाई यह तो फिर मोनोपोली ही हो गई कि सारे कंपनीज़ यही तीन फंड्स ओन करती हैं। देन यू जस्ट नीड टू फिगर आउट कि इन फंड्स को कौन ओन करता है। आप जाके थोड़ी उसमें रिसर्च करोगे तो आप दिखाओगे दोनों ही ये तीनों ही आपस में एक दूसरे के शेयर्स इतने ज्यादा होल्ड करते हैं। फिर सवाल आ जाएगा कि इनको और कौन होल्ड करता है ब्लैक रॉक स्ट्रीट स्ट्रीट वैनगार्ड को? तो वो रिसर्च हम अगले किसी वीडियो के लिए छोड़ देते हैं हमारी। बट इससे आपको एक पॉइंट यह पता चलता है कि कोई भी अगर इन तीन फंड्स में से है तो वो काफी चीजें कंट्रोल करता है। फॉर एग्जांपल एक ऑयल कंपनी है। क्या करना है? एक ऑयल कंपनी के सीईओ को फोन उठा के बोलना है तुमको ऐसा-सा करना है। ऐसा-सा बोलना है। मीडिया कंपनीज़ भी आ जाएंगी इसमें कितनी सारी। ये ये चीज बोलनी है। ये ये चीज नहीं बोलनी। या यह चीजें सेंसर्ड हैं। तो भाई सिंपल बात है। पैसे का खेल है। मतलब इसमें सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि अमेरिका के पैसे से ही अमेरिकनंस को खरीदा जा रहा है। वहां के टैक्स पेयर के पैसे से ही वहां के जो पॉलिटिशियंस हैं उनको खरीदा जा रहा है एंड अपना पूरा काम करवाया जा रहा है। अपने पास हथियार लाए जा रहे हैं एंड अपने फेवर की लॉबिंग की जा रही है। इससे खतरनाक मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम शायद ही कोई हो।