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धर्मस्थल सामूहिक कब्र मामले में अब तक कार्यवाही कहाँ तक पहुँची है? आपको ज्ञात ही होगा कि कैसे एक व्यक्ति सामने आया था और उसने यह दावा किया था कि वह १९९५ से २०१४ तक धर्मस्थल के श्री मंजुनादेश्वर मंदिर में एक सफाईकर्मी था। इस अवधि के दौरान उसने अपने मालिक के कहने पर लगभग ४०० लड़कियों के शवों को दफनाया था, जिन्हें यातना दी गई थी और बलात्कार किया गया था।
जिस मालिक का उल्लेख यह व्यक्ति कर रहा है, उसका नाम सौजन्या के मामले से भी संबंधित है, जिस मामले के बारे में मैंने आपको पिछली वीडियो में बताया था। इसके पश्चात् कर्नाटक के धर्मस्थल क्षेत्र में एक विशेष जाँच दल गठित किया गया। इसका उद्देश्य नेत्रावती नदी और उसके आसपास के इलाकों में दफ़न शवों की सच्चाई को उजागर करना था। भय था कि यदि देर हुई तो सबूत मिटा दिए जाएँगे। धर्मस्थल के जंगलों और नदी के किनारों में दफ़न कथित शव गायब हो सकते हैं।
परंतु अब दल पहुँच चुका था। मुख्यालय स्थापित किया गया जहाँ इस गवाह से पूछताछ हुई। पूछताछ के बाद बीस सदस्यों का यह दल उस गवाह को लेकर धर्मस्थल के जंगलों और नेत्रावती नदी के किनारे पर पहुँचा। वहीं से रहस्य की वास्तविक खुदाई आरंभ हुई। गवाह ने पंद्रह अलग-अलग स्थान दिखाए जहाँ उसने दावा किया कि शव दफ़न किए गए थे। पहले आठ स्थान नदी के किनारे पर थे जहाँ दल ने लोहे की नंबर प्लेटें गाड़ दीं, एक से आठ तक, ताकि खुदाई के समय पहचान बनी रहे।
अगले चार स्थान नदी से थोड़ी दूर राजमार्ग के किनारे पर थे, सुनसान घने जंगलों से घिरे हुए, जहाँ दिन में भी सन्नाटा रहता है। फिर तेरहवाँ स्थान आया – अजूपुरी और नेत्रावती नदी को जोड़ने वाली सड़क, एक ऐसा खुला स्थान जिसे छिपाना कठिन था। चौदहवाँ और पंद्रहवाँ स्थान कन्याडी क्षेत्र के पास बताए गए। इस बार फिर राजमार्ग के समीप घने जंगलों में, गवाह ने हर बार पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, "यहाँ शव दफ़न हैं।"
उसने यहाँ तक कि यह भी दावा किया कि उन शवों की मौतें डूबने के कारण नहीं हुई हैं। यदि डूबने के कारण हुई होती तो उन पर चोट के निशान कुछ अलग प्रकार के होते। अब क्या हुआ है? कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि हो सकता है कि वे जो शव हैं, उन्होंने आत्महत्या की हो और वहाँ वे आत्महत्या वाले शव पड़े हों। गवाह का कहना है कि इन शवों के निजी अंगों पर गहरे चोट के निशान हैं, इसलिए वह उन्हें बलात्कार पीड़ितों के रूप में बता रहा है।
गवाह ने एक और बहुत बड़ा राज़ खोला है। उसने बताया है कि जो कंकाल उसने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अपने हाथों से सौंपा था, वह उन्हीं पंद्रह स्थानों से उसने निकाला था। अब चुनौती यह भी है कि यदि वास्तव में शव मिले तो उनकी पहचान कैसे होगी? क्योंकि कोई भी आरोपी स्वयं को बचाने के लिए यह कह सकता है कि ये शव आत्महत्या करने वालों के हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए विशेष जाँच दल ने अपील की है कि जिन लोगों के परिजन अब से लगभग बीस से पच्चीस साल पहले गायब हुए थे, वे सामने आएँ। उनके डीएनए लिए जाएँगे और खुदाई से मिले अवशेषों से यदि उनका मिलान हुआ तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
यदि गवाह सच बोल रहा है और अवशेष मिले तो यह आपराधिक मामला केवल कर्नाटक का ही नहीं, बल्कि भारत के सबसे बड़े आपराधिक मामलों में से एक बन जाएगा। एक ऐसा रहस्य जिसने दो दशकों तक धर्म की आड़ में बलात्कार, हत्या और दफ़न की साज़िश को छिपा कर रखा।