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6) Fiqh -Najast Dor Karnai kai Masael (Mas’alah 26 - 37 )- Class 6 - Level 1 || Dr. Mahboob Abu Asim

Dr. Mehboob Abu Asim31:52

Transcription

य उनके बाल पर ऐसी चीजें हराम जानवर भी हो पाक होने की क्या दलील है? क्योंकि इन चीजों के अंदर जान नहीं होती, या इन चीजों के अंदर खून नहीं होता। या असल आप देखेंगे ना पाकी नापाकी का ताल्लुक किस चीज से? वो खून से है कि जिस चीज में खून है, बहने वाला खून है, इन चीजों का तालुक उसे। तो चूंकि परों के अंदर, बालों के अंदर, इन चीजों के अंदर खून नहीं होता, इसलिए चाहे वह हराम जानवर का हो, हलाल का हो, यह सभी पाक है, उनको आप इस्तेमाल कर सकते हैं।

किसी भी चीज में हलाल जानवर का कटा हुआ हिस्सा, अगर को बकरी का हिस्सा कट गया, एक्सीडेंट से किसी वजह से टांग कट के अलग हो गई, हराम है और नापाक है। जी हां, माते हैं कि जानवर से कटा हुआ हिस्सा है, वह हराम है, नापाक है, ना उसको खा सकते हैं। अगर वह हिस्सा किसी पानी वगर में गिर गया और पानी का रंग बदल गई, तो पानी भी नापाक हो जाएगा। और आखिर में हमने पढ़ा था शराब के बारे में, और शराब में ही अल्कोहल भी है जिससे नशा हो जाए, तो यह पाक है, नापाक है? वैसे तो शराब हराम है, कोई शक नहीं, किसी का इलाफ नहीं कि शराब हराम है, लेकिन बजाए खुद हराम होने के साथ-साथ क्या नापाक भी है? इसमें उलमा का बहुत बड़ा इलाफ है। हम चाहते हैं कि इन चीजों को थोड़ा जाने, उलमा का इख्तिलाफ है इसमें। ये ना आप दो टोक कह दे भी तो इसमें उलमा का इख्तिलाफ जरूर है, लेकिन जो सही है, दलील के साथ, और यह है कि शराब के नापाक होने की कोई दलील नहीं है।

और हमने आखिर में इस मसले को जिक्र किया था, मजीद थोड़ी सी इस पर डिटेल जिक्र करते हैं। के जब शराब हराम हुई तो शराब मदीना की गलियों में बहाई गई, और हालांकि नबी करीम सलाम ने चलते हुए रास्ते में नापाकी इसकी डालने से मना किया है। अगर यह नापाक होती तो मदीना की गलियों में सहाबा किराम इसको ना बहाते, समझे ना? इसी तरह जब शराब हलाल थी, आपको पता है, होना चाहिए कि पहले शराब हलाल थी, उसके बाद हराम हुई। तो जब शराब हलाल थी, शराब लोग पीते थे, और जाहिरी बात जब पिएंगे मुंह के अंदर तो शराब का असर होगा ना? तो किसी हदीस में नहीं आता कि उनको मुंह साफ करने का, कुली करने का, इन चीजों का हुक्म दिया गया हो, कपड़ों पर गिर सकती है, कपड़ों को धोने का हुक्म दिया गया हो। तो इसलिए शराब के नापाक होने की शरी तौर पर कोई दलील नहीं है, जो वाकई जिसे पता चलता हो।

हां, एक आयत को लेते हैं कि जिसमें अल्लाह ने जुए का, बुतों का, शराब का, इन चीजों का जिक्र किया, फरमाया कि ये रिज है, लेकिन वहां पर उसकी नापाकी मान भी है। क्योंकि जुआ और बुतों की नापाकी क्या है? हिसी है, मानवी है। बुत को आप हाथ लगाएंगे, आपका हाथ नापाक हो जाएगा, पत्थर की मूर्ति है, उसको आप हाथ लगाएंगे, क्या हाथ नापाक हो जाएगा? उन चीजों की नापाकी मानवी है। जिस तरह के मुशरिक की नापाकी क्या है? हाँ, मुशरिक कोई काफिर है, उसकी नापाकी हिसी है, मानवी है। ते मुशरिक नस है, नापाक है, लेकिन नापाकी उनकी क्या है? मान, उनके कुफ्र शिर्क की नापाकी है। वरना आप किसी क्रिश्चन से, किसी हिंदू से हाथ मिलाते हैं तो ये नहीं कि आपका हाथ नापाक हो जाएगा। उनकी व नापाक है, लेकिन उनकी नापाकी मानवी है। इसी तरह ही शराब की, इन चीजों की नापाकी मानवी है, हिसी है। तो यह हमने मसाइल लिए थे, आखिर साब दर्स में। उसके बाद हमारे पास आज का चैप्टर है, नजासत दूर करने के मसाइल। नजासत, नजासत का लफ्ज़ समझने क्या है? नजासत, गंदगी नहीं, नापाकी। देखिए हम चाहते हैं जरा अल्फाज़ को थोड़ा सा उसमें फर्क जाने। एक है चीज गंदी होना, गंदी होने का माना कि जो नी कि आपको अच्छी ना लगे, उसमें कोई यानी कि ऐसा पहलू हो कि जो सफाई का ना हो। फर्ज़ करो आपके कपड़ों पर मीटी, मिट्टी, कीचड़ लग गया, कीचड़ आपके कपड़ों पर लग गया, लेकिन कीचड़ जो है वो मट्टी का है, किसी गटर वगैरह का नहीं है। गंदगी है ना? वो गंदगी है कि नहीं? लेकिन नापाक है? हाँ, नापाक नहीं, समझे ना? इसलिए यहां पर हम पहले भी आपको जिक्र किया था कि पाकी नापाकी शरी हुक्म है कि हम किसी चीज को। यहां पर हम दोबारा फिर आज लेंगे कि असल यह है, नजासत हर उस गंदी चीज का नाम है जिससे पाक रहने का हुक्म दिया गया है। गंदी चीज यानी नापाक चीज। नजासत हर उस नापाक चीज का नाम है जिसे पाक रहने का हुक्म दिया गया है। और उलमा ने उसकी तीन किस्में जिक्र की है। नजासत मुगल, मुगल यानी सख्त, और जिस तरह की कुत्ते की नजासत है। कुत्ता जो है वो सबसे ज्यादा नजस और नापाक तरीन जानवर है। अगर किसी बर्तन में मुंह डालता है तो क्या है? वो चीज भी नापाक हो जाएगी, पानी है, खाना कुछ भी है, नापाक हो जाएगा, उसको फेंकना होगा, और बर्तन भी नापाक हो जाएगा, उसको सात मर्तबा धोना होगा। आगे हम पढ़ेंगे, सात मर्तबा उसको धोना होगा, एक बार मट्टी से। तो कुत्ता जो है सबसे बड़कर नापाकी इस कुत्ते की है। इसी तरह उसके बाद दूसरी नजासत की किस्म है, जोतत आम नजासत है, दरमियानी दर्जे की, जिस तरह के आम नजस चीज है, पेशाब, पखाना वगैरा, मुर्दार इस तरह की चीज। और तीसरी है, नजासत खी खफ, यानी हल्की, हल्की यानी है तो वो भी नजस लेकिन उसकी आम नजासत उसका हुक्म नहीं। जिस तरह के उस बच्चे का पेशाब जो अभी दूध पीता है, नर बच्चा, मेल बच्चा जो भी सिर्फ दूध पीता है, या उसकी अक्सर खोराक दूध की है, तो उसका पेशाब जो है आप पढ़ेंगे हम इंशाअल्लाह, उसका पेशाब भी है तो नापाक, लेकिन उसकी नापाकी सिर्फ पानी के छींटे मार देने से, ऊपर पानी डाल देने से वो कपड़ा पाक हो जाता है, उसको धोने की जरूरत नहीं है। तो यह है नापाकी के हवाले से तीन तरह के इसके, इसके कैटेगरी।

27 नंबर मसला में, असल ये है कि चीजें पाक हैं, दुनियावी चीजें, इस्तेमाल की चीजें, कोई भी है, असल पाक ही है। जिस हमने पहले पढ़ा था, किसी चीज को नापाक करार देने की शरी दलील होना जरूरी है। अगर को कहता है कि यह प्लास्टिक का टुकड़ा नापाक है, प्लास्टिक नापाक होता है? हाँ, वैसे प्लास्टिक नापाक, क्योंकि इस पर नापाकी लगी है, वो अलग बात है। लेकिन को कहे कि प्लास्टिक नापाक होता है, हम कहेंगे दलील दो। भी प्लास्टिक नापाक होता है, समझे ना? या किसी और भी चीज के बारे में कोई दावा कर दे कि फला चीज नापाक होती है, तो हम कहेंगे इसकी नापाक होने की दलील दो। दलील है तो ठीक है, सरा आंखों पर। अगर दलील नहीं तो उसको हम नापाक नहीं कह सकते, हमें अगरचे वो चीज गंदी महसूस हो, अच्छी नहीं लगती, उसकी गंदगी के पहलू हैं, लेकिन उसको आप नापाक नहीं कहोगे जब तक उसकी दलील ना हो। नापाकी ये बहुत अहम फार्मूला है जो मैं चाहता हूं कि इसको मन में रखें। कुरान सुन्नत में जिन चीजों को नापाक करार दिया गया है वह इंसान या हराम जानवरों के फुतला, जात है, पेशाब, पखाना वगैरह, मदी, वदी, हैद, नफास का खून, बहा हुआ खून, खुसूस जानवरों का बहा हुआ खून, सूअर का, खंजीर का गोश्त, कुत्ते का लब, मछरी और टिड्डी के अलावा मुर्दा जानवर। जैसा हमने पढ़ा था कि खुश्की के मुर्दा जानवर, इंसान की मनी पाक है, नापाक है? इसमें इलाफ जरूर है, लेकिन इन नापाक होने की इसकी कोई दलील नहीं है। हत आयशा फरमा है, आपकी मनी कपड़ों पर लगी होती थी, अगर खुश्क होती तो मैं उसको खर्च देती, उसको रगड़ के उतार देती, रगड़ के उतार देती कपड़े के अंदर तो जजब होगी, लेकिन रगड़ के उतार देती। इसका माना अगर वह नापाक होती तो उसको लाजमी धोया जाता, और यह सही मुस्लिम की हदीस है।

28 नंबर मसला में, मदी खारिज होने से सजा और वजू करना चाहिए, का होती है? बाका शहवत में इस तरह के हालत में इंसान से कतरे खारिज होते हैं, एक दो कतरे या चंद कतरे खारिज होते हैं जो आमतौर पर शहवत के इस तरह की चीज के वजह से होते हैं, तो यह कपड़े पर लग जाए तो कपड़े को धोना चाहिए, लेकिन इसकी नजासत जो है वो भी खी है, यानी उस पर सिर्फ पानी अच्छी तरह डाल दे, उसको धोने से मुराद यानी अच्छी तरह धोने की जरूरत नहीं, सिर्फ पाए उसको डाल दे। लेकिन अगर मदी निकलती है तो वजू टूटेगा, आपको वजू करना होगा, वजू करना होगा, और कपड़े पर लगी है तो उसको भी पानी उस पर डालना होगा। सही मुस्लिम की हदीस में है, सदना ला ताला फरमाते हैं कि उनको यह मर्ज था, बा लोगों को बीमारी होती है, मर्ज होता है, उससे निकलती है, आपसे पूछा उन्होंने तो आपने फरमाया कि उसको कहो कि वो इस्तंजा करे और वजू करे। इत करने का माना जहां लगी है वो धो ले, जगह को और वजू करे। तो इस, इसका हुक्म ये है। इसी तरह 29 नंबर मसला में, 29 में अहादीस की रोशनी में हलाल जानवरों का गोबर, पेशाब, लब नापाक नहीं है। अहादीस की रोशनी में क्या मतलब? कि वैसे तो उलमा के मुख्तलिफ अवायल है, उलमा कहते हैं कि जो जानवर हलाल है, बकरी है, गाय है, ऊंट है, जिनके गोश्त खाए जाते हैं, समझे ना? हलाल जानवर, मुर्गा वगैरह है, चिड़िया, चिड़िया है, कबूतर है, और यह सभी चीजें हमें इनसे वास्ता पड़ता रहता है। क्या आपके कपड़े पर कबूतर के कोई चीज लग गई? समझे ना? चिड़िया की लग गई तो अब क्या है? कपड़े को लाज़मी धोना होगा, कपड़ा नापाक हो गया? ये पाक है? तो बामा कहते हैं कि जानवर के गोबर, पेशाब, भी इस चीज भी नापाक है। लेकिन हलाल जानवर, जौर की हराम जानवर। हलाल जानवरों के गोबर, पेशाब नापाक होने की कोई दलील नहीं है। बल्कि दलील जो है अभी आप देखेंगे, के दलीले जो है उनके पाक होने की है। आप उस तरफ क्या देख रहे हैं? ये आपको क्या चीज नज़र आ रही है? लेफ्ट में बाड़ा है। बाड़ा क्या होता है? जहां पर जानवर रखे जाते हैं, बकरियां वगैरह, ऊंट, गाय वगैरह, जहां पर बांधे जाते हैं, रखे जाते हैं, उसको बाड़ा कहते हैं। तो हदीस यहां पर कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने या सल मराम के बकरियों के बारे में नमाज़ पढ़ो। बकरियों के बारे में नमाज़ पढ़ो। अब जहां बकरी होगी, जहां बकरी ठहरेगी, रहेगी, पेशाब, गोबर उसका सारा वहां पर होगा। और हम आगे नमाज़ के मसाइल में पढ़ेंगे इंशाअल्लाह के नमाज़ी के लिए तीन तरह की तहरीर या तीन की तार जरूरी होती है। कौन सी? जिस्म की, जिस्म पाक हो, और कपड़े पाक हो, और जिस जगह से नमाज़ पढ़ता है वो जगह भी पाक हो। समझे? ये सभी हम जानते पहले से के जगह भी पाक होना जरूरी है। अब अगर बकरी का बाड़ा नापाक होता तो आप उसमें क्या नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देते? और यह सही हदीस आपके सामने, आप मम के बकरियों के बाड़े में नमाज़ पढ़ो। इस बात की दलील है कि अगर बकरी का गोबर, पेशाब नापाक होता तो वहां पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त ना दी जाती। इसी तरह एक दूसरी चीज आपने शायद सुना होगा के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बाज़ लोगों को ऊंटों का पेशाब, दूध पीने का हुक्म दिया। कभी सुना कि नहीं सुना? यह सही बुखारी का वाकया है। सही बुखारी, मुस्लिम की हदीस है। कुछ लोग मदीना में आए और मदीना में आए तो बीमार हो गए। बीमार हो गए तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनको सदके, जकात के ऊंट, मदीना से कुछ बाहर दूर फासले पर रखे जाते थे, उनको कहा कि तुम वहां पर चले जाओ और वहां ऊंटों का पेशाब और दूध पियो, इलाज के तौर पर। इलाज के तौर पर ऊंटों का पेशाब, दूध पीने का आपने हुक्म दिया। और वाकई उन्होंने ऊंटों का पेशाब, दूध पिया और वह सही हो गए। यह तो नबी करीम सलाम की तरफ से तालीमात [संगीत] है कि वाकई ऊंट के पेशाब के अंदर कई तरह की बीमारियों का इलाज है। ऊंट के पेशाब के अंदर कई तरह की बीमारियों का इलाज है। खैर वो एक अलग चीज है, लेकिन यहां पर मसला हम यह पढ़ रहे हैं के ऊंट का पेशाब अगर नापाक होता तो क्या आप उसको पीने की इजाज़त देते? कोई भी हराम चीज उसको आप शिफा के तौर पर, इलाज के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकते, समझे ना? कोई भी हराम चीज उसको इलाज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, और खुद आप सबसे मना किया इस चीज से। तो इसलिए अगर यह नापाक होता, ऊंटों का पेशाब, तो नामुमकिन है उनको ये पीने की इजाज़त देते, या पीने का हुक्म दे। बल्कि आपने उनको हुक्म दिया कि तुम पियो ताकि तुमको तुम्हारी बीमारी खत्म हो। अल्लाह कुल्ली हाल, इस मसले में जिस तरह हमने जिक्र किया है कि उलमा के इख्तिलाफ जरूर है, लेकिन अहादीस की रोशनी में ऐसे जानवर जो के खाए जाते हैं, हलाल जानवर हैं, उनके गोबर, पेशाब, उनके लब, ऐसी चीजें नापाक नहीं है, समझे ना? अच्छा हराम जानवर जो है, उसके बाद नंबर मसला, हराम जानवर कि जो खाए नहीं जाते, जिसमें शेर, चीता, कुत्ता, बिल्ली है। बिल्ली के बारे में हम पढ़ेंगे खास तौर पर से हुक्म है, लेकिन कुत्ता वगैरह, चीता, शेर वगैरह, गधा है, उसमें हराम जानवर है। तो जो हराम जानवर है, उनके गोबर, पेशाब क्या है? नापाक है। दलील क्या है? के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक सहाबी को ईंट ढेले लाने के लिए कहा, मिट्टी का ढेला जिससे पेशाब, पखाना करने के बाद सफाई की जाती थी, उसको दो ढेले मिल गए, दो पत्थर मिल गए, तीसरा मिला लाक, तीन तीन पत्थर चाहिए, हम आगे पढ़ेंगे में तो तीसरा उसको ना मिला, तो उसने क्या किया? उसको गधे का गोबर मिल गया, वो ले आया। गधे का तो आपने उसको फेंका और फरमाया कि नास ये नापाक है, यह नापाक है। इससे मालूम हो गया कि नापाक जो है वो हराम जानवर है, जो खाए नहीं जाते, उनके गोबर, पेशाब को भी सभी नापाक है। और नापाक होने की दलील क्या है? यह आपके सामने हमने पहले जिक्र किया है कि हम किसी चीज को नापाक नहीं कह सकते जब तक उसकी दलील ना हो। तो हराम जानवर के नापाक, उनके गोबर, पेशाब नापाक होने की दलील क्या है? वो यह है के आपने इस गोबर को इस्तेमाल ना किया और फरमाया कि यह नापाक है। अच्छा, हराम जानवरों के गधा भी है, और खचर जानते हैं ना? खचर क्या होता है? घोड़े और गधे से मिलाप से जो पैदा होता है, खचर होता है, और यह हलाल है? क्या हराम है? हाँ हाँ जी, साथ खामोश है। जो हलाल और हराम से पैदा हो, रही बात उसमें हराम चीज मिक्स है तो हराम है, समझे ना? उसके हराम होने में कोई शक नहीं। तो गधा तो हराम है ही, लेकिन खच्चर भी चूंकि गधे के मिलाप से पैदा होता है इसलिए वो भी हराम है। तो गधा और खच्चर और घोड़े पर भी सवारी की जाती है। तो गधा और खच्चर खास तौर पर तो इस पर सवारी की जाती है। अब सवारी जब की जाती है, आप देख भी रहे होंगे, गधे पर आदमी बैठा हुआ। तो सवारी करने वाला जब उस पर बैठेगा और ख़ास गर्मी का मौसम होगा और गधा भागेगा तो पसीना पसीना तो आएगा और पसीना कपड़ों को लगेगा, फिर कपड़े नापाक होंगे। देखिए यहां पर हम देखेंगे कि अल्लाह के नबी खुद भी गधे पर बैठते थे, सहाबा किराम के दौर में आम गधा इस्तेमाल होता था सवारी के लिए, लेकिन कभी किसी हदीस में आपने कपड़ों को धोने का हुक्म नहीं दिया। किस बात की दलील है? कि गधा अगर हराम है, अगरचे उसके गोबर, पेशाब नापाक है, समझे ना? लेकिन उसका पसीना और बल्कि हता कि उसको लब वो भी गिर जाए कपड़ों पर तो यह नापाक नहीं है। दलील क्या है? आप सहाबा किराम इस पर सवारी करते थे और किसी को कपड़े धोने का हुक्म नहीं दिया जाता था। लाक पसीना तो आता था, तबी तौर पर, यकीनी तौर पर।

उसके बाद 31 नंबर मसला में, कपड़े पर हैज का खून लग जाए, कपड़े पर खून लग जाए तो उसे अच्छी तरह साफ करना चाहिए। हैज का खून नापाक है और जिसको खूब अच्छी तरह धोने का हुक्म दिया गया है। हम यहां पर देखेंगे कि चीजों को धोने के हवाले से अलग-अलग हुक्म है। बच्चे के पेशाब के हवाले से हमने बताया क्या है? सिर्फ पानी डाल दो। अभी हैज के खून की बात आई है तो क्या है? आप माते हैं तीन चीजों का आपने हुक्म दिया कि पहले कपड़े को रगड़ा जाए पानी के साथ, पानी डालकर, फिर मजीद उस पर पानी बहाया जाए, उसको धोया जाए, फिर उस पर मजीद पानी बहाया जाए। हता कि अच्छी तरह वो खून निकल जाए, क्योंकि वह नापाक है। तो इसलिए जो चीज वाकई नापाक है उसको शक्ति से दूर करने का हुक्म दिया गया, कपड़े को अच्छी तरह धोने का हुक्म दिया गया। तो तो हैज का खून कपड़े पर लग जाए तो कपड़े को धोने का हुक्म है, लेकिन पूरे कपड़े को? ये सिर्फ जहां लगा है। हाँ, सिर्फ जहां पर खून लगा है, क्योंकि सिर्फ खून नापाक है, बाकी कपड़े के साथ उसका कोई ताल्लुक नहीं। फर्ज़ करो के कपड़े के एक हिस्से पर खून लगा है, एक दो तीन इंच का हिस्सा है, उस पर खून लगा है, बाकी कपड़े के साथ उसका कोई तो सिर्फ इतना कपड़ा धोना ही काफी है। और धोने के बाद अगर खून खत्म हो गया, लेकिन खून का बाज़ औकात आप देखते हो कि कलर मामूली सा रह जाता है, उस कलर के रहने का कोई असर, उसका कोई असर नहीं है, उसका कोई नुकसान नहीं। समझे ना? कि खून निकल गया, खून खत्म हो गया, अच्छी तरह धो लिया, उसको रगड़कर, मलकर और पानी बहाकर उसको अच्छी तरह धो लिया। अगरचे उसके बाद हैज के खून का रंग बाकी भी रह गया हो, कलर बाकी भी रह गया हो तो उसका कोई नुकसान नहीं, उसमें नमाज़ पढ़ी जा सकती है।

32 नंबर मसला में, ग़लाज़ और नजासत दूर करने के लिए बायां हाथ इस्तेमाल करना चाहिए। कोई भी नापाक चीजें हैं, उनको दूर करना हो, उसके लिए सुन्नत है कि बायां हाथ। दायां, बायां जानते हैं ना सभी? आपका दायां कौन सा? बायां कौन सा? ये बायां। माशाल्लाह, क्योंकि हमारे अक्सर इंग्लिश चलती है, राइट, लेफ्ट तो सी है। तो बायां हाथ यानी लेफ्ट हैंड। तो ये है आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत कि आप हमेशा दायां हाथ अच्छी चीजों के लिए इस्तेमाल करते, खाने, पीने के लिए, वजू के लिए, तो और बायां हाथ आप इस्तेमाल करते थे किसके लिए? नजासत, इस तरह की नापाक चीजों को दूर करने के लिए। जिस तरह के हत आयशा की हदीस आपके सामने दी गई है।

33 नंबर मसला में, तत हासिल करने और नजासत दूर करने के लिए असल यह है कि पानी का इस्तेमाल किया जाए। पानी का हमने इसलिए पहले पढ़ा है क्योंकि वजू के मसाइल में असल पानी है। असल पानी ही से नजासत दूर होती है, कपड़ा धोया जाता है, जिस्म धोया जाता है, वजू किया जाता है, गुसल किया जाता है, समझे ना? असल इन सभी चीजों में क्या है? पानी है। हता कि नजासत दूर करने के लिए भी, कपड़ा, कपड़ा नापाक हो गया तो कपड़े को पानी से धोना चाहिए। तो असल यह पानी है, दूर करने के लिए। क्या दलील? क्या है? अल्लाह ने जब वजू का जिक्र किया ना तो फरमाया कि अगर तुमको पानी ना मिले तो तुम क्या करो? तुम करो। असल क्या है? पानी है। असल से मुराद यानी जो मेन चीज है, पानी है। अच्छा, लेकिन अगर पानी ना मिले तो तुम कर सकते हो। और वैसे भी बा दूसरी चीजें हैं कि जो पानी की जगह पर भी कायम मुकाम होती है। कैसी है? मसलन के जमीन पर चलने से आपके जूते के नीचे जो नजासत लगती है वह जमीन पर चलने से ही साफ पाक हो जाती है। आप सहाबा ने पूछा क्या हम बा कात मस्जिद को आते हुए किसी नापाक जगह से गुजरते हैं या गंदगी होती, नीचे नजासत होती है तो क्या हम अपने जूतों को आकर धोएं? आप जो तुम नापाक जगह पर चलने के बाद पाक जगह पर चलते हो ना, कहते चलते हैं, तो मैं के जब तुम पाक जगह पर चलते हो, जूता रगड़ता है तो पाक हो जाता है। तो इससे मालूम क्या हुआ? कि जूते को जो नापाकी लगती है वो सिर्फ मिट्टी से रगड़ने से ही पाक हो जाती है। जूते को धोने की जरूरत नहीं, अगर धोना पड़े तो फिर जूते हमें हर रोज़ ना बदलना पड़े, समझे ना? इसलिए जूता जो है वो मट्टी पर रगड़ने से ही पाक हो जाता है। इसी तरह जमीन, मट्टी, जमीन पर नजासत पड़ी, किसी ने पेशाब कर दिया जमीन पर, आम जमीन है, खुली जमीन और पेशाब कर दिया। उसके बाद वो जगह ऐसी खुली पड़ी रही, धूप के साथ, पेशाब खुश्क हो गया, हवाओं के साथ खुश्क हो गया तो वो मट्टी जगह पाक होगी, नापाक ही रहेगी? हाँ, ये भी है अल्लाह ताला की नेमत है, वरना अगर जहां पर भी कोई नापाकी पड़ती वो जमीन नापाक हो जाती तो शायद आपको आज को पाक जमीन ना मिलती, समझे? क्योंकि हर जमीन पर किसी ना किसी ख़ते पर कोई ऐसी चीजें तो होती रहती है ना, हमेशा से। तो अल्लाह ताला की नेमत है कि जमीन पर अगर कोई नापाक चीज पड़ती है और पड़ी रही, पड़ने का माना कि वहां पर धूप से, हवाओं से वो ऐसा ऐसा खुश्क हो के खत्म हो जाती है तो वो जगह पाक हो जाती है। लेकिन अगर फौरी तौर पर पाक करना हो तो फिर क्या है? आगे मसला आ रहा है के हाँ कि एक ही बार उस पर पानी डाल दे तो पाक हो जाती है। यानी फर्ज़ करो मस्जिद है। अब मस्जिद में जाहिरी बात है इस तरह की चीज होना सही नहीं है। तो मस्जिद में किसी ने पेशाब कर दिया। मस्जिद से मुराद यानी जहां मिट्टी है, वैसे कार्पेट वगैरह तो ना होगा, समझे? एक मिट्टी है तो वहां पर किसी ने पेशाब कर दिया तो आपने एक बद्दू, देहाती आया मस्जिद में, उसको पेशाब की जरूरत पड़ी, उठा और मस्जिद में एक तरफ बैठ के पेशाब करना शुरू कर दिया उसने। साबा उसको डांटना चाहा, उसको उठाना चाहा, नहीं, इसको करने दो। तो उठाते तो क्या करता है? उसको भी तकलीफ़ होती, पेशाब उसका और फैलता, अपना। इसको करने दो। जब उसने कर लिया, आपने सहाबा को कहा कि इसके पेशाब के ऊपर पानी का डोल, पानी की बाल्टी डाल दो, बस यही काफी है। तो जमीन जो है इससे मालूम हुआ क्या? कि जमीन अगर मिट्टी है तो उस पर सिर्फ पानी डालने से ही वह पाक हो जाती है, उसको उसकी पाकी के लिए ही काफी है। लेकिन अगर वो खुली पड़ी रहे, जि हमने बताया है कि नापाकी खुश्क हो गई तो उसके खुश्क होने से वो जगह पाक हो जाती है ना, जमीन पाक हो जाती है।

34 नंबर मसला में, बिल्ली का जूठा नापाक नहीं है। हमने पहले पढ़ा था के जानवरों के जूठे जो है, हलाल, हराम जानवर। तो बिल्ली का जूठा नापाक नहीं। बिल्ली किसी पानी में, बर्तन में मुंह डाल देती है, कुछ खा पी भी लेती है तो बचा हुआ जो है वह पाक भी है और हलाल भी है, समझे ना? उसको खा भी सकते हैं, उसे दू और गुसल वजू में उसको इस्तेमाल किया जा सकता है। दा की हदीस है। हमने की कि वजू कर रहे थे तो वजू के बिल्ली आई और उन्होंने अपना बर्तन, पानी का बर्तन बिल्ली के सामने कर दिया, तो बिल्ली ने उसे पिया और फिर उन्होंने अपना वजू मुकम्मल करना शुरू कर दिया। उनकी बहन जो उनको वजू करवा रही थी बड़ी हैरान हुई कि आप क्या कर रहे हैं? तो उन्होंने फरमाया अल्लाह फते हैं। इस बिल्ली नापाक नहीं है, है वो हराम ही को खाना शुरू कर दे, है वो हराम ही, लेकिन नापाक नहीं है। किस लिए नापाक नहीं है? क्योंकि तुम्हारे घरों में उसका आना जाना रहता है। अच्छा, आना जाना, आना जाना। कुत्ते का भी रहता है, बाज़ लोग कुत्ते पालते हैं और घर का एक ंबर होता है, बदा समझे ना? उसके लिए बेड होता है, ठीक है? उसके लिए सारा कुछ होता है। तो कुत्ता जो है यह भी घर में रहता है। कुत्ते का हुक्म ये नहीं है, यह हुक्म सिर्फ बिल्ली के लिए है। कुत्ते के बारे में आप 35 में पढ़ रहे हैं। कुत्ता बर्तन में मुंह डाल दे तो बर्तन को को धोया जाएगा, सात मर्तबा। सात मर्तबा धोया जाएगा, पहली बार मिट्टी के साथ, पहली मिट्टी के साथ। और ये आज की लैबोरेटरी सर्च बताती है कि कुत्ते के लार में, कुत्ते के लार में, उसके थूक में ऐसे बैक्टीरिया हैं कि जो सिर्फ मिट्टी से ही खत्म होते हैं। आप उसको वैसे धोते रहो पानी से, जने वो खत्म ही नहीं होगा। और यहीं से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नबूवत की सदाकत का पता चलता है। आपने कोई लैबोरेटरी सर्च की थी कि कुत्ते के लार के अंदर ये है। आपको कहां से पता चला? अल्लाह ताला की तरफ से, अल्लाह की तरफ से, वहीं से कि कुत्ते के लार में वो बैक्टीरिया है कि जो मिट्टी से खत्म होता है, इसलिए पहली दफ़ा मिट्टी से धोने का हुक्म दिया, उसके बाद फिर छह दफ़ा और पानी के साथ। इससे पता चलता है कि कुत्ते की नजासत किस क़दर ग़लीज़ है। और ये हदीस आप पढ़ रहे हैं कि कुत्ता अगर मुंह पानी में मुंह डाल दे तो क्या करना है? और उसके अलावा कुत्ते के अलावा बाकी जितनी भी नापाक चीजें हैं उनको अगर एक दो, एक दफ़ा धोने से नापाकी खत्म हो जाती, दूर हो जाती है तो काफी है। जिस हमने अभी जिक्र किया था, को देहाती ने, बद्दू ने पेशाब किया मस्जिद में तो आपने ऊपर पानी डालने का हुक्म दे दिया। तो बाकी कुत्ते, कुत्ते के अलावा बाकी जितनी भी नापाक चीजें हैं, नजासत की चीज है वो अगर एक दफ़ा धोने से नजासत निकल गई तो काफी है। अगर एक दफ़ा नहीं निकली, दोबारा दूसरी दफ़ा धो लो, दूसरी दफ़ा आप देख देखे कि अभी नजासत बाकी, तीसरी दफ़ा धो लो। तो सिर्फ़ नजासत ख़त्म करने तक है। अगर एक दफ़ा से ख़त्म हो वही काफी है। कुत्ते, कुत्ते के हवाले से सात दफ़ा उसको धोने का हुक्म है। आखिरी एक दो मसले बाकी हैं। शर ख़ार बच्चा, शर ख़ार बच्चा के माने दूध पीने वाला बच्चा। दूध पीने वाला बच्चा जो है जिसकी ग़ालिब खोराक दूध होती है। वैसे तो बाक़ी शीर इस की चीज़ें बच्चों को दी जाती हैं, लेकिन वो आम एक्स्ट्रा चीज होती है, उसकी असल खोराक दूध है। तो जिस बच्चे की असल खोराक दूध हो,

वो मेल बच्चा नर बच्चा अगर वो पेशाब करे तो उसके पेशाब को आम नजासत की तरह धोने की जरूरत नहीं। सिर्फ उस पर पानी डाल देना काफी है। पानी छींटे मार देना जिससे पानी वो जगह तर हो जाए उतना ही काफी है। उसको धोना वगैरह, निचोड़ना वगैरह इन चीजों की जरूरत नहीं है। और उसकी दलील आपके हदीस है कि आप फरमाते हैं कि जो अपने दूध पीने वाला बच्चा है उसको पेशाब को जो है वो छींटा बांटे हैं। अगर बच्ची है, फीमेल, उसके पेशाब को धोने का हुक्म है। अब आप कहें कि दोनों में फर्क क्यों किया? हाँ, फर्क उसने किया है कि जिसने इस बच्चे और बच्ची को पैदा किया है, किसने? अल्लाह ताला ने। और हम मुसलमान होने के नाते असल यह है कि अल्लाह ताला उसके रसूल के अकाम के पाबंद है कि जिस चीज का हुक्म दिया गया उसको करना है और जिस चीज का हुक्म नहीं दिया गया उसको हम नहीं करेंगे। तो बच्ची अगर फीमेल है तो उसके पेशाब को आम पेशाब की तरह धोया जाता है। लेकिन बच्चा मेल है तो उसको जिस तरह बताया है कि उसको सिर्फ उस पर पानी डाल देना काफी है।

आखिरी मसला, नापाकी थोड़ी हो या ज्यादा हो। अगर आपको पता चल रहा है कि नापाकी पड़ी है, नापाकी नजर आ रही है, थोड़ी हो या ज्यादा हो उसमें कोई फर्क नहीं, उसको धोया जाएगा। बाज़ उलमा ने फर्क किया है कि अगर नापाकी एक दिरहम के बराबर हो, इतनी हो तो वह छोड़ दी जाएगी। उसको हदीस की रूह से, रूह से ऐसी कोई हमारे पास चीज नहीं है। समझे ना? हदीस की रूह में नापाकी थोड़ी हो या ज्यादा हो उसको धोने का हुक्म है। इल्ला ये कि अगर वो नजर ना आती हो, यानी मामूली किस्म की वो फर्र सी पड़ी, हल्की सी पता नहीं कहाँ पड़ी है, उसमें आपको शक है तो सिर्फ छींटा मार दो, काफी है। ऐसी चीज को धोने की जरूरत नहीं। लेकिन पाकी नजर आ रही है, नापाक चीज तो असल ये है कि उसको धोया जाए, वो चाहे थोड़ी हो या ज्यादा हो। क्योंकि हदीस की रूह से थोड़ी-ज्यादा नापाकी में फर्क नहीं किया गया। समझे ना? अगर कोई कहे, बाज़ उलमा ने तो कहा ऐसा, हम कहेंगे उनके पास कोई दलील है तो हमें दें। लेकिन क्योंकि हदीस की रूह से थोड़ी पाकी या नापाकी ज्यादा में उसमें फर्क नहीं किया गया, इसलिए असल ये है जो भी चीज नापाक है उसको धोया जाए, थोड़ी हो या ज्यादा हो।

बारक फला खैर। यह आखिर में उठने से पहले टाइम तो खत्म हो चुका है। ये फिर से आपको याद दिलाते हैं, आपको पिछले हफ्ते प्रोग्राम दिया था एक।