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चले बिस्मिल्लाह। अल्हम्दुलिल्लाह। ला सलाम अला रसूलल्लाह। अमा बाद। आज हम तफसीर का समझ ले एक और पास पार्ट ले रहे हैं। सूरतुल इखलास तिलावत उसकी भी नहीं करेंगे ताकि टाइम थोड़ा हम बचा ले। सीधा उसका तर्जुमा करते हैं और उसकी जो है फ तफसीर की तरफ से आते हैं। कोशिश करें कि आप लोग किताब से भी उसको पढ़ ले। आ गए डॉक्टर नवीन। चले बस फर इंशाल्लाह देखते पा 10 मिनट और शुरू करते हैं। सबसे पहले इसका तर्जुमा तफसीर आपके सामने रख लेते हैं। कुल हु अल्लाह अहद। कह दीजिए कि वह अल्लाह एक है। अल्लाह समद। अल्लाह ताला बे नियाज है। लम यद वलम यूद। ना उसने किसी को जना है ना वह खुद किसी से जना गया है। वलम यकल कु अद। और कोई उसका हमसर नहीं है। सरल इखलास की बस आपको फजीलत बताते हैं और इंशाल्लाह बाकी जो कोशिश करेंगे अगली क्लास में इसको कंटिन्यू कर ले।
सूरत इखलास जो है इसकी आपको सही अदीस से फजीलत मिलेंगी। कुराने मजीद में आप बा सरते देखेंगे कि जिनकी फजीलत जो है वह सदीस से भी मिलती है। लेकिन बाज ऐसी सूरत जिनकी फज लोगों ने खुद से गड़ द है क हकीकत नहीं है। लेकिन लोगों ने खुद से बना दी है। लेकिन सरत खलास ऐसी सूरत है कि इसकी बहुत ज्यादा फजीलत है। यह सेकंड स्लाइड में करता हूं। इसमें आप देखें तीन फजीलत आपके सामने। सबसे पहली एक हदीस में आता है कि सरल इखलास जो है कुरान कि यह अकेली सूरत कुराने मजीद के एक तिहाई हिस्से के बराबर है। एक ई हिस्सा कितना बनता है? 33 पर थ 10 पारे इस तरह यानी आप सरल इखलास पढ़ते हैं तो आपको कुरान का न थर्ड पने पढ़ने का जो अजर मिलता है ना व सूरत इखलास को एक बार पढ़ने से अजर मिलता है। इतनी जो है सूरत की अजमत है। और क्यों है? क्योंकि इस सूरत में सिर्फ एक ही टॉपिक है और व क्या है? अल्लाह ताला। इसमें सिर्फ अल्लाह की तौहीद का जिक्र है और कोई रूलिंग नहीं है। कोई आप नमाज का तरीका नहीं देखें। सिर्फ अल्लाह की तौहीद है।
दूसरी फजीलत यह है के सूरतुल इखलास के बारे में आता है। एक सहाबी थे वो जब भी जमात कराते तो सूर फातिहा के साथ जब सूरत पढ़ते तो एंड में सूर इखलास पढ़ के खत्म करते। तो बाज सहाबा ने यह बात नबी सला वसल्लम को बताई। तो आप सलम ने कहा जरा उससे पूछ लो कि वो करता क्यों है। वो सहाबी क्यों ऐसा करते हैं कि हर रकात में फातिहा पढ़ के एक और सर पढ़ के सर इखलास से खत्म कर। तो एक रिवायत में आता उन सहाबी ने कहा कि इस सूरत में रहमान की सिफात है इसलिए मुझे सूरत बड़ी पसंद है। तो अल्लाह के रसूल सलाहु सल्लम ने जवाब में यह बात कही अरला ताला उसको बता दो कि अब अल्लाह भी उससे मोहब्बत करता है। और बाज रिवायत में आता है कि जब वो सहाबी ने कहा ना कि मुझे सूरत से बड़ी मोहब्बत है इसलिए मैं हर रकात में पढ़ता हूं। तो अल्लाह के रसूल सलम ने यह जवाब दिया कि उसको बताओ तुम्हारी जो मोहब्बत है ना सूरत से सूर खलास से इसी ने तुम्ह जन्नत में दाखिल कर दिया। तो इसीलिए इसकी तफसीर को आज हम य रोकेंगे। लेकिन हम यह चाहेंगे कि आज से हर शख्स को हर साथी को इस सरत से मोहब्बत होनी चाहिए। सूर इखलास के साथ जो है खास मोहब्बत जोड़ ले क्योंकि अगर वो सहाबी के लिए खुशखबरी है तो यह सिफत अगर वो सहाबी की किसी और के अंदर भी आती है उसके लिए भी खुशखबरी है। अल्ला भी से मोहब्बत करेगा और यह जन्नत में दाखिल कर देगी बंदे को। तो चलिए इसी पर इफा करते हैं और कोशिश थी आज की सूर इखलास मुकम्मल करले लेकिन चल इंशाल्लाह अगली क्लास में हम कोशिश करेंगे इसी तरह उसको मुकम्मल कर ले। बारक अल्ला फीकुम। जकम अल्ला खैर। अभी आखरी क्लास की तरफ आते हैं अकीदा की क्लास के हवाले से।